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मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

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मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन
रायपुर/ सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम चेरपाल में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकासखंड कुआकोंडा एवं कटेकल्याण के 8 संकुल स्तरीय संगठनों को आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना (AGEY) के तहत टाटा मैजिक सवारी वाहनों की चाबी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर अधिकारियों ने जानकारी दी कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ दूरस्थ अंचलों में परिवहन सुविधाओं को मजबूत बनाना है। योजना के तहत प्रदाय किए गए प्रत्येक टाटा मैजिक वाहन के लिए लगभग 5 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। इन वाहनों के संचालन से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित आय का स्रोत प्राप्त होगा तथा ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

*41 हजार से अधिक परिवारों की आजीविका सशक्त करने में जुटा बिहान मिशन*
कार्यक्रम में बताया गया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के 41 हजार 110 परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्वरोजगार एवं आयवर्धन गतिविधियों से जोड़ा गया है। समूह की महिलाएं कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, लघु उद्यम, वनोपज प्रसंस्करण तथा विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

*गांव और शहर के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी, महिलाओं को मिलेगा स्थायी आय का स्रोत*
मुख्यमंत्री द्वारा प्रदाय किए गए इन वाहनों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुलभ, सुरक्षित एवं किफायती परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इससे दूरस्थ गांवों का बाजारों, स्वास्थ्य संस्थानों, शैक्षणिक केंद्रों तथा जिला मुख्यालय से बेहतर संपर्क स्थापित होगा। साथ ही महिलाओं को वाहन संचालन एवं प्रबंधन के माध्यम से नियमित आय प्राप्त होगी, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनकर उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना से उन्हें न केवल रोजगार का अवसर मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जनसेवा का एक नया माध्यम भी प्राप्त होगा। यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

डीके शिवकुमार आज बनेंगे कर्नाटक के CM

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डीके शिवकुमार आज बनेंगे कर्नाटक के CM
डीके शिवकुमार आज (3 जून) को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शाम 4 बजे लोकभवन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत डीके को सीएम पद की शपथ दिलाएंगे. कांग्रेस आलाकमान के कहने पर सिद्धारमैया के इस्तीफा देने के बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं. शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था.

10-12 विधायक बन सकते हैं मंत्री
सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार के साथ 10 से 12 विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. मंत्रिमंडल विस्तार इस महीने होने वाले राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के बाद होने की संभावना है. इससे पहले मंगलवार (2 जून) को उन्होंने दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ मंत्रिमंडल को लेकर चर्चा की थी. सिद्धारमैया भी बैठक में शामिल हुए थे.

दोनों ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ विस्तृत चर्चा की. इसके बाद दोनों नेताओं ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और पार्टी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के साथ अलग से बातचीत की.

कौन-कौन ले सकता है शपथ?
शिवकुमार और सिद्धरमैया मंगलवार (2 जून) रात बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए. सूत्रों ने बताया कि बुधवार को जी परमेश्वर, प्रियंक खरगे, रामालिंगा रेड्डी, एमबी पाटिल और यतीन्द्र सिद्धरमैया मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है.

मंत्रिमंडल में बैलेंस बनाने की होगी कोशिश
सूत्रों का कहना है कि नए मंत्रिमंडल में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है. जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सिद्धरमैया समर्थक नेताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी. यह भी चर्चा है कि कई उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं और सिद्धरमैया मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को नए मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है.

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्री पद के दावेदारों की लंबी कतार और उपलब्ध पदों की सीमित संख्या के बीच शिवकुमार के सामने संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है. उन्हें हर कदम बेहद सावधानी से उठाना होगा, क्योंकि मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले नेताओं की नाराजगी बड़े स्तर पर असंतोष का रूप ले सकती है.

सिद्धारमैया बने CWC मेंबर
रविवार (31 मई) को शिवकुमार से मुलाकात के बाद सिद्धरमैया के बेटे और कांग्रेस के विधान परिषद (एमएलसी) सदस्य यतींद्र सिद्धरमैया ने कहा था कि उन्हें अगले मंत्रिमंडल में जगह मिलने की पूरी उम्मीद है. उन्होंने दावा किया था कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मंत्री पद देने का आश्वासन भी दिया है. इस बीच, पार्टी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अपने सीनियर नेता सिद्धरमैया को मंगलवार (2 जून) को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) का सदस्य नियुक्त कर दिया.

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान

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प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सम्मान
रायपुर/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर : मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आयोजित “Month of Solar” अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाना राज्य के लिए अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और जनहितकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयासों का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मध्यम उपभोक्ता आधार वाले राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वेंडर रजिस्ट्रेशन के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है, जिसके लिए राज्य का चयन पीएम सूर्यघर एक्सीलेंस अवार्ड हेतु किया गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की सक्रियता, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसहभागिता का सकारात्मक परिणाम है।

मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए ऊर्जा विभाग, क्रेडा, विद्युत वितरण कंपनियों, सभी अधिकारियों, कर्मचारियों तथा सहयोगी संस्थाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि टीमवर्क, प्रतिबद्धता और बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले ऐसे प्रयास प्रदेश के नागरिकों को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ स्वच्छ एवं सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कंगना रनौत ने रणवीर सिंह के बैन होने पर किया रिएक्ट

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कंगना रनौत ने रणवीर सिंह के बैन होने पर किया रिएक्ट
एक्टर रणवीर सिंह पिछले कुछ समय से फिल्म ‘डॉन 3’ की वजह से विवादों में हैं. रणवीर ने ये फिल्म बीच में ही छोड़ दी है. फिल्म का प्री प्रोडक्शन हो चुका है. ऐसे में फिल्म प्रोड्यूसर फरहान अख्तर ने उनकी शिकायत FWICE में की. इसके बाद FWICE ने उन्हें बैन किया. अब कंगना रनौत ने इस पूरे मामले पर रिएक्ट किया है.

रणवीर सिंह के बैन पर बोलीं कंगना रनौत
कंगना रनौत ने रणवीर के बैन होने को लेकर कहा, ‘आप मुझसे पूछ रहे हैं. मुझे तो खुद सभी ने बैन कर दिया था. तो मैं ये कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है तो दुश्मन भी बढ़ते हैं. अब ऐसा नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बने. तो आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन है. तो अच्छा है. जिंदगी में जब आप आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की रुकावटें आती हैं. मेरे साथ तो ये इतना हुआ है. आज मैं ठीक कर रही हूं. मेरी भी अच्छी गाड़ी चल रही है. कुछ फर्क नहीं पड़ता. आखिर में सब ठीक हो ही जाती है.’

‘डॉन 3’ का क्या है मामला?
बता दें कि रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ बीच में छोड़ने से प्रोड्यूसर्स को काफी नुकसान हुआ. FWICE में मामले की शिकायत हुई. FWICE से प्रोड्यूसर फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने बताया कि फिल्म का प्री-प्रोडक्शन हो गया है और अभी तक 45 करोड़ खर्च हो गया है. प्रोड्यूसर को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने रणवीर सिंह से 45 करोड़ की मांग की.

इसके बाद FWICE ने रणवीर को तब तक के लिए बैन किया जब तक वो पूरा पैसा लौटा नहीं देते हैं.

CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला

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CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला
केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया गया है. सीबीएसई की ‘ऑन- स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) प्रणाली में बड़े पैमाने पर हुईं कथित अनियमितताओं के बाद ये कदम उठाया गया है.

ऑन- स्क्रीन मार्किंग को लेकर इंक्वायरी कमेटी का भी गठन
CBSE की ओर से ऑन-स्क्रीन मार्किंग की प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच के लिए एक इंक्वायरी कमेटी का भी गठन किया गया है. यह समिति पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी. इस समिति की कमान कैपेसिटी बिल्डिंग कमिशन (CBC) की अध्यक्ष एस. राधा चौहान को सौंपी गई है. वह जरूरत पड़ने पर दूसरे विभागों के अधिकारियों की मदद ले सकती हैं.

इसके अलावा, समिति को कामकाज में मदद (Secretarial Assistance) देने की जिम्मेदारी भी कैपेसिटी बिल्डिंग कमिशन को ही सौंपी गई है. इस समिति को अपनी जांच पूरी करके एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. ऑन-स्क्रीन मार्किंग के तहत छात्रों की कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचा जाता है. सीबीएसई का दावा है कि इससे कॉपियां जल्दी और बिना किसी भेदभाव के जांची जाती हैं, लेकिन इस व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने कई तरह की शिकायतें की हैं.

छात्रों और अभिभावकों का क्या है आरोप ?
छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि डिजिटल तरीके से कॉपियां जांचने के बाद जब रिजल्ट आया तो नंबरों के दोबारा मिलान (री-इवैल्युएशन) की प्रक्रिया में उन्हें सही और साफ जानकारी नहीं मिली. कुछ छात्रों का कहना है कि उन्होंने जितना अच्छा लिखा था, उन्हें उससे बहुत कम नंबर मिले, जबकि कुछ का तो यह भी दावा है कि उनके रिजल्ट में जो कॉपी जांची गई, वह उनकी थी ही नहीं. इसके अलावा कॉपियों के खराब स्कैन होने, कंप्यूटर पर जांच के दौरान तकनीकी खराबी आने, नंबर चढ़ाने में गलती होने और डिजिटल तरीके में कमियां ढूंढना मुश्किल होने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं.

सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्री

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सुशासन का संदेश लेकर गांव-गांव पहुंच रही सरकार, योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने स्वयं पहुंचे मुख्यमंत्री
रायपुर-प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यहां आयोजित जनचौपाल में ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं, योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति जानी तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से मुलाकात कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी जरूरतमंद को अपने अधिकारों एवं सुविधाओं के लिए भटकना न पड़े। इसी भावना के साथ सरकार स्वयं गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनके समाधान का प्रयास कर रही है।

जनचौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया तथा हितग्राहियों को वनाधिकार मान्यता पत्र, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री आवास योजना, श्रम कार्ड, किसान हितग्राही योजनाओं सहित विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ वितरित किए। उन्होंने लाभार्थियों से चर्चा कर योजनाओं के प्रभाव और उनके अनुभवों की जानकारी भी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त आवेदनों एवं शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब उसका लाभ पात्र व्यक्ति तक सही समय पर पहुंचे और आमजन को शासन की संवेदनशीलता का अनुभव हो।मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है तथा क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई धारा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासन के प्रति आमजन का विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा – दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

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विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया निरीक्षण, कहा – दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता

बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर बना आधुनिक बेली ब्रिज: कनेक्टिविटी और विकास को मिली नई गति
रायपुर।जहां कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां विकास की राह में चुनौती बनती थीं।वहां आज आधुनिक अधोसंरचना नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया।उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी लेते हुए इसे बदलते बस्तर की नई तस्वीर का प्रतीक बताया।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि वे दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं।राज्य सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो।

कम समय, कम लागत और अधिक मजबूती की तकनीक
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बेली ब्रिज पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक किफायती, मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में किया जा सकता है तथा इन्हें मात्र एक माह के भीतर तैयार किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।

बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास के वाहक
उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के निर्माण से दूरस्थ गांवों तक आवागमन सुगम हुआ है तथा लोगों को आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बड़ी राहत मिली है। इन संरचनाओं ने क्षेत्र में विकास और जनसेवाओं के विस्तार को नई गति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माणकर्ता हैं। उन्होंने श्रमिकों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके अनुभव भी साझा किए।

बदलते बस्तर की नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर में अधोसंरचना विकास के माध्यम से नई संभावनाओं का निर्माण हो रहा है। कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है।यह उस नए बस्तर की पहचान है, जहां विकास अब दूरस्थ गांवों और दुर्गम अंचलों तक मजबूती से पहुंच रहा है तथा लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पानी की बोतल खरीदकर बढ़ाया हौसला, कहा- यही है नए बीजापुर की तस्वीर

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मुख्यमंत्री रुके एक छोटी-सी किराना दुकान पर… और सामने थी बदलाव की बड़ी कहानी

कभी बंदूक थामने वाले मासा तामो और जयमोती आज चला रहे हैं अपनी दुकान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पानी की बोतल खरीदकर बढ़ाया हौसला, कहा- यही है नए बीजापुर की तस्वीर

रायपुर।प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल स्थित ग्राम कोण्डापल्ली पहुंचे।चौपाल के लिए जा रहे मुख्यमंत्री का काफिला अचानक एक छोटी-सी किराना दुकान के सामने रुक गया। बाहर से देखने पर यह एक सामान्य दुकान थी, लेकिन उसके भीतर संघर्ष, साहस और बदलाव की एक असाधारण कहानी छिपी थी।यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी।
मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे दोनों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके जीवन में आए बदलाव के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है।

बंदूक से रोजगार तक का सफर
मासा तामो का बचपन गरीबी और अभावों में बीता। बचपन में पिता का साया उठ गया और पढ़ाई का अवसर कभी नहीं मिला।वर्ष 2007 में परिस्थितियों के कारण वह नक्सली संगठन से जुड़ गया।उधर जयमोती की कहानी भी संघर्षों से भरी रही।बचपन में माता-पिता का निधन हो गया और जीवन की कठिन परिस्थितियों ने उन्हें भी उसी रास्ते की ओर धकेल दिया। संगठन में दोनों की मुलाकात हुई और वर्ष 2021 में उन्होंने विवाह कर लिया।लेकिन समय के साथ दोनों ने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं है।अक्टूबर 2025 में उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।

पुनर्वास केंद्र बना नई जिंदगी का आधार
बीजापुर पुनर्वास केंद्र पहुंचने के बाद दोनों के जीवन में नया अध्याय शुरू हुआ। पहली बार उन्हें अक्षर ज्ञान मिला।कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला और शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया।राशन कार्ड, आधार कार्ड,आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, बैंक खाता और अन्य आवश्यक दस्तावेज बनवाए गए।महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ।इसी सहायता से कोण्डापल्ली में उनकी छोटी-सी किराना दुकान शुरू हुई।

अब हाथों में हथियार नहीं, मेहनत की कमाई है
मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान मासा और जयमोती ने बताया कि अब वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। दुकान से होने वाली आय से परिवार की जरूरतें पूरी हो रही हैं और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।उन्होंने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि जीवन में ऐसा बदलाव आएगा, लेकिन सरकार की पुनर्वास नीति और प्रशासन के सहयोग ने उन्हें नई पहचान दी है।

बदलते बस्तर की जीवंत तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मासा और जयमोती की कहानी केवल दो व्यक्तियों की कहानी नहीं, बल्कि बदलते बस्तर की कहानी है।यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर विश्वास और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सकता है।

‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाईल एप का किया शुभारंभ

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‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाईल एप का किया शुभारंभ
मध्यप्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन की पहल के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर में ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ का लोकार्पण तथा ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 18 अत्याधुनिक हाईटेक ड्रोन्स का और 10 पुलिस वाहनों का लोकार्पण कर इन्हें इंदौर पुलिस के बेड़े में शामिल कराया। यह ड्रोन्स पुलिस की तीसरी आंख के रूप में हर वक्त कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और भी अधिक प्रभावी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों की मांग पर इंदौर शहर में तीन नए पुलिस थाने खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुलिस बल की कमी की पूर्ति भी क्रमबद्ध रूप से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हर साल पुलिस विभाग के 22 हजार 500 पदों पर भर्ती कर रहे हैं। लगभग सभी पदों पर भर्ती जारी है। हम प्रदेश के हर जिले में पुलिस बैंड की स्थापना भी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार हमेशा पुलिस विभाग के साथ है। परन्तु नागरिकों को बेवजह परेशानी या अपने पदीय कर्तव्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लोगों के हित में है, तो एक चुनौती भी है, इसलिए इसका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन पुलिस का कान्सेप्ट इंदौर से ही आया है। अब यह एक मिसाल बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘विरासत से विकास’ के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने जिस इंदौर को सेवा, सुशासन और जनकल्याण के जीवन मूल्यों से जोड़ा था, अपनी श्रम साधना से सींचा था, आज वही शहर नवाचार और तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में देश के लिए उदाहरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञान वास्तव में सुशासन की दिशा में ‘लोक कल्याणकारी राज्य’ के लिए एक वरदान साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार तकनीक से लोगों की तकदीर बदलने, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और लोकसेवा का नया अध्याय लिखने के लिए प्रतिबद्ध है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘डिस्ट्रिक्ट ड्रोन यूनिट’ और ‘इंदौर ट्रैफिक साथी’ जैसे नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को नई ताकत प्रदान करेंगे। आज इंदौर में हुआ यह नवाचार पुलिस और प्रशासन दोनों को बेहतर काम करने की नई ऊर्जा देगा तथा नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल स्मार्ट और सुरक्षित इंदौर की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और सुशासन के बेहतर समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी। आज लोकार्पित ड्रोन्स कानून व्यवस्था की स्थापना में पुलिस के लिए सहायक होंगे, वहीं ट्रेफिक साथी ऐप वाहन चालकों के लिए बेहद कारगर साबित होगा। इस ऐप के जरिए वाहन चालक पार्किंग की बेहतर लोकेशन जान सकेंगे।

पुलिस कमिश्नर इंदौर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस के बेड़े में 18 ड्रोन्स शामिल किए जा रहे हैं। अब इंदौर पुलिस भीड़ के समुचितप्रबंधन में इन अत्याधुनिक ड्रोन्स के बेहतर उपयोग करने के लिये तैयार हो गई है। इन ड्रोन्स से 2 किलोमीटर का दायरा कवर होगा। उन्होंने कहा कि अब हम न सिर्फ ट्रैफिक बल्कि अपराधों पर भी नजर रख सकेंगे। इसका प्रयोग इंदौर में रंगपंचमी पर निकली गैर और बसंत पंचमी पर भोजशाला में कानून व्यवस्था के लिए किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इंदौर पुलिस ने 4 हजार 370 लोगों को नि:शुल्क हेलमेट बांटे हैं।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, पूर्व मंत्री एवं विधायिका सु उषा ठाकुर, पूर्व मंत्री एवं विधायक महेन्द्र हार्डिया, विधायक रमेश मेंदोला, विधायिका मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, विधायक मनोज पटेल, विधायक राकेश शुक्ला सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।

म्यांमार सीमा पर तनाव को लेकर पीएम मोदी ने जताई चिंता

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म्यांमार सीमा पर तनाव को लेकर पीएम मोदी ने जताई चिंता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में भारत-म्यांमार सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और शरणार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और उनके भारतीय सीमा क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने राष्ट्रपति के भारत दौरे पर आयोजित विशेष ब्रीफिंग में बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के भीतर चल रहे संघर्ष और उससे जुड़े सीमा पार प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीमा के आसपास सक्रिय सशस्त्र समूहों और उनके खिलाफ म्यांमार सेना की कार्रवाई का असर भारत की सीमा से लगे इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है।

सीमा पार गतिविधियों को लेकर जताई चिंता
विदेश सचिव के अनुसार, प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि म्यांमार में सक्रिय समूहों की गतिविधियां भारतीय सीमा के बेहद करीब तक पहुंच रही हैं। इसके जवाब में म्यांमार सेना की सैन्य कार्रवाई भी सीमा के नजदीक होती है, जिसका असर भारतीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

प्रधानमंत्री ने म्यांमार प्रशासन से कहा कि सीमा के पास होने वाली सैन्य कार्रवाई इस तरह की जाए कि भारतीय क्षेत्र में रहने वाले नागरिकों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। उन्होंने इस मुद्दे पर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत पर जोर दिया।

शरणार्थियों का मुद्दा भी उठा
बैठक के दौरान म्यांमार से भारत आए शरणार्थियों का मुद्दा भी चर्चा में रहा। विक्रम मिस्री ने कहा कि म्यांमार में जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग मिजोरम पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि शरणार्थियों की वापसी का एक तय तंत्र मौजूद है और इस संबंध में दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।