Home Blog Page 256

मध्य प्रदेश के जंगलों में नव वर्ष का उत्सव, सभी टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की भीड़

0
mp_reserve
mp_reserve

उमरिया। मध्य प्रदेश में इन दिनों शीतलहर है। वर्ष का अंत होने को है और इसे उत्सव की तरह मनाने के लिए मध्य प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की बंपर बुकिंग हुई है। सभी टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की भीड़ है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सुबह 75 और शाम को 72 जिप्सी कोर के तीन गेट से प्रवेश करती हैं। यहां की यह सभी जिप्सियां जनवरी के पहले सप्ताह तक के लिए बुक हैं। कान्हा की 232 जिप्सी, पेंच टाइगर रिजर्व की 99 जिप्सी प्रतिदिन पर्यटकों को लेकर पार्क के अंदर जा रही हैं। इन सभी पार्कों में जनवरी के पहले सप्ताह तक यही स्थिति बनी रहने वाली है। स्थिति यह है कि बिना बुकिंग के आने वाले पर्यटकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई पर्यटक तो इंतजार के बावजूद बिना सफारी के भी लौट रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ होटल संचालकों ने भी पर्यटकों के लिए कई तरह के कार्यक्रम बना रखे हैं।

दिसंबर के पहले पखवाड़े में 50 हजार ने की सफारी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सहित प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व में पर्यटकों का रेला लगा हुआ है। जनवरी के पहले सप्ताह तक के लिए बुकिंग फुल चल रही है। 15 दिसंबर तक कान्हा टाइगर रिजर्व में 14327, बांधवगढ़ में 9300, पेंच में 7900, पन्नाा में 8200, सतपुड़ा में 8540, संजय में 2000 पर्यटक वन्यजीवों का दीदार करके वापस लौट चुके हैं। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या इससे ज्यादा होने की संभावना है।

बफर में भी रौनक

पर्यटकों की लगातार बढ़ती भीड़ के कारण सभी टाइगर रिजर्व के बफर में भी रौनक दुगनी हो गई है। जो पर्यटक आनलाइन बुकिंग करके नहीं आते उन्हें परमिट के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कोर का परमिट नहीं मिलने पर टाइगर रिजर्व तक पहुंच चुके पर्यटक बफर में ही सफारी करके अपने परिवार के लोगों की निराशा को दूर करते हैं। हालांकि बांधवगढ़, कान्हा, पेंच और पन्नाा में बफर का सफर भी कम रोचक नहीं है। बांधवगढ़ और कान्हा में तो बफर में भी पर्यटकों को बाघ देखने को मिल रहे हैं।

होटल में ही खुश पर्यटक

बिना बुकिंग के सफारी की उम्मीद में पहुंचने वाले पर्यटक या तो बफर का सफर कर रहे हैं या फिर होटल में ही परिवार को खुश रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कुछ होटल वालों ने उमरिया जिले के स्थानीय पर्यटन क्षेत्रों के भ्रमण की व्यवस्था भी पर्यटकों को दी है। इस व्यवस्था के तहत उमरिया जिले के घुनघुटी के जंगल में स्थित तुम्मी, मढ़ीवाह, झोझा फॉल आदी स्थानों का भ्रमण करने भी पर्यटक जा रहे हैं।

2 लाख महिलाएं प्रयागराज में मोदी की रैली में जुटेंगी

0
Prayagraj
Prayagraj

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी राज्य के दौरे की संख्या में इजाफा हुआ है।पीएम मोदी मंगलवार को प्रयागराज जाने वाले हैं। इस कार्यक्रम में दोपहर लगभग एक बजे करीब 2 लाख से अधिक महिलाएं शामिल होंगी। पीएमओ के अनुसार, महिलाओं को आवश्यक कौशल, प्रोत्साहन और संसाधन प्रदान करके, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

“महिलाओं को समर्थन देने के इस प्रयास में, प्रधानमंत्री स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के बैंक खाते में 1000 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित करेंगे, जिससे एसएचजी की लगभग 16 लाख महिला सदस्यों को लाभ होगा।”

“यह ट्रांसफर दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत किया जा रहा है। इसमें 80,000 एसएचजी प्रति एसएचजी 1.10 लाख रुपये का सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) प्राप्त कर रहे हैं और 60,000 एसएचजी प्रति एसएचजी 15000 रुपये का रिवाल्विंग फंड प्राप्त कर रहे हैं। ”

इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट-सखियों को प्रोत्साहित करेंगे। पीएम 20,000 महिलाओं के खाते में पहले महीने के वजीफे के रूप में 4000 रुपये ट्रांसफर करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 1 लाख से अधिक लाभार्थियों को कुल 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी ट्रांसफर करेंगे। पीएमओ ने कहा कि यह योजना एक बालिका को उसके जीवन के विभिन्न चरणों में सशर्त नकद हस्तांतरण प्रदान करती है। इस योजना के तहत प्रति लाभार्थी 15,000 रुपये दिए जाते हैं।

“जन्म के समय 2000 रुपये, एक साल का टीकाकरण पूरा करने पर 1000 रुपये, कक्षा- I में प्रवेश पर 2000 रुपये, कक्षा-VI में प्रवेश पर 2000 रुपये, कक्षा IX में प्रवेश पर 3000 रुपये, दसवीं या बारहवीं पास करने के बाद 5000 रुपये दिए जाते हैं।“ साथ ही बताया गया कि प्रधानमंत्री 202 पूरक पोषाहार निर्माण इकाइयों का शिलान्यास करेंगे।

उन्होंने कहा, “इन इकाइयों को स्वयं सहायता समूहों द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है और एक इकाई के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण किया जाएगा। ये इकाइयां राज्य के 600 ब्लॉक में एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत पूरक पोषण की आपूर्ति करेंगी।”

31 लाख छात्र सरकारी स्कूलों में घटे, प्याज खरीदी घोटाले में जांच जारी

0
Mantralaya
Mantralaya

भोपाल : स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि शासकीय स्कूलों में बच्चों के घटने की संख्या के पीछे चाइल्ड पापुलेशन में गिरावट एक वजह है। इसके अलावा आरटीई के अंतर्गत अशासकीय स्कूलों में निशुल्क प्रवेश, एसएसएसएमआईडी के माध्यम से किए जाने वाले डेटा शुद्धिकरण के चलते भी सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन घटा है। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार चाइल्ड वाइस ट्रेकिंग करा रही है। नव प्रवेश प्रबंधन, कक्षांतरण और शाला से बाहर बच्चों के लिए अलग-अलग माड्यूल तैयार कर छात्रवार समीक्षा की जा रही है ताकि 6 से 14 साल तक केसभी छात्रों का शाला में नामांकन तय किया जा सके।

मंत्री परमार ने ये बातें विधायक प्रवीण पाठक के सवाल के लिखित जवाब में कही। पाठक ने पूछा था कि प्रदेश में वर्ष 2010-11 में सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कितनी थी और वर्ष 2020-21 में यह संख्या कितनी है? साथ ही इन दस सालों में छात्रों के ड्रेस, किताबें और मध्यान्ह भोजन पर हुए खर्च की जानकारी भी मांगी गई थी। इसके जवाब में मंत्री परमार ने यह भी बताया कि वर्ष 2010-11 में कक्ष एक से आठ तक विद्यार्थियों की सरकारी स्कूलों में संख्या 105.30 लाख थी जो वर्ष 2020-21 में घटकर 64.3 लाख हो गई है। यानी 30.896 लाख छात्र इन सालों में सरकारी स्कूलों में घटे हैं।

उधर निशुल्क गणवेश का खर्च 2010-11 में 39911.57 लाख रुपए था जो 2020-21 में 32408.16 लाख रुपए तक पहुंच गया है। इसी तरह किताबों के वितरण में 16020.69 लाख रुपए 2010-11 में खर्च हो रहे थे जो 2020-21 में 15436.32 लाख रुपए हो गए हैं। इसी तरह मध्यान्ह भोजन पर वर्ष 2010-11 में 91603.53 लाख रुपए खर्च हुए थे जो वर्ष 2020-21 में बढ़कर 161789.46 लाख रुपए तक पहुंचा है। यानी बच्चे घटे, किताबें और गणवेश का खर्च घटा है लेकिन मध्यान्ह भोजन का खर्च बढ़ गया है।

एक अन्य सवाल विधायक विनय सक्सेना ने किया जिसमें उन्होंने 30 सितम्बर 21 तक एक साल में सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए खरीदी गई ड्रेस और खरीदी में नियमों का पालन नहीं किए जाने पर अनियमितता का सवाल उठाया। इसके लिखित जवाब में मंत्री परमार ने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन, राज्य शहरी आजीविका मिशन और महिला व बाल विकास विभाग के अंतर्गत स्व सहायता समूहों से 26662 करोड़ रुपए के एक करोड़ 16 लाख 41 हजार गणवेश खरीदे गए हैं। इस खरीदी में भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 के अंतर्गत नियम 6 बी में व्यवस्था से छूट प्रदान की गई है। खरीदी में किसी तरह की गड़बड़ी से मंत्री ने इनकार किया है।

विधायक जयवर्द्धन सिंह और अन्य ने विधानसभा के जरिये यह जानकारी मांगी थी कि वर्ष 2019-21 के बीच उद्यानिकी नर्सरियों में उत्पादित बीज की बिक्री के लिए विक्रय दर क्या तय थी। किसानों को प्याज बीज किस दर पर और किस संस्था से कब कब दिया गया। इस पर मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2021 में खरीफ मौसम के लिए प्याज बीच एनएचआरडीएफ से किसानों को 7960 रुपए प्रति किलो की दर से दिया गया। इस मामले में बगैर निविदा बुलाए की गई कार्यवाही पर जांच की जा रही है। अभी तक किसी के विरुद्ध जांच के मामले में कार्यवाही नहीं हुई है।

सड़क मंत्रालय ने IIT मद्रास के साथ मिलकर लॉन्च किया फ्री-टू-यूज नेविगेशन ऐप, रोड सेफ्टी फीचर्स से ड्राइवरों को मिलेगी मदद

0

सड़क पर लोगों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय (MoRTH) ने देश में रोड सेफ्टी टेक्नोलॉजी के लिए IIT मद्रास और डिजिटल टेक कंपनी MapmyIndia के साथ कोलैबोरेट किया है। तीनों पार्टी ने नागरिकों के लिए एक फ्री-टू-यूज़-नेविगेशन ऐप (Navigation App) लॉन्च किया है, जो सड़क पर आने वाले दुर्घटनाओं के खतरों के बारे में लोगों को अलर्ट करेगा साथ ही ये कई तरह के रोड सेफ्टी फीचर्स के साथ आता है। इससे पहले भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कई बार रोड सेफ्टी की जरूरतों पर फोकस करने की बात कही थी। ये ऐप सरकार का इसी दिशा में उठाया गया बेहतरीन कदम है। यह देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली एक्सीटेंड और मौतों को कम करने के लिए सड़क परिवहन मंत्रालय की लंबी प्लानिंग का एक हिस्सा है।

ये नेविगेशन ऐप, सर्विस ड्राइवरों को अपकमिंग एक्सीडेंट प्रोन एरिया, स्पीड ब्रेकर, शार्प कर्व्स और गड्ढों सहित दूसरे खतरों के बारे में वॉयस और विजुअल अलर्ट देता है। MapmyIndia का डेवलप किया गया ये नेविगेशन सर्विस ऐप, जिसे ‘MOVE’ कहा जाता है, ने 2020 में सरकार की आत्मानिर्भर ऐप इनोवेशन चैलेंज जीता था। इस सर्विस का इस्तेमाल नागरिकों और अथॉरिटी द्वारा एक्सीडेंट, असुरक्षित एरिया, सड़क और ट्रैफिक के मुद्दों को मैप पर रिपोर्ट और ब्रॉडकास्ट और दूसरे यूजर्स की मदद करने के लिए किया जा सकता है। इसके डेटा का विश्लेषण IIT मद्रास और MapmyIndia द्वारा किया जाएगा और फिर भविष्य में सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए सरकार को सुझाव दिये जाएंगे।

Virat Kohli के आरोपों पर Sourav Ganguly की पहली प्रतिक्रिया

0
virat_kohli_vs_sourav_gangul
virat_kohli_vs_sourav_gangul

भारतीय क्रिकेट टीम दक्षिण अफ्रीका दौरे पर रवाना हो गई है, लेकिन विराट कोहली बनाम सौरव गांगुली विवाद अभी थमा नहीं है। विराट कोहली ने बीते दो दिन पहले बीसीसीआई प्रमुख सौरव गांगुली पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया था। अब Sourav Ganguly की पहली प्रतिक्रिया भी आ गई है। दादा ने कहा है कि विराट कोहली की वनडे कप्तानी को लेकर चल रहे विवाद को बीसीसीआई डील कर लेगा। इस तरह Sourav Ganguly ने Virat Kohli के साथ विवाद पर मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया। बता दें, सौरव गांगुली ने कहा था कि जब विराट ने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया तो खुद उन्होंने क्रिकेटर से बात की थी और मनाने की कोशिश की थी। हालांकि विराट ने कहा कि सौरव गांगुली से उनकी ऐसी कोई बात नहीं हुई और उनके खिलाफ झूठ फैलाया जा रहा है।

विराट कोहली से विवाद, सौरव गांगुली ने नहीं दिया सीधा जवाब

विवाद सामने आने के बाद गुरुवार को गांगुली का सामना मीडियाकर्मियों से हुआ। दादा से जब कोहली की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पत्रकारों द्वारा परेशान किए जाने के बाद विवाद पर बोलने से इनकार कर दिया। भारत के पूर्व कप्तान ने कहा, मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। हम इससे निपटेंगे, इसे बीसीसीआई पर छोड़ दें। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकत, बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी कोहली के दावों से सहमत नहीं हैं और प्रतिक्रिया देने को लेकर अपनी रणनीति बना रहे हैं।

सौरव गांगुली से खफा है बोर्ड

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई निश्चित रूप से नाराज है लेकिन बोर्ड बहुत मुश्किल स्थिति में है। एक तरफ, अगर बोर्ड खुलकर सामने आता है और कहता है कि कोहली के दावे सही नहीं हैं, तो यह प्रशंसकों और खेल के लिए एक बुरी तस्वीर पेश करता है। वहीं अगर वे चुप रहे तो ऐसा लगेगा कि बोर्ड ने कप्तान के साथ बदसलूकी की है।

फ्रांस के रक्षा मंत्री का भारत दौरा, कहा – ‘जरूरत पड़ने पर हम भारत को और राफेल देने को तैयार’

0
modi-france
modi-france

भारत के दौरे पर आई फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ले ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की। इससे पहले उनकी भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी विस्तृत मुद्दों पर वार्ता हुई। बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका देश भारत को आवाश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त राफेल युद्धक विमान देने को तैयार है। भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ करीब 59 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए अंतर सरकारी स्तर पर समझौता किया था। पार्ले ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मैं खुश हूं कि भारतीय वायुसेना राफेल विमानों से संतुष्ट है और हमें गर्व है कि कोविड-19 महामारी के बावजूद हमने करार के तहत समय पर 36 विमानों की आपूर्ति की।’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘एक ही तरह के विमान का उपयोग करना वास्तविक परिसंपत्ति और ताकत है। मैं निश्चिंत हूं कि नई संभावनाओं की गुंजाइश है। अगर भारत की अतिरिक्त आवश्यकता व्यक्त की गयी तो हम उसका जवाब देने को तैयार हैं।’’

फ्रांसीसी रक्षामंत्री ने भारतीय नौसेना के बेड़े में दूसरे विमानवाहक पोत के शामिल करने की योजना को रेखांकित करते हुए संकेत दिया कि फ्रांस की पोत आधारित लड़ाकू जेट की आपूर्ति करने में रुचि है. उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि विमानवाहक पोत जल्द सेवा में होगा…उसके लिए विमानों की जरूरत होगी। अगर भारत फैसला करता है तो हम कोई और राफेल (संस्करण) देने को तैयार हैं।’’ गौरतलब है कि भारत के स्वदेश में निर्मित पहले विमान वाहक पोत विक्रांत को अगले साल अगस्त में भारतीय नौसना में शामिल करने की योजना है। माना जा रहा है कि फ्रांस, भारत के साथ 36 और राफेल विमानों की खरीददारी की सोच रहा है।

गैंगस्टर एक्ट का प्रारूप तैयार, अंतिम रूप देने में जुटी मध्य प्रदेश सरकार

0
crimemp
crimemp

भोपाल।। अवैध खनन, मिलावटी शराब, नकली दवाओं का व्यापार, मानव तस्करी, ड्रग्स, अवैध हथियार का निर्माण और व्यापार, जैसे संगठित अपराधों पर सख्ती के साथ अंकुश लगाने के लिए सरकार जल्द ही नया कानून लागू करेगी। इसके लिए गृह विभाग ने उत्तर प्रदेश के अधिनियम के आधार पर मध्य प्रदेश गिरोहबंदी और समाज विरोधी कार्यकलाप (निवारण) विधेयक-2021 का प्रारूप तैयार कर लिया है। विधि विभाग से कानूनी पहलूओं का परीक्षण भी करा लिया गया है।

इसमें पुलिस को आरोपित से पूछताछ के लिए रिमांड की अवधि दो माह तक मिल सकेगी। कलेक्टरों को यह अधिकार होंगे कि वे आरोपितों की संपत्ति की जांच कर सकेंगे। यदि घोषित स्रोत से अधिक संपत्ति होना प्रमाणित होता है तो उसे राजसात किया जा सकेगा।

गृह विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस अधिनियम के दायरे में वे सभी अपराध शामिल किए जाएंगे, जिसमें एक से अधिक व्यक्ति की भूमिका होती है। उत्तर प्रदेश के अधिनियम का अध्ययन करने के बाद प्रदेश की परिस्थितियों को देखते हुए प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें अवैध खनन, ड्रग्स, मानव तस्करी, नकली दवाओं का व्यापार, मिलावटी शराब का कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस को पूछताछ करने के लिए अधिक समय मिलेगा और इस अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों पर न्यायालय में अलग से सुनवाई की व्यवस्था रहेगा ताकि निर्णय जल्द से जल्द हो सके। गवाहों को सुरक्षा देने का प्रविधान भी रहेगा ताकि वे निर्भीक होकर अपनी बात रख सकें।

कलेक्टर को आरोपितों की संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार होगा। आरोपित को ही यह साबित करना होगा कि उसने वैधानिक तरीके से संपत्ति अर्जित की है। अधिनियम के प्रविधानों को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ चर्चा के बाद अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यदि तैयारी पूरी हो जाती है तो इसे विधानसभा के शीतकालीन सत्र या फिर वर्ष 2022 के बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा।

इंदौर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका में तैयारी, निजी अस्पतालों में कम से कम 10 प्रतिशत बिस्तर होंगे आरक्षित

0
indore_collector
indore_collector

इंदौर । कोरोना वायरस और इसके नए वेरिएंट ओमिक्रोन की सक्रियता को देखते हुए तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे निजी अस्पताल जहां 50 से अधिक बिस्तर हैं, वहां कम से कम 10 प्रतिशत बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसके लिए कलेक्टर मनीषसिंह ने महामारी रोग अधिनियम-1897 और दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-144 के तहत आदेश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार, 50 बिस्तरों से अधिक संख्या वाले सभी अशासकीय अस्पताल न्यूनतम 10 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित कर इसकी जानकारी अपर कलेक्टर डा. अभय बेड़ेकर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. बीएस सैत्या को देंगे। साथ ही शिशुओं के उपचार के लिए आरक्षित बिस्तरों की जानकारी भी देंगे।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिले के सभी चिकित्सालयों में आक्सीजन आपूर्ति निर्बाध और सरलता से हो इसके लिए 47 शासकीय और अशासकीय अस्पतालों में आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए गए हैं। यह प्लांट चलने की स्थिति में पहुंचे हैं या नहीं, इसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

इसके लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संयुक्त दल बनाए गए हैं। इन दलों में अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीएमएचओ और डाक्टरों को रखा गया है। यह दल देखेंगे कि आक्सीजन संयंत्रों में बिजली, आक्सीजन की शुद्धता, प्रेशर, प्लांट चलाने के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति आदि व्यवस्थाएं हैं या नहीं?

मप्र राज्य निर्वाचन आयोग के अशोकनगर और शिवपुरी कलेक्टर को नोटिस

0
mp_election
mp_election

भोपाल। । बोली लगाया या बड़ा चंदा देकर निर्विरोध निर्वाचन की लोकतंत्र में अनुमति नहीं है। ऐसी किसी भी घटना पर आदर्श आचार संहिता के तहत कार्रवाई होगी। अशोक नगर की भटौती पंचायत में सरपंच के निर्विरोध निर्वाचन के लिए 44 लाख रुपये की बोली लगाए जाने का मामला सामने आने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने कलेक्टर को नोटिस जारी कर प्रतिवेदन मांगा है। वहीं, शिवपुरी की कोलारस तहसील के इमलावदी गांव में इसी तरह निर्विरोध निर्वाचन की घटना सामने आने पर कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बीएस जामोद ने बताया कि चुनाव की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके अलावा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़कर किसी अन्य तरीके से निर्वाचन नहीं किया जा सकता है। आचार संहिता का पालन करना सबके लिए अनिवार्य है। किसी के चुनाव लड़ने के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है।

आचार संहिता में स्पष्ट प्रविधान है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए निजी राशि से सामाजिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक प्रयोजन से कोई निर्माण या कार्यक्रम की घोषणा नहीं की जाएगी। सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि आचार संहिता का पालन कराया जाए। साथ ही चुनाव संबंधी प्रविधान का प्रचार-प्रसार भी किया जाए।

मध्‍य प्रदेश में पंचायत चुनाव पर संशय, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पिछड़ा वर्ग की सीट सामान्य में मर्ज करें फिर कराएं चुनाव

0
court_election
court_election

भोपाल। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पंचायत चुनाव पर असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। राज्य सरकार ने शनिवार को होने वाला जिला पंचायत के अध्यक्ष पद का आरक्षण अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। इधर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि जब आपने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का डाटा एकत्र नहीं किया, डाटा मांगा गया तो दे नहीं पाए फिर किस बात के आधार पर आप ओबीसी आरक्षण दे रहे हैं। ओबीसी की सीट को सामान्य श्रेणी में मर्ज किया जाए ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यही निर्देश नगरीय निकाय चुनाव पर भी लागू होंगे। सालीसिटर जनरल और राज्य निर्वाचन आयोग को सख्त निर्देश दिए कि वह इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की गई तो चुनाव रद कर दिए जाएंगे। हाईकोर्ट से भी कहा कि जनवरी में नियमित सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को देखें।

जिला पंचायत अध्यक्ष के आरक्षण पर रोक

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को होने वाला आरक्षण अब नहीं होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की रोशनी में प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है। यह दूसरा मौका है जब पदों का आरक्षण करने की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। प्रदेश सरकार ने कमल नाथ सरकार में हुए पंचायतों के परिसीमन को निरस्त कर दिया था। इस कारण अब 2014 के आरक्षण के आधार पर चुनाव कराए जा रहे थे। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण करने के लिए कार्यक्रम घोषित किया था।

14 दिसंबर को आरक्षण की प्रक्रिया होनी थी पर हाईकोर्ट, जबलपुर में आरक्षण के मामले में दायर याचिका को देखते हुए इसे चार दिन बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण करना फिलहाल टाल दिया है। आरक्षण लाटरी निकालकर अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सभी वर्गों की महिला के लिए किया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ले रहा कानूनी सलाह

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर दिए आदेश के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार में मंथन का दौर शुरू हो गया है। दोनों अपने-अपने स्तर पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। इसके बाद ही चुनाव के संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा।

ये है आरक्षण की व्यवस्था

प्रदेश के 52 जिलों के हिसाब से आठ जिला पंचायत अनुसूचित जाति, 14 अनुसूचित जनजाति और 13 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो रही थीं। प्रदेश में आरक्षण की जो व्यवस्था है उसके तहत जिस जिले में अनुसूचित जाति-जनजाति का आरक्षण 50 प्रतिशत से कम होता है वहां अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रविधान है।