विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 1947 के भारत विभाजन को लेकर तत्कालीन नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश को यह याद रखना जरूरी है कि आजादी के पीछे सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि लाखों लोगों का दर्द, विस्थापन और हिंसा की भयावह त्रासदी भी छिपी थी।
नेहरू पर साधा निशाना
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विभाजन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया था। उनके मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन की स्थिति बनने के बावजूद उनके पुनर्वास और सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को अपना घर, जमीन और संपत्ति छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा।
‘आजादी के पीछे छिपा दर्द याद रखना जरूरी’
विजयवर्गीय ने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि देश की आजादी के पीछे कितना दर्द, पीड़ा और चीत्कार छिपी हुई थी। उन्होंने विभाजन के दौरान हुई हिंसा और जनहानि का जिक्र करते हुए कहा कि इस त्रासदी को इतिहास से मिटाया नहीं जाना चाहिए।
इतिहास से सबक लेने की अपील
मंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की त्रासदी से परिचित कराने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि इतिहास से सबक लेकर देश को एकता, विकास और राष्ट्रहित की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, ताकि विभाजन के दौरान पीड़ित लोगों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को याद रखा जा सके।









