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गौपालक महिलाओं ने सुनाई सफलता की कहानी तो पीएम मोदी हुए मुरीद, बेटियों की शिक्षा को लेकर दी खास सलाह

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दौरान बनासकांठा के भिलडी स्थित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) पहुंचे। यहां उन्होंने महिला डेयरी किसानों और गौपालक महिलाओं से मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़कर अपनी जिंदगी में आए बदलावों की कहानी प्रधानमंत्री के साथ साझा की। उनकी उपलब्धियां सुनकर पीएम मोदी काफी प्रभावित नजर आए।

प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा कि बनासकांठा में हुई यह बातचीत बेहद खुशी देने वाली है। कृषि, डेयरी और पशुपालन किस तरह महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ा रहे हैं, यह देखकर अच्छा लगता है।

नर्मदा का पानी पहुंचा तो बदली किसानों की किस्मत
बातचीत के दौरान एक महिला ने प्रधानमंत्री को बताया कि नर्मदा नहर का पानी उनके खेतों तक पहुंचने से खेती की तस्वीर बदल गई। पहले उनके परिवार को लगता था कि खेतों तक पानी कभी नहीं पहुंचेगा, लेकिन नहर बनने के बाद कच्छ के रण तक पानी पहुंचने लगा। महिला ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया और बताया कि सिंचाई की सुविधा ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गोबर बना कमाई का नया जरिया
एक अन्य महिला ने गोबरधन योजना का जिक्र करते हुए बताया कि पहले पशुओं के गोबर को बेकार समझा जाता था और उससे उपले बनाए जाते थे। लेकिन अब गोबर का इस्तेमाल आमदनी बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। पशुओं का गोबर अब उनके लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत बन गया है। महिला की बात सुनकर पीएम मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में मजाक भी किया।

पीएम मोदी ने दी बेटियों को पढ़ाने की सलाह
महिलाओं की सफलता की कहानियां सुनने के बाद प्रधानमंत्री ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि सभी महिलाएं खूब प्रगति करें और बनासकांठा को आगे लेकर जाएं। साथ ही उन्होंने बेटियों की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उन्हें पढ़ाने में कभी कोई कमी नहीं रखनी चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा कि बेटियां पढ़-लिखकर आगे आएंगी तो समाज और परिवार में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि बेटियों को घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें शिक्षा और आगे बढ़ने के पूरे अवसर दें।

महिला सशक्तिकरण की बन रही नई मिसाल
प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बातचीत में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, पशुपालन, सिंचाई और कृषि से जुड़े अनुभव सामने आए। इन महिलाओं की कहानियां बताती हैं कि डेयरी और पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

देशभर में जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, 25 जनवरी से शुरू होगी जनसंख्या गणना; जानें पूरा शेड्यूल

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देश में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण तारीखों का ऐलान कर दिया है। जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना का काम 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक देश के अधिकांश हिस्सों में किया जाएगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में जनगणना की समय-सीमा और विशेष क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम की जानकारी दी गई है।

सरकार के मुताबिक, जनगणना के लिए सामान्य संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। हालांकि, चुनाव वाले राज्यों और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनगणना अलग-अलग तारीखों पर कराई जाएगी।

जनगणना 2027 का पूरा शेड्यूल
जनगणना के दूसरे चरण के लिए निर्धारित प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
– 10 से 24 जनवरी 2027: अधिकांश क्षेत्रों में स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा।
– 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027: घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना।
– 1 से 5 मार्च 2027: पुनरीक्षण कार्य (Revisional Round)।
– 1 मार्च 2027: देश के अधिकांश हिस्सों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि।

इन राज्यों में अलग-अलग तारीखों पर होगी जनगणना
चुनावी कार्यक्रम को देखते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड के गैर-बर्फबारी वाले क्षेत्रों में जनगणना का अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
– 16 से 30 नवंबर 2026: स्व-गणना की सुविधा।
– 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027: घर-घर जाकर जनसंख्या गणना।
– 5 से 9 जनवरी 2027: पुनरीक्षण कार्य।
मणिपुर के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग से घोषित किया जाएगा।

बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में पहले होगी गणना
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऐसे क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का कार्य सितंबर 2026 में ही निर्धारित किया गया था। यहां 1 से 30 सितंबर तक गणना और 1 से 5 अक्टूबर तक पुनरीक्षण कार्य का कार्यक्रम रखा गया है।

पहली बार डिजिटल माध्यम से होगी जनगणना
जनगणना 2027 कई मायनों में खास होगी। देश में पहली बार जनगणना की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन और ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है, जिसके माध्यम से वे निर्धारित अवधि में अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

इसके अलावा, आगामी जनगणना में जातिगत गणना को भी शामिल किया गया है। इस विशाल अभियान में लगभग 30 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों की सेवाएं ली जाएंगी।

गौरतलब है कि भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। कोरोना महामारी के कारण 2021 में प्रस्तावित जनगणना टल गई थी। अब करीब 16 वर्षों के अंतराल के बाद देश में जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। इससे देश की आबादी, सामाजिक संरचना, शिक्षा, रोजगार और विकास योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध होंगे।

भूटान में ग्लेशियल झील फटी, तबाही का खतरा! बंगाल के संकोश तट पर हाई अलर्ट, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

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पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियल झील फटने से अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। इस घटना के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में भी खतरे की आशंका बढ़ गई है। संकोश नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

शिंताफू झील फटने से आया पानी का तेज बहाव
जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में वकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू (Shintaphu) ग्लेशियल झील में अचानक पानी का बांध टूट गया। इसके बाद झील से भारी मात्रा में पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगा। पानी के तेज बहाव ने भूटान के गासा त्साचू क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। लाया गांव को जोड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा भी बह गया, जिससे इस दूरस्थ क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हुआ है।

भूटान के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र को पहले ही खाली करा लिया था। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

बंगाल और असम में बाढ़ का अलर्ट
झील से निकला पानी मोफू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। इस संभावित खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी सहित उत्तर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। असम के धुबरी समेत सीमावर्ती निचले इलाकों में भी प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने कुमारग्राम, चांगमारी और आसपास के गांवों के लोगों से सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन की ओर से माइक के जरिए लोगों को चेतावनी दी जा रही है।

NDRF और SDRF की टीमें तैनात
संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को तैनात किया गया है। कूचबिहार के तूफानगंज और बक्सीरहाट क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के निगरानी केंद्रों को भी नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत की ओर से जारी विशेष बाढ़ एडवाइजरी में आशंका जताई गई है कि पानी 6 से 8 घंटे के भीतर भारत-भूटान सीमा तक पहुंच सकता है। हालांकि, पानी की वास्तविक मात्रा और निचले इलाकों पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF)?
ग्लेशियरों के पिघलने से पहाड़ों में बड़ी-बड़ी झीलें बन जाती हैं। इन झीलों को रोकने वाले बर्फ या चट्टानों के प्राकृतिक बांध के अचानक टूटने पर जमा पानी तेज गति से बाहर निकलता है। इसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है। इस तरह की बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और मिट्टी लेकर आती है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

फिलहाल भारत और भूटान के अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान चलाना है।

खेतों में फंसे काले हिरणों के रेस्क्यू अभियान का जायजा लेने पहुंचे CM मोहन यादव, हेलीकॉप्टर से हो रहा रेस्क्यू

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने खेतों में फंसे काले हिरणों (कृष्णमृग) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों से अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

दक्षिण अफ्रीका के विशेषज्ञ कर रहे रेस्क्यू
किसानों की फसलों को जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान से बचाने और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने दक्षिण अफ्रीका से विशेषज्ञों की विशेष टीम बुलाई है। यह टीम आधुनिक बोमा पद्धति के जरिए काले हिरणों और नीलगाय को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर रही है। इस अभियान में हेलीकॉप्टर की भी मदद ली जा रही है।

अब तक 1,236 से अधिक काले हिरणों का रेस्क्यू
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अभियान के तहत अब तक 1,236 से अधिक काले हिरणों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। इन्हें कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर, श्योपुर के वन क्षेत्रों और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व जैसे संरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों और आवश्यक उपकरणों की मदद भी ली जा रही है।

किसानों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों की फसलें भी सुरक्षित रहें और वन्यजीवों को भी किसी प्रकार की चोट या नुकसान न पहुंचे। हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति द्वारा वन्यजीवों का रेस्क्यू दक्षिण एशिया में अपनी तरह की पहली पहल है। उन्होंने वन विभाग और अभियान में जुटी विशेषज्ञ टीम के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस अभियान की सफलता से देश के अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। शाजापुर में यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके बाद उज्जैन जिले में नीलगाय के रेस्क्यू की योजना है।

चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर अमित शाह ने CM विष्णु देव साय से की चर्चा, प्रदेश के हालात की ली जानकारी

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चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर केंद्र सरकार सतर्क है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से फोन पर चर्चा कर प्रदेश की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने चक्रवात के संभावित प्रभावों और उससे निपटने के लिए राज्य सरकार की तैयारियों के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश हो रही है, लेकिन फिलहाल कहीं से भी बाढ़ या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को समन्वय के साथ सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

केंद्र सरकार ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों से भी चर्चा की है। उन्होंने प्रभावित राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। शाह ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय हैं। चक्रवात से हुए नुकसान का आकलन करने और अतिरिक्त जरूरतों का पता लगाने के लिए प्रभावित राज्यों में अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल भी भेजे जाएंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार के सहयोग और सहायता के आश्वासन के लिए अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

खेती को लाभकारी बनाने आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और पशुपालन को दें बढ़ावा : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को इंदौर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कटनी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को संबोधित किया। कृषक कल्याण वर्ष-2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए पारंपरिक फसल उत्पादन के साथ बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इससे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के नए अवसर मिलेंगे।

कटनी में आधुनिक खेती की संभावनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कटनी को खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां कृषि के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। किसान पारंपरिक फसलों के साथ चिया सीड, अश्वगंधा और काजू प्रसंस्करण जैसे नए क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। ऐसे नवाचार कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर किसानों की उपज को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा सकता है। खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर भी विकसित होंगे।

प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत उपकरणों और बेहतर कृषि प्रबंधन से जोड़ना जरूरी है। इसके साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने से खेती पर निर्भर परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकते हैं।

उन्होंने गोवर्धन पूजन के अवसर पर प्रदेश के वृंदावन गांवों में गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार प्रतियोगिताएं आयोजित करने की जानकारी भी दी। इसमें श्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक गायों के पालकों को क्रमशः एक लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये के पुरस्कार दिए जाने की बात कही।

किसानों से किया संवाद, कृषि यंत्रों के उपयोग पर चर्चा
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने कटनी के उन्नतशील किसानों से संवाद कर उनके कृषि नवाचारों और अनुभवों की जानकारी ली। बहोरीबंद के किसान गोविंद पटेल ने नरवाई प्रबंधन में हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग से मिल रहे लाभों के बारे में बताया।

मुख्यमंत्री ने जिले में ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने के निर्देश दिए, जहां किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र उपलब्ध कराने की जरूरत है। उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि संबंधी समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर जोर दिया।

कृषि आधारित उद्योगों से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
कार्यक्रम में किसान संकेत नवानी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के माध्यम से 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त कर काजू प्रसंस्करण का काम शुरू किया। इससे उन्हें प्रसंस्करण, ग्रेडिंग, कटिंग और बिक्री के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री ने किसानों के ऐसे प्रयासों को कृषि क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों, कृषि आधारित उद्योगों और बाजार से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करना है।

बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, कृषि नवाचार और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों के अनुभव, तकनीक का उपयोग और कृषि के विविधीकरण से प्रदेश में खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर को दी 232 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सूरजपुर जिले को 232 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। इन विकास कार्यों का उद्देश्य जिले में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना, क्षेत्रीय विकास को गति देना और आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।

मुख्यमंत्री की इस पहल से जिले में विकास कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विकास योजनाओं के माध्यम से सड़क, आधारभूत संरचना और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को भी गति मिल सकती है।

राज्य सरकार का जोर प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का विस्तार करने तथा आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर है। सूरजपुर जिले के लिए घोषित इन कार्यों से स्थानीय स्तर पर सुविधाओं के विस्तार और विकास की संभावनाएं मजबूत होंगी।

हालांकि, विभिन्न परियोजनाओं के नाम, उनकी लागत और लोकार्पण अथवा भूमिपूजन से संबंधित विस्तृत जानकारी के आधार पर इन विकास कार्यों का पूरा ब्योरा सामने आएगा।

स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर से भीषण हादसा, 64 लोगों की मौत का दावा

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स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों के बीच टक्कर की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। हादसे में अब तक 64 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आने का दावा किया जा रहा है। इस भीषण दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहत एवं बचाव कार्य और हादसे के कारणों को लेकर स्थिति की जानकारी का इंतजार है।

हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर जैसे हादसों में यात्रियों की सुरक्षा, आपातकालीन सेवाओं की तत्परता और रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। हालांकि, इस घटना में मृतकों की संख्या, घायलों की स्थिति, दुर्घटना के स्थान और टक्कर के कारणों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

तीसरे T20 में रिकॉर्ड्स की बारिश! अभिषेक-वैभव ने वेलिंगटन में तोड़े 6 बड़े रिकॉर्ड, न्यूजीलैंड को 6 विकेट से हराया

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने ऐसा तूफान मचाया कि रिकॉर्ड बुक के कई पन्ने बदल गए। अभिषेक शर्मा और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी के दम पर भारत ने न्यूजीलैंड को 6 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली। भारत ने 199 रन का लक्ष्य महज 13.2 ओवर में हासिल कर लिया।

अभिषेक शर्मा का शतक, वैभव का तूफानी साथ
अभिषेक शर्मा ने सिर्फ 38 गेंदों में 113 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने 9 चौके और 11 छक्के लगाए तथा महज 35 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। दूसरी ओर, वैभव सूर्यवंशी ने 18 गेंदों में 45 रन बनाकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। दोनों के बीच पहले विकेट के लिए केवल 43 गेंदों में 133 रन की साझेदारी हुई।

तीसरे टी20 में बने ये 6 बड़े रिकॉर्ड
1. पावरप्ले में 118 रन: भारत ने शुरुआती छह ओवर में बिना विकेट गंवाए 118 रन बनाए। यह पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नया विश्व रिकॉर्ड है। इससे पहले रोमानिया ने 2021 में सर्बिया के खिलाफ 116 रन बनाए थे।

2. 35 गेंदों में अभिषेक का शतक: अभिषेक ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज शतक लगाने का नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने इसी साल ईशान किशन के 42 गेंदों में शतक के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।

3. 30 गेंदों में शतकीय साझेदारी: अभिषेक और वैभव ने महज 30 गेंदों में 100 रन की साझेदारी पूरी की। यह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे तेज शतकीय साझेदारियों में ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा।

4. पहली गेंद से आक्रामक शुरुआत: भारतीय सलामी बल्लेबाजों ने पहले ही ओवर में 26 रन बटोर लिए। इससे भारत ने पूर्ण सदस्य देशों के बीच पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहले ओवर में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज किया।

5. 100 रन का आंकड़ा सबसे तेजी से पार: भारत ने केवल 30 गेंदों में 100 रन पूरे कर पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम के सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इससे पहले रोमानिया ने 34 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।

6. टी20 क्रिकेट में अभिषेक के 11 शतक: इस पारी के साथ अभिषेक शर्मा भारतीय बल्लेबाजों में सर्वाधिक टी20 शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने विराट कोहली के 10 शतकों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। अब उनसे आगे क्रिस गेल (22) और बाबर आजम (13) हैं।

न्यूजीलैंड के 198 रन भी नहीं आए काम
इससे पहले न्यूजीलैंड ने डेरिल मिचेल की नाबाद 89 रन की पारी की मदद से 20 ओवर में 3 विकेट पर 198 रन बनाए थे। भारतीय टीम ने जवाब में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य को 40 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। अभिषेक शर्मा को उनकी शानदार पारी के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

सीरीज में भारत की 3-0 की अजेय बढ़त
तीसरे मुकाबले में जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज अपने नाम कर ली है। अब सीरीज के दो मुकाबले शेष हैं। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी की इस साझेदारी ने भारतीय टीम की आक्रामक बल्लेबाजी को नई पहचान दी है और आगामी मुकाबलों के लिए भी उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

सलमान खान की ‘मातृभूमि’ की CBFC स्क्रीनिंग का इंतजार, 13 नवंबर को रिलीज करने की तैयारी!

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बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म की रिलीज को लेकर दर्शकों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को सरकारी स्तर पर मंजूरी मिलने की खबरों के बावजूद केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की स्क्रीनिंग अभी बाकी है। निर्माता जल्द से जल्द प्रमाणन प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश में जुटे हैं।

नवंबर में रिलीज करने की योजना
रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान खान फिल्म को 13 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, यह तारीख CBFC से समय पर प्रमाणपत्र मिलने पर निर्भर करेगी। फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट को लेकर निर्माताओं की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ था फिल्म का नाम
इस फिल्म का नाम पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था। इसकी कहानी वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं, जबकि सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म की कहानी और कुछ दृश्यों में बदलाव किए गए हैं। इसके बाद फिल्म को लेकर मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जताई गई थी।

अब सेंसर बोर्ड की मंजूरी पर टिकी निगाहें
फिल्म की रिलीज में देरी के कारण सलमान खान के प्रशंसकों की उत्सुकता बढ़ गई है। अब सभी की नजर CBFC की स्क्रीनिंग और प्रमाणपत्र पर है। यदि निर्धारित समय पर मंजूरी मिल जाती है, तो फिल्म नवंबर में बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रमाणन प्रक्रिया पूरी होने और निर्माताओं की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।