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इन राशियों के 31 मार्च से शुरू होंगे अच्छे दिन

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शुक्र ग्रह को वैवाहिक सुख, प्रसिद्धि, कला, सौंदर्य और प्रतिभा का प्रतीक माना जाता है। शुक्र के राशि परिवर्तन से सभी राशियों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जिन लोगों के जन्म कुंडली में शुक्र मजबूत होता है। उनके जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र में सभी ग्रहों का गोचर महत्वपूर्ण है। शुक्र के गोचर का विशेष महत्व है। मार्च के अंतिम दिन यानी 31 मार्च 2022, गुरुवार को सुबह 08.54 बजे शुक्र कुंभ राशि में गोचर करेंगे। शुक्र इस राशि में 26 अप्रैल तक रहेगा।

इन उपायों से शुक्र को करें मजबूत

1. सफेद रंग के कपड़ों का इस्तेमाल ज्यादा करें। खासतौर पर सोमवार को सफेद वस्त्र जरूर पहनें।

2. शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार का व्रत रखें। मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाएं।

3. शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला से ऊं द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः मंत्र का जाप करें।

4. शुक्रवार को जरूरतमंदों को चावल, दूध, शक्कर, दूध की मिठाई या सफेद कपड़े दान करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है।

5. हाथ में चांदी का कंगन या गले में स्फटिक की माला पहनने से जन्म कुंडली में शुक्र मजबूत होता है।

शुक्र के गोचर से किन राशिवालों को फायदा होगा-

मेष

शुक्र के राशि परिवर्तन से मेष राशिवालों को अच्छे परिणाम मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। नौकरीपेशा जातकों के लिए कोई विशेष कार्य सफलता दिला सकता है। करियर में अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। कार्यस्थल में बहुत प्रशंसा मिलेगी। विदेशी संपर्क वाले लोगों को अचानक लाभ मिलेगा। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है।

वृषभ

ग्रह का शुभ प्रभाव वृषभ राशि के जातकों के लिए शुभ रहेगा। पुराने निवेश से बेहतर पैसा मिलेगा। सरकारी कर्मचारियों को पुरस्कार भी प्राप्त होने की संभावना है। प्रेम संबंधों के लिए अच्छा समय रहेगा। नौकरीपेशा अपने अधिकारियों को प्रसन्न करने में कामयाब रहेंगे। कार्यक्षेत्र में आपके कार्य की सराहना होगी।

तुला

तुला राशिवालों के लिए आर्थिक और व्यापारिक रूप से लाभदायक यात्राएं संभव है। निजी जीवन में अच्छे परिणाम आने की संभावना बनी रहेगी। व्यापारी अच्छा मुनफा कमाएंगे। नियमित काम से हटकर कुछ करने की कोशिश करेंगे। हर तरफ से सफलता प्राप्त करेंगे। आप जीवन साथी के साथ अच्छा समय बीताएंगे।

धनु

ग्रह के प्रभाव से धनु राशि के जातकों में शुभ स्थितियां पैदा होंगी। इस दौरान धन कमाने में सफल रहेंगे। अगर कोई मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। तो फैसला आपके पक्ष में आने की संभावना है। नए अधिकारी और उत्तरदायित्व आ सकते हैं, जो जीवन शैली में सुधार करेंगे। मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। आपके व्यापार का विस्तार हो सकता है।

जापान भारत में करेगा 3.2 लाख करोड़ का निवेश

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जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा शनिवार को भारत के दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्‍ली पहुंचे हैं। केंद्रीय मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने उनकी आगवानी की। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भारत पहुंचने के बाद वो सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे हैं। इस दौरान वो 14वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने प्रेस को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि प्रगति, समृद्धि और साझेदारी भारत-जापान संबंधों के आधार पर हैं। हम भारत में जापानी कंपनियों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वन टीम वन प्रोजेक्ट पर काम

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘भारत-जापान आर्थिक साझेदारी के बीच आर्थिक साझेदारी में प्रगति हुई है। जापान भारत में सबसे बड़े निवेशकों में से एक है।’ भारत-जापान मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर ‘वन टीम-वन प्रोजेक्ट’ के रूप में काम कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने का निर्णय

उन्होंने कहा क कि हमारी चर्चा ने हमारे आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया। हमने विपक्षीय मुद्दों के अलावा कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया। हमने यूनाइटेड नेशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपना समन्वय बढ़ाने का निर्णय लिया।

जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने कहा

उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया कई घटनाओं के कारण हिल गई है। भारत और जापान के बीच साझेदारी होना बहुत जरूरी है। हमने अपने विचार व्यक्त किए। यूक्रेन में रूस के आक्रमण के बारे में बात की। हमें अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है। किशिदा ने कहा, ‘दोनों देशों को खुले और मुक्त हिंद-प्रशांत के लिए प्रयास बढ़ाने चाहिए।’ जापान, भारत के साथ, युद्ध को समाप्त करने की कोशिश करता रहेगा। यूक्रेन और उसके पड़ोसी देशों को सहायता प्रदान करता रहेगा।

भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर आशीष झा को व्हाइट हाउस का कोविड को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया

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अमेरिकी भारतीय डॉ. आशीष झा अगले महीने राष्ट्रपति जो बाइडेन के कोविड-19 रिस्पॉन्स को-ऑर्डिनेटर के रूप में कार्यभार संभालेंगे। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने गुरुवार को कोविड-19 को-ऑर्डिनेटर के रूप में भारतीय-अमेरिकी डॉ. आशीष झा के नाम की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे समय में जब हम एक और महामारी की तरफ बढ़ रहे हैं, इसको रोकने की रणनीति बनाने के लिए डॉ आशीष झा सबसे सही व्यक्ति हैं। व्हाइट हाउस ने बताया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन के कोविड-19 को-ऑर्डिनेटर जेफ जेंट्स और उनकी डिप्टी नताली क्विलियन अगले महीने एडमिनिस्ट्रेशन छोड़ रहे हैं। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी भारतीय-अमेरिकी सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आशीष झा को दी गई है।

राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डॉ. आशीष झा की प्रशंसा करते हुए कहा, “डॉ. झा अमेरिका में अग्रणी सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों में से एक हैं। वे अपनी बुद्धिमता और शांत सार्वजनिक उपस्थिति से कई अमेरिकियों के लिए एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं.” राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा, “जैसा कि हम महामारी में एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। मेरी राष्ट्रीय कोविड-19 पर तैयार योजना पर अमल कराना और कोविड से जोखिम का प्रबंधन करना है और डॉ. झा इस काम के लिए एकदम सही व्यक्ति हैं।” उन्होंने कहा, “मैं जेफ और डॉ. झा दोनों की सराहना करता हूं कि उन्होंने एक सहज संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम किया। मैं आने वाले महीनों में निरंतर प्रगति की आशा करता हूं।”

डॉ. आशीष झा ब्राउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन हैं। 51 वर्षीय झा ने प्रबंधन सलाहकार और राष्ट्रपति बराक ओबामा के पूर्व शीर्ष आर्थिक सलाहकार जेफ जेंट्स की जगह ली। अमेरिका में कोविड महामारी के फैलने के कुछ ही हफ्ते पहले यानी फरवरी 2020 में इन्हें स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ का नेतृत्व सौंपा गया था। फिर उन्होंने सितंबर 2020 में डीन के रूप में काम संभाला।

डॉ. आशीष झा का जन्म 1970 में बिहार के पुरसौलिया में हुआ था। इसके बाद वे 1979 में कनाडा और फिर 1983 में संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। 1992 में कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और 1997 में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एम.डी. प्राप्त करने के बाद, उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में आंतरिक चिकित्सा में भी प्रशिक्षण लिया है। इन्होंने हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट का नेतृत्व संभालने के बाद विश्वविद्यालय का रुख किया और हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में छात्रों को पढ़ाया।

DRDO ने सिर्फ 45 दिनों में खड़ी कर दी 7 मंजिला इमारत

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने कमाल कर दिया है। संगठन ने रिकॉर्ड 45 दिनों में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए एक बहुमंजिला इमारत का निर्माण किया है। 7 मंजिला बिल्डिंग एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए लड़ाकू विमान और उड़ान नियंत्रण प्रणाली (FCS) के लिए एवियोनिक्स विकसित करने की सुविधाओं से लैस है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इस इमारत का उद्घाटन किया।

इस तकनीक का किया इस्तेमाल

भारत अपनी वायु शक्ति क्षमता को बढ़ाने के लिए पांचवीं पीढ़ी के मध्यम लड़ाकू जेट को विकसित करने महत्वाकांक्षी एमसीए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। डीआरडीओ भवन 1.3 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे इन-हाउस तकनीक का इस्तेमाल करके विकसित किया गया है।

इतनी है परियोजना की लागत

एक अधिकारी ने पीटीआई समाचार एजेंसी को बताया कि डीआरडीओ ने एडीई बेंगलुरु में पारंपरिक, प्री-इंजीनियर्ड और प्रीकास्ट मेथोडोलोग्य से युक्त हाइब्रिड तकनीक के साथ फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के लिए एक बहुमंजिला इमारत का निर्माण पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना की लागत करीब 15,000 करोड़ रुपए आंकी गई है।

1 फरवरी को शुरु हुआ निर्माण

प्रोजेक्ट की आधारशिला 22 नवंबर 2021 को रखी गई थी। वास्तविक निर्माण 1 फरवरी को शुरू हुआ था। परियोजना में शामिल अधिकारी ने दावा किया यह हाइब्रिड निर्माण तकनीक के साथ एक स्थायी सात मंजिला इमारत को पूरा करने का एक अनूठा रिकॉर्ड है।

आईआईटी रुड़की और मद्रास ने किया सहयोग

हाइब्रिड कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी में स्ट्रक्चरल फ्रेम के कॉलम और बीम एलिमेंट्स स्टील प्लेट्स से बनाते जाते हैं। बिल्डिंग में मानक राष्ट्रीय भवन कोड के अनुसार एयर कंडीशनिंग, इलेक्ट्रिकल और अग्नि सुरक्षा प्रणालियां हैं। अधिकारी ने कहा कि आईआईटी मद्रास और आईआईटी रुड़की ने डिजाइन की जांच और तकनीकी में सहायता प्रदान की है।

जबलपुर में 10 रुपये दो और पता कर लो मावा शुद्ध है या मिलवटी

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जबलपुर। मिलावट से मुक्ति अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा अमले की ओर से नए-नए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शहर की खोवा मंडी में विशेष जांच अभियान चलाया। इस दौरान उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई खाद्य सामग्रियों का भी मात्र 10 रुपये के मामूली शुल्क पर परीक्षण किया गया।

ऐसे में स्वाभाविक रूप से खोवा (मावा) का क्रय-विक्रय ज्यादा होता है। उत्पादन पर्याप्त नहीं होने और मुनाफाखोरी की चक्कर में व्यापारी दूषित और मिलावटी मावा ग्राहकों को थमा देते हैं, जिससे बीमारियों के संक्रमण का खतरा रहता है। इसी के चलते खोवा मंडी में खाद्य सुरक्षा अमले की चलित प्रयोगशाला ने लोगों द्वारा खरीदे गए मावे का भी वैज्ञानकि तरीके से परीक्षण किया। इसके लिए ग्राहकों से 10 रुपये शुल्क लिया गया और उनके खरीदे गए मावे में से सैम्पल लेकर मौके पर ही उसका लैबोरेटरी लेस्ट किया गया।

चंद मिनटों में ही उनको रिपोर्ट भी दे दी गई कि उनके द्वारा लिया गया मावा कैसा है। खोवा मंडी स्थित 17 दुकानों से कुल 37 सैंपल की जांच की गई। उपभोक्ताओं से दस रुपये का शुल्क प्राप्त कर उनके द्वारा क्रय किए गए मावे की जांच मौके पर की गई और जांच रिपोर्ट मौके पर ही दी गई। इस दौरान 13 उपभोक्ताओं ने 20 नमूनों की जांच कराई।
प्रयास एक, फायदे दो: खाद्य सुरक्षा अमले के इस प्रयास से दो तरह के फायदे हुए पहला तो ग्राहकों को बहुत कम खर्च पर पता चल गया कि उनके द्वारा लिया गया मावा शुद्ध है या मिलावटी। इसी तरह से दुकानदारों को संदेश मिल गया कि वो अगर मिलावटी सामान बेचेंगे तो इसकी पोल ग्राहक 10 रुपये देकर खोल देगा। इसी तरह से समाज में अन्य लोगों को भी यह पता चल जाएगा कि अगर वो चाहें तो खाद्य सुरक्षा अमले से संपर्क करके संदिग्ध खाद्य सामग्रियों की जांच करा सकते हैं।

G-23 नेताओं के निशाने पर राहुल गांधी – प्रियंका वाड्रा

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पांच राज्यों की हार को लेकर कांग्रेस में बढ़ रहा अंदरूनी असंतोष अब गांधी परिवार के नेतृत्व के खिलाफ खुले विद्रोह के रूप में सामने आ गया है। गुलाम नबी आजाद के आवास पर बुधवार को हुई असंतुष्ट जी-23 नेताओं की बैठक में प्रस्ताव पारित कर साफ कहा गया कि कांग्रेस को मौजूदा चुनौतियों से बाहर निकालने के लिए सामूहिक नेतृत्व का माडल ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने शीर्ष से लेकर सभी स्तरों तक सामूहिक व समावेशी नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया की जोरदार पैरोकारी की। इस बयान से असंतुष्ट खेमे के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, जी-23 के इस रुख से सोनिया गांधी को अवगत करा दिया गया है। समझा जाता है कि गुलाम नबी आजाद ने खुद इस संबंध में सोनिया गांधी को बैठक के दौरान ही फोन किया। संभावना जताई जा रही है कि आजाद गुरुवार को सोनिया से मुलाकात भी कर सकते हैं।

इस बैठक में कांग्रेस की पांच राज्यों में हार के कारणों की पड़ताल और लगातार पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं के पलायन पर चर्चा करते हुए नेताओं ने एक सुर से कहा कि नेतृत्व की मौजूदा कार्यशैली की खामियों के चलते ही पार्टी की यह दुर्दशा हो गई है। पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिदर सिंह को बदलने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यसमिति से चर्चा के बाद ही इतने अहम फैसले लिए जाने चाहिए थे। इससे साफ है कि उनका सीधा निशाना राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर था। इसी तरह एक असंतुष्ट नेता ने उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने के बड़े फैसले पर सवाल उठाया।

पार्टी की मौजूदा हालत के लिए नेतृत्व की खामियों की चर्चा करते हुए कहा गया कि राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाकर संकट से उबरने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी। पार्टी को सामूहिक नेतृत्व के रास्ते पर ही चलना होगा अन्यथा कांग्रेस के पास आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले कुछ भी नहीं बचेगा। गुजरात और हिमाचल प्रदेश में इस साल चुनाव होने हैं, लेकिन मौजूदा नेतृत्व जीत दिलाने में सक्षम नजर नहीं आ रहा। अगर पार्टी इन दोनों राज्यों में भी हार गई तो इस बात की उम्मीद कम ही रहेगी कि 2023 में कांग्रेस छत्तीसगढ़ और राजस्थान की अपनी सरकारें बचा पाएगी। नेताओं का कहना था कि ऐसा हुआ तो 2024 के लिए कांग्रेस के पास कुछ नहीं रहेगा और इस हालात को टालने के लिए सामूहिक नेतृत्व के माडल पर ही चलना पड़ेगा।

असंतुष्ट नेताओं ने कार्यसमिति के मौजूदा स्वरूप पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि अहम नीतिगत मसलों पर चर्चा के लिए 23 सदस्यीय कार्यसमिति की बैठक होनी चाहिए, लेकिन हाईकमान अपने समर्थकों की भीड़ जुटाने के लिए 60-65 लोगों को बैठक में बुला लेता है। इनमें विशेष आमंत्रित सदस्यों से लेकर स्थायी आमंत्रित सदस्य तक शामिल होते हैं। असंतुष्टों का कहना था कि यह परिपाटी बंद होनी चाहिए।

दिलचस्प यह भी रहा कि बैठक में शामिल होने से कुछ घंटे पहले ही शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा, “मैंने अपनी गलतियों से बहुत कुछ सीखा है और इसलिए कुछ और गलतियां करने की सोच रहा हूं।” थरूर के इस ट्वीट के गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बता दें, हाल ही में उन्होंने पीएम मोदी की बातों में अटल बिहारी वाजपेयी की झलक नजर आने की बात कही थी।

‘द कश्मीर फाइल्स’ देखकर MP के मुख्यमंत्री शिवराज बोले- सच्चाई सभी को देखनी चाहिए

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भोपाल।  हर कोई शांत था। हर कोई नि:शब्द था। यहां जिनके भी चेहरे पर नजर पड़ती, लाल हो चुकी आंसुओं से भरी आंखें दिखतीं।जिनसे भी बात करने की कोशिश होती, उनका गला रौंधा हुआ-सा महसूस होता। कोई जेब से रूमाल निकाल आंसू पोंछता, तो कोई साड़ी के पल्लू से चेहरा ठीक करता। यह भावुक कर देने वाली नजारा था ड्राइव इन सिनेमा का। जहां ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने के लिए राजधानी के कई गणमान्य नागरिक पहुंचे थे।

कश्मीर में पंडितों पर हुए अत्याचार के दर्द को बयां करती फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखने वालों की सूची में बुधवार को कुछ और नाम जुड़ गए। इनमें सबसे प्रमुख नाम था मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का। इन्होंने लेक व्यू भोपाल स्थित ड्राइव- इन-सिनेमा में रात आठ बजे परिवार के साथ फिल्म देखी। उनके साथ मंत्री, विधायक और भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी भी फिल्म देखने पहुंचे।

फिल्म के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि सच्चाई सबको देखना चाहिए। जो नहीं देख रहे वो जान-बुझकर आंखों पर पट्टी बांधना चाहते हैं। जो देश ने भुगता है, हमारे बेटे-बेटियों ने भुगता है, उसे जानना जरूरी है। ये हम सब का फर्ज है। मुझे यह कहते हुए गर्व है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धारा 370 समाप्त हुई है। अन्य बदलाव कश्मीर में आ रहे हैं। आशा और विश्वास जगा है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूएस संसद को किया संबोधित

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रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में एक तरफ रुसी राष्ट्रपति पुतिन ने हमला तेज कर दिया है, तो दूसरी तरफ यूक्रेनी राष्ट्रपति दुनिया भर के देशों से मदद मांग रहे हैं। अमेरिका में यूक्रेनी राष्‍ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) को पूरा नैतिक समर्थन मिल रहा है। यूक्रेनी राष्‍ट्रपति जेलेन्स्की ने वीडियो कॉल के जरिए अमेरिकी संसद (US Congress) को संबोधित किया और मदद मांगी। अमेरिकी संसद भवन परिसर में सीधे प्रसारण वाले अपने संबोधन में जेलेंस्की ने पर्ल हार्बर और 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों का बुधवार को जिक्र किया और कहा कि अमेरिका को रूसी सांसदों पर अवश्य ही प्रतिबंध लगा देना चाहिए और रूस से आयात रोक देना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपने देश में युद्ध से हुई तबाही और विनाश का एक मार्मिक वीडियो भी सांसदों को दिखाया। अमेरिकी कांग्रेस को संबोधन के दौरान अमेरिकी सांसदों ने शुरुआत और आखिर में उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया।

यूक्रेनी राष्‍ट्रपति ने कहा कि अमेरिका को रूसी सांसदों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए और रूस से आयात रोक देना चाहिए। जेलेंस्की ने यूक्रेन में रूसी आक्रमण में मरने वाले लोगों की संख्या को दिखाने के लिए ग्राफिक वीडियो का उपयोग किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के बचाने के लिए सबसे पहले उनके देश को उड़ान वर्जित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए, ताकि रुसी विमान हवाई हमले ना कर सकें।

यूक्रेनी राष्‍ट्रपति ने कहा कि रूस के साथ सभी व्यापार बंद होना चाहिए, ताकि वह हमारे बच्चों की हत्या को प्रायोजित न कर सके। उन्होंने दुनिया भर में यूक्रेनियन से अपील करते हुए कहा कि आप राजनेताओं से संपर्क करें, पत्रकारों से बात करें और उनसे रूसी बाजार छोड़ने का दबाव डालें, ताकि हमारे खून के लिए उनके डॉलर और यूरो का भुगतान न किया जाए।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई में अमेरिकी संसद से और अधिक मदद की अपील करते हुए कहा कि मैं आपसे और अधिक (मदद करने) की अपील करता हूं। उन्होंने रूसियों पर और अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाने की अपील करते हुए कहा कि आय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण शांति है।

कांग्रेस में बगावत के सुर तेज

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विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस में बगावत के सुर तेज हो गये हैं। कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस में बदलाव का मन बना लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के दिल्ली स्थित आवास पर आज एक बार फिर ‘जी 23’ समूह के नेताओं की बैठक हो रही है। इस बैठक में कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, अखिलेश प्रसाद सिंह, पृथ्वीराज चौहान, मणिशंकर अय्यर, पी जे कुरियन, संदीप दीक्षित, परिणीत कौर, शशि थरूर, राज बब्बर, राजिंदर कौर भट्टल, कुलदीप शर्मा, भूपेंद्र हुड्डा और कुलदीप शर्मा समेत कई नेता मौजूद हैं। पहले यह बैठक कपिल सिब्बल के घर पर होनी थी लेकिन सिब्बल की तरफ से खुल कर गांधी परिवार के खिलाफ बयान देने के बाद बैठक की जगह बदल दी गई। आजाद के घर नेताओं के लिए डिनर का इंतजाम भी किया गया है।

क्या है मुद्दा?

पांच राज्‍यों के चुनावों में कांग्रेस के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद G-23 या पार्टी के असंतुष्‍ट नेताओं का ग्रुप, संगठनात्‍मक बदलाव की मांग को लेकर सक्रिय हो गया है। इसी को लेकर G-23 के नेताओं की आज गुलाम नबी आजाद के घर पर बैठक हो रही है। इस गुट के नेताओं ने पांच राज्यों, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तरांचल, गोवा और मणिपुर में परिणाम के दिन आपस में मुलाकात की थी। कपिल सिब्बल ने तो खुले आम गांधी परिवार पर हमला बोल दिया है। जी 23 ग्रुप के प्रमुख सदस्य कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू में कहा कि गांधी परिवार को कांग्रेस नेतृत्व छोड़ देना चाहिए और किसी अन्य नेता को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। इस बैठक का मकसद भी एक वैकल्पिक नेतृत्व पर सहमति पैदा करना है।

बैठक पर कांग्रेस की भी नजर

जी 23 नेताओं की इस बैठक को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद भी ‘जी 23’ समूह के नेता बार-बार बैठकें करके पार्टी को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरी कांग्रेस में कोई भी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को कमजोर नहीं कर सकता और पार्टी के सभी लोग उनके साथ हैं।’

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड को 4 विकेट से हराया, 112 गेंदें शेष रहते जीता मैच

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भारत और इंग्लैंड के बीच आईसीसी वुमेंस वर्ल्ड कप 2022 का 15वां मुकाबला बे ओवल माउंट माउंगानुई में खेला गया। इस मैच में इंग्लैंड ने टीम इंडिया को 4 विकेट से धूल चटाते हुए टूर्नामेंट की पहली जीत दर्ज की। गत चैंपियन की इस जीत में कप्तान नाइट ने 53 रनों की नाबाद पारी खेली। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लिश टीम के सामने 135 रनों का लक्ष्य रखा था जिसे उन्होंने 112 गेंदें शेष रहते हासिल कर लिया। बात भारतीय पारी की करें तो टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। पहले 10 ओवर में भारत ने यस्तिका भाटिया, मिताली राज और दीप्ति शर्मा के रूप में तीन विकेट खो दिए थे। श्रबसोल ने यहां दो विकेट लिए हैं, वहीं दीप्ति शर्मा रन आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने स्मृति मंधाना के साथ 33 रनों की साझेदारी कर कुछ देर साथ जरूर दिया, मग डीन ने उन्हें 14 के निजी स्कोर पर पवेलियन का रास्ता दिखाया। इसी ओवर में स्नेह राणा को भी डीन ने अपना शिकार बनाकर भारत को 5वां झटका दिया। टीम इंडिया की उम्मीदें तब टूटी जब 22वें ओवर में एक्लेस्टोन ने 35 के निजी स्कोर पर मंधाना को LBW आउट किया। मंधाना ने रिव्यू जरूर लिया मगर थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट करार दिया। मंधाना के बाद भारत को 7वां झटका पूजा वास्त्राकर के रूप में लगा वह 6 के निजी स्कोर पर पवेलियन लौटी। इसके बाद आखिरी तीन विकेट भी भारत ने जल्द खो दिए।