Home Blog Page 201

भारत एक खोज: भारत का अनोखा रेलवे स्टेशन! दो राज्यों में बंटा हुआ है प्लेटफॉर्म और 4 भाषाओं में यात्रियों को मिलती है सूचना, सोशल मीडिया पर पोस्ट हो रही वायरल

0

भारत का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन जो बंटवारे से पहले बनाया गया था, जहाँ ट्रेन गुजरात में रूकती है तो टिकट महाराष्ट्र से लेनी पड़ती है, सोशल मीडिया ऐप कू पर पोस्ट हो रही वायरल

नेशनल। अब तक आपने कई तरह के सीमा विवाद सुने होंगे। कई बार सोशल मीडिया पर दो देश की बॉर्डर के आपस में जुड़े होने की तस्वीरें शेयर की जाती हैं। ऐसा ही कुछ भारत के एक रेलवे स्टेशन (Railway Station) के साथ भी है। भारत में एक रेलवे स्टेशन ऐसा है, जिसका आधा हिस्सा गुजरात (Gujrat) में आता है और दूसरा हिस्सा महाराष्ट्र (Maharashtra) में। अब आप यह जरूर सोच रहे होंगे कि आखिर यह कैसे संभव है।

कुर्सी हिस्से की

सबसे खास बात यह है कि इस रेलवे स्टेशन पर एक कुर्सी भी रखी है, जिसका एक हिस्सा गुजरात में है और दूसरा महाराष्ट्र में। यह सुनने में बड़ा ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यहाँ काम कैसे होता है और किस राज्य के नियमों का पालन किया जाता है। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में:

बंटवारे के पहले से बना है स्टेशन

आपको बता दें कि यह रेलवे स्टेशन सूरत-भुसावल लाइन पर है, जो दो राज्यों में बंटा हुआ है। आधा स्टेशन महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में आता है और आधा गुजरात के तापी जिले में। दरअसल गुजरात और महाराष्ट्र के बंटवारे से पहले ही यह स्टेशन बन चुका था और बंटवारे के बाद भी इस स्टेशन में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब यह दोनों राज्यों में आता है।

किस तरह से बंटा हुआ है?

आपको बता दें कि यह रेलवे स्टेशन बेहद खास तरीके से बंटा हुआ है। इसमें प्लेटफॉर्म पर जहाँ ट्रेन खड़ी होती है, वह गुजरात के क्षेत्र में है। दूसरी तरफ, यहाँ का क्लर्कियल काम महाराष्ट्र के क्षेत्र में होता है। साफ शब्दों में कहें, तो रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म वाला हिस्सा गुजरात में है और ऑफिस का हिस्सा महाराष्ट्र के क्षेत्र में है। वैसे नवापुर रेलवे स्टेशन, महाराष्ट्र के हिस्से में आता है।

चार भाषाओं में दी जाती है सूचना

दो राज्यों में बंटे इस अनोखे नवापुर रेलवे स्टेशन पर चार अलग-अलग भाषाओं में रेल यात्रियों को सूचना दी जाती है। यहाँ हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाओं में अनाउंसमेंट होता है। ऐसे में यह रेलवे स्टेशन वाकई खास है। हो भी क्यों न, जिस रेलवे स्टेशन पर आपको महाराष्ट्र से टिकट लेनी होती है और ट्रेन पकड़ने के लिए गुजरात जाना पड़ता है।

‘एक नेता, एक पद’ के फॉर्मूले पर होगा राजस्थान कैबिनेट में फेरबदल

0

राजस्थान को लेकर दिल्ली में चल रही सियासी सरगर्मियों के बीच प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं.

राजस्थान: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की संभावना है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों से बताया है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस ‘एक नेता-एक पद’ के फॉर्मूले की नीति को लागू कर सकती है. ये मंत्रिमंडल विस्तार 15 से 20 नवंबर के बीच किया जा सकता है.

“कैबिनेट फेरबदल में ‘एक नेता, एक पद’ का फॉर्मूला होगा. इस फॉर्मूले के मद्देनजर गहलोत मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों को उनके पद से हटाए जाने की संभावना है क्योंकि उन्हें पहले ही पार्टी में जिम्मेदारी दी जा चुकी है. राजस्थान पीसीसी प्रमुख गोविंद डोटासरा, पंजाब के एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी, गुजरात के एआईसीसी प्रभारी रघु शर्मा के फेरबदल से बाहर होने की संभावना है. उन्होंने खुद पार्टी के लिए काम करने का अनुरोध किया है, “.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक की थी. बैठक में राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी अजय माकन भी मौजूद थे. बैठक के बाद माकन ने कहा कि राजस्थान में राजनीतिक स्थिति, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य में 2023 के विधानसभा चुनाव के रोडमैप पर चर्चा की गई.

पायलट के 5-6 समर्थक विधायकों को बनाया जा सकता है मंत्री

सूत्रों ने ABP News को ये भी बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट के समर्थक 5 से 6 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. इस बीच बुधवार को ही सचिन पायलट ने भी संगठन महासचिव केसी वेणु गोपाल से मुलाकात की थी. पायलट पहले ही इस सिलसिले में प्रियंका गांधी से मिल चुके हैं. करीबी सूत्रों के मुताबिक पायलट ने फिर नेतृत्व से मांग की थी कि उनसे किए गए वादों को पूरा किया जाए और उनके समर्थक विधायकों को मंत्री बनाया जाए. पायलट ये भी चाहते हैं कि इस बार के विस्तार में दलित चेहरों को भी मौका मिले.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है

0

उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले विपक्षी पार्टियों ने इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ऐप पर भाजपा सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है. विपक्षी दलों की सक्रियता को देखते हुए अब ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश का चुनावी दंगल कू ऐप पर ही लड़ा जाएगा. उत्तर प्रदेश चुनावों में काफी सक्रीय दिख रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) उत्तर प्रदेश और पीस पार्टी ने अब कू ऐप पर अपना आधिकारिक अकाउंट बना लिया है. पार्टी की नजर इस क्षेत्रीय भाषा वाले माइक्रोब्लॉगिंग ऐप के जरिए वोटरों के बीच अपनी जगह बनाने पर है. अब साफ है कि मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली ये दोनों पार्टियां कू ऐप के जरिए ही लोगों से संवाद करेंगी. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही इस प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय हैं.

 

कू ऐप पर पहले से ही सपा (Samajwadi Party), बसपा (Bahujan Samaj Party), कांग्रेस(Congress), आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party), आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party), सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेता जुड़ चुके हैं. जानकारों का कहना है कि भाजपा सरकार पर हमलावर रहने वाले एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी जल्द ही इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं. आपको बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में ये ऐलान किया था कि वो भाजपा-कांग्रेस को छोड़ कर किसी भी अन्य दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं. ऐसे बड़े ऐलान के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) उत्तर प्रदेश का कू ऐप पर आना ये साफ जाहिर करता है कि पार्टी इस चुनाव में सोशल मीडिया के जरिए सफलता का रास्ता तलाश रही है.

 

एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी ने क्योंचुना कू ऐप?

 

कू ऐप एक इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है जिस पर उत्तर प्रदेश की जनता भारी संख्या में मौजूद है और क्षेत्रीय भाषा में अपनी राय और सवाल लिख रही है.कू ऐप पर उत्तर प्रदेश के युवाओं की संख्या भी काफी ज्यादा है और ये जागरुक युवा इस स्वदेशी ऐप के जरिए हिंदी में अपने सवाल नेताओं से पूछते हैं, अपने इलाके की परेशानियों के लिए आवाज उठाते हैं. एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी ने इस मौके को अच्छी तरह से समझ लिया है और इसलिए उन्होंने इस माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को चुना है.

 

दलित और मुस्लिम वोटरों पर है नजर

 

उत्तर प्रदेश में दलित और मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी निर्णायक है और चुनाव में इस वर्ग की भूमिका काफी अहम होती है. एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी की नजर आमतौर पर मुस्लिम और दलित वोटरों को रिझाने पर है जिसके लिए उन्होंने इस क्षेत्रीय भाषा वाले प्लेटफॉर्म को चुना है. इन दोनों दलों के अलावा आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद, बहुजन समाज पार्टी के सतीष चंद्र मिश्रा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ओम प्रकाश राजभर पहले से ही कू ऐप पर काफी सक्रीय हैं और आम लोगों से संवाद कर रहे हैं.

 

कू ऐप पर एआईएमआईएम (AIMIM) की सक्रीयता

 

एआईएमआईएम (AIMIM) पार्टी उत्तर प्रदेश ने Koo पर@ AIMIM upofficalहैंडल के साथ अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है. पार्टी के समर्थकों ने अब कू ऐप के जरिए पार्टी से जुड़ना शुरू कर दिया है. इसके पहले एआईएमआईएम (AIMIM) बिहार ने कू ऐप ज्वाइन किया था और उनके कई बड़े नेता भी कू ऐप पर आ चुके हैं. बताते चलें कि बिहार विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम (AIMIM) ने अपने 20 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 5 उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी. पार्टी की मुस्लिम और दलित वोटरों के बीचकाफी लोकप्रियता है और अब सूत्रों की मानें तो जल्द ही पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी भी इस इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं.

 

 

 

हिंदी सोशल मीडिया यूजर्स पर है सबकी नजर

 

तेजी से लोकप्रिय हो रहे स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग साइट Koo ने ये ऐलान किया था कि उसके 1 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हो गए हैं जिनमें से करीब आधे यूजर्स हिंदी के हैं. ऐसे में ये साफ है कि बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग Koo पर हैं और हिंदी में अपनी बात रख रहे हैं. बीजेपी ने इस बात को पहले ही भांप लिया था और इस प्लेटफॉर्म से जुड़ गए थे. चुनाव को नजदीक आता देख विपक्ष भी इस बात को समझ गया है कि उत्तर प्रदेश के सत्ता का रास्ता हिंदी के साथ चल कर ही तय किया जा सकता है और यही वजह है कि अब सभी विपक्षी पार्टियों ने Koo का रुख कर लिया है. जानकारों की मानें तो इस स्वदेशी सोशल मीडिया ऐप पर यूपी चुनाव का घमासान देखने को मिलेगा.

क्या डिंपल को खुद से ऊपर रख पाएंगे अखिलेश?- – अतुल मलिकराम

0

पिछले विधानसभा चुनाव में आंतरिक संघर्ष से जूझ रही, समाजवादी पार्टी इस बार कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है. खबर है कि प्रत्याशियों की सूचि जारी की जा सकती है. वहीँ दूसरी तरफ चुनावी रैलियों का दौर भी शुरू हो चुका है. #बाइसमेंबाइसिकिल का नारा सड़क से सोशल मीडिया तक बुलंद हो रहा है. फिर मेरी बात उनके कानों तक भले देर में पहुंची हो, लेकिन डिंपल को सियासी मैदान में उतारने का काम भी उन्होंने तय समय पर किया है. दशहरा पर आश्चर्यजनक रूप से डिंपल का विरोधियों पर हमलावर होना काफी हद तक समाजवादियों के पक्ष में जाता है. शायद अखिलेश को भी उनसे इसी तरह का रुख अख्तियार करने की उम्मीद होगी. जो पार्टी कार्यकर्ताओं में थोड़ी और जान फूंकने के साथ प्रदेश की जनता को सपा की साइकल पर एक बार फिर सैर करने के बारे में सोचने पर मजबूर करेगा.

 

मार्च 2017 में सत्ता संभालने के साथ ही योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा को सबसे अधिक तवज्जो देते हुए ऐंटी रोमिओ स्कॉड बना दी, रोड छाप रोमियों के साथ गुंडे बदमाशों को प्रदेश छोड़ने की धमकी भी दे दी. लेकिन पिछले साढ़े चार सालों का आपराधिक रिकॉर्ड देखें तो योगी सरकार, बलात्कार से लेकर गंभीर मामलों तक में अखिलेश की पिछली सरकार से बीस ही नजर आती है. ऐसे में सपा समेत अन्य विरोधी दलों के पास महिला सुरक्षा अभी भी एक जटिल और उकसाऊ मुद्दा है. ऐसे में सपा अपनी महिला ब्रिगेड को संभालने की जिम्मेदारी, आँख मूँद डिंपल को सौप सकती है.

 

 

मेरी नजर में आगामी विधानसभा चुनावों में सपा के लिए डिंपल को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमोट करना अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है. यह सिर्फ उत्तर प्रदेश की महिला वोटरों को साथ लाने के लिए नहीं बल्कि प्रदेश को पहली युवा समाजवादी महिला मुख्यमंत्री देने के मकसद से भी सही साबित होगा. बेशक उनके पास सरकार चलाने का अनुभव नहीं होगा, लेकिन सरकार में रह चुके लोगों का अनुभव, खासकर खुद पूर्व मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन उन्हें प्राप्त होगा. हालांकि इन सब में सिर्फ एक ही सवाल से सपा को पार पाने की जरुरत है. ‘क्या अखिलेश को खुद से ऊपर रख पाने में सहज महसूस करेंगे? शायद नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की पहल में जनता का खूब प्यार बटोरा है. एक झटके में खुद को उम्मीदवारी से हटाना उनके लिए आसान नहीं होगा, हालाँकि योगी जी से कुर्सी छीनना भी सिर्फ डिंपल के ही बस में होगा, यह भी निश्चित है.

 

उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों को टिकट देने से पहले उनकी क्षमताओं को परखने का काम किया जा रहा है, वह भी प्रोफेशनल एजेंसियों के द्वारा. इतना ही नहीं संभावित प्रत्याशियों का आकलन और आतंरिक फीडबैक के बाद ही प्रत्याशियों की नियुक्ति होगी. 2017 के चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण, सपा को जल्दबाजी में अपने प्रत्यासी घोषित करने पड़े थे. वहीँ गठबंधन के चक्कर में सपा को 114 सीटें छोड़नी पड़ी थीं. जिनमें से अधिकांश सीटें भाजपा के पास चली गई थीं. अब इन सीटों पर भी जल्द प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी. जाहिर है इस बार सपा के पास खुला मैदान है और वह मैदान के चारों तरफ अपनी फील्डिंग सजा सकती है, बस जरुरत है तो कप्तान के नाम में थोड़ी बहुत हेर फेर करने की.

पृथ्वीपुर में मुख्यमंत्री ने कई घोषणा की

0

पृथ्वीपुर : मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले दिनों एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान (Shivraj singh Chouhan) पर तंज किया था कि वे जेब में नारियल (Coconut) लेकर चलते हैं और कहीं भी फोड़ देते हैं। जहां नदी नहीं हो वहां भी पुल की घोषणा करने में देर नहीं करते। आज शिवराज सिंह ने पृथ्वीपुर में कमलनाथ (Kamalnath) को उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया और बार-बार नारियल फोड़ने की बात करके कई घोषणाएं की।

मुख्यमंत्री (CM) ने कहा कि कमलनाथ कह रहे हैं कि वे तो नारियल जेब में धरे रहते हैं और कहीं भी नारियल फोड़ देते हैं। आज हमने पृथ्वीपुर में कितने नारियल फोड़े हैं और किस-किस के नारियल फोड़े हैं, कमलनाथ तुम भी सुन लो।

CM ने कहा, हमने आज पृथ्वीपुर में सीएम राइस स्कूल खोलने का 18 करोड़ का नारियल फोड़ा, ये सस्ता थोड़ी न है। दूसरा नारियल रोहतेरा, कोली, सिमरिया 6 किलोमीटर सड़क निर्माण का फोड़ा। जेरौन में नाला निर्माण का नारियल फोड़ा। अंबेडकर भवन निर्माण के साथ ही जेरौन में बस स्टैंड निर्माण का भी हमने नारियल फोड़ा। तालाब के सौंदर्यीकरण का भी नारियल फोड़ा। हमने दिगौड़ा को तहसील बनाने का नारियल भी फोड़ा।

 

भैया दिगौड वालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी, तो हम क्यों कोई कसर छोड़ें! हमने पृथ्वीपुर में राधा सागर तालाब को सुंदर बनाने, पाइप लाइन के विस्तार का, तिराहा के सौंदर्यकरण का और जब सिटी में घुसो तो अच्छे इंट्रेंस गेट का भी नारियल आज ही फोड़ दिया।

कमजोरों को कोई सताए नहीं, इसलिए पृथ्वीपुर में जिम बनाने का नारियल भी हमने फोड़ दिया। जोरा-मोरा में आंगनवाड़ी भवन का, जौराखास, सियाखास, जमालपुरा, मुडेनी, खिसटोन आंगनवाड़ी के भवन के नारियल भी फोड़ रहे हैं।

सिमरा में पंचायत भवन का नारियल, ममोरा में सीमेट कांक्रीट रोड का नारियल, पृथ्वीपुर को खेल मैदान का नारियल और जिनके नाम नहीं आए चिंता मत करना भाइयों सबका नारियल आज ही फूटेगा। मामा ने जितनी घोषणा की सबके नारियल फोड़े हैं। जामनी नदी के पुल की स्वीकृति का 3 करोड़ का नारियल यहीं फोड़े या वहां ही फोड़ने आएं!

IAS अधिकारियों के प्रभार में बदलाव

0

भोपाल: राज्य शासन ने आज 2 आईएएस अधिकारियों के प्रभार में बदलाव किया है।

निशांत वरवड़े को आप अपने वर्तमान दायित्व के साथ साथ सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग भी घोषित किया गया है।

श्रीमती अलका श्रीवास्तव को सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग के कार्य से मुक्त कर दिया गया है। वह अब केवल सदस्य सचिव मध्यप्रदेश खाद्य आयोग रहेंगी।

न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट में रहाणे करेंगे कप्तानी

0

17 नवंबर से भारत और न्यूजीलैंड के बीच घरेलू सरजमीं पर तीन टी-20 और दो टेस्ट मैचों की सीरीज का आगाज होने जा रहा है। टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया गया है, जबकि टेस्ट सीरीज को लेकर अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है।  टेस्ट सीरीज के लिए रोहित शर्मा ने BCCI से आराम मांगा है और पहले टेस्ट के लिए अजिंक्य रहाणे टीम के कप्तान होंगे।  टी-20 के अलावा पहले टेस्ट के लिए भी BCCI से आराम मांगा है।

रोहित को कप्तान बनाने पर चल रहा था विचार
टी-20 वर्ल्ड कप में हिटमैन की शानदार फॉर्म और इंग्लैंड दौरे पर उनके प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए BCCI और चयनकर्ता पहले टेस्ट के लिए रोहित शर्मा को कप्तान बनाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन अब उनके आराम की बात सामने आने के बाद टीम के उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को कानपुर टेस्ट के लिए कप्तान बनाया जा सकता है। साथ ही विराट के पहले टेस्ट के अलावा तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी पूरी सीरीज के लिए रेस्ट दिया जा सकता है।

कप्तानी में रहाणे का कमाल का रिकॉर्ड

विराट कोहली की गैरमौजूदगी में अभी तक उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को टेस्ट टीम की कप्तानी करते देखा गया है। अनुभवी खिलाड़ी ने अभी तक कुल पांच टेस्ट मैचों में भारत की कमान संभाली है और चार मुकाबले जीतने में सफल रहे हैं। खास बात ये है कि अपनी कप्तानी में उन्होंने एक भी टेस्ट मैच नहीं गंवाया। चार जीत के अलावा एक मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ। इस साल कोहली की गैरमौजूदगी में भारत ने रहाणे की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2-1 से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।

ऐसा है सीरीज का शेड्यूल

भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 सीरीज का पहला मैच 17 नवंबर को जयपुर, दूसरा मैच 19 नवंबर को रांची और आखिरी मैच 21 नवंबर को कोलकाता में खेला जाएगा। टेस्ट सीरीज का आगाज 25 नवंबर को होगा और पहला टेस्ट कानपुर में खेला जाएगा। जबकि दूसरा टेस्ट 3 दिसंबर से 7 दिसंबर के बीच मुंबई में होगा।

बीजेपी सलमान खुर्शीद द्वारा हिन्दुत्व की तुलना बोको हरम से करने पर भड़की – कहा यह भारत का अपमान है

0

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की एक दिन पहले विमोचन की गई किताब में हिन्दुत्व को लेकर जो कुछ कहा गया है, उस पर भारी विवाद पैदा हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने इस किताब में हिन्दुत्व की तुलना आतंकी संगठन बोको हरम और आईएसआईएस से करने पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिर्फ हिन्दू ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा को भी ठेस पहुंचाती है.

बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस मामले पर कहा कि सोनिया गांधी को चुप्पी तोड़नी होगी और इस पर अपना विचार साफ करना होगा. उन्होंने आगे कहा कि सवाल उठता है कि ये सोच शशि थरूर की है, या मणिशंकर अय्यर की है. क्या प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की गलियों में जाकर इसे कहने की हिम्मत करेंगी. उन्होंने कहा कि ये तुलना उन 100 हिंदुओ से की गई है जो आजादी से पहले और आजादी के बाद सहिष्णुता का परिचय दिया है. सोनिया राहुल गांधी के इशारे पर हिंदुओं का अपमान है. चुनाव आते ही राहुल और प्रियंका इच्छाधारी हिन्दू बन जाते है.
खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस से शिकायत
इधर, सलमान खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस से शिकायत की गई है. उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने हिन्दुत्व की आतंकवाद से तुलना कर उसे बदनाम करने की कोशिश की है. खुर्शीद की किताब सनराइज ओवर अयोध्या में टिप्पणी के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई गई है. विवेक गर्ग नाम के दिल्ली के वकील ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से शिकायत करते हुए केस दर्ज करने का अनुरोध किया है.

किताब में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों से करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि हिंदुत्व साधु-सन्तों के सनातन और प्राचीन हिंदू धर्म को किनारे लगा रहा है, जो कि हर तरीके से आईएसआईएस और बोको हरम जैसे जिहादी इस्लामी संगठनों जैसा है. इसकी वजह पूछे जाने पर सलमान ने कहा, “हिन्दू धर्म बहुत उच्च स्तर का धर्म है. इसके लिए गांधी जी ने जो प्रेरणा दी उससे से बढ़कर कोई प्रेरणा नहीं हो सकती है. कोई नया लेबल लगा ले तो उसे मैं क्यों मानूं? कोई हिन्दू धर्म का अपमान करे तो भी मैं बोलूंगा. मैंने ये कहा कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाले गलत हैं और आईएसआईएस भी गलत है.”

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले और अपनी किताब को लेकर सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘’अयोध्या विवाद को लेकर समाज में बंटवारे की स्थिति थी. सुप्रीम कोर्ट ने उसका समाधान निकाला. कोर्ट के फैसले ने काफी दूर तक देखने की कोशिश की है. ऐसा फैसला है जिससे ये ना लगे कि हम हारे, तुम जीते.’’ बीजेपी सरकार की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘’ऐसा एलान तो नहीं हुआ कि “हम जीत गए” लेकिन कभी-कभी ऐसे संकेत दिए जाते हैं. सबको जोड़ने की कोशिश होनी चाहिए. फिलहाल अयोध्या के उत्सव में ऐसा लगता है कि एक ही पार्टी का उत्सव है.’’

खुर्शीद की किताब पर भारी विवाद

किताब में सलमान खुर्शीद लिखते हैं “बेशक, हिंदुत्व के समर्थक इसे इतिहास में अपने गौरव को उचित मान्यता मिलने के तौर पर देखेंगे. न्याय के संदर्भ सहित जीवन कई खामियों से भरा है, लेकिन हमें आगे बढ़ने के लिए इसके साथ समायोजन करने की जरूरत है. यह किताब एक विवेकपूर्ण फैसले में आशा को देखने की कोशिश है, फिर भले ही कुछ लोगों को यह लगता हो कि फैसला पूरी तरह उचित नहीं था.” किताब पर बात करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि समाज में एकता आएगी तो मानूंगा कि किताब लिखने का फैसला कामयाब रहा.

देश में हिंदुत्ववादी राजनीति के प्रभाव की चर्चा करते हुए सलमान खुर्शीद लिखते हैं, “मेरी अपनी पार्टी, कांग्रेस में, चर्चा अक्सर इस मुद्दे की तरफ मुड़ जाती है. कांग्रेस में एक ऐसा तबका है, जिन्हें इस बात पर पछतावा है कि हमारी छवि अल्पसंख्यक समर्थक पार्टी की है. यह तबका हमारी लीडरशीप की जनेऊधारी पहचान की वकालत करता है. इन्होंने अयोध्या पर आए फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए यह घोषणा कर दी कि अब इस स्थल पर भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए. इस रुख ने निश्चित तौर पर सर्वोच्च न्यायलय की ओर से दिए गए आदेश के उस हिस्से की अनदेखी की, जिसमें मस्जिद के लिए भी जमीन देने का निर्देश दिया गया था.”

इसको लेकर जब सलमान खुर्शीद से सवाल किया गया तो उन्होंने नहीं बताया कि उनका निशाना किन नेताओं की तरफ है, लेकिन कहा कि कुछ नेताओं ने अपनी समझ और निजी आस्था से ऐसा कहा होगा. हमें वो कहना चाहिए जो राहुल गांधी कहते हैं, वो नहीं जो कुछ लोगों ने कह दिया.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 12 नवम्बर को जनजातिय गौरव दिवस के संबंध में चर्चा करेंगे 

0

भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में 12 नवंबर को सुबह 11:00 बजे से मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है।

 

इस वीडियो कॉन्फ्रेंस में वे प्रदेश के समस्त कमिश्नर, कलेक्टर, आईजी और एसपी से जनजातिय गौरव दिवस के संबंध में बात करेंगे।

 

वीडियो कांफ्रेंस में समस्त मंत्री और राज्य मंत्री भी भाग लेंगे। कार्यक्रम की दृष्टि से जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। वे भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग लेंगे |

राजस्व मंत्री ने भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े की समय सीमा बढ़ाने के दिए निर्देश

0

मध्यप्रदेश में पहली बार तैयार हो रहा कम्प्यूटराइज लैंड रिकॉर्ड, राजस्व मंत्री के नवाचार को मिल रही सराहना*

*भोपाल।* प्रदेश के राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की पहल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर राजस्व विभाग द्वारा एक नवंबर से प्रारंभ किए गए भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े को आगामी 15 दिन तक बढ़ाने के निर्देश राजस्व मंत्री द्वारा समीक्षा बैठक में दिए गए। दरअसल, प्रदेश की जनता की सुविधा के लिए प्रारंभ किए गए राजस्व विभाग के नवाचार भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े में राजस्व से जुड़ी विभिन्न त्रुटियों के सुधार को लेकर जनता में बढ़ती रूचि को ध्यान में रखते हुए राजस्व मंत्री श्री राजपूत ने मंत्रालय में विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पखवाड़े की अवधि 16 नवंबर से 30 नवंबर तक बढ़ाने के निर्देश अफसरों को दिए। बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व मनीष रस्तोगी, प्रमुख राजस्व आयुक्त संजय गोयल, आयुक्त भू अभिलेख ज्ञानेश्वर पाटिल सहित विभाग के अन्य आला अधिकारी मौजूद थे। समीक्षा बैठक के दौरान श्री राजपूत ने यह भी तय किया कि सरकार द्रारा प्रारंभ किए गए मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना तथा भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े की जमीनी हकीकत जानने के लिए वह संभागवार योजनाओं की समीक्षा करेंगे। राजस्व मंत्री ने तय किया है कि समीक्षा की शुरुआत मालवांचल के इंदौर से की जाएगी। इसके बाद ग्वालियर, जबलपुर, रीवा तथा अन्य संभागों में इन योजनाओं की विस्तृत समीक्षा राजस्व मंत्री श्री राजपूत करेंगे। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर से प्रारंभ किए गए भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े में अब तक 33 लाख 6 हजार 664 अभिलेखों में विभिन्न प्रकार की त्रुटियों को सुधारा गया। उन्होंने कहा कि त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के कारण भूमि स्वामियों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्व मंत्री के निर्देश विभाग द्व्रारा भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़े की शुरुआत की गई। दरअसल, राजस्व अभिलेखों में क्षेत्रीय शब्दों के उपयोग के कारण नामों में एकरूपता नहीं रहती थी। साथ ही अभिलेख में भूमि स्वामी के प्रचलित नाम और आधार-कार्ड में वास्तविक नाम भिन्नता के कारण नामांतरण एवं बंटवारा प्रकरणों में भी क्षेत्रीय कर्मचारियों को परेशानी आती थी। बैंक से ऋण प्राप्त करने, प्रधानमंत्री किसान एवं फसल बीमा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का भी भूमिधारक लाभ नहीं ले पा रहे थे। जब इस तरह की परेशानियों से जूझ रही जनता ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान अवगत कराया तो मुख्यमंत्री के निर्देश एवं राजस्व मंत्री की पहल पर अभिलेख शुद्धिकरण की शुरुआत की गई।

*योजनाओं में गति लाने राजस्व अफसरों को दिए निर्देश :*

विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान भू-अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़ा, ड्रोन सर्वेक्षण तथा मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के कार्यों में गति लाने के लिए राजस्व मंत्री श्री राजपूत ने अफसरों को सख्त निर्देश दिए। बैठक में श्री राजपूत ने कहा कि राजस्व विभाग की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए न्यायालय परिसर, तहसील कार्यालय, जनपद कार्यालय तथा जिला पंचायत कार्यालय व कलेक्ट्रेट परिसर में डिस्प्ले बोर्ड / फ्लैक्स लगाए जाएं। उन्होंने विभाग की योजनाओं से जुड़ी छोटी-छोटी फिल्में बनाकर सोशल मीडिया के माध्यस से प्रचार करने के निर्देश अफसरों को दिए। बैठक में राजस्व मंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता जताई की आजादी के 70 साल बाद पहली बार मध्यप्रदेश में भूमि का कम्पयूटीराइज्ड रिकॉर्ड बनाया जा रहा है। उन्होंने बैठक में अफसरों को निर्देश दिए की सभी योजनाओं की लगातार मानीटिरिंग के लिए जिले के कलेक्टरों को निर्देश जारी करें ताकि किसी प्रकार की कोताही ना हो। बैठक में श्री राजपूत ने मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के तहत सीहोर और सागर जिले को प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए।

*मुख्य सड़कों से हटाया जाएगा अतिक्रमण :*

समीक्षा बैठक के दौरान राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जिले की नगरीय क्षेत्रों से गुजरने वाली मुख्य सड़कों में अतिक्रमण हटाए जाने के निर्देश राजस्व विभाग के अफसरों को दिए। उन्होंने कहा कि बेजा अतिक्रमण की वजह से सड़कों की चौड़ाई घटती जा रही है। जिसे रोकने विभाग के अफसर सख्त कदम उठाएं। श्री राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि का सर्वे कर 50 हजार ग्रामों में संपत्तिधारकों को उनका मालिकाना हक दिया जाएगा।

*वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाई जाएंगी :*

परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने निर्देश दिए हैं कि वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और दुर्घटनाओं को रोकने व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस/ पैनिक बटन तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यवसायिक वाहनों में रेट्रो रिफ्लेक्टिग टेप लगाने की योजना पर चरणबद्ध तरीके से अमल किया जाए। इसके अलावा समीक्षा बैठक में परिवहन मंत्री श्री राजपूत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 नवम्बर को प्रस्तावित भोपाल यात्रा को लेकर भी व्यवस्थाओं को लेकर अफसरों से चर्चा की।