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42.52 करोड़ रुपये की लागत से बना सांदीपनि विद्यालय, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया लोकार्पण

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 42.52 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण किया। इस विद्यालय के शुरू होने से विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।

सांदीपनि विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त विद्यालय विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और सर्वांगीण विकास में सहायक बन सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। नए विद्यालय भवन से विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।

प्रदेश में शैक्षणिक अधोसंरचना के विस्तार को विद्यार्थियों के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, विद्यालय के स्थान, उपलब्ध सुविधाओं और लोकार्पण कार्यक्रम से जुड़ी विस्तृत जानकारी मिलने पर समाचार को और अधिक तथ्यात्मक बनाया जा सकता है।

महिला सशक्तिकरण से साकार होगा विकसित छत्तीसगढ़ का सपना, महिलाओं की आत्मनिर्भरता पर CM विष्णु देव साय का जोर

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि महिला सशक्तिकरण के माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ के सपने को साकार किया जा सकता है। महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य के समग्र विकास के लिए आवश्यक है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक गतिविधियों में अधिक अवसर उपलब्ध कराने से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, महिलाएं समाज और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।

राज्य सरकार की महिला कल्याण और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला सशक्तिकरण को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य से जोड़ते हुए महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और समान अवसरों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही समावेशी विकास की परिकल्पना को आगे बढ़ाया जा सकता है।

सहवाग को वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में दिखी अपनी झलक, बोले- पहली गेंद से आक्रमण करने की सोच है खास

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी से काफी प्रभावित हैं। सहवाग का कहना है कि वैभव की सोच काफी हद तक उनकी तरह है। जिस तरह वह अपने करियर में पहली गेंद से ही गेंदबाजों पर हमला करना पसंद करते थे, उसी तरह वैभव भी शुरुआत से आक्रामक बल्लेबाजी करने में विश्वास रखते हैं। सहवाग ने इस युवा बल्लेबाज को भारतीय टीम में अधिक मौके दिए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

‘पहली गेंद से मारने की सोच मेरी जैसी’
दिल्ली में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के वार्षिक सत्र के दौरान सहवाग ने वैभव की बल्लेबाजी और उनके आत्मविश्वास की तारीफ की। उन्होंने कहा कि वैभव की सोच उनसे मिलती-जुलती है और वह पहली ही गेंद से बड़े शॉट खेलने के इरादे से उतरते हैं।

सहवाग के मुताबिक, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैभव को भारतीय टीम में कब और कितने मुकाबले खेलने का अवसर मिलता है। नियमित मौके मिलने से युवा बल्लेबाज को अपनी प्रतिभा साबित करने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अनुभव हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

उम्र नहीं, प्रदर्शन होना चाहिए चयन का आधार
वैभव सूर्यवंशी की कम उम्र को लेकर होने वाली चर्चा पर भी सहवाग ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अंडर-19 जैसे आयु वर्ग के टूर्नामेंट में उम्र के नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी आईपीएल और भारतीय सीनियर टीम तक पहुंच जाता है, तब उसके प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सहवाग ने विराट कोहली और वैभव का उदाहरण देते हुए कहा कि क्रिकेट में अलग-अलग उम्र के खिलाड़ी एक साथ खेलते हैं। ऐसे में खिलाड़ी की उम्र के बजाय मैदान पर उसका प्रदर्शन अधिक मायने रखता है।

कम उम्र में आक्रामक बल्लेबाजी से बनाई पहचान
महज 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय सीनियर टीम में भी जगह मिली। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज की खासियत तेजी से रन बनाना और शुरुआती ओवरों में ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना है।

हालांकि, वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के शुरुआती दो मुकाबलों में वैभव को अंतिम एकादश में मौका नहीं मिला। टीम प्रबंधन ने संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की सलामी जोड़ी पर भरोसा बनाए रखा। ऐसे में वैभव को अगले मैचों में अवसर मिलने का इंतजार है।

सहवाग की सलाह से बढ़ा युवा खिलाड़ी का उत्साह
वीरेंद्र सहवाग अपने पूरे करियर में बेखौफ बल्लेबाजी और तेज शुरुआत के लिए जाने जाते रहे हैं। अब वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी में उन्हें उसी तरह का आक्रामक अंदाज नजर आ रहा है। सहवाग की टिप्पणी से युवा खिलाड़ी की प्रतिभा पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।

CJP की प्रेस वार्ता में केंद्र पर बरसे सौरव दास और आशुतोष रांका, बोले- देश में आपातकाल जैसे हालात

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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में सौरव दास और आशुतोष रांका ने दावा किया कि राजधानी में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाई गईं और आंदोलन से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया। नेताओं ने मौजूदा हालात की तुलना आपातकाल से करते हुए सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

‘देश में आपातकाल जैसे हालात’, सरकार पर लगाए आरोप
CJP नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था, सड़कों पर बैरिकेडिंग और परिवहन सेवाओं पर पाबंदियों के कारण आम लोगों को परेशानी हुई। सौरव दास ने कहा कि देश में ऐसे हालात दिखाई दे रहे हैं, जो आपातकाल की याद दिलाते हैं। नेताओं के मुताबिक, इन कदमों का उद्देश्य उनके युवा आंदोलन को कमजोर करना और प्रदर्शन को नकारात्मक रूप में पेश करना है। ये आरोप CJP नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।

हिरासत और मोबाइल फोन को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल
प्रेस वार्ता में सौरव दास और आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि दिल्ली पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें विमान से ही हिरासत में ले लिया। दास के मुताबिक, हिरासत के दौरान उनके मोबाइल फोन ले लिए गए और उन्हें वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फोन जब्त करने से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

CJP नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए इसकी जांच की मांग की। इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस का पक्ष और स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा संगठन
CJP का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने की मांग है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

CJP नेताओं ने केंद्र सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आरोपों और SIR के प्रभाव का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर किया जाना चाहिए।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान
CJP नेताओं ने कहा कि हिरासत और पुलिस कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन ने युवाओं और नागरिक समूहों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य चुनाव आयोग की जवाबदेही और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।

रांची IIIT में छात्र की संदिग्ध मौत पर बवाल, निदेशक और डीन के इस्तीफे की मांग; अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे विद्यार्थी

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झारखंड की राजधानी रांची स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है। हॉस्टल में छात्र का शव मिलने के बाद विद्यार्थियों में आक्रोश फैल गया। छात्रों ने संस्थान के निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। विद्यार्थियों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं में कथित लापरवाही की जांच कराने की मांग भी उठाई है।

हॉस्टल के कमरे में मिला छात्र का शव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के पूर्णिया निवासी आदित्य कुमार IIIT रांची में प्रथम वर्ष के छात्र थे। शनिवार रात हॉस्टल के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिलने के बाद विद्यार्थियों ने दरवाजा खोला, जहां आदित्य का शव मिला। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।

आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद छात्रों ने संस्थान की आपातकालीन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों का आरोप है कि छात्र को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। छात्रों के अनुसार, उसे कमरे से बाहर निकालने के बाद सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन एंबुलेंस की उपलब्धता और जरूरी सुविधाओं को लेकर समस्याएं सामने आईं।

छात्रों ने दावा किया कि एंबुलेंस की चाबी मिलने में करीब 15 से 20 मिनट की देरी हुई और वाहन में ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संस्थान में आपातकालीन सेवाओं की स्थिति और घटना के दौरान हुई गतिविधियों की जांच की मांग तेज हो गई है।

निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग
छात्रों का कहना है कि संस्थान प्रबंधन को हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे के साथ कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

विद्यार्थियों ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं, एंबुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग भी की है। विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर हॉस्टल परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है।

पुलिस जांच जारी, परीक्षा के दबाव की आशंका
पुलिस के मुताबिक, छात्र की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में परीक्षा के दबाव की आशंका जताई गई है, क्योंकि संस्थान में परीक्षाएं 8 अक्टूबर से शुरू हुई थीं। हालांकि, मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी संज्ञान लेने की जानकारी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में कथित तौर पर चिकित्सा सहायता मिलने में देरी, प्रशासनिक लापरवाही और छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी।

नेपाल में फिर तबाही! बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़ से 6 पुल और दर्जनों घर बहे, 10 लोग लापता

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नेपाल में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई। गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कई मकान और पुल बह गए। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 10 लोग लापता हैं। बाढ़ के बाद नदी किनारे बसे गांवों में अफरा-तफरी मच गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई।

भूस्खलन के कारण आई अचानक बाढ़
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गोरखा जिले के चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका क्षेत्र में भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह बाधित हुआ था। आशंका है कि मलबे से बना अस्थायी अवरोध टूटने के बाद पानी तेजी से नीचे की ओर बहा, जिससे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। हालांकि, बाढ़ के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

छह पुल और करीब 35 मकान बाढ़ में बहे
नेपाल के स्थानीय समाचार पोर्टल ऑनलाइनखबर और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाढ़ के तेज बहाव में छह पुल बह गए। इनमें दो मोटर वाहन पुल और चार झूला पुल शामिल हैं। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के पैन्यू और बगर क्षेत्रों में करीब 35 मकानों के बहने की खबर है। जगत, सल्लेरी, दोभान और घट्टेखोला सहित कई बस्तियों में भी नुकसान हुआ है।

10 लोग लापता, राहत-बचाव अभियान जारी
बाढ़ के बाद कम से कम 10 लोगों के लापता होने की सूचना है। नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सेना ने 49 लोगों को सुरक्षित निकाला है, जिनमें एक विदेशी नागरिक भी शामिल है। अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

कई जिलों में अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
बूढ़ी गंडकी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की है। गोरखा के अलावा धादिंग, तनहूं, चितवन तथा पूर्वी और पश्चिमी नवलपरासी के नदी किनारे बसे इलाकों में भी चेतावनी जारी की गई। अधिकारियों ने लोगों से नदी के पास जाने से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है।

पहले भी नेपाल में आई थी विनाशकारी बाढ़
नेपाल अभी अगस्त 2026 में आई विनाशकारी बाढ़ के प्रभावों से उबरने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में बूढ़ी गंडकी नदी में आई ताजा बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन करने, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने में जुटा है।

PM मोदी ने तमिलनाडु CM विजय को दिया बड़ा ऑफर! विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र के सहयोग का भरोसा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति और विकास योजनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में प्रधानमंत्री मोदी ने तमिलनाडु को 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

मुख्यमंत्री विजय ने रखीं राज्य की प्रमुख मांगें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री के सामने चेन्नई मेट्रो के तीसरे चरण को मंजूरी देने, कोयंबटूर और मदुरै की प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाओं पर दोबारा विचार करने और समग्र शिक्षा योजना के तहत लंबित धनराशि जारी करने की मांग रखी। राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से सार्वजनिक परिवहन और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मोदी ने दिया विकास में सहयोग का भरोसा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तमिलनाडु में सरकार बदलने के बावजूद राज्य के विकास के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता में बदलाव नहीं होगा। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर जोर दिया।

13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात
प्रधानमंत्री ने चेन्नई मेट्रो रेल परियोजना के दूसरे चरण में पूनमल्ली से वडापलानी तक करीब 15 किलोमीटर लंबे हिस्से का उद्घाटन किया। इस खंड के निर्माण पर लगभग 4,900 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे, बंदरगाह और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं भी कार्यक्रम का हिस्सा रहीं।

तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री विजय ने राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2036 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त और समावेशी शासन के जरिए विकास को गति देने की बात कही। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को तमिलनाडु की आगामी विकास योजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है ‘बड़े ऑफर’ की वास्तविकता?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री की ओर से मुख्यमंत्री विजय को किसी विशेष राजनीतिक पद, गठबंधन या अलग आर्थिक पैकेज का औपचारिक ऑफर दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। खबरों में मुख्य रूप से तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र के सहयोग और मुख्यमंत्री की ओर से रखी गई मांगों का उल्लेख है।

‘दृश्यम 3’ ने ‘मिर्जापुर’ को पछाड़ा, 2026 की चौथी सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्म बनी

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बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की क्राइम-थ्रिलर फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। रिलीज के महज नौ दिनों में फिल्म ने कमाई के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने ‘मिर्जापुर द मूवी’ को पीछे छोड़ते हुए साल 2026 की चौथी सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में जगह बना ली है।

नौ दिनों में 286 करोड़ रुपये के करीब पहुंची कमाई
बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक, ‘दृश्यम 3’ ने शुरुआती सात दिनों में भारतीय बाजार में लगभग 245.50 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके बाद आठवें दिन फिल्म ने करीब 14.50 करोड़ रुपये और नौवें दिन लगभग 26.50 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह फिल्म का कुल घरेलू नेट कलेक्शन लगभग 286.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। ये आंकड़े शुरुआती बॉक्स ऑफिस अनुमानों पर आधारित हैं और इनमें बदलाव संभव है।

110 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ने कमाया अच्छा मुनाफा
रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का बजट करीब 110 करोड़ रुपये बताया गया है। नौ दिनों के कारोबार के आधार पर फिल्म का प्रदर्शन मजबूत रहा है। एबीपी लाइव की रिपोर्ट में कोइमोई के आंकड़ों का हवाला देते हुए फिल्म का मुनाफा लगभग 159.55 प्रतिशत बताया गया है। इसी आधार पर इसे 2026 की चौथी सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्म बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग ट्रेड पोर्टल मुनाफे की गणना में अलग मानक अपना सकते हैं।

अजय देवगन के विजय सलगांवकर ने फिर जीता दर्शकों का दिल
‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी में अजय देवगन विजय सलगांवकर की भूमिका निभा रहे हैं। सस्पेंस, रहस्य और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर इस कहानी ने पहले भी दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल की है। तीसरे भाग को लेकर बनी उत्सुकता का असर फिल्म की कमाई में भी दिखाई दे रहा है।

फिल्म ने अपने पहले सप्ताह में ही ‘दृश्यम 2’ के घरेलू बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया था। अब इसकी नजर आगे के कारोबार और नए रिकॉर्ड पर है।

बॉक्स ऑफिस पर आगे भी कायम रह सकता है फिल्म का दबदबा
‘दृश्यम 3’ की शुरुआती सफलता ने इसे साल की चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया है। आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई किस स्तर तक पहुंचती है, यह दर्शकों की प्रतिक्रिया और सिनेमाघरों में इसकी पकड़ पर निर्भर करेगा। फिलहाल, अजय देवगन की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा दी है।

कामजोंग और उखरुल जिलों में बढ़ा तनाव, प्रशासन ने लागू किए प्रतिबंध

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मणिपुर के कामजोंग और उखरुल जिलों में नागा और कुकी समुदायों से जुड़े सशस्त्र समूहों के बीच हुई हिंसक घटनाओं में कम से कम पांच लोगों की मौत की खबर है। चसाद गांव और आसपास के इलाकों में आगजनी की घटनाओं में 10 घरों और 20 दुकानों को जला दिया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, चसाद गांव में एक महिला की गोली लगने से मौत के बाद तनाव बढ़ा। इसके बाद हुई गोलीबारी में अन्य लोगों की भी जान गई। अलग-अलग घटनाओं में कामजोंग और उखरुल जिलों में मौतें दर्ज की गई हैं। हमलों में शामिल लोगों की पहचान और घटनाओं के कारणों की जांच की जा रही है।

प्रशासन ने लागू की निषेधाज्ञा
स्थिति को नियंत्रित करने और हिंसा को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कामजोंग जिला प्रशासन ने चसाद पुलिस गेट जंक्शन के आसपास प्रतिबंध लागू किए हैं। आदेश के तहत निर्धारित क्षेत्र में लोगों के जमावड़े और हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई है। वहीं, हिंसा के विरोध में कांगपोकपी जिले में 24 घंटे के बंद का आह्वान भी किया गया है।

शांति बहाली प्रशासन के सामने चुनौती
लगातार सामने आ रही गोलीबारी और आगजनी की घटनाओं से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने की चुनौती है। फिलहाल, प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और घटनाओं की जांच जारी है।

बीज से बाजार तक किसानों को मिल रही हर सुविधा, CM योगी बोले- डबल इंजन सरकार में किसान कर्ज के जाल से हुए मुक्त

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि डबल इंजन सरकार किसानों को बीज से लेकर बाजार तक आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों और किसान कल्याण की योजनाओं से प्रदेश की खेती-किसानी को नई दिशा मिली है। मुख्यमंत्री ने कृषि विकास दर में वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

सीएम योगी के मुताबिक, वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर लगभग 8 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों और सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। सरकार का जोर किसानों को बेहतर बीज, खाद, सिंचाई, कृषि तकनीक और फसल के उचित बाजार की सुविधा उपलब्ध कराने पर है, ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता दी जा रही है। कृषि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, सिंचाई व्यवस्था में सुधार और कृषि उत्पादों के विपणन को बेहतर बनाने जैसे प्रयासों से किसानों को लाभ पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार की प्राथमिकता खेती को लाभकारी बनाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को कर्ज के दबाव से बाहर निकालना है। मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना भी सरकार के एजेंडे में शामिल है।

बीज से बाजार तक सुविधाओं पर जोर
उत्तर प्रदेश में कृषि विकास को गति देने के लिए उत्पादन से लेकर उपज के विपणन तक सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर संसाधन और बाजार तक पहुंच मिले, जिससे उनकी आय में सुधार हो और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।