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यूपी के 865 होनहारों को योगी सरकार देगी फ्री हॉस्टल, किताबें और टॉप क्लास कोचिंग

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यूपी के 865 होनहारों को योगी सरकार देगी फ्री हॉस्टल, किताबें और टॉप क्लास कोचिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के गरीब व होनहार युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं में भेजने के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित ‘निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना’ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए अब राज्य के प्रतिभावान छात्रों को देश और प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC और UPPSC) की तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी।

5 जुलाई को 10 हजार से अधिक अभ्यर्थी आजमाएंगे भाग्य
इस योजना के अंतर्गत दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आगामी 5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कुल 10,175 छात्र-छात्राएं शामिल होने जा रहे हैं। परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद पारदर्शी काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से योग्य अभ्यर्थियों की छंटनी होगी। चयनित छात्र-छात्राओं के लिए नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ हो जाएंगी और यह विशेष शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा।

7 हाई-टेक सेंटर और 865 सीटें: रहना, खाना और किताबें सब मुफ्त
प्रदेश भर में स्थापित सात अत्याधुनिक आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रवेश दिया जाएगा। सरकार ने इसमें एक विशेष व्यवस्था भी की है, जिसके तहत 25 प्रतिशत सीटें उन छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा (Preliminary Exam) पहले ही क्वालीफाई कर चुके हैं। चयनित युवाओं को हॉस्टल में रहने, पौष्टिक भोजन, बेहतरीन पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और देश के अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन जैसी सभी विश्वस्तरीय सुविधाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री का विजन: आर्थिक तंगी से नहीं होगा समझौतो का दौर
यह योजना महज एक कोचिंग कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बड़ा विजन है। मुख्यमंत्री की स्पष्ट मंशा है कि आर्थिक तंगी या संसाधनों का अभाव किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य और उसके बड़े सपनों के आड़े नहीं आना चाहिए। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार इन होनहारों की पढ़ाई का पूरा खर्च खुद उठा रही है।

निजी कोचिंग के लाखों के खर्च से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान दौर में जहां निजी संस्थानों में आईएएस-पीसीएस की तैयारी के नाम पर लाखों रुपये की फीस वसूली जाती है, वहीं गरीब परिवारों के बच्चों के लिए यह खर्च उठा पाना नामुमकिन होता है। समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, योगी सरकार की इस पहल से वंचित और शोषित वर्ग के युवाओं में नया आत्मविश्वास जगा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही दिशा मिलने से अब ये युवा भी ब्यूरोक्रेसी (प्रशासनिक सेवाओं) में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराएंगे, जिससे आने वाले समय में समाज में एक बेहद सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

CM योगी 10 लाख शिक्षकों-कर्मचारियों को आठ जुलाई को व्यापक सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा देंगे

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CM योगी 10 लाख शिक्षकों-कर्मचारियों को आठ जुलाई को व्यापक सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा देंगे
प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 10 लाख शिक्षक और कर्मचारियों को अब व्यापक सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आठ जुलाई को वाराणसी में बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच एमओयू होगा।

इसके तहत करीब 4.50 लाख स्थायी और 5.50 लाख संविदा शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, समग्र शिक्षा, मध्याह्न भोजन योजना व अन्य कार्मिक एसबीआई के विशेष सैलरी पैकेज से जुड़ेंगे।

स्थायी कार्मिकों को 10 लाख रुपये का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, एक करोड़ का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, एक करोड़ रुपये का स्थायी दिव्यांगता कवर और 1.60 करोड़ रुपये तक का एयर एक्सीडेंट बीमा मिलेगा।

साथ ही बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा कवर रहेगा। 10 हजार रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले संविदा कार्मिकों को 30 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा, स्थायी दिव्यांगता पर 30 लाख रुपये, आंशिक दिव्यांगता पर 15 लाख रुपये व एयर एक्सीडेंट पर 30 लाख रुपये का कवर मिलेगा।

10 हजार रुपये से कम वेतन वाले कार्मिकों को जीरो बैलेंस खाते और रुपे डेबिट कार्ड के आधार पर एक लाख का बीमा मिलेगा। एसबीआई में पहले से वेतन खाता रखने वालों को सैलरी पैकेज का लाभ मिलेगा, जबकि अन्य कर्मचारियों को एसबीआई में वेतन खाता खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी को ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले जान से मारने की धमकी

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प्रधानमंत्री मोदी को ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले जान से मारने की धमकी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले हफ्ते सोमवार (9 जुलाई, 2026) को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर रवाना होने से पहले उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई है. इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट हो गई हैं.

दरअसल, यह धमकी प्रधानमंत्री मोदी के लिए ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर में आयोजित होने वाले ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ प्रोग्राम के प्रचार के लिए किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर दी गई है. मेलबर्न में भारत के पीएम को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया के फेडरल पुलिस तुरंत हरकत में आई और मामले की जांच में जुट गई है.

फेसबुक पोस्ट के कमेंट बॉक्स में दी गई धमकी
द ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेलबर्न पहुंचने के बाद 9 जुलाई को स्थानीय मार्वल स्टेडियम में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ के नाम से एक कम्युनिटी प्रोग्राम का आयोजन किया जाने वाला है. जिसके प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट शेयर किए गए हैं. इसी दौरान फेसबुक प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए पोस्ट के कमेंट बॉक्स में एक ऐसा कमेंट सामने आया, जिसने दोनों देशों के सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए.

रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्ट के कमेंट बॉक्स में अबू मुस्तफा के नाम से एक टिप्पणी की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी ऑस्ट्रेलिया यात्रा पर मारने की धमकी दी गई. कमेंट में लिखा था, ‘कार्यक्रम के दौरान स्टेडियम की छत को बंद कर देना चाहिए, नहीं तो वो ऑस्ट्रेलिया में अपनी मौत के लिए आएगा.’

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सुजलॉन ग्रुप के सीईओ कपूर ने की भेंट

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सुजलॉन ग्रुप के सीईओ कपूर ने की भेंट
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सुजलॉन ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर अजय कपूर ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। सुजलॉन ग्रुप द्वारा नवकरणीय ऊर्जा विशेष रूप से सोलर एनर्जी तथा विंड एनर्जी के क्षेत्र में परियोजनाऐं संचालित की जा रही हैं। सुजलॉन ग्रुप उज्जैन जिले की तराना तहसील में 200 मेगावाट की विंड एनर्जी परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सीईओ सुजलॉन ग्रुप कपूर ने प्रदेश में विंड एनर्जी परियोजना के विस्तार तथा हाइब्रिड क्षमता में वृद्धि संबंधी चर्चा की।

भारत-इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू

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भारत-इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता लागू
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता (बीआइए) शनिवार से लागू हो गया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश वातावरण सुनिश्चित करेगा।

साथ ही सीमा पार निवेश गतिविधियों में वृद्धि होगी। दोनों देशों ने इस समझौते पर पिछले वर्ष आठ सितंबर को हस्ताक्षर किए थे।
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय निवेश समझौता

मंत्रालय ने बताया कि समझौते के तहत भारत ने इजरायली निवेशकों के लिए स्थानीय उपायों की समाप्ति अवधि को तीन वर्षों तक सीमित कर दिया है।

स्थानीय उपायों का मतलब है कि निवेशकों को पहले मेजबान देश की कानूनी प्रणाली का उपयोग करके अपने विवादों को हल करने का प्रयास करना होगा। इसके बाद ही वे वे मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में ले जा सकेंगे।

सामान्य तौर पर भारत के लिए यह अवधि पांच वर्ष होती है। भारत-इजरायल बीआइए में पोर्टफोलियो निवेश भी शामिल है, जो पिछले ऐसे समझौतों से बिलकुल अलग है।

इजरायल पहला आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) सदस्य है, जिसके साथ भारत ने यह समझौता किया है। अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत को इजरायल से 37.13 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) मिला है।

आर्थिक थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआइ) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि इजरायल के साथ ताजा समझौते में पोर्टफोलियो निवेश को शामिल करने से पारंपरिक एफडीआइ अलग कुछ वित्तीय निवेशों को बढ़ा सकता है।

पोर्टफोलियो निवेश में शेयर, स्टाक व अन्य इक्विटी होल्डिंग, योग्य बांड, डेट और अन्य कारपोरेट ऋण शामिल हैं।
एफटीए पर भी वार्ता कर रहे दोनों देश

इस समझौते का लागू होने इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दोनों देश एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के कारण एफटीए वार्ता की गति धीमी है।

पूरे हफ्ते करें कपूर के 3 उपाय, बनी रहेगी घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति

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पूरे हफ्ते करें कपूर के 3 उपाय, बनी रहेगी घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति
हिंदू धर्म में घर की तुलना स्वर्ग से की जाती है। ऐसे में हर कोई चाहता है कि उसके घर में सुख-शांति बनी रहे, लोगों के बीच आपसी प्रेम हो और कभी दरिद्रता उनके द्वार न आए। लेकिन कई बार न चाहते हुए भी घर में बुरी ऊर्जा का साया मंडराने लगता है और सब काम बिगड़ने लगते हैं। वास्तु शास्त्र में कपूर के कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिनको पूरे सप्ताह कर लिया जाए, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा वास करने लग जाती है।
मंगलवार और शनिवार करें यह काम

वास्तु शास्त्र में कपूर के अनेक फायदे बताए गए हैं। इसकी सुगंध बहुत शक्तिशाली होती है। इसमें यदि लौंग मिलाकर इसे जलाया जाए, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है। यह कार्य आपको मंगलवार और शनिवार के दिन ही करना चाहिए क्योंकि यह दोनों दिन प्रबंधन और नियंत्रण के होते हैं। इस उपाय से किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को इस दिन नियंत्रित किया जा सकता है।

रविवार और सोमवार को करें यह काम
घर में शाम के वक्‍त कपूर और दालचीनी जलाएं । इसे आग्नेय कोण में रखें। ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा इस स्थान पर होती है। इन्हें जलाने पर निकलने वाली सुगंध घर में मौजूद हवा को शुद्ध करती है। धन लाभ और समृद्धि के लिए यह बहुत ही अच्‍छा उपाय है। किसी मिट्टी या पीतल के बर्तन में ही इसे जलाएं। रविवार और सोमवार को यह उपाय इसलिए करने चाहिए, क्योंकि यह दिन सूर्य देव और भगवान शिव के होते हैं और दोनों ही देवता धन-धान्य की वृद्धि, तरक्की और समृद्धि देने वाले होते हैं।

गुरुवार और शुक्रवार को करें यह काम
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की पूर्व दिशा में अगर आप कपूर और तेजपत्ता जलाते हैं, तो परिवार में प्रेम बना रहता है। इसकी सुगंध गुरु, शुक्र और शनि को प्रभावित करती है, जिससे घर का वास्तु दोष खत्म होता है। इतना ही नहीं, घर में रहने वाले लोगों का मन इससे शांत रहता है और वे तनावमुक्त रहते हैं। तेजपत्ते को गुरु का कारक माना जाता है, इसे जलाने से बुद्धि और सौभाग्य की भी प्राप्ति होती है।

अतः ऊपर बताए गए उपाय यदि आप भी दिन के अनुसार रोजाना करते हैं, तो आपको भी अपने घर की ऊर्जा बदली हुई नजर आती है।

‘मैं वापस आऊंगा’, कमाई सुनकर Alpha और वेलकम टू द जंगल की भी बढ़ेगी टेंशन

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‘मैं वापस आऊंगा’, कमाई सुनकर Alpha और वेलकम टू द जंगल की भी बढ़ेगी टेंशन
बॉक्स ऑफिस पर इस वक्त बड़ी फिल्मों के बीच तकरार देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां पिछले 8 दिनों से अक्षय की ‘वेलकम टू द जंगल’ (Welcome To The Jungle) बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही है, तो वहीं उसे टक्कर देने के लिए अब आलिया-बॉबी देओल की ‘ऐल्फा’ बॉक्स ऑफिस के मैदान में उतरी है।

भारतीय बॉक्‍स ऑफिस पर शुक्रवार को जहां ‘अल्‍फा’ और ‘बेबी डू डाई डू’ जैसी नई फिल्‍में रिलीज हुई हैं, वहीं अक्षय कुमार की ‘वेलकम टू द जंगल’ ने पहला शानदार हफ्ता भी पूरा कर लिया है। अपने ओपनिंग वीक में इस कॉमेडी फिल्‍म ने वर्ल्‍डवाइड ₹137 करोड़ से अध‍िक की ग्रॉस कमाई की है। दूसरी ओर, इम्‍त‍ियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’ ने अपने तीसरे हफ्ते में ₹17 करोड़ से अध‍िक का कारोबार किया है, जो इसके पहले हफ्ते की ₹12.25 करोड़ की कमाई से अध‍िक है। हां, शाहिद कपूर की ‘कॉकटेल 2’ को दूसरे हफ्ते में झटका लगा है। पहले हफ्ते में ₹70.50 करोड़ कमाने के बाद दूसरे हफ्ते में यह रोमांटिक कॉमेडी ₹18.90 करोड़ की नेट कमाई ही कर सकी है।

‘मैं वापस आऊंगा’ बॉक्‍स ऑफिस कलेक्‍शन: 21वां दिन
बॉक्‍स ऑफिस पर इस वक्‍त जिस एक फिल्‍म ने दर्शकों का दिल जीता है, वह ‘मैं वापस आऊंगा’ है। पहले हफ्ते में इस फिल्‍म ने ₹12.25 करोड़ कमाए थे। दूसरे हफ्ते में कमाई बढ़कर ₹22.55 करोड़ हो गई। जबकि अब तीसरे हफ्ते में ₹17.45 करोड़ का नेट बिजनस किया है। रिलीज के 21वें दिन भी ‘मैं वापस आऊंगा’ ने 1,969 शोज से ₹1.30 करोड़ का नेट कलेक्शन किया है। इससे भारत में फिल्‍म का कुल ग्रॉस कलेक्शन ₹62.24 करोड़ और नेट कलेक्शन ₹52.25 करोड़ हो गया है। विदेशों में तीन हफ्तों में ₹17.50 करोड़ की ग्रॉस कमाई हुई है और इस तरह वर्ल्‍डवाइड ग्रॉस कलेक्शन ₹79.74 करोड़ तक पहुंचा है। दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, वेदांग रैना और शर्वरी स्‍टारर इस फिल्‍म का बजट ₹70 करोड़ है।

पहले में हफ्ते में नेट कलेक्शन – ₹12.25 करोड़
दूसरे हफ्ते में नेट कलेक्शन – ₹22.55 करोड़
तीसरे हफ्ते में नेट कलेक्‍श – ₹17.45 करोड़

‘मैं वापस आऊंगा’ की तीसरे हफ्ते की कमाई:
15वां दिन, शुक्रवार – ₹2.75 करोड़
16वां दिन, शनिवार – ₹4.25 करोड़
17वां दिन, रविवार – ₹4.50 करोड़
18वां दिन, सोमवार – ₹1.50 करोड़
19वां दिन, मंगलवार – ₹1.75 करोड़
20वां दिन, बुधवार – ₹1.40 करोड़
21वां दिन, गुरुवार – ₹1.30 करोड़

5 दिग्गज खिलाड़ी जिन्हें T20I करियर में कभी नहीं मिला प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड

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5 दिग्गज खिलाड़ी जिन्हें T20I करियर में कभी नहीं मिला प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड
टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट ऐसा फॉर्मेट माना जाता है, जहां कुछ गेंदों का शानदार प्रदर्शन भी किसी खिलाड़ी को प्लेयर ऑफ द मैच बना सकता है. इसके बावजूद कई बड़े नाम ऐसे रहे हैं, जिन्होंने लंबे और सफल करियर के बाद भी एक बार भी यह अवॉर्ड अपने नाम नहीं किया है. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 खिलाड़ियों के बारे में.

दिनेश रामदीन (वेस्टइंडीज)
वेस्टइंडीज के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश रामदीन ने 2006 से 2019 के बीच 71 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं. वह इस दौरान टीम के अहम सदस्य रहे हैं और 2012 व 2016 में टी20 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा भी रहे हैं. हालांकि पूरे टी20 इंटरनेशनल करियर में वह एक बार भी प्लेयर ऑफ द मैच नहीं बन पाए हैं.

महेंद्र सिंह धोनी (भारत)
पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 98 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 का टी20 विश्व कप जीता है. इतने सफल करियर के बावजूद धोनी कभी भी टी20 इंटरनेशनल में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड हासिल नहीं कर पाए हैं.

विलियम पोर्टरफील्ड (आयरलैंड)
बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज विलियम पोर्टरफील्ड ने 2008 से 2018 के बीच आयरलैंड के लिए टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट खेला है. उन्होंने 61 मुकाबलों में 1079 रन बनाए हैं और टीम की कप्तानी भी संभाली है. इसके बावजूद उनके नाम एक भी प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड दर्ज नहीं है.

बेन स्टोक्स (इंग्लैंड)
इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने अपने टी20 इंटरनेशनल करियर में 43 मैच खेले हैं. उन्होंने 585 रन बनाने के साथ 26 विकेट भी लिए हैं. हालांकि ऑलराउंड प्रदर्शन के बावजूद वह इस फॉर्मेट में कभी प्लेयर ऑफ द मैच नहीं बन पाए हैं.

असगर अफगान (अफगानिस्तान)
असगर अफगान टी20 इंटरनेशनल इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में गिने जाते हैं. उनकी कप्तानी में अफगानिस्तान ने 52 में से 42 मुकाबले जीते हैं. उन्होंने अपने करियर में 75 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, लेकिन इस दौरान उन्हें एक बार भी प्लेयर ऑफ द मैच का सम्मान नहीं मिला है.

‘मुझे रोकना है तो पहले मारना होगा’-ममता बनर्जी

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‘मुझे रोकना है तो पहले मारना होगा’-ममता बनर्जी
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में जारी सियासी संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्हें रोकना है तो पहले उन्हें मारना होगा। ममता ने बागियों को गद्दार बताते हुए कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न कहीं नहीं जाएगा और वह उनके नेतृत्व वाले गुट के पास ही रहेगा।

ममता ने स्पष्ट किया कि उन्हें बागी गुट की ओर से सलाहकार बनने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन वह किसी भी परिस्थिति में उनके साथ नहीं जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई नेता दबाव में पार्टी छोड़कर गए हैं, लेकिन वह भाजपा या किसी अन्य दबाव के सामने नहीं झुकेंगी और उनकी पार्टी भी ऐसा नहीं करेगी।

तृणमूल भवन पर बागी गुट के कब्जे के मुद्दे पर ममता ने कहा कि कार्यालय किराये पर लिया गया था और उसका लीज समझौता अक्टूबर 2027 तक वैध है। किसी व्यक्ति के पार्टी छोड़ देने से संस्था समाप्त नहीं हो जाती। पार्टी की संपत्ति पर कोई जबरन कब्जा नहीं कर सकता।

उन्होंने बागी विधायकों से सवाल किया कि जिन उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों पर उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में हस्ताक्षर किए, वे चुनाव के दो महीने के भीतर ही गद्दार कैसे बन गए। ममता ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस की विचारधारा भाजपा के खिलाफ है और भाजपा के साथ खड़े होकर पार्टी का दावा नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय और बंगाल इकाई की कमान खुद संभालने की घोषणा की

चंद्रिमा के इस्तीफे के बाद ममता ने राष्ट्रीय और बंगाल इकाई दोनों की जिम्मेदारी खुद संभालने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अब उनके आवास स्थित कार्यालय को ही तृणमूल कांग्रेस का मुख्य कार्यालय बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 जुलाई से

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 जुलाई से

आईआईएम रायपुर में होगा आयोजन: विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न, सुशासन और भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

नीति, नवाचार, नेतृत्व और परिणामोन्मुखी शासन पर विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का आयोजन 4 एवं 5 जुलाई को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), रायपुर में किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आईआईएम रायपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य शासन की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, नवाचार आधारित तथा परिणामोन्मुख बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के विज़न को नई गति देना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बदलते समय की चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप शासन को भी निरंतर सीखना, स्वयं का मूल्यांकन करना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप आयोजित यह चिंतन शिविर मंत्रिमंडल और विभिन्न क्षेत्रों के राष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव-साझाकरण तथा नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

शिविर में प्रदेश के समग्र, संतुलित और समावेशी विकास से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग, निवेश, पर्यटन, खेल, नवाचार, उभरती प्रौद्योगिकी, सुशासन, संस्थागत सुधार, नेतृत्व विकास तथा प्रभावी जनसेवा जैसे विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित होंगे। इन चर्चाओं के आधार पर शासन की प्राथमिकताओं, विभागीय समन्वय और जनहितकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए भावी रणनीति तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि सुशासन केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय की मांग के अनुरूप स्वयं को निरंतर बेहतर बनाते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना भी है। चिंतन शिविर इसी सतत सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी, संवेदनशील और परिणाम आधारित हो तथा जिसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल संसाधनों के बेहतर उपयोग से नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति, नवाचार, प्रभावी नेतृत्व और विभागों के बीच बेहतर समन्वय से संभव होगा। चिंतन शिविर में होने वाला मंथन आने वाले वर्षों की विकास यात्रा को नई दिशा देगा।

राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव
चिंतन शिविर के प्रथम दिवस की शुरुआत आध्यात्मिक गुरु एवं मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास के नेतृत्व एवं जीवन मूल्यों पर व्याख्यान से होगी। इसके बाद अभय करंदीकर उभरती प्रौद्योगिकियों एवं भविष्य की शासन व्यवस्था में उनकी भूमिका पर अपने विचार रखेंगे। डॉ. रमेश चंद कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और भविष्य की कृषि रणनीतियों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

द्वितीय दिवस की शुरुआत योग सत्र से होगी। इसके पश्चात सुमन बिल्ला पर्यटन एवं सेवा क्षेत्र की संभावनाओं, शशांक मणि त्रिपाठी सार्वजनिक नीति एवं विकास, ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग उत्कृष्टता, नेतृत्व और प्रदर्शन की संस्कृति तथा डॉ. विनय सहस्रबुद्धे सुशासन, नेतृत्व और जनकेंद्रित प्रशासन पर अपने विचार साझा करेंगे।

सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को मिलेगा बल
चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य शासन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना, विभागों के बीच अभिसरण एवं समन्वय को मजबूत करना, निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना तथा परिणामोन्मुखी प्रशासनिक संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। साथ ही शासन में प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग, नवाचार आधारित समाधान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को लेकर भी विस्तृत चर्चा होगी।