गजकेसरी और बुध पुष्य योग के महासंयोग में 15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में चार बार नवरात्रि पड़ती है। आषाढ़ मास में पड़ने वाली यह नवरात्रि तंत्र-साधकों और सिद्धियों को प्राप्त करने वाले लोगों के लिए बेहद खास मानी जाती है। इन नौ दिनों में माता के उग्र और सौम्य दोनों रूपों की पूजा होती है, जिसमें प्रमुख रूप से महाकाली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल में चार बार नवरात्रि पड़ती है। आषाढ़ मास में पड़ने वाली यह नवरात्रि तंत्र-साधकों और सिद्धियों को प्राप्त करने वाले लोगों के लिए बेहद खास मानी जाती है। इन नौ दिनों में माता के उग्र और सौम्य दोनों रूपों की पूजा होती है, जिसमें प्रमुख रूप से महाकाली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
गुप्त नवरात्रि पर घटस्थापना शुभ मुहूर्त
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ 14 जुलाई को दोपहर तीन बजकर 14 मिनट होगा, जो 15 जुलाई को दोपहर 11 बजकर 52 मिनिट तक रहेगी। घटस्थापना शुभ मुहूर्त 15 जुलाई को सुबह पांच बजकर 33 मिनिट से 10 बजकर नौ मिनिट तक रहेगा। इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां भगवती का आह्वान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
गुप्त नवरात्रि पर बनेगे शुभ योग
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्र की शुरुआत 15 जुलाई से होने वाली है। इस बार की गुप्त नवरात्रि बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस बार हर्षण और पुष्य योग का संयोग बन रहा है। नवरात्रि के दिन हर्षण योग सुबह आठ बजकर चार मिनिट तक रहेगा, वहीं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले ही दिन पुष्य योग भी बनेगा, जो कि रात नौ बजकर 46 मिनिट तक रहेगा। इस गुप्त नवरात्रि पर गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग के दुर्लभ संयोग बनेंगे।















