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राष्ट्रपति पुतिन से पीएम मोदी ने एक बार फिर बात की, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का उठाया मुद्दा

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यूक्रेन में रुस के तेज होते हमलों के बीच आज प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की। ये बातचीत यूक्रेन से भारतीयों को सुरक्षित निकालने को लेकर हुई है।दरअसल यूक्रेन के बड़े शहरों पर रूस का हमला तेज हो चुका है और आम नागरिक ठिकानों को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे में भारत सरकार इन शहरों में फंसे भारतीय नागरिकों को एक सेफ पैसेज दिलवाने की कोशिश कर रही है। इस बैठक के बाद पीएम मोदी भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर एक बार फिर उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं।

भारतीयों को खारकीव खाली करने का निर्देश

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के लिए दिन-ब-दिन खतरा बढ़ता जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने वहां फंसे भारतीय छात्रों के लिए ताजा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें छात्रों से कहा गया है कि खारकीव से जितनी जल्दी हो सके, निकल जाएं। उन्हें किसी भी सूरत में शाम 6 बजे तक (यूक्रेन के समयानुसार) Pisochyn, Bezlyudovka & Babaye के सेट्लमेंट में पहुंचने को कहा गया है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये एडवाइजरी रुस से मिली जानकारी के आधार पर जारी की गई है। यानी रुस जल्द ही खारकीव में अंतिम और बड़ा हमला करने वाला है।

परमाणु हमले का खतरा

उधर, रूस ने एक बार फिर परमाणु युद्ध की चेतावनी दी है। रूस के विदेश मंत्री ने कहा है कि तीसरा विश्व युद्ध महाविनाशकारी होगा. उन्होंने कहा कि तीसरा विश्व युद्ध परमाणु हमले वाला होगा। रूस ने कहा है कि वह यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल का इंतजार करेगा।उधर रूस ने यूक्रेन के कई शहरों पर रॉकेट और मिसाइलों से हमला किया। आज रूसी सेना ने खारकीव मिलिट्री अकादमी को निशाना बनाया। ताजा जानकारी के मुताबिक खारकीव में हुए रुसी हमलों में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 9 घायल हो गये हैं। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि जंग के पिछले छह दिनों में यूक्रेनी सेना ने रूस के 6 हजार जवानों को मार गिराया है।

भारतीयों को निकालने का अभियान जारी

भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का प्रयास जारी है। ऑपरेशन गंगा के तहत नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट पहुंचे हुए हैं और छात्रों की सुरक्षित वापसी की निगरानी कर रहे हैं। आज बुखारेस्ट में हेनरी कोंडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उन्होंने भारतीय छात्रों के साथ बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी छात्रों को निकाला जा रहा है और भारत वापस लाया जाएगा।

तिरंगे ने बचाई जान

यूक्रेन से रोमानिया के बुखारेस्ट शहर आए कई भारतीय छात्रों ने बताया कि चेकपॉइंट्स से सुरक्षित निकलने में तिरंगे ने उनकी काफी मदद की। जिन गाड़ियों पर तिरंगा लगा था, उन्हें बिल्कुल भी रोका नहीं जा रहा है। यहां तक कि कुछ पाकिस्तानी और तुर्की के छात्रों ने तिरंगे की मदद ली। आपको बता दें ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय छात्रों को यूक्रेन से बाहर निकाला जा रहा है। इन छात्रों के लिए यूक्रेन के पड़ोसी देश रोमानिया, स्लोविया और पोलैंड से विशेष फ्लाइट्स उड़ाई जा रही हैं। इस काम में एयर इंडिया, स्पाइसजेट और इंडिगो के विमान भी लगे हुए हैं। इनका सारा खर्च भारत सरकार उठा रही है।

मध्य प्रदेश में इसलिये आबाद हैं बाघ, पेंगोलिन और कछुए

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भोपाल। मध्य प्रदेश यूं ही नहीं बाघ व तेंदुए की सर्वाधिक आबादी वाला प्रदेश बना है। यह परिणाम अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले श‍िकारी व तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने से प्राप्त हुआ है। जिसके लिए बीते 11 वर्षों से स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार मेहनत कर रही है। चीन, नेपाल, ताइवान व म्यांमार समेत नौ देश और 14 राज्यों में श‍िकारियों के नेटवर्क में अब तक 1093 आरोपितों की पहचान कर अपराध दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें 75 प्रतिशत गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं। गिरफ्तार तस्करों में ताइवान, म्यांमार के दो नागरिक भी शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में 2018 की गणना में 526 बाघ थे। 2022 के प्रचलित आकलन के अनुसार यह संख्या 700 तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य मेंं 2014 में 1517 तेंदुए थे, जिनकी संख्या अब 3421 है। दरअसल प्रदेश में 2006 में 300 बाघ थे, जो देश में सर्वाधिक थे।

भरपूर जंगल क्षेत्र होने के कारण तेंदुए, पेंगोलिन और जलीय तंत्र ठीक होने के कारण कछुओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। जिन पर तस्करों की नजर पड़ी। तभी से तस्करों ने स्थानीय लोगों को मोहरा बनाया। रुपयों का लालच दिया और बाघ, तेंदुए, पेंगोलिन, कछुए समेत अन्य वन्यप्राणियों का शिकार कराया।

मामूली दामों पर इनके अंग मप्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मिजोरम, सिक्किम, उत्तरप्रदेश, राजस्थान व ओडिशा के तस्करों ने खरीदे। यहां से बाघ के अंग नेपाल, चीन, तिब्बत, पेंगोलिन के अंग चीन, म्यांमार, तिब्बत, नेपाल, कछुए के अंग चीन, म्यांमार, थाईलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, हांगकांग और तेंदुए के अंग नेपाल तक भेजे गए थे।

कभी खत्म हो चुके थे बायसन, एक प्रोजेक्ट की वजह से अब हैं 140

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कभी खत्म हो चुके बायसन (जंगली भैंसा) एक बार फिर इसे गुलजार कर रहे हैं। यह सफलता ‘इंट्रोडक्शन आफ गौर इन बांधवगढ़” नाम के प्रयास से मिली। 12 साल पहले शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट इन दिनों अपनी सफलता के चरम पर है। इसकी शुरुआत में 49 बायसन कान्हा टाइगर रिजर्व से यहां लाए गए थे, अब इनकी संख्या 140 से ज्यादा हो चुकी है।

प्रामोशन का किसको अधिकार दें, तीन साल में तय नहीं कर पाई मध्‍य प्रदेश सरकार

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भोपाल( । स्कूल शिक्षा विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की सुविधाभोगी सोच ने उन 80 हजार शिक्षकों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है, जिन्हें वर्ष 2018 में अध्यापक से शिक्षक संवर्ग में लाया गया है। जिम्मेदार अधिकारी अपना काम कनिष्ठ से कराना चाहते हैं, इसलिए तीन साल से शिक्षकों को क्रमोन्नति नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, इस कारण सेवा पुस्तिका अपडेट नहीं हो रही हैं और उन्हें छठवें-सातवें वेतनमान का एरियर नहीं मिल पा रहा है। क्रमोन्नति की नोटशीट पिछले तीन साल से लोक शिक्षण संचालनालय, सचिवालय, विभाग के मंत्री एवं वित्त विभाग के बीच घूम रही है।

सामान्य प्रशासन विभाग के नियम अनुसार किसी भी कर्मचारी को नियोक्ता (नियुक्त करने वाला अधिकारी) ही क्रमोन्नति या समयमान वेतनमान का लाभ दे सकता है। यह व्यवस्था सभी विभागों में लागू है पर वर्ष 2014 में स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने क्रमोन्नति को लेकर होने वाली कानूनी झंझट से बचने के लिए अपने अधिकार कनिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए थे।

यही निर्णय आज 80 हजार शिक्षकों को भारी पड़ रहा है। वर्तमान अधिकारी भी चाहते हैं कि वर्ष 2014 की ही व्यवस्था लागू रहे और शासन इसके लिए तैयार नहीं है। इसी मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए तीन साल से नोटशीट घूम रही है।

स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार की प्रशासकीय मंजूरी के बाद नोटशीट करीब दो माह पहले फिर से वित्त विभाग को भेजी गई है, जो अभी नहीं लौटी है। उल्लेखनीय है कि शिक्षकों को 12, 24 और 30 साल में क्रमोन्नति दी जाती है। वर्ष 2006 में नियुक्त शिक्षक वर्ष 2018 में पहली क्रमोन्नति के लिए पात्र हो चुके हैं।

यह है शासन की व्यवस्था

स्कूल शिक्षा विभाग में पुराने संवर्ग के व्याख्याता की नियुक्ति आयुक्त लोक शिक्षण, उच्च श्रेणी शिक्षक की संभागीय संयुक्त संचालक व सहायक शिक्षक की जिला शिक्षा अधिकारी ने की है। यही फार्मूला क्रमोन्नति पर लागू होता है, पर काम के बोझ के मारे अधिकारियों ने वर्ष 2014 में इस व्यवस्था को ही पलट दिया।

आयुक्त ने अपने अधिकार संभागीय संयुक्त संचालक और संभागीय संयुक्त संचालक ने जिला शिक्षा अधिकारी को सौंप दिए। यानी नियुक्ति भले ही आयुक्त ने की हो, पर व्याख्याता संवर्ग को अन्य लाभ देने की जिम्मेदारी संभागीय संयुक्त संचालक निभाएंगे और उच्च श्रेणी शिक्षक व सहायक शिक्षक की नियुक्ति की जिला शिक्षा अधिकारी।

जनजातीय विभाग में मिल रहा लाभ

करीब 55 हजार शिक्षकों की नियुक्त जनजातीय कार्य विभाग में भी हुई है, पर वहां ऐसी स्थिति नहीं है। इसलिए नियोक्ता कर्मचारियों को तय समय पर क्रमोन्न्ति का लाभ दे चुके हैं।

यूक्रेन मे करीब 17,000 भारतीय नागरिकों ने छोड़ा, 3500 से अधिक वापस लौटे

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भारत सरकार युद्धग्रस्त यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए हरसंभव उपाय कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बुधवार को सरकार के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यूक्रेन पर रूसी हमला होने के बाद से अभी तक लगभग 17,000 भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ दिया है। वहीं अब तक 15 उड़ानों में 3,352 लोग भारत लौट भी चुके हैं। अरिंदम बागची ने कहा कि भारतीय वायु सेना के विमान बुखारेस्ट (रोमानिया) से पहली सी-17 उड़ान के साथ ऑपरेशन गंगा में शामिल हो गए हैं। अरिंदम बागची ने बताया मंत्रालय ने कहा कि हम वहां फंसे नागरिकों को निकालने में सहायता के लिए पूर्वी यूक्रेन पहुंचने के विकल्प तलाश रहे हैं। हम देख रहे हैं कि क्या हमारी टीमें वहां पहुंच सकती हैं, यह आसान नहीं है क्योंकि रास्ता हर समय खुला नहीं रहता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि कीव स्थित दूतावास को भारतीयों द्वारा सीमा पार करने की सुविधा के लिए ल्वीव (Lviv) में एक अस्थायी कार्यालय स्थापित करने के लिए कहा गया था। इस उद्देश्य के लिए हमारी दूतावास टीम का एक बड़ा हिस्सा अब Lviv में है।

भारतीय छात्रों की हरसंभव मदद

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि जिन लोगों ने अपना भारतीय पासपोर्ट खो दिया है, उन्हें आपातकालीन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक क्रियाविधि स्थापित की गई है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि इससे कई भारतीय छात्रों को भी मदद मिलेगी।

यूक्रेन में एक और छात्र की मौत

विदेश मंत्रालय ने कि यूक्रेन में रहने वाले भारतीय नागरिक चंदन जिंदल का बुधवार को स्वाभाविक कारणों से निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में थे। उनका परिवार भी यूक्रेन में ही रहता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उच्च स्तरीय बैठक, विदेशी नेताओं से भी की बातचीत

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यूक्रेन-रूस संकट पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। यूक्रेन पर जारी हमलों के बीच करीब 18 हजार भारतीय छात्र वहां फंसे हुए हैं। इन्हीं भारतीय छात्रों को स्वदेश वापसी को लेकर मोदी सरकार हर एक प्रयास कर रही है। इसी को लेकर पीएम मोदी आज एक बार फिर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंरकर समेत कई शीर्ष अधिकारी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। यूक्रेन संकट को लेकर पीएम मोदी की यह चौथी बैठक है। युद्धग्रस्त देश में खार्किव में गोलाबारी के दौरान एक भारतीय छात्र की मौत हो गई है। यूक्रेन में भारतीय छात्र की मौत को लेकर विदेश मंत्रालय ने ट्वीट करते हुए लिखा कि गंभीर दुख के साथ हम पुष्टि करते हैं कि आज सुबह खार्किव में गोलाबारी में एक भारतीय छात्र की जान चली गई। मंत्रालय उनके परिवार के संपर्क में है। हम परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। केंद्र सरकार ने युद्धग्रस्त यूक्रेन से फंसे छात्रों और भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए आपरेशन गंगा शुरू किया है। ऑपरेशन गंगा मिशन के तहत एयर इंडिया द्वारा विशेष उड़ानें संचालित की जा रही हैं।

इन विदेशी नेताओं ने की बात

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स मिशेल ने पीएम नरेंद्र मोदी से बात की। चार्ल्स मिशेल ने ट्वीट किया, निर्दोष नागरिकों के खिलाफ अंधाधुंध रूसी हमलों के कारण आज खार्किव में एक भारतीय छात्र की मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आज टेलीफोन पर बातचीत हुई।

आपरेशन गंगा में अब भारतीय वायु सेना भी जुटेगी

‘आपरेशन गंगा’ के तहत चल रहे निकासी प्रयासों को बढ़ाने के लिए पीएम मोदी ने मंगलवार को भारतीय वायु सेना को निकासी प्रयासों में शामिल होने के लिए कहा है। सूत्रों ने कहा कि वायु सेना की क्षमताओं का लाभ उठाने से यह सुनिश्चित होगा कि कम समय में अधिक लोगों को निकाला जा सके। साथ ही कहा कि यह मानवीय सहायता को अधिक कुशलता से वितरित करने में भी मदद करेगा। भारतीय वायु सेना आज से ‘आपरेशन गंगा’ के तहत कई सी-17 विमान तैनात कर सकती है।

 

उज्‍जैन में बना विश्‍व कीर्तिमान,

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ज्जैन । मध्‍य प्रदेश की धर्मधानी उज्जैन में महाशिवरात्रि पर सूरज ढलते ही इतिहास रचा गया। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर 11 लाख 71 हजार 78 मिट्टी के दीये एक साथ प्रज्वलित किए गए।

आज #महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल की नगरी दीपों की ज्योति से जगमगा रही है। उज्जैन की जनता ने अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया है। अनोखे तरीके से शिवभक्ति की है। मैं महाकाल महाराज से प्रार्थना करता हूं कि उज्जैन, मध्यप्रदेश, देश व सम्पूर्ण विश्व पर कृपा की वर्षा करें

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पहला दीप मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने प्रज्वलित किया। गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड की टीम ने इसे दीपों का सबसे बड़ा प्रदर्शन (लार्जेस्ट डिस्प्ले आफ आयल लैम्प) करार देकर उज्जैन का नाम गिनीज बुक में दर्ज किया। इससे पहले यह रिकार्ड अयोध्या के नाम ( नौ लाख 41 हजार 551 दीये) था। मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के नाम इसका प्रमाण पत्र मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को प्रदान किया।

शिव ज्योति अर्पणम् महोत्सव नाम से रखे इस दीपोत्सव में 20 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। दीपोत्सव का इंटरनेट साइट एवं टीवी चैनलों पर प्रसारण हुआ। इसे पूरे विश्व ने देखा और सराहा। कार्यक्रम पश्चात सभी दीये और तेल की खाली बोतलें नगर निगम ने एकत्र की। नगर निगम आयुक्त अंशुल गुप्ता ने विश्व का सबसे बड़ा जीरो वेस्ट कार्यक्रम होने का दावा किया। कहा कि उपयोग हुए सभी दीयों को रिसाइकल कर एक बड़ा दीया बनाया जाएगा। तेल की बोतलों से गमले, कुर्सियां बनाई जाएंगी। दीपोत्सव पर पूरे शहर में 21 लाख से अधिक दीये जले।

मध्‍य प्रदेश को खरीफ फसलों के लिए 25 लाख मीट्रिक टन खाद मिलेगी, केंद्र ने दी सहमति

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भोपाल।। रबी फसलों की कटाई प्रारंभ होने के साथ ही शिवराज सरकार खरीफ फसलों की तैयारी में जुट गई है। किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद मिल जाए, इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। इस बार 13 लाख टन यूरिया, दस लाख टन डीएपी और ढाई लाख टन एनपीके की आपूर्ति पूरे सीजन में केंद्र सरकार करेगी। यह पिछले साल की तुलना में अधिक है। इसके साथ ही सरकार ने अपने स्तर से अतिरिक्त खाद की व्यवस्था भी बनाई है। इसके तहत आठ लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जाएगा।

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प्रदेश में प्रतिवर्ष सीजन के समय खाद की समस्या सामने आती है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के ऊपर काफी दबाव भी बनता है क्योंकि किसानों को 70 प्रतिशत खाद इसी माध्यम से उपलब्ध होती है। इसे देखते हुए सरकार ने इस बार आठ लाख मीट्रिक टन खाद का अग्रिम भंडारण करने का निर्णय लिया हैै। इसमें सरकार अपने संसाधनों से चार लाख टन यूरिया, तीन लाख टन डीएपी और एक लाख टन कांप्लेक्स खाद का भंडारण करेगी। यह खाद किसानों को बिना ब्याज लिए सीजन प्रारंभ होने से पहले दी जाएगी।

इसके साथ ही केंद्र सरकार को खरीफ सीजन के लिए खाद आपूर्ति का जो प्रस्ताव भेजा था, उस पर सहमति बन गई है। सोमवार को अपर मुख्य सचिव कृषि अजीत केसरी ने केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। इसमें तय हुआ कि केंद्र सरकार 13 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 10 लाख मीट्रिक टन डीएपी और ढाई लाख टन एनपीके की आपूर्ति पूरे सीजन में करेगी। पिछले साल 12.16 लाख टन यूरिया, छह लाख तीन हजार टन डीएपी और एक लाख 63 हजार टन एनपीके की आपूर्ति की गई थी।

पांच लाख टन खाद का भंडारण

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अभी पांच लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद का भंडारण है। इसमें दो लाख 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 70 हजार टन डीएपी, दो लाख टन सिंगल सुपर फास्फेट और 40 हजार टन एनपीके है। बीते रबी सीजन में किसानों को 16.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया, पांच लाख 80 हजार मीट्रिक टन डीएपी, छह लाख 50 हजार मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट और साढ़े तीन लाख मीट्रिक टन एनपीके की आपूर्ति की गई है।

उमरिया के मढ़ीवाह में लगा भक्तों का मेला

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उमरिया। महाशिवरात्रि पर शहर के शिव मंदिरों में मेले का आयोजन किया गया। सगरा मंदिर में विशाल मेला लगा। इसी तरह शिवबाबा के प्रमुख केन्द्र मढ़ीवाह में भी विशाल मेला आयोजित किया गया। कल्चुरकालीन इस मंदिर में उमरिया के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग आए।

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पाली में भी निकली बरात : महाशिवरात्रि पर जिले के बिरसिंहपुर पाली में भी भगवान भोलेनाथ की धूमधाम से बरात निकाली गई। भोले की बरात में हजारों की तादात में नगर के श्रद्घालु शामिल हुए। बरात का स्वागत शहर के लोगों ने किया गया। जगह-जगह पर शरबत और खीर का वितरण किया गया। पाली शहर में महाशिवरात्रि पर जगह-जगह विशाल भण्डारों का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय लोगों ने भी बढ-चढ़कर सहभागिता निभायी। देर शाम तक भण्डारे चले।

अमोलखोह में उमड़े भक्त : महाशिवरात्रि पर जिले के अमोल खोह में भी सुबह से श्रद्घालुओं का तांता लगा रहा। यहां शिवरात्रि पर इन दिनों कथा एवं शिवरूद्र महायज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है। कथा के दौरान बताया गया कि जो व्यक्ति तीनों लोकों के स्वामी रूद की पूजा भक्ति में नहीं करता। वह समस्त जन्मों में भ्रमित रहता है। नारी को शिवरात्रि का व्रत भक्ति के साथ करना चाहिए। इसे इच्छापूर्ति का व्रत भी कहते हैं। अमोलखोह में उमरिया, पाली, करकेली, चंदिया, शहडोल, कटनी सहित दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्घालु भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। दोपहर में मंदिर में विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्घालुओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इसके अलावा करकेली, चंदिया, भरेवा, इंदवार, झाल, चितरांव, दमोय सहित आसपास के गांवों में स्थित शिव मंदिरों में भी महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान भोलेनाथ की बारात निकली।

भक्ति में बीता छुट्टी का दिन : महाशिवरात्रि पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। इस दिन सभी सरकारी विभागों, स्कूल, कालेजों की छुट्टी रही जिसके कारण लोगों का सारा दिन भक्तिमय वातावरण में बीता। लोगों ने भोले बाबा की पूजा कर महाशिवरात्रि की छुट्टी का आनंद लिया।

पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली गिरफ्तार, कुछ ही देर में मिली ज़मानत

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर विनोद कांबली एक बार फिर सुर्खियों में आ गये हैं। रविवार शाम मुंबई पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, वैसे थोड़ी ही देर में उन्हें ज़मानत भी मिल गई। आरोपों के मुताबिक विनोद कांबली ने मुंबई के बांद्रा में नशे की हालत में अपनी सोसाइटी के गेट में कार से टक्कर मार दी। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक कांबली के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना), 336 (अन्य लोगों की ज़िदंगी और सुरक्षा को खतरे में डालना) और 427 (ऐसी हरकत करना जिससे नुकसान हो) के तहत बांद्रा थाने में मामला दर्ज किया गया है।

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कांबली ने घटना के बाद परिसर के चौकीदार और कुछ निवासियों से कथित रूप से बहस भी की। जिसके बाद मामला बढ़ गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद में उन्हें ज़मानत पर छोड़ दिया गया। बता दें कि अभी कुछ ही समय पहले विनोद कांबली ऑनलाइन ठगी के भी शिकार हुए थे। कांबली को साइबर ठगों ने एक लाख रुपये की चपत लगा दी थी, जिसके बाद इस संबंध में बांद्रा पुलिस थाने में एक मामला दर्ज किया गया था।

विनोद कांबली का क्रिकेट करियर

सचिन तेंदुलकर के साथ करियर की शुरुआत करनेवाले विनोद कांबली ने 17 टेस्ट मैचों की 21 पारियों में 54.20 के औसत से कुल 1084 बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 227 रन रहा। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में कुल 4 शतक और तीन हाफ सेंचुरी बनाईं। वनडे क्रिकेट में कांबली ने 104 मैचों की 97 पारियों में 32.59 के औसत से कुल 2477 रन बनाए। खराब फॉर्म की वजह से उनका करियर सचिन की तुलना में बहुत जल्दी खत्म हो गया।

चंबल अंचल के मुरैना में दुर्गम पहाड़ और जंगलों के बीच बना है 9वीं सदी का शिवधाम

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मुरैना। ग्वाल‍ियर चंबल अंचल स्थित मुरैना मेें बटेश्वरा के 200 मंदिरों के समूह से भी कई सदी पुराना शिव धाम भी बसा है। 9वीं सदी की इस प्राचीन मंदिर श्रंखला में दुर्गम रास्ते, घने जंगल व पहाड़ों के बीच लगभग 45 मंदिर हैं, जिनमें से आधे मंदिर पत्थरों का ढेर बनकर पहाड़-जंगलों में बिखरे हैं। यहां मंदिर वर्गाकार बने हैं, जो देश में कहीं और नहीं दिखते। मंदिर में अलग-अलग आकार के शिवलिंग है। मुख्य मंदिर का शिवलिंग चतुर्भुजी हैं, जिसका जलाभिषेक पहाड़ों को चीरकर निकली जलधारा करती है।

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जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर, मुरैना, ग्वालियर और भिंड जिले की सीमा के बीच दुर्गम जंगल और पहाड़ांे के बीच नरेश्वर महादेव को स्थानीय लोग केदारा के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि शिव मंदिरों के बीच माता हरसिद्धि का मंदिर भी है। यहां 23 मंदिर 16-17 सदी पुराने हैं, 20 से अधिक मंदिर डेढ़ वर्ग किलोमीटर एरिया में पत्थर बनकर बिखरे हैं।

मंदिरों के बीच पहाड़ काटकर बनाए गए गर्भगृह में स्थित है, नरेश्वर महादेव का शिवलिंग चौकोर हैं। ऐसा चौकोर शिवलिंग नरेश्वर के अलावा भोपाल के भोजपुर मंदिर में देखने को मिलता है, लेकिन नरेश्वर के कई मंदिरों में चौकोर, कई में अंडे जैसे आकार के, कई पिंडी व मणि के आकार के शिवलिंग हैं। हर मंदिर में समानता यह है कि अधिकांश शिवलिंग नींचे से चौकोर हैं। राज्य पुरातत्व धरोहरों में शामिल मंदिरोें के संरक्षण का काम पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद हुकुम चंद की निगरानी मंे 9 माह से चल रहा है।

बटेश्वरा से तीन सदी पुराना, समानताएं कईं

मुरैना का बटेश्वरा मंदिर समूह पूरी दुनिया में ख्याति पा चुका है,नरेश्वर मंदिर समूह, बटेश्वरा के मंदिरों से लगभग तीन सदी पुराना है। जिला पुरातत्व अधिकारी अशोक शर्मा बताते हैं, कि बटेश्वरा मंदिर समूह 8 से 10वीं सदी गुर्जर-प्रतिहार राजवंश में बने और 13वीं सदी में नष्ट हो गए थे। वहीं नरेश्वर मंदिर समूहों का निर्माण गुप्तकाल यानी तीसरी से पांचवी सदी के बीच हुआ है और इनका विस्तार 8 से 9वीं सदी के बीच हुआ। बटेश्वरा में अभी भी 140 मंदिर भग्नावस्था में हैं, तो नरेश्वर में भी 20 से ज्यादा मंदिरों के अवशेष डेढ़ वर्गकिलोमीटर के एरिया में पत्थरों की तरह बिखरे पड़े हैं।

पानी निकासी और जलसंरक्षण का अद्भुत प्रबंधन

पहाड़ों को काटकर बनाए गए नरेश्वर मंदिरों के पीछे, पहाड़ी की चोटियों पर दो तालाब हैं, जो बारिश में लबालब होने के बाद पानी पहाड़ों को चीरकर नरेश्वर शिवलिंग और उसके पास बने मंदिर के शिवलिंग के ऊपर ऐसे टपकता है, जिससे प्राकृतिक रूप से शिवलिंग का जलाअभिषेक होता है।

पुरातत्व अधिकारी अशोक शर्मा बताते हैं कि नरेश्वर जैसे वर्गाकार मंदिर देश में कहीं नहीं मिलते। आदिकाल में यहां पहुंचने के लिए जलमार्ग हुआ करता था, क्योंकि चारों ओर पानी भरा था। मंदिर के ऊपर, पास होकर और अंडर ग्राउंड तरीके से जलनिकासी प जलसंरक्षण का ऐसा प्रबंध किया गया है, जो आधुनिक इंजीनियरों को भी अचरज मेें डाल देता है। बारिश मेें मंदिरों के बीच से पानी बहने से आवागमन के लिए पत्थरों का पुल बना है।