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Yami Gautam गंभीर और लाइलाज बीमारी की हुईं शिकार

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सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि वह किशोरावस्था से ही इस रोग से पीड़ित हो गई थी. इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है. एक्ट्रेस Yami Gautam ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए अपनी त्वचा को दिखाया और कई तस्वीरें शेयर किया है.

वहीं, सोशल मीडिया पर कुछ फोटो शेयर करते हुए Yami Gautam ने लिखा – ‘नमस्कार दोस्तों, मैंने हाल ही में कुछ फोटो के लिए शूटिंग की है. जब वे केराटोसिस-पिलारिस नामक मेरी त्वचा की स्थिति को छिपाने के लिए पोस्ट-प्रोडक्शन (एक सामान्य प्रक्रिया) के लिए जाने वाली थीं, तो मैंने सोचा, कि मैं इस तथ्य को स्वीकार क्यों नहीं कर लेती. इसके साथ मैं सहज हूं.’

केराटोसिस पिलारिस एक ऐसी स्थिति है जो त्वचा पर खुरदुरे पैच और छोटे, मुंहासे जैसे धक्के बनाती है. यामी ने कहा, ‘मैंने आपके साथ अपनी सच्चाई साझा करने का साहस दिखाया है. मुझे अपने फॉलिकुलिटिस को एयरब्रश करने या अंडर-आई को चिकना करने या कमर को थोड़ा और आकार देने का मन नहीं था. मैं जैसी दिख रही थी वह बेहतर और सुंदर थी.’

उज्‍जैन में देवी हरसिद्धि श्रीयंत्र पर विराजित हैं , इसलिये हैं प्रसिद्ध

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उज्जैन। शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है यहां माता सती की सीधे हाथ की कोहनी गिरी थी। मंदिर में देवी की मूर्ति श्रीयंत्र पर विराजित है। इस मंदिर में देवी की साधना करने से साधकों को शीघ्रता से हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। इसलिए इस शक्तिपीठ का नाम हरसिद्धि है।

जन्माष्टमी की धूम: कश्मीर से केरल तक

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The birth of Lord Krishnaदेशभर में सोमवार को जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई. भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की धूम कश्मीर से केरल तक देखने को मिली. कोरोना काल में कान्हा की नगरी मथुरा में अलग ही नजारा देखने को मिला. नंदलला के दर्शन के लिए देशभर के तमाम मंदिरों में लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली.

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि की आधी रात को मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था. श्रीकृष्ण के जन्म की इसी शुभ घड़ी का उत्सव पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया. श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर जंहा मथुरा और वृन्दावन में धूमधाम से जन्माष्टमी मनाई जाती है. वहीं, कृष्ण का ससुराल भी इस दिन पीछे नहीं रहता है. कुदरकोट में भी यह पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. अपने प्रिय दामाद का जन्मदिन मनाने की वजह से इस जगह को खास पहचान मिली हुई है.

कोरोना के साये में सोमवार को देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी सादगीपूर्ण तरीके से मनाई गई। मंदिरों में जय कन्हैया लाल की की गूंज के बीच लोग नाचते-गाते दिखे। राजस्थान की धार्मिक नगरी अजमेर और मंदिरों की नगरी पुष्कर में सुबह से ही श्रद्धा, भक्ति, उल्लास एवं उत्साहपूर्वक परंपरागत तरीके से जन्माष्टमी मनाई गई। कोविड-19 की वजह से अधिकतर राज्यों में मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी रही।

श्रीनगर में दो साल बाद जन्माष्टमी का जुलूस निकाला गया

श्रीनगर में दो साल बाद कड़ी सुरक्षा के बीच कश्मीरी पंडितों ने जन्माष्टमी पर जुलूस निकाला। अधिकारियों ने बताया कि जुलूस शहर के हब्बा कदल इलाके के गणपतियार मंदिर से शुरू हुआ और ऐतिहासिक लाल चौक स्थित घंटाघर तक पहुंचा। पुरुषों, महिलाओं और बच्चों सहित भक्तों ने रथ के साथ नृत्य किया और लोगों के बीच मिठाई बांटी। उन्होंने कहा कि जुलूस अमीरकदल पुल को पार कर जहांगीर चौक से गुजरा और मंदिर लौट आया। श्रद्धालुओं में से एक वरिष्ठ नागरिक ने कहा कि दो साल बाद उन्हें श्रीनगर में जन्माष्टमी का जुलूस निकालने की अनुमति मिली। कोविड-19 के कारण 2020 में कोई जुलूस नहीं निकाला गया था, जबकि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन के कारण इस आयोजन को रद्द कर दिया गया था।

मध्यप्रदेश और केरल में उत्सव

मध्यप्रदेश में भोपाल सहित राज्यभर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेशवासियों को जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दीं। केरल के प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचे। हालांकि, कोरोना पर पाबंदी की वजह से इस बार पहले की तरह रौनक नहीं है। कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे।