शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है। इस वर्ष 15 अक्टूबर, गुरुवार को मां स्कंदमाता की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को सुख-शांति, सकारात्मकता और संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। मां का स्वरूप ममता, करुणा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन विधि-विधान से मां की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है। यदि आप भी जीवन में आ रही परेशानियों से मुक्ति और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, तो मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान ये पांच उपाय कर सकते हैं।
1. मां को केले का भोग लगाएं
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केला अर्पित करना शुभ माना जाता है। आप चाहें तो केले से बनी मिठाई या अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।
2. पीले फूल अर्पित करें
मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद श्रद्धापूर्वक फूल अर्पित कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
3. मां के मंत्र का जाप करें
मां स्कंदमाता की आराधना के दौरान उनके मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के समय शांत मन से इस मंत्र का उच्चारण करें।
मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
आप अपनी श्रद्धा और पूजा-पद्धति के अनुसार 11, 21 या 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। माना जाता है कि नियमित मंत्र-जाप से मन एकाग्र होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
4. मां को सफेद मिठाई या खीर अर्पित करें
मां स्कंदमाता की पूजा में सात्विक भोग का विशेष महत्व माना जाता है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार खीर, दूध से बनी मिठाई या फल अर्पित कर सकते हैं। भोग लगाने के बाद मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
5. जरूरतमंदों की सहायता करें
नवरात्रि में दान-पुण्य और सेवा को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पांचवें दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल, कपड़े या आवश्यक वस्तुएं दान कर सकते हैं। धार्मिक दृष्टि से सेवा और करुणा को देवी की आराधना से जोड़कर देखा जाता है।
मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व
मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। उन्हें चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके दो हाथों में कमल के फूल होते हैं, जबकि वे अपने पुत्र स्कंद को गोद में धारण करती हैं। उनका स्वरूप मातृत्व, प्रेम, संरक्षण और साहस का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण मिलता है। हालांकि, इन उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में अपनाएं; जीवन की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना भी जरूरी है।









