नवनीत राणा ने जेल से निकलते ही उद्धव ठाकरे को चुनौती दी

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हाल ही में जमानत पर रिहा हुई निर्दलीय सांसद नवनीत राणा एक बार फिर से उद्धव सरकार को चुनौती देने के मूड में हैं। लेकिन इस बार उनकी मुश्किलें ज्यादा बढ़ सकती हैं, क्योंकि ताजा मामला अदालत की अवमानना से जुड़ा है। सांसद नवनीत राणा ने रविवार को एक बार फिर से शिवसेना पर हमला बोलते हुआ कहा कि वो इस लड़ाई को जारी रखेंगी। इसके साथ ही उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को अपने मुकाबले चुनाव लड़ने की भी चुनौती दी। इस बयान के बाद महाराष्ट्र सरकार, राणा दंपती की जमानत को चुनौती देने और अदालत की अवमानना का केस दर्ज करने पर विचार कर रही है।

नवनीत राणा ने क्या कहा?

नवनीत राणा ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, ‘मैं उद्धव ठाकरे को चुनौती देती हूं कि यदि वे चाहें तो मेरे खिलाफ किसी भी क्षेत्र से चुनाव लड़ लें। मैं आपके खिलाफ चुनाव लड़ूंगी और दिखा दूंगी कि महिला की शक्ति क्या होती है।’ नवनीत राणा ने कहा, ‘मैं उद्धव सरकार से पूछना चाहती हूं कि आखिर मैंने क्या गलती थी, जिसकी मुझे सजा दी गई है। मैं पूछना चाहती हूं कि क्या हनुमान चालीसा पढ़ना अपराध है। यदि अपराध है तो फिर मैं 14 दिन नहीं बल्कि 14 सालों के लिए जेल जाने को तैयार हूं।

अदालत की अवमानना कैसे?

दरअसल सेशन कोर्ट ने राणा दंपती को सशर्त जमानत दी थी। इन शर्तों में से एक के बारे में अदालत ने साफ कहा था, ‘आरोपियों के समक्ष यह शर्त होगी कि वे जेल से निकलने के बाद हनुमान चालीसा विवाद को लेकर बात नहीं करेंगे।’ लेकिन नवनीत राणा ने एक बार फिर हनुमान चालीसा का मुद्दा उठाया है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार यह दलील दे सकती है कि नवनीत राणा और उनके पति ने अदालत की शर्त का उल्लंघन कर उसकी अवमानना की है। और इसलिए उनकी जमानत को रद्द कर दोबारा उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।

कैसे मिली जमानत?

राणा दंपती ने मुख्यमंत्री उद्ध ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया था। लेकिन बाद में उन्होंने ये प्लान कैंसल कर दिया। इसके बावजूद मुंबई पुलिस ने उनके घर पहुंचकर दोनों पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। इन पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया गया और बाद में राजद्रोह की धारा भी लगा दी गई। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। लेकिन 14 दिन पूरे होने से पहले ही दोनों को जमानत मिल गई।

कैसे मिली जमानत?

राणा दंपती ने मुख्यमंत्री उद्ध ठाकरे के घर के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया था। लेकिन बाद में उन्होंने ये प्लान कैंसल कर दिया। इसके बावजूद मुंबई पुलिस ने उनके घर पहुंचकर दोनों पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। इन पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया गया और बाद में राजद्रोह की धारा भी लगा दी गई। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। लेकिन 14 दिन पूरे होने से पहले ही दोनों को जमानत मिल गई।

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