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पोलार्ड के आने से बदला खेल, अब रोहित के पाले में गेंद! IPL 2027 में फिर संभाल सकते हैं मुंबई इंडियंस की कप्तानी

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आईपीएल 2027 से पहले मुंबई इंडियंस में बड़े बदलावों की तैयारी दिखाई दे रही है। टीम ने कायरन पोलार्ड को नया हेड कोच नियुक्त किया है। इसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल टीम की कप्तानी को लेकर उठ रहा है। खबरों के मुताबिक, पांच बार मुंबई इंडियंस को आईपीएल चैंपियन बनाने वाले रोहित शर्मा एक बार फिर टीम की कमान संभाल सकते हैं।

हार्दिक पांड्या की कप्तानी में पिछले कुछ सीजन में टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। ऐसे में फ्रेंचाइजी अब अपने पुराने सफल कप्तान रोहित शर्मा की ओर लौटने पर विचार कर रही है।

पोलार्ड बने हेड कोच, सपोर्ट स्टाफ में भी बदलाव
मुंबई इंडियंस ने 24 अक्टूबर को कायरन पोलार्ड को हेड कोच बनाने की आधिकारिक घोषणा की थी। उन्होंने महेला जयवर्धने की जगह ली है। इसके साथ ही टीम के कोचिंग स्टाफ में भी बदलाव किए गए हैं। रॉबिन उथप्पा को बैटिंग कोच और मिचेल मैक्लेनाघन को बॉलिंग कोच की जिम्मेदारी दी गई है।

पोलार्ड और रोहित की जोड़ी मुंबई इंडियंस के सफल दौर का अहम हिस्सा रही है। दोनों के अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि टीम अगले सीजन में एक बार फिर पुराने संयोजन के साथ मैदान पर उतर सकती है।

रोहित की कप्तानी में मुंबई ने जीते थे पांच खिताब
रोहित शर्मा मुंबई इंडियंस के सबसे सफल कप्तान रहे हैं। उनकी अगुवाई में टीम ने 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 में आईपीएल का खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, 2024 सीजन से पहले फ्रेंचाइजी ने कप्तानी हार्दिक पांड्या को सौंप दी थी।

अब 2027 सीजन से पहले रोहित की वापसी की चर्चा तेज हो गई है। इंडियन एक्सप्रेस की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रेंचाइजी ने रोहित को फिर से कप्तानी संभालने का प्रस्ताव दिया है और उन्होंने इसके लिए सहमति दे दी है।

हार्दिक पांड्या के भविष्य पर भी नजर
कप्तानी में बदलाव की चर्चा के बीच हार्दिक पांड्या के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके दूसरी फ्रेंचाइजी में ट्रेड होने की संभावनाओं पर भी चर्चा है। हालांकि, यदि हार्दिक मुंबई के साथ बने रहते हैं तो रिपोर्ट के मुताबिक वह रोहित की कप्तानी में खेलने के लिए तैयार हैं।

क्या पुराने कप्तान के साथ लौटेगी मुंबई की किस्मत?
मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल 2027 काफी अहम माना जा रहा है। टीम पिछले कुछ सीजन में लगातार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी है। ऐसे में पोलार्ड की कोचिंग और रोहित की संभावित कप्तानी के साथ फ्रेंचाइजी नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार कर सकती है।

‘जेलर 2’ ने तेलुगु में तोड़े 5 फिल्मों के रिकॉर्ड, बनी 2026 की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म

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सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। तमिल सिनेमा में शानदार प्रदर्शन के बाद फिल्म के तेलुगु संस्करण ने भी दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बनाई है। फिल्म ने तेलुगु बॉक्स ऑफिस पर पांच फिल्मों के रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए एक नया मुकाम हासिल किया है। इसके साथ ही यह 2026 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में छठे स्थान पर पहुंच गई है।

फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज के शुरुआती दिनों से ही इसके कलेक्शन में तेजी देखने को मिली। रजनीकांत की लोकप्रियता और फिल्म के एक्शन से भरपूर अंदाज ने दक्षिण भारतीय बाजार में इसे बड़ी सफलता दिलाई है।

दुनियाभर में 700 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई
‘जेलर 2’ ने महज 12 दिनों में दुनियाभर में लगभग 733 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया था। इस प्रदर्शन के साथ फिल्म ने रजनीकांत की ही ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘2.0’ के लगभग 691 करोड़ रुपये के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्म बन गई।

फिल्म ने भारत में भी शानदार कारोबार किया है। तमिल के अलावा तेलुगु, हिंदी और कन्नड़ संस्करणों से इसे अच्छी कमाई हुई है। खास तौर पर तेलुगु बाजार में फिल्म की सफलता ने इसके कुल कारोबार को मजबूती दी है।

दमदार स्टारकास्ट ने बढ़ाया फिल्म का आकर्षण
नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रजनीकांत के साथ मोहनलाल, शिवराजकुमार, जैकी श्रॉफ, राम्या कृष्णन, विद्या बालन, मिथुन चक्रवर्ती और एसजे सूर्या जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म का निर्माण सन पिक्चर्स ने किया है।

‘जेलर 2’ की सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि रजनीकांत का स्टारडम दक्षिण भारतीय सिनेमा के साथ-साथ देशभर के बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ा प्रभाव रखता है।

डिंडोरी में कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास की नई संभावनाएं हैं : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डिंडोरी जिले में कृषि के क्षेत्र में नवाचार और विकास को लेकर सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है। यहां कृषि विकास की नई संभावनाएं हैं, जो उत्साहजनक हैं। डिंडोरी उनके लिए विशेष महत्व रखने वाला जिला है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को इंदौर एयरपोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिंडोरी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों को खेती की नई संभावनाओं, आधुनिक तकनीकों और नवाचारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। डिंडोरी जैसे जनजातीय बहुल जिले में कृषि के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक प्रयास सराहनीय हैं। राज्य सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आर्थिक समृद्धि के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में कोदो, कुटकी के साथ धान की खरीदी का निर्णय लिया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज का उचित लाभ मिलेगा और परंपरागत कृषि उत्पादों को भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा।

किसान कल्याण वर्ष में गौपालन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से कृषि और पशुपालन को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस वर्ष प्रत्येक विकासखंड में गौमाता प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक के वृंदावन ग्राम में उत्कृष्ट गौपालकों को पुरस्कृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गौपालन को प्रोत्साहित करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

डिंडोरी को मिली आयुर्वेद महाविद्यालय की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डिंडोरी जिले को हाल ही में आयुर्वेद महाविद्यालय की सौगात मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी जिले को अनेक विकास कार्यों की सौगात मिली है। इन कार्यों से डिंडोरी की प्रगति को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में जिला विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं।

बलराम कृषि महोत्सव की श्रृंखला का 49वां आयोजन
कार्यक्रम में राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत भगवान बलराम के नाम पर बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। डिंडोरी में आयोजित यह श्रृंखला का 49वां कार्यक्रम है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर विधायक ओमप्रकाश धुर्वे, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रेश परस्ते, कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इंदौर में वरिष्ठ विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल भी मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का किया आत्मीय स्वागत

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उनका प्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री नड्डा के छत्तीसगढ़ आगमन को लेकर उनका अभिनंदन किया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आत्मीय मुलाकात हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत के अवसर पर प्रदेश के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और केंद्र एवं राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों को लेकर भी चर्चा की संभावना जताई गई।

धान खरीदी में किसानों को नहीं होगी परेशानी, व्यवस्था सुचारू रखना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश के किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। धान खरीदी प्रक्रिया को सुचारू, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और खरीदी केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहें। इसके साथ ही बारदाने, तौल व्यवस्था, परिवहन और धान के सुरक्षित भंडारण से जुड़ी तैयारियों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की मजबूत आधारशिला हैं। उनकी मेहनत और उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और धान खरीदी व्यवस्था की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।

सरकार का उद्देश्य है कि धान खरीदी का पूरा कार्य समयबद्ध तरीके से संपन्न हो और किसानों को किसी भी स्तर पर परेशानी का सामना न करना पड़े।

गौपालक महिलाओं ने सुनाई सफलता की कहानी तो पीएम मोदी हुए मुरीद, बेटियों की शिक्षा को लेकर दी खास सलाह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दौरान बनासकांठा के भिलडी स्थित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) पहुंचे। यहां उन्होंने महिला डेयरी किसानों और गौपालक महिलाओं से मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी जिंदगी में आए बदलावों की कहानी प्रधानमंत्री के साथ साझा की। उनकी उपलब्धियां सुनकर पीएम मोदी काफी प्रभावित नजर आए।

प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि बनासकांठा में हुई यह बातचीत बेहद खुशी देने वाली है। कृषि, डेयरी और पशुपालन किस तरह महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ा रहे हैं, यह देखकर अच्छा लगता है।

नर्मदा का पानी पहुंचा तो बदली किसानों की किस्मत
बातचीत के दौरान एक महिला ने प्रधानमंत्री को बताया कि नर्मदा नहर का पानी उनके खेतों तक पहुंचने से खेती की तस्वीर बदल गई। पहले उनके परिवार को लगता था कि खेतों तक पानी कभी नहीं पहुंचेगा, लेकिन नहर बनने के बाद कच्छ के रण तक पानी पहुंचने लगा। महिला ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया और बताया कि सिंचाई की सुविधा ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गोबर बना कमाई का नया जरिया
एक अन्य महिला ने गोबरधन योजना का जिक्र करते हुए बताया कि पहले पशुओं के गोबर को बेकार समझा जाता था और उससे उपले बनाए जाते थे। लेकिन अब गोबर का इस्तेमाल आमदनी बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। पशुओं का गोबर अब उनके लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन गया है। महिला की बात सुनकर पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में मजाक भी किया।

पीएम मोदी ने दी बेटियों को पढ़ाने की सलाह
महिलाओं की सफलता की कहानियां सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सभी महिलाएं खूब प्रगति करें और बनासकांठा को आगे लेकर जाएं। साथ ही उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उन्हें पढ़ाने में कभी कोई कमी नहीं रखनी चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि बेटियां पढ़-लिखकर आगे आएंगी तो समाज और परिवार में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि बेटियों को घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें शिक्षा और आगे बढ़ने के पूरे अवसर दें।

महिला सशक्तिकरण की बन रही नई मिसाल
प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बातचीत में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, पशुपालन, सिंचाई और कृषि से जुड़े अनुभव सामने आए। इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि डेयरी और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

देशभर में जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, 25 जनवरी से शुरू होगी जनसंख्या गणना; जानें पूरा शेड्यूल

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देश में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण तारीखों का ऐलान कर दिया है। जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का काम 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक देश के अधिकांश हिस्सों में किया जाएगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में जनगणना की समय-सीमा और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।

सरकार के मुताबिक, जनगणना के लिए सामान्य संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। हालांकि, चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना अलग-अलग तारीखों पर कराई जाएगी।

जनगणना 2027 का पूरा शेड्यूल
जनगणना के दूसरे चरण के लिए निर्धारित प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
– 10 से 24 जनवरी 2027: अधिकांश क्षेत्रों में स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा।
– 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027: घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना।
– 1 से 5 मार्च 2027: पुनरीक्षण कार्य (Revisional Round)।
– 1 मार्च 2027: देश के अधिकांश हिस्सों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि।

इन राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर होगी जनगणना
चुनावी कार्यक्रम को देखते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना का अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
– 16 से 30 नवंबर 2026: स्व-गणना की सुविधा।
– 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027: घर-घर जाकर जनसंख्या गणना।
– 5 से 9 जनवरी 2027: पुनरीक्षण कार्य।
मणिपुर के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा।

बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में पहले होगी गणना
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का कार्य सितंबर 2026 में ही निर्धारित किया गया था। यहां 1 से 30 सितंबर तक गणना और 1 से 5 अक्टूबर तक पुनरीक्षण कार्य का कार्यक्रम रखा गया है।

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना
जनगणना 2027 कई मायनों में खास होगी। देश में पहली बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है, जिसके माध्यम से वे निर्धारित अवधि में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

इसके अलावा, आगामी जनगणना में जातिगत गणना को भी शामिल किया गया है। इस विशाल अभियान में लगभग 30 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं ली जाएंगी।

गौरतलब है कि भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। कोरोना महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना टल गई थी। अब करीब 16 वर्षों के अंतराल के बाद देश में जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। इससे देश की आबादी, सामाजिक संरचना, शिक्षा, रोजगार और विकास योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध होंगे।

भूटान में ग्लेशियल झील फटी, तबाही का खतरा! बंगाल के संकोश तट पर हाई अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

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पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियल झील फटने से अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में भी खतरे की आशंका बढ़ गई है। संकोश नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

शिंताफू झील फटने से आया पानी का तेज बहाव
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में वकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू (Shintaphu) ग्लेशियल झील में अचानक पानी का बांध टूट गया। इसके बाद झील से भारी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। पानी के तेज बहाव ने भूटान के गासा त्साचू क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। लाया गांव को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा भी बह गया, जिससे इस दूरस्थ क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हुआ है।

भूटान के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र को पहले ही खाली करा लिया था। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

बंगाल और असम में बाढ़ का अलर्ट
झील से निकला पानी मोफू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। इस संभावित खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी सहित उत्तर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। असम के धुबरी समेत सीमावर्ती निचले इलाकों में भी प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने कुमारग्राम, चांगमारी और आसपास के गांवों के लोगों से सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन की ओर से माइक के जरिए लोगों को चेतावनी दी जा रही है।

NDRF और SDRF की टीमें तैनात
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। कूचबिहार के तूफानगंज और बक्सीरहाट क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के निगरानी केंद्रों को भी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत की ओर से जारी विशेष बाढ़ एडवाइजरी में आशंका जताई गई है कि पानी 6 से 8 घंटे के भीतर भारत-भूटान सीमा तक पहुंच सकता है। हालांकि, पानी की वास्तविक मात्रा और निचले इलाकों पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)?
ग्लेशियरों के पिघलने से पहाड़ों में बड़ी-बड़ी झीलें बन जाती हैं। इन झीलों को रोकने वाले बर्फ या चट्टानों के प्राकृतिक बांध के अचानक टूटने पर जमा पानी तेज गति से बाहर निकलता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। इस तरह की बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी लेकर आती है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

फिलहाल भारत और भूटान के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाना है।

खेतों में फंसे काले हिरणों के रेस्क्यू अभियान का जायजा लेने पहुंचे CM मोहन यादव, हेलीकॉप्टर से हो रहा रेस्क्यू

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने खेतों में फंसे काले हिरणों (कृष्णमृग) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ कर रहे रेस्क्यू
किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की विशेष टीम बुलाई है। यह टीम आधुनिक बोमा पद्धति के जरिए काले हिरणों और नीलगाय को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर रही है। इस अभियान में हेलीकॉप्टर की भी मदद ली जा रही है।

अब तक 1,236 से अधिक काले हिरणों का रेस्क्यू
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अभियान के तहत अब तक 1,236 से अधिक काले हिरणों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इन्हें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर, श्योपुर के वन क्षेत्रों और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों और आवश्यक उपकरणों की मदद भी ली जा रही है।

किसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहें और वन्यजीवों को भी किसी प्रकार की चोट या नुकसान न पहुंचे। हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति द्वारा वन्यजीवों का रेस्क्यू दक्षिण एशिया में अपनी तरह की पहली पहल है। उन्होंने वन विभाग और अभियान में जुटी विशेषज्ञ टीम के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस अभियान की सफलता से देश के अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। शाजापुर में यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके बाद उज्जैन जिले में नीलगाय के रेस्क्यू की योजना है।

चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर अमित शाह ने CM विष्णु देव साय से की चर्चा, प्रदेश के हालात की ली जानकारी

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चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर केंद्र सरकार सतर्क है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से फोन पर चर्चा कर प्रदेश की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने चक्रवात के संभावित प्रभावों और उससे निपटने के लिए राज्य सरकार की तैयारियों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश हो रही है, लेकिन फिलहाल कहीं से भी बाढ़ या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को समन्वय के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

केंद्र सरकार ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों से भी चर्चा की है। उन्होंने प्रभावित राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। शाह ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय हैं। चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने और अतिरिक्त जरूरतों का पता लगाने के लिए प्रभावित राज्यों में अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भी भेजे जाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के सहयोग और सहायता के आश्वासन के लिए अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।