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इंडोनेशिया में 6.2 तीव्रता के भूकंप से हिली धरती, सुनामी का खतरा नहीं

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इंडोनेशिया के मालुकु क्षेत्र के पास बांदा सागर में शुक्रवार को 6.2 तीव्रता का भूकंप आया। इंडोनेशिया की भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 143 किलोमीटर की गहराई में था।

भूकंप के झटके मालुकु के आसपास के इलाकों में महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि अधिकारियों ने सुनामी की कोई संभावना नहीं जताई है। शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप के कारण किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली।

इंडोनेशिया भूकंपीय रूप से बेहद सक्रिय क्षेत्र में स्थित है, जिसके चलते यहां लगातार भूकंप आते रहते हैं। अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।

BRICS में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का जोर

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नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में भारत ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS देश आज दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 25 प्रतिशत से अधिक वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यापारिक बाधाओं को कम करने, स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच नए बिजनेस पार्टनरशिप विकसित करने की जरूरत बताई। साथ ही सुरक्षित समुद्री मार्गों और सप्लाई चेन को वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।

BRICS के नई दिल्ली घोषणा पत्र में भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान, सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने और निवेश सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। भारत की पहल पर BRICS Risk Lab और अन्य आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रस्तावों को भी आगे बढ़ाया गया है।

भारत का जोर ऐसे वैश्विक आर्थिक ढांचे पर है जिसमें विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को निर्णय लेने में अधिक प्रभावी भूमिका मिले और वैश्विक व्यापार एवं वित्तीय व्यवस्था अधिक समावेशी बने।

दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आगाज, वैश्विक मुद्दों पर महामंथन

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भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आगाज हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के शीर्ष नेता वैश्विक शासन व्यवस्था, बहुपक्षवाद, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत कई देशों के नेता शामिल हुए हैं। सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने को प्रमुख प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को मजबूत करने के साथ वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया और सदस्य देशों से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का आह्वान किया।

सम्मेलन के दौरान नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकातों का दौर भी जारी है। भारत के लिए यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती देने और आर्थिक, रणनीतिक तथा तकनीकी सहयोग को नए स्तर पर ले जाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पर्युषण महापर्व का शुभारंभ, आठ दिनों तक तप-साधना और आत्मचिंतन में जुटेगा जैन समाज

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जैन धर्म के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व पर्युषण महापर्व का मंगलवार, 8 सितंबर से शुभारंभ हो गया। श्वेतांबर जैन परंपरा में यह पर्व 8 से 15 सितंबर तक मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु तप, उपवास, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण और ध्यान के माध्यम से आत्मशुद्धि का प्रयास करेंगे।

पर्युषण पर्व को जैन समाज में आत्मचिंतन, संयम, त्याग और क्षमा का विशेष अवसर माना जाता है। इन दिनों श्रद्धालु सांसारिक गतिविधियों को सीमित कर अपने विचारों, वाणी और कर्मों की समीक्षा करते हैं। अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे जैन सिद्धांतों के पालन पर विशेष जोर दिया जाता है।

तप और साधना का विशेष महत्व
पर्युषण के दौरान जैन मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, प्रवचन, स्वाध्याय और प्रतिक्रमण के आयोजन होंगे। अनेक श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास, एकासन और अन्य तप-साधनाएं करते हैं। इस अवधि को बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मा के निकट जाने और आत्मनिरीक्षण का समय माना जाता है।

15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व
आठ दिवसीय पर्युषण पर्व का समापन 15 सितंबर को संवत्सरी महापर्व के साथ होगा। इस दिन जैन समाज में आत्मालोचना और क्षमायाचना की विशेष परंपरा है। श्रद्धालु वर्षभर में जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हुए ‘मिच्छामि दुक्कड़म्’ कहते हैं।

पर्युषण महापर्व का संदेश केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा, क्षमा और बेहतर आचरण की प्रेरणा देता है। पर्व के दौरान जैन समाज के लोग आध्यात्मिक साधना के साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प लेते हैं।

यूपी को ग्लोबल टेक्सटाइल हब बनाने की तैयारी, लखनऊ में जुटेंगे दिग्गज; CM योगी करेंगे UPTEX-2026 का शुभारंभ

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उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंटिंग हब के रूप में विकसित करने की दिशा में योगी सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में UPTEX-2026 का आयोजन 8 और 9 सितंबर को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को इस दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ करेंगे।

UPTEX-2026 में देशभर के प्रमुख टेक्सटाइल निर्माता, कारोबारी, निवेशक और उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन के जरिए प्रदेश में वस्त्र उद्योग के विस्तार, निवेश आकर्षित करने, उत्पादन और निर्यात बढ़ाने तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर मंथन किया जाएगा।

50 नई और विस्तार करने वाली इकाइयों को मिलेगा समर्थन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 50 नई एवं विस्तार करने वाली टेक्सटाइल इकाइयों को Letters of Comfort (LoCs) भी प्रदान करेंगे। सरकार के मुताबिक अब तक संबंधित नीतियों के तहत 214 इकाइयों को LoCs जारी किए जा चुके हैं और 157 इकाइयों को 416.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।

निवेश और रोजगार पर रहेगा फोकस
UPTEX-2026 के जरिए सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश की पारंपरिक हथकरघा, पावरलूम और रेशम उद्योग की क्षमता को आधुनिक टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग सेक्टर से जोड़ना है। सम्मेलन में निवेश, उत्पादन, निर्यात, तकनीकी नवाचार और कारोबारी माहौल से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। इससे प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

सरकार पीएम मित्र पार्क समेत टेक्सटाइल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा दे रही है। इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक वस्त्र एवं परिधान उद्योग के मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने की कोशिश की जा रही है।

UPTEX-2026 को प्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जहां सरकार, उद्योग और निवेशकों के बीच संभावित साझेदारियों और नए निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ का बॉक्स ऑफिस पर भौकाल, चार दिनों में 100 करोड़ के पार पहुंची कमाई

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लोकप्रिय वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ की कहानी को बड़े पर्दे पर आगे बढ़ाने वाली फिल्म ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 4 सितंबर 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने महज चार दिनों में भारत में 100 करोड़ रुपये के नेट कलेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया है।

फिल्म की कमाई में रिलीज के बाद लगातार तेजी देखने को मिली। पहले दिन फिल्म ने करीब 25.75 करोड़ रुपये, दूसरे दिन 32 करोड़ रुपये और तीसरे दिन करीब 36 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। चौथे दिन सोमवार को भी फिल्म ने मजबूत पकड़ बनाए रखी और करीब 15.50 करोड़ रुपये की कमाई की। इसके साथ भारत में फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 109.25 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

फिल्म की इस सफलता में ‘मिर्जापुर’ फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता का बड़ा योगदान माना जा रहा है। पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रवि किशन जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने दर्शकों की दिलचस्पी को और बढ़ाया है। फिल्म ने रिलीज से पहले ही अपने चर्चित किरदारों और कहानी को लेकर जबरदस्त बज बनाया था।

बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की रफ्तार ने कई दूसरी फिल्मों के लिए भी मुकाबला मुश्किल कर दिया है। पहले वीकेंड में ही फिल्म ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 2026 की बड़ी ओपनिंग वीकेंड फिल्मों में अपनी जगह बनाई। तीसरे दिन तक इसका भारत नेट कलेक्शन करीब 93.75 करोड़ रुपये था और दुनियाभर में कमाई 132 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई थी।

चौथे दिन 100 करोड़ का आंकड़ा पार करना फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि है। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म अब आने वाले दिनों में 150 करोड़ रुपये के वैश्विक आंकड़े की ओर बढ़ रही है। दर्शकों के बीच ‘मिर्जापुर’ के किरदारों का क्रेज बरकरार रहने से फिल्म की कमाई आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है।

ग्लोबल 6G पहल से जुड़ा भारत, अमेरिका समेत 25 देश तय करेंगे अगली पीढ़ी की तकनीक की दिशा

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भारत ने अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक यानी 6G के विकास और वैश्विक मानकों को आकार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत अब अमेरिका के नेतृत्व वाली उस अंतरराष्ट्रीय पहल का हिस्सा बन गया है, जिसमें अमेरिका के साथ कुल 25 देश 6G तकनीक के भविष्य को लेकर सहयोग करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य 6G नेटवर्क से जुड़ी तकनीक, सुरक्षा, मानकों और भविष्य की तैनाती को लेकर समान दृष्टिकोण विकसित करना है। 5G के बाद आने वाली 6G तकनीक को अधिक तेज, कम विलंबता वाली और AI आधारित कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत की भागीदारी ऐसे समय में हुई है जब दुनिया के प्रमुख देश 6G की तकनीकी दिशा और वैश्विक मानकों में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सहयोग के जरिए भारत को नई तकनीकों के विकास, शोध और वैश्विक मानकीकरण की प्रक्रियाओं में अपनी विशेषज्ञता और प्राथमिकताओं को सामने रखने का अवसर मिलेगा।

भारत पहले से ही Bharat 6G Alliance के माध्यम से स्वदेशी 6G इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है। जुलाई 2026 तक इस गठबंधन में 90 सदस्य शामिल हो चुके थे, जिनमें दूरसंचार कंपनियां, उपकरण निर्माता, स्टार्टअप, शोध संस्थान और अकादमिक संस्थान शामिल हैं।

सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत को 6G तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाना है। भारत ने 6G से जुड़े वैश्विक पेटेंट में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की महत्वाकांक्षा भी व्यक्त की है।

इस वैश्विक साझेदारी को भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे देश को भविष्य की डिजिटल कनेक्टिविटी, AI-आधारित नेटवर्क और उन्नत दूरसंचार तकनीकों के विकास में अपनी भूमिका और मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तातारस्तान के प्रमुख रुस्तम मिन्निखानोव से अहम मुलाकात, निवेश और साझेदारी पर चर्चा

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित AIM Congress-2026 के दौरान रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव से उच्चस्तरीय द्विपक्षीय मुलाकात की। बैठक में मध्य प्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की संभावनाएं तलाशना और मध्य प्रदेश में तातारस्तान के निवेश को बढ़ावा देना रहा। इस दौरान एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, इंजीनियरिंग, फूड प्रोसेसिंग, लॉजिस्टिक्स, कृषि, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रुस्तम मिन्निखानोव को मध्य प्रदेश की औद्योगिक क्षमता और निवेश के अनुकूल वातावरण से अवगत कराया। उन्होंने तातारस्तान को आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS)-2027 में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया। तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल को रूस-भारत TIME फोरम में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया।

दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए B2B और G2G स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी, द्विपक्षीय बिजनेस मिशन तथा संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इसके लिए अधिकृत नोडल अधिकारियों के माध्यम से समन्वय को तेज करने की दिशा में भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह मुलाकात मध्य प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने और राज्य को वैश्विक औद्योगिक एवं निवेश साझेदारियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के वर्षों में मध्य प्रदेश और रूस के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस बने कृष्न राम महापात्र, राज्यपाल ने दिलाई पद की शपथ

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छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका को नया नेतृत्व मिल गया है। राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह रायपुर स्थित लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम् में आयोजित किया गया।

शपथ ग्रहण के बाद राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। न्यायाधिपति महापात्र इससे पहले उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।

समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं ने भी समारोह में हिस्सा लिया।

मुख्य सचिव विकास शील ने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। कार्यक्रम में राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाईकोर्ट के अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। कृष्ण राम महापात्र छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश बने हैं।

न्यायमूर्ति महापात्र के मुख्य न्यायाधीश पद संभालने के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में न्यायिक प्रशासन को नया नेतृत्व मिला है। न्यायपालिका से जुड़े लोगों ने उनके लंबे अनुभव और न्यायिक कार्यक्षमता को महत्वपूर्ण माना है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर तेल और भू-राजनीतिक तनाव का दबाव, निवेशकों में बढ़ी चिंता

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वैश्विक बाजारों में सोमवार को तेल की बढ़ती कीमतों और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई हैं।

100 डॉलर के करीब पहुंचा कच्चा तेल
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। तेल की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण मध्य-पूर्व से आपूर्ति बाधित होने की आशंका और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया हमलों के बाद निवेशक इस क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

महंगे तेल से बढ़ सकता है महंगाई का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों की लागत बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला भी मुश्किल हो सकता है।

शेयर बाजार भी दबाव में
तेल की तेजी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में सोमवार को सेंसेक्स करीब 0.50 प्रतिशत और निफ्टी 0.50 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। निवेशकों की नजर अब तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका की महंगाई संबंधी आगामी आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के अगले कदम पर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगी।