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दिल्ली में जल्द हट सकती हैं कोरोना पाबंदियां, CM केजरीवाल ने दिए संकेत

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भारत में कोरोना की तीसरी लहर का कहर जारी है। धीरे-धीरे यह लहर चरम पर पहुंच रही है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही केस घटने लगेंगे। लेकिन जब तक राहत नहीं मिलती, तब तक नियमों का पालन और सावधानी बहुत जरूरी है। यही कारण है कि विभिन्न राज्यों ने अघोषित लॉकडाउन (Lockdown Latest News) लगा रखा है। अधिकांश राज्यों में नाइट कर्फ्यू है, कहीं-कहीं वीकेंड कर्फ्यू लगाया गया है, कुछ राज्यों ने इसे संडे शटडाउन का नाम दिया है, स्कूल बंद है, ऑफिसेस बंद हैं। दिल्ली से ताजा खबर है कि यहां मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कोरोना नियमों में छूट के संकेत दिए हैं। केजरीवाल ने मंगलवार को कहा, जल्द ही हम (कोविड-19) प्रतिबंधों को हटाने और आपके जीवन को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास करेंगे… उस दिशा में सभी प्रयास करेंगे।

वैक्सीन नहीं, तो सार्वजनिक स्थानों पर एंट्री नहीं, यहां आज से लागू हुआ यह नियम

इस बीच, ताजा खबर असम से आ रही है। यहां उन लोगों को सार्वजनिक स्थानों यानी पब्लिक प्लेसेस पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा, जिन्होंने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है। असम में बढ़ते कोरोना मामलों के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। गैर-टीकाकरण वाले लोगों के सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया। हां, ऐसे लोग अस्पताल जा सकते हैं। नए आदेश के अनुसार, नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय टीकाकरण का प्रमाण साथ रखने को कहा गया है। ये पाबंदियां 25 जनवरी को सुबह छह बजे से लागू होंगी।

बिहार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की कि मौजूदा कोरोना प्रतिबंधों को 6 फरवरी तक बढ़ा दिया जाएगा। सीओवीआईडी ​​​​-19 मामलों में वृद्धि के कारण, राज्य सरकार ने 4 जनवरी से प्रतिबंध लगाए थे। प्रतिबंध 21 जनवरी को समाप्त होने वाले थे। COVID-19 की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि स्थिति को देखते हुए वर्तमान में लागू सभी प्रतिबंधों को 6 फरवरी 2022 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। आप सभी से अनुरोध है कि विशेष सावधानी बरतें और सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

10 हजार से नीचे आई प्रदेश में 24 घंटे में मिले कोरोना मरीजों की संख्या, 9451 नए मामले, सात की मौत

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भोपाल । राहत की बात है कि प्रदेश में लगातार तीन दिन से कोरोना मरीजों की संख्या कम हो रही है। सोमवार को 72 ,382 सैंपलों की जांच में 9451 मरीज मिले हैं। शुक्रवार को 24 घंटे में मिले मरीजों की संख्या 11,274 थी। शनिवार को 11,253 और रविवार को 10585 मरीज मिले थे। रविवार के मुकाबले सोमवार को करीब 900 मरीज कम मिले हैं। भारतीय विज्ञान संस्थान और भारतीय सांख्यिकी संस्थान ने भी अपने गणितीय आकलन से अनुमान लगाया है कि 24 जनवरी के बाद मरीजों की संख्या कम होगी। सोमवार को सात मरीजों की मौत भी हुई है।

बॉलीवुड के 12 गाने जो आपके अंदर के देशभक्त को जगा देंगे

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26 जनवरी 1950 भारत का संविधान लागू हुआ। जिससे हमारा देश एक नवगठित गणराज्य में बदल गया। तब से इस तिथि का सम्मान करने के लिए देश में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। इस तारीख को इस लिए चुना गया क्योंकि इसी दिन 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज की घोषणा की गई थी। देश में गणतंत्र दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। राष्ट्रति राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह की अध्यक्षता करते हैं।

फिल्म उद्योग लंबे समय से देशभक्ति के गाने बना रहे हैं। जब देश के लिए अपने प्यार का इजहार करने की बात आती है। इसे अपने पसंदीदा गाने के साथ कहने से बेहतर कोई तरीका नहीं है। इस साल भारत अपना 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है।

प्रदेश के डीजीपी को अमेजन कंपनी और उसके मालिक पर एफआईआर दर्ज करने के मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिए निर्देश

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भोपाल । ई कॉमर्स कंपनी अमेजन की एमपी में बढ़ सकती है  मुश्किलें । ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर राष्ट्रध्वज छपे जूते बिक रहे हैं। इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर यूजर्स लगातार कार्रवाई की मांग कर रहे थे। वहीं, इस पूरे प्रकरण में एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की एंट्री हो गई है। उन्होंने इस घटना को पीड़ादायी बताया है। इसे लेकर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एमपी के डीजीपी को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कानूनी प्रक्रियाओं के तहत अब डीजीपी विवेक जौहरी आगे निर्णय लेंगे।

गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भोपाल में मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे संज्ञान में यह पूरा मामला आया है। राष्ट्र को अपमानित करने का कोई भी कार्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि अमेजन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जो राष्ट्रध्वज का उपयोग किया गया है, इस मामले में राष्ट्रध्वज संहिता का प्रयोग कर कार्रवाई की जाए। यह बिल्कुल असहनीय है क्योंकि जूते पर राष्ट्रध्वज का उपयोग किया गया है। मैंने डीजीपी से कहा है कि कंपनी और अमेजन के मालिक पर तत्काल एमपी में केस दर्ज किया जाए। साथ ही उनके ऊपर कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि अमेजन कंपनी के अधिकारियों पर पहले भी एमपी के भिंड जिले में ऑनलाइन गांजा डिलीवरी को लेकर केस दर्ज है। साथ ही कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। भिंड के तत्कालीन एसपी ने उस वक्त आरोप लगाया था कि कंपनी के लोग जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। अब कपड़े और जूते पर राष्ट्रध्वज की तस्वीर को लेकर मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

कोरोना गाइडलाइन के तहत मनाया जाएगा Republic Day, CM शिवराज करेंगे ध्वजारोहण

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भोपाल ! राजधानी भोपाल सहित सभी जिलों में 26 जनवरी (Republic day in mp) को गणतंत्र दिवस गरिमामय ढंग से मनाया जाएगा. राज्य शासन ने इस वर्ष कोरोना वायरस संक्रमण के दृष्टिगत कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की है. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागाध्यक्ष, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर्स और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं. मुख्यमंत्री लाल परेड मैदान पर सुबह 9:00 बजे ध्वजारोहण करेंगे, जिसमें कक्षा एक से दसवीं तक के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा.

ऐतिहासिक स्थानों पर फहराया जाएगा राष्ट्रीय ध्वज
गणतंत्र दिवस पर राज्य के समस्त महत्वपूर्ण शासकीय भवनों एवं ऐतिहासिक स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा. राजधानी में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन लाल परेड ग्राउंड भोपाल में होगा. कार्यक्रम प्रातः 9 बजे शुरू होगा, जिसमें मुख्य अतिथि परेड की सलामी लेंगे तथा उपस्थित जनसभा को संबोधित करेंगे.

परेड के बाद होगी घुड़सवारी का प्रदर्शन
परेड का आयोजन पिछले वर्ष की भांति किया जाएगा. इसमें पुलिस, होमगार्ड, विशेष सशस्त्र बल, जेल वार्डन, सीआईएसएफ, आरएएफ एवं सीनियर एनसीसी छात्रों की टुकड़ियां शामिल होंगी. परेड में एनएसएस, स्काउट-गाईड एवं शौर्यादल शामिल नहीं होगें. परेड के पश्चात घुड़सवारी का प्रदर्शन किया जाएगा. इसके बाद झांकियां निकाली जायेंगी.

सीएम शिवराज सिंह देंगे संदेश का वाचन
गणतंत्र दिवस पर जिला मुख्यालयों में गत वर्षानुसार मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संदेश का वाचन किया जाएगा. परेड का आयोजन सिर्फ जिला मुख्यालयों पर ही होगा. शिक्षण संस्थाओं में कार्यालय प्रमुख द्वारा ध्वजारोहण, राष्ट्रगान का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कक्षा 1 से 10वीं तक के बच्चे शामिल नहीं होंगे.

ओबीसी आरक्षण की तैयारी में जुटी शिवराज सरकार
जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत कार्यालयों में प्रशासकीय समिति प्रधान द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा तथा राष्ट्रगान होगा. ऐसे जिला पंचायत, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायत जहां प्रशासकीय समिति के प्रधान उपलब्ध नहीं होने की दशा में कार्यालय प्रमुख द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा. कार्यक्रम स्थलों पर प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य की आवश्यक व्यवस्था अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है.

BJP में शामिल हुए आरपीएन सिंह, स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ लड़ना तय

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दिग्गज कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह (RPN Singh) ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और चंद घंटों बाद ही भाजपा में शामिल हो गए। खबर यह भी है कि भाजपा उन्हें पडरौना सीट से टिकट दे सकती है। खास बात यह है कि चुनाव से ऐन पहले भाजपा का साथ छोड़कर समाजवादी खेमे में जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य पडरौना सीट से भी प्रत्याशी हैं। भाजपा अब RPN सिंह को स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ खड़ा कर सकती है। RPN Singh और उनके परिवार का इलाके में दबदबा है। RPN सिंह पडरौना राजघराने से हैंं। RPN Singh यूपीए सरकार में मंत्री रहे। कांग्रेस ने उन्हें झारखंड का प्रभारी भी बनाया था।

कांग्रेस छोड़ने का ऐलान खुद RPN Singh ने अपने ट्विटर हैंडल पर किया। पढ़िए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजे इस्तीफे में आरपीएन सिंह ने क्या लिखा। आरपीएन सिंह 1996 और 2009 के बीच उत्तर प्रदेश के पडरौना निर्वाचन क्षेत्र से सांसद थे। बाद में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता।

कौन हैं आरपीएन सिंह?

25 अप्रैल 1964 को जन्मे रतनजीत प्रताप नारायण (RPN) सिंह एक शाही परिवार से हैं। उनके पिता भी राजनीति में थे और इंदिरा गांधी सरकार में मंत्री रहे। आरपीएन सिंह ने एआईसीसी के सचिव सहित सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली पार्टी में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। 2009 के लोकसभा चुनावों में कुशीनगर से चुने जाने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। UPA-2 के कार्यकाल के दौरान उन्होंने सड़क, परिवहन और राजमार्ग, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और कॉर्पोरेट मामलों और गृह मामलों में राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। हालांकि, उन्हें कुशीनगर से 2014 और 2019 में लगातार आम चुनाव हारकर एक झटका लगा।

महेश्‍वर में पूजन कर सारा अली खान ने खरीदी साड़ी, दोपहर में पहुंचे विक्की कौशल

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महेश्वर । सोमवार से प्रारंभ होने वाली फिल्म लुका छिपी 2 की शूटिंग में हिस्सा लेने पहुंची अभिनेत्री सारा अली खान अपने मां अमृता सिंह के साथ रविवार को महेश्वर पहुंची। सारा ने महेश्वरी साड़ियां व सूट मटेरियल की खरीदारी की। शनिवार देर शाम को किला परिसर स्थित होटल अहिल्या फोर्ट में पहुंची सारा ने रविवार को होटल से निकल कर राजबाडा स्थित देवपूजा स्थल में स्थित लिंगार्चन पूजन में भाग लिया।

इस दौरान उन्होंने लिंगार्चन का पूजन किया। इसके बाद किला परिसर में ही स्थित रेवा सोसायटी में महेश्वरी साड़ी की बुनाई प्रक्रिया को देखा। उन्होंने कुछ साड़ी व सूट खरीदे। बड़ी संख्या में साड़ी व सूट मटेरियल को पसंद कर उन्होंने अलग रखने के लिए भी वहां के कर्मचारियों को कहा।

यहां सारा ने 75 वर्षीय बुनकर चंद्राबाई पालनपुरे से बात की। सारा ने चंद्राबाई से लूम पर लगे उपकरणों के बारे पूछा वहीं उनके नाम भी जाने। इस दौरान वे चंद्राबाई के समीप बैठी और फोटो शूट भी खींचवाया। इसके बाद सारा ने चौमुखी दरवाजा की सीढ़ियां उतरकर अहिल्येश्वर मंदिर प्रांगण से किले की नक्काशी को देखा। वहीं अष्टपहलु सीढ़ियों से सुरम्य घाट को निहारा। वे किले व घाट की सुंदरता को देख काफी प्रभावित हुई। इसके बाद वे सीधे होटल की ओर रवाना हो गई। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक मौजूद थे।

होगी “जो तूने ना कहा” गाने की शूटिंग

नगर के किला परिसर व सुरम्य घाट पर सोमवार को एक दिवसीय शूटिंग होगी। इसमें अभिनेता विक्की कौशल व अभिनेत्री साला अली खान पर दृश्यों का फिल्मांकन निर्देशक लक्ष्मण उटेकर के निर्देशन में होगा। इस दौरान फिल्म के गीत “जो तूने ना कहा वो जो मैं सुनता रहा” का फिल्मांकन होगा। शूटिंग में स्थानीय कलाकारों को भी शामिल किया गया है। रविवार की शाम को निर्देशक लक्ष्मण उटेकर ने किला परिसर में शूटिंग किए जाने वाले स्थानों की फायनल रैकी की। शाम सवा चार बजे अभिनेता विक्की कौशल भी इंदौर से पहुंचे। वे सीधे किला परिसर के अंदर स्थित होटल अहिल्या फोर्ट में दाखिल हुए।

मास्क को लेकर जिम्मेदारों की अनदेखी

कोरोना की लहर से पूरा देश आहत है। मास्क और शारीरिक दूरी को लेकर सरकार प्रचारप्रसार कर रही है। वहीं नगर में रविवार को शूटिंग से जुड़े जिम्मेदार लोग कोरोना गाइड लाइन की अनदेखी करते नजर आए। किला परिसर व घाट की फायनल रैकी करने पहुंचे निर्देशक लक्ष्मण उटेकर बगैर मास्क के टीम को निर्देश देते नजर आए।

पीवी सिंधु ने आसानी से जीता मुकाबला, फाइनल में मालविका बंसोड़ को हराया

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भारत की शटलर और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने सैयद मोदी अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट में महिला एकल का खिताब जीत लिया है। रविवार को बाबू बनारसी इंडोर स्टेडियम में शीर्ष वरीयता प्राप्त सिंधु ने मालविका बंसोड़ (Malvika Bansod) को 21-13, 21-16 से हराया। फाइनल मुकाबला 35 मिनट तक चला।

पीवी सिंधु का दूसरा सैयद मोदी खिताब

इससे पहले पीवी सिंधु ने शनिवार को 5वीं वरीयता प्राप्त रूस की इवजेनिया कोसेतस्काया के सेमीफाइनल में रिटायर्ड हर्ट होने से फाइनल में जगह बनाई थीं। सिंधु ने आसानी से पहला गेम 21-11 से अपने नाम किया था। जिसके बाद कोसेतस्काया ने दूसरे महिला एकल सेमीफाइनल मैच से रिटायर्ड हर्ट होकर हटने का निर्णय लिया था। बता दें 2019 में BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300 इवेंट में शामिल गोने के बाद पीवी सिंधु का दूसरा सैयद मोदी खिताब था।

ईशान और तनीषा की जोड़ी जीती

महिला एकल फाइनल से पहले, सातवीं वरीयता प्राप्त ईशान भटनागर (Ishaan Bhatnagar) और तनीषा क्रास्टो (Tanisha Crasto) की जोड़ी ने टी हेमा नागेंद्र बाबू (T Hema Nagendra Babu) और श्रीवेद्या गुरजादा (Srivedya Gurazada) को सीधे सेट में हराकर मिश्रित युगल खिताब जीता। भटनागर और क्रास्टो ने गैर वरीयता प्राप्त विरोधियों को 29 मिनट में हराकर 21-16, 21-12 पर खेल समाप्त कर दिया।

नो मैच घोषित

इससे पहले अरनॉर्ड मर्कले (Arnaud Merkle) और लुकास क्लेरबाउट (Lucas Claerbout) के बीच पुरुष एकल फाइनल को ‘नो मैच घोषित’ किया गया। जब एक फाइनलिस्ट कोरोन संक्रमित पाया गया।

राज्यपाल भोपाल में, विधानसभा अध्यक्ष रीवा और मुख्यमंत्री इंदौर में करेंगे ध्वजारोहण

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भोपाल । गणतंत्र दिवस पर बुधवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल भोपाल, विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम रीवा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इंदौर में ध्वजारोहण करेंगे। राज्य स्तरीय समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर आयोजित किया जाएगा। इसमें नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह शामिल होंगे।

गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों में कोरोना से बचाव के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। राज्य और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में परेड का आयोजन होगा। एनसीसी, स्काउट गाइट और शौर्यादल के सदस्य शामिल नहीं होंगे। वहीं, स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों में पहली से 10वीं तक के विद्यार्थियों को बुलाने पर रोक है। जहां मंत्री या राज्य मंत्री ध्वजारोहण नहीं करेंगे वहां कलेक्टर यह जिम्मेदारी निभाएंगे।

मंत्री, राज्य मंत्री — यहां फहराएंगे ध्वज

डा. नरोत्तम मिश्रा — छिंदवाड़ा

गोपाल भार्गव — जबलपुर

तुलसीराम सिलावट — ग्वालियर

विजय शाह — नरसिंहपुर

जगदीश देवड़ा — उज्जैन

बिसाहूलाल सिंह — मंडला

यशोधरा राजे सिंधिया — देवास

मीना सिंह मांडवे — अनूपपुर

कमल पटेल — खरगोन

गोविंद सिंह राजपूत — भिंड

बृजेन्द्र प्रताप सिंह — नर्मदापुरम (होशंगाबाद)

विश्वास सारंग — टीकमगढ़

डा. प्रभुराम चौधरी — सीहोर

डा. महेन्द्र सिंह सिसोदिया — शिवपुरी

प्रद्युम्न सिंह तोमर — गुना

प्रेमसिंह पटेल — बुरहानपुर

ओमप्रकाश सकलेचा — सिवनी

उषा ठाकुर — खंडवा

अरविंद भदौरिया — सागर

डा. मोहन यादव — राजगढ़

हरदीप सिंह डंग — बड़वानी

राजवर्धन सिंह दत्तीगांव — मंदसौर

भारत सिंह कुशवाह — श्योपुर

इंदर सिंह परमार — बैतूल

राम खेलावन पटेल — शहडोल

रामकिशोर कांवरे — पन्न्ा

बृजेन्द्र सिंह यादव — शाजापुर

सुरेश धाकड़ — दतिया

ओपीएस भदौरिया — रतलाम

दिग्विजय कांग्रेस का इकलौता चेहरा, जिसके खिलाफ शिवराज सरकार तल्ख और भाजपा मुखर

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भोपाल। सियासत में कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं, जो अपनी पार्टी से ज्यादा विपक्ष के लिए मुफीद बन जाते हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में ऐसा ही चेहरा दिग्विजय सिंह बन चुके हैं, जो कांग्रेस से ज्यादा भाजपा के लिए कारगर माने जा रहे हैं। अब तो कांग्रेस में एकमात्र वही ऐसे नेता बन गए हैं, जिनके खिलाफ हमेशा शिवराज सरकार की तल्खी बनी रहती है और भाजपा भी मुखर रहती है। शिवराज सरकार पर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ भी हमलावर रहते हैं, लेकिन अघोषित तौर पर सत्ता-संगठन उन्हें कड़ी प्रतिक्रिया नहीं करता। ताजा मामला सीएम हाउस के बाहर डूब प्रभावितों के हक के लिए दिग्विजय सिंह द्वारा धरना देने का है।

दिग्विजय के विरोध की पांच वजह

चुनाव नगर निकाय से लेकर विधानसभा या लोकसभा का क्यों न हो, दिग्विजय के कार्यकाल को भाजपा याद न दिलाए, ऐसा हो नहीं सकता है। दरअसल वर्ष 2003 से दिग्विजय सिंह सत्ता से बाहर हैं। 2018 में कमल नाथ कांग्रेस सरकार के मुखिया बने फिर भी भाजपा के लिए चुनौती सिर्फ दिग्विजय ही रहते हैं। इसकी पांच बड़ी वजहें सामने आती हैं, जो कमल नाथ के मुकाबले दिग्विजय सिंह को विरोध के लिए अधिक फायदेमंद साबित करती हैं।

1- सिंह की असफल मुख्यमंत्री की छवि गढ़ने में भाजपा की सफलता। भाजपा ने चुनावी अभियानों के साथ ही सियासत के हर छोटे-बड़े घटनाक्रम में दिग्विजय सिंह को कांग्रेस की विफल सरकार का चेहरा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। भाजपा, विशेषकर मुख्यमंत्री कांग्रेस की असफलता के लिए कमल नाथ के बजाय अब भी दिग्विजय सिंह की सरकार की याद दिलाते हैं।

2- दिग्विजय का हिंदुत्व विरोधी जिससे भाजपा को सियासत में हमेशा फायदा मिलता रहा है। सिंह की इसी छवि के चलते उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में भोपाल सीट से हार का सामना करना पड़ा था। सिंह के बयानों के आधार पर भाजपा कई बार चुनावों का धार्मिक ध्रुवीकरण करने में सफल रही है। ऐसा लाभ भाजपा को मध्य प्रदेश से बाहर दूसरे राज्यों में भी मिल चुका है। इस मामले में सॉफ्ट हिंदुत्व के चलते कमल नाथ भाजपा के निशाने पर नहीं आते।

3- दिग्विजय सिंह को राजा कहे जाने से उनके लिए गढ़ी गई गरीब विरोधी छवि। उन पर कांग्रेस में ही आदिवासी, दलित, पिछड़ेे और कमजोर वर्ग के नेताओं को अहम जिम्मेदारी से दूर रखने के आरोप लगते रहे हैं। जबकि कमल नाथ ने अपनी सरकार और संगठन में जातिगत संतुलन साधने की कोशिश की थी, जिसके चलते वह भाजपा के निशाने पर आने से बचते रहे हैं।

4-एक बड़ी वजह संगठन स्तर पर मिलने वाला लाभ। दिग्विजय के पूरे मध्य प्रदेश में समर्थक हैं। उनका विरोध करने पर पूरे प्रदेश से प्रतिक्रिया होती है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सक्रिय हो जाते हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्तर के नेता के विरोध का मौका मिल जाता है। कमल नाथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन प्रदेश में उनके उतने समर्थक नहीं हैं, जितने की दिग्विजय सिंह के।

5- दिग्विजय के राष्ट्रीय स्तर के सियासी कद का फायदा भी भाजपा को मिलता है। उनके विवादित बयान और उस पर कांग्रेस हाईकमान की चुप्पी साबित करती रही है कि वह किसी की परवाह नहीं करते। ऐसे में भाजपा जब दिग्विजय को घेरती है, तो न सिर्फ मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आता है, बल्कि हाईकमान को ही सीधे चुनौती देने का मौका मिल जाता है। जबकि कमल नाथ के साथ ऐसा नहीं है। वह विवादित बयानों से तो बचते ही हैं, साथ ही दिल्ली के संपर्क में रहते हैं। कोई विवादित स्थिति बन जाने पर पार्टी को साथ लेकर चलते हैं।