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रणबीर कपूर और आलिया भट्ट एक-दूजे के हुए

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रणबीर कपूर और आलिया भट्ट शादी के बंधन में बंध चुके हैं और आज से अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू करने जा रहे हैं। परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में रणबीर और आलिया ने सात फेरे लिए और शादी के बंधन में बंध गये। शादी के बाद कपूर फैमिली ने बाहर मौजूद मीडिया में भी लड्डू बंटवाए। शादी के बाद न्यूली-वेड कपल रणबीर-आलिया सबसे पहले सिद्धिविनायक मंदिर जाकर गणपति बप्पा के दर्शन करेंगे। इसके बाद शानदार रिसेप्शन पार्टी होगी, जिसमें बॉलीवुड के तमाम सितारे और बड़ी हस्तियां शामिल होंगी। आलिया ने शादी के बाद खुद सोशल मीडिया पर रणबीर के साथ अपनी शादी की तस्वीरें शेयर की हैं।

रणबीर कपूर और आलिया भट्ट चार साल से एक दूसरे को डेट कर रहे थे। इस तरह अब कपूर खानदान और भट्ट फैमिली एक दूसरे के रिश्तेदार हो गए हैं। हालांकि शुरू में इस शादी को लेकर काफी सस्पेंस रखा गया था, और सिर्फ एक दिन पहले यानी मेहंदी के दिन ही नीतू कपूर ने शादी की तारीख बताई थी। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की शादी में मेहमानों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। आकाश अंबानी और श्लोका अंबानी पहुंच गए हैं। करीना कपूर भी पति सैफ अली खान के साथ पहुंची हैं। वहीं भट्ट और कपूर खानदान के सभी सदस्य वास्तु में मौजूद हैं।

दंगे प्रायोजित, कुछ मुस्लिम संगठन भी भाजपा के साथ मिलकर खेलते हैं- दिग्विजय सिंह

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इंदौर । रामनवमी पर मध्यप्रदेश के खरगोन और देशभर में भड़के दंगों को कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रायोजित करार दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम संगठन भाजपा के साथ मिलकर खेल रहे हैं। हालांकि सिंह ने ऐसे संगठनों के नाम नहीं बताए।

विभिन्न् आयोजनों में भाग लेने के लिए सिंह बुधवार दोपहर बाद इंदौर पहुंचे थे। एक दिन पहले ही प्रदेश मेें अलग-अलग जगहों पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई है। उनके द्वारा किए गए एक ट्वीट को मुद्दा बनाते हुए सिंह पर धार्मिक उन्माद भड़काने का आरोप लगाया है।

खुद पर दर्ज हुए मुकदमों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने यह भी कहा कि मैंने जीवनभर भाईचारे और अहिंसा की बात की। मेरे खिलाफ ही उन्माद और दंगे भड़काने का केस दर्ज किया जा रहा है। सिंह ने यह भी कहा कि मैंने क्या किया था सिर्फ सवाल ही तो पूछे थे। भीकनगांव का भाषण भी भड़काने वाला है।

उन्‍होंने कहा कि मैंने जिंदगी भर भाईचारे की बात की। मैंने सवाल ही तो पूछे थे। क्या किसी के पूजा स्थल पर बिना उनकी इजाजत के धर्मस्थल धर्मस्थल पर झंडा फहराना उचित है? किसी भी जूलूस में हथियार प्रदर्शन करने पर मेरे शासनकाल में रोक लगाई थी। आर्म्स एक्ट में तीन इंच से बड़ी ब्लेड के लिए भी लाइसेंस जरूरी है। खंडवा में धार्मिक जुलूस में तलवार और हथियार लहराए गए। इन अवैध हथियारों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की? साफ है कि दंगे प्रायोजित हैं।

इंदौर में भी तीन मामले दर्ज

उधर धार्मिक उन्माद भड़काने के मामले में इंदौर जिले में भी पूर्व मुख्यमंत्री सिंह के खिलाफ तीन प्रकरण दर्ज हुए हैं। जिले के किशनगंज, खुड़ैल और महू थाने में शिकायत के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किए हैं। इसी तरह बैतूल में भी उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट में उठा पाकिस्तान में कैद भारतीय सैनिकों का मामला

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सुप्रीम कोर्ट में 50 साल पुराने मामले को फिर से उठाया गया है। खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस गंभीरता से लिया है। दरअसल 1971 में पाकिस्तान में युद्धबंदी बने मेजर कंवलजीत सिंह के साथ पूर्व सैनिक बीर बहादुर सिंह की ओर से एक याचिका दाखिल की है। मेजर कंवलजीत सिंह की पत्नी जसबीर कौर ने याचिका में कहा गया है कि 54 POW को अभी भी पाकिस्तान सरकार द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। याचिका में इन POWs की रिहाई की मांग की गई है। साथ ही POWs के अधिकारों की रक्षा के लिए घरेलू और एक अंतरराष्ट्रीय तंत्र की स्थापना की मांग भी की गई है। याचिका में कैप्टन सौरभ कालिया और जाट रेजीमेंट के 4 सिपाहियों की हत्या की भी जांच की मांग की गई है।

कोर्ट में मामले को बताया महत्वपूर्ण

याचिका में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और सेना प्रमुख को प्रतिवादी बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और सूर्य कांत की बेंच ने याचिका में कही गई बातों महत्वपूर्ण माना। जजों ने पाकिस्तान में बंद भारतीय सैनिकों की लिस्ट मांगने और उन्हें वापस लाने के लिए कदम उठाने की मांग पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि वह याचिका में कही गई बातों पर 3 हफ्ते में अपना रुख बताए। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कोर्ट भारत सरकार को अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस से पाकिस्तान में बंद भारतीय सैनिकों की लिस्ट देने को कहे और उसके आधार पर कार्रवाई करे। याचिका में कहा गया है इस महान देश के सैनिक लगभग 50 वर्षों से दयनीय जीवन जी रहे हैं। वहीं भारत सरकार का दावा है कि वे POW की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाये जा रहे हैं।

पाकिस्तान ने नहीं लौटाए 1971 के युद्धबंदी

याचिका में बताया गया है कि युद्ध के बाद यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तान 54 भारतीय युद्धबंदियों को भारत भेजेगा। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बीच-बीच में यह सुना जाता रहा कि पाकिस्तानी जेल में इन सैनिकों को बहुत यातनापूर्ण परिस्थितियों में रखा गया है. लेकिन भारत सरकार और सेना ने कभी भी इन लोगों की रिहाई के लिए उचित प्रयास नहीं किए।

1999 में शहीद कैप्टन का मामला

याचिकाकर्ता ने 1999 में पाकिस्तान की क्रूरता का शिकार हुए जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया समेत 6 सैनिकों की हत्या की जांच की भी मांग की है। कारगिल युध्द से पहले मई 1999 में लद्दाख से सटे लाइन ऑफ कंट्रोल में गश्त कर रहे इन 6 सैनिकों को घुसपैठिए पाकिस्तानी सैनिकों ने कैदी बना लिया था। उन्हें बहुत तकलीफ देकर जान से मारा गया। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पाकिस्तानी सेना के नायक गुले खानदान ने सार्वजनिक कार्यक्रम में भारतीय सैनिकों के साथ की गई क्रूरता के बारे में बताया है। भारत सरकार ने मामले की जांच और कार्रवाई के लिए ठोस प्रयास नहीं किए। गौरतलब है कि कैप्टन सौरभ कालिया के पिता ने भी 2012 में इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

मध्‍य प्रदेश का यह शहर है संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जन्मस्थली

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:इंदौर । भारत के संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती गुरुवार को पूरे देश में मनाई जाएगी। देश में वर्णभेद को समाप्त करने की अलख जगाने वाले इस महानायक का जन्म इंदौर के समीप महू (मिलिट्री हेडक्वार्टर आफ वार) में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। हालांकि महू में डा. आंबेडकर बहुत कम समय रहे, लेकिन उनकी जन्मभूमि को पूजने के लिए गुरुवार को मानों पूरा देश यहां इकट्ठा होगा।

इस बार उल्लास इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कोरोनाकाल के दो साल तक डा. आंबेडकर के अनुयायी उनकी जयंती मनाने के लिए महू नहीं पहुंच सके थे। गुरुवार को यहां होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल होंगे।

बाबा साहेब पुकारे जाने वाले डा. आंबेडकर के पिता रामजी मालोजी सकपाल ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे और मां भीमाबाई गृहणी थीं। वर्ष 1894 में पिता सेना से सेवानिवृत्त हो गए और पूरा परिवार महाराष्ट्र के सतारा में रहने चला गया। दो साल बाद ही बाबा साहेब की मां का निधन हो गया और ननिहाल में ही उनका पालन-पोषण हुआ। हालात मुश्किल थे, लेकिन तपिश के बीच वे सोना बनकर निकले और पूरे राष्ट्र के नायक बन गए।

महू में बाबा साहेब की के जन्म स्थान पर मप्र सरकार ने भव्य स्मारक का निर्माण किया है। करीब 4.52 एकड़ भूमि स्मारक से जुड़ी है। यहां प्रतिवर्ष होने वाले आयोजनों में देश के गणमान्य नागरिक शामिल होते हैं।

संतोष पाटिल केस में फंसे मंत्री ईश्वरप्पा

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कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा और उनके सहयोगियों बसवराज और रमेश पर ठेकेदार संतोष पाटिल की आत्महत्या का केस दर्ज किया गया है। मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद ख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने ईश्वरप्पा को तलब किया है। इस मामले में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर भी प्रदर्शन हुआ। हालांकि ईश्वरप्पा ने ठेकेदार संतोष पाटिल से किसी भी मुलाकात से इन्कार किया। साथ ही कहा कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। ईश्वरप्पा और उनके सहयोगियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। पाटिल के भाई प्रशांत की शिकायत पर उदीपी में मामला दर्ज किया गया था। कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले ठेकेदार संतोष पाटिल मंगलवार को उडुपी के एक लॉज में मृत पाए गए। संतोष पाटिल के भाई प्रशांत पाटिल ने अपने भाई की मौत के लिए ईश्वरप्पा को जिम्मेदार ठहराया है।

अमेरिका में चार सिखों ने दाढ़ी रखने से मना करने पर मरीन कोर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इनमें से एक मरीन कोर में कैप्टन सुखबीर सिंह तूर भी शामिल हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से दाढ़ी और पगड़ी पहनने को लेकर अभियान चलाया था, जिसके बाद मरीन कोर ने उन्हें इसकी अनुमति दे दी थी। परंतु, हाल ही में मरीन कोर ने लड़ाई के मोर्चे पर तैनाती या बूट कैंप के दौरान तूर समेत किसी भी सिख को दाढ़ी रखने की छूट देने से इन्कार कर दिया। मरीन कोर ने कहा कि दाढ़ी कोर के काम करने की क्षमता को प्रभावित करती है और जान को भी जोखिम में डालती है। सोमवार को तूर और तीन अन्य सिखों ने मरीन कोर के खिलाफ अमेरिका के कोलंबिया जिला अदालत में मामला दर्ज कराया। इन्होंने कहा कि कोर द्वारा धार्मिक छूट देने से इन्कार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है और उनके धर्म के मुक्त पालन के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है। तूर के साथ वाद दायर करने वाले तीनों सिखों का कहना है कि उनसे बूट कैंप के दौरान दाढ़ी कटवाने को कहा गया था। बूट कैंप में अमेरिकी मरीन को बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल सभी पक्षों से पीएम मोदी ने की बात

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देवघर के त्रिकूट पर्वत पर रोपवे में फंसे 40 से ज्यादा लोगों को दो दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बचा लिया गया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना, वायुसेना, ITBP, NDRF और स्थानीय प्रशासन ने खतरनाक परिस्थितियों में भी लगातार काम करते हुए लोगों की जान बचाई।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देवघर में बचाव कार्यों में शामिल भारतीय वायुसेना के कर्मियों, भारतीय सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, स्थानीय प्रशासन और नागरिक समाज के कर्मियों के साथ बात की। पीएम मोदी ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि आपने तीन दिनों तक 24 घंटे लगकर एक मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा किया और अनेक देशवासियों की आपने जान बचाई है। पूरे देश ने आपके साहस को सराहा है, मैं इसे बाबा बैद्यनाथ जी की कृपा मानता हूं। हालांकि हमें दुख है कि कुछ साथियों का जीवन हम नहीं बचा पाए, जबकि अनेक साथी घायल भी हुए हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि देश को गर्व है कि उसके पास हमारी थल सेना, वायु सेना, NDRF, ITBP के जवान और पुलिस बल के रूप में ऐसी कुशल फोर्स है, जो देशवासियों को हर संकट से सुरक्षित बाहर निकालने का माद्दा रखती है। आप सभी प्रशंसा के पात्र हैं। इस चर्चा में शामिल गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जब त्रिकूट पहाड़ी पर इतने सारे यात्री फंसे हुए थे तो पूरे देश की सांसे अधर में लटकी हुई थीं। लेकिन सभी एजेंसियों ने बहुत कम समय में तालमेल के साथ कम से कम नुकसान के साथ इस ऑपरेशन को पूरा किया।

झारखंड के देवघर स्थित त्रिकूट पहाड़ रोपवे हादसा में ट्रॉली में फंसे लोगों में से कुल 46 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। वैसे इस दौरान तीन लोगों की मौत हो गयी। ये हादसा रविवार की शाम साढ़े चार बजे के करीब हुआथा और तब से लेकर मंगलवार को, यानी तीसरे दिन ये रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया। इस दौरान वायुसेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी समेत सेना के अन्य जवानों ने कड़ी मशक्कत और जान जोखिम में डालकर ट्रॉली में फंसे लोगों को नयी जिंदगी दी। इस हादसे में झारखंड के निवासी पन्नालाल ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 10 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस काम में बसडीहा निवासी उमेश सिंह, उपेंद्र विश्वकर्मा, नरेश गुप्ता और शिलावर चौधरी ने भी मदद की।

खरगोन में दंगाइयों से होगी संपत्ति की क्षतिपूर्ति, दावा अध‍िकरण गठित

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भोपाल।  खरगोन में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हुए उपद्रव से सरकारी और निजी संपत्ति को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी भरपाई दंगाइयों से की जाएगी। इसके लिए सरकार ने मध्य प्रदेश लोक एवं निजी संपत्ति को नुकसान का निवारण एवं नुकसानी की वसूली अधिनियम 2021 के तहत दावा अधिकरण का गठन कर दिया है। इसका अध्यक्ष सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश डा.शिवकुमार मिश्रा और सदस्य प्रभात पाराशर को बनाया है। अधिकरण तीन माह में नुकसान की वसूली के लिए आदेश पारित करेगा।

अपर मुख्य सचिव गृह डा.राजेश राजौरा ने मंगलवार को दावा अधिकरण के गठन की अधिसूचना जारी की। उन्होंने बताया कि खरगोन नगरीय क्षेत्र में 10 अप्रैल 2020 को आयोजित जुलूस, सांप्रदायिक दंगों से हुई लोक तथा निजी संपत्ति के नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए अधिकरण आवेदन लेगा।

90 दिन के भीतर इनका निराकरण करके नुकसान की प्रतिपूर्ति के लिए आदेश जारी करके क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर को देगा। कलेक्टर प्रभावित व्यक्ति को राशि दिलाएंगे। इसके लिए दोषी व्यक्ति को 15 दिन का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो ब्याज लगाया जाएगा। इसके बाद भी भुगतान न करने की सूरत में राजस्व नियमों के अंतर्गत चल-अचल संपत्ति की नीलामी करके राशि वसूली जाएगी।

मध्‍य प्रदेश में दो साल में 18146 करोड़ की 21502 एकड़ भूमि भू-माफिया से कराई मुक्त

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भोपाल । मध्य प्रदेश में पिछले दो साल से भू-माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। माफिया के विरुद्ध अप्रैल 2020 से मार्च 2022 तक की गई कार्रवाई में 18146 करोड़ रुपये की 21502 एकड़ भूमि मुक्त कराई गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में कार्रवाई को लेकर गृह विभाग ने प्रस्तुतीकरण के जरिए सारे तथ्यों से अवगत कराया।

मंत्री प्रभार के जिलों में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखें

मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रभार के जिलों में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी वर्गों के साथ चर्चा करें। कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त रहे और आने वाले त्योहार निर्विघ्न संपन्न् हों, यह सुनिश्चित करें। शांति समिति की बैठकें करें और गड़बड़ी करने वालों की धरपकड़ हो। अपराध करने वाला कोई भी हो, माफ नहीं किया जाएगा। जो भी वैधानिक कार्रवाई है, वह सब की जाएगी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर भ्रामक जानकारियां देने वालों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

सरकार की 15397 एकड़ भूमि पर था अतिक्रमण

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजौरा ने बताया कि भू-माफिया, गुड़ों और आदतन अपराधियों ने राजस्व, नगरीय निकाय और वन विभाग की 15397 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण करके रखा था। इसका मूल्य 11941 करोड़ रुपये होता है। इसे मुक्त कराया जा चुका है। इसके साथ ही 6105 एकड़ निजी और अन्य विभागों की भूमि मुक्त कराई गई है। मार्च 2021 से मार्च 2022 के बीच भू-माफिया के विरुद्ध 4495 प्रकरण दर्ज किए गए। 9896 अतिक्रमण तोड़े गए और 188 व्यक्तियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की गई। 498 व्यक्तियों को जिला बदर भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिक्रमण से मुक्त कराई भूमि का उपयोग गरीबों के मकान, अस्पताल, स्कूल बनाने सहित अन्य गतिविधियों के लिए किया जाएगा।

ट्वीट कर धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर एफआइआर

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भोपाल । कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भोपाल क्राइम ब्रांच ने धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। बता दें कि रामनवमी की शोभायात्रा पर मध्य प्रदेश के खरगोन और बड़वानी जिले के सेंधवा में पथराव की घटनाएं हुई थीं। खरगोन में तनाव बढ़ने पर कर्फ्यू लगाना पड़ा है।

(कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को एक फोटो ट्वीट किया जिसमें एक युवक धार्मिक स्थल पर भगवा झंडा फहराते दिखाई दे रहा है। इस ट्वीट पर कमेंट से माहौल सांप्रदायिक रंग लेने लगा। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि दिग्विजय सिंह उन्माद भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने जिस फोटो का उपयोग किया है वह मध्य प्रदेश का नहीं है। इसके बाद दिग्विजय ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इस मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने भोपाल क्राइम ब्रांच के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने चित्तौड़ कांप्लेक्स निवासी प्रकाश मांडे की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया। पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर ने बताया कि मामले में जांच शुरू कर दी गई है।

इन धाराओंं में दर्ज हुई एफआइआर

– 153(ए): किसी धर्म या संप्रदाय के खिलाफ धार्मिक भावनाओं का ऐसा कार्य, जिससे लोगों के बीच में शांति या बाधा उत्पन्ना होती है। इसमें तीन वर्ष का कारावास या जुर्माना हो सकता है।

– 295(ए): धार्मिक भावनाओं को आहत करना।

– 465: कूटरचना करना।

– 505 (2): गैर जमानती, संज्ञेय व दो समुदायों के बीच शत्रुता, घृणा की भावना पैदा करने का आशय के तहत असत्य कथन कहना। इसमें तीन साल तक का कारावास का प्रविधान है।

UGC के चेयरमैन का एलान, एक साथ मिलेंगी दो डिग्रियां

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जल्द ही छात्रों को एक ही साथ दो फु-टाइम डिग्री प्रोग्राम करने की अनुमति मिलेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के चेयरमैन ने इसकी घोषणा की। लेकिन ये फिजिकल मोड में होगा और दोनों कोर्सेस की टाइमिंग अलग-अलग होनी चाहिए। यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने इसका ऐलान करते हुए कहा कि छात्र एक ही विश्वविद्यालय या विभिन्न विश्वविद्यालयों से एक साथ दो डिग्री कार्यक्रम कर सकते हैं। अब तक छात्रों को केवल एक ही स्नातक कार्यक्रम में एडमिशन लेने अनुमति थी। लेकिन आयोग द्वारा स्वीकृत नए दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि एक छात्र एक ही समय में दो कार्यक्रमों में शामिल हो सकता है। डिग्री या तो एक ही या विभिन्न विश्वविद्यालयों से प्राप्त की जा सकती है।

UGC के इस फैसले से छात्रों को एक ही या अन्य संस्थानों में विभिन्न संकायों से कई विषयों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। जगदीश कुमार ने यह भी बताया कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए इन दिशा-निर्देशों को अपनाना अनिवार्य नहीं है, लेकिन वे उम्मीद कर रहे हैं कि अधिक से अधिक संस्थान छात्रों को एक साथ दो डिग्री करने की अनुमति देंगे। चेयरमैन ने कहा कि ये दिशा-निर्देश विश्वविद्यालयों और वैधानिक निकायों को भेजा जाएगा, इसके बाद वे इसे अपने अनुकूल तरीके से अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे। वहीं ऑनलाइन मोड में असीमित सीटें होंगी और विश्वविद्यालय पर कोई दबाव नहीं होगा। ऑनलाइन डिग्री के लिए कोई एंट्रेंस एग्जाम भी जरुरी नहीं होगा।

यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि फिजिकल और ऑनलाइन मोड दोनों महत्वपूर्ण हैं। हमारा मानना है कि फिजिकल के लिए हम सीमित सीटों के कारण केवल 4-5 प्रतिशत छात्रों को ही प्रवेश देते हैं। लेकिन नये दिशा-निर्देशों से विश्वविद्यालयों को और भी अधिक अधिकार प्राप्त हो सकेंगे। वही छात्रों के लिए नये विकल्प उपलब्ध होंंगे।