‘एक नेता, एक पद’ के फॉर्मूले पर होगा राजस्थान कैबिनेट में फेरबदल

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राजस्थान को लेकर दिल्ली में चल रही सियासी सरगर्मियों के बीच प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं.

राजस्थान: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की संभावना है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों से बताया है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस ‘एक नेता-एक पद’ के फॉर्मूले की नीति को लागू कर सकती है. ये मंत्रिमंडल विस्तार 15 से 20 नवंबर के बीच किया जा सकता है.

“कैबिनेट फेरबदल में ‘एक नेता, एक पद’ का फॉर्मूला होगा. इस फॉर्मूले के मद्देनजर गहलोत मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों को उनके पद से हटाए जाने की संभावना है क्योंकि उन्हें पहले ही पार्टी में जिम्मेदारी दी जा चुकी है. राजस्थान पीसीसी प्रमुख गोविंद डोटासरा, पंजाब के एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी, गुजरात के एआईसीसी प्रभारी रघु शर्मा के फेरबदल से बाहर होने की संभावना है. उन्होंने खुद पार्टी के लिए काम करने का अनुरोध किया है, “.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक की थी. बैठक में राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी अजय माकन भी मौजूद थे. बैठक के बाद माकन ने कहा कि राजस्थान में राजनीतिक स्थिति, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य में 2023 के विधानसभा चुनाव के रोडमैप पर चर्चा की गई.

पायलट के 5-6 समर्थक विधायकों को बनाया जा सकता है मंत्री

सूत्रों ने ABP News को ये भी बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट के समर्थक 5 से 6 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. इस बीच बुधवार को ही सचिन पायलट ने भी संगठन महासचिव केसी वेणु गोपाल से मुलाकात की थी. पायलट पहले ही इस सिलसिले में प्रियंका गांधी से मिल चुके हैं. करीबी सूत्रों के मुताबिक पायलट ने फिर नेतृत्व से मांग की थी कि उनसे किए गए वादों को पूरा किया जाए और उनके समर्थक विधायकों को मंत्री बनाया जाए. पायलट ये भी चाहते हैं कि इस बार के विस्तार में दलित चेहरों को भी मौका मिले.

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