इंदौर में एक सप्ताह के अंदर मिले 36 कोरोना वायरस पाजिटिव मरीज

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इंदौर। इंदौर में पिछले एक सप्ताह से कोविड संक्रमितों की संख्या में इजाफा दिखाई दे रहा है। पहले जहां इक्का-दुक्का का संक्रमित मिलते थे। वहीं अब हर दिन पांच से अधिक मरीज मिल रहे हैं। पिछले छह दिनों में इंदौर में 36 नए संक्रमित मिल गए है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण जिला प्रशासन व स्वास्थ विभाग का अमला भी अलर्ट पर है। कोविड वायरस के ओमिक्रान वैरिएंट के खतरे को देखते हुए विदेश से आने वाले लोगों की जांच करवाई जा रही है। इसके साथ ही शहर में सैम्पलिंग की संख्या बढ़ाई गई है। ऐसे में शहर के चिकित्सकों का कहना है अभी संक्रमण का खतरा टला नहीं है। ऐसे में शहरवासी को अब भी कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए सर्तकता रखना जरुरी है।

सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचने वाले लोगों को सावधानी बरतने की है जरुरत
जिन लोगों को अभी तक तक टीके की दूसरी डोज नहीं लगी है, उन्हें जल्द से जल्द टीका लगवाना चाहिए। कुछ स्टडी बता रही है कि जिन लोगों को टीके लगे होंगे उन्हें कोविड के ओमिक्रान वैरिएंट से संक्रमण तो होगा लेकिन उसकी तीव्रता कम रहेगी। यदि शहर में लोग टीके लगा लेते है और मास्क पहनते है तो ओमिक्रान वेरिएंट के आने पर केस तो बढ़ेगे लेकिन संक्रमण की लहर आने की संभावना कम ही होगी। आरटीपीसीआर टेस्ट से ओमिक्राम की पहचान हो जाती है। इसके अलावा जीनोम सिक्वेसिंग के माध्यम से वेरिएंट का पता लगाया जा रहा है। जिन लोगों को अस्थमा, सीओपीडी व फाइब्रोसिस जैसी समस्यां है। उन्हें जल्द से जल्द टीका लगवाना चाहिए। इसके अलावा चिकित्सक की सलाह पर वे फ्लू का टीका भी लगवा सकते है। अभी बाजारों व सार्वजनिक स्थानों पर पहुंचने वाले लोग मास्क न पहनकर व शारीरिक दूरी का पालन न कर लापरवाही बरत रहे है। लोगों में भ्रांति है कि उन्हें टीका लग गया तो अब संक्रमण नहीं होगा। यदि कोविड का वायरस तेजी से फैला तो उसमे म्युटेड होने पर गंभीर वायरस भी आ सकता है। ऐसे में लोग यह न सोचे की खतरा अब पूरी तरह टल गया है।- डा.गौरव गुप्ता, चेस्ट रोग विशेषज्ञ
अस्थमा व बुजुर्ग मरीजों को सावधानी रखने की है जरुरत
डब्लयुएचओ ने ओमिक्रान को वैरिएंट आफ कन्सर्न घोषित किया हैं। वर्तमान में कोविड वायरस में बहुत ज्यादा म्युटेशन देखने को मिल रहे हैं। अभी तक करीब 50 से अधिक म्यूटेशन हुए है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन में अधिकांश बदलाव दिखाई दिए है जो कि चिंताजनक है। अभी तक साउथ अफ्रीका पाए गए इस वेरिएंट में देखने को मिला है कि एक मरीज से दूसरे में फैलने की इसकी तीव्रता ज्यादा है। हालांकि इसकी आक्रामकता ज्यादा नहीं है। ऐसे में अभी सर्तक रहना जरुरी है। बदलते मौसम में अस्थमा, दमा व बुजुर्ग मरीजों को परेशानी ज्यादा रहती है। शहर में धूल, धुएं के कारण वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है। ऐसे में इस तरह के मरीजों में सर्दी-खांसी की समस्यां ज्यादा होती है। लोगों को अब कोविड नियमों को पालन करना चाहिए। बाहर से आने के बाद लोग हाथ जरुर धोए। भीड़ में जाने से बचे और मास्क पहने। चेहरे को बार-बार न छुए। अभी लोग जिस तरह मास्क नहीं पह रहे है उससे लगता है वो अप्रैल-मई में कोविड के कारण जो त्राहि-त्राहि मची थी, उसे भूल गए है। वैवाहिक आयोजन में पहुंचने पर भी लोगों को सावधानी रखना चाहिए।- डा. तनय जोशी, कंसल्टेंट चेस्ट रोग विशेषज्ञ

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