पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व विशेष माना जाता है। इस वर्ष इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को देर रात 2:07 बजे शुरू होकर 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितरों की शांति और मोक्ष की कामना की जाती है।
चार शुभ योगों का संयोग
इस बार इंदिरा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि, सिद्ध, साध्य और शुभ योग का संयोग बताया गया है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:17 बजे से रात 10:17 बजे तक रहेगा। सिद्ध योग सुबह 7:20 बजे तक और इसके बाद साध्य योग शुरू होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को पूजा और धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त रहेगा खास?
6 अक्टूबर को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 से 5:28 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सुबह 10:41 से दोपहर 12:09 बजे तक लाभ-उन्नति और दोपहर 12:09 से 1:37 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है।
पितरों के लिए श्राद्ध का समय
इंदिरा एकादशी पर उन पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा बताई जाती है, जिनका निधन एकादशी तिथि को हुआ हो। इसके लिए कुतुप मुहूर्त 11:46 बजे से 12:33 बजे, रौहिण मुहूर्त 12:33 से 1:20 बजे और अपराह्न काल 1:20 से 3:40 बजे तक बताया गया है।
कैसे करें भगवान विष्णु की पूजा?
मान्यता के अनुसार व्रती सुबह स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को पंचामृत से अभिषेक कर पीले चंदन, फूल, अक्षत और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इंदिरा एकादशी के व्रत का पुण्य पितरों को समर्पित करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।









