गणेश उत्सव के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही गणपति विसर्जन की तैयारियां तेज हो गई हैं। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने के बाद उन्हें भावपूर्ण विदाई देंगे। शहरों में गणेश पंडालों के साथ-साथ विसर्जन स्थलों पर भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा के बाद विसर्जन किया जाता है। श्रद्धालु गणपति की आरती कर उन्हें मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय भोग अर्पित करते हैं। इसके बाद परिवार एवं भक्तों के साथ गणपति की शोभायात्रा निकालकर उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।
विसर्जन से पहले श्रद्धालु भगवान गणेश से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं। इस दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से भी विसर्जन को लेकर आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इंतजाम किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए कई स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन कुंड भी तैयार किए जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे निर्धारित स्थानों पर ही गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करें और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग करें। गणेश उत्सव के समापन के साथ ही भक्त भगवान गणेश को श्रद्धा और उल्लास के साथ विदाई देने की तैयारियों में जुट गए हैं।









