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तीज हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति का पावन पर्व, मातृशक्ति की आस्था और परिवार की खुशहाली की कामना का प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीज पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर मातृशक्ति को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जुड़ा पावन पर्व है। इस पर्व में मातृशक्ति के प्रेम, आस्था, त्याग और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का भाव समाहित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। महिलाएं इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखकर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और पर्व-त्योहारों में यहां की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दिखाई देती है। तीज जैसे पर्व समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकजुटता की भावना को मजबूत करते हैं। इन पर्वों के माध्यम से हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं जीवंत बनी रहती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से तीज पर्व को श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए तथा प्रदेश में खुशहाली और सामाजिक सौहार्द की भावना और मजबूत हो।

तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और कृषि परंपरा के प्रतीक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और कृषि परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने के साथ समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकजुटता की भावना को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा पर्व मातृशक्ति की आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह से मनाती हैं। वहीं पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। किसान और ग्रामीण समाज इस अवसर पर कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले पशुधन और कृषि उपकरणों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में प्रकृति, कृषि और पारिवारिक जीवन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। तीजा-पोरा तिहार इसी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम है। ऐसे पर्व हमारी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी परंपराओं को संरक्षित रखने की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से तीजा-पोरा तिहार को पारंपरिक उल्लास और सद्भाव के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए तथा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और सामाजिक सौहार्द को और मजबूती प्रदान करे।

मायावती का Gen-Z आंदोलन पर बड़ा बयान, बोलीं- राजनीतिक दलों ने किया ‘हाइजैक’; कार्यकर्ताओं को दी ये नसीहत

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बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने Gen-Z युवाओं और बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर चल रहे आंदोलनों के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब स्वतंत्र कम और राजनीतिक ज्यादा दिखाई दे रहा है।

मायावती ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल ऐसे आंदोलनों को अपने प्रभाव में ले रहे हैं। उनका कहना है कि इससे युवाओं और छात्रों के मन में आंदोलन को लेकर गंभीर शंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को दिखाए गए बड़े सपनों के बाद अब आंदोलन के राजनीतिक स्वरूप को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

‘युवाओं की जायज मांगों के साथ BSP’
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी Gen-Z और Gen-Alpha सहित युवाओं की जायज मांगों और समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर है। उन्होंने कहा कि पार्टी आगे भी युवाओं की समस्याओं के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयास करती रहेगी।

BSP कार्यकर्ताओं को आंदोलन से दूर रहने की सलाह
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से धरना, प्रदर्शन और आंदोलनों में शामिल नहीं होने की अपील की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपनी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक ऊर्जा को आगामी चुनावों के लिए बचाकर रखने को कहा। मायावती ने कहा कि BSP का लक्ष्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर सरकार बनाकर युवाओं समेत समाज के सभी वर्गों की समस्याओं का स्थायी समाधान करना है।

मायावती के इस बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी चुनावी राजनीति में युवाओं की भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Gen-Z के मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज होती दिखाई दे रही है।

SIP: सिर्फ ₹3,000 महीने के निवेश से बन सकता है ₹2 करोड़ का रिटायरमेंट फंड, जानिए कितने साल लगेंगे

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अगर आप रिटायरमेंट के लिए बड़ी रकम जुटाना चाहते हैं, तो SIP यानी Systematic Investment Plan एक लंबी अवधि का विकल्प हो सकता है। खास बात यह है कि छोटी रकम से शुरुआत करके भी कंपाउंडिंग की मदद से बड़ा कॉर्पस तैयार किया जा सकता है। SIP कैलकुलेटर भी निवेश की अवधि, अनुमानित रिटर्न और मासिक निवेश के आधार पर संभावित भविष्य की वैल्यू का अनुमान लगाते हैं।

₹3,000 की SIP से ₹2 करोड़ कब?
मान लीजिए कोई निवेशक हर महीने ₹3,000 की SIP करता है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलने की धारणा रखता है। इस अनुमान के आधार पर ₹2 करोड़ का लक्ष्य करीब 36-37 साल में हासिल हो सकता है। यानी लंबे समय तक नियमित निवेश और कंपाउंडिंग इस लक्ष्य को संभव बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

करीब 36.7 साल में कुल निवेश लगभग ₹13.2 लाख होगा, जबकि बाकी रकम अनुमानित रिटर्न और कंपाउंडिंग से बनेगी। हालांकि, यह केवल गणितीय अनुमान है—म्यूचुअल फंड के रिटर्न बाजार से जुड़े होते हैं और 12% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

कंपाउंडिंग का दिखेगा बड़ा असर
SIP में हर महीने निवेश की गई रकम अलग-अलग समय के लिए निवेशित रहती है। समय बढ़ने के साथ निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगता है, जिससे कंपाउंडिंग का प्रभाव बढ़ता जाता है। यही वजह है कि रिटायरमेंट जैसे लंबे लक्ष्य के लिए जल्दी शुरुआत और नियमित निवेश महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

क्या ₹3,000 SIP पर्याप्त है?
यह व्यक्ति की उम्र, रिटायरमेंट की उम्र, महंगाई और भविष्य की जरूरतों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, आज के ₹2 करोड़ की खरीद क्षमता कई दशकों बाद महंगाई के कारण काफी कम हो सकती है। इसलिए समय के साथ SIP की रकम बढ़ाना यानी Step-up SIP अपनाना रिटायरमेंट प्लान को मजबूत कर सकता है।

नोट: ऊपर की गणना 12% अनुमानित वार्षिक रिटर्न पर आधारित है। वास्तविक रिटर्न इससे कम या ज्यादा हो सकता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।

यूपी में पढ़ाई के साथ रोजगार की तैयारी, योगी सरकार के ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ से हुनरमंद बनेंगे हजारों छात्र

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उत्तर प्रदेश में स्कूली शिक्षा को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ को आगे बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत 36,103 विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ ऐसे व्यावहारिक हुनर से जोड़ना है, जो आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार और बेहतर करियर के अवसरों में मददगार साबित हों।

इन क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण
प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत विद्यार्थियों को उनकी रुचि और उपलब्ध प्रशिक्षण के अनुसार आईटी-आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, कृषि और मैनेजमेंट जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का जोर विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर रहेगा।

एक बैच में अधिकतम 35 छात्र
प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक बैच में अधिकतम 35 विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण की अवधि जरूरत के अनुसार 300 घंटे तक होगी, ताकि नियमित स्कूली पढ़ाई प्रभावित किए बिना विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जा सके। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और मूल्यांकन संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाएगा।

स्कूल स्तर पर ही करियर की तैयारी
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अनुसार, प्रोजेक्ट प्रवीण का मूल उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें भविष्य की नौकरी एवं उद्यमिता के लिए तैयार करना है। आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक योजना में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को नियमित शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गई है।

AI से लेकर आधुनिक कौशल तक फोकस
प्रोजेक्ट प्रवीण को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भी शामिल किया गया है। 2026 में ‘AI for All’ पाठ्यक्रम के तहत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक से परिचित कराया गया है। इससे छात्रों में डिजिटल और तकनीकी कौशल विकसित करने पर सरकार का फोकस साफ दिखाई देता है।

सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थी शिक्षा से कौशल और कौशल से रोजगार की दिशा में आगे बढ़ें। स्कूल स्तर पर ही व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य के करियर विकल्पों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान का शतक, वैभव-तिलक की नोकझोंक ने बढ़ाया रोमांच; सिराज रहे बेअसर

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चेन्नई में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल के पहले दिन क्रिकेट का रोमांच अपने चरम पर रहा। ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने शानदार शतक जड़कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, वहीं युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा के बीच मैदान पर हुई तीखी बहस ने भी खूब सुर्खियां बटोरीं। दूसरी ओर, तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज विकेट के लिए संघर्ष करते नजर आए।

ईशान किशन का शानदार शतक
ईस्ट जोन की पारी में कप्तान ईशान किशन ने जिम्मेदारी संभालते हुए बेहतरीन बल्लेबाजी की। उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में अपना 10वां शतक पूरा किया और टीम को बड़े स्कोर की ओर पहुंचाया। पहले दिन का खेल खत्म होने तक ईस्ट जोन ने 385/4 का मजबूत स्कोर खड़ा कर लिया था।

वैभव ने सिराज पर बरसाए चौके-छक्के
युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने मोहम्मद सिराज के ओवर में चौके-छक्के लगाकर दबाव बनाया और 44 रन की तेज पारी खेली। हालांकि वह अपना अर्धशतक पूरा करने से महज 6 रन दूर रह गए।

तिलक-वैभव की मैदान पर बहस
वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी के दौरान साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने उन्हें स्लेज करने की कोशिश की। 11वें ओवर के आसपास दोनों के बीच बातचीत देखते ही देखते तीखी बहस में बदल गई। स्थिति बढ़ने पर अंपायरों को बीच-बचाव करना पड़ा। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

सिराज नहीं दिला सके सफलता
साउथ जोन को मोहम्मद सिराज से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन पहले दिन वह प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने 14 ओवर में 96 रन खर्च किए और कोई विकेट नहीं लिया। ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ खुलकर रन बनाए।

पहले दिन के प्रदर्शन ने फाइनल को बेहद रोमांचक बना दिया है। ईशान किशन का शतक, वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी और तिलक-वैभव की गर्मागर्म बहस के बाद अब दूसरे दिन साउथ जोन के गेंदबाजों पर वापसी का दबाव होगा।

अजा एकादशी पर अश्वमेध यज्ञ के समान मिलता है पुण्य! जानें पूजा विधि और इस दिन भूलकर भी न करें ये काम

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भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा। सनातन परंपरा में यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और व्रत के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गौदान के समान पुण्य प्राप्त हो सकता है।

अजा एकादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन स्नान, ध्यान, दान, भगवान विष्णु का स्मरण और कथा श्रवण को पुण्यकारी माना जाता है।

अजा एकादशी की पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल की साफ-सफाई कर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान विष्णु को पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल अर्पित करें।
धूप और घी का दीपक जलाकर फल व सात्विक नैवेद्य अर्पित करें।
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर सकते हैं।
अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

इस दिन क्या न करें?
अजा एकादशी के दिन सात्विकता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रती को चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। मन, वाणी और कर्म को संयमित रखते हुए क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है।

कब होगा व्रत का पारण?
अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर को रखा जाएगा और इसका पारण अगले दिन यानी 8 सितंबर 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार पारण का समय सुबह 7:17 बजे से 9:53 बजे तक बताया गया है।

कोंडागांव में नक्सली साजिश नाकाम, जंगल से पिस्टल और 30 किलो विस्फोटक बरामद

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छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ी सफलता हासिल की है। मर्दापाल थाना क्षेत्र के पुसपाल-मोखामारी के जंगल-पहाड़ी इलाके में सर्चिंग के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया डंप बरामद किया। बरामद सामग्री में 9 एमएम पिस्टल, करीब 30 किलो विस्फोटक और अन्य नक्सली सामान शामिल है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों की निशानदेही पर कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, कोंडागांव नक्सल सेल, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और बीडीएस की संयुक्त टीम ने आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली जानकारी के आधार पर इलाके में सर्चिंग अभियान चलाया। टीम ने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र की घेराबंदी कर व्यवस्थित तरीके से तलाशी ली, जिसके दौरान नक्सल डंप का पता चला।

करीब 10 किलो की टिफिन IED भी मिली
सुरक्षा बलों को बरामद सामग्री में करीब 10 किलोग्राम वजन की टिफिन IED भी मिली। बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए इसे मौके पर ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। इसके अलावा डंप से हथियार और संचार से जुड़ी सामग्री भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है।

लगातार जारी है सर्चिंग अभियान
सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई से नक्सलियों की संभावित गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों के मुताबिक, जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री की तलाश के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सुरक्षा बलों की सतर्कता से समय रहते विस्फोटक सामग्री बरामद होने से किसी संभावित नक्सली वारदात को टालने में मदद मिली है।

31वें दिन ‘हनुमान अंश’ ने मचाया धमाल, ‘मिर्जापुर द मूवी’ को दी टक्कर; 100 करोड़ के पार पहुंची कमाई

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सिनेमाघरों में रिलीज के 31वें दिन भी ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा कायम है। कम बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी कमाई से बड़े-बड़े सितारों की फिल्मों को हैरान कर दिया है। रविवार को फिल्म ने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया, जो इसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

‘मिर्जापुर द मूवी’ की रिलीज का भी नहीं पड़ा असर
‘हनुमान अंश’ की कमाई ऐसे समय में जारी है, जब सिनेमाघरों में ‘मिर्जापुर द मूवी’ जैसी बहुप्रतीक्षित फिल्म रिलीज हो चुकी है। इसके बावजूद ‘हनुमान अंश’ दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सफल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सिंगल-स्क्रीन सिनेमाघरों में ‘मिर्जापुर द मूवी’ के साथ शो शेयरिंग को लेकर भी स्थिति बनी हुई है।

शुरुआत बेहद धीमी, फिर आया बॉक्स ऑफिस चमत्कार
‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को रिलीज हुई थी और शुरुआती दौर में इसकी कमाई बेहद कम रही। पहले सप्ताह में फिल्म ने करीब 1.08 करोड़ रुपये कमाए थे, जबकि दूसरे सप्ताह में इसकी कमाई लगभग 40 लाख रुपये रही। लेकिन तीसरे सप्ताह से फिल्म की कमाई ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। चौथे सप्ताह में फिल्म ने करीब 61 करोड़ रुपये का कारोबार किया और अब पांचवें सप्ताह में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।

कम बजट की फिल्म ने बड़े नामों को दी चुनौती
विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी ‘हनुमान अंश’ का बजट करीब 2 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित है। शुरुआती दिनों में कम स्क्रीन मिलने के बावजूद पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म की किस्मत बदल दी और यह बॉक्स ऑफिस की सरप्राइज हिट बन गई।

सागर में कथित जहरीली शराब से 9 लोगों की मौत, कई की हालत बिगड़ी; प्रशासन ने शुरू की जांच

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मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली या अवैध शराब के सेवन से 9 लोगों की मौत का मामला सामने आया है। घटना जिले के बंडा क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां शनिवार रात अलग-अलग गांवों के कुछ लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद रविवार सुबह कई लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।

जानकारी के मुताबिक, घूघर, नौराज, बराज समेत आसपास के गांवों में शराब पीने के बाद लोगों को उल्टी-दस्त और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने लगीं। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। कई मरीजों को बेहतर इलाज के लिए सागर रेफर किया गया है।

घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। प्रभावित गांवों में घर-घर स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग शुरू की गई है, ताकि शराब सेवन के बाद बीमार हुए अन्य लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस और आबकारी विभाग भी मामले की जांच में जुटे हैं।

फिलहाल मौतों की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी। हालांकि शुरुआती जांच में जहरीली या अवैध शराब की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि शराब कहां से आई और इसके सेवन से इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे प्रभावित हुए।

घटना के बाद इलाके में हड़कंप और ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने लोगों से संदिग्ध शराब का सेवन न करने और तबीयत खराब होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।