मध्‍य प्रदेश में नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष की आयु 21 वर्ष करने के अध्यादेश का प्रारूप विधि विभाग को भेजा

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नगर पालिका और नगर परिषद का अध्यक्ष 21 वर्ष की आयु का पार्षद भी बन सकेगा। इसके लिए सरकार द्वारा लाए जा रहे नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश के प्रारूप को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह के अनुमोदन के बाद शुक्रवार को विधि एवं विधायी विभाग भेज दिया। विभाग विधिक पक्षों का अध्ययन करने के बाद इसे लौटाएगा, जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह अध्यादेश की अधिसूचना जारी हो जाएगी।

राज्य निर्वाचन आयोग 16 नगर निगम, 76 नगर पालिका और 255 नगर परिषदों के चुनाव दो चरण में कराया जा रहा है। निर्वाचन की प्रक्रिया 18 जुलाई को पूरी हो जाएगी। इसके बाद वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पार्षदों में से नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। इसके लिए अभी पात्रता आयु 25 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित है, जबकि पार्षद पद के लिए पात्रता आयु 21 या उससे अधिक तय है।

कांग्रेस सरकार ने 2019 में नगर पालिका विधि में संशोधन करके अध्यक्ष का चुनाव जनता की जगह पार्षदों के माध्यम से कराए जाने की व्यवस्था लागू कर दी थी लेकिन अध्यक्ष की पात्रता आयु में संशोधन नहीं हो पाया। तब से ही यह प्रविधान प्रभावी है। अब सरकार ने तय किया है कि जो पात्रता आयु पार्षद के लिए निर्धारित है, वही अध्यक्ष के लिए भी रहेगी। इसके लिए अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा का मानूसन सत्र 25 जुलाई है और 18 जुलाई को नगरीय निकायों के निर्वाचन की प्रक्रिया हो जाएगी, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है। विभागीय मंत्री के अनुमोदन मिलने के बाद अध्यादेश के प्रारूप को विधि एवं विधायी विभाग विधिक पहलूओं का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है। वहां से लौटने पर इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुमोदन से राज्यपाल को अनुमति के लिए भेजा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 28 जून को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में भी अध्यादेश का विचार के लिए रखा जा सकता है।

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