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‘सात्विक बलि’ के लिए प्रसिद्ध है भारत का यह मंदिर, जानिए क्या है इसकी खास परंपरा

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भारत में आस्था और परंपराओं से जुड़े अनेक मंदिर हैं, लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है जहां बकरे की ‘सात्विक बलि’ देने की अनोखी परंपरा निभाई जाती है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में बकरे का वध नहीं किया जाता और न ही खून की एक भी बूंद बहती है। यही वजह है कि यह परंपरा देशभर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में बलि का स्वरूप पूरी तरह प्रतीकात्मक होता है। धार्मिक अनुष्ठान के तहत बकरे को देवी-देवता के समक्ष समर्पित किया जाता है, लेकिन उसकी हत्या नहीं की जाती। पूजा संपन्न होने के बाद उसे जीवित ही छोड़ दिया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परंपरा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और पशु हिंसा से भी बचा जा सकता है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अनोखी परंपरा को देखने और पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं और अहिंसा के संदेश का अनूठा संगम मानी जाने वाली यह परंपरा भारत की सांस्कृतिक विविधता और लोक आस्थाओं का एक अलग उदाहरण प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने यात्रा का शुभारंभ कर यात्रियों को दीं शुभकामनाएं

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मुख्यमंत्री ने यात्रा का शुभारंभ कर यात्रियों को दीं शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन केवल एक नगर नहीं, भूत भगवान महाकाल की पावन नगरी है। यहां के 84 महादेव श्रद्धा, साधना और सनातन परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं। दर्शन यात्रा हमारी सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा आस्था के साथ-साथ आत्मिक जागरण का भी पुण्य अवसर भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को उज्जैन में आयोजित 84 महादेव दर्शन यात्रा-2026 का शुभारंभ कर वीडियो कान्फ्रेसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने दर्शन करने जा रहे सभी यात्रियों को अपनी आत्मीय शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु सुखिनः का संदेश देती है। भगवान शिव समरसता, करुणा और लोककल्याण के प्रतीक हैं। भारत की आध्यात्मिक शक्ति आज पूरे विश्व को आकर्षित कर रही है। यह यात्रा हमारी पवित्र आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाने का अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 84 महादेवों की परिक्रमा शिवभक्ति की प्राचीन और पवित्र परंपरा है। यह यात्रा श्रद्धा, संयम और आध्यात्मिक अनुशासन का संदेश देती है। प्रत्येक मंदिर उज्जैन के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति का साक्षी है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त प्रयास है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे आयोजन कम ही होते हैं। 84 महादेव दर्शन यात्रा में शामिल सभी मातृशक्तियों को आयोजक संस्था द्वारा लाल चुनरी, साडी, रूद्राक्ष की माला, बिल्वपत्र का पौधा निःशुल्क भेंट किए जा रहे हैं। यात्रा के साथ में प्रसिद्ध भजन गायक मनीष तिवारी की भजन मंडली भी चल रही है। उन्होंने कहा कि सावन मास के पावन अवसर पर भगवान शिव के प्रति सबकी श्रद्धा प्रशंसनीय है। इस यात्रा से हमारी संस्कृति के प्रचार-प्रसार को बढावा मिलेगा, धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा और हमारी सामाजिक समरसता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राएं केवल आस्था नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की भी शक्ति हैं। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को लाभ मिलेगा। प्रदेश सरकार तीर्थ स्थलों पर बेहतर सुविधाएं विकसित कर रही है। हमारा लक्ष्य उज्जैन को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को सहज और सुरक्षित दर्शन का अनुभव मिले, यही हमारी प्राथमिकता है। प्रशासन और समाज मिलकर इस आयोजन को सफल बनाएंगे जनभागीदारी से ही ऐसे आयोजन भव्य और दिव्य बनते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृति से जुड़ा समाज ही सशक्त और आत्मविश्वास राष्ट्र बनाता है। इसलिए हमारे युवाओं को भी अपनी संस्कृति, तीर्थ और परंपराओं से जुड़ना चाहिए। क्योंकि हमारी पहचान हमारी सभ्यता और संस्कारों से बनती है। यह यात्रा युवाओं में सेवा, अनुशासन औ राष्ट्रभाव की प्रेरणा जगाएगी।

वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

उन्होंने कहा कि नए कानूनों से न्याय प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सरल, पारदर्शी और कम खर्चीली हुई है। कागजी औपचारिकताओं में कमी आई है तथा सीमित संसाधनों में अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने में भी ये कानून अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इसी दिशा में राज्य सरकार ने नौ नए साइबर थाने प्रारंभ किए हैं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इंदौर में नगरीय निकाय उपचुनाव की तैयारी तेज, वार्ड 58 और 60 में होगा मतदान

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इंदौर। इंदौर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 58 और 60 में होने वाले उपचुनाव को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। नगरीय निकाय की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर गई है।

जिला निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची तैयार होने के साथ ही अब राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की तिथियों की घोषणा की जाएगी। दोनों वार्डों में मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए प्रशासन आवश्यक व्यवस्थाओं में जुट गया है।

उपचुनाव को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। संभावित उम्मीदवारों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय मुद्दों के साथ विकास कार्य चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।

प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान से पहले मतदाता सूची में अपना नाम और मतदान केंद्र की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि मतदान के दिन किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

जंतर-मंतर प्रकरण: छात्रा को माफी देने के बाद कानूनी पहलुओं पर उठे सवाल

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नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुई घटना से जुड़े मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रा को माफ किए जाने के बाद प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। छात्रा के अधिवक्ता अनिल सिंह ने एफआईआर में दर्ज तथ्यों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उसमें छात्रा की उम्र और पेशे से संबंधित जानकारी सही नहीं है।

वकील के अनुसार, छात्रा की उम्र 15 वर्ष है और वह राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा प्रणाली (ओपन स्कूल) से कक्षा 10वीं की पढ़ाई कर रही है। उन्होंने कहा कि एफआईआर में छात्रा को सैलून में कार्यरत बताया गया है, जबकि यह तथ्य गलत है। उनका आरोप है कि पुलिस ने पर्याप्त जांच के बिना मामला दर्ज किया।

अधिवक्ता ने बताया कि अब तक परिवार को पुलिस की ओर से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है और न ही किसी अधिकारी ने संपर्क किया है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, शुक्रवार को छात्रा का जन्मदिन था और उसी दिन प्रधानमंत्री की ओर से मिला माफी का संदेश उसके लिए विशेष महत्व रखता है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर जारी वीडियो संदेश में कहा था कि जंतर-मंतर की घटना के दौरान कुछ बच्चों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा अनुचित और अस्वीकार्य थी। उन्होंने कहा कि उनके तथा उनकी दिवंगत माता के संबंध में की गई टिप्पणियां दुखद थीं, लेकिन वह इस पूरे प्रकरण को कटुता की भावना से नहीं देखना चाहते।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बचपन में गलतियां हो सकती हैं और बच्चों को उन्हें सुधारने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दंड से अधिक आवश्यक है कि बच्चों को सही मार्गदर्शन दिया जाए, ताकि वे भविष्य में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने युवाओं से अपनी गलतियों से सीख लेकर देश के विकास में रचनात्मक भूमिका निभाने की भी अपील की।

इससे पहले संबंधित छात्रा ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।

मुख्यमंत्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

भारतीय जूडोका अस्मिता डे का राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण, हर्ष ने भी हासिल किया सोना

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cwg-भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने जूडो में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है। पहले अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग में सोना अपने नाम किया और अब हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता। हर्ष ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 से हराकर भारत को स्वर्ण दिलाया। हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे और पहले पुरुष जूडोका हैं। अस्मिता और हर्ष से पहले अब तक किसी भारतीय जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता है।

अस्मिता CWG में स्वर्ण जीतने वाली पहली जूडोका
भारतीय जूडिका अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन किया और सोने का तमगा हासिल करने में सफल रहीं। त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता का यह स्वर्ण ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले भारत की ओर से किसी भी जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। अस्मिता का सामना फाइनल में कनाडा की हेडी काच से हुआ। अस्मिता फाइनल मुकाबले में 0-1 से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। चार मिनट का निर्धारित समय पूरा होने के बाद मुकाबला सडन डैथ तक खींचा, जहां इस भारतीय जूडोका ने 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर सोना अपने नाम किया। मालूम हो कि सडन डैथ में पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है।

जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में पहली बार 1990 में ऑकलैंड में हुए खेलों के दौरान हिस्सा लिया था। इस ऐतिहासिक पहले संस्करण में ही भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक भी जीते थे। नरेंद्र सिंह (60 किग्रा भार वर्ग) और राजिंदर कुमार ढांगर (86 किग्रा भार वर्ग) ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। हालांकि, इसके बाद भारत राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य और रजत पदक जीतता रहा, लेकिन कभी भी कोई भारतीय जूडोका स्वर्ण पदक अपने नाम नहीं कर सका था। आज यह तिलिस्म भी टूटा। पहले अस्मिता और अब हर्ष ने एक ही दिन में जूडो में दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले।

अस्मिता ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में किया था दमदार प्रदर्शन
फाइनल से पहले अस्मिता ने सेमीफाइनल में दमदार प्रदर्शन किया था। युवा खिलाड़ी अस्मिता डे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘युको’ के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी। इससे पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। जूडो में ‘इप्पोन’ को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। ‘युको’ अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।

सावन के महीने में OTT-थिएटर्स में लगेगा मनोरंजन का मेला

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शुक्रवार मतलब वीकेंड वाली फीलिंग और काम करने का मन करना। सिने लवर्स तो आज ही से प्लान बनाने में लग जाते हैं कि छुट्टी वाले दिन उन्हें क्या देखना है। अगर आप भी वीकेंड पर कहीं न जाने का प्लान कर रहे तो हम आपके लिए सिनेमाघरों से लेकर ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्में और सीरीज लेकर आए हैं जिन्हें आप घर बैठकर मजे से बिंज वॉच कर सकते हैं।

दिल को छू लेने वाले ड्रामा और साइकोलॉजिकल थ्रिलर से लेकर एनिमेटेड सुपरहीरो एडवेंचर और सच्ची घटनाओं पर आधारित क्राइम डॉक्यूमेंट्री तक। इस बार सिनेमा के पिटारे में क्या-क्या है चलिए जानते हैं।

है जवानी तो इश्क होना है (Hai Jawani to Ishq Hona Hai)
कहानी- वरुण धवन, मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े और मनीष पॉल स्टारर यह रोमांटिक कॉमेडी ‘जस’ की कहानी है। उसकी शादी टूट जाती है, लेकिन विदेश में शुरू हुई एक नई लव स्टोरी उसे प्यार, वफादारी और कमिटमेंट के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर कर देती है। आप इसे 31 जुलाई, 2026 से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।

द डेविल वेयर्स प्राडा 2 (The Devil Wears Prada 2)
पहली फिल्म के लगभग दो दशक बाद, ‘द डेविल वेयर्स प्राडा 2’ दर्शकों को मिरांडा प्रीस्टली से फिर से मिलाती है, जो तेजी से बदलती फैशन इंडस्ट्री में अपना रास्ता बना रही हैं। यह सीक्वल बदलती फैशन इंडस्ट्री, कॉर्पोरेट कॉम्पटीशन और बदलते रिश्तों की कहानी है। साथ ही इसमें वही तीखा मजाक, ग्लैमर और वर्कप्लेस ड्रामा भी है जिसने पहली फिल्म को दुनिया भर में इतना लोकप्रिय बनाया था।

रोमांस: माय लाइफ विद द वॉल्टर बॉयज
आने वाले तीसरे सीजन में, जैकी सिल्वर फॉल्स लौटती है। वह अपने रिश्तों को फिर से बनाने और एलेक्स और कोल के लिए अपनी उलझी हुई भावनाओं के बीच साफ सोच पाने के लिए पक्का इरादा कर चुकी है। जब वॉल्टर परिवार नई चुनौतियों का सामना करता है, तो जैकी प्यार, अपनी तरक्की और मुश्किल फैसलों के बीच अपना रास्ता बनाती है और यह भी पता लगाती है कि असल में उसकी जगह कहां है। आप इसे 6 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं।

बालन: द ब्वॉय
बालन अपनी मां के साथ एक महिला जेल में बड़ा होता है। उसका बचपन अपनी पहचान बदलते हुए और छिपते-छिपाते बीतता है। जब वह अपने अतीत का सच जानने की कोशिश करता है, तो वह दबे हुए राज, खतरनाक खुलासों और भावनात्मक खोजों के ऐसे जाल में फंस जाता है जो उसकी जिंदगी के बारे में उसकी सारी सोच को ही बदल देता है। आप इसे जी5 पर देख सकते हैं।

द लीजेंड ऑफ कर्ण (The Legend Of Karn)
यह कहानी कर्ण की है, जो प्राचीन भारतीय महाकाव्य महाभारत का एक दुखद नायक है। वह अपनी बेमिसाल उदारता, तीरंदाजी के अद्भुत कौशल और अपने दोस्त के प्रति अटूट वफादारी के लिए मशहूर है, भले ही उसने एक विशाल युद्ध में गलत पक्ष की ओर से लड़ाई लड़ी थी। आप इसे सोनी लिव पर देख सकते हैं।

नगर निगम की चेतावनी भी बेअसर, 10 दिवसीय नोटिस की मियाद पूरी

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निगम का दावा था अवैध दुकानों को सील करेंगे, अधिकांश संस्थान खुले रहे

“यदि नगर निगम अवैध व्यावसायिक परिसरों पर कार्रवाई नहीं करता तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे” – विवेक त्रिपाठी
भोपाल। भोपाल नगर निगम द्वारा किए गए उस दावे की गुरुवार को पूरी तरह पोल खुल गई, जिसमें कहा गया था कि 10 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद आवासीय परिसरों में संचालित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। इस घोषणा से रहवासियों में यह उम्मीद जगी थी कि उनकी वर्षों पुरानी शिकायतों पर प्रशासन अब गंभीरता से कार्रवाई करेगा, किंतु वास्तविकता इसके विपरीत रही। अधिकांश अवैध दुकानें एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरे दिन सामान्य रूप से संचालित होते रहे और नगर निगम की कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दी।

भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी सहित अनेक आवासीय क्षेत्रों के रहवासी लंबे समय से आवासीय भूखंडों पर हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण एवं व्यवसायों के विरुद्ध शिकायत कर रहे हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय निवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन एवं नगर निगम से जवाब तलब किया है। रहवासियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करने के बजाय तथ्यों को छिपाने एवं गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

रहवासियों ने कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अवैध निर्माणों के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूखंड का उपयोग व्यावसायिक अथवा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए किया जाता है अथवा उस पर नियमों के विपरीत निर्माण किया जाता है, तो संबंधित स्थानीय निकाय एवं जिला प्रशासन ऐसे निर्माणों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे। आदेशों के पालन में उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित विभिन्न स्थानों पर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी की है। इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न नगर निकायों से भी अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक निर्माणों एवं उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है।

इसी आधार पर अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि यदि भोपाल नगर निगम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। उनका आरोप है कि भोपाल में नगर निगम की मिलीभगत से आवासीय नक्शों की स्वीकृति लेकर अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर सहित अनेक रहवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक भवन खड़े कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत मिलने पर नगर निगम केवल दिखावटी कार्रवाई करते हुए छोटे व्यापारियों के विरुद्ध औपचारिक कदम उठाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई मामलों में बिना भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र (Building Completion Certificate) के ही इमारतों का संचालन जारी है तथा स्वीकृत मानचित्रों का भी खुलेआम उल्लंघन किया गया है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

रहवासियों ने यह भी कहा कि नगर निगम ने पूरे भोपाल में लगभग 1,000 अवैध व्यावसायिक संस्थानों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने का दावा किया था तथा घोषणा की थी कि 10 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद गुरुवार से सीलिंग अभियान शुरू होगा। किंतु वास्तविक स्थिति यह रही कि अधिकांश बड़े प्रतिष्ठान पूरे दिन खुले रहे। रहवासियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किए जाने पर पाया गया कि कुछ छोटे प्रतिष्ठानों को छोड़कर अधिकांश प्रभावशाली व्यापारिक संस्थान सामान्य रूप से संचालित होते रहे।

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। समिति का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभावशाली अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने के उद्देश्य से जानबूझकर कमजोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि न्यायालय में उन्हें लाभ मिल सके। समिति ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और आशा है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित होगा तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

देश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की ज़रूरत का सिर्फ 3.5% ही पूरा

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health-अंग प्रत्यारोपण यानी ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant) कई मरीजों के लिए जीवन बचाने का आखिरी विकल्प होता है। लेकिन भारत (India) में ज़रूरतमंद मरीजों के लिए नया अंग मिलना आज भी मुश्किल है। द लैंसेट के रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अंग प्रत्यारोपण की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद 2021 में भारत में किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की कुल अनुमानित ज़रूरत का सिर्फ करीब 3.5% ही पूरा हो सका। इनमें हार्ट ट्रांसप्लांट की स्थिति सबसे खराब रही, जहाँ ज़रूरत का सिर्फ 0.2% ही पूरा हुआ।

अंग प्रत्यारोपण की मांग और उपलब्धता (2021)
2021 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,26,172 थी। हालांकि इसमें से 9,040 ही ट्रांसप्लांट हुई। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 7.2% रही। लिवर की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,85,197 थी। हालांकि इसमें से 2,777 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.5% रही। हार्ट की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 84,347 थी। हालांकि इसमें से 188 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 0.2% रही। फेफड़े की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 10,911 थी। हालांकि इसमें से 133 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.2% रही।

किन जगहों पर हुए सबसे ज़्यादा ट्रांसप्लांट?
तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, केरल, महाराष्ट्र और तेलंगाना में देश की लगभग 29% आबादी निवास करती है। हालांकि ट्रांसप्लांट की दर पर गौर किया जाए, तो यह 80% से 96% है। हार्ट, लिवर और फेफड़ों के 85% से ज़्यादा ट्रांसप्लांट इन्हीं पांच राज्यों में हुए थे। किडनी प्रत्यारोपण के मामले में केरल सबसे आगे रहा।

अंग प्रत्यारोपण की मांग (2040)
2040 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की ज़रूरत बढ़कर 1,43,722 तक होने की संभावना है। लिवर की ज़रूरत बढ़कर 2,10,649 तक हो सकती है। हार्ट की ज़रूरत बढ़कर 95,711 तक पहुंच सकती है। फेफड़े की ज़रूरत बढ़कर 12,780 तक हो सकती है।

बच सकती है जान
सही समय पर सही अंग मिल जाने पर कई मरीजों की जान भी बच सकती है। हालांकि इसके लिए व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ जागरूकता फैलाना भी ज़रूरी है, जिससे लोग मृत्यु से पहले अपने अंग दान कर सके।