संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक को लोकसभा से पारित करा लिया। विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने इसे न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने कई प्रावधानों पर सवाल उठाए।
लोकसभा में लंबी बहस के बाद विधेयक को बहुमत के आधार पर मंजूरी मिल गई। सरकार का कहना है कि संशोधन से न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। वहीं विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधेयक के कुछ प्रावधानों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई गई और व्यापक सहमति बनाने का प्रयास भी नहीं हुआ।
उधर, राज्यसभा में इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधेयक पर विस्तृत चर्चा और जवाब की मांग की। सदन में शोर-शराबे के कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई।
सरकार की ओर से कहा गया कि विधेयक पूरी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए लाया गया है और इसका उद्देश्य न्यायपालिका की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना है। वहीं विपक्ष ने सरकार से विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर पुनर्विचार करने और सभी पक्षों से व्यापक चर्चा करने की मांग दोहराई।
अब इस विधेयक पर राज्यसभा में आगे की चर्चा और मतदान पर सभी की नजरें टिकी हैं। सदन में सरकार और विपक्ष के बीच इसे लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।









