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RBI ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं करेगा

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नई दिल्ली  : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रेट-सेटिंग पैनल रूस-यूक्रेन संघर्ष के मद्देनजर भू-राजनीतिक रिस्क के बावजूद अपने उदार रुख को जारी रखेगा और ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखेगा। अर्थशास्त्रियों के कहना है कि आरबीआई के इस साल के अंत में ही मौद्रिक नीति को कड़ा करना शुरू करने की उम्मीद है, और फरवरी की शुरुआत में हुई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की पिछली बैठक के बाद से भू-राजनीतिक स्थिति में बदलाव हुआ है लेकिन आरबीआई दरों में कोई तत्काल परिवर्तन नहीं करेगा। पिछले हफ्ते यूक्रेन पर रूस के हमले ने वैश्विक और घरेलू बाजारों में उथल-पुथल ला दिया दिया और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ गई है।

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दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंक बढ़ा चुके हैं दरें
आश्चर्यजनक कदम के रूप में, मौद्रिक नीति पैनल ने अपनी फरवरी की बैठक में नीतिगत दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया जबकि वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने महामारी के बाद मुद्रास्फीति का मुकाबला करने के लिए दरें बढ़ाईं हैं। अन्य केंद्रीय बैंकों के उलट आरबीआई के दर न बढ़ने का कारण है कि भारत की मुद्रास्फीति का चरित्र अन्य अर्थव्यवस्थाओं से थोड़ा अलग है। हालांकि, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने एमपीसी की बैठक में कहा था कि चूंकि अगले वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति के शांत होने की उम्मीद है, इसलिए मौद्रिक नीति में समायोजन की गुंजाइश रहेगी। बार्कलेज के अर्थशास्त्रियों ने 24 फरवरी को ग्राहकों को लिखे एक नोट में कहा, “हम दोहराते हैं कि मुद्रास्फीति पर इस तरह के संदेश के बाद आरबीआई की निकट अवधि में दरों में बढ़ोतरी की परिकल्पना कर पाना मुश्किल हो जाता है।”

बैंकों का अनुमान रेट बढ़ने में होगी देरी
बार्कलेज ने कहा कि आरबीआई नीति सामान्यीकरण का केवल एक क्रमिक मार्ग पसंद करेगा। बार्कलेज ने कहा, “आरबीआई अगले छह महीनों में पॉलिसी कॉरिडोर को सामान्य करने का विकल्प चुन सकता है। हम उम्मीद करते हैं कि रेपो दर में बढ़ोतरी केवल Q3 2022-अगस्त की बैठक से शुरू होगी और इसमें और देरी संभव है।” एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, पॉलिसी निर्माता ब्याज दर के जरिये तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं। एमपीसी की बैठक में कठोर नीति संकेत और आम तौर पर सुस्त मिनटों का मतलब है कि आरबीआई नीति परिवर्तन पर धीमा हो जाएगा। हम अपने विचार को बनाए रखते हैं कि आरबीआई के हाथ में कुछ नीतिगत लचीलापन है, जो रेपो दर में बढ़ोतरी में देरी कर सकता है।

आपूर्ति के कारण घरेलू मुद्रास्फीति पर असर
पिछले कुछ समय से, आरबीआई ने माना है कि आपूर्ति की बाधाएं घरेलू मुद्रास्फीति पर असर डाल रही हैं और जब अड़चनें कम होंगी, तो मुद्रास्फीति की गति कम हो जाएगी। फरवरी की बैठक में, दास ने एक बार फिर कहा कि भारत में मुद्रास्फीति का दबाव काफी हद तक आपूर्ति-पक्ष कारकों से उत्पन्न होता है। इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए, डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा कि महामारी की मुद्रास्फीति अधिक मांग से नहीं बल्कि आपूर्ति की बाधाओं से प्रेरित है। दूसरों का मानना ​​​​है कि पिछले 15 दिनों में स्थिति में बदलाव को देखते हुए, केंद्रीय बैंक के लिए कार्य करने का समय आ गया है। इसके अलावा, यह देखते हुए कि भारत अपनी तेल की मांग का 85% आयात के माध्यम से पूरा करता है, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति को बढ़ावा देगी।

‘यहां से मेरा भावुक रिश्ता, उज्ज्वला को बलिया ने दिशा दिखाई थी’- पीएम

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बलिया। पूर्वांचल के बलिया जिले में छठवें चरण में तीन मार्च को मतदान होना है। इस लिहाज से बलिया जिले में सियासी घमासान पूर्वांचल के अन्‍य जिलों की अपेक्षा अधिक है। सोमवार को बलिया जिले में पीएम नरेन्‍द्र मोदी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमवार को बलिया दोपहर बाद भाजपा के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे। प्रधानमंत्री शहर से सटे माल्देपुर गांव में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे तो लोगों ने नारे लगाकर उनका स्‍वागत किया।

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पीएम का हेलीकाप्टर दोपहर करीब तीन बजे हेलीपैड पर उतरा तो पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्‍वागत किया। वहीं मंच पर पीएम पहुंचे तो जन समूह का हाथ उठाकर अभिवादन किया। प्रधानमंत्री का दोपहर बाद मंच पर आगमन हुआ तो पहले सभी का अभिवादन किया, उसके बाद जनता का अभिवादन कर उनको प्रणाम किया। इस दौरान मंच पर पार्टी की ओर से उम्‍मीदवार भी मौजूद रहे। दरअसल जिस मैदान पर पीएम नरेन्‍द्र मोदी की जनसभा थी वहीं से उन्‍होंने उज्‍जवला योजना की शुरुआत की थी।

पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि बागी बलिया की मिट्टी में देशभक्ति की खुशबू है। आपका आशीर्वाद मैं विकास करके लौटाऊंगा। यह चंद्रशेखर जी की धरती है। उत्तर प्रदेश में पांच चरण के चुनाव हो चुके हैं। पश्चिम से पूरब तक यूपी की जनता ने घोर परिवारवाद को नकार दिया है। विकास के हाइवे पर रफ्तार भर ली है। बलिया, पूर्वांचल व यूपी का विकास मेरा कर्तव्य और प्राथमिकता है। यूपी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं गरीब की सेवा करने का मैं संकल्प लेकर चल पड़ा हूं। विकास के हर काम पर ध्यान दिया जा रहा है। परिवार वादियों ने यूपी की कानून व्यवस्था को बर्बाद कर दिया था। बलिया के कारोबारी का पैसा गुंडे छीनकर ले जाते थे। अब करोबार सुरक्षित है। महिलाओं को गुंडे बदमाशों का डर नहीं है। परिवार वादियों ने सिर्फ अपनी तिजोरी भरी, विकास पर ध्यान नहीं दिया। हमारी सरकार ने बीते पांच वर्ष में कई नई सड़के बनाई है।

बिजली सप्लाई में बहुत पक्षपात होता था। यहां के लोगों का दर्द मैं समझता हूं। आज बलिया में ज्यादा बिजली आ रही है। आपके प्यार का कर्ज मैं कभी उतार नहीं सकता है। बलिया से मेरा भावुक रिश्ता है। उज्ज्वला को दिशा इसी बलिया ने दिखाई थी। सरकार गर्भवती माताओं के लिए मातृ वंदना योजना चला रही है। 10 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं। गरीबों व दलितों के बच्चों के लिए स्कालरशिप बढ़ाई गई है। हमारी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। कौशल विकास योजना से ट्रेनिंग दी जा रही है। गांव व गरीब के युवाओं को बिना गारंटी बैंक से मदद देने का काम किया है। मुद्रा योजना का लाभ गरीब बेटियों को अधिक मिला है।

गरीब के पास पक्का घर हो इसके लिए पीएम आवास योजना शुरू की है। यूपी में 34 लाख पक्के घर गरीबों को बनाकर दिए गए हैं। बीमारी के लिए गरीब का साथी बनी हैं। आयुष्मान योजना के माध्यम से पांच लाख के मुफ्त इलाज की सुविधा दी गयी है। आजादी के इतने साल के बाद गरीब माताओं की मदद करनी चाहिए। भाजपा की सरकार मदद में जुटी है। पांच लाख तक के बीमारी के लिए खर्च मोदी ने उठाना तय किया है। सरकार ने हर जिले में जन औषधि की दुकान खोली है, ताकि गरीबों को सस्ते दर पर दवाएं मिल सके। देश मे किसानों की बात करने वाले बहुत हो गए हैं।

छोटे किसानों की बात कोई नहीं करता है। इनकी चिंता कौन करेगा। मैं जब तक आपकी सेवा करता रहूंगा, मैं आपका विकास करता रहूंगा।  पहले घर के पैसे भी गरीबों को देने के लिए तैयार नहीं थे। जो विकास के रोड़े अटकाते हैं, उन्हें सरकार में मत लाना। 10 मार्च को फिर भाजपा की सरकार उत्तर प्रदेश में बनने जा रही है। हम यह नहीं देखते की कौन किस जाति का है। सबको उसका हक दिया जाता है। कोरोना संकट से हर देश जूझ रहा है। इस महामारी से सरकार लड़ रही है। 15 करोड़ गरीबों को सरकार ने मुफ्त राशन दिया है। इस मुसीबत में गरीब के बच्चों को भूखा नहीं सोना पड़े। आज वैक्सीन यूपी के करोड़ों लोगों का जीवन बचा रही है। टीका के लिए किसी को कोई पैसा नहीं देना पड़ा। बलिया व पूर्वांचल के विकास के लिए डबल इंजन की सरकार जरूरी है। घोर परिवार वादियों को पटखनी देनी है।

टीम इंडिया की मध्यक्रम समस्या श्रेयस-जडेजा ने सुलझाई

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भारत और श्रीलंका के  बीच टी-20 सीरीज खत्म हो चुकी है। टीम इंडिया ने 3-0 के अंतर से सीरीज जीतकर लगातार 12वां टी-20 अपने नाम किया है। वर्ल्डकप की तैयारियों के मद्देनजर यह सीरीज बेहद अहम थी और रोहित को कई सवालों के जवाब मिल चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया में होने वाले वर्ल्डकप के लिए भारत की टीम ‘बी’ भी पूरी तरह से तैयार है। इसके बावजूद रोहित और द्रविड़ को कुछ अहम बिंदुओं पर काम करना होगा और वर्ल्डकप से पहले भारतीय टीम को पूरी तरह से तैयार करना होगा।

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श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में भारत ने दो मैच लक्ष्य का पीछा करते हुए जीते। वहीं पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ बड़ा लक्ष्य खड़ा करके जीता था। इससे यह साफ होता है कि भारत को लक्ष्य का पीछा करने या पहले बल्लेबाजी करने में समस्या नहीं है, लेकिन खराब फील्डिंग और ओपनिंग जोड़ी पर काम करना जरूरी है।

मध्यक्रम की समस्या सुलझी

भारतीय टीम के मध्यक्रम बल्लेबाज लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। इस वजह से टीम इंडिया के शुरुआती विकेट गिरते ही पूरी टीम दबाव में आ जाती थी और मैच हार जाती थी। इस सीरीज में ऐसा नहीं हुआ। तीनों मैचों में रोहित या किशन सस्ते में आउट हुए, लेकिन श्रेयस और जडेजा ने आकर पारी को संभाला। दूसरे  मैच में संजू सैमसन ने भी मध्यक्रम में अहम योगदान दिया। इसी वजह से भारत ने तीनों मैच आसानी से जीते। सभी मैचों में मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने अहम योगदान दिया। इससे  पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में भी भारत के मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव और वेंकेटेश अय्यर ने अच्छा प्रदर्शन किया था।

हार्दिक का विकल्प मिला

वेंकटेश अय्यर हार्दिक पांड्या के विकल्प के रूप में खुद को स्थापित कर रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने वाले अय्यर को इस सीरीज में ज्यादा मौके नहीं मिले। सिर्फ आखिरी मैच में उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिला और इसमें वे कुछ खास नहीं कर सके। वहीं गेंद के साथ उन्होंने पहले मैच में दो विकेट चटकाए थे। फील्डिंग के दौरान भी अय्यर ने अच्छा प्रदर्शन किया। खेल के तीनों विभाग में अय्यर का प्रदर्शन लाजवाब रहा है।
भारत की टीम ‘बी’ तैयार

इस सीरीज में विराट कोहली, ऋषभ पंत और लोकेश राहुल जैसे खिलाड़ी नहीं खेल रहे थे, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने सभी मैच बड़े अंतर से जीते। इसमें खास बात यह थी कि हर मैच में श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, ईशान किशन और आवेश खान जैसे खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जिनकी जगह टीम में पक्की नहीं है। इससे यह बात साफ होती है कि भारत की टीम ‘बी’ तैयार है और वर्ल्डकप के दौरान किसी खिलाड़ी के चोटिल होने पर उनकी जगह नए खिलाड़ी अच्छे प्रदर्शन के लिए तैयार हैं।
ओपनिंग जोड़ी बनी नई समस्या
भारत के लिए ओपनिंग जोड़ी नई परेशानी बन चुकी है। कप्तान रोहित शर्मा भी लय में नहीं दिख रहे हैं और पिछले कई मैचों से वे बड़ी पारी नहीं खेल पाए हैं। वहीं उनके ओपनिंग जोड़ीदार लगातार बदल रहे हैं। रोहित के साथ राहुल भारत के प्रमुख ओपनर हैं, लेकिन पिछले कुछ मैचों में रोहित ने ईशान किशन, संजू सैमसन और वनडे में तो पंत के साथ भी ओपनिंग की है। ऐसे में भारत को जल्द ही अपनी ओपनिंग जोड़ी तय करनी होगी और अच्छे तरीके से पारी की शुरुआत करनी होगी।

फील्डिंग में सुधार की जरूरत
पिछले दो सीरीज से भारत की फील्डिंग खराब रही है। टीम इंडिया इस दौरान सभी मैच जीती और गेंदबाजों ने विकेट भी निकाले। इससे खराब फील्डिंग की कमजोरी सामने नहीं आ रही है। भारत की पिछली दो सीरीज वेस्टइंडीज और श्रीलंका जैसी टीम के खिलाफ रही है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड के खिलाफ कैच छोड़ने पर भारतीय टीम को दूसरा मौका नहीं मिलेगा।

यूक्रेन के मुद्दे पर पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग

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रुस और यूक्रेन के बीच युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, भारतीय नागरिकों और देश के नेताओं की चिंता उतनी ज्यादा बढ़ती जा रही है। युद्ध के खतरे को देखते हुए यूक्रेन में फंसे 15000 के करीब भारतीय नागरिकों को निकालना और मुश्किल होता जा रहा है। साथ ही उनके लिए खतरा भी बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन और रूस के बीच खतरनाक होते युद्ध को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के दौरे को बीच में ही छोड़ दिया है। दिल्‍ली पहुंचते ही उन्होंने यूक्रेन संकट पर हाई लेवल मीटिंग ली। इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला समेत तमाम अधिकारी मौजूद रहे।

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अभी भी भारत के करीब 15000 छात्र और नागरिक यूक्रेन में फंसे हुए हैं। उधर, भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया कि हमने अपने मास्को दूतावास से लोगों की एक टीम को वहां भेजा है ताकि उस क्षेत्र की मैपिंग हो जाए और ट्रांसपोर्ट का, खाने का, रहने का इंतजाम किया जाए। उन्होंने कहा भारत सरकार ने अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। भारतीय दूतावास ने पोलैंड, रोमानिया, हंगरी और स्लोवाक रिपब्लिक की सीमाओं पर क्रॉसिंग प्वाइंट तय किये हैं, ताकि यूक्रेन से भारतीय नागरिकों को जमीनी रास्ते से निकाला जा सके। इसके अलावा भारतीय नागरिकों की मदद के लिए 24 घंटे चलनेवाले कंट्रोल सेंटर बनाये गये हैं।

विदेश सचिव ने बताया कि अब पड़ोसी देशों के ज़रिये, यूक्रेन में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर हमारे विदेश मंत्रालय के अधिकारी मौजूद हैं। बॉर्डर के आस-पास लोगों के ठहरने के लिए कुछ शेल्टर भी तैयार किए गए हैं। हमारी कोशिश है कि सभी को जल्द से जल्द निकाला जा सके।

राष्ट्रपति पुतिन ने अपने परमाणु दस्ते को किया अलर्ट

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रूसी सेनाओं और यूक्रेन (Ukraine) के बीच घमासान जंग जारी है। इस बीच NATO देशों के युद्ध में दखल दिये जाने की आशंका को लेकर रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने रूसी परमाणु निवारण फोर्स (Nuclear Deterrence Force) को अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। यानी पुतिन ने सीधे तौर पर विश्व समुदाय को चेतावनी दी है कि अगर किसी ने यूक्रेन मामले में दखल दी, तो वो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से भी पीछे नहीं हटेंगे। विश्व इतिहास में पिछले कई दशकों से ये पहला मौका है, जब किसी देश ने खुले तौर पर परमाणु हमले की धमकी दी हो। यूक्रेन पर हमले से पहले भी व्लादिमीर पुतिन ने दुनिया के सभी देशों को धमकी दी थी कि यदि उन्होंने दखल देने का प्रयास किया तो ये जंग परमाणु युद्ध में बदल सकता है।

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अगर रूसी सेना पर यूक्रेन के बाहर की ताकतों की ओर से हमला किया जाता है, तो रूस परमाणु हथियारों की तैनाती कर सकता है। रूस के राष्ट्रपति ने हमले के बाद अपने भाषण में साफ चेतावनी दी थी – ‘किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि हमारे देश पर सीधा हमला किसी भी संभावित हमलावर के लिए विनाश और भयानक परिणाम का कारण बनेगा.’

पीएम मोदी ने बुलाई बैठक

यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के दौरे को बीच में ही छोड़ दिया है। दिल्‍ली पहुंचते ही वह यूक्रेन संकट पर हाई लेवल मीटिंग करेंगे। बता दें कि दोनों देशों के बीच पिछले चार दिनों से जंग जारी है। अभी भी भारत के करीब 15000 छात्र और नागरिक यूक्रेन में फंसे हुए हैं।

भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने बताया कि हमने अपने मास्को दूतावास से लोगों की एक टीम को वहां भेजा है ताकि उस क्षेत्र की मैपिंग हो जाए और ट्रांसपोर्ट का, खाने का, रहने का इंतजाम किया जाए। उन्होंने कहा भारत सरकार ने अपने नागरिकों को यूक्रेन से निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा चलाया है। 4 हज़ार लोग पहले ही निकाल लिये गये थे। अब पड़ोसी देशों के ज़रिये लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि बॉर्डर पर हमारे विदेश मंत्रालय के अधिकारी मौजूद हैं। बॉर्डर के आस-पास लोगों के ठहरने के लिए कुछ शेल्टर भी तैयार किए गए हैं। हमारी कोशिश है कि सभी को जल्द से जल्द निकाला जा सके।

राजस्थान सरकार की तरह छत्तीसगढ़ में भी लागू हो पुरानी पेंशन

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रायपुर । राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ प्रदेश संयोजक संजय शर्मा ने कहा है कि राजस्थान सरकार की तरह छत्तीसगढ़ में पुरानी पेंशन पुनः लागू किया जाए। जनघोषणा पत्र में कांग्रेस सरकार ने जो पुरानी पेंशन लागू करने का वादा किया है, उसे भी पूरा किया जा सकता है।

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पुरानी पेंशन देना राज्य सरकार के अधीन

उन्होंने कहा है कि राज्य कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का विषय राज्य सरकार के अधीन है। अब छत्तीसगढ़ सरकार इस पर तत्काल निर्णय ले। कर्मचारियों के अलग से 10 फीसद अंश जमा राशि 90 अरब को सरकार ब्याज में लेकर विकास कार्य बढ़ा सकती है, अभी बड़ी संख्या में NPS कर्मचारी रिटायर नहीं हो रहे हैं। अतः ज्यादा राशि के भुगतान का भार नहीं आएगा। एनपीएस हटाकर ओपीएस लागू करने से सरकार को विकास के लिए कुल 180 अरब की राशि प्राप्त हो सकता है।

प्रति वर्ष करीब 20 अरब राज्य शासन का बचत

राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे ,लैलूंन भारद्वाज , रोहित तिवारी, तुलसी साहू, निर्मल साहू, डा. रवि बंजारे, एसपी देवांगन, बीबी जायसवाल, महेंद्र सिंह राजपूत, शैलेंद्र सोनी, संतोष कुमार वर्मा, राष्ट्रीय आईटी सेल प्रभारी बसंत चतुर्वेदी ने कहा है कि अपैल 2022 से 4 फीसद राज्यांश का निर्णय लिया गया है। पुरानी पेंशन लागू करने से राज्य सरकार द्वारा 14 प्रतिशत राज्यांश राशि जमा नहीं करने पर प्रति वर्ष करीब 20 अरब छत्तीसगढ़ राज्य शासन का बचत होगा।

एनपीएस से बुढ़ापे में गुजर बसर मुश्किल

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के जनघोषणा पत्र में कहा गया है कि सीपीएफ पर विचार कर, 2004 के पूर्व जो पेंशन योजना थी उसे लागू करने की कार्यवाही की जाएगी, परंतु अभी तक छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुरानी पेंशन बहाली हेतु सार्थक पहल नही किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1 नम्वबर 2004 से नवीन अंशदायी पेंशन योजना लागू की गई है। नवीन अंशदायी पेंशन योजना बाजार आधारित योजना है, इस योजना से सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों को अल्प पेंशन का भुगतान हो रहा है, जिससे बुढ़ापे में उनका गुजर बसर अत्यंत पीड़ादायक होता जा रहा है।

T20 सीरीज में टीम इंडिया ने लगातार तीसरी विपक्षी टीम का किया क्लीन स्वीप

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भारतीय टीम का टी20 इंटरनेशनल सीरीज में विजयी अभियान लगातार जारी है। भारतीय टीम ने जो सिलसिला साल 2021 के टी20 विश्व कप के आखिरी तीन मैच जीतकर शुरू किया था, वो सिलसिला अभी भी जारी है। इतना ही नहीं, टीम इंडिया ने लगातार तीसरी टी20 सीरीज में सामने वाली टीम को क्लीन स्वीप किया है। भारत ने इस बार श्रीलंकाई टीम का सूपड़ा साफ किया है।

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धर्मशाला के एचपीसीए क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए तीसरे और आखिरी टी20 इंटरनेशनल मैच में भारत ने श्रीलंका को 6 विकेट से हरा दिया और इसी के साथ लगातार तीसरी टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप कर दिया। भारत ने इससे पहले वेस्टइंडीज को 3-0 से और उससे पहले पिछले साल के आखिर में न्यूजीलैंड को 3-0 से हराया था। इस तरह भारत का इस प्रारूप में जीत का सिलसिला जारी है।

इस मैच की बात करें तो श्रीलंकाई टीम के कप्तान दसुन शनाका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। हालांकि, कप्तान का ये फैसला सही साबित नहीं हुआ, लेकिन श्रीलंकाई टीम ने कप्तान शनाका की 38 गेंदों में 74 रन की तूफानी पारी के दम पर स्कोर बोर्ड पर 146 रन ठोक दिए। हालांकि, ये टारगेट भारतीय बल्लेबाजी क्रम के आगे बौना साबित हुआ।

भारतीय टीम ने 147 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत हासिल नहीं की थी, लेकिन श्रेयस अय्यर ने टीम को जिताकर ही दम लिया। उन्होंने 45 गेंदों में 9 चौके और 1 छक्के की मदद से 73 रन बनाए और टीम इंडिया को 6  विकेट से जीत दिलाने में अहम योगदान दिया। भारतीय टीम ने 147 रन का लक्ष्य 16.5 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया।

रुस के साथ वार्ता को तैयार हुआ यूक्रेन

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रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। शुरू में लग रहा था कि यूक्रेन कमजोर पड़ रहा है और जल्द घुटने टेक देगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यूक्रेन की तरफ से भी रूस को भारी नुकसान पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। यूक्रेन का तो यहां तक कहना है कि उसने रूस के 3500 सैनिक मार गिराए हैं। ताजा खबर यह है कि यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत से मामला सुलझाने के रास्ते खुल गये हैं। यूक्रे ने बेलारुस में रुसी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत पर सहमति जताई है, और अपना एक प्रतिनिधिमंडल बेलारूस भेजा है। रुस ने पहले ही अपना प्रतिनिधिमंडल वहां भेज दिया था। हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की चाहते थे कि ये वार्ता किसी वारसॉ, इस्तांबुल और बाकू में हो और इसलिए पहले उन्होंने वार्ता में शामिल होने से इंकार कर दिया था।

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अमेरिका ने चीन को दी चेतावनी

इस बीच, अमेरिका और चीन के बीच तनातनी शुरू हो गई है। दरअसल, रविवार सुबह अमेरिका ने चीन को चेतावनी जारी कि वह रूस का साथ देना बंद करे, अन्यथा बुरे परिणाम भुगतने होंगे। चीन ने भी जवाब देने में देर नहीं की और अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि रूस पर केवल आर्थिक प्रतिबंध लगाने से कुछ नहीं होगा। चीन ने सवाल दी कि अमेरिका को इस समस्या का राजनीतिक हल निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास करने होंगे।

क्या होकर रहेगा तीसरा विश्व युद्ध (WWIII)

हमलों का आदेश देते समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि यदि कोई देश यूक्रेन के समर्थन में आया तो गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। ताजा खबर यह है कि जर्मनी और फ्रांस ने यूक्रेन की मदद में कदम आगे बढ़ाए हैं। जर्मनी ने पहली बार यूक्रेन को अपने हथियार दिए हैं। वहीं फ्रांस ने बेलारूस से कहा है कि वह अपने यहां से रूसी सेना को भगाए। बता दें, बेलारूस शुरू से रूस के साथ है और से पुतिन की आर्मी ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। कुल मिलाकर यूक्रेन और रूस की जंग अब बढ़ती जा रही है। अन्य महाशक्तियों के शामिल होने से तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं उठने लगी हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- अब WWIII की विकल्प

इससे पहले रविवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का बड़ा बयान आया। उन्होंने कहा, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दो ही विकल्प छोड़े है। या तो तीसरा विश्वयुद्ध हो जाए या रूस पर आर्थिक बैन लगाए जाएं। यही कारण है कि अमेरिका व अन्य देशों ने प्रतिबंधों का ऐलान किया है।

मारोयोपोल में रूसी हमले में ग्रीस के 10 नागरिकों की मौत हो गई है। इसके बाद ग्रीस भी रूस के खिलाफ भड़क गया है और ग्रीस में रूसी राजदूत को तलब किया गया है।

रूस के हमले के तीसरे दिन शनिवार को देर रात रूसी सेना की कमांडो टुकड़ी यूक्रेन की राजधानी कीव के मुहाने पर आ गई और वहां उसकी यूक्रेनी सैनिकों की आमने-सामने की लड़ाई शुरू हो गई। यह टुकड़ी टैंकों और भारी सैन्य वाहनों के लिए रास्ता बनाने के उद्देश्य से आगे आई है।

इससे पहले राजधानी में रूसी एजेंटों की मौजूदगी की बात मेयर कह चुके हैं और कहा है कि वे रूसी सेना के लिए काम कर रहे हैं। शनिवार को दिन भर कीव को तीन तरफ से घेरकर रूसी टैंक गोलों की बरसात करते रहे, जबकि आसमानी रास्ते से क्रूज मिसाइल लक्ष्यों को निशाना बना रही हैं।

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कीव से महज 30 किलोमीटर दूर रूसी सेना ने भारी जमावड़ा लगा रखा है। रूसी सेना राजधानी के नजदीक अपनी स्थिति मजबूत करती जा रही है। अमेरिका रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। जबकि राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि सेना और सरकार का राजधानी पर पूरा नियंत्रण बना हुआ है और हम पूरी ताकत से हमलों का मुकाबला कर रहे हैं।

होली-रंगमंचमी धूमधाम से मनाओ, गेर भी निकालो – सीएम शिवराज

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 इंदौर। इंदौर शहर में इस बार 22 मार्च को रंगपंचमी पर गेर निकलेगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को बुढ़ी बरलाई की सभा में कहा कि कोरोना जा रहा है। होली-रंगपंचमी धूमधाम से मनाओ, गेर भी निकालो। गेर को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा सि्थति स्पष्ट करने के बाद गेर आयोजकों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दो साल से कोरोना के कारण शहर की इस सांस्कृतिक परंपरा पर विराम लग गया था, लेकिन इस बार खुशियों की गेर का सिलसिला फिर शुरू होगा, हालांकि जिस रुट से गेर निकलती है, उसके बड़े हिस्से पर निर्माण कार्य चल रहा है, ऐसे में इस साल रुट में बदलाव हो सकता है।

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गेर को लेकर मुख्यमंत्री के बयान के बाद उत्सव समितियों का गेर निकालने को लेकर उत्साह दुगना हो गया है। संगम कार्नर रंग पंचमी महोत्सव समिति के अध्यक्ष कमलेश खंडेलवाल का कहना है कि गेर को लेकर सि्थति स्पष्ट होने के बाद प्रशासन को अब समितियों की तैयारियों में सहयोग देना चाहिए। वर्तमान में गेर मार्ग पर निर्माण कार्य चल रहा है। उसे जल्द ठीक किया जाना चाहिए। टोरी कार्नर रंग पंचमी महोत्सव समिति के समन्वयक शेखर गिरी का कहना है कि दो साल बाद एक बार फिर दुगने उत्साह के साथ हम गेर निकालने की तैयारी हम कर रहे है। मारल क्लब के आयोजक अभिमन्यु मिश्रा ने बताया कि गेर को लेकर कार्यकर्ता में बहुत उत्साह है। इसके लिए महाराष्ट्र के अमरावती की 100 सदस्यी ढोल पार्टी को बुलाया जा रहा है।

धुलेंडी के बाद रंगपंचमी पर गेर निकालने की परंपरा आजादी के पहले से चली आ रही है। होलकर राजवंश के समय राजपरिवार के लोग रंगपंचमी पर जुलूस की शक्ल में लोगों के साथ रंग खेलने के लिए सड़कों पर निकलते थे। इंदौर के अलावा मालवा-निमाड़ के कुछ नगरों में भी रंगपंचमी पर गेर निकाली जाती है। समय के साथ गेर में बदलाव हुए होते रहे। अब गेर में 40-50 फुट तक रंगों की बौछार करती मिसाइलें, पिचकारी, वाटर टैंकर शामिल होते है।

चित्रकूट में नानाजी की पुण्यतिथि में हुआ देश की नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय विचार

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चित्रकूट/सतना। भारत रत्न नानाजी देशमुख की 12 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान एवं महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संयोजन में दीनदयाल परिसर के विवेकानंद सभागार में नानाजी की दृष्टि में राष्ट्र निर्माण : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। जिसमें मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रदीप जोशी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक और भारत में कृषि शिक्षा के सचिव डा. त्रिलोचन महापात्रा के साथ प्रदेश के अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों सहित मध्य प्रदेश से बाहर के 12 राज्यों के कुलपतियों ने उद्घाटन सत्र में सहभागिता की। हाईब्रिड मोड़ में प्रारंभ इस संगोष्ठी में प्रख्यात चिंतक एबीएम राजू, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं संयोजक राष्ट्रीय संगोष्ठी एनसी गौतम, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भरत मिश्रा, दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन और संगठन सचिव अभय महाजन उपस्थित रहे।

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मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि नानाजी का शैक्षिक चिंतन उनके अन्य सामाजिक आयामों के चिंतन की तरह अति विशिष्ट था, नयापन लिए हुए था। देश में जिस महत्‍वाकांक्षी दस्तावेज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारत निर्माण के लिए आवश्यक शिक्षा का सपना देखा, उसे नाना जी ने चित्रकूट में वर्ष 1991 में सोच रखा था। यह जानकार सुखद अनुभूति होती है कि नाना जी के शैक्षिक चिंतन पर आधारित नवाचार और अभिनव प्रयोग चित्रकूट के ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ प्रारंभ हुए हैं। आज मध्य प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को पूरी तत्परता और समर्पण के साथ प्रतिबद्धता पूर्वक लागू करने वाले राज्यों में सबसे आगे है। नाना जी के चिंतन के विचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समाहित हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधान प्रभावी ढंग से लागू होते हैं तो नाना का शैक्षिक चिंतन भी देश के कोने कोने में पहुंचेगा। अतः हमारे लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इसीलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के समग्र रूप में लागू किए जाने की जो चुनौतियां सम्मुख हैं उन पर विचार विमर्श कर उन्हें एक रोडमैप, एक ब्लूप्रिंट बने यही इस संगोष्ठी का प्रमुख लक्ष्य है। देशभर से विद्वान जन आ चुके हैं मुझे विश्वास है कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से बड़े-बड़े शिक्षाविदों के तमाम मंथन के बाद जो अमृत निकलेगा वह निश्चित तौर पर शिक्षा क्षेत्र में एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा। शिक्षा नीति पर दो दिवसीय इस विचार संगोष्ठी में रविवार को भी मंत्रियों और वीआइपी शामिल रहेंगे जिसमें नानाजी की पुण्यतिथि कार्यक्रम में रविवार को मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, प्रदेश के वन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री डा. कुंवर विजय शाह, प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री कमल पटेल, प्रदेश की पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग मंत्री ऊषा ठाकुर, प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार सतना पहुंचेंगे और यहां से चित्रकूट में कार्यक्रम में शामिल होंगे।

नानाजी का चिंतन सदैव समग्रता पर रहा: डा. त्रिलोचन महापात्रा

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डा. त्रिलोचन महापात्रा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज जो शिक्षा के किसी भी आयाम पर देश सोच रहा है उसे नाना जी ने तीन दशकों पहले ही क्रियान्वित करना प्रारंभ कर दिया था, यह उनकी दूरदृष्टि थी। नाना जी का चिंतन सदैव समग्रता पर रहा और इसलिए उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय की परिकल्पना की। जिसमें ग्रामीण जीवन के बहुआयामी जीवन के समस्त पक्षों को प्रधानता मिल सके।

संगोष्ठी के निष्कर्ष पूरे देश को दिशा देने वाले होंगे: प्रदीप जोशी

संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रदीप जोशी ने नानाजी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मैं विविध सेवाओं के लिए चयन के लिए देश की सर्वोच्च संस्था के प्रतिनिधि के रूप में मंच में हूं, इसलिए इस देश के युवाओं की नौकरी के प्रति आकर्षण का प्रत्यक्ष गवाह हूं। भारत जैसे देश में चाह कर भी सभी को नौकरी देना संभव नहीं है और इस बात की आवश्यकता महसूस करते हुए नाना जी ने वर्षो पूर्व शिक्षा में नौकरी के बजाय स्वावलंबी बनने पर जोर दिया था। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभी आत्मनिर्भर भारत का स्वर सबसे मुखर है मुझे विश्वास है कि संगोष्ठी के निष्कर्ष पूरे देश को दिशा देने वाले होंगे।