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प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी मंदसौर जिले के दोनों मंत्री करेंगे

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भोपाल। आगामी 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोपाल आगमन पर मंदसौर जिले के दोनों मंत्रीगण उनकी अगवानी एवं सत्कार करेंगे।

 

 

 

 

राज्य शिष्टाचार अधिकारी द्वारा जारी मिनिस्टर इन वेटिंग सूची में बताया गया कि वाणिज्यिक कर, वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री जगदीश देवड़ा एयरपोर्ट भोपाल पर, नवीन, नवकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरण मंत्री  हरदीप सिंह डंग बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय हेलीपैड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी करेंगे।

 

 

 

 

इसके साथ ही जंबूरी मैदान हेलीपैड पर सहकारिता मंत्री  अरविंद सिंह भदोरिया, जंबूरी मैदान कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह एवं हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर मिनिस्टर इन वेटिंग रहेंगे।

15 नवंबर से फिर शुरु होगी 97 हजार आंगनवाड़ियाँ, मिलेगा गर्म भोजन

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भोपाल: कोरोनाकाल में लंबे समय तक बंद रही प्रदेश की 84 हजार मुख्य आंगनबाड़ी और तेरह हजार मिनी आंगनबाड़ियां एक बार फिर 15 नवंबर से खुलने जा रही है।

कोविड प्रोटोकाल के पालन के साथ शुरु होंने वाली इन आंगनबाड़ियों में आइये, आंगनबाड़ी कार्यक्रम का आयोजन कर समुदाय के सहयोग से स्थानीय खाद्य विविधता पर आधारित विशेष ताजा गर्म भोजन तैयार कर बच्चों को परोसा जाएगा।

महिला बाल विकास विभाग ने इसके लिए एसओपी जारी की है।आंगनबाड़ियों में तीन से छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों को लाने के लिए स्थानीय जिला स्तरीय क्राइसेस मैनेजमेंट और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरुप निर्णय लेने के लिए कलेक्टरों को अधिकृत किया गया है।

आइये आंगनबाड़ी समारोह से आगाज-

सभी जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और हितग्राहियों की मौजूदगी में आइये आंगनबाड़ी थीम पर समारोह का आयोजन करते हुए इन्हें शुरु किया जाएगा। यहां स्थानीय खाद्य विविधता वाला गर्म भोजन तैयार कर परोसा जाएगा। पहले दिन के बाद प्रतिदिन पूर्व की भांति समय-सारणी अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाएगा।

रेडी टू ईट की जगह गर्म भोजन-

कोविड संक्रमण काल में तीन से छह वर्ष के बच्चों को पूर्व में प्रदाय रेडी टू ईट सामग्री का वितरण स्थगित करते हुए बच्चों को ताजा नाश्ता एवं गर्म पका हुआ भोजन प्रदाय किया जाएगा।

65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का प्रवेश होगा वर्जित, मास्क होगा अनिवार्य-

आंगनबाड़ी केन्द्र के अंदर एवं बाहर आसपास की साफ-सफाई, स्वच्छता एवं कोविड संक्रमण से बचाव की व्यवस्था रहेगी। कोविड संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, सेनेटाईजर, दो गज की दूरी जैसे सुरक्षात्मक उपायों का पालन भी किया जाएगा। 65 साल से अधिक आयु के व्यक्तियों का आंगनबाड़ी केन्द्र में प्रवेश वर्जित होगा। गर्भवती महिलाओं एवं दस वर्ष से कम आयु के बच्चों हेतु निर्देशानुसार गतिविधियों की प्राथमिकता के आधार पर कोविड से बचाव की सावधानियों का पालन करना होगा।

ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम – 11 नवम्बर 2021 भावी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश

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गौतम अदाणी

चेयरमैन, अदाणीग्रुप

देवियो और सज्जनों,
मैं ब्लूमबर्ग को भारत में 25 वर्षों की उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए अपनी बात शुरू करना चाहूंगा। 1996 मेंभारत सिर्फ 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था था, जिसकी आबादी एक अरब से कम थी। आज जब भारत आजादी के 75 साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है,तो मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम विकास के उस असाधारण दौर के कगार पर हैं, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र ने अब तक हासिल किया है।

अब से लगभग 25 वर्षों बाद, भारत की जनसंख्या 1.6 बिलियन पर हो जाएगी, जो अब तक की सबसे बड़ी आबादी होगी और जिसकी औसत आयु 40 वर्ष से कम होगी। इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि अगर राष्ट्र स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का सामाजिकीकरण करने में सफल हो जाते हैं तो राष्ट्रों को इस युवा आबादी से बहुत लाभ होता है।। ये वही विकास है जिसे वर्तमान सरकार ने अपनी विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं के जरिये गति प्रदान की है। हालांकि परिणाम रातोंरात नहीं दिखाई देंगे, लेकिन मेरा मानना है कि आज से लेकर 2050तक के समय के बीच, भारत किसी भी देश के मुकाबले अब तक के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी जनसांख्यिकीय लाभ का सृजन करेगा, जिसका अर्थ वैश्विक मामलों में अग्रणी भूमिका निभाने की बढ़ी हुई जिम्मेदारी होगी।

इस अग्रणी भूमिका की शुरुआत अवश्य ही सस्टेनेबिलिटी हासिल करने के प्रयास से होनी चाहिए। यह अब एक आवश्यक चुनौती है, जिसके लिए पूरे देश को एकजुट होना चाहिए। ग्लासगो में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, सीओपी 26 से पहले ही, मैंने कहा था कि इंक्रिमेंटल ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने की तत्काल आवश्यकता पर ध्यान देने वाले बिजनेस अगले कई दशकों के दौरान सबसे बड़े अवसर प्रदान करेंगे। उत्सर्जन को सीमित करते हुए विकास को संतुलित करना, अनुकूलन के लिए तैयारबिजनेस के लिए एक अविश्वसनीय वैश्विक अवसर हैं। हालांकि आज देखें तो आसान समाधान आ+++सानी से उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी हम एक उदाहरण के रूप में कोविड महामारी के अपने अनुभवों कोले सकते हैं। शुरुआती उथलपुथल के बाद, हम किसी भी अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से समस्या पर ध्यान देने और उसका समाधान करने के लिए एकजुट हुए। दुनिया के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में कोरोनावायरस के टीके बनाने के लिए सीमाओं के पार जाकर सहयोग किया। वैज्ञानिकों को इस कार्य में एक वर्ष से भी कम समय लगा, जबकि सामान्य रूप से पांच वर्ष लग सकते थे। जब मानव जाति अस्तित्वगत खतरे का सामना कर रही थी, ऐसे वक्त में वैज्ञानिकों की सफलता मुझे पहले से कहीं अधिक आशावादी बनाती है और उम्मीद जगाती है कि विज्ञान अंततः जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर विजय हासिल कर लेगा। लेकिन अब यह हम पर निर्भर है कि हम तात्कालिकता, विश्वास के साथ और न्यायसंगत समाधानों पर ध्यान देते हुए विज्ञान का समर्थन करें।

पारिस्थितिक आपदा को टालने के इस गंभीर प्रयास में दुनिया भारतीय नेतृत्व का उपयोग कर सकती है। सस्टेनेबिलिटी संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड किसी भी अन्य प्रमुख राष्ट्र की तुलना में बेहतर है। पेरिस में सीओपी 21 में, भारत ने वादा किया था कि2030 तक, वह अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% तक कमी लाएगा और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के अपने हिस्से को 40% तक बढ़ा देगा। हमने दोनों लक्ष्यों को हासिल कर लिया है, जिसमें दूसरे लक्ष्य को तो तय समय से नौ साल पहले ही हासिल कर लिया। यह कुछ और नहीं भी हो तो भी इस बात का तो पर्याप्त प्रमाण है कि भारत संभवतः नई और अधिक महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताओं को हासिल करेगा जिनकी घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सीओपी 26 में की थी।

हालांकि, हम मानते हैं कि यह आसान नहीं होगा। हर राजनेता और बिजनेस लीडर को ऐसे निर्णय लेने पड़ेंगे जो उनसे मौजूदा नियमों में परिवर्तन करने के साथ-साथ मौजूदा बिजनेस मॉडल में भी बदलाव की मांग करते हैं। इसे उस डिजिटल स्पेस में आने वाले व्यवधानों के साथ जोड़ दें, जिसने हर क्षेत्र को अपने दायरे में समेट लिया है तो हमारे सामने लगभग एकदम सही परिस्थिति मौजूद है। यह परिस्थिति कई बड़े बहुराष्ट्रीय व्यवसायों के पतन का कारण बनेगा, और उनकी जगह केवल सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के तालमेल से पैदा हुईं नई मल्टी ट्रिलियन डॉलर की कंपनियां लेंगी। दूसरे शब्दों में, हरित दुनिया को सक्षम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य के डिजाइन और कार्यान्वयन दोनों के लिए मुख्य रूप से सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल इनोवेशन दोनों की जरूरत पड़ेगी।

आइए, मैं अदाणी ग्रुप के नजरिए से अपनी बात समझाता हूं।

हम इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते हैं जो ‘गतिशीलता’ को सक्षम बनाता है। और इस दुनिया में जो कुछ भी गतिशील है उसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल होना चाहिए – चाहे वह ऊर्जा का प्रवाह हो, माल का प्रवाह हो, लोगों का प्रवाह हो या डेटा का प्रवाह हो। पिछले वर्षों में, हमने अपने बिजली से संबंधित व्यवसायों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स व्यवसायों, हवाई अड्डे और परिवहन व्यवसायों और डेटा-सेंटर से संबंधित व्यवसायों के जरिये इन सभी प्रवाहों में खुद को स्थापित किया है। जलवायु परिवर्तन संबंधित दायित्व और अधिकार-पत्र इन व्यवसायों मं से हर एक को नए बाजार के अवसरों और एडजासेंसीज का पता लगाने और उनका निर्माण करने की सुविधा प्रदान करेगा। इसे प्रभावी ढंग से करने के लिए, हम अपने वर्तमान बिजनेस मॉडल पर पुनर्विचार कर रहे हैं और इसे फिर से डिज़ाइन कर रहे हैं। जब हम व्यवसाय के उन निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, जिनके लिए हमें अनुकूलन करने और तेजी से सीखने की आवश्यकता होती है तो मैं जटिलताओं को पहचान पाता हूं। लेकिन यही अनिश्चितता है, और यही तेज विकास है जो चीजों को दिलचस्प बनाये रखता है।

चलिए, मैं कुछ खास उदाहरणों से बताता हूं कि कैसे नई मार्केट एडजासेंसीज तक हमारी पहुंच बन रही है।
जब ऊर्जा के प्रवाह की बात आती है, तो अब यह निर्विवाद है कि बिजली का प्राथमिक स्रोत ग्रीन यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। हालांकि, वास्तविक वैल्यू क्रिएटर्स ग्रीन इलेक्ट्रॉन का संगहण करेंगे और ट्रांसमिशन ग्रिड में इसकी क्षणभंगुरता को स्वीकार करने के बजाय, वे इलेक्ट्रॉन को दूसरे रूप में सूचीबद्ध करेंगे –इस मामले में एक स्पष्ट संभावना हाइड्रोजन के रूप में है। यह मौजूदा वैल्यू चेंस सहित कई व्यवसायों को बाधित करेगा, जिनमें रसायन, धातु और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अदाणी के नजरिए से, हम दुनिया के सबसे कम खर्चीले हाइड्रोजन का उत्पादन करने की मजबूत स्थिति में हैं, और उम्मीद है कि यह हाइड्रोजन उन विभिन्न उद्योगों के लिए ऊर्जा स्रोत और फीडस्टॉक का काम करेगा, जिनमें काम करने का हमारा इरादा है।

जब माल और लोगों की आवाजाही की बात आती है, तो यह साफ है कि परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह से पुनर्गठन होगा। ऑनबोर्ड बैटरी, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन या मेथनॉल द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े का मतलब है कि आंतरिक दहन इंजन का चलन बंद हो जाएगा और इसका अर्थ यह भी है कि दुनिया भर में नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। चाहे वह हवाई जहाज के लिए टिकाऊ (सस्टेनेबल) एविएशन फ्यूल का उत्पादन करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर होया परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जलयानों के लिए, लॉजिस्टिक्स वैल्यू चेन के हर हिस्से को बदलने और फिर से डिजाइन करने की आवश्यकता होगी। जहां अर्थशास्त्र में अब भी सुधार की जरूरत है, वहीं उम्मीद की किरण यह है कि हरित परिवहन के समाधान संभव हैं। वास्तव में, अदाणी ग्रुप ने पहले ही शुरुआत कर दी थी और हमारे पोर्टफोलियो में तेजी से पर्यावरण-अनुकूल हरित बंदरगाह, हरित हवाई अड्डे, हरित बिजली और हरित ट्रांसमिशन शामिल हो चुके हैं। इसने हमें कई अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों का पसंदीदा पार्टनर बनने की स्थिति में ला दिया है, जो भारत के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की सेवा करने की चाह में, हरित इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे के लिएभारत की तरफ देख रहे हैं।

डेटा प्रवाह के मामले में तो यह अपरिहार्य है कि बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चरअब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-खपत करने वाला उद्योग बन जाएगा। क्लाउड स्टोरेज एप्लिकेशन सपोर्ट से लेकर डेटा बैकअप तक, और नेटवर्किंग से लेकर वेबसाइट होस्ट करने तक, तकनीक से संचालित होने वाली आधुनिक दुनिया को चलाने में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग और 5जी के आगमन के साथ तेजी से वृद्धि होगी। यह अनुमान लगाया गया है कि 2025 मेंविकसित दुनिया में एक व्यक्ति हर 20 सेकंड में किसी एक डेटा सेंटर के साथ एक इंटरएक्शन करेगा। जैसे-जैसे 5जी कनेक्टिविटी एंटरप्राइज़ नेटवर्क का विस्तार करेगी और डेटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी, हमें डेटा सेंटर डिजाइनों को फिर से तैयार करने की आवश्यकता पड़ेगी। डेटा सेंटर्स के निर्माण, डेटा सेंटर्स को जोड़ने और डेटा सेंटर्स को 100% हरित बिजली प्रदान करने की अपनी क्षमता को देखते हुए अदाणी ग्रुप इस प्रवृत्ति से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जो एक ऐसा प्रावधान है जिसे दुनिया में कहीं और आर्थिक पैमाने पर दोहराना कठिन होगा।

अदाणी में, हम रिन्यूएबल एनर्जी को जीवाश्म ईंधन का एक व्यवहारिक, किफायती विकल्प बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दावोस 2020 में अपनी सोच जाहिर करने के बाद से, हमने केवल 30 महीनों की अवधि में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर एनर्जी डेवलपर बनकर अपनी गंभीरता को साबित किया है। उम्मीद है कि 2030 तकहम बिना किसी शर्त या बाधा के दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन जाएंगे – और ऐसा करने के लिए हमने अगले दशक में 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसी कोई अन्य कंपनी नहीं है जिसने अभी तक अपनी सस्टेनेबिलिटीइंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर इतना बड़ा दांव लगाया हो।

इसलिए हम मानते हैं कि हमारी रिन्यूएबल क्षमता और हमारी इन्वेस्टमेंट साइज साथ मिलकर हमें सस्ती हरित बिजली और हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के प्रयास में सभी वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अग्रणी स्थिति में रखते हैं। वैश्विक सर्वसम्मति देखते हुए लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हरित हाइड्रोजन एक वरदान साबित होगी। यह एक चमत्कारिक ईंधन और एक चमत्कारी फीडस्टॉक है। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत की तेज वृद्धि को देखें तोसस्ते में हरित हाइड्रोजन का उत्पादन भारत को हरित ऊर्जा के नेट एक्सपोर्टर में बदल सकता है। कल्पना करें कि एक ऐसा भारत है जिसे अब आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा,एक ऐसा भारत है जो अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रभाव में नहीं है, और एक ऐसा भारत है जिसने ईंधन स्वतंत्रता हासिल कर ली है। और हम इस कल्पना को ही अपने देश में संभव बनाने के लिए मदद करना चाहते हैं।

इसके लिए, अदाणी ग्रुप डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चरके क्षेत्र में भी बड़ा निवेश कर रहा है। डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना, रीयल-टाइम डेटा और ऊर्जा दक्षता तक हमारी पहुंचको काफी बेहतर बनाते हैं। विज्ञान को आज बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमताओं की आवश्यकता है और कंप्यूटिंग क्षमताओं को क्लाउड आधारित डेटा सेंटर्स की आवश्यकता है और डेटा सेंटर्स भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं। हम मानते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारत की तेज प्रगति और अंततः स्वच्छ बिजली उत्पादन की हमारी क्षमता हमें न केवल भारत के, बल्कि शायद दुनिया के अधिकांश डेटा का भंडारण करने के लिए सबसे बड़ा हरित विकल्प बना देगी – और ‘एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड’ के सिद्धांत के साथ जोड़ेगी, जिसका उल्लेख हाल ही में सीओपी 26 में किया गया है।

जैसाकि उम्मीद है, ऐसा कहने वाले लोग भी होंगे कि भारत, और अन्य राष्ट्र, आवश्यकता के अनुसार तेजी से हरित, सस्टेनेबल दुनिया में परिवर्तित नहीं हो सकते। लेकिन मैं इससे असहमत हूं। यह पहली बार नहीं है जब मानव जाति को अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ा है। आज हमारे पास विज्ञान की शक्ति, बढ़ती जागरूकता और वैश्विक सहयोग है, जिसके साथ, मुझे विश्वास है कि, हम इस संकट से भी उबरेंगे, और भारत पहले से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावशाली होगा। विलुप्तिकरण की संभावना सामने होने पर सब कुछ संभव हो जाता है।

इसके अलावा, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से रोमांचक लगता है, वह यह है कि अब हम विज्ञान के इतिहास के महान परिवर्तनकारी मोड़ पर खड़े हैं, जहां डिजिटल तकनीक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाने के लिए सक्रिय है जो अभी अज्ञात है, और जो लगभग असीमित पैमाने पर होगा। हमें प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता होगी, लेकिन भारत को एक महत्वपूर्ण लाभ है यह है कि हमारा मध्य वर्ग, हमारे युवा, हमारी डिजिटल क्षमता, और हमारी इंफ्रास्ट्रक्चरसंबंधी ज़रूरतें भविष्य के इस उद्योग का निर्माण और उपभोग दोनों करेंगी। हम इन चुनौतियों को कैसे लेते हैं, उसी पर अगले कई दशकों में होने वाले हमारे देश के विकास की नींव पड़ेगी और यह विकास ही भारत की कहानी को हम सभी के लिए, जिनको इसका हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है, काफी प्रेरक बनाएगा।
धन्यवाद।

*हर सफल आदमी कुछ अनैतिक काम करें ये ज़रूरी नहीं है -इमरान हाशमी*

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*नेशनल*: बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी अपनी हॉरर फिल्मों में अभिनय कर सुर्खियां में हमेशा उनकी फिल्म रहते हैं | उनकी हर एक फिल्म को दर्शकों को न सिर्फ पसंद भी आती है बल्कि काफी प्यार भी मिलता हैं | हाल ही में आई थ्रिलर जॉनर फिल्म “चेहरे” जिसमें इमरान ने बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर किया था | फिल्म में अमिताभ बच्‍चन का किरदार रिटायर्ड लॉयर के साथ आर्टिस्‍ट‍िक दिखाया गया था | वंही इमरान हाश्मी का किरदार बड़ा ट्रैवेल पसंद करने वाला था । उसे अच्‍छे सूट,लेदर जैकेट, जूते पहनने का शौक था ।

 

फिल्म में इमरान हाश्मी का एक डॉयलॉग है जिसमें वे कहते हैं कि हर एक कामयाब आदमी को कुछ बेईमानी वाले काम तो करने पड़ते है | लेकिन हाल में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वे एक फिल्म का डॉयलॉग और एक किरदार था जो वो निभा रहे थे और असल ज़िन्दगी में वे इस बात से बिलकुल वाकिफ नहीं रखते है | उनका मानना हैं कि अगर ज़िन्दगी में कामयाबी की सीढ़ी चढ़ना है तो अपना काम करते जाओ और वक़्त आपको बेशुमार उपलब्धियों से नवाज़ेगा और जो भी ज़िन्दगी में आप चाहते हो वो सब आपको मिल सकता हैं | इसी के साथ साथ बेईमानी से किया हुआ काम आपको बेशक कामयाब बना दें लेकिन वो कामयाबी आपसे बहोत कुछ छीन भी लेगी |

 

इमरान हाश्मी का वीडियो अभिनेता कारण सिंह छाबड़ा ने सोशल मीडिया Koo पर शेयर किया | अभिनेता कारण सिंह छाबड़ा ने सुशांत सिंह राजपूत और कृति सनोन के साथ “राबता” मूवी में स्क्रीन शेयर किया था |

 

इमरान हाश्मी के आने वाले प्रोजेक्ट्स की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म “डीबुक” रिलीज़ हुई है और दिसंबर में “फादर्स डे” और आलिआ भट्ट के साथ साथ गंगू बाई फिल्म में नज़र आने वाले हैं |

किसान आंदोलन- राकेश टिकैत बोले 29 नवंबर को ट्रैक्टरों से संसद भवन जाएंगे।

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दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के आंदोलन का एक साल पूरा होने जा रहा है। 26 नवम्बर को इस किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर दिल्ली की सभी सीमाओं पर किसानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही 29 नवम्बर से हर दिन संसद के सत्र चलने तक 500 किसान 30 ट्रैक्टर ट्रालियों में ‘संसद मार्च’ करेंगे।

तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर पिछले साल से ही संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान दिल्ली के तीन बॉर्डर पर डेरा जमाए हुए हैं। इस दौरान किसान नेताओं की केंद्र सरकार से कई दौर की बातचीत हुई तो जो बेनतीजा रही। अब इस किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने जा रहा है जिसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बैठक की और फैसला लिया है कि दिल्ली से सटे राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों की राजधानियों में किसान, मजूदर, महिलाओं का व्यापक प्रदर्शन होगा। दूसरी तरफ दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा के किसानों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

29 नवम्बर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। सत्र में पहले दिन से आखिरी दिन तक हर रोज 30 ट्रैक्टर ट्रॉली में 500 किसान हर रोज संसद की तरफ कूच करेंगे। संसद की तरफ जाने वाले ट्रैक्टर पहले से तय होंगे और वो पूरे अनुशासन का पालन करेंगे। इस ट्रैक्टर मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर कानून रदद् करने का दबाव बढ़ाना होगा।

इसके अलावा इस बैठक में हाल ही में आई उस जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई जिसमें ये सामने आया है कि लखीमपुर हिंसा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र को रायफल से गोली चली थी। इन पर संयुक्त किसान मोर्चा ने अजय मिश्र की बर्खास्तगी और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग दोहराई।

राकेश टिकैत ने कू कर दी जानकारी
किसान आंदोलन को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ राकेश टिकैत ने सोशल सोशल मीडिया हैंडल पर आगामी संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर आंदोलन के बारे में जानकारी दी। अपनी पोस्ट में वे लिखते है – ट्रैक्टर भी वही हैं और किसान भी वही। इस बार गूंगी-बहरी सरकार को जगाने और अपनी बात मनवाने के लिए किसान 29 नवंबर की ट्रैक्टरों से संसद भवन जाएंगे।

भारत एक खोज: भारत का अनोखा रेलवे स्टेशन! दो राज्यों में बंटा हुआ है प्लेटफॉर्म और 4 भाषाओं में यात्रियों को मिलती है सूचना, सोशल मीडिया पर पोस्ट हो रही वायरल

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भारत का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन जो बंटवारे से पहले बनाया गया था, जहाँ ट्रेन गुजरात में रूकती है तो टिकट महाराष्ट्र से लेनी पड़ती है, सोशल मीडिया ऐप कू पर पोस्ट हो रही वायरल

नेशनल। अब तक आपने कई तरह के सीमा विवाद सुने होंगे। कई बार सोशल मीडिया पर दो देश की बॉर्डर के आपस में जुड़े होने की तस्वीरें शेयर की जाती हैं। ऐसा ही कुछ भारत के एक रेलवे स्टेशन (Railway Station) के साथ भी है। भारत में एक रेलवे स्टेशन ऐसा है, जिसका आधा हिस्सा गुजरात (Gujrat) में आता है और दूसरा हिस्सा महाराष्ट्र (Maharashtra) में। अब आप यह जरूर सोच रहे होंगे कि आखिर यह कैसे संभव है।

कुर्सी हिस्से की

सबसे खास बात यह है कि इस रेलवे स्टेशन पर एक कुर्सी भी रखी है, जिसका एक हिस्सा गुजरात में है और दूसरा महाराष्ट्र में। यह सुनने में बड़ा ही अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यहाँ काम कैसे होता है और किस राज्य के नियमों का पालन किया जाता है। आइए जानते हैं इस अनोखे रेलवे स्टेशन के बारे में:

बंटवारे के पहले से बना है स्टेशन

आपको बता दें कि यह रेलवे स्टेशन सूरत-भुसावल लाइन पर है, जो दो राज्यों में बंटा हुआ है। आधा स्टेशन महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में आता है और आधा गुजरात के तापी जिले में। दरअसल गुजरात और महाराष्ट्र के बंटवारे से पहले ही यह स्टेशन बन चुका था और बंटवारे के बाद भी इस स्टेशन में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि अब यह दोनों राज्यों में आता है।

किस तरह से बंटा हुआ है?

आपको बता दें कि यह रेलवे स्टेशन बेहद खास तरीके से बंटा हुआ है। इसमें प्लेटफॉर्म पर जहाँ ट्रेन खड़ी होती है, वह गुजरात के क्षेत्र में है। दूसरी तरफ, यहाँ का क्लर्कियल काम महाराष्ट्र के क्षेत्र में होता है। साफ शब्दों में कहें, तो रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म वाला हिस्सा गुजरात में है और ऑफिस का हिस्सा महाराष्ट्र के क्षेत्र में है। वैसे नवापुर रेलवे स्टेशन, महाराष्ट्र के हिस्से में आता है।

चार भाषाओं में दी जाती है सूचना

दो राज्यों में बंटे इस अनोखे नवापुर रेलवे स्टेशन पर चार अलग-अलग भाषाओं में रेल यात्रियों को सूचना दी जाती है। यहाँ हिंदी, अंग्रेजी, गुजराती और मराठी भाषाओं में अनाउंसमेंट होता है। ऐसे में यह रेलवे स्टेशन वाकई खास है। हो भी क्यों न, जिस रेलवे स्टेशन पर आपको महाराष्ट्र से टिकट लेनी होती है और ट्रेन पकड़ने के लिए गुजरात जाना पड़ता है।

‘एक नेता, एक पद’ के फॉर्मूले पर होगा राजस्थान कैबिनेट में फेरबदल

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राजस्थान को लेकर दिल्ली में चल रही सियासी सरगर्मियों के बीच प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर सकते हैं.

राजस्थान: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की संभावना है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों से बताया है कि मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस ‘एक नेता-एक पद’ के फॉर्मूले की नीति को लागू कर सकती है. ये मंत्रिमंडल विस्तार 15 से 20 नवंबर के बीच किया जा सकता है.

“कैबिनेट फेरबदल में ‘एक नेता, एक पद’ का फॉर्मूला होगा. इस फॉर्मूले के मद्देनजर गहलोत मंत्रिमंडल के तीन वरिष्ठ सदस्यों को उनके पद से हटाए जाने की संभावना है क्योंकि उन्हें पहले ही पार्टी में जिम्मेदारी दी जा चुकी है. राजस्थान पीसीसी प्रमुख गोविंद डोटासरा, पंजाब के एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी, गुजरात के एआईसीसी प्रभारी रघु शर्मा के फेरबदल से बाहर होने की संभावना है. उन्होंने खुद पार्टी के लिए काम करने का अनुरोध किया है, “.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास पर पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक की थी. बैठक में राजस्थान के एआईसीसी प्रभारी अजय माकन भी मौजूद थे. बैठक के बाद माकन ने कहा कि राजस्थान में राजनीतिक स्थिति, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और राज्य में 2023 के विधानसभा चुनाव के रोडमैप पर चर्चा की गई.

पायलट के 5-6 समर्थक विधायकों को बनाया जा सकता है मंत्री

सूत्रों ने ABP News को ये भी बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार में सचिन पायलट के समर्थक 5 से 6 विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है. इस बीच बुधवार को ही सचिन पायलट ने भी संगठन महासचिव केसी वेणु गोपाल से मुलाकात की थी. पायलट पहले ही इस सिलसिले में प्रियंका गांधी से मिल चुके हैं. करीबी सूत्रों के मुताबिक पायलट ने फिर नेतृत्व से मांग की थी कि उनसे किए गए वादों को पूरा किया जाए और उनके समर्थक विधायकों को मंत्री बनाया जाए. पायलट ये भी चाहते हैं कि इस बार के विस्तार में दलित चेहरों को भी मौका मिले.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) लगभग 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है

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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले विपक्षी पार्टियों ने इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ऐप पर भाजपा सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है. विपक्षी दलों की सक्रियता को देखते हुए अब ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश का चुनावी दंगल कू ऐप पर ही लड़ा जाएगा. उत्तर प्रदेश चुनावों में काफी सक्रीय दिख रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) उत्तर प्रदेश और पीस पार्टी ने अब कू ऐप पर अपना आधिकारिक अकाउंट बना लिया है. पार्टी की नजर इस क्षेत्रीय भाषा वाले माइक्रोब्लॉगिंग ऐप के जरिए वोटरों के बीच अपनी जगह बनाने पर है. अब साफ है कि मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली ये दोनों पार्टियां कू ऐप के जरिए ही लोगों से संवाद करेंगी. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही इस प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय हैं.

 

कू ऐप पर पहले से ही सपा (Samajwadi Party), बसपा (Bahujan Samaj Party), कांग्रेस(Congress), आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party), आजाद समाज पार्टी (Azad Samaj Party), सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के कई बड़े नेता जुड़ चुके हैं. जानकारों का कहना है कि भाजपा सरकार पर हमलावर रहने वाले एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी जल्द ही इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं. आपको बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में ये ऐलान किया था कि वो भाजपा-कांग्रेस को छोड़ कर किसी भी अन्य दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं. ऐसे बड़े ऐलान के बाद एआईएमआईएम (AIMIM) उत्तर प्रदेश का कू ऐप पर आना ये साफ जाहिर करता है कि पार्टी इस चुनाव में सोशल मीडिया के जरिए सफलता का रास्ता तलाश रही है.

 

एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी ने क्योंचुना कू ऐप?

 

कू ऐप एक इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म है जिस पर उत्तर प्रदेश की जनता भारी संख्या में मौजूद है और क्षेत्रीय भाषा में अपनी राय और सवाल लिख रही है.कू ऐप पर उत्तर प्रदेश के युवाओं की संख्या भी काफी ज्यादा है और ये जागरुक युवा इस स्वदेशी ऐप के जरिए हिंदी में अपने सवाल नेताओं से पूछते हैं, अपने इलाके की परेशानियों के लिए आवाज उठाते हैं. एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी ने इस मौके को अच्छी तरह से समझ लिया है और इसलिए उन्होंने इस माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म को चुना है.

 

दलित और मुस्लिम वोटरों पर है नजर

 

उत्तर प्रदेश में दलित और मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी निर्णायक है और चुनाव में इस वर्ग की भूमिका काफी अहम होती है. एआईएमआईएम (AIMIM) और पीस पार्टी की नजर आमतौर पर मुस्लिम और दलित वोटरों को रिझाने पर है जिसके लिए उन्होंने इस क्षेत्रीय भाषा वाले प्लेटफॉर्म को चुना है. इन दोनों दलों के अलावा आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद, बहुजन समाज पार्टी के सतीष चंद्र मिश्रा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ओम प्रकाश राजभर पहले से ही कू ऐप पर काफी सक्रीय हैं और आम लोगों से संवाद कर रहे हैं.

 

कू ऐप पर एआईएमआईएम (AIMIM) की सक्रीयता

 

एआईएमआईएम (AIMIM) पार्टी उत्तर प्रदेश ने Koo पर@ AIMIM upofficalहैंडल के साथ अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है. पार्टी के समर्थकों ने अब कू ऐप के जरिए पार्टी से जुड़ना शुरू कर दिया है. इसके पहले एआईएमआईएम (AIMIM) बिहार ने कू ऐप ज्वाइन किया था और उनके कई बड़े नेता भी कू ऐप पर आ चुके हैं. बताते चलें कि बिहार विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम (AIMIM) ने अपने 20 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें से 5 उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी. पार्टी की मुस्लिम और दलित वोटरों के बीचकाफी लोकप्रियता है और अब सूत्रों की मानें तो जल्द ही पार्टी के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी भी इस इंडियन माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ सकते हैं.

 

 

 

हिंदी सोशल मीडिया यूजर्स पर है सबकी नजर

 

तेजी से लोकप्रिय हो रहे स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग साइट Koo ने ये ऐलान किया था कि उसके 1 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हो गए हैं जिनमें से करीब आधे यूजर्स हिंदी के हैं. ऐसे में ये साफ है कि बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश के लोग Koo पर हैं और हिंदी में अपनी बात रख रहे हैं. बीजेपी ने इस बात को पहले ही भांप लिया था और इस प्लेटफॉर्म से जुड़ गए थे. चुनाव को नजदीक आता देख विपक्ष भी इस बात को समझ गया है कि उत्तर प्रदेश के सत्ता का रास्ता हिंदी के साथ चल कर ही तय किया जा सकता है और यही वजह है कि अब सभी विपक्षी पार्टियों ने Koo का रुख कर लिया है. जानकारों की मानें तो इस स्वदेशी सोशल मीडिया ऐप पर यूपी चुनाव का घमासान देखने को मिलेगा.

क्या डिंपल को खुद से ऊपर रख पाएंगे अखिलेश?- – अतुल मलिकराम

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पिछले विधानसभा चुनाव में आंतरिक संघर्ष से जूझ रही, समाजवादी पार्टी इस बार कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है. खबर है कि प्रत्याशियों की सूचि जारी की जा सकती है. वहीँ दूसरी तरफ चुनावी रैलियों का दौर भी शुरू हो चुका है. #बाइसमेंबाइसिकिल का नारा सड़क से सोशल मीडिया तक बुलंद हो रहा है. फिर मेरी बात उनके कानों तक भले देर में पहुंची हो, लेकिन डिंपल को सियासी मैदान में उतारने का काम भी उन्होंने तय समय पर किया है. दशहरा पर आश्चर्यजनक रूप से डिंपल का विरोधियों पर हमलावर होना काफी हद तक समाजवादियों के पक्ष में जाता है. शायद अखिलेश को भी उनसे इसी तरह का रुख अख्तियार करने की उम्मीद होगी. जो पार्टी कार्यकर्ताओं में थोड़ी और जान फूंकने के साथ प्रदेश की जनता को सपा की साइकल पर एक बार फिर सैर करने के बारे में सोचने पर मजबूर करेगा.

 

मार्च 2017 में सत्ता संभालने के साथ ही योगी आदित्यनाथ ने महिला सुरक्षा को सबसे अधिक तवज्जो देते हुए ऐंटी रोमिओ स्कॉड बना दी, रोड छाप रोमियों के साथ गुंडे बदमाशों को प्रदेश छोड़ने की धमकी भी दे दी. लेकिन पिछले साढ़े चार सालों का आपराधिक रिकॉर्ड देखें तो योगी सरकार, बलात्कार से लेकर गंभीर मामलों तक में अखिलेश की पिछली सरकार से बीस ही नजर आती है. ऐसे में सपा समेत अन्य विरोधी दलों के पास महिला सुरक्षा अभी भी एक जटिल और उकसाऊ मुद्दा है. ऐसे में सपा अपनी महिला ब्रिगेड को संभालने की जिम्मेदारी, आँख मूँद डिंपल को सौप सकती है.

 

 

मेरी नजर में आगामी विधानसभा चुनावों में सपा के लिए डिंपल को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमोट करना अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है. यह सिर्फ उत्तर प्रदेश की महिला वोटरों को साथ लाने के लिए नहीं बल्कि प्रदेश को पहली युवा समाजवादी महिला मुख्यमंत्री देने के मकसद से भी सही साबित होगा. बेशक उनके पास सरकार चलाने का अनुभव नहीं होगा, लेकिन सरकार में रह चुके लोगों का अनुभव, खासकर खुद पूर्व मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन उन्हें प्राप्त होगा. हालांकि इन सब में सिर्फ एक ही सवाल से सपा को पार पाने की जरुरत है. ‘क्या अखिलेश को खुद से ऊपर रख पाने में सहज महसूस करेंगे? शायद नहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की पहल में जनता का खूब प्यार बटोरा है. एक झटके में खुद को उम्मीदवारी से हटाना उनके लिए आसान नहीं होगा, हालाँकि योगी जी से कुर्सी छीनना भी सिर्फ डिंपल के ही बस में होगा, यह भी निश्चित है.

 

उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनावों में प्रत्याशियों को टिकट देने से पहले उनकी क्षमताओं को परखने का काम किया जा रहा है, वह भी प्रोफेशनल एजेंसियों के द्वारा. इतना ही नहीं संभावित प्रत्याशियों का आकलन और आतंरिक फीडबैक के बाद ही प्रत्याशियों की नियुक्ति होगी. 2017 के चुनावों में कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण, सपा को जल्दबाजी में अपने प्रत्यासी घोषित करने पड़े थे. वहीँ गठबंधन के चक्कर में सपा को 114 सीटें छोड़नी पड़ी थीं. जिनमें से अधिकांश सीटें भाजपा के पास चली गई थीं. अब इन सीटों पर भी जल्द प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी. जाहिर है इस बार सपा के पास खुला मैदान है और वह मैदान के चारों तरफ अपनी फील्डिंग सजा सकती है, बस जरुरत है तो कप्तान के नाम में थोड़ी बहुत हेर फेर करने की.

पृथ्वीपुर में मुख्यमंत्री ने कई घोषणा की

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पृथ्वीपुर : मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले दिनों एक चुनावी सभा में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान (Shivraj singh Chouhan) पर तंज किया था कि वे जेब में नारियल (Coconut) लेकर चलते हैं और कहीं भी फोड़ देते हैं। जहां नदी नहीं हो वहां भी पुल की घोषणा करने में देर नहीं करते। आज शिवराज सिंह ने पृथ्वीपुर में कमलनाथ (Kamalnath) को उन्हीं के अंदाज में जवाब दिया और बार-बार नारियल फोड़ने की बात करके कई घोषणाएं की।

मुख्यमंत्री (CM) ने कहा कि कमलनाथ कह रहे हैं कि वे तो नारियल जेब में धरे रहते हैं और कहीं भी नारियल फोड़ देते हैं। आज हमने पृथ्वीपुर में कितने नारियल फोड़े हैं और किस-किस के नारियल फोड़े हैं, कमलनाथ तुम भी सुन लो।

CM ने कहा, हमने आज पृथ्वीपुर में सीएम राइस स्कूल खोलने का 18 करोड़ का नारियल फोड़ा, ये सस्ता थोड़ी न है। दूसरा नारियल रोहतेरा, कोली, सिमरिया 6 किलोमीटर सड़क निर्माण का फोड़ा। जेरौन में नाला निर्माण का नारियल फोड़ा। अंबेडकर भवन निर्माण के साथ ही जेरौन में बस स्टैंड निर्माण का भी हमने नारियल फोड़ा। तालाब के सौंदर्यीकरण का भी नारियल फोड़ा। हमने दिगौड़ा को तहसील बनाने का नारियल भी फोड़ा।

 

भैया दिगौड वालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी, तो हम क्यों कोई कसर छोड़ें! हमने पृथ्वीपुर में राधा सागर तालाब को सुंदर बनाने, पाइप लाइन के विस्तार का, तिराहा के सौंदर्यकरण का और जब सिटी में घुसो तो अच्छे इंट्रेंस गेट का भी नारियल आज ही फोड़ दिया।

कमजोरों को कोई सताए नहीं, इसलिए पृथ्वीपुर में जिम बनाने का नारियल भी हमने फोड़ दिया। जोरा-मोरा में आंगनवाड़ी भवन का, जौराखास, सियाखास, जमालपुरा, मुडेनी, खिसटोन आंगनवाड़ी के भवन के नारियल भी फोड़ रहे हैं।

सिमरा में पंचायत भवन का नारियल, ममोरा में सीमेट कांक्रीट रोड का नारियल, पृथ्वीपुर को खेल मैदान का नारियल और जिनके नाम नहीं आए चिंता मत करना भाइयों सबका नारियल आज ही फूटेगा। मामा ने जितनी घोषणा की सबके नारियल फोड़े हैं। जामनी नदी के पुल की स्वीकृति का 3 करोड़ का नारियल यहीं फोड़े या वहां ही फोड़ने आएं!