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इंदौर । मध्यप्रदेश में हुए व्यापम घोटाले के मुख्य आरोपित जगदीश सिंह सागर को शनिवार को एरोड्रम पुलिस ने जिंदा कारतूस के साथ पकड़ा। आरोपित को इंदौर विमानतल से तब गिरफ्तार किया गया, जब वह इंदौर से ग्वालियर रवाना हो रहा था। इसी दौरान विमानतल पर तैनात सुरक्षा प्रहरियों ने स्कैनर से जांच की तो बैग में जिंदा कारतूस मिला।

पूछने पर अरोपित ने बहाना बनाया तो विमानतल प्रबंधन ने एरोड्रम थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस आरोपित को थाने ले आई और उस पर आर्म्स एक्ट कर तहत कार्रवाई की है। आरोपित ने बताया कि व्यापम घोटाले मामले में जेल में रहने के बाद उसकी दो बंदूकों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पाया था। इसके बाद उसने दोनों बंदूकें बेच दीं। एक कारतूस गलती से बैग में रह गया। पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद आरोपित को न्यायालय में पेश किया था। वहां से उसे जमानत पर शाम को छोड़ दिया गया।

डा. जेपी सिंह सागर को पीएमटी 2013 में सीबीआइ ने रैकेटियर के रूप में आरोपित बनाया था। भिंड के गोहद निवासी डाक्टर सागर ने 1991 में पीएमटी से ग्वालियर मेडिकल कालेज में प्रवेश लिया और 2000 में यानी नौ साल में एमबीबीएस किया था। फिर 2004 में इंदौर के एमजीएम में पीजी के लिए प्रवेश लिया, जो चार साल बाद 2008 में पूरा हुआ।

व्यापम घोटाले में इंदौर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज करने के बाद सागर को क्राइम ब्रांच ने 15 जुलाई 2013 को गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ एसटीएफ ने चार अक्टूबर 2013 में चालान पेश किया था। उसने व्यापमं ही नहीं, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से राज्य सेवा का अफसर बनवाने के लिए भी कई सौदे किए थे। इसमें 6 पदों के लिए 95 लाख रुपये का सौदा किया गया था। इसके बाद आरोपित को दो साल की जेल भी हुई थी।

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