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मध्य प्रदेश में चार सिस्टम सक्रिय, जेट स्ट्रीम के असर से गिर रहे ओले

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भोपाल। अलग-अलग स्थानों पर बने चार वेदर सिस्टम के असर से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक मप्र पर बने जेट स्ट्रीम के कारण उज्जैन, सागर, ग्वालियर संभागों के जिलों में ओला वृष्टि हो रही है। शुक्रवार से बारिश की गतिविधियों में और तेजी आने की संभावना है। गुरुवार को सुबह साढ़े आठ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक शाजापुर में 35, ग्वालियर में 27.2, टीकमगढ़ में 22, नौगांव में 14, खजुराहो में 7.6, इंदौर में 5.8, गुना में 5, सतना में 0.4 मिलीमीटर बारिश हुई। उज्जैन में बूंदाबांदी हुई।

मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी पीके साहा ने बताया कि गुरुवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 28.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो सामान्य से चार डिग्रीसे. अधिक रहा। साथ ही बुधवार के अधिकतम तापमान 26.5 डिग्रीसे. की तुलना में 1.8 डिग्रीसे. अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 15 डिग्रीसे. रिकार्ड किया गया। यह सामान्य से चार डिग्रीसे. अधिक रहा। यह बुधवार के न्यूनतम तापमान 11.6 डिग्रीसे. के मुकाबले 3.4 डिग्रीसे. अधिक रहा।

इन सिस्टम के असर से बिगड़ा मौसम का मिजाज

मौसम विज्ञान के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और आसपास बना हुआ है। उसके प्रभाव से दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर एक प्रेरित चक्रवात बना हुआ है। एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ अफगानिस्तान और उसके आसपास बना है। इस सिस्टम के असर से शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान पर एक प्रेरित चक्रवात बनने की संभावना है। इसके अतिरिक्त एक जेट स्ट्रीम (लगभग 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर 200 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का बहाव) उज्जैन, सागर, ग्वालियर संभाग से होते हुए उत्तर प्रदेश तक बना हुआ है। इसकी वजह से इन तीन संभागों के जिलों में ओला वृष्टि हो रही है। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश की गतिविधियां शुरू होने के आसार हैं। इस दौरान ओले भी गिर सकते हैं।

ओमिक्रोन वैरिएंट से संक्रमित होने पर होती हैं ये परेशानी

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देश में एक बार फिर कोविड के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तीसरी लहर से बचाव के लिए प्रतिबंधों को बढ़ाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया गुरुवार को एम्स दिल्ली पहुंचे। वहां उन्होंने कोरोना से गस्त डॉक्टरों और हेल्थ वर्कर्स से मुलाकात की। एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि मास्क, हाथ धोना, भीड़ से बचना और वैक्सीनेशन महत्वपूर्ण है। घबराएं नहीं, यह एक हल्की बीमारी है, लेकिन सतर्क रहें। वहीं डॉ. सुरेश कुमार ने कहा, जिस तरह से मामले बढ़ रहे हैं, ये एक अलार्मिंग सिग्नल है। पिछले बार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। संक्रमण तेजी से फैल रहा है। राजधानी में पिछले 3-4 दिन से मामले लगातार बढ़ हैं। यह संख्या डबल भी हो सकती है।

बता दें कोरोना वायरस पर एक हद तक दुनिया ने काबू पा लिया था। लेकिन इसके नए ओमिक्रोन वैरिएंट ने सबको चिंता में डाल दिया है। ये संस्करण डेल्टा वैरिएंट से भी तेज फैसला है। नए वैरिएंट को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेताया है। अब दुनियाभर के वैज्ञानिक ओमिक्रोन के स्टडी पर जुट गए हैं। वहीं लोगों में भी इसे लेकर कई सवाल हैं। आखिर इसके लक्षण, बचाव और पता कैसे चलता है। आइए जानते हैं ओमिक्रोन से जुड़ी सभी महत्वपू्र्ण बातों को यहां।

ओमिक्रोन वैरिएंट के लक्षण

1. ओमिक्रोन से संक्रमिक व्यक्ति को गले में खराब, नाक बहना और सिरदर्द की समस्या होती है।

2. बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है।

3. हल्का बुखार आता है, जो अपने आप ठीक हो जाता है।

4. संक्रमित को बहुत अधिक पसीना आता है।

5. सूखी खांसी की समस्या होती है।

6. गले में जलन और चुभन होता है।

बचाव के लिए क्या करना होगा

1. कोविड के लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करवाकर आइसोलेट हो जाएं।

2. संपर्क में आए लोगों को सूचना दें और जांच कराने को कहें।

3. डॉक्टर से संपर्क में रहें।

4. वैक्सीन लगवाएं और दोस्तों और परिजनों को भी लगवाने के लिए कहें।

5. घर से बाहर मास्क पहनकर ही निकलें।

6. भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं जाएं।

7. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

ओमिक्रोन संक्रमण का पता कैसे चलता है

ओमिक्रोन से संक्रमित है या नहीं। इसका पता आरटी-पीसीआर टेस्ट से चल सकता है। इसमें लार के नमूने को पैथोलॉजी लैब में भेजा जाता है। अगर सिर्फ ये पता करना है कि संक्रमण है या नहीं। इसके लिए रैपिड टेस्ट करवाया जा सकता है। हालांकि इसमें किस वैरिएंट से संक्रमित हैं। इसका पता नहीं चल पता है। ओमिक्रोन की पुष्टि के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग जरूरी है। जिसमें चार से छह दिन लगते हैं।

देश में ओमिक्रोन के कुल 2,630 मामले, 26 राज्यों में फैला संक्रमण

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केंद्र सरकार ने एक बार फिर राज्‍यों को कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट को लेकर आगाह किया है। अब तक देश के 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पैर पसार चुके ओमिक्रोन के कुल मामले 2,630 हो गए हैं। ओमिक्रोन से महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बीते 24 घंटे में महाराष्‍ट्र में 144 और केरल में 50 नए मामले सामने आए हैं। महाराष्‍ट्र में ओमिक्रोन के सबसे ज्‍यादा 797 मामले आए हैं। बिना लक्षण वाले मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए नौ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से कोरोना जांच बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, मेघालय, जम्मू-कश्मीर और बिहार को लिखे पत्र में कोविड-19 जांच की दर कम होने की ओर इशारा करते हुए इस पर चिंता जताई है। उन्‍होंने कहा है कि पर्याप्त जांच नहीं होने की स्थिति में समुदाय में फैले संक्रमण के सही स्तर का आकलन करना असंभव होगा।

सुरक्षा में चूक मामले पर मुख्यमंत्री चन्नी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, घटना पर जताया खेद

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काफिले के दौरान सुरक्षा में चूक को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि उन्हें इस घटना पर खेद है, लेकिन इसमें राज्य सरकार की ना तो कोई गलती है और ना ही कोई साजिश। उन्होंने कहा कि मुझे खुद भी बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी करने जाना था, लेकिन जिन लोगों को मेरे साथ जाना था, वे कोरोना पॉजिटिव पाए गए, इसलिए मैं प्रधानमंत्री को रिसीव करने नहीं गया। उन्होंने कहा कि मुझे खेद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज फिरोजपुर ज़िले के दौरे के दौरान वापस लौटना पड़ा। हम अपने प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं। और ये भरोसा दिलाते हैं कि पीएम को किसी तरह का कोई खतरा नहीं था और ना ही सुरक्षा में कोई चूक हुई थी।

सीएम ने बताया कि हमने उनसे (पीएमओ) खराब मौसम की स्थिति और विरोध के कारण यात्रा बंद करने के लिए कहा था। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले की अचानक मार्ग परिवर्तन करने की कोई सूचना नहीं थी। ऐसे में कुछ किसान अचानक आकर धरने पर बैठ गये, तो इसमें सुरक्षा में चूक का सवाल कहां पैदा होता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पर कोई हमला नहीं हुआ, ऐसी कोई सोच भी नहीं थी। पहले भी दिल्ली में किसान आंदोलन हुआ। उनकी कुछ मांग थी जो 1 साल बाद पूरी हुई। आज भी अगर कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने रास्ते पर आ गया, तो इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने बीजेपी पर भी मामले को बेकार तूल देने और राजनीति करने का आरोप लगाया।

पीएम का काफिला सड़क के रास्ते से फिरोजपुर जा रहा था, लेकिन बीच रास्ते में कोटकपूरा पुल पर किसानों के प्रदर्शन की वजह से उनके काफिले को रोक दिया गया। 20 मिनट के इंतजार के बाद उनका काफिला बठिंडा वापिस लौट गया।

मध्‍य प्रदेश में सात जिलों के रेत ठेके निरस्त

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भोपाल। प्रदेश की सबसे बड़ी रेत खदान नर्मदापुरम(होशंगाबाद)), भोपाल सहित सात जिलों के रेत ठेके सरकार ने निरस्त कर दिए हैं। ठेकेदारों की सुरक्षा राशि (सौ करोड़ से अधिक) जब्त कर ली है। वहीं संबंधित ठेकेदारों द्वारा भंडारित रेत की जांच के निर्देश संबंधित जिलों के कलेक्टरों को दिए गए हैं। ये ठेकेदार पिछले तीन महीने से मासिक किस्त जमा नहीं कर रहे थे।

ठेकेदारों ने पिछले माह स्वेच्छा से खदानें छोड़ने का आवेदन भी दिया था। ज्ञात हो कि नर्मदापुरम(होशंगाबाद) जिले की 118 रेत खदानों के समूह का ठेका 19 महीने में दूसरी बार निरस्त हुआ है। वर्ष 2019 में रेत खदानों की नीलामी में शामिल होकर तेलंगाना की पावरमैक कंपनी ने 217 करोड़ में ठेका लिया था, जिसे मई 2020 में निरस्त किया गया था। जनवरी 2021 में छत्तीसगढ़ की कंपनी आरके ट्रांसपोर्ट ने 262 करोड़ रुपये में यह ठेका लिया था।

खनिज निगम ने रायल्टी की राशि नियमित रूप से नहीं मिलने पर नर्मदापुरम(होशंगाबाद), भोपाल, खरगोन, बड़वानी, जबलपुर, दमोह और टीकमगढ़ की रेत खदानों के समूह के ठेके निरस्त कर दिए हैं। प्रदेश की सबसे बड़े रेत खदानों के समूह नर्मदापुरम(होशंगाबाद) के ठेकेदार पर 63 करोड़ से अधिक की देनदारी थी।

ठेकेदार ने दिसंबर 2021 में खदान समर्पित करने का आवेदन तो दे दिया था, पर वह अक्टूबर 2021 से रायल्टी की नियमित किस्तों का भुगतान नहीं कर रहे थे। इसे देखते हुए ठेका निरस्त किया गया है और 65 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि जब्त कर ली गई है। साथ ही ठेकेदार को काली सूची (ब्लैक लिस्ट) में डाला गया है।

कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा ठेकेदार

रिस्क एंड कास्ट के नियम सहित अन्य प्रतिबंधों के खिलाफ ठेकेदार ने हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका लगाई है। जानकार बताते हैं कि रिस्क एंड कास्ट के नियम में ठेकेदार को राहत मिल सकती है।

ठेकेदारों ने 39 में से 24 खदानें छोड़ीं

वर्ष 2019 में सरकार ने रेत खदानों के 39 समूह (जिला स्तर पर समूह) नीलाम किए थे। इनमें से आठ ठेकेदारों ने खदानें छोड़ दी हैं, तो 16 ठेकेदारों के ठेके निरस्त कर दिए गए हैं। इस तरह प्रदेश में वर्तमान में 15 जिलों की खदानों से ही रेत निकाली जा रही है। उल्लेखनीय है कि रतलाम, भिंड और पन्ना के ठेकेदार पहले खदानें समर्पित कर चुके हैं। बैतूल, देवास, ग्वालियर, नरसिंहपुर और डिंडौरी के दिसंबर में खदानें समर्पित कर दी हैं। वहीं भोपाल, नर्मदापुरम(होशंगाबाद), रायसेन, धार, आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, शिवपुरी, जबलपुर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, मंदसौर, रीवा, राजगढ़ और शाजापुर की खदानें निरस्त की गई हैं।

मध्‍य प्रदेश के नागदा में ग्रेसिम उद्योग से गैस का रिसाव

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नागदा । ग्रेसिम उद्योग के सीएसटू विभाग में बुधवार शाम गैस रिसाव होने से अफरातफरी मच गई। कुछ ही देर में गैैस आधे शहर में फैल गई जिससे अंधेरा छा गया। लोगों को आंखों में जलन, खांसी व सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इससे हड़कंप मच गया। उद्योग प्रबंधन ने इंटरनेट मीडिया पर मैसेज कर इससे बचने की जानकारी दी। एक घंटे बाद लीकेज ठीक कर रिसाव पर काबू पा लिया गया। कुछ लोगों ने बाद में अस्पताल पहुंचकर उपचार करवाया। ग्रेसिम उद्योग के सीएसटू विभाग से बुधवार शाम 4 बजे अचानक गैस का बड़ी मात्रा में रिसाव हुआ। हवा का रुख शहर की तरफ होने से सारी गैस मंडी क्षेत्र में आने से धुआं ही धुआं हो गया। धुआं इतना ज्यादा था कि पास का व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था। बढ़ते धुएं को देखते हुए शहर में अफरातफरी मच गई।

हर कोई एक दूसरे से मोबाइल पर गैस व इससे बचाव की जानकारी लेने लगा। गैस लगने से आंखों में जलन, खांसी व सांस लेने में तकलीफ हुई। कई लोगों ने अस्पताल में जाकर उपचार कराया। हालांकि गैस रिसने से कोई जनहानि नहीं हुई। कुछ लोग उपचार के बाद सामान्य हो गए।

उद्योग के जनंसपर्क अधिकारी संजय व्यास ने बताया कि एसिड प्लांट नंबर 1 में मेंटेनेंस का कार्य पिछले शनिवार से किया जा रहा था। गैस की लाइन की सफाई का कार्य किया जा रहा है। ड्रेन वाल्व में सफाई के दौरान निर्धारित कार्य विधि के अनुसार लाइन क्लीनिंग के साथ ड्रेन वाल्व में थोड़ी मात्रा में पेरापेड वाल के अंदर फैल गया। जिससे सल्फरट्राई आक्साइड गैस रिसने लगी। सुरक्षा साधनों के साथ इसे नियंत्रण किया गया। उद्योग प्रबंधक नियंत्रण के समय स्वयं उपस्थित रहे। गैस लीकेज के मामले में जांच होने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

घबराए लोग शहर के बाहर जाने लगेगैस रिसाव के बाद शहरवासियों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया था। इंटरनेट मीडिया पर कई तरह के कमेंट्स भी डाले जा रहे थे। कई लोग निजी वाहन से शहर के बाहर तक चले गए। आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। इस पर उद्योग प्रबंधन ने इंटरनेट मीडिया लीकेज गैस के नियंत्रण की सूचना के साथ गैस से बचने की जानकारी दी। बता दें कि कई वर्षों बाद इतनी ज्यादा मात्रा में गैस रिसाव हुआ है।

सल्फर ट्राई आक्साइड का उपयोग कई तरह के रासायनिक उत्पादों को बनाने में किया जाता है। उद्योगों में इसका उपयोग बड़ी मात्रा में होता है। यह वातावरण में उपस्थित जल में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल का निर्माण करता है, जो अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी होता है। अम्ल वर्षा से मानव त्वचा और आंखों पर दुष्प्रभाव पड़ता है।

मध्य प्रदेश में फिर कोरोना पाबंदियां लागू, मेलों पर रोक, शादी में ढाई सौ और अंत्येष्टि में 50 लोगों को ही अनुमति, स्‍कूलों में 50 प्रतिशत उपस्थिति

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भोपाल । मध्य प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए बुधवार को राज्य सरकार ने एकबार फिर कई तरह की पाबंदियां लागू कर दी। अब किसी भी तरह के मेले प्रतिबंधित रहेंगे। शादी-ब्याह में दोनों पक्षों को मिलाकर ढाई सौ लोगों की उपस्थिति की अनुमति होगी। इस दौरान मास्क और शारीरिक दूरी का पालन करना अनिवार्य होगा। अंतिम संस्कार और उठावना में अधिकतम 50 लोगों को शामिल होने की सशर्त अनुमति दी जाएगी। सार्वजनिक स्थान पर मास्क लगाना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाकडाउन के बजाए इन पाबंदियों का सख्ती से पालन कराया जाए।

बुधवार को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डा राजेश राजौरा ने कोरोना गाइडलाइन संबंधी नए निर्देश कलेक्टरों को जारी किए। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय में कोरोना की समीक्षा की। उन्होंने सभी कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर किए जा रहे इंतजामों की जानकारी ली। ज्ञात हो कि प्रदेश में मंगलवार को 595 लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है।

इसके अलावा ये प्रतिबंध भी लागू रहेंगे

-रात्रिकालीन कर्फ्यू 11 बजे से सुबह पांच बजे तक

– सिनेमाघर, मल्टीप्लेक्स, थियेटर, जिम, कोचिंग क्लास, स्वीमिंग पूल, क्लब और स्टेडियम में 18 वर्ष से अधिक के वैक्सीनेटेड लोगों को ही मिलेगा प्रवेश

-कालेज, स्कूल, हास्टल में कार्यरत सभी लोग और 18 वर्ष से अधिक के छात्रों के लिए दोनों डोज का टीकाकरण अनिवार्य

-सभी बाजार, माल के दुकानदार को भी दोनों डोज का टीकाकणण अनिवार्य होगा।

भोपाल- इंदौर में स्टेडियम को तैयार करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों में भी अभी सख्त प्रतिबंध नहीं हैं, इसलिए मध्य प्रदेश में भी नहीं होंगे। भारत सरकार के तय प्रोटोकाल के तहत मरीजों का इलाज किया जाए। प्रतिदिन 75 हजार जांच कराएं। अस्पतालों और कोविड केयर सेंटरों में एक लाख बिस्तरों की क्षमता रखें। पहले की तरह मोतीलाल नेहरू स्टेडियम भोपाल और इंदौर के स्टेडियम में एहतियातन आइसोलेशन की तैयारी अभी से कर लें। ठंड के मौसम को देखते हुए स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से रजाइयों की व्यवस्था भी करें। बड़े नगरों में पुख्ता व्यवस्था होने से निकटवर्ती जिलों से आने वाले संक्रमितों की देखभाल में आसानी होगी। महाराष्ट्र में सर्वाधिक संक्रमण है। पड़ोसी राज्य होने के नाते मध्य प्रदेश में अधिक से अधिक सावधानी बरतें।

जबलपुर में रोज पांच हजार जांच

जबलपुर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन पांच हजार जांच करा रहे हैं। अभी 73 प्रकरण हैं। फीवर क्लीनिक शुरू कर दिए हैं। 32 सरकारी और निजी अस्पतालों से संपर्क कर व्यवस्था बनाई है। मुख्यमंत्री ने जबलपुर में बिस्तर बढ़ाने के निर्देश दिए। ग्वालियर कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि मंगलवार को 58 प्रकरण आए हैं। छह हजार बेड उपलब्ध हैं। कांटेक्ट ट्रेसिंग भी की जा रही है। रोगियों के घर जाकर चिकित्सकीय परामर्श दे रहे हैं। एक मांडल तैयार किया है, जिसमें रोगी को एक पैकेज में उपचार और देखभाल का लाभ मिलेगा। इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि संक्रमण को देखते हुए डाक्टरों से दवाओं का निर्धारण करने को कहा है। भोपाल कलेक्टर अविनाश लवानिया ने बताया कि पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक महाविद्यालय में कोविड केयर सेंटर शुरू किया है। नेहरू स्टेडियम में भी करीब एक हजार बिस्तर क्षमता का केंद्र शुरू करने की तैयारी है। भोपाल में मंगलवार को 24 प्रकरण आए हैं। फीवर क्लीनिक भी कार्य कर रहे हैं।

कोरोना के कारण BCCI ने रणजी ट्रॉफी, कर्नल CK नायडू और सीनियर महिला T20 लीग को स्थगित किया

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रणजी ट्रॉफी 2022 के शुरू होने से पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया है। कई खिलाड़ियों के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस टूर्नामेंट को स्थगित कर दिया गया है। रणजी ट्रॉफी अब 13 जनवरी से शुरू नहीं होगी। बीसीसीआई ने रणजी ट्रॉफी के अलावा सभी घरेलू टूर्नामेंट को फिलहाल तत्काल प्रभाव से रोक दिया। बोर्ड ने हालांकि कूच बिहार अंडर-19 के नॉक आउट मुकाबलों को तय शेड्यूल के अनुसार जारी रखने का फैसला किया है।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि देश बढ़ते कोविड-19 मामलों के मद्देनजर 2021-22 सीजन के लिए रणजी ट्रॉफी, कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी और सीनियर महिला टी20 लीग को स्थगित ​कर दिया गया है। रणजी ट्रॉफी और कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी इस महीने शुरू होने वाली थी, जबकि सीनियर महिला टी 20 लीग फरवरी में शुरू होने वाली थी।

बीसीसीआई ने एक बयान में कहा कि बोर्ड खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ, मैच अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों की सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहता है और इसलिए, अगले आदेश तक तीनों टूर्नामेंटों को रोकने का फैसला किया है। बीसीसीआई स्थिति का आकलन करना जारी रखेगा और उसी के अनुसार टूर्नामेंट शुरू करने पर फैसला करेगा। बोर्ड ने कहा कि बीसीसीआई उन सभी लोगों के प्रयासों की सराहना करता है, जिन्होंने मौजूदा 2021-22 घरेलू में 11 टूर्नामेंटों में 700 से अधिक मैचों की मेजबानी करने के लिए अपना बेस्ट दिया।

स्वामी विवेकानंद जयंती पर मध्‍य प्रदेश में मनाया जाएगा रोजगार दिवस

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भोपाल।। प्रदेश में स्वामी विवेकानंद जयंती पर 12 जनवरी को रोजगार दिवस मनाया जाएगा। इस एक दिन में तीन लाख लोगों के ऋण प्रकरण के स्वीकृति पत्र दिए जाएंगे। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा। मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधि इन कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे। रोजगार देने के लिए इस तरह के आयोजन प्रतिमाह किए जाएंगे। यह जानकारी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक से पहले मंत्रियों को संबोधन में दी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना सहित स्वरोजगार की अन्य योजनाओं के प्रकरण तेजी से स्वीकृत किए जाएं। सभी मंत्री राज्य और जिलों की समितियों से संपर्क करके मध्य प्रदेश को विभिन्न् स्वरोजगार योजना में अग्रणी बनाने के प्रयास करें। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वनिधि सहित योजनाओं की तरह हमें अन्य योजनाओं में भी सबसे आगे रहना है।

मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर में सबसे कम

उन्होंने मंत्रियों को बताया कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां बेरोजगारी की दर सबसे कम है। यह निश्चित ही हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पिछले साल अधोसंरचना पर 40 प्रतिशत अधिक राशि खर्च की गई। कोरोना काल में किए गए प्रयास इसलिए महत्व रखते हैं क्योंकि संकट के समय इसकी आवश्यकता थी। हमने विपरीत परिस्थितियों में उपलब्धि अर्जित की है। लघु, सूक्ष्म एवं उद्योगों के विकास के लिए भी कोशिश की जा रही हैं।

15 से 18 वर्ष के बच्‍चों के टीकाकरण में अग्रणी

मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 से 18 साल के बधाों के टीकाकरण में मध्य प्रदेश सभी राज्यों से आगे है। सभी मंत्री गृह और प्रभार के जिलों में बच्चों के टीकाकरण के काम का जायजा लें। इससे हमें और गति देना है। प्रदेश में टीकाकरण को लेकर एक माहौल बना है। आपदा प्रबंधन समितियों के सदस्यों से संवाद के साथ-साथ प्रशासन एवं जनता की भागीदारी से अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।

चुनाव होने तक मध्‍य प्रदेश की पंचायतों में प्रधान प्रशासकीय समिति करेगी काम

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भोपाल।प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव निरस्त होने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायतों में कार्यों के संचालन के लिए प्रधान प्रशासकीय समिति की व्यवस्था लागू कर दी है। जनपद और जिला पंचायत स्तर पर भी यही व्यवस्था रहेगी। इसमें संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खातों का संचालन किया जाएगा।

प्रदेश में मार्च, 2020 में ही 22, 604 पंचायतों में सरपंच और पंच का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इसी तरह 841 जिला और 6774 जनपद पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। नियमानुसार यहां चुनाव हो जाने चाहिए थे पर किसी न किसी कारण से ये टलते रहे हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग ने जनवरी में चुनाव कराने की तैयारी की थी लेकिन ये भी नहीं हो पाए। आदर्श आचार संहिता भी समाप्त हो चुकी है। पंचायतों में कार्य प्रभावित न हों इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पूर्व सरपंच को ही प्रधान बनाकर अधिकार दिए हैं। इसके लिए प्रशासकीय समिति बनाने की व्यवस्था बनाई है। पंचायत सचिव और प्रधान प्रशासकीय समिति के संयुक्त हस्ताक्षर से पंचायत के खातों का संचालन किया जाएगा।