सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी रहेगी मप्र में पंचायत चुनाव प्रक्रिया – राज्य निर्वाचन आयोग

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भोपाल । विधानसभा में गुरुवार को सत्तापक्ष और विपक्ष की सहमति से पंचायत चुनाव ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण के साथ ही कराने का संकल्प जरूर पारित हुआ है, पर राज्य निर्वाचन आयोग ने भी साफ कर दिया है कि पंचायत चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार ही कराए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को छोड़कर चुनाव प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, आयोग संकल्प को लेकर विधि वेत्ताओं से परामर्श भी लेेगा।

विधानसभा में संकल्प पारित होने के बाद पंचायत चुनाव को लेकर जनता की नजरें राज्य निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को सामान्य में परिवर्तित करके चुनाव कराए जाएं। साथ ही ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को छोड़कर शेष पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन चुनाव परिणाम एक साथ जारी किए जाएंगे।

कोर्ट के निर्देशों के तहत आयोग ने 18 दिसंबर को सरकार को पत्र लिखकर ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को सात दिन में सामान्य श्रेणी में पुन: अधिसूचित करने के लिए कहा था। यह अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही है। बुधवार देर शाम पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने आयोग को पत्र लिखकर बताया कि ओबीसी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। हम याचिका पर सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कोर्ट के निर्देश पर ही रुकेगी चुनाव प्रक्रिया

पंचायत चुनाव प्रक्रिया अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही रुकेगी। यह तभी संभव है, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार की पुनर्विचार याचिका पर त्वरित सुनवाई करे और आयोग को इस संबंध में निर्देश दे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को सीधे आदेश दिए हैं।

आयोग आरक्षित पदों के लिए तीसरे चरण में करा सकता है मतदान

पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीसरे चरण के चुनाव की प्रक्रिया 30 दिसंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी। तब तक ओबीसी के लिए आरक्षित पदों की स्थिति स्पष्ट हो जाती है तो आयोग पहले और दूसरे चरण की शेष पदों के लिए तीसरे चरण में चुनाव करा सकता है।

रोक नहीं लगती है तो खर्च होगी अधिक राशि

चुनाव पर रोक नहीं लगती है तो ओबीसी के लिए आरक्षित पदों के लिए अलग से चुनाव कराने होंगे। ऐसे में मतपत्र छपाई, कर्मचारियों के भत्ते, यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं पर दोबारा राशि खर्च होगी। साथ ही आयोग को सारे इंतजाम भी फिर से करने होंगे।

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