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भारत प्रतिबंध के बाद मिस्र को गेहूं देने को तैयार हुआ

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नई दिल्ली : भारत ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद गेहूं की एक बड़ी खेप मिस्र को भेजी है. मिस्र के अनुरोध के बाद भारत की तरफ से 61,500 टन गेहूं मिस्र को भेजा गया है. गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के बाद भारत की तरफ से ये किसी देश को दी गई सबसे बड़ी खेप है. मिस्र की तरह ही करीब 12 देशों ने भारत से अनुरोध किया है कि वो उन्हें गेहूं का निर्यात करे.

पूरे मामले से अवगत एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि कम से कम एक दर्जन देश ऐसे हैं जो भारत से गेहूं के लिए राजनयिक स्तर पर अनुरोध कर रहे हैं.

मिस्र को जितना गेहूं निर्यात किया जाना था, कस्टम ने उसमें से 17,160 टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी. अधिकारी ने बताया कि भारत की तरफ से निर्यात पर प्रतिबंध प्रभावी होने से पहले ही मिस्र को भेजे जा रहे शिपमेंट के लिए क्रेडिट गारंटी सहित अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं.

मिस्र को भारत की तरफ से गेहूं की शिपमेंट मेरा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कर रहा है. प्रतिबंध के प्रभावी होने के बाद गेहूं की इस खेप के लिए शिप को कस्टम क्लीयरेंस दिया गया. ये खेप 17 मई को गुजरात के कांडला बंदरगाह से निकल गई थी.

घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने लगाया गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक भारत ने 13 मई को कहा कि वो अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है. हालांकि, भारत ने ये जरूर कहा था कि वो खाद्य संकट झेल रहे उन देशों की मदद करेगा जो उनसे मदद की मांग करेंगे. भारत ने ये भी कहा कि प्रतिबंध से पहले जिन देशों के साथ गेहूं निर्यात को लेकर सौदा किया गया है, उन देशों को भी भारत गेहूं निर्यात करेगा.

वहीं, मिस्र को गेहूं भेजे जाने की जानकारी देने वाले अधिकारी ने कहा कि भारत विदेशों से प्राप्त हो रहे गेहूं के अनुरोध पर विचार करेगा. ये देश गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी जल्द ही अनुरोधों की समीक्षा करने के लिए चर्चा करने वाले हैं. हालांकि, अधिकारी ने ये नहीं बताया कि विदेश मंत्रालय को किन देशों से गेहूं के अनुरोध मिल रहे हैं.

भारत सरकार के अनुमानों के अनुसार, भारत में लगातार पांच वर्षों के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बाद पहली बार इसमें गिरावट देखने को मिल रही है. फरवरी में अनुमान लगाया गया कि उत्पादन 11.1 करोड़ टन होगा लेकिन उत्पादन 10.5 करोड़ टन ही है. यानी उत्पादन में कम से कम 5.7% की गिरावट आई है.

अप्रैल 2022 में, देश के व्यापारियों ने उच्च वैश्विक मांग और बढ़ी हुई कीमतों का लाभ उठाने के लिए विदेशों में 14 लाख टन गेहूं की बिक्री की. भारत ने वित्त वर्ष में मार्च तक रिकॉर्ड 78 लाख 50 हजार टन निर्यात किया, जो एक साल पहले की तुलना में 275% अधिक है.

24 मई को टोक्यो में होगा चौथा क्वाड सम्मेलन

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24 मई को टोक्यो में चौथा क्वॉड सम्मेलन होने जा रहा है। इसमें हिस्सा लेने के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी भी जापान जाएंगे। इस दौरान उनकी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के पीएम फुमिओ किशिदा से मुलाकात होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक इसके अलावा उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। पीएम मोदी ऑस्ट्रेलियाई पीएम के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ये हिन्द प्रशांत क्षेत्र और परस्पर हित के दूसरे विश्व मुद्दों पर विचार साझा करने का ये अच्छा अवसर होगा।आपको बता दें कि क्वॉड में सिर्फ चार देश अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान सदस्य हैं।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक अपने दौरे पर पीएम मोदी जापानी बिजनेस लीडर्स के साथ एक बिजनेस इवेंट में हिस्सा लेंगे। साथ ही वह जापान में भारतीय समुदाय से मिलेंगे और उन्हें संबोधित करेंगे। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी दक्षिण कोरिया और जापान की छह दिन की यात्रा पर रवाना हो गये हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलीवन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

सुलीवन ने व्हाइट हाउस में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमारा मानना है कि यह सम्मेलन यह प्रदर्शित करेगा कि लोकतंत्र काम करता है और साथ मिलकर काम कर रहे ये चार देश. खुले एवं स्वतंत्र हिंद-प्रशांत के सिद्धांत की रक्षा करेंगे और उसे बरकरार रखेंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने बताया कि इस सम्मेलन में नयी आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए ‘हिंद-प्रशांत आर्थिक मसौदा’ (आईपीईएफ) लाया जा रहा है।

सुरेन्द्र कोली को आखिरी मामले में मिली फांसी

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नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के आखिरी मामले में मुख्य आरोपी सुरेन्द्र कोली को फांसी की सज़ा सुनाई गई है। इस मामले में सीबीआई कोर्ट ने अन्य आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर को भी देह व्यापार मामले में दोषी पाए जाने पर 7 साल कैद की सजा सुनाई है। ये दोनों आरोपी पहले से ही कई मामलों में डासना जेल में सजा काट रहे हैं।बता दें कि सुरेंद्र कोली को पहले 13 मामलों में फांसी की सजा हो चुकी है। सीबीआई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उसे 14 बार फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में सबूतों के अभाव में और 3 मामलों में सबूतों के अभाव में बरी किया गया था। अभी तक केवल एक मामले में उसे फांसी दी जानी थी, लेकिन देरी के कारण सुप्रीम कोर्ट ने इसे भी रद्द कर दिया। एक अन्य मामले में हाईकोर्ट की ओर से फांसी में देरी को देखते हुए उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। सीबीआई कोर्ट से मौत की सजा मिलने के बाद भी कई मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

क्या था निठारी कांड?

निठारी गांव के कोठी नंबर डी-5 में रहनेवाले मोनिंदर सिंह पंढेर ने 7 मई 2006 को निठारी की एक युवती को नौकरी दिलाने के बहाने बुलाया था। इसके बाद युवती वापस घर नहीं लौटी। युवती के पिता ने नोएडा के सेक्टर 20 थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच शुरु की तो 29 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले में पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के मानव कंकाल मिले थे। साथ ही कोठी के पास नाले से बच्चों के अवशेष भी मिले। माना जाता है कि यहां से मानव शरीर के अंगों के पैकेट मिले थे, साथ ही कंकालों को नाले में फेंक दिया गया था। डी-5 कोठी में उसका नौकर सुरेंद्र कोली भी रह रहा था। माना जाता है इन सारी हत्याओं को इन दोनों ने मिलकर अंजाम दिया।

मुख्यमंत्री ने बुरहानपुर कलेक्टर को लगाई फटकार, हरदा को सौंपी जांच

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भोपाल । वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान इधर-उधर देखने और किसी से बात करने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुरहानपुर कलेक्टर प्रवीण सिंह अठायच को जमकर फटकार लगाई। कलेक्टर से कहा जब हम बोल रहे हैं, तो तुम्हें बोलने का अधिकार नहीं है। वहीं हरदा में भू-अधिकार पत्र की हितग्राही शशि परते को निर्धारित से कम मात्रा में खाद्यान्न् मिलने पर कलेक्टर ऋ षि गर्ग से शुक्रवार को रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा मिस्टर कलेक्टर टीम भेजकर जांच कराओ। मुख्यमंत्री से चर्चा में शशि परते ने बताया कि प्रधानमंत्री की ओर से दिया जा रहा पांच किलो प्रति व्यक्ति अनाज उन्हें आज तक नहीं मिला है। ‘मुख्यमंत्री नगरीय भू-अधिकार” योजना के तहत गुरुवार को मुख्यमंत्री हितग्राहियों को भू-अधिकार पत्र और स्थाई पट्टे वितरित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केंद्र और राज्य की योजनाओं को मिलाकर परते के परिवार को 50 किलो अनाज हर माह मिलना था।

1428 रुपये में मिल गई कब्जे की भूमि

मुख्यमंत्री ने भू-अधिकार पत्र और स्थाई पट्टे पाने वाले हितग्राहियों से बात करते हुए कहा अब आपको कोई तंग नहीं करेगा। यह जमीन आपकी है। अपनी जमीन पर घर बनाकर रहें। जिंदगी के हर मोड़ पर सरकार आपके साथ है।

उन्होंने बालाघाट के अनिल मिश्रा से पूछा, कब से कब्जा था। मिश्रा ने बताया तीन पीढ़ी से कब्जा था। 1428 रुपये भू-भाटक देकर जमीन मिल गई है।

– बड़वानी के हरिओम आटो चालक हैं। वे 30 साल से 37.29 वर्गमीटर भूमि पर काबिज हैं। 12 हजार 791 रुपये भू-भाटक लेकर उन्हें भूमि का पट्टा दिया गया। कलेक्टर ने बताया कि इस भूमि की कीमत दो लाख से अधिक है। हरिओम ने बताया बेटी की पढ़ाई संबल योजना के तहत करा रहे हैं।

– हरदा की शशि परते ने बताया 35 साल से कब्जा है। आज अधिकार मिलने से अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा बेटी की शादी की चिंता है, तो मुख्यमंत्री ने कहा चिंता क्यों करते हो। मैं तो हूं। ये अधिकार पत्र है अब सीना तानकर कहो, ये मेरी है।

मुरैना के जितेंद्र शाक्य रिक्शा चालक हैं। वे बताते हैं कि 20 साल से कब्जा था, निकाय के कर्मचारी और दबंग परेशान करते थे। जितेन्द्र ने बताया बेटी नेहा डाक्टर बनना चाहती है। मुख्यमंत्री ने नेहा से भी बात की।

जो सामाजिक व्यवस्था से छेड़छाड़ करें, विद्वेष अशांति फैलाएं, उनके विरुद्ध सख्त एक्शन हो: CM शिवराज

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भोपाल : सिवनी में दो आदिवासियों की हत्या के बाद वहां कानून व्यवस्था को लेकर की गई कार्यवाही की एसआईटी जांच के उपरांत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार सुबह सिवनी और नीमच के कलेक्टर एसपी को तलब कर कहा कि जो लोग सामाजिक व्यवस्था से छेड़छाड़ करें और समुदायिक विद्वेष व अशांति फैलाने का काम करते हैं, उनके विरुद्ध सख्त एक्शन होना चाहिए। सिवनी में पीएम आवास प्लस स्कीम में नाम जुड़वाने के नाम पर पैसे मांगे जाने समेत करप्शन व अन्य मामलों में कुछ जिम्मेदार अफसरों की सूची दिखाते हुए सीएम ने कहा कि इनके विरुद्ध वे जांच करा रहे हैं और एक्शन लेंगे।

उन्होंंने कहा कि गोवंश के परिवहन और गौवध में लिप्त व्यक्तियों और इससे जुड़े माफिया की पड़ताल कर इस नेटवर्क को ध्वस्त करें। विकास और जन सेवा से हमें विभिन्न समुदायों में विश्वास पैदा कर सामाजिक समरसता को बनाए रखना है। हमारा प्रयास यह है कि किसी भी कीमत पर विभिन्न समुदायों में दूरियां नहीं बढ़ें। मुख्यमंत्री दबंगों और माफियाओं के अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि की जानकारी भी प्राप्त की। सिवनी कलेक्टर ने बताया कि अब तक 200 एकड़ भूमि मुक्त कराई गई है, यह भूमि प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना के लिए सुरक्षित रखी गई है।

पेयजल व्यवस्था की रिपोर्ट ली
मुख्यमंत्री चौहान ने सिवनी जिले में पेयजल की स्थिति की जानकारी प्राप्त की तथा जल जीवन मिशन के अंतर्गत जारी कार्यों की अपडेट रिपोर्ट ली। चौहान ने एल एंड टी कंपनी को  कार्य शीघ्र पूर्ण करने और जिला अधिकारियों को जलापूर्ति की व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा की अमृत सरोवर के अंतर्गत 15 जून तक अधिक से अधिक कार्य पूर्ण किए जाएं। करप्शन कर रहे अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करें।

कांग्रेस हिंदुओं के मुद्दों पर बोलने में दिलचस्पी नहीं लेती -हार्दिक पटेल

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नई दिल्ली : कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने पर कोई निर्णय नहीं लिया है। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर बगैर कोई नजरिया रखे काम करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी के नेताओं पर भी सवाल उठाए।

28 वर्षीय पटेल ने यहां संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस का कोई दृष्टिकोण नहीं है और पार्टी के नेता गुजराती लोगों से पक्षपात करते हैं। गुजरात में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और पटेल ने बुधवार को यह कहते हुए कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया कि पार्टी के शीर्ष नेताओं का ध्यान अपने मोबाइल फोन में लगा रहता है और गुजरात कांग्रेस के नेता उनके लिए चिकन सैंडविच का प्रबंध करने में लगे रहते हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारतीय जनता पार्टी या आप में शामिल हो सकते हैं, पटेल ने गुरुवार को कहा, “मैंने अभी तक किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है चाहे वह भाजपा हो या आप।” कांग्रेस की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कभी हिंदुओं के मुद्दों, जैसे कि सीएए या वाराणसी की मस्जिद में मिले शिवलिंग आदि पर कुछ नहीं बोलती।

पटेल ने कहा, “इसके अलावा गुजरात कांग्रेस में जातीय राजनीति बहुत ज्यादा होती है। मैंने पार्टी में तीन साल बर्बाद किये।” पटेल को जुलाई 2020 में गुजरात प्रदेश कांग्रेस का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया था।

गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटेल ने पार्टी को काम करने के तरीके पर भी घेरा। उन्होंने कहा, ‘7-8 लोग 33 साल से कांग्रेस को चला रहे हैं। मेरे जैसे कार्यकर्ता हर रोज 500-600 किमी की यात्रा करते हैं। अगर मैं लोगों के बीच जाता हूं और उनके हालात जानने की कोशिश करता हूं, तो यहां बड़े नेता एसी कमरों में बैठकर मेरे प्रयासों में बाधा डालने की कोशिश करते हैं।’

राष्ट्रीय बायोफ्यूल पॉलिसी 2018 में संशोधन को मिली मंजूरी, 20% तक इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य

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बुधवार को मोदी कैबिनेट की बैठक में दो अहम फैसले लिए गए। मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय बायोफ्यूल पॉलिसी (National Policy on Biofuels) 2018 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई और फ़सलों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी गई है। साथ ही पेट्रोल-डीज़ल में इथेनॉल की 20% ब्लेंडिंग के लक्ष्य को 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया गया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इसे अच्छी पहल बताते हुए कहा कि जितना ज्यादा बायो-फ्यूल का उत्पादन होगा, हमारी पेट्रोलियम उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता उतनी ही कम होगी। साथ ही इस कदम से इस क्षेत्र में देशी तकनीक के विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

इस नीति में हुए प्रमुख संशोधन में पेट्रोल में 20 फीसदी एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पांच साल कम करना अहम है। फिलहाल पेट्रोल में करीब 10 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाता है। लेकिन 2025-26 तक इसे बढ़ाकर 20% कर दिया जाएहा। साथ जैव ईंधन के उत्पादन के लिए और कुछ और ‘कच्चे माल’ के इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी है। मंत्रिमंडल ने ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) कार्यक्रम के तहत देश में जैव ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने की भी मंजूरी दी है। बयान में कहा गया कि इस फैसले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को 2047 तक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के निदेशक मंडलों को इकाइयों एवं उनकी अनुषंगिक इकाइयों को बंद करने और उनका विनिवेश करने संबंधी फैसले लेने का अधिकार दिया है।फिलहाल संयुक्त उपक्रम में हिस्सेदारी बेचने, अनुषंगी या इकाइयों को बंद करने या उनकी कुछ हिस्सेदारी बेचने या रणनीति विनिवेश करने के लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी की आवश्यकता होती है। अब निदेशक मंडल भी ये फैसला ले सकते हैं।

राहुल द्रविड़ की जगह 7 मैचों के लिए टीम इंडिया के हेड कोच बन सकते हैं वीवीएस लक्ष्मण

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नई दिल्ली : टीम इंडिया का बिजी शेड्यूल एक बार फिर से देखने को मिलेगा, जब एक साथ दो टीमें फिर से एक्शन में नजर आएंगी। सफेद गेंद वाली टीम साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपनी सरजमीं पर मुकाबला खेलेगी, जबकि आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज भी टीम इंडिया को खेलनी है। इसी दौरान टीम इंडिया टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड के दौरे पर जाएगी। ऐसे में दो कोचिंग स्टाफ देखने को मिल सकते हैं। ऐसा दूसरी बार होगा, जब एक नियमित और एक पार्ट टाइम कोचिंग स्टाफ होगा।

राहुल द्रविड़ की अगुवाई वाला कोचिंग स्टाफ अगले महीने इंग्लैंड का दौरा करेगा। टीम इंडिया के मुख्य कोच की अनुपस्थिति में वीवीएस लक्ष्मण को दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए मुख्य कोच की भूमिका निभानी पड़ सकती है। इनसाइडस्पोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई लक्ष्मण को द्रविड़ के स्थान पर सीमित समय के लिए टीम इंडिया का हेड कोच बनाएगी, जो इस समय नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) के प्रमुख के रूप में काम कर रहे हैं।

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने बताया, “अब हमारे पास बर्मिंघम टेस्ट से पहले 24 जून को लीसेस्टरशायर के खिलाफ अभ्यास मैच है। राहुल द्रविड़ और टीम 15 या 16 जून को रवाना होगी। हम वीवीएस (लक्ष्मण) से भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका टी20 सीरीज और आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में कोच की भूमिका निभाने के लिए कहेंगे।” दिलचस्प बात यह है कि राहुल द्रविड़ जब एनसीए प्रमुख थे तो उन्होंने श्रीलंका के दौरे पर मुख्य कोच की भूमिका निभाई थी, क्योंकि रवि शास्त्री मुख्य टीम के साथ इंग्लैंड में थे।

टीम इंडिया 9 से 19 जून तक 5 T20I मैचों में दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी करने वाली है। घरेलू सीरीज के बाद टीम 26 और 28 जून को 2 T20I खेलने के लिए आयरलैंड रवाना होगी। वहीं, इस टी20 सीरीज के बीच में सीनियर टीम यूके के लिए रवाना होगी, जहां जुलाई में एक टेस्ट, तीन वनडे और इतने ही टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने हैं। इससे पहले टेस्ट मैच के अभ्यास के लिए टीम इंडिया को लीसेस्टरशायर के खिलाफ अभ्यास मैच खेलना है। इसके लिए अगले हफ्ते टीम का ऐलान होगा।

MP में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने की मंजूरी

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भोपाल : मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय और पंचाचत चुनाव को लेकर राज्य सरकार को एतिहासिक सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने  पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश में पचास फीसदी आरक्षण रखते हुए  मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव कराने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को एक सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा सरकार पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दे सकती है। लेकिन आरक्षण किसी भी हालत में पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में किए गए परिसीमन को भी मान लिया है। कोर्ट ने  कहा है कि सरकार और चुनाव आयोग इस मामले में एक सप्ताह में अपनी स्थिति स्पष्ट करे और चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करे। कोर्ट के फैसले के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, आज का दिन एतिहासिक है।  सत्य की जीत हुई है। ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को प्रणाम है। ओबीसी आरक्षण को रुकवाकर कांग्रेस ने पाप किया था।

मजबूती से रखा पक्ष: भूपेंद्र सिंह
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगरीय विकास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को लेकर सरकार ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा है। प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की वस्तृत रिपोर्ट रखी है। कोर्ट ने कुछ और जानकारी मांगी। वह उपलब्ध करा रहे हैं।

2022 का परिसीमन भी मंजूर
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग 2022 के परिसीमन के आधार पर अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण तय करेंगे। यह आरक्षण किसी भी हालत में पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। राज्य निर्वाचन आयोग आरक्षण की मौजूदा वैधानिक स्थिति के आधार पर चुनावों के लिए अधिसूचना जारी करेगा। निकायों के चुनाव पहले और पंचायतों के चुनाव उसके बाद कराए जाएंगे। एक सप्ताह में आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी कर देगा और प्रदेश में निकाय चुनाव के लिए आचार संहिता प्रभावशील हो जाएगी।

ये न्याय नहीं: नाथ
सुप्रीम कोर्ट से ओबीसी आरक्षण को लेकर फैसला आने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने दिल्ली में कहा कि यह अन्याय है। न्याय नहीं हुआ। इस व्यवस्था से ओबीसी को 14 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं मिलेगा। भाजपा सरकार ने ओबीसी को लेकर सही से कोर्ट में पक्ष नहीं रखा। ट्रीपल टेस्ट की रिपोर्ट भी सही से नहीं पेश की। हमारी अभी भी मांग है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।

सीआरपीएफ ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने की सुरक्षा करेगी

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वाराणसी : वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने को प्रशासन ने 9 ताले लगाकर सील कर दिया है. इसके साथ ही वजूखाने की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंप दी गई है. सीआरपीएफ के दो जवान 24 घंटे सील किए गए वजूखाने की रखवाली करेंगे. सीआरपीएफ के दोनों जवानों की ड्यूटी शिफ्ट के हिसाब से चौबीसों घंटे लगी हुई.

यानी हर शिफ्ट में दो-दो जवान वहां मुस्तैदी से डटे रहेंगे ताकि शिवलिंग के उस स्थान को कोई नुकसान ना पहुंचाया जा सके. हर शिफ्ट में मंदिर सुरक्षा के प्रमुख डिप्टी एसपी रैंक के मंदिर सुरक्षा अधिकारी और सीआरपीएफ के कमांडेंट औचक निरीक्षण करेंगे और शिवलिंग के स्थान की सुरक्षा देखेंगे. कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया है.

वाराणसी प्रशासन के मुताबिक, वजू के उस स्थान पर छोटा सरोवर है जिसे सील कर लिया गया है क्योंकि यह इलाका पहले से लोहे के बैरिकेड और जालों से घिरा हुआ है. यह वही स्थान है, जहां हिंदू पक्ष ने शिवलिंग मिलने का दावा किया है. हालांकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वजूखाने में शिवलिंग नहीं बल्कि फव्वारा मिला है.

वजूखाने का एक और वीडियो, शिवलिंग या फव्वारा?

इस बीच मस्जिद के वजूखाने से जुड़ा एक और वीडियो सामने आ गया है. ये दूसरा वीडियो भी पुराना बताया जा रहा है. इसे लेकर अब तक कुल दो वीडियो वायरल हैं. प्रशासन का कहना है कि दोनों वीडियो एक-दो महीने पुराने हैं. खैर अब सबके मन में सवाल है कि वजूखाने में मिली पत्थरनुमा आकृति वाकई में क्या है शिवलिंग है या फव्वारा?

अगर ये साबित हो गया कि ये वाकई शिवलिंग ही है तो मंदिर के अस्तित्व को लेकर अंधेरे की गुंजाइश ही खत्म हो जाएगी, लेकिन ये तय कर पाना आसान नहीं. इसे वैज्ञानिक और पुरातत्विक पैमाने पर परखना-जांचना होगा. अभी तो सिर्फ मोटे तौर पर तर्क -वितर्क चल रहे हैं. हिंदू पक्ष इसे शिवलिंग बता रहा है तो मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा.

हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष के अपने-अपने तर्क

दरअसल -हिंदू पक्ष कह रहा है आकृति साफ-साफ बता रही है ये शिवलिंग है. मुस्लिम पक्ष कह रहा है उपरी हिस्से की बनावट बता रही ये फव्वारा है. हिंदू पक्ष तर्क दे रहा है कि ये एक ही पत्थर से बनी संरचना है, शिवलिंग ऐसे ही बनते हैं. मुस्लिम पक्ष की दलील है कि ये अभी कैसे तय हो गया कि ये एक ही पत्थर से बना है.

हिंदू पक्ष का सवाल है कि फव्वारा है तो इससे पानी क्यों नहीं निकलता? पानी का प्रवाह क्यों नहीं दिख रहा? मुस्लिम पक्ष का जवाब है कि गहरे सुराख दिख रहे हैं इसलिए ये फव्वारा ही है. खैर ज्ञानवापी में बाबा मिले या नहीं, ये तो कोर्ट को तय करना है, लेकिन जिन महिलाओं की अर्जी पर ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे हुआ, उन्होंने अदालत में नई अर्जी दाखिल कर दी है.

कोर्ट में महिला वादियों ने दी नई अर्जी

नई अर्जी में कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद के पूर्वी हिस्से में नंदीजी के सामने व्यासजी के तहखाने में एक अस्थायी दीवार है, उसे हटाकर शिवलिंग तक पहुंचने का रास्ता बनाया जाए. साथ ही शिवलिंग वाली जगह के आसपास का मलबा हटाया जाए. महिला वादियों का कहना है कि चूंकि ज्ञानवापी में बाबा मिल गए हैं इसलिए पूजा की अनुमति मिलनी चाहिए.