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स्वतंत्रता दिवस से पहले छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि, 152 पुलिसकर्मियों को मिलेगा सम्मान

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स्वतंत्रता दिवस से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस पदकों की घोषणा कर दी है। छत्तीसगढ़ के कुल 152 पुलिस अधिकारी और जवानों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। इनमें 141 को वीरता पदक, एक अधिकारी को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक और 10 को सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया जाएगा।

नक्सल विरोधी अभियानों में साहस का सम्मान
छत्तीसगढ़ को इस बार देशभर में सबसे अधिक 141 वीरता पदक मिले हैं। इनमें बड़ी संख्या उन पुलिस अधिकारियों और जवानों की है, जिन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया।

IPS एमएल कोटवानी को विशिष्ट सेवा पदक
विशिष्ट सेवाओं के लिए वरिष्ठ IPS अधिकारी एमएल कोटवानी को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा। वहीं 10 अधिकारियों को सराहनीय सेवा के लिए पदक प्रदान किया जाएगा। इनमें कमांडेंट गायत्री सिंह, ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. अर्चना झा और एएसपी दीपमाला कश्यप समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी उपलब्धि
पुलिस पदकों की यह घोषणा छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। खास तौर पर नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षा बलों के योगदान और साहस को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। पदक पाने वाले अधिकारियों और जवानों को उनके असाधारण साहस, कर्तव्यपरायणता और सेवाओं के लिए सम्मानित किया जाएगा।

14 अगस्त को लेकर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान, बोले- विभाजन से लाखों लोग हुए बेघर

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 1947 के भारत विभाजन को लेकर तत्कालीन नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश को यह याद रखना जरूरी है कि आजादी के पीछे सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि लाखों लोगों का दर्द, विस्थापन और हिंसा की भयावह त्रासदी भी छिपी थी।

नेहरू पर साधा निशाना
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विभाजन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया था। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन की स्थिति बनने के बावजूद उनके पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और संपत्ति छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा।

‘आजादी के पीछे छिपा दर्द याद रखना जरूरी’
विजयवर्गीय ने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश की आजादी के पीछे कितना दर्द, पीड़ा और चीत्कार छिपी हुई थी। उन्होंने विभाजन के दौरान हुई हिंसा और जनहानि का जिक्र करते हुए कहा कि इस त्रासदी को इतिहास से मिटाया नहीं जाना चाहिए।

इतिहास से सबक लेने की अपील
मंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की त्रासदी से परिचित कराने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि इतिहास से सबक लेकर देश को एकता, विकास और राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, ताकि विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को याद रखा जा सके।

राष्ट्रपति के संबोधन की PM मोदी ने सराहना की, बोले- उनके विचार देश को नई दिशा देने वाले

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्र के नाम संबोधन की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के विचारों को देश की सामूहिक प्रगति और राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरणादायक बताया।

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन में देश की उपलब्धियों, भविष्य की संभावनाओं और नागरिकों की जिम्मेदारियों पर महत्वपूर्ण बातें रखी गईं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने देशवासियों को उन महान बलिदानों की याद दिलाई, जिनकी बदौलत भारत ने स्वतंत्रता हासिल की।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र की प्रगति केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से संभव है। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के संबोधन को विचारोत्तेजक बताते हुए कहा कि इसमें भारत की सामूहिक प्रगति और भविष्य के अवसरों पर विशेष जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संदेश नागरिकों को देश के विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रेरित करता है।

रक्षाबंधन पर लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा

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अगस्त 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से बेहद खास रहने वाला है। 12 अगस्त को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने के बाद अब 28 अगस्त 2026 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। खास बात यह है कि इस दिन देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन पर लगेगा चंद्र ग्रहण
साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, शुक्रवार को पड़ेगा। यह ग्रहण रक्षाबंधन के दिन होगा। खगोलीय गणना के मुताबिक ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं भारतीय समयानुसार सुबह से दोपहर तक रहेंगी।

भारत में दिखाई नहीं देगा ग्रहण
इस चंद्र ग्रहण को लेकर भारत में लोगों के लिए राहत की बात है। ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। यही वजह है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाएगा। ऐसे में रक्षाबंधन के पर्व पर ग्रहण का कोई धार्मिक व्यवधान नहीं रहेगा।

राखी बांधने पर नहीं पड़ेगा असर
ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होने के कारण बहनें रक्षाबंधन के दिन सामान्य तरीके से भाइयों को राखी बांध सकेंगी। धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण से जुड़े सूतक और अन्य नियम मुख्य रूप से उन स्थानों पर लागू माने जाते हैं जहां ग्रहण दिखाई देता है।

अगस्त में दो ग्रहण
अगस्त 2026 में कुल दो ग्रहण पड़ रहे हैं। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण और इसके करीब 16 दिन बाद 28 अगस्त को चंद्र ग्रहण होगा। दोनों ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे।

इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण को लेकर किसी तरह की विशेष चिंता की जरूरत नहीं है। हालांकि, पूजा-पाठ और शुभ मुहूर्त से जुड़े निर्णय के लिए स्थानीय पंचांग या ज्योतिषाचार्य की सलाह ली जा सकती है।

वनडे फॉर्मेट को बचाने के लिए ICC कर रहा बड़ी प्लानिंग

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वनडे फॉर्मेट को बचाने के लिए ICC कर रहा बड़ी प्लानिंग
टी20 क्रिकेट का आगाज हुए लगभग दो दशक का समय होने वाला है और इसकी लोकप्रियता पूरे वर्ल्ड में देखने को मिलती है। इसी वजह से मौजूदा दौर में लगभग हर क्रिकेट खेलने वाले बड़े देश में फ्रेंचाइजी टी20 लीग भी देखने को मिलती है। इसके चलते वनडे और टेस्ट फॉर्मेट पर इसका बुरा असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है जिसमें फैंस इनको लेकर अधिक दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में अब आईसीसी टेस्ट और वनडे के भविष्य को लेकर बड़ी प्लानिंग कर रहा है जिसको लेकर आईसीसी सीईओ संजोग गुप्ता का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि बिना मतलब के खेले जाने वाली टी20 सीरीज का कोई फ्यूचर नहीं है और ये जल्द ही बंद हो जाएगी।

वनडे की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है
आईसीसी सीईओ संजोग गुप्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए अपने बयान में कहा कि बिना किसी उद्देश्य और संदर्भ के आयोजित की जाने वाली द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीजों का दौर अब खत्म होना चाहिए। ऐसे में वनडे क्रिकेट केवल अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी काफी मजबूत हो सकता है। क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में वनडे की अपनी स्पष्ट और महत्वपूर्ण भूमिका है, जो मेंस और महिला आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप से खासतौर पर जुड़ी हुई है। बता दें कि सूत्रों के अनुसार आईसीसी टेस्ट फॉर्मेट की तरह वनडे के लिए भी अगले वर्ल्ड कप से पहले एक अलग विंडो तैयार करने पर विचार कर रहा है ताकि इस फॉर्मेट को भी अहमियत मिल सके।
विंबलडन और गोल्फ जैसे खेलों से सीखना चाहिए

ICC सीईओ संजोग गुप्ता ने अपने बयान में आगे कहा कि क्रिकेट को टेनिस के विंबलडन और गोल्फ के द मास्टर्स जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के आयोजन से सीखना चाहिए, जिन्होंने बदलाव के इस दौर में अपने खेल की सालों पुरानी परंपरा को बनाए रखा हुआ है, जिसमें फैंस अभी भी इन टूर्नामेंट के लिए दिलचस्पी रखते हैं। ग्लोबल लेवल पर क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी माध्यम फिलहाल टी20 क्रिकेट है, लेकिन इसके यह मायने नहीं कि वनडे और टेस्ट क्रिकेट के विकास की उपेक्षा की जाए। कुछ देशों में टेस्ट क्रिकेट के प्रशंसकों का वर्ग बेहद मजबूत है लेकिन जरूरत इस बात की है कि सदस्य देशों को भी ऐसे अवसर मिलें, जिनसे उनके यहां टेस्ट मैच बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों के रूप में स्थापित हो सकें।

BSNL का नया सैटेलाइट फोन लॉन्च, टावर के बिना भी कर सकेंगे कॉल; कीमत जानकर चौंक जाएंगे

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भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने सैटेलाइट फोन सेवा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। यह फोन उन इलाकों में भी वॉयस कॉल और SMS की सुविधा दे सकता है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या टावर उपलब्ध नहीं हैं। BSNL के मुताबिक, उसकी Global Satellite Phone Service (GSPS) के जरिए आम लोगों और निजी संस्थानों को भी वॉयस कॉल और SMS की सुविधा दी जा रही है। यह सेवा वर्ष 2018 से उपलब्ध है।

1.34 लाख रुपये है फोन की कीमत
BSNL ने जुलाई 2026 में जिस सैटेलाइट हैंडसेट की उपलब्धता का ऐलान किया था, उसकी कीमत 1,34,166 रुपये (टैक्स समेत) बताई गई है। यह सामान्य स्मार्टफोन की तरह ऑनलाइन या किसी आम मोबाइल स्टोर से खरीदने वाला फोन नहीं है। इसे लेने के लिए BSNL की निर्धारित प्रक्रिया और मंजूरी जरूरी है।

मोबाइल टावर की जरूरत नहीं
सैटेलाइट फोन जमीन पर मौजूद मोबाइल टावरों के बजाय सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए कनेक्ट होता है। यही वजह है कि दूरदराज, पहाड़ी, समुद्री या आपदा प्रभावित इलाकों में, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, वहां इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। BSNL की GSPS सेवा फिलहाल मुख्य रूप से वॉयस कॉल और SMS उपलब्ध कराती है।

किन लोगों के लिए उपयोगी?
इस तरह की सेवा विशेष रूप से सरकारी एजेंसियों, आपदा प्रबंधन से जुड़े संगठनों, रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र, समुद्री गतिविधियों और ऐसे लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें दूरदराज के क्षेत्रों में भरोसेमंद संचार की जरूरत होती है। BSNL पहले से ही सरकारी और निजी संस्थानों को यह सेवा उपलब्ध करा रहा है।

खरीदने के लिए जरूरी है अनुमति
भारत में सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल सामान्य मोबाइल फोन की तरह पूरी तरह खुला नहीं है। BSNL के अनुसार, ग्राहक को निर्धारित Customer Acquisition Process पूरा करना होता है और फोन के इस्तेमाल की जगह, अवधि तथा उद्देश्य जैसी जानकारी भी देनी होती है। GSPS के तहत संचार को एन्क्रिप्टेड बताया गया है।

इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से तैयार होंगे यूपी के युवा, 8 जिलों में शुरू होगा अभियान

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उत्तर प्रदेश के युवाओं को पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद सीधे रोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत युवाओं की स्किल को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि उन्हें प्रशिक्षण पूरा करने के बाद नौकरी के लिए भटकना न पड़े। इस पहल की शुरुआत प्रदेश के 8 जिलों से की जाएगी।

इस पहल में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) के बीच सहयोग की योजना है। इसका उद्देश्य क्लासरूम में मिलने वाली ट्रेनिंग और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के बीच की दूरी को कम करना है। युवाओं को उनकी रुचि और उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने पर जोर रहेगा।

सरकार का फोकस केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाने और कंपनियों से सीधे जोड़ने पर रहेगा। इससे उद्योगों को कुशल कर्मचारी मिल सकेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

यूपी सरकार पहले से ही युवाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत भी युवाओं को कौशल प्रमाणपत्र के आधार पर स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है।

8 जिलों में शुरू होने वाली यह पहल सफल रहती है तो इसे आगे प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तार दिया जा सकता है। इससे शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्टील सेक्टर को लेकर CM साय का बड़ा निर्देश, डाउनस्ट्रीम और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स पर फोकस

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छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में उत्पादित स्टील का अधिकतम मूल्य संवर्धन राज्य के भीतर ही करने पर जोर दिया है। ‘छत्तीसगढ़ इंडस्ट्री डायलॉग ऑन ग्रीन स्टील’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य को केवल लौह अयस्क और स्टील उत्पादन तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि डाउनस्ट्रीम और स्पेशियलिटी उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना होगा।

स्टील से तैयार हों ऑटो, रेलवे और रक्षा क्षेत्र के उत्पाद
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में तैयार होने वाले स्टील को प्राथमिक रूप में बाहर भेजने के बजाय यहीं ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रेलवे, रक्षा और सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाना चाहिए। इससे उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

ग्रीन स्टील पर सरकार का फोकस
कार्यक्रम में ग्रीन स्टील के बढ़ते महत्व पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है और ग्रीन स्टील की मांग आने वाले समय में बढ़ने की संभावना है। छत्तीसगढ़ की बिजली उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक दरें ऊर्जा-आधारित उद्योगों के लिए प्रदेश को मजबूत स्थिति में रखती हैं।

₹13,840 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
‘छत्तीसगढ़ इंडस्ट्री डायलॉग ऑन ग्रीन स्टील’ के दौरान प्रदेश को करीब 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 10,921 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। सरकार का जोर निवेश को केवल पूंजी तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय रोजगार और औद्योगिक मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर है।

18 महीनों में करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके लागू होने के बाद पिछले 18 महीनों में छत्तीसगढ़ को करीब 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें पारंपरिक खनन और इस्पात क्षेत्र के साथ-साथ AI, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे नए क्षेत्र भी शामिल हैं।

नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास पर जोर
राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राजनांदगांव में करीब 306 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) विकसित किया जा रहा है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश और करीब 9,000 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।

मुख्यमंत्री साय ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए नीतियां स्पष्ट और प्रक्रियाएं पारदर्शी रखी जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसर तैयार करना है।

बलराम कृषि महोत्सव में CM मोहन यादव का संबोधन, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने पर दिया जोर

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के किसानों को कृषि क्षेत्र की रीढ़ बताते हुए आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन और उत्पादकता दोनों को बढ़ाया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को खेती के साथ-साथ कृषि आधारित अन्य गतिविधियों से भी जोड़ा जाए।

किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ने पर जोर
बलराम कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक उपकरणों और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में कृषि से जुड़े विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने भी किसानों को विभिन्न योजनाओं और तकनीकों के बारे में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को बदलते समय के साथ नई तकनीकों को अपनाना होगा। इससे खेती की लागत कम करने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। सरकार किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादों का उचित मूल्य दिलाने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में किसानों की समृद्धि और प्रदेश के कृषि क्षेत्र को और मजबूत बनाने के संकल्प पर भी चर्चा हुई।

किसानों के लिए योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर फोकस
बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए जागरूक किया गया। अधिकारियों ने किसानों को फसल उत्पादन, कृषि यंत्रों, सिंचाई, उन्नत बीज और अन्य सुविधाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे और उन्हें खेती के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हरसंभव सहयोग मिले। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जागरूक करने के साथ कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं से परिचित कराना भी रहा।

बार काउंसिल ने वापस लिया अपना आदेश, CJI का विरोध करने वाले छात्रों पर से हटाई एनरोलमेंट रोक

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अपने फैसले से यू-टर्न लेते हुए हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर लगाई गई रोक हटा दी है। यह फैसला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध से जुड़े विवाद के बीच लिया गया है।

दरअसल, BCI ने पहले सभी स्टेट बार काउंसिल्स को निर्देश दिया था कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट को अगले आदेश तक एडवोकेट के तौर पर एनरोल न किया जाए। साथ ही यूनिवर्सिटी से उन छात्रों की पहचान करने के लिए रिपोर्ट मांगी गई थी, जो CJI की दीक्षांत समारोह में भागीदारी के विरोध में चलाए गए अभियान में प्रमुख रूप से शामिल थे।

हालांकि, बाद में BCI ने मामले पर विचार-विमर्श के बाद अपने पुराने निर्देश में बदलाव कर दिया। काउंसिल ने कहा कि उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र इस मामले में निर्दोष हैं और वे विरोध अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। ऐसे में सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने का अधिकार दिया गया है।

BCI ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने तक छात्रों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस फैसले के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को बड़ी राहत मिली है और उनके वकालत के करियर पर मंडरा रहा तत्काल संकट फिलहाल टल गया है।