देशभर में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कश्मीर से लेकर बिहार की राजधानी पटना और हरियाणा के पंचकूला तक दशहरे की रौनक देखने को मिली। विभिन्न शहरों में आयोजित रामलीला और रावण दहन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आकर्षक आतिशबाजी, सजे हुए मैदानों और भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल उत्सवमय हो गया।
दशहरा भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।
पंचकूला में सबसे ऊंचे रावण के दहन पर नजरें
हरियाणा के पंचकूला में रावण दहन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां सबसे ऊंचे रावण के पुतले के दहन को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और विजयादशमी के उत्सव का आनंद लिया। रावण दहन के दौरान आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा।
पटना के गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब
बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भी दशहरे का उत्साह देखने को मिला। यहां आयोजित दशहरा समारोह में लोगों ने रामलीला और रावण दहन का आनंद लिया। मैदान में जुटे लोगों ने भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया। आयोजन को लेकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहीं।
कश्मीर में भी दिखी दशहरे की रौनक
कश्मीर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में दशहरे के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने परंपरागत तरीके से पर्व मनाते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच विजयादशमी ने लोगों को एकता और सद्भाव का संदेश दिया।
अच्छाई की राह पर चलने का संदेश
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, अहंकार, क्रोध और अन्याय को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। देशभर में हुए आयोजनों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की राह अंततः विजय की ओर ले जाती है।









