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मध्य प्रदेश में बाल कांग्रेस की शुरुआत, इंदौर के लक्ष्य गुप्ता को बनाया स्टेट कैप्टन

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भोपाल। पंडित जवाहरलाल नेहरू की जन्मतिथि 14 नवंबर को प्रदेश में बाल कांग्रेस का गठन किया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इसकी औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने कहा कि नौजवान देश और प्रदेश का भविष्य है पर इससे खिलवाड़ किया जा रहा है। इतिहास को तोड़मरोड़ करके प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके लिए भाजपा के पास इंटरनेट मीडिया की बड़ी मशीनरी है। इसका जवाब बाल कांग्रेस देगी। हम नहीं कहते कि आप कांग्रेस का साथ दीजिए पर सच्चाई को पहचानिए और उसका साथ जरूर दीजिए। आज देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को नीचा दिखाने का काम हो रहा है। स्वर्गीय इंदिरा गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में संगठन का पहला स्टेट कैप्टन इंदौर के लक्ष्य गुप्ता को घोषित किया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मध्य प्रदेश का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है, जब आप इतिहास को समझें और जानें। देश के इतिहास में कई सरकार आईं और गईं पर किसी ने ऐसा दुष्प्रचार नहीं किया। कांग्रेस और देश की संस्कृति जोड़ने की है। विश्व में ऐसे कोई देश नहीं है, जहां इतने धर्म, जाति, भाषा, रस्म और त्योहार हों। हम एक झंडे के नीचे खड़े हैं, यही भारत की संस्कृति है। आज इस पर हमला हो रहा है। आपको बहकाने का प्रयास किया जा रहा है। जवाहरलाल नेहरू के सामने देश को एक रखने और नवनिर्माण की चुनौती थी। जो लोग आज हमें राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने आए हैं, आप उनसे पूछिए कि एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का नाम बता दें, जो उनकी पार्टी के हों।

 

इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था। कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने का काम हो या फिर पाकिस्तान को सबक सिखाकर बांग्लादेश बनाने का काम हो, उन्होंने ही किया था। यह कोई सर्जिकल स्ट्राइक का नाटक नहीं था बल्कि एक लाख सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। वर्ष 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 लाख रुपये खाते में जमा करने और दो करोड़ नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था पर क्या हुआ। उन्होने कहा कि बाल कांग्रेस मध्य प्रदेश ही नहीं देश में उदाहरण बनेगी।

सिद्धू ने चुनाव से पहले किया ऐलान-कौन सी सीट से चुनाव लड़ेंगे

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चंडीगढ़
हर समय पार्टी लाइन से अलग सुर अपनाकर चर्चा में बने रहने वाले कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने साफ कर दिया है कि वह आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में अमृतसर सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले कुछ अटकलें थीं कि सिद्धू पटियाला से भी चुनाव लड़ सकते हैं। सिद्धू मूल रूप से पटियाला से ही हैं। वहीं, सिद्धू ने यह भी ऐलान किया कि पार्टी चीफ सोनिया गांधी को भेजे 13 सूत्रीय एजेंडा पर अब चन्नी सरकार ने काम करना शुरू कर दिया है।

हालांकि जब सिद्धू से 2022 विधानसभा चुनाव में सीएम चेहरे को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे टाल दिया। सिद्धू से पूछा गया कि क्या आगामी पंजाब चुनाव में वह सीएम पद का चेहरा हो सकते हैं। इस पर सिद्धू ने जवाब दिया कि यह पार्टी हाईकमान तय करेगा। इसके बाद सिद्धू बोले कि वह अपनी जबान के पक्के हैं और सिर्फ अमृतसर से ही चुनाव लड़ेंगे।

सिद्धू ने कहा, ‘मैंने तब भी अपना चुनावी क्षेत्र नहीं बदला था जब अरुण जेटली को साल 2014 के चुनाव में अमृतसर से टिकट दी गई थी। मैंने राज्यसभा की सीट तक लेने से इनकार कर दिया था।’ बता दें कि कांग्रेस से पहले सिद्धू बीजेपी में थे और साल 2004 से अमृतसर सीट से सांसद रहे थे। सिद्धू ने साल 2017 में कांग्रेस जॉइन की थी और चुनाव में वह अमृसर ईस्ट सीट से जीतकर विधायक बने थे। इस सीट पर सिद्धू से पहले उनकी पत्नी नवजोत कौर विधायक थीं।

बीते महीने ही नवजोत सिद्धू ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधई को चिट्ठी लिखकर पंजाब सरकार को 13 मुद्दों पर काम करने के लिए निर्देश दिए जाने को कहा था। बता दें कि सिद्धू को कांग्रेस ने इसी साल जुलाई में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाया था और उन्होंने सितंबर में इस पद से इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया था। हालांकि, बाद में सिद्धू ने यह इस्तीफा वापस ले लिया।

मानव सभ्यता की विकास यात्रा की सहभागिता रही हैं म.प्र. की जनजातीय भाषाएँ

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भोपाल: किसी भी मानव-समुदाय की पृथक पहचान उसकी जीवन-शैली, सांस्कृतिक परंपराओं और भाषा-बोली से होती है। आज स्थिति यह है कि वैश्वीकरण की प्रक्रिया में दुनिया की सैकड़ों बोलियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। किसी भी सभ्यता के विकास में भाषा की प्रमुख भूमिका होती है। मनुष्य अपने भाव अथवा विचार भाषा के माध्यम से ही अन्य व्यक्ति तक सम्प्रेषित करता है। इस प्रकार भाषा मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाने में केन्द्रीय तत्व के रूप में कार्य करती है। जनजाति समुदायों की भाषाओं पर विचार करते हुए यह तथ्य और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। ये भाषाएँ मानव-सभ्यता की विकास-यात्रा में सहयात्री रही हैं, इसलिये इनमें आरंभिक मनुष्य द्वारा अन्वेषित और अर्जित पारंपरिक ज्ञान संचित है,जो अत्यंत मूल्यवान है।

    जनजातीय भाषाओं का एक-एक शब्द संबंधित समुदाय की सांस्कृतिक निधि है। इन भाषाओं की परंपरागत वाचिक (मौखिक) संपदा के माध्यम से ही मानव-इतिहास, सभ्यता-संस्कृति, वनस्पति और जीव-जगत, कृषि, वास्तु एवं अन्य कला-कौशलों संबंधित ज्ञान की परंपरा को समझा जा सकता है। भारत की सांस्कृतिक विविधता में भाषिक भिन्नता एक प्रमुख घटक है। राष्ट्र की इस वैविध्यपूर्ण विशेषता को अक्षुण्ण रखने के लिए विभिन्न भाषा-बोलियों को बचाए रखना आवश्यक है। यह निश्चित है कि भाषाओं को बचाने का काम उसे बोलने वाले  ही कर सकेंगे।

      जनजातीय भाषाओं को जब तक आजीविका से नहीं जोड़ा जायेगा,तब तक संबंधित समुदाय भी इन्हें आर्थिक भविष्य के लिये अनुपयोगी और अवरोध मानकर उनकी उपेक्षा ही करेंगे। अन्य उन्नत भाषाओं और सभ्यताओं से सघन संपर्क के कारण जनजातीय भाषाओं के स्वरूप में बदलाव आ रहा है। भाषा की यह परिवर्तनशीलता एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे चाहकर भी रोका नहीं जा सकता।

      मध्यप्रदेश में 43 अनुसूचित जनजातियाँ अथवा उनके समूह हैं।पहले प्रत्येक जनजाति समुदाय की अलग भाषा हुआ करती थी। अब केवल भीली, भिलाली, बारेली, पटलिया, गोंडी, ओझियानी, अगरिया, बैगानी, कोरकू, मवासी, नहाली ही कुछ क्षेत्रों में परिवर्तित रूपों के साथ संबंधित समुदायों की प्राय: पुरानी पीढ़ी द्वारा बोली जाती हैं। अन्य जनजातियों की बोलियाँ लुप्त हो चुकी हैं, जैसे-कोल की कोलिहारी, परधान की परधानी, भारिया की भरियाटी, सहरिया की सहरानी, खैरवार या कोंदर की खैरवारी तथा भिम्मा, नगारची, मोंगिया सहित अन्य जनजातियों की भाषाएँ भी।

   भारत की मान्य भाषाएँ वे हैं, जो आठवीं अनुसूची में सम्मिलित हैं।तकनीकी रूप से ये प्रायः वे भाषाएँ हैं, जिनके प्रयोक्ताओं की संख्या तुलनात्मक दृष्टि से अधिक है और जिनका समृद्ध साहित्यिक इतिहास है। इनके अलावा भी देश में अनेक भाषाएँ हैं,जिनका प्रयोग व्यापक क्षेत्र में होता है और जिनमें प्रचुर मात्रा में साहित्य भी उपलब्ध है। वर्ष 1961 की जनगणना में कुल 1652 मातृभाषाएँ चिन्हित की गयीं थीं, जिनमें से 184 भाषाओं को बोलने वालों की संख्या 10 हजार से अधिक थी। ‘पीपुल ऑफ इंडिया’ के अनुसार भारत में 75 प्रमुख भाषाएँ हैं, जबकि मातृभाषा के रूप में 325 बोलियों का प्रयोग होता है। ‘एथनोलॉग’ में उल्लेख किया गया है कि भारत में कुल 398 भाषाएँ रही हैं, जिनमें से 387 जीवित हैं और 11 मृत हो चुकी हैं। एक आकलन के अनुसार 32 भाषाएँ ऐसी हैं, जिनका प्रयोग 10 लाख अथवा उससे अधिक लोग करते हैं। यूनेस्को की मान्यता पर ध्यान दें तो भारत में 400 भाषाएँ हैं, जिनमें से 70 से 80 प्रतिशत विलोपन के क्षेत्र में हैं।

आयुक्त भाषाई अल्पसंख्यक द्वारा वर्ष 2005 में प्रस्तुत ‘लघु भाषाएँ : विशेष प्रतिवेदन’ में उल्लेखानुसार भारत में कुल 116 भाषाएँ हैं, जिनमें से 22 आठवीं अनुसूची में तथा 94 उसके बाहर हैं। इनके अलावा दस हजार से कम प्रयोक्ताओं वाली अनेक बोलियाँ हैं, जिनमें से 44 सुपरिभाषित हैं। इसी प्रतिवेदन में बताया गया है कि चार अण्डमानीय भाषाएँ- अका 50, जारवा 300, सैंटिनलीज़ 100 तथा ओंजे 100 भाषा-भाषियों के साथ जीवित हैं।

       मध्यप्रदेश जनजातीय जनंसख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य है।जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, यहाँ भारत सरकार द्वारा जारी अनुसूची में शामिल 43 जनजाति समूह आबाद हैं, जिनमें जनंसख्या की दृष्टि से भील, गोंड, कोल,सहरिया,बैगा, कोरकू आदि प्रमुख हैं। आदिम जाति समूह के अंतर्गत बैगा, भारिया और सहरिया शामिल हैं। इन सभी जनजातियों की अपनी-अपनी बोलियाँ हैं। भील समूह की भीली, भिलाली, बारेली, पटलिया आदि बोलियाँ प्रमुख रूप से झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगौन, बड़वानी, रतलाम, मंदसौर आदि जिलों में बोली जाती है। यह आर्य भाषा परिवार से संबंधित भाषा समूह है। इन बोलियों का मौखिक साहित्य अत्यंत समृद्ध है। गोंडी मध्य भारत की प्रमुख जनजातीय भाषा है। एक कालखंड में वर्तमान उत्तर प्रदेश की सीमा से लेकर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में गोंडवाना साम्राज्य स्थापित था।उन क्षेत्रों में आज भी गोंडी के विभिन्न रूपों का प्रयोग होता है। मध्यप्रदेश में प्रमुख रूप से मंडला, डिण्डौरी, जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, शहडोल, अनूपपुर, सीधी, रायसेन, सागर, होशंगाबाद, बैतूल, छिन्दवाड़ा आदि जिलों में गोंडी बोली जाती है। यह द्रविड़ भाषा-परिवार की भाषा है। मध्यप्रदेश में इसके दो रूप देखने को मिलते हैं। एक आधुनिक रूप, जिसे ‘मंडलाही’ कहा जाता है, इसमें आर्य बोलियों-जैसे छत्तीसगढ़ी, बुंदेली आदि के साथ हिन्दी-मराठी के शब्दों की प्रचुरता है और दूसरा मूल द्रविड़ियन रूप, जो ‘पारसी’ कहलाता है।

      कोरकू जनजाति की भाषा कोरकू कहलाती है। कोरकू जातिसूचक शब्द ‘कोरो’ (मनुष्य) शब्द में बहुवचन सूचक ‘कू’ प्रत्यय लगाने पर बना है। कोरकू समूह की दो उप बोलियाँ हैं, जो मवासी अथवा मोवासी और नहाली अथवा निहाली कहलाती हैं। यह आस्ट्रिक भाषा परिवार की बोली मानी जाती है, जो खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, होशंगाबाद, बैतूल आदि जिलों के साथ ही महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बोली जाती है। कोरकू आस्ट्रो-एशियाई भाषा-परिवार की मुण्डा शाखा की भाषा है। कोरकू समुदाय की बसाहट गोंड समुदाय के आसपास होती है।

   बैगानी प्रमुख रूप से डिण्डौरी, मंडला, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर के साथ ही छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी प्रचलित है। भरियाटी पातालकोट की भारिया जनजाति द्वारा बोली जाती है। इन सभी बोलियों का मौखिक साहित्य इनकी प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा को रेखांकित करता है।

   मध्यप्रदेश में जनजातीय बोलियों की स्थिति यदि जनगणना संबंधी आँकड़ों के विश्लेषण के आधार पर देखी जाये तो यह पता चलता है कि इन भाषाओं के प्रयोक्ता जनसंख्या की तुलना में निरंतर कम होते जा रहे हैं। अल्प आबादी वाली जनजातियों द्वारा बहुसंख्यक समुदाय की बोलियों को संपर्क भाषा के रूप में व्यवहार में लाये जाने के कारण उनकी मातृभाषा विस्मृत होती जा रही है। इसके अलावा जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का माध्यम हिन्दी अथवा अन्य भाषा होने के कारण भी विद्यार्थी अपनी मातृभाषा का प्रयोग प्रायः नहीं करते हैं। विभिन्न कारणों से शहरों के संपर्क में आने और आवश्यकता के अनुरूप हिन्दी अथवा अन्य भाषाओं के प्रयोग की  बाध्यता के कारण भी जनजातीय युवा अपनी मूल भाषा से दूर होते जा रहे हैं।

      निष्कर्ष रूप में जनजातीय भाषाओं की वर्तमान दशा को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि अनुकूल माहौल बनाकर यदि इन्हें खुली हवा में साँस लेने का अवसर उपलब्ध नहीं कराया गया तो जल्दी ही इनका दम घुट जायेगा। इसलिये इनकी सही देखभाल घरों में ही हो सकती है। हर माँ को बच्चे की परवरिश अपनी भाषा में करनी होगी। स्कूल हो,या कार्यस्थल-कहीं भी किसी को अपनी भाषा बोलने से न रोका जाये।ये प्राचीन भाषाएँ बचेंगी तो इनके साथ करोड़ों वर्षों के अनुभव से अर्जित ज्ञान-संपदा भी बचेगी। संतोष की बात है कि वर्तमान मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय संस्कृति और भाषाओं के संरक्षण को लेकर गंभीर है और इनके प्रोत्साहन के अनेक उपाय लगातार कर रही हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी जयंती पर किया याद, ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी जयंती पर 14 नवंबर को श्रद्धांजलि दी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा है, “पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।” इस साल भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 132वीं जयंती है।पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू की जयंती को भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू, जिन्हें प्यार से चाचा नेहरू के नाम से जाना जाता है, उन्हें बच्चों से काफी प्यार था। भारत 1956 से पहले हर साल 20 नवंबर को बाल दिवस मनाता था क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने 1954 में इस दिन को सार्वभौमिक बाल दिवस के रूप में घोषित किया था। 1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद, संसद में सर्वसम्मति से 14 नवंबर को उनकी जयंती के दिन को राष्ट्रीय बाल दिवस के रूप में घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था। उस वक्त से लेकर अब तक हर साल 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस मनाया जाता है।

कांग्रेस ने भी पंडित नेहरू को श्रद्धांजलि अर्पित की है। नेहरू कांग्रेस पार्टी के कई बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। कांग्रेस पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया, “हर शब्द, हर कृत्य, हर बलिदान, पंडित नेहरू जी ने सच्चे राष्ट्रवाद की मिसाल पेश की है। नेहरू ने हमारे देश की एकता के लिए, हमारे देश की विविधता के लिए, हमारे देश की समृद्धि के लिए एक अटूट समर्पण दिखाई है।’

15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग स्वतंत्र देश बनने के बाद नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। 1963 में उन्हें पहला हार्ट अटैक आया था और जनवरी 1964 में दूसरा और कुछ महीने बाद तीसरे हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई। उनकी बेटी इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक भारत की प्रधानमंत्री रहीं।

कल MP में PM के दौरे का ट्रैफिक प्लान जारी

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भोपाल
प्रदेश की राजधानी में 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दिवसीय दौरे के कारण भोपाल में ट्रैफिक व्यवस्था में आवश्कता अनुसार बदलाव किया गया है. भोपाल में आने जाने वाले सभी मार्गों में कुछ परिवर्तन किए गए हैं. जानिए आम जनों के लिए कौन से रास्ते प्रतिबंधित रहेंगे, जम्बूरी मैदान पर पहुंचने के लिये क्या रहेगी व्यवस्था, सिटी बसों के लिये भी रहेंगे अलग रूट, स्टेशन जाने वाले यात्रियों के लिये भी मार्ग परिवर्तित रहेगा.

15 नवम्बर को प्रधानमंत्री के भोपाल भ्रमण के दौरान ऐसे रहेगी यातायात व्यवस्था

A. जम्बूरी मैदान कार्यक्रम के लिए व्यवस्था
1. कार्यक्रम में शामिल होने वाले जन-सामान्य

  • कार्यक्रम में इन्दौर की तरफ से आने वाले समस्त प्रकार के बस वाहन खजूरी सड़क, बकानियाॅ डिपो होते हुए मुबारकपुर, लाम्बाखेड़ा, चैपड़ा कला, पटेल नगर बायपास, आंनद नगर से जम्बूरी मैदान कट प्वाइंट का उपयोग करते हुए बस पार्किंग स्थल में पार्क करेंगे.
  • राजगढ़ (ब्यावरा) की ओर से कार्यक्रम में भाग लेने वाले समस्त प्रकार के बस वाहन मुबारकपुर जोड़, लांबाखेड़ा जोड़, चैपड़ाकला जोड़, पटेल नगर बाइपास, आंनद नगर से जम्बूरी मैदान कट प्वाइंट का उपयोग करते हुए बस पार्किंग में पार्क करेंगे.
  • सागर/रायसेन की तरफ से आने वाले समस्त वाहन पटेल नगर चैराहा से आनंद नगर पहुंचेंगे एवं जम्बूरी मैदान में बायीं ओर मुड़कर बस पार्किंग में पार्क करेंगे.
  • होशंगाबाद रोड की ओर से आने वाले समस्त वाहन 11 मील से आउटर बाइपास होकर पटेल नगर चैराहे से बायीं ओर मुड़कर आनन्द नगर के आगे जाकर बायीं ओर मुड़कर जम्बूरी मैदान पर बस पार्किंग में पार्क करेंगे.

2. कार्यक्रम में शामिल होने वाले स्थानीय जन सामान्य, जीप/कार एवं दो पहिया वाहन
गोविन्दपुरा टर्निंग से महात्मा गांधी चौराहा की ओर आने वाले चार पहिया वाहन, महात्मा गांधी स्कूल पार्किंग एवं महात्मा गांधी तिराहा से होते हुए सेंट जेविंयर स्कूल के पीछे अपना वाहन पार्क करेंगे.

3. कार्यक्रम में आने वाले वीआईपी और पास धारक वाहन
गोविन्दपुरा टर्निंग से महात्मा गांधी चौराहा होते हुए अयप्पा मंदिर, गैस गोदाम होकर सेंट जेवियर स्कूल के सामने वीआईपी पार्किंग में वाहन पार्क कर सकेंगे.

4. कार्यक्रम में आने वाले मीडियाकर्मी
गोविन्दपुरा टर्निंग से महात्मा गांधी चौराहा से होते हुए अयप्पा मंदिर एवं गैस गोदाम के बीच मीडिया पार्किंग में वाहन पार्क कर सकेंगे.

5. यहां रहेगा पूर्णतः प्रतिबंध
कार्यक्रम के दौरान महात्मागांधी चैराहे से अवधपुरी चैक (जम्बूरी मैदान के सामने की रोड) तक वाहनों का आवागमन दिनांक-15 के सुबह 06ः00 बजे से शाम 06 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा.

6. भोपाल में यह मार्ग हुए परिवर्तित
अवधपुरी से बीकानेर मिष्ठान भंडार, सुरभि इन्कलेव, रिषिपुरम चौराहा, चर्च चैराहा, विजय मार्केट, श्रीकृष्ण मंदिर, बरखेड़ा, गुलाब उद्यान, मंस्जिद तिराहा, डीआरएम ऑफिस, हबीबगंज नाका अथवा हबीबगंज अण्डरब्रिज से 10 नम्बर मार्केट की ओर आवागमन कर सकेंगे. पिपलानी/अयोध्यानगर से आने वाले वाहन जेके रोड, आईटीआई तिराहा, प्रभात चौराहा मार्ग से आवागमन कर सकेंगे.

B. हबीबगंज रेलवे स्टेशन कार्यक्रम के लिए व्यवस्था
1. हबीबगंज स्टेशनन की ओर आने-जाने वाले वाहन

  • बागसेनिया थाने से मानसरोवर तिराहा तक आवागमन दिनांक 15 के सुबह 06ः00 बजे से शाम 06 बजे तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा.
  • यात्रीगण प्लेटफार्म नम्बर-01 की ओर से स्टेशन में प्रवेश नहीं कर सकेंगे. केवल प्लेटफॉर्म नम्बर-05 का उपयोग कर सकेंगे.
  • बोर्ड ऑफिस की ओर से जाने वाले वाहन गोविन्दपुरा टर्निंग, आईएसबीटी बस स्टैंड, सांची दुग्ध संघ, हबीबगंज स्टेशन प्लेटफार्म नम्बर-05 का उपयोग किया जा सकेगा.
  •  मिसरोद की ओर से आने वाले वाहन बागसेवनिया थाना तिराहा से अरविन्द विहार काॅलोनी मार्ग का उपयोग कर एम्स अस्पताल, आरआरएल तिराहा, हबीबगंज नाका होते हुए प्लेटफॉर्म नम्बर-05 की ओर आवागमन कर सकेंगे.

2. कार्यक्रम में आने वाले पासधारी वाहन
बोर्ड ऑफिस चौराहे की ओर से आने वाले वाहन प्रगति पेट्रोल पंप होते हुये मान सरोवर तिराहा का उपयोग कर हबीबगंज स्टेशन कार्यक्रम स्थल की ओर जा सकेंगे.
लिंक रोड नम्बर-02 एवं 03 की ओर से आने वाले वाहन 07 नम्बर चौराहा होकर मानसरोवर तिराहा से हबीबगंज स्टेशन कार्यक्रम स्थल की ओर जा सकेंगे.
मिसरोद की ओर से आने वाले वाहन बावड़िया कला ब्रिज से होते हुए 07 नम्बर चौराहा होकर मानसरोवर तिराहा से हबीबगंज स्टेशन कार्यक्रम स्थल की ओर जा सकेंगे.

3. इन मार्गों का हुआ परिवर्तन
होशंगाबाद की ओर से आने वाले वाहन मिसरोद, बावड़िया रोड ओवर ब्रिज से शाहपुरा, मनीषा मार्केट एवं कोलार रोड से अरेरा काॅलोनी, 12 नम्बर मार्केट, 10 नम्बर मार्केट की ओर आवागमन कर सकेंगे. बोर्ड ऑफिस चौराहे से प्रगति होकर हबीबगंज स्टेशन की ओर एवं 07 नम्बर स्टॉप से मानसरोवर हबीबगंज की ओर सामान्य वाहन के लिए मार्ग प्रतिबंधित रहेगा.

4. यात्री बसों का डायवर्जन

  • होशंगाबाद, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल की ओर से आने वाली बसें बागसेवनिया थाना तिराहा से बागसेवनिया आईसीआईसीआई बैंक तिराहा, अरविन्द विहार काॅलोनी, एमरोल्ड सिटी मार्ग का उपयोग कर एम्स अस्पताल गेट नम्बर-3, साकेत नगर, आरआरएल तिराहा, हबीबगंज नाका होते हुए आईएसबीटी की ओर आवागमन कर सकेंगे. आईएसबीटी से आगे यात्री बसों का नादरा बस स्टैंड की ओर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा.
  • सागर, छतरपुर, दमोह की ओर से आने वाली यात्री बसें पटेल नगर बाइपास, चैपड़ाकला, भानपुर चैराहा, पीपुल्स माॅल, बेस्ट प्राइज, करोंद मंडी, जेपी तिराहा होते हुए नादरा बस स्टैण्ड अथवा इंदौर की ओर आवागमन कर सकेंगी.
  • इंदौर से भोपाल की ओर आने वाली बसें हलालपुर बस स्टैण्ड का उपयोग कर सकेंगी. इंदौर, उज्जैन की ओर से आने वाली यात्री बसों का हलालपुर बस स्टैण्ड से आगे लालघाटी की ओर प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा.
  • गुना, राजगढ़, ब्यावरा की ओर से आने वाली यात्री बसें मुबारकपुर बाइपास से खजूरी सड़क, बैरागढ़ होकर हलालपुर बस स्टैण्ड की ओर आवागमन कर सकेंगी. इन बसों का प्रवेश हलालपुर बस स्टैण्ड से लालघाटी की ओर प्रतिबंधित रहेगा.

कंगना रनौत ने किताब का अंश साझा कर ‘भीख में आजादी’ बयान को किया डिफेंड

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नई दिल्ली 
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत आजादी भीख में मिलने का बयान देकर विवादों में घिर गई हैं। अब कंगना ने कहा है कि अगर वह गलत साबित होती हैं तो पद्मश्री अवॉर्ड लौटा देंगी। कंगना ने अपने बचाव में जो तर्क दिया है, वह और भी चौंकाने वाला है। गौरतलब है कि पद्मश्री मिलने के एक दिन बाद ही कंगना ने विवादास्पद बयान दिया था। फिल्म अभिनेत्री ने कहा था कि असली आजादी तो 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद मिली है। 1947 में मिली आजादी तो भीख में मिली थी। इसके बाद देशभर में कंगना का विरोध हो रहा है।

साझा किया किताब का अंश
अब एक बार फिर कंगना ने भीख में मिली आजादी वाले अपने बयान को डिफेंड किया है। फिल्म अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक किताब के कुछ अंश साझा किए हैं। इस किताब का नाम ‘जस्ट टू सेट द रिकॉर्ड्स स्ट्रेट’ है। कंगना ने लिखा है कि 1857 में आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी। इसमें सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर ने हिस्सा लिया था। लेकिन 1947 में आजादी के लिए कौन सा युद्ध लड़ा गया था? मुझे तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कोई मुझे इस बारे में जानकारी दे दे तो मैं माफी तो मांगूंगी ही, साथ ही पद्मश्री भी लौटा दूंगी।

भाजपा नेता भी विरोध में
इस बीच देशभर में कंगना रानाउत का विरोध जारी है। नेताओं और तमाम अन्य लोगों ने कंगना रानाउत के बयान पर आपत्ति जताई है। दिल्ली भाजपा के नेता प्रवीण शंकर कपूर ने गुरुवार को इस बारे में ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा कि एक स्वतंत्रता सेनानी का बेटा होने और आजादी के लिए लड़ाई लड़ने वाले वाले परिवार से आने के नाते मैं कंगना रनौत के बयान को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान मानता हूं। मैं चाहता हूं कि भारतीय न्याय व्यवस्था इस मामले का खुद से संज्ञान ले। उन्होंने शुक्रवार को पीटीआई से बातचीत में कहा कि निजी स्तर पर ट्वीट करके यह विरोध जताया है। वहीं महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने भी कंगना रनौत के बयान को गलत बताया है।

इंदौर में फूंका गया पुतला
वहीं इस बयान के बाद देशभर में कंगना का विरोध हो रहा है। इंदौर में स्वतंत्रता सेनानियों के एक ग्रुप ने कंगना का पुतला जलाया। एमजी रोड पर किए गए इस विरोध के बाद इसमें भाग लेने वाले आशा गोविंद खादीवाला ने कहा कि कंगना को अपने बयान को माफी मांगनी ही चाहिए। वहीं जोधपुर में एक महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने फिल्म अभिनेत्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जोधपुर महिला कांग्रेस कमेटी की प्रेसीडेंट मनीषा पंवार ने अपनी शिकायत में कहाकि कंगना ने आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ-साथ देश के लोगों का भी अपमान किया है।

मणिपुर माओवादी हमले में कर्नल विप्लव त्रिपाठी,उनकी धर्मपत्नी और पुत्र हुए शहीद

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रायपुर:  मणिपुर राज्य के चुराचन्दपुर जिले के ग्राम सियालसी के समीप हुए माओवादी हमले में दैनिक बयार रायगढ़ के सम्पादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री सुभाष त्रिपाठी के पुत्र कर्नल विप्लव त्रिपाठी, बहू श्रीमती अनुजा त्रिपाठी एवं पांच वर्षीय पौत्र अबीर त्रिपाठी शहीद हो गए। यह घटना आज पूर्वान्ह 11.30 बजे उस वक्त घटित हुई, जब कर्नल विप्लव त्रिपाठी, बिहांग काय-पोस्ट का विजिट कर वापस लौट रहे थे। सियालसी गांव के पास एम्बुस लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया, जिसमें कर्नल त्रिपाठी और उनके परिवार के लोग शहीद हो गए। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने माओवादी हमले को कायराना कृत्य करार देते हुए इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। उन्होंने कर्नल विप्लव त्रिपाठी की शहादत को नमन करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

भारतीय रेलवे का फैसला, स्पेशल की जगह चलेंगी नियमित ट्रेने

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने कोविड-19 संक्रमण में निरंतर गिरावट के मद्देनजर यात्रियों को राहत देते हुए कोरोना पूर्व की व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया है। इससे मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के नाम से स्पेशल हट जाएगा और वह पुरानी व्यवस्था के अनुरूप चलेंगी। रेलवे बोर्ड द्वारा बीते शुक्रवार, 12 नवंबर को जारी एक सर्कुलर के अनुसार, मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सभी नियमित टाइम टेबल ट्रेनें जो वर्तमान में एएसपीसी (मेल/एक्सप्रेस स्पेशल) और एचएसपी (हॉलिडे स्पेशल) ट्रेन सेवाओं के रूप में चल रही हैं वह नियमित नंबरों के साथ वर्किंग टाइम टेबल (वर्तमान समय सारिणी) के आधार पर चलेंगी। ट्रेनों के आगे से स्पेशल हटने के साथ ही सभी ट्रेन नंबरों के आगे लगे शून्य भी हट जाएंगे।

सॉफ्टवेयर में किये जायेंगे परिवर्तन

सर्कुलर में कहा गया है, “ऐसी ट्रेनों की दूसरी श्रेणी विशेष मामले में किसी भी छूट को छोड़कर आरक्षित के रूप में चलती रहेगी, पहले से बुक किए गए टिकटों पर रेलवे द्वारा वसूल किए जाने वाले किराए में कोई अंतर या पहले से बुक किए गए यात्रियों के कारण किसी भी रिफंड की अनुमति नहीं दी जाएगी। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र से अनुरोध किया गया है कि सॉफ्टवेयर में आवश्यक परिवर्तन करें। प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे यह सुनिश्चित करेगा कि सभी संबंधित कर्मचारियों को विवरण उपलब्ध कराने और डेटाबेस में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है।

रेल मंत्रालय के अनुसार रेलवे अभी 1744 ट्रेन चला रही है स्पेशल के रूप में आगे 0 लगा है। पुरानी व्यवस्था लागू होने पर रेलगाड़ी संख्या में शून्य हट जाएगा। इन विशेष ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सामान्य ट्रेनों की तुलना में 30 फीसद ज्यादा किराया देना पड़ता था।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान कहा कि कोविड प्रोटोकॉल में रेलवे ने ट्रेनों को स्पेशल कैटेगरी में चलाने की शुरूआत की थी, जिसका उद्देश्य ट्रेनों में भीड़ को नियंत्रित कर यात्रियों को सुविधा देना था। रेल मंत्री के अनुसार, फिलहाल 95 फीसदी मेल एक्सप्रेस ट्रेनें पटरी पर लौट चुकी हैं। इनमें से करीब 25 फीसदी ट्रेनें स्पेशल कैटेगरी में चल रही हैं।

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मुंबई
मनी लॉन्ड्रिंग केस में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को आज भी राहत नहीं मिली है। मुंबई की पीएमएलए अदालत ने शुक्रवार को अनिल देशमुख को 15 नवंबर तक प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

पिछले हफ्ते हुए थे गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने देशमुख को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था। विशेष अवकाशकालीन अदालत ने छह नवंबर को 71 वर्षीय राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता देशमुख को न्यायिक हिरासत में भेजा था और ईडी की हिरासत की मांग खारिज कर दी थी। इसके एक दिन बाद ही बंबई उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए देशमुख को 12 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था। पूर्व मंत्री को शुक्रवार को पीएमएलए की अदालत के न्यायाधीश एचएस सठभाई के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उनकी हिरासत की अवधि 15 नवंबर तक बढ़ा दी।

ये हैं आरोप
देशमुख और अन्य के खिलाफ ईडी का मामला मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोपों के मद्देनजर सीबीआई द्वारा मामला दर्ज करने के बाद सामने आया था। मार्च में पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने सचिन वाझे को महानगर में बार और रेस्तरां से एक महीने में 100 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने के लिए कहा था। इसके बाद देशमुख ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि सिंह ने मुंबई पुलिस प्रमुख के पद से हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ आरोप लगाए थे। आरोप दुर्भावनापूर्ण बयानों पर आधारित हैं।

केंद्र सरकार के निर्णय पर अब हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति स्टेशन

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भोपाल: भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर गोंड राज्य गिन्नौरगढ़ की रानी कमलापति के नाम पर किया गया। जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने उक्त निर्णय किया। हबीबगंज स्टेशन अब रानी कमलापति स्टेशन कहलायेगा।
रानी कमलापति गोंड ही नहीं अपितु समग्र समाज का मान सम्मान और गौरव का नाम है। जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर यह सबसे बड़ी सौगात है।

दरअसल 18 वीं सदी में भोपाल क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन था। ऐसा माना जाता है कि उस समय गॉड राजा सूरज सिंह शाह के पुत्र निजाम शाह से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। रानी कमलापति ने अपने पूरे जीवन काल में अत्यंत बहादुरी और वीरता के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया। रानी कमलापति की स्मृतियों को बनाए रखने एवं उनके बलिदान के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के स्वरूप जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष में हबीबगंज रेलवे स्टेशन भोपाल का नामकरण रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के नाम पर किए जाने का प्रस्ताव राज्य शासन ने केंद्र सरकार को भेजा था जिसे केंद्र ने मंजूरी प्रदान कर दी है।