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इंदौर सहित देशभर में 1 जुलाई से चाकलेट कैंडी में नहीं लगेगी प्लास्टिक स्टिक

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इंदौर सहित देशभर में 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की तैयारी की जा रही है। इस वजह से आने वाले दिनों में चाकलेट कैंडी में प्लास्टिक स्टिक दिखाई नहीं देगी। वहीं चौराहों पर मिलने वाले गुब्बारों के साथ भी प्लास्टिक स्टिक नहीं मिलेगी।

भारत सरकार के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम 2021 के अनुसार प्लास्टिक व थर्माकोल से बने सिंगल यूज़ प्लस्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में मप्र पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड की टीमों द्वारा इंदौर के प्रमुख प्रतिष्ठानों में जाकर सिंगल यूज प्लास्टिक की ब्रिक्री पर रोक लगाने के लिए दुकानदारों व आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसएन द्विवेदी ने इंदौर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी व बुरहानपुर जिलों में इसके लिए दल गठित किए हैं। इंदौर में विभाग के विज्ञानी सुनील व्यास के नेतृत्व में एक टीम ने पाटनीपुरा, रानीपुरा, सियागंज क्षेत्र में प्लास्टिक की पालीथिन व अन्य उत्पाद बेचने वाले विक्रेताओं को समझाइश दी। दल ने एमआर-9 चौराहे के पास एबी रोड पर स्थित दो माॅल के अधिकारियों को सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगाने की जानकारी दी गई और यहां के प्रतिष्ठानों की जांच भी की। इस कार्रवाई के दौर मप्र पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड के अजय मिश्रा, संजय जैन व रामसंतोष शुक्ला भी उपस्थित थे।

इन प्लास्टिक उत्पादों के क्रय, विक्रय व उपयोग पर रहेगा प्रतिबंध –प्लास्टिक स्टिक सहित ईयर बड, गुब्बारों में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक स्टिक, चाकलेट कैंडी स्टिक, आइस्क्रीम स्टिक, सजावट में उपयोग होने वाले थर्माकोल, प्लास्टिक व थर्माकोल से बने प्लेट, कप, गिलास, फाेर्क, चम्मच, स्ट्रा व ट्रे, मिठाई के बक्से, निमंत्रण पत्र, सिगरेट पैकेट को कवर करने वाली पैकिंग फिल्म, प्लास्टिक स्टीकर्स, 100 माइक्रान से कम मोटाई वाले प्लास्टिक व पीवीसी के बैनर आदि। इन वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

तीस्ता सीतलवाड़ एटीएस की हिरासत में, गुजरात दंगों के मामले में साजिश रचने का आरोप

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गुजरात आतंकवादी निरोधी दस्ते (ATS) की टीम ने शनिवार को कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को हिरासत में लिया। उन्हें अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तीस्ता और दो पूर्व आईपीएस अधिकारियों पर गुजरात दंगों के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

साजिश का आरोप

गुजरात पुलिस ने इस मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट, पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार और कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर के मुताबिक सीतलवाड़ ने जकिया जाफरी के जरिए कई याचिकाएं अदालत में डालीं और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के प्रमुख और अन्य आयोगों को गलत जानकारी दी। जांच में पाया गया कि याचिका के जरिए झूठी सूचना दी गई।

इन धाराओं पर केस दर्ज

आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471(फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल), 194(झूठे सबूत देना) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2002 के दंगों के मामले में पीएम नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखने के बाद आया है।

गृहमंत्री बोले-तीस्ता के एनजीओ ने गलत जानकारी दी

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू में सीतलवाड़ पर गुजरात दंगों के बारे में पुलिस को आधारहीन जानकारी देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ का एक एनजीओ था। जिसने बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस स्टेशन में आवेदन जमा किए थे। उन्हें सच मानकर मांगा गया था। इधर गुजरात एटीएस की टीम शनिवार को मुंबई के जुहू स्थित तीस्ता के आवास पर पहुंची। उन्हें मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन ले गई, बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

जुलाई से खुल जाएगी इन राशि वालों की किस्मत, हटेगी शनि की टेढ़ी नजर

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शनि ग्रह 12 जुलाई को राशि परिवर्तन करेंगे। वे वक्री चाल चलते हुए कुंभ राशि से निकलकर मकर राशि में आएंगे। वक्री शनि का गोचर सभी राशियों को प्रभावित करेगा। साथ ही शनि राशि परिवर्तन का असर उन राशि वालों पर पड़ेगा। जिन पर साढ़े साती या ढैय्या चल रही है।

खत्म होगी 2 राशियों की ढैय्या

शनि देव फिलहाल कुंभ राशि में हैं। इस कारण कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर ढैय्या चल रही है। इन राशियों पर 29 अप्रैल से ढैय्या शुरू हुई। वहीं मिथुन और तुला राशि से शनि की ढैय्या खत्म हुई थी। हालांकि अब फिर वक्री शनि के मकर राशि में आते ही दोनों राशियों पर ढैय्या शुरू हो जाएगी। साथ ही कर्क और वृश्चिक राशिवालों को राहत मिलेगी।

कर्क-वृश्चिक वालों को मिलेगी सफलता

12 जुलाई को शनिदेव के मकर राशि में प्रवेश करते ही कर्क और वृश्चिक राशि से ढैय्या समाप्त हो जाएगी। साथ ही इन्हें कामों में सफलता मिलने लगेगी। अटके हुए काम बनेंगे। रुका हुआ पैसा वापस मिलेगा। तनाव और शारीरिक कष्ट कम होंगे। प्रमोशन, इंक्रीमेंट और व्यापार में वृद्धि होगी। अगर कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है, तो काफी लाभ देंगे। इस दौरान शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय जरूर करें।

शनि शांति मंत्र स्तुति

राज्य नष्ट हुए राजा नल को शनिदेव ने स्वप्न में अपने एक प्रार्थना मंत्र का उपदेश दिया था। उसी नाम स्तुति से उन्हें पुनः राज्य उपलब्ध हुआ था। उस स्तुति से शनि की प्रार्थना करनी चाहिए। जो जातक हर शनिवार को इसका पाठ करता है। उसे कभी शनि की पीड़ा नहीं भोगनी पड़ती।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! जुलाई में सरकार देगी 3 बड़े लाभ

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अगले महीने केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को तीन तोहफे दे सकती है। सरकार कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि के साथ बकाया राशि के भुगतान पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी के साथ बकाया डीए का भुगतान और पीएफ ब्याज की राशि भी सरकार कर्मचारियों को दे सकती है। बता दें कर्मचारियों को 18 महीने का डीए नहीं मिला है। सरकार ने कोरोना महामारी के कारण इसे होल्ड पर रखा था।

बकाया महंगाई भत्ता का भुगतान

रिपोर्ट्स की माने तो केंद्र कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ता का भुगतान जुलाई में कर सकती है। जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 माह का डीए बकाया है। कहा जा रहा है कि कर्मचारियों को दो लाख रुपए का बकाया डीए एरियर मिल सकता है।

महंगाई भत्ता में वृद्धि

वहीं केंद्र सरकार जुलाई में केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में वृद्धि कर सकती है। सरकार कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में 4 से 5 फीसदी तक इजाफा कर सकती है। फिलहाल 34 फीसदी की दर से कर्मचारियों को डीए मिल रहा है। केंद्र ने मार्च में तीन फीसदी डीए बढ़ाया था। बता दें मई में रिटेल महंगाई दर 7.04 फीसदी रही। यह आरबीआई द्वारा तय टारगेट से अधिक है। यदि सरकार डीए में बढ़ोतरी करती है, तो 50 लाख से अधिक कर्मचारियों को 65 लाख पेंशनर्स को इसका लाभ मिलेगा।

पीएफ ब्याज मिलेगा

केंद्र सरकार ईपीएफओ के ब्याज दर मुहर लगा चुकी है। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ईफीएफ पर 8.01 प्रतिशत ब्याज दर तय है। पिछले वित्त वर्ष में ब्याज दर 8.5 फीसदी थी। ब्याज दर कम होने से लाखों नौकरीपेशा को झटका लगा है। कहा जा रहा है कि सरकार अगले महीने कर्मचारियों के बैंक खाते में पीएफ के ब्याज की रकम ट्रांसफर कर सकती है।

शिंदे गुट ने बढ़ाई होटल की बुकिंग, अब 30 जून तक गुवाहाटी में ठहरेंगे

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महाराष्ट्र में सियासी घमासान जारी है। अब तक हाई प्रोफाइल ड्रामा हुआ, लेकिन तस्वीर साफ नहीं है कि आगे क्या होगा? सभी की नजर महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पर रही। डिप्टी स्पीकर ने आज दो बड़े कदम उठाए। पहला- उनके खिलाफ शिंदे गुट द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया और दूसरा – बागी गुट के 16 विधायकों को नोटिस कर दिया गया है। उनके पास जवाब देने के लिए सोमवार शाम 5 बजे तक का मौका है। इस बीच, मुंबई से लेकर दिल्ली और गुवाहाटी तक बैठकों का दौर जारी है। उद्धव ठाकरे हर तरह का कार्ड खेल रहे हैं, वहीं संजय राउत की बयानबाजी भी जारी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस भी Wait n watch की पॉलिसी अपनाए हुए हैं। भाजपा भी यही कर रही है, हालांकि अंदरखाने रणनीति पर काम पहले दिन से जारी है।

महाराष्ट्र में सियासी हलचल के बीच शिंदे का ट्वीट

एकनाथ शिंदे ने एक ट्वीट किया है। कहा कि शिवसेना कार्यकर्ताओं को समझना चाहिए कि मैं शिवसेना और उसके कार्यकर्ताओं को महाविकास अघाडी सरकार के चंगुल से मुक्त करना चाहता हूं। मैं इसके लिए संघर्ष कर रहा हूं। यह लड़ाई पार्टी कार्यकर्ताओं की बेहतरी के लिए है।

मध्‍य प्रदेश में नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष की आयु 21 वर्ष करने के अध्यादेश का प्रारूप विधि विभाग को भेजा

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नगर पालिका और नगर परिषद का अध्यक्ष 21 वर्ष की आयु का पार्षद भी बन सकेगा। इसके लिए सरकार द्वारा लाए जा रहे नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश के प्रारूप को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह के अनुमोदन के बाद शुक्रवार को विधि एवं विधायी विभाग भेज दिया। विभाग विधिक पक्षों का अध्ययन करने के बाद इसे लौटाएगा, जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह अध्यादेश की अधिसूचना जारी हो जाएगी।

राज्य निर्वाचन आयोग 16 नगर निगम, 76 नगर पालिका और 255 नगर परिषदों के चुनाव दो चरण में कराया जा रहा है। निर्वाचन की प्रक्रिया 18 जुलाई को पूरी हो जाएगी। इसके बाद वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पार्षदों में से नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। इसके लिए अभी पात्रता आयु 25 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित है, जबकि पार्षद पद के लिए पात्रता आयु 21 या उससे अधिक तय है।

कांग्रेस सरकार ने 2019 में नगर पालिका विधि में संशोधन करके अध्यक्ष का चुनाव जनता की जगह पार्षदों के माध्यम से कराए जाने की व्यवस्था लागू कर दी थी लेकिन अध्यक्ष की पात्रता आयु में संशोधन नहीं हो पाया। तब से ही यह प्रविधान प्रभावी है। अब सरकार ने तय किया है कि जो पात्रता आयु पार्षद के लिए निर्धारित है, वही अध्यक्ष के लिए भी रहेगी। इसके लिए अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा का मानूसन सत्र 25 जुलाई है और 18 जुलाई को नगरीय निकायों के निर्वाचन की प्रक्रिया हो जाएगी, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है। विभागीय मंत्री के अनुमोदन मिलने के बाद अध्यादेश के प्रारूप को विधि एवं विधायी विभाग विधिक पहलूओं का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है। वहां से लौटने पर इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुमोदन से राज्यपाल को अनुमति के लिए भेजा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 28 जून को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में भी अध्यादेश का विचार के लिए रखा जा सकता है।

भितरघात करने वाले कांग्रेस प्रवक्ता ब्रजेश पांडे निष्कासित

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विपक्षी पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे प्रदेश प्रवक्ता ब्रजेश पांडे को छह साल के लिए सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी को लगातार पांडे के विरुद्ध अनुशासनहीनता की शिकायत प्राप्त हो रही थी। इस आधार पर यह कदम उठाया गया है।

प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि चाहे कोई भी हो, पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पांडे विपक्षी पार्टी के साथ तालमेल बनाकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे थे। इस आधार पर उन्हें पार्टी की सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर इसकी सूचना जिला शहर कांग्रेस कमेटी रीवा को भी दे दी है।

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अजय सिंह यादव ने भाजपा पर आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों को नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याश्ाी बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा कि इंदौर, सागर, टीकमगढ़ सहित अन्य नगरीय निकायों में आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों को टिकट दिया है। जिन्होंने इन्हें टिकट देने की अनुशंसा की, उनके नाम अब तक भाजपा ने सार्वजनिक नहीं किए हैं। इससे साफ होता है कि भाजपा कुछ व्यक्तियों का टिकट काटकर जनता को भ्रमित करना चाहती है पर मतदाता समझदार है और चुनाव के माध्यम से अपनी भावना प्रकट करेगा।

उद्धव ठाकरे की शरद पवार के मीटिंग खत्म, कल बुलाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

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हाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा है कि वो बागियों के सामने हथियार नहीं डालेंगे और आर-पार की लड़ाई को भी तैयार हैं। सरकार बचाने की कोशिशों को लेकर उनकी शरद पवार के साथ बैठक हुई। इस बैठक में एनसीपी चीफ शरद पवार, डिप्टी सीएम अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल और कैबिनेट मंत्री जयंत पाटिल मातोश्री पहुंचे। करीब 2 घंटे तक इस बैठक में सरकार बचाने की संभावनाओं पर गहन विमर्श हुआ। कल यानी शनिवार को शिवसेना ने कल दोपहर 1 बजे मुंबई के सेना भवन में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। ।

उधर, तमाम धमकियों और भावनात्मक अपील के बावजूद बागी विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज महाराष्ट्र शिवसेना के एक और विधायक दिलीप लांडे, गुवाहाटी होटल पहुंचे और बागी विधायकों के साथ शामिल हो गये। इनके अलावा राजेश क्षीरसागर के भी गुवाहाटी पहुंचने की खबर है। इन बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे का दावा है कि अब उन्हें शिवसेना के 38 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। आपको बता दें कि दल-बदल कानून से बचने से के लिए उन्हें 37 विधायकों की जरुरत है। ऐसे में एक और विधायक के जुड़ने से उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है।

महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष ने विधायक अजय चौधरी को राज्य विधानसभा में शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त करने के शिवसेना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस संबंध में डिप्टी स्पीकर कार्यालय की ओर से शिवसेना कार्यालय को पत्र भेजा गया है।

शिवसेना चीफ और सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वो पार्टी के अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं, बशर्ते बागी विधायक वापस लौटें और खुद उनसे बात करें। वैसे उन्होंने ये भी कहा कि वो हथियार नहीं डालेंगे और अगर बागी विधायक वापस नहीं लौटे, तो अब आर-पार की लड़ाई होगी।

बागी विधायकों की डिप्टी स्पीकर को हटाने की तैयारी, अयोग्य घोषित करने के अधिकार को चुनौती

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एक तरफ शिवसेना बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बागी विधायक डिप्टी स्पीकर को ही हटाने की मांग कर रहे हैं। गुवाहाटी में मौजूद शिंदे गुट के दो निर्दलीय विधायक महेश बाल्दी और विनोद अग्रवाल ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने के लिए नोटिस भेजा है। आपको बता दें कि डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल एनसीपी (NCP) के नेता हैं। इन्होंने डिप्टी स्पीकर द्वारा शिवसेना के एमएलए अजय चौधरी को सदन का नेता नियुक्त किए जाने का भी विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के बागी विधायकों की बैठक में उन्होंने डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने का प्रस्ताव लेने की योजना बनाई है। बागी गुट के 46 विधायकों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव तैयार करने के लिए काम जारी है।

शिवसेना की चाल का जवाब

दरअसल शिवसेना ने बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखा, जिसमें 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की। शिवसेना ने कल 12 और आज 4 और लोगों के नाम डिप्टी स्पीकर को भेजे। डिप्टी स्पीकर को अब इन 12 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग पर फैसला लेना है। इसी की प्रतिक्रिया में दो निर्दलीय विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेज दिया।

नोटिस से क्या होगा फायदा?

नोटिस भेजनेवाले दोनों विधायकों ने अरुणाचल प्रदेश के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए डिप्टी स्पीकर से अयोग्यता याचिका पर फैसला नहीं करने का आग्रह किया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकते हैं, यदि उनके खिलाफ “अविश्वास” प्रस्ताव लंबित हो। विधायकों में से एक महेश बाल्दी ने जिरवाल से कहा कि वह किसी को भी अयोग्य घोषित करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वे खुद अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विधायक अयोग्य घोषित किए गए तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

क्या बिन ठाकरे होगी शिवसेना? उद्धव के हाथ से सरकार ही नहीं पार्टी भी जाने का खतरा

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महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। जहां उद्धव ठाकरे और उनके समर्थक नेता बागी विधायकों से सामने आकर इस्तीफा मांगने की अपील कर रहे हैं। दूसरी ओर एकनाथ शिंदे का कहना है कि उद्धव के साथ वाली शिवसेना अब पुरानी पार्टी नहीं रह गई है। शिंदे ने दावा किया है कि निर्दलीय और शिवसेना के 42 से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं। यानी असली शिवसेना ही उनके साथ है। इतना ही नहीं शिंदे ने एक दिन पहले ही महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर को 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी भेजी, जिसमें शिवसेना के विधायक दल के चीफ व्हिप को हटाने की बात कही गई है।

शिंदे के इस कदम को शिवसेना प्रमुख और सीएम उद्धव ठाकरे के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, पार्टी के मुख्य व्हिप को हटाने का फैसला आमतौर पर दल के प्रमुख का ही होता है। अपने नेताओं के इतनी बड़ी संख्या में टूटने और उनके बगावती तेवर देखने के बाद उद्धव ठाकरे ने खुद मंगलवार को सीएम आवास छोड़ दिया और अपने घर मातोश्री लौट गए। उन्होंने बागी विधायकों से इस्तीफा तैयार होने की बात भी कही।

ऐसे में यह सवाल अभी भी सामने हैं कि क्या शिवसेना के दो-तिहाई विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे पार्टी पर अपना दावा ठोक सकते हैं? अगर शिवसेना टूटती है तो उसका तीर-कमान का निशान किस धड़े के पास रहेगा? इसके अलावा पार्टी टूटने पर असली शिवसेना कौन है, इसका फैसला कौन करेगा?

क्या शिवसेना पर दावा ठोक सकते हैं एकनाथ शिंदे?
एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी के होटल में शुरुआत में विधायकों की संख्या 34 थी। हालांकि, मुंबई से बुधवार और गुरुवार को कुछ और विधायक गुवाहाटी पहुंच गए। शिंदे गुट की ओर से कहा गया है कि उसके पास 40 शिवसेना के विधायकों का समर्थन है, जबकि छह से ज्यादा निर्दलीय भी उनके साथ हैं। इस धड़े ने गुवाहाटी में रुके 42 विधायकों की एक तस्वीर भी जारी की थी, जिसमें 35 शिवसेना के एमएलए शामिल थे। यानी शिंदे के पार्टी तोड़ने और दल-बदल कानून से बचने के दावे से महज दो कम। ऐसे में माना जा सकता है कि शिंदे के पास विधायकों का जरूरी समर्थन मौजूद है।