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8 हजार के बम से उज्जैन में मोहर्रम जुलूस में उड़ाया गया था वाहन, जांच में जुटी ATS

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8 हजार के बम से उज्जैन में मोहर्रम जुलूस में उड़ाया गया था वाहन, जांच में जुटी ATS
उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में मोहर्रम के जुलूस के दौरान क्रेन से हवा में लटकाए गए मैजिक वाहन में विस्फोट का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। जैसे ही इस घटना का वीडियो सामने आया सोच तो मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। वहीं सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई है।

घटना के बाद मैजिक और क्रेन को जब्त कर लिया गया है। उज्जैन के आसपास मौजूद उन्हेल, नागदा और महिदपुर क्षेत्र संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में कोई भी जोखिम न लेते हुए मामले की जांच स्थानीय पुलिस के साथ-साथ एटीएस को सौंपी गई है।

वाहन में किया गया था विस्फोट
बता दे की 23 जून की रात को यह घटना बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकले मोहर्रम जुलूस की है। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। जुलूस के दौरान एक मैजिक वाहन क्रेन की मदद से लगभग 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया। इस पर दो युवक खड़े हुए थे और लाल झंडा लहरा रहे थे। इसके बाद विस्फोट किया गया। यहां हैरान करने वाली बात यह थी कि जिस वाहन में विस्फोट किया गया उसे पर ले फिर आ गए लिखा हुआ था।
8 हजार के पटाखों से विस्फोट

घटना के बारे में जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक भंगार में रखी हुई मैजिक गाड़ी को क्रेन में लटका कर लगभग 8000 रुपए के पटाखे से यह विस्फोट किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने 8 हजार के उताखे खरीदने का बिल भी दिया है, जिसकी जांच की जा रही है।

जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां
जैसे ही घटना का वीडियो वायरल हुआ पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले से कई तरह के सवाल जुड़ गए हैं। विस्फोट क्यों किया गया इसके पीछे का मकसद क्या था। वहां पर ले फिर आ गए क्यों लिखा गया। कौन सा विस्फोटक था और कहां से लाया गया इन सभी चीजों को जांच चल रही है।

इस संबंध में क्रेन संचालक का कहना है कि पुष्प वर्षा करने के लिए क्रेन किराए पर लेने की बात कही गई थी। 2500 रुपए किराया तय होने के बाद चालक सहित क्रेन मौके पर भेज दी थी। मौके पर पहुंचने के बाद लोगों ने वाहन को क्रेन से लटका दिया। उन्हें वाहन में किसी तरह के विस्फोट की जानकारी नहीं थी।

जिस वाहन में विस्फोट हुआ उस पर ले फिर आ गए लिखा हुआ था जो कि जांच का विषय बन गया है। जुलूस में शामिल कुछ लोगों के हाथों में भी इसी संदेश की तख्तियां दिखाई दी थी। इसका आशय क्या है इसकी जांच की जा रही है।

BDS और फोरेंसिक की जांच
घटना के बाद विस्फोट में जिस मैजिक और क्रेन का इस्तेमाल किया गया था, उन्हें जप्त किया गया है। वाहन के अंदर अभी भी फटाके और विस्फोट के लिए लगाई गई केबल दिख रही है। फारेंसिक टीम और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचकर नमूने एकत्र करेगा। इनकी जांच के बाद विस्फोटक सामग्री की जानकारी सामने आएगी।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए वैध रहेगा पासपोर्ट

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वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए वैध रहेगा पासपोर्ट
देश में चल रहे वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए भारतीय पासपोर्ट एक वैध दस्तावेज बना रहेगा। ये कहना है चुनाव आयोग का। विदेश मंत्रालय के हालिया बयान के बाद लोगों में भ्रम का स्थिति बनी हुई थी जिसके बाद चुनाव आयोग ने ये स्पष्टीकरण दिया।

लोगों में क्यों बनी ये स्थिति
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने या अपनी पात्रता साबित करने के लिए जो 12 मान्य दस्तावेज जरूरी होते हैं, उनमें पासपोर्ट भी शामिल है और इसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारतीय पासपोर्ट “मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज” है और इसे नागरिकता का पक्का या निर्णायक सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का दिया था हवाला
सरकार ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 और बॉम्बे हाई कोर्ट के 2013 के एक फैसले का हवाला देते हुए साफ किया कि विशेष परिस्थितियों में जनहित में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है, इसलिए सिर्फ पासपोर्ट होने से भारतीय नागरिकता साबित नहीं होती।

चुनाव आयोग ने दिया आश्वासन
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि बिहार और असम में हुए पिछले सुधार अभियानों की तरह ही इस बार भी पासपोर्ट पूरी तरह स्वीकार्य है। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर (ERO) आवेदक की पात्रता तय करने के लिए इन 12 मान्य दस्तावेजों की जांच करते हैं, जिसमें पासपोर्ट पहचान साबित करने का एक मजबूत जरिया बना रहेगा।

वेनेज़ुएला में भीषण भूकंप से हज़ारों लोगों के मारे जाने की आशंका

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वेनेज़ुएला में भीषण भूकंप से हज़ारों लोगों के मारे जाने की आशंका
वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज़ ने कहा है कि बुधवार रात देश में आए भूकंप से मरने वालों की संख्या अब 164 हो गई है.

इस हादसे में अब तक क़रीब एक हज़ार लोगों से घायल होने की भी सूचना है. हालांकि भूकंप से इससे कहीं भारी जनहानि और व्यापक तबाही की आशंका जताई जा रही है.

यूनाइटेड स्टेट्स जीयोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, इस बात की 44% आशंका है कि मृतकों की संख्या 10 हज़ार से ज़्यादा हो सकती है. वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिगेज़ ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी है.

वेनेज़ुएला में बिजली कटौती की समस्या काफ़ी आम है और भूकंप के बाद प्रभावित इलाक़ों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी असर पड़ा है, इसलिए भूकंप से प्रभावित लोगों और इसके असर की जानकारी मिलने में भी काफ़ी परेशानी हो रही है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है और हर संभव मदद की पेशकश की है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका वेनेज़ुएला में “तुरंत खोज और बचाव दल, चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता तैनात कर रहा है.”

एक्स पर की गई अपनी पोस्ट में रुबियो ने कहा, “हमारी संवेदनाएँ उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, जो घायल हुए हैं, और उन साहसी बचावकर्मियों के साथ हैं जो इस त्रासदी के बाद लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं.”

झारखंड से राज्यसभा चुनाव में जीत कर परिमल नाथवानी पीएम मोदी से मिले

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झारखंड से राज्यसभा चुनाव में जीत कर परिमल नाथवानी पीएम मोदी से मिले
झारखंड से राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद परिमल नाथवानी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। नाथवानी ने इससे पहले राज्यसभा के सदस्य के तौर पर शपथ ली। नाथवानी चौथी बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनके दो टर्म झारखंड और एक टर्म आंध्र प्रदेश से रहा है। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद नाथवानी ने एक्स पर तस्वीरें साझा कीं। इनमें उन्होंने झारखंड को अपनी कर्मभूमि बताया है। नाथवानी गुजरात के जामनगर में रहते हैं। पीएम मोदी से मुलाकात में उनके साथ उनकी पत्नी वर्षा नाथवानी उनके साथ मौजूद रहीं। पीएम मोदी परिमल नाथवानी के पोते शिवान नाथवानी और पोती कृषा नाथवानी से भी मिले। परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में ग्रुप प्रेसिडेंट और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के अध्यक्ष हैं।

परिमल नाथवानी प्रधानमंत्री के काफी करीबी लोगों में शामिल है। गुजरात के अहमदाबाद में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम का निर्माण परिमल नाथवानी की देखरेख में ही पूरा हुआ था। परिमल नाथवानी ने एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से शिष्टाचार भेंट करने का सौभाग्य मिला। झारखंड से राज्यसभा के लिए हाल ही में हुए चुनावों में NDA के महत्वपूर्ण समर्थन के लिए मैंने उनके प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया। देश के प्रति उनके विजन से प्रेरित होकर मैं अपनी कर्मभूमि में विकास की गति को और तेज करने के लिए तत्पर हूं।

नाथवानी की जीत पर मचा था हड़कंप
गौरतलब हो कि झारखंड से राज्यसभा चुनाव में एनडीए (NDA) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को कुल 28 वैध वोट मिले। उन्हें कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन उनमें से दो वोट अमान्य घोषित कर दिए गए थे। नाथवानी की जीत ने इंडिया ब्लॉक को हिला दिया था। नाथवानी ने झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ऐसे हालात में जीत दर्ज की है जब वहां केवल 24 विधायकों का समर्थन था। नाथवानी पहले भी दो टर्म झारखंड से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। जमीन से उठकर बड़े आदमी बने नाथवानी रिलांयस के चेयरमैन मुकेश अंबानी के काफी नजदीक हैं। वह रिलायंस के बड़े फैसले में दखल रखते हैं।

सीएम मोहन यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लाभार्थियों के खाते में 203 करोड़ 56 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर

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सीएम मोहन यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के लाभार्थियों के खाते में 203 करोड़ 56 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर
सीएम मोहन यादव ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हितग्राहियों के खाते में राशि ट्रांसफर की है। उन्होंने वर्चुअली इसके लाभार्थियों के खाते में 203 करोड़ 56 रुपए ट्रांसफर किए हैं। उन्होंने कहा कि घर में बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद होना, तपती धूप में ठंडी छांव के समान होता है।

बुजुर्गों के खाते में ट्रांसफर की राशि
सीएम मोहन यादव ने 33 लाख 92 हजार 695 से अधिक भाई-बहनों और बुजुर्गों के खातों में मई महीने की 203 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि सिंगल क्लिक से उनके खातों में ट्रांसफर की। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में बुजुर्गों, असहायों और समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आदर देना केवल कर्तव्य नहीं बल्कि हमारा धर्म माना गया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के सम्मान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

खुद को बेसहारा न समझें
उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि राज्य का कोई भी निर्धन परिवार, माताएं, बहनें या हमारे दिव्यांग साथी स्वयं को बेसहारा न समझें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में अंत्योदय का संकल्प सिद्ध हो रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार भी गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के कल्याण में जुटी है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन केवल आर्थिक सहायता नहीं है, अपितु निर्धन परिवारों, दिव्यांग साथियों में आपके प्रति सरकार का स्नेह, सम्मान और सुरक्षा का वचन है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

बीते दो माह में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 1747 प्रकरण दर्ज

6.49 करोड़ रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल

बलौदाबाजार में अवैध उत्खनन, जांजगीर-चांपा में अवैध परिवहन और रायपुर में अवैध भंडारण के सबसे ज्यादा मामले

अवैध खनन पर डबल वार, ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ जुर्माना भी कई गुना बढ़ा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है।

अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।

अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं।

अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री साय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

यूपी के सरकारी स्कूलों में होगा एमएमसी का गठन

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यूपी के सरकारी स्कूलों में होगा एमएमसी का गठन
प्रदेश के सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में इस शैक्षणिक सत्र से विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) का गठन किया जाएगा। समिति में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के अभिभावक या संरक्षक होंगे, जिससे स्कूल के संचालन, विकास और विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़े निर्णयों में अभिभावकों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

शिक्षा मंत्रालय की ओर से निर्देश दिए गए थे कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक माह के भीतर विद्यालय प्रबंध समिति का गठन कर लिया जाए, लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

अब एक जुलाई से राजकीय माध्यमिक विद्यालय खुलने के साथ ही समितियों के गठन की प्रक्रिया तेज की जाएगी। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

विद्यालय में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर समिति के सदस्यों की संख्या तय होगी। 100 तक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 15 सदस्य, 101 से 500 विद्यार्थियों तक वाले विद्यालयों में 20 सदस्य और 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालयों में 25 सदस्य होंगे।

बेंगलुरु रोड शो में उत्तर प्रदेश को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले

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बेंगलुरु रोड शो में उत्तर प्रदेश को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले
राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेंगलुरु में बुधवार को आयोजित रोड शो में विभिन्न कंपनियों ने 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव दिए हैं।

साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 कंपनियों ने निवेश को लेकर सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इन एमओयू से वैश्विक क्षमता केंद्र, इलेक्ट्रानिक्स व इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

सबसे अधिक निवेश प्रस्ताव औद्योगिक एवं बिजनेस पार्क के क्षेत्र में प्राप्त हुए हैं। होराइजन (ब्लैकस्टोन) ने 10 हजार करोड़ रुपये, एंबेसी ने पांच हजार करोड़ रुपये, रहेजा-माइंडस्पेस रीट ने पांच हजार करोड़ रुपये, प्रेस्टीज ने 15 हजार करोड़ रुपये और सत्व डेवलपर्स ने चार हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं। श्रीराम प्रापर्टीज ने भी राज्य में निजी औद्योगिक व व्यापारिक पार्क विकसित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

वहीं, एलजी, एओएन, मेटलाइफ, टेबलस्पेस समेत अन्य कंपनियों ने जीसीसी के क्षेत्र में निवेश को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उत्तर प्रदेश में जीसीसी टैलेंट डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के लिए टीमलीज ने गैर वित्तीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का मकसद राज्य में प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता को मजबूत करना है।

अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार, बढ़ा जुर्माना और कार्रवाई हुई सख्त

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अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार, बढ़ा जुर्माना और कार्रवाई हुई सख्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सख्ती का असर

मंत्रिपरिषद् की मंजूरी के बाद किया गया है नियमों में संशोधन

छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और उनके सख्त प्रशासनिक रुख के तहत राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू हो गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाना, राजस्व बढ़ाना और खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है।

सबसे बड़ा बदलाव अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन पर लगने वाले जुर्माने में किया गया है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से समझौता शुल्क देना होगा। इसके अलावा अवैध रूप से ले जाए जा रहे खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करता है, तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये और खनिज का मूल्य अलग से देना होगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क तथा रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन आसानी से दोबारा अपराध में इस्तेमाल न हो सकें। अब जब्त वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन सुपुर्द किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र के नियम भी आसान बनाए हैं। शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध होगा और व्यवस्थित खनन को बढ़ावा मिलेगा।

खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना भी की गई है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है।

सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। इससे अलग-अलग प्रकार से स्वीकृत पट्टों के एकीकरण में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयां दूर होंगी और शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी।

निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को भी एक समान बनाया गया है। अब सभी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर और सुरक्षा के तौर पर अतिरिक्त राशि निर्धारित नियमों के अनुसार काटेंगे। खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी, अन्यथा विभाग इसे खनिज मद में जमा करेगा। इससे अवैध स्रोतों से खनिज के उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत गौण खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ अब केवल नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला पंचायतों को भी इसका हिस्सा मिलेगा।
करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। राज्य में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए डेड रेंट से केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। जो खदानें संचालित नहीं होंगी, वे समर्पित होकर दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार के जीरो टॉलरेंस और सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा सख्त कदम माना जा रहा है। नए नियमों से एक ओर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, वहीं राज्य के राजस्व में वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम को जबलपुर में संबोधित किया

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर कार्यक्रम को जबलपुर में संबोधित किया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रानी दुर्गावती, अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और साहस की प्रतिमूर्ति थीं। नारी शक्ति का पराक्रम मां दुर्गावती के व्यक्तित्व में नजर आता है। मुगलों को युद्धों में धूल चटाने वाली ऐसी वीरांगना रानी दुर्गावती का आज 463वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना साम्राज्य में 52 गढ़ों पर शासन किया। पति की असमय मृत्यु के बाद 5 साल के बेटे को सिंहासन पर बैठाया और 15 साल तक जनता की सेवा के लिए और क्षेत्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग 500 वर्ष पूर्व रानी दुर्गावती का जन्म हुआ, लेकिन आज पूरा देश और प्रदेश उन्हें आदर के साथ स्मरण करता है। हमारा सौभाग्य है कि प्रदेश सरकार के गठन के बाद मंत्रि-परिषद की पहली बैठक जबलपुर में रानी दुर्गावती को समर्पित कर आयोजित की गई थी। इसके बाद दूसरी कैबिनेट बैठक रानी दुर्गावती के गौंडवाना साम्राज्य की राजधानी संग्रामपुर में आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि जबलपुर एयरपोर्ट का नाम वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर रखने के लिए केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर उनकी समाधि स्थल नर्रई नाला जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती को समर्पित नवीन संस्थान जबलपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से मदन महल के पास तैयार हो रहा है, जिसका लोकार्पण बहुत जल्द किया जाएगा। इस संस्थान से प्रदेश की भावी पीढ़ी रानी दुर्गावती के गौरवशाली अतीत और कार्यों से परिचित होंगी। जबलपुर में रानी दुर्गावती के नाम पर एक चिड़ियाघर (जू) और वन्य प्राणी रेस्क्यू सेंटर बन रहा है। इसके साथ ही 35वीं बटालियन मंडला का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नायकों की वीरता और समृद्ध विरासत को सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए ‘विरासत से विकास’ अभियान शुरू किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का शासन काल, गौंड साम्राज्य का स्वर्णिम युग था। रानी दुर्गावती ने किसान कल्याण के लिए उस दौर में बीज संग्रह, फसल चक्रण और जल संचय के महत्वपूर्ण कार्य कराए थे। उनके प्रबंधन के परिणाम स्वरूप अनाज के भंडार भरे हुए थे।