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सलमान खान की ‘मातृभूमि’ को मिली हरी झंडी, सरकार से NOC के बाद रिलीज की बढ़ी उम्मीद

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सलमान खान की बहुप्रतीक्षित वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म के संशोधित वर्जन को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल गया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी फिल्म के सिनेमाघरों तक पहुंचने की उम्मीद बढ़ गई है।

फिल्म पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से बनाई जा रही थी और इसकी कहानी 2020 के गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुए टकराव की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म के कंटेंट और चीन के चित्रण को लेकर कथित आपत्तियों के बाद इसके रिलीज में देरी हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, मेकर्स ने फिल्म में कई बदलाव किए हैं।

13 नवंबर की रिलीज पर नजर
NOC मिलने के बाद अब फिल्म के मेकर्स की नजर 13 नवंबर 2026 की संभावित रिलीज डेट पर बताई जा रही है। हालांकि यह तारीख अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुई है। फिल्म को पहले CBFC के पास प्रमाणन के लिए भेजा जाएगा और सेंसर बोर्ड की मंजूरी के बाद ही रिलीज डेट पर अंतिम फैसला होगा।

फिल्म में किए गए बदलाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की आपत्तियों के बाद फिल्म के नए वर्जन में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सूत्रों के हवाले से दावा है कि संशोधित फिल्म में भारत-चीन संबंधों के सकारात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण CBFC सर्टिफिकेशन का है।

अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी फिल्म
‘मातृभूमि’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म का निर्माण सलमा खान के प्रोडक्शन हाउस Salman Khan Films के बैनर तले किया गया है।

फिलहाल दर्शकों को आधिकारिक रिलीज डेट और CBFC की मंजूरी का इंतजार है। अगर प्रमाणन प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो फिल्म नवंबर में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है।

IISER भोपाल के विस्तारित ‘अत्रि’ परिसर का शिलान्यास, रिसर्च और इनोवेशन को मिलेगी नई दिशा

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भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में अत्याधुनिक शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विस्तारित ‘अत्रि’ परिसर की आधारशिला रखी गई। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि रहे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति रही।

राज्य सरकार ने IISER भोपाल को नए परिसर के विकास के लिए 52 एकड़ भूमि आवंटित की है। प्रस्तावित अत्रि परिसर में उन्नत अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है।

AI, रोबोटिक्स और क्वांटम तकनीक पर रहेगा फोकस
IISER के अनुसार, नए परिसर में क्वांटम एवं उन्नत पदार्थ, ड्रोन तकनीक, सतत प्रणालियां एवं प्रौद्योगिकियां, मेडिकल डिवाइस एवं डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही AI और रोबोटिक्स स्कूल विकसित करने की भी योजना है।

मध्य भारत में रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी
प्रस्तावित परिसर को रिसर्च और इनोवेशन पार्क के रूप में विकसित करने की योजना है। संस्थान के मुताबिक इसका उद्देश्य शोध को नवाचार, कौशल विकास और उद्योग के साथ सहयोग से जोड़ना है। इससे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को उभरती तकनीकों के क्षेत्र में काम करने के लिए नया प्लेटफॉर्म मिलने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान IISER परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। नए परिसर के निर्माण से भोपाल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित शोध गतिविधियों के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।

बस्तर-सरगुजा के 13 जिलों में 106 मार्गों पर दौड़ रहीं 107 बसें, ग्रामीणों की राह हुई आसान

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छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। इससे इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जरूरी सेवाओं के लिए आवागमन में सुविधा मिल रही है।

बस सेवाओं के विस्तार से दूरस्थ गांवों से जिला और तहसील मुख्यालयों तक पहुंच आसान हुई है। विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने, मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचने और ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों से जुड़े कामों के लिए यात्रा करने में सहूलियत मिल रही है।

हाट-बाजार तक पहुंच में भी सुधार
नियमित बस सेवा का लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा है। ग्रामीण अब साप्ताहिक हाट-बाजारों और स्थानीय व्यापारिक केंद्रों तक आसानी से पहुंच सकते हैं। किसान और छोटे व्यापारी अपनी उपज तथा अन्य सामान बाजार तक ले जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर पा रहे हैं।

प्रशासनिक सेवाओं तक आसान पहुंच
बस्तर और सरगुजा के कई इलाके भौगोलिक रूप से दूरस्थ हैं। ऐसे क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बढ़ने से लोगों के लिए प्रशासनिक मुख्यालय और सरकारी संस्थानों तक पहुंच सुगम हुई है। इससे विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं से जुड़े कामों के लिए आने-जाने में लगने वाला समय और परेशानी कम होने की उम्मीद है।

सरकार का फोकस ऐसे क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करने पर है, जहां लंबे समय से नियमित बस सेवा की जरूरत महसूस की जा रही थी। 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन दूरस्थ अंचलों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

MP के 7 सरकारी आयुर्वेद कॉलेजों को NCISM की मान्यता, BAMS की 523 और PG की 117 सीटों पर प्रवेश

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मध्य प्रदेश के आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी खबर है। NCISM ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश के सभी सात शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता दे दी है। मान्यता मिलने के बाद ये कॉलेज AYUSH NEET काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। सातों संस्थानों में कुल 523 BAMS स्नातक और 117 MD/MS स्नातकोत्तर सीटों को मंजूरी मिली है।

भोपाल कॉलेज को सबसे ज्यादा PG सीटें
मान्यता प्राप्त सात कॉलेजों में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और बुरहानपुर शामिल हैं। इनमें पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल को BAMS की 75 और PG की 74 सीटें मिली हैं। वहीं शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज, इंदौर को BAMS की 75 और PG की 15 सीटें स्वीकृत हुई हैं।

इसके अलावा रीवा कॉलेज को BAMS की 75 और PG की 6, ग्वालियर को 75 और 5, उज्जैन को 75 और 17 सीटें मिली हैं। जबलपुर को BAMS की 75 तथा बुरहानपुर को 73 सीटों की मान्यता दी गई है। कुल सीटों में EWS कोटे की सीटें भी शामिल हैं।

AYUSH NEET काउंसलिंग में शामिल होंगे कॉलेज
NCISM की मान्यता के बाद इन संस्थानों के विद्यार्थी प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। AYUSH UG में BAMS समेत अन्य पाठ्यक्रमों के लिए पात्र NEET-UG 2026 उम्मीदवारों की काउंसलिंग AYUSH Admissions Central Counseling Committee (AACCC) के माध्यम से होती है। सरकारी संस्थानों की AIQ सीटों के लिए AACCC ऑनलाइन काउंसलिंग आयोजित करता है।

इस मान्यता से प्रदेश में आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकारी संस्थानों में उपलब्ध सीटों का दायरा बढ़ा है। साथ ही इंदौर में पहली बार 15 विषयों में PG शुरू होने की जानकारी भी सामने आई है।

4 शुभ योगों के महासंगम में इंदिरा एकादशी, 6 अक्टूबर को जानें पूजा और श्राद्ध का शुभ मुहूर्त

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पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को देर रात 2:07 बजे शुरू होकर 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना की जाती है।

चार शुभ योगों का संयोग
इस बार इंदिरा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि, सिद्ध, साध्य और शुभ योग का संयोग बताया गया है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:17 बजे से रात 10:17 बजे तक रहेगा। सिद्ध योग सुबह 7:20 बजे तक और इसके बाद साध्य योग शुरू होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त रहेगा खास?
6 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 से 5:28 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सुबह 10:41 से दोपहर 12:09 बजे तक लाभ-उन्नति और दोपहर 12:09 से 1:37 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है।

पितरों के लिए श्राद्ध का समय
इंदिरा एकादशी पर उन पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा बताई जाती है, जिनका निधन एकादशी तिथि को हुआ हो। इसके लिए कुतुप मुहूर्त 11:46 बजे से 12:33 बजे, रौहिण मुहूर्त 12:33 से 1:20 बजे और अपराह्न काल 1:20 से 3:40 बजे तक बताया गया है।

कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
मान्यता के अनुसार व्रती सुबह स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से अभिषेक कर पीले चंदन, फूल, अक्षत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी के व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

UP में अपराधियों पर शिकंजा, 23,601 इनामी गिरफ्तार; 15,233 करोड़ की संपत्ति जब्त

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उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आंकड़े सामने आए हैं। सरकार के मुताबिक, 20 मार्च 2017 से अब तक 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसी अवधि में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 15,233 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत 995 लोगों पर कार्रवाई हुई। पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधियों के मारे जाने और 12,202 के घायल होने की जानकारी भी सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में दी गई है।

68 चिह्नित माफिया के खिलाफ कार्रवाई
प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों व सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। अधिकारियों के मुताबिक, इनके खिलाफ 909 मुकदमे दर्ज किए गए और 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

साइबर अपराध पर भी कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित किए जा रहे हैं। पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क भी बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार, अगस्त 2019 से जून 2026 के बीच साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 874.58 करोड़ रुपये से अधिक की रकम फ्रीज या होल्ड कराई गई। इसके लिए साइबर क्राइम पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 का इस्तेमाल किया गया।

सरकार ने इन आंकड़ों को अपराध और संगठित अपराध के खिलाफ की गई कार्रवाई के तौर पर जारी किया है। आंकड़ों में गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती, गैंगस्टर एक्ट और साइबर अपराध से जुड़े मामलों की कार्रवाई शामिल है।

वित्तीय मजबूती के बावजूद नए संकट का खतरा, RBI गवर्नर ने किया अलर्ट

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भारतीय वित्तीय व्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन भविष्य के संभावित जोखिमों को लेकर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सतर्क रहने की जरूरत बताई है। 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय मजबूती को भविष्य के संकट से सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।

मल्होत्रा के मुताबिक लंबे समय तक वित्तीय स्थिरता रहने से संस्थानों और निवेशकों में अधिक जोखिम लेने तथा कर्ज बढ़ाने की प्रवृत्ति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी वित्तीय तनाव के दौर देख चुका है और कमजोरियों को समय रहते पहचानना जरूरी है।

बैंकिंग सिस्टम से बाहर से भी आ सकता है संकट
RBI गवर्नर ने चेताया कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि किसी बैंक या वित्तीय संस्था से ही शुरू हो। भू-राजनीतिक घटनाएं, साइबर हमले और तकनीकी गड़बड़ियां भी वित्तीय व्यवस्था में बड़े व्यवधान का कारण बन सकती हैं। वैश्विक वित्तीय नेटवर्क की बढ़ती आपसी निर्भरता के कारण एक जगह पैदा हुआ संकट दूसरे क्षेत्रों तक तेजी से फैल सकता है।

उन्होंने वित्तीय स्थिरता के लिए बैंकों के साथ-साथ NBFC, वित्तीय बाजार, पेमेंट सिस्टम, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क को भी मजबूत बनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार लक्ष्य हर संकट को रोकना नहीं, बल्कि वित्तीय व्यवस्था को ऐसे तैयार करना है कि वह झटकों को सह सके और उनके प्रभाव को सीमित रखे।

RBI गवर्नर ने बेहतर डेटा, जोखिम की निगरानी, मजबूत संस्थानों और प्रभावी नियमन को वित्तीय स्थिरता के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में सतर्कता और सिस्टम की मजबूती बनाए रखना जरूरी है।

किसानों से नियमित संवाद करें मंडी सचिव, समस्याओं का समयबद्ध समाधान कराने के निर्देश

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उत्तर प्रदेश में मंडी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में मंडी परिषद ने नए निर्देश जारी किए हैं। मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से संवाद करते हुए किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने और उनसे नियमित संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।

निदेशक ने कहा कि मंडियां किसानों के लिए केवल कृषि उपज की बिक्री का केंद्र नहीं हैं, बल्कि उन्हें बेहतर सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। उन्होंने मंडी सचिवों से कहा कि मंडियों में आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनकी शिकायतों का समयबद्ध एवं प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए।

उन्होंने किसानों और आढ़तियों से नियमित संवाद स्थापित करने तथा मंडी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की जानकारी लेकर उनका समाधान कराने पर जोर दिया। साथ ही कृषि उपज की खरीद-बिक्री से जुड़ी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

नवनियुक्त सचिवों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग
मंडी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नवनियुक्त मंडी सचिवों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें मंडी संचालन, विभागीय प्रक्रियाओं, किसानों की शिकायतों के त्वरित समाधान, राजस्व संबंधी कार्यों और मंडी व्यवस्थाओं की प्रभावी निगरानी जैसे विषय शामिल होंगे। किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ दिलाने पर भी प्रशिक्षण में विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मंडी परिषद के मुताबिक, सचिवों की भूमिका किसानों और मंडी प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की है। इसलिए उनसे संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने की अपेक्षा की गई है।

पशुपालकों के लिए बड़ी खबर, देशभर में खुलेंगी 75 हजार नई डेयरियां

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पशुपालकों और डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशभर में 75 हजार नई सहकारी डेयरियां खोलने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत सबसे अधिक डेयरियां मध्य प्रदेश में स्थापित की जाएंगी।

सरकार का फोकस ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के जरिए गांव-गांव तक डेयरी नेटवर्क मजबूत करने पर है। इसके तहत दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने के साथ पशुपालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे छोटे पशुपालकों को अपने दूध के लिए संगठित बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

अमित शाह ने पशुपालन में नस्ल सुधार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की भी बात कही। उन्होंने बताया कि गायों की नस्ल सुधार के लिए 50 एकड़ जमीन की मांग को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। साथ ही दूध के अलावा गोबर से बायोगैस और जैविक खाद बनाने तथा दुग्ध उत्पादों की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार के मुताबिक, डेयरी सहकारिता के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और महिलाओं की डेयरी क्षेत्र में भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

संसदीय समितियों में बड़ा फेरबदल, शशि थरूर को फिर मिली अहम जिम्मेदारी; कीर्ति आजाद की छुट्टी

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संसद की विभाग संबंधी स्थायी समितियों का 2026-27 के लिए पुनर्गठन कर दिया गया है। नई सूची में कई मौजूदा अध्यक्षों को बरकरार रखा गया है, जबकि कुछ समितियों की कमान नए सांसदों को सौंपी गई है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर को विदेश मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष फिर से नियुक्त किया गया है। वहीं कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी कृषि समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों की समिति की जिम्मेदारी भी बरकरार रखी गई है।

इस पुनर्गठन में कीर्ति आजाद को बड़ा बदलाव झेलना पड़ा है। वह इससे पहले रसायन एवं उर्वरक संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष थे। अब उनकी जगह TMC की काकोली घोष दस्तीदार को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

इसके अलावा भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी को वाणिज्य समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रामगोपाल यादव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है।

संसदीय स्थायी समितियां संबंधित मंत्रालयों के बजट, नीतियों और विधेयकों की समीक्षा करती हैं तथा विभिन्न मुद्दों पर अधिकारियों और विशेषज्ञों से जानकारी लेकर संसदीय निगरानी की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।