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मध्‍य प्रदेश में नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष की आयु 21 वर्ष करने के अध्यादेश का प्रारूप विधि विभाग को भेजा

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नगर पालिका और नगर परिषद का अध्यक्ष 21 वर्ष की आयु का पार्षद भी बन सकेगा। इसके लिए सरकार द्वारा लाए जा रहे नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश के प्रारूप को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह के अनुमोदन के बाद शुक्रवार को विधि एवं विधायी विभाग भेज दिया। विभाग विधिक पक्षों का अध्ययन करने के बाद इसे लौटाएगा, जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से राज्यपाल मंगुभाई पटेल की अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह अध्यादेश की अधिसूचना जारी हो जाएगी।

राज्य निर्वाचन आयोग 16 नगर निगम, 76 नगर पालिका और 255 नगर परिषदों के चुनाव दो चरण में कराया जा रहा है। निर्वाचन की प्रक्रिया 18 जुलाई को पूरी हो जाएगी। इसके बाद वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पार्षदों में से नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव किया जाएगा। इसके लिए अभी पात्रता आयु 25 वर्ष या उससे अधिक निर्धारित है, जबकि पार्षद पद के लिए पात्रता आयु 21 या उससे अधिक तय है।

कांग्रेस सरकार ने 2019 में नगर पालिका विधि में संशोधन करके अध्यक्ष का चुनाव जनता की जगह पार्षदों के माध्यम से कराए जाने की व्यवस्था लागू कर दी थी लेकिन अध्यक्ष की पात्रता आयु में संशोधन नहीं हो पाया। तब से ही यह प्रविधान प्रभावी है। अब सरकार ने तय किया है कि जो पात्रता आयु पार्षद के लिए निर्धारित है, वही अध्यक्ष के लिए भी रहेगी। इसके लिए अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विधानसभा का मानूसन सत्र 25 जुलाई है और 18 जुलाई को नगरीय निकायों के निर्वाचन की प्रक्रिया हो जाएगी, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है। विभागीय मंत्री के अनुमोदन मिलने के बाद अध्यादेश के प्रारूप को विधि एवं विधायी विभाग विधिक पहलूओं का अध्ययन करने के लिए भेजा गया है। वहां से लौटने पर इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुमोदन से राज्यपाल को अनुमति के लिए भेजा जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 28 जून को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक में भी अध्यादेश का विचार के लिए रखा जा सकता है।

भितरघात करने वाले कांग्रेस प्रवक्ता ब्रजेश पांडे निष्कासित

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विपक्षी पार्टी के साथ मिलकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे प्रदेश प्रवक्ता ब्रजेश पांडे को छह साल के लिए सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। पार्टी को लगातार पांडे के विरुद्ध अनुशासनहीनता की शिकायत प्राप्त हो रही थी। इस आधार पर यह कदम उठाया गया है।

प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि चाहे कोई भी हो, पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पांडे विपक्षी पार्टी के साथ तालमेल बनाकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे थे। इस आधार पर उन्हें पार्टी की सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर इसकी सूचना जिला शहर कांग्रेस कमेटी रीवा को भी दे दी है।

पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अजय सिंह यादव ने भाजपा पर आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों को नगरीय निकाय चुनाव में प्रत्याश्ाी बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारवार्ता में कहा कि इंदौर, सागर, टीकमगढ़ सहित अन्य नगरीय निकायों में आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों को टिकट दिया है। जिन्होंने इन्हें टिकट देने की अनुशंसा की, उनके नाम अब तक भाजपा ने सार्वजनिक नहीं किए हैं। इससे साफ होता है कि भाजपा कुछ व्यक्तियों का टिकट काटकर जनता को भ्रमित करना चाहती है पर मतदाता समझदार है और चुनाव के माध्यम से अपनी भावना प्रकट करेगा।

उद्धव ठाकरे की शरद पवार के मीटिंग खत्म, कल बुलाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

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हाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साफ कहा है कि वो बागियों के सामने हथियार नहीं डालेंगे और आर-पार की लड़ाई को भी तैयार हैं। सरकार बचाने की कोशिशों को लेकर उनकी शरद पवार के साथ बैठक हुई। इस बैठक में एनसीपी चीफ शरद पवार, डिप्टी सीएम अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल और कैबिनेट मंत्री जयंत पाटिल मातोश्री पहुंचे। करीब 2 घंटे तक इस बैठक में सरकार बचाने की संभावनाओं पर गहन विमर्श हुआ। कल यानी शनिवार को शिवसेना ने कल दोपहर 1 बजे मुंबई के सेना भवन में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। ।

उधर, तमाम धमकियों और भावनात्मक अपील के बावजूद बागी विधायकों की संख्या बढ़ती जा रही है। आज महाराष्ट्र शिवसेना के एक और विधायक दिलीप लांडे, गुवाहाटी होटल पहुंचे और बागी विधायकों के साथ शामिल हो गये। इनके अलावा राजेश क्षीरसागर के भी गुवाहाटी पहुंचने की खबर है। इन बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे का दावा है कि अब उन्हें शिवसेना के 38 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। आपको बता दें कि दल-बदल कानून से बचने से के लिए उन्हें 37 विधायकों की जरुरत है। ऐसे में एक और विधायक के जुड़ने से उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है।

महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष ने विधायक अजय चौधरी को राज्य विधानसभा में शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में नियुक्त करने के शिवसेना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस संबंध में डिप्टी स्पीकर कार्यालय की ओर से शिवसेना कार्यालय को पत्र भेजा गया है।

शिवसेना चीफ और सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा है कि वो पार्टी के अध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हैं, बशर्ते बागी विधायक वापस लौटें और खुद उनसे बात करें। वैसे उन्होंने ये भी कहा कि वो हथियार नहीं डालेंगे और अगर बागी विधायक वापस नहीं लौटे, तो अब आर-पार की लड़ाई होगी।

बागी विधायकों की डिप्टी स्पीकर को हटाने की तैयारी, अयोग्य घोषित करने के अधिकार को चुनौती

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एक तरफ शिवसेना बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ बागी विधायक डिप्टी स्पीकर को ही हटाने की मांग कर रहे हैं। गुवाहाटी में मौजूद शिंदे गुट के दो निर्दलीय विधायक महेश बाल्दी और विनोद अग्रवाल ने महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने के लिए नोटिस भेजा है। आपको बता दें कि डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल एनसीपी (NCP) के नेता हैं। इन्होंने डिप्टी स्पीकर द्वारा शिवसेना के एमएलए अजय चौधरी को सदन का नेता नियुक्त किए जाने का भी विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक शिवसेना के बागी विधायकों की बैठक में उन्होंने डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल को हटाने का प्रस्ताव लेने की योजना बनाई है। बागी गुट के 46 विधायकों के हस्ताक्षर से प्रस्ताव तैयार करने के लिए काम जारी है।

शिवसेना की चाल का जवाब

दरअसल शिवसेना ने बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डिप्टी स्पीकर को पत्र लिखा, जिसमें 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की। शिवसेना ने कल 12 और आज 4 और लोगों के नाम डिप्टी स्पीकर को भेजे। डिप्टी स्पीकर को अब इन 12 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग पर फैसला लेना है। इसी की प्रतिक्रिया में दो निर्दलीय विधायकों ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेज दिया।

नोटिस से क्या होगा फायदा?

नोटिस भेजनेवाले दोनों विधायकों ने अरुणाचल प्रदेश के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए डिप्टी स्पीकर से अयोग्यता याचिका पर फैसला नहीं करने का आग्रह किया है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला नहीं कर सकते हैं, यदि उनके खिलाफ “अविश्वास” प्रस्ताव लंबित हो। विधायकों में से एक महेश बाल्दी ने जिरवाल से कहा कि वह किसी को भी अयोग्य घोषित करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वे खुद अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विधायक अयोग्य घोषित किए गए तो हम अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

क्या बिन ठाकरे होगी शिवसेना? उद्धव के हाथ से सरकार ही नहीं पार्टी भी जाने का खतरा

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महाराष्ट्र में सियासी सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। जहां उद्धव ठाकरे और उनके समर्थक नेता बागी विधायकों से सामने आकर इस्तीफा मांगने की अपील कर रहे हैं। दूसरी ओर एकनाथ शिंदे का कहना है कि उद्धव के साथ वाली शिवसेना अब पुरानी पार्टी नहीं रह गई है। शिंदे ने दावा किया है कि निर्दलीय और शिवसेना के 42 से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं। यानी असली शिवसेना ही उनके साथ है। इतना ही नहीं शिंदे ने एक दिन पहले ही महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर को 34 विधायकों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी भेजी, जिसमें शिवसेना के विधायक दल के चीफ व्हिप को हटाने की बात कही गई है।

शिंदे के इस कदम को शिवसेना प्रमुख और सीएम उद्धव ठाकरे के लिए बड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, पार्टी के मुख्य व्हिप को हटाने का फैसला आमतौर पर दल के प्रमुख का ही होता है। अपने नेताओं के इतनी बड़ी संख्या में टूटने और उनके बगावती तेवर देखने के बाद उद्धव ठाकरे ने खुद मंगलवार को सीएम आवास छोड़ दिया और अपने घर मातोश्री लौट गए। उन्होंने बागी विधायकों से इस्तीफा तैयार होने की बात भी कही।

ऐसे में यह सवाल अभी भी सामने हैं कि क्या शिवसेना के दो-तिहाई विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे पार्टी पर अपना दावा ठोक सकते हैं? अगर शिवसेना टूटती है तो उसका तीर-कमान का निशान किस धड़े के पास रहेगा? इसके अलावा पार्टी टूटने पर असली शिवसेना कौन है, इसका फैसला कौन करेगा?

क्या शिवसेना पर दावा ठोक सकते हैं एकनाथ शिंदे?
एकनाथ शिंदे के साथ गुवाहाटी के होटल में शुरुआत में विधायकों की संख्या 34 थी। हालांकि, मुंबई से बुधवार और गुरुवार को कुछ और विधायक गुवाहाटी पहुंच गए। शिंदे गुट की ओर से कहा गया है कि उसके पास 40 शिवसेना के विधायकों का समर्थन है, जबकि छह से ज्यादा निर्दलीय भी उनके साथ हैं। इस धड़े ने गुवाहाटी में रुके 42 विधायकों की एक तस्वीर भी जारी की थी, जिसमें 35 शिवसेना के एमएलए शामिल थे। यानी शिंदे के पार्टी तोड़ने और दल-बदल कानून से बचने के दावे से महज दो कम। ऐसे में माना जा सकता है कि शिंदे के पास विधायकों का जरूरी समर्थन मौजूद है।

सूर्य देव ने बदला नक्षत्र, इन राशियों के शुरू हुए अच्छे दिन

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सूर्य देव ने 22 जून को नक्षत्र परिवर्तन किया है। सूर्य गोचर की तरह नक्षत्र परिवर्तन भी प्रभावित करता है। भास्कर इस समय आर्द्रा नक्षत्र में हैं। वे 6 जुलाई तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान 3 राशियों पर उनकी कृपा बरसेगी। इससे पहले 15 जून को सूर्य ने मिथुन राशि में प्रवेश किया था। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रवि जब आर्द्रा नक्षत्र में होते हैं। तब शुभ फल देते है। इस दौरान महादेव और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

मिथुन राशि

आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य मिथुन राशि वालों को लाभ देंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। प्रमोशन-इंक्रीमेंट मिलने के योग हैं। ऑफिस में मान-सम्मान बढ़ेगा। सारे काम पूरे होंगे। नए कार्य शुरू करने के लिए उत्तम समय है। मनोबल मजबूत होगा। आपको समस्या से छुटकारा मिलेगा। स्थान परिवर्तन होने की संभावना है।

कन्या राशि

सूरज का नक्षत्र परिवर्तन कन्या राशि के जातकों के लिए लाभदायक होगा। जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी-व्यापार में सफलता मिलेगी। सरकारी नौकरी पाने का सपना पूरा होगा। करीबी व्यक्ति से सहयोग प्राप्त होगा। किसी महत्वपूर्ण काम को संचालित कर पाएंगे।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य का नक्षत्र परिवर्तन खुशियां लेकर आएगा। अटके हुए काम में अब तेजी आएगी। धन और प्रतिष्ठा मिलेगी। भाग्य सूरज की तरह चमकेगा। नया वाहन खरीदने के लिए समय शुभ है। निवेश में भी मुनाफा होगा। प्रतियोगी परीक्षा में परिणाम आपके पक्ष में आएगा। पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी मिलने के योग है।

वृश्चिक राशि

करियर में बड़ी उपलब्धि मिलने के संकेत है। ऑफिस का काम घर पर कर रहे लोगों से अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। घर-बाहर प्रसन्नता का माहौल रहेगा। वैवाहिक चर्चाओं में सफलता मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में सफलता अर्जित करेंगे। मन में चल रही कोई उलझन समाप्त होगी।

उर्फी जावेद ने पहनी तार से बनी ड्रेस, दिखाया अपना बोल्ड लुक

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उर्फी जावेद हर बार अपने अतरंगी लुक से फैंस को घायल करती रहती हैं। हर बार वे अपने बेबाक अंदाज में लोगों को हैरान कर देती हैं। उर्फी अपने फैशन के साथ एक्सपेरिमेंट करना बंद नहीं करती हैं। वे अपने अनूठे फैशन सेंस के लिए लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी ही रहती हैं। एक बार फिर उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है हाल ही में उर्फी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वे तार लपेटे हुए नजर आ रही हैं। इस बार उर्फी ने तार को ही अपना आउटफिट बना लिया है। उर्फी का यह लुक सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

उर्फी का नया लुक वायरल

उर्फी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वे पहले तो वे नीले तार के साथ नजर आ रही हैं। लेकिन चंद सेकेंड में ही उन्होंने उसी तार की ड्रेस भी बना ली। अब उर्फी का यह वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही वायरल होने लगा। उर्फी ने एक बार फिर अपने बोल्ड लुक से लोगों को अपना दीवाना बना दिया है। उर्फी ने उस नीले तार से एक टॉप और स्कर्ट बनाई है। साथ ही उन्होंने अपने बालों का बन बनाया है और लाइट मेकअप किया है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट को कैप्शन देते हुए लिखा है कि ‘हां यह एक तार है। मुझे लगता है कि यह लुक बहुत ही शानदार है। और भी रंगों के तार मुझे ट्राई करना चाहिए। मेरे लिए फैशन का मतलब एक्सपेरिमेंट करना, कुछ नया बनाना है।’

कई शोज में काम कर चुकी हैं उर्फी

बिग बाॅस ओटीटी से अपनी पहचान बनाने वाली उर्फी ने कई टीवी शोज में काम भी किया है। उन्होंने ‘बड़े भैया की दुल्हनिया’ में ‘अवनि’, ‘मेरी दुर्गा’ में ‘आरती’, ‘बेपनाह’ में ‘बेला’, ‘पंच बीट सीजन 2’ में ‘मीरा’ का रोल अदा किया है। वहीं 2016-17 में उर्फी ने स्टार प्लस के ‘चंद्र नंदिनी’ में ‘छाया’ की भूमिका निभाई थी। साल 2018 में वे टेलीविजन के शो ‘सात फेरों की हेराफेरी’ में ‘कामिनी’ की भूमिका में नजर आई थीं। वहीं 2020 में वे ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में ‘शिवानी’ के रूप में नजर आई थी। बाद में वे ‘कसौटी जिंदगी की’ में ‘तनीषा’ के रोल में थी।

मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज उज्‍जैन के इस्कान मंदिर में कृष्ण भक्ति में झूमे

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जनआशीर्वाद रैली में शामिल होने आए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान बुधवार देर शाम भरतपुरी स्थित इस्कान मंदिर पहुंचे। यहां भक्तों ने नृत्य व कीर्तन करते हुए उनकी अगवानी की। कृष्ण भक्ति में आल्हादित सीएम शिवराज खुद को रोक नहीं पाए और कीर्तन करते हुए नृत्य करने लगे। मुख्यमंत्री को भावविभोर देख अन्य लोगों ने भी उनके साथ नृत्य किया।

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान उज्जैन आए थे, इस पर हमने उनके इस्कान मंदिर में भी दर्शन करने आने का आग्रह किया। जनआशीर्वाद रैली के बाद मुख्यमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रम से समय निकालकर शाम करीब 7.45 बजे इस्कान मंदिर पहुंचे। मुख्य द्वार पर भक्तों ने नृत्य व कीर्तन करते हुए उनकी अगवानी की। इसके बाद उन्हें मंदिर के भीतर ले जाया गया। जहां मुख्यमंत्री ने भगवान राधा मदन मोहन की आरती की।

इसके बाद मंदिर के ऑडिटोरियम में इस्कान प्रबंधन के प्रमुख गोपाल कृष्ण गोस्वामीजी महाराज तथा इस्कान ब्यूरो के सचिव बासु घोष प्रभुजी ने मंदिर को 14 हजार 674 वर्ग मीटर जमीन दिलवाने के लिए आभार मानते हुए स्वागत किया। इस्कान मंदिर की ओर से मुख्यमंत्री को शाल, श्रीफल के साथ इस्कान के संस्थापर्क आचार्य श्रील प्रभुपादजी की 125 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अनावरित चांदी का सिक्का तथा रामायण आर्ट बुक भेंट की गई। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, उच्च शिक्षा मंत्री डा.मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, भाजपा के महापौर प्रत्याशी मुकेश टटवाल आदि मौजूद थे।

सरफराज खान के आंखों से छलके आंसू

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सरफराज खान एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली भी उनकी तारीफ कर चुके हैं। रणजी ट्रॉफी के फाइनल में गुरुवार को मध्यप्रदेश के खिलाफ बल्लेबाज ने शतकीय पारी खेली। इस पारी को खेलने के बाद वह भावुक हो गए। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस सीजन का रणजी फाइनल 41वीं बार की चैंपियन मुंबई और 22 साल बाद फाइनल में पहुंची मध्यप्रदेश टीम के बीच खेला जा रहा है। 22 जून को शुरू हुए इस मैच में मुंबई के कप्तान पृथ्वी शॉ ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। फाइनल की पहली पारी में सरफराज ने 134 रन बनाए। उन्होंने अपनी शतकीय पारी में 243 गेंदों का सामना किया। इसमें 13 चौके और 2 छक्के शामिल हैं। मुंबई पहली पारी में 374 रन पर आल आउट हो गई।

सरफराज हुए भावुक

इस खिलाड़ी ने सीजन का चौथा शतक जड़ा। सेंचुरी लगाने के बाद सरफराज खान इमोशनल हो गए और रोने लगे। उन्होंने दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला का सिग्नेचर स्टेप कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान काफी भावुक नजर आए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

150 से ज्यादा का औसत

सरफराज फाइनल से पहले 275, 63, 48, 165, 153, 40 और 59 रन की पारी खेल चुके हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2021-22 में 8 पारियों में 900 से ज्यादा रन बना चुके हैं। उनकौ औसत 150 से ज्यादा का है।

फिल्म को लेकर ट्रोल हो रहे हैं Akshay Kumar

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बॉलीवुड के हिट-मशीन अक्षय कुमार (Akshay Kumar) अपनी अगली फिल्म ‘रक्षा बंधन’ (Raksha Bandhan) की रिलीज के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. कल यानी मंगलवार को ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था. ट्रेलर में बड़े भाई यानी अक्षय का अपनी बहनों के लिए प्यार और बलिदान दिखाया गया है. वहीं, फैंस भी ट्रेलर को काफी प्यार दे रहे हैं. हालांकि, फिल्म में खिलाड़ी कुमार के लुक की वजह से कुछ लोग उन्हें ट्रोल भी कर रहे हैं. दरअसल, लोग हर फिल्म में अक्षय के एक ही मूंछ वाले लुक को देख-देख कर परेशान हो चुके हैं. कई यूजर्स ने कहा है कि अक्षय अपने लुक के साथ एक्सपेरिमेंट्स क्यों नहीं कर रहे हैं जैसा कि वो अपनी एक्टिंग में करते हैं.

अक्षय कुमार के कई फैंस ने सोशल मीडिया पर इस बात का जिक्र किया है कि ‘रक्षा बंधन’ में अक्षय का लुक उन्हें उनकी पिछली फिल्मों जैसे ‘जॉली एलएलबी’, ‘गोल्ड’ और ‘सम्राट पृथ्वीराज’ की याद दिला रहा है. क्योंकि इस फिल्म में भी खिलाड़ी कुमार मूंछों में दिखाई दे रहे हैं. ट्रेलर पर अपना रिएक्शन देते हुए एक यूजर ने लिखा- ‘बाकी सब तो ठीक है, सेम लुक क्यू है हर मूवी में. जॉली एलएलबी, टॉयलेट एक प्रेम कथा, गोल्ड, बेल बॉटम में भी यही था’. एक और यूजर ने लिखा- ‘क्या भैया, आजकल जब लोग रियलिस्टिक लुक रखते हैं, लुक्स पर बहुत ध्यान देते हैं, तुमने फिर वही खेल कर दिया. घर में पुरानी मूंछ पड़ी थी लगा ली. भैया पैसा कमाने के चक्कर में फैंस को शर्मिंदा करते हुए शर्म नहीं आती? बिना मूंछ के भी ये रोल हो सकता था.’

लोगों का रिएक्शन देखकर एक बात तो तय है कि अक्षय अपनी नई फिल्म ‘रक्षा बंधन’ में अपने लुक से लोगों को इम्प्रेस नहीं कर पाए हैं. खैर आनंद एल राय के डायरेक्शन में बनी फिल्म का ट्रेलर कल रिलीज हुआ है जिसमें अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर लीड रोल में हैं. जैसा कि नाम से पता चलता है, फिल्म की कहानी भाई-बहन के रिश्ते पर बेस्ड है. भाई अपनी बहनों की शादी होने तक खुद की शादी करने से इंकार कर देता है. ये फिल्म इसी साल 11 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.