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साढ़े चार लाख पेंशनरों को पांच प्रतिशत महंगाई राहत दे सकती है शिवराज सरकार

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शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता आठ प्रतिशत बढ़ाने के बाद अब राज्य सरकार पेंशनरों की महंगाई राहत (डीआर) में वृद्धि कर सकती है। इसके लिए वित्त विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। महंगाई राहत में पांच प्रतिशत वृद्धि का प्रस्तावित की गई है। दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने पांच प्रतिशत महंगाई राहत बढ़ाई है। इसी हिसाब से प्रदेश में वृद्धि होगी क्योंकि दोनों राज्यों के बीच महंगाई राहत को लेकर सहमति होना आवश्यक है।
प्रदेश सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता आठ प्रतिशत बढ़ाकर बीस प्रतिशत कर दिया है। इसका भुगतान भी नवंबर में प्राप्त वेतन में कर दिया गया है लेकिन महंगाई राहत बढ़ाने को लेकर निर्णय होना अभी बाकी है। दरअसल, पेंशनर की महंगाई राहत बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच सहमति होना अनिवार्य है क्योंकि वर्ष 2000 के पहले की महंगाई राहत के भुगतान का भार 74 प्रतिशत मध्य प्रदेश और 26 प्रतिशत छत्तीसगढ़ को उठाना पड़ता है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने पांच प्रतिशत महंगाई राहत बढ़ाकर जुलाई से देने का निर्णय लिया है। इसी हिसाब से वित्त विभाग ने भी प्रस्ताव तैयार किया है पर इसमें भुगतान अक्टूबर से दिए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के स्तर से प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद इसे छत्तीसगढ़ सरकार को भेजकर बताया जाएगा कि राज्य में अक्टूबर से भुगतान किया जाएगा। पेंशनर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेश दत्त जोशी का कहना है कि जब एक बार सहमति बन चुकी है तो फिर प्रस्ताव भेजने में विलंब क्यों किया जा रहा है। पेंशनरों में इसको लेकर आक्रोश है। सरकार को पेंशनर की स्थिति को समझना चाहिए।

दो साल बाद 22 नवंबर को परंपरागत मार्ग से निकलेगी महाकाल की सवारी

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ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी सोमवार को दो साल बाद अपने परंपरागत मार्ग से निकलेगी। इस खबर से पंडे-पुजारी, अफसर-जनप्रतिनिधि और क्षेत्रीय नागरिक काफी खुश हैं। उन्होंने सवारी का भव्य स्वागत करने की तैयारियां भी की हैं। याद रहे कि श्रावण-भादौ मास और कार्तिक-अगहन मास की पिछली सवारियां कोविड-19 गाइडलाइन की वजह से परिवर्तित मार्ग महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, सिद्ध आश्रम होकर निकाली गई थी।
ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी सोमवार को दो साल बाद अपने परंपरागत मार्ग से निकलेगी। इस खबर से पंडे-पुजारी, अफसर-जनप्रतिनिधि और क्षेत्रीय नागरिक काफी खुश हैं। उन्होंने सवारी का भव्य स्वागत करने की तैयारियां भी की हैं। याद रहे कि श्रावण-भादौ मास और कार्तिक-अगहन मास की पिछली सवारियां कोविड-19 गाइडलाइन की वजह से परिवर्तित मार्ग महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, सिद्ध आश्रम होकर निकाली गई थी।

गहलोत कैबिनेट में बड़ी फेरबदल, राज्यपाल ने 15 नये मंत्रियों को दिलाई शपथ

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राजस्थान में गहलोत सरकार के नए मंत्रिमंडल (Rajasthan Cabinet Oath) का शपथ ग्रहण संपन्न हुआ। राज्यपाल ने 15 नये सदस्यों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें 11 कैबिनेट और चार राज्य मंत्री है। कैबिनेट मंत्री के रूप में हेमाराम चौधरी, रामलाल जाट, महेंद्रजीत मालवीय, विश्वेंद्र सिंह, महेश जोशी, रमेश मीणा, भजनलाल जाटव, ममता भूपेश, टीकाराम जूली, शकुंतला रावत और गोविंद राम मेघवाल ने शपथ ली। इनके अलावा विधायक जाहिदा खान, राजेंद्र गुढ़ा, मुरारीलाल मीणा और बृजेंद्र ओला ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली। इस तरह कुल 30 मंत्री बनाए गए हैं, जिनमें 10 पुराने चेहरे शामिल हैं और 12 नए चेहरों को भी शामिल किया गया है।
सीएम गहलोत (CM Gehlot) के नए मंत्रिमंडल में तीन मंत्रियों को कैबिनेट रैंक में पदोन्नत किया गया है। वहीं सचिन पायलट गुट के हेमाराम चौधरी, मुरारी लाल मीणा, जाहिदा खान, राजेंद्र और बृजेंद्र ओला को गहलोत कैबिनेट में शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद राजस्थान में कैबिनेट को लेकर चली आ रही सचिन पायलट की नाराजगी दूर हो गई है। रविवार शाम होने वाले अशोक गहलोत कैबिनेट फेरबदल से पहले सचिन पायलट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले के प्रति संतोष जताया और आगामी चुनावों में फिर से पार्टी की सरकार बनाने के लिए मिलकर प्रयास करने की बात कही।
सचिन पायलट ने कहा, पार्टी और नेतृत्व द्वारा उठाया गया कदम पूरे राज्य में सकारात्मक संदेश दे रहा है। हमने इस मुद्दे को बार-बार उठाया था। मुझे खुशी है कि पार्टी, आलाकमान और राज्य सरकार ने इसका संज्ञान लिया। उन्होंने कहा, नई कैबिनेट में 4 दलित मंत्री शामिल होना यह एक संदेश है कि AICC, राज्य सरकार और पार्टी दलितों, पिछड़े और गरीबों के लिए प्रतिनिधित्व चाहती है। लंबे समय से हमारी सरकार में दलित प्रतिनिधित्व नहीं था, अब इसकी भरपाई हो गई है और उन्हें अच्छी संख्या में शामिल किया गया है।

सचिन पायलट ने कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। हमारा एक ही गुट है और वो है – सोनिया, राहुल और प्रियंका का गुट। हम सब उसी के सदस्य हैं। सभी मिलकर 2023 के चुनावों में कांग्रेस को जिताएंगे।

लगातार पांच साल से स्वच्छता में अव्वल है इंदौर, जानें- इसके पीछे क्या है वजह

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भोपाल। इंदौर को स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार पांचवी बार देश में सबसे स्वच्छ शहर के साथ-साथ ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’ व कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग प्रोटोकाल के तहत ‘फाइव स्टार रेटिंग’ का पुरस्कार भी मिला।जनभागीदारी के बगैर इंदौर कभी स्वच्छता में सिरमौर नहीं हो सकता था। यहां के नागरिकों को स्वच्छता के लिए तैयार करने और शिक्षित करने का सबसे महत्वपूर्ण काम किया गया। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, स्थानीय संगठनों की मदद ली गई। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ वार्डो में काम किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे शहर में प्रोजेक्ट शुरू किए गए। इससे लोगों को नया सिस्टम समझने में आसानी हुई। सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिलने के बाद सीएम शिवराज सिंह ने माइक्रोब्लागिंग एप कू पर पोस्ट कर कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के तहत में मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा इंदौर के पास बरकरार रखते हुए कई वर्गों में उल्लेखनीय सफलता के लिए सम्मान प्राप्त किया। हम सभी मध्यप्रदेश वासी आदरणीय राष्ट्रपति को हृदय से धन्यवाद करते हैं।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के तहत में मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा इंदौर के पास बरकरार रखते हुए कई वर्गों में उल्लेखनीय सफलता के लिए सम्मान प्राप्त किया। हम सभी मध्यप्रदेश वासी आदरणीय राष्ट्रपति को हृदय से धन्यवाद करते हैं।
स्वच्छता में इस तरह लोगों को पीछे किया इंदौर
1-पहले वर्ष 2017 में नगर निगम ने गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके गाड़ियों में एकत्र करने की व्यवस्था शुरू की। नागरिकों को इसके लिए प्रेरित किया गया। सड़कों की नियमित सफाई शुरू हुई।
2-वर्ष 2018 में नगर निगम ने शहर के गीले कचरे के 100 प्रतिशत निपटान के लिए खाद बनाने की कई यूनिट लगवाई गई।
3-2019 में ट्रेंचिंग ग्राउंड में पड़े 15 लाख टन पुराने कचरे का पूरी तरह निपटान कर वहां 100 एकड़ जमीन खाली कर दी गई। अब वहां एक लाख से ज्यादा पेड़-पौधे लगे हैं।
4– वर्ष 2020 आते-आते शहर में सफाई जनआंदोलन बन चुका था। प्रदूषण कम करने के लिए सड़कों में सुधार किए गए। इस वर्ष दूसरी बार फाइव स्टार रेटिंग भी मिली।
5- 2021 में इंदौर ने शहर के नदी-नालों को सीवरेज आउटफाल मुक्त कर दिया। इंदौर पहला शहर है, जो घरों से पांच तरह का कचरा अलग-अलग करके लेने की शुरआत कर चुका है।

बता दें कि इस बार इंदौर ने सफाई का ‘पंच’ लगा दिया। सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज में भी इंदौर अव्वल रहा। इसमें 12 करोड़ रुपए का पुरस्कार मिला। राज्य कैटेगरी में मध्यप्रदेश को तीसरा स्थान मिला है। मध्यप्रदेश को कुल 35 अवॉर्ड मिले हैं। इंदौर के पांचवीं बार टॉप रहने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इंदौरी अंदाज दिखा। उन्होंने ट्वीट किया- वाह भिया! छा गया अपना इंदौर…। दस लाख से ज्यादा आबादी वाले टॉप 20 शहरों में मप्र के चारों बड़े शहर शामिल हैं। इंदौर-1, भोपाल-7, ग्वालियर-15, जबलपुर-20 नंबर पर है। 10 लाख तक की आबादी में उज्जैन का पांचवां नंबर है। वहीं तीन लाख की आबादी वाले शहर में देवास को छठवां स्थान मिला है।

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भोपाल. मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने रविवार को ऐलान किया कि भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होगा. इस ऐलान के साथ ही आईपीएस अधिकारियों की पुरानी मांग पूरी हो गई है. इस मांग को लेकर मध्‍य प्रदेश IPS एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से भी मुलाकात की थी. सालों से अटका पुलिस कमिश्नर सिस्टम 2020 में 15 अगस्त को लागू किया जाना था. लेकिन, एन वक्त पर घोषणा टल गई थी. पुलिस मुख्यालय कई बार पुलिस कमिश्नर सिस्टम के लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेज चुका है.

 

 

 

गौरतलब है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम के पिरामिड में डीजी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, एडीजी स्तर के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जा सकता है. उसके नीचे एडीजी या आईजी स्तर के दो ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर होंगे. पिरामिड में एडिशनल पुलिस कमिश्नर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी आईजी या डीआईजी स्तर अफसरों को मिलेगी. इसी तरह डिप्टी पुलिस कमिश्नर डीआईजी या एसपी स्तर के होंगे. जूनियर आईपीएस या वरिष्ठ एसपीएस अधिकारियों को असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर बनाया जा सकेगा.

 

 

 

 

 

प्रदेश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बेहतर है, लेकिन जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इसलिए कानून व व्यवस्था की कुछ नई समस्याएं पैदा हो रही हैं।

 

 

 

अत: हम भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर रहे हैं, ताकि अपराधियों पर और बेहतर नियंत्रण कर सकें।

अमिताभ बच्चन की नातिन Navya Naveli-Siddhant Chaturvedi के साथ रिलेशनशिप में ?

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मनोरंजन की दुनिया में पर्दे के पीछे के किस्से लोगों को और भी ज्यादा दिलचस्प लगते हैं. कई अलग-अलग कारणों से नव्या नवेली नंदा चर्चा में छाई रहती हैं। अब ताजा रिपोर्ट्स नव्या नवेली नंदा की पर्सनल लाइफ को लेकर आ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, नव्या नवेली एक बॉलीवुड एक्टर के साथ रिलेशनशिप में हैं।

कथित तौर पर नव्या नवेली अपकमिंग फिल्म बंटी और बबली-2 के स्टार सिद्धांत चतुर्वेदी के साथ सीरियस रिलेशनशिप(Love Birds )में हैं। दोनों एंटरटेनमेंट वर्ल्ड के सबसे नए कपल हैं। हालांकि, इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

श्वेता बच्चन नंदा की बेहद खूबसूरत बेटी नव्या की सोशल मीडिया पर फैन फॉलोइंग भी किसी एक्ट्रेस से कम नहीं है. नव्या अक्सर इंस्टाग्राम पर ग्लैमरस फोटोशूट शेयर करती रहती हैं. इन दिनों नव्या का नाम ‘बंटी और बबली 2’एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी (Siddhant Chaturvedi) के साथ जुड़ रहा है. खबर है कि नव्या और सिद्धांत (Love Birds)सीरियस रिलेशनशिप में हैं.

 

नव्या नवेली नंदा और मीजान के डेटिंग की खबर थी
नव्या नवेली नंदा फेमस एक्टर जावेद जाफरी के बेटे मीजान जाफरी संग डेट कर रही थीं. नव्या और मीजान की दोस्ती जावेद की बेटी आलाविया जाफरी की वजह से है. मीजान ने पहले दिए कई इंटरव्यू में इस रिश्ते के बारे में कहा था कि वे और नव्या सिर्फ अच्छे दोस्त हैं और मीडिया में डेटिंग की खबरों की वजह से उनके लिए एक समय काफी अजीब सा हो गया. हालांकि अब जो खबर आ रही है उसके मुताबिक नव्या, सिद्धांत चतुर्वेदीको पसंद करती
गली बॉय’फेम एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह सिंगल नहीं हैं बल्कि किसी को डेट कर रहे हैं. वह लड़की फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक तो रखती है लेकिन एक्ट्रेस नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि सिद्धांत का इशारा नव्या की तरफ था.

नव्या और सिद्धांत अपने रिलेशनशिप को लेकर काफी सीरियस हैं. हालांकि इस बारे में ना नव्या ना ही सिद्धांत की तरफ से कोई रिएक्शन सामने आया है.उनका इरादा बॉलीवुड में करियर बनाने बनाने का नहीं है. नव्या अपने फैमिली बिजनेस में अपने पापा का हाथ बंटाना चाहती हैं.

माना जा रहा है कि नंदा खानदान की चौथी पीढ़ी की विरासत को आगे ले जाने वाली पहली लेडी होंगी जो बिजनेस में हाथ आजमाएंगी. नव्या के मुताबिक अपने परदादा एच पी नंदा की लीगेसी को आगे बढ़ाना उनके लिए गर्व की बात है.

100 फीसदी क्षमता के साथ खुलेंगे स्कूल, छोटी कक्षाओं के बच्चे अभिभावकों की अनुमति से ही स्कूल आ सकेंगे

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भोपाल : मध्यप्रदेश में कोरोना प्रोटोकॉल के तहत लगी सभी पाबंदियां हटा दी गई हैं। शादियों में मेहमानों की संख्या के अलावा सिनेमाघर के दरवाजे भी पूरे खुल गए। कोरोना के तहत लगी सारी पाबंदियां ख़त्म करने के आदेश जारी हो गए! अब 100 फीसदी क्षमता के साथ प्रदेश में सभी स्कूल भी खुलेंगे। लेकिन, अभी भी अभिभावकों की मंजूरी के बाद ही बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा।

कोरोना की पाबंदिया समाप्त (Covid Restrictions Removed) कर दी गई। स्कूल, कॉलेज, जिम, मॉल और सिनेमा हॉल पूरी क्षमता के साथ खुल गए। साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन भी होने लगे। लेकिन, छोटे बच्चों के स्कूल खुलने पर अभी कुछ प्रतिबंध है। क्लास वन के नीचे के बच्चे अभी स्कूल नहीं जा रहे। सरकार ने मंजूरी तो दे दी, पर बच्चों को स्कूल आने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता। इसके लिए अभिभावकों की अनुमति अनिवार्य होगी।

स्कूली शिक्षा विभाग ने भी स्पष्ट कर दिया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को बुलाने से पहले उनके अभिभावकों से संपर्क जाएगा। शिक्षा विभाग के मुताबिक, अभी पुराने प्रोटोकॉल के तहत ही अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजेंगे। बाकी निर्णय उच्च अधिकारियों के स्तर पर होगा। मतलब यह कि बच्चों को स्कूल भेजने का अंतिम फैसला उनके अभिभावक ही करेंगे। उधर, अभिभावकों के सामने बड़ा कि बिना वैक्सीनेशन के बच्चों को स्कूल कैसे भेजा जाए!

शिवाजी नगर के 64 फ्लैट हो सकते है नवागत IAS का बसेरा

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भोपाल: यहां शिवाजी नगर में बनने वाले डी टाइप 64 फ्लैट नवागत IAS अफसरों का बसेरा हो सकते है।
आईएएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इन आवासों के लिए नवागत आईएएस अधिकारियों को पात्रता प्रदान किए जाने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने इस पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

आईएएस एसोएिशन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को 17 दिसंबर से 19 दिसंबर तक होंने वाली आईएएस मीट के लिए आमंत्रण देते समय यह मांग रखी थी। संभावना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस संबंध में मीट के दौरान ही कोई घोषणा करेंगे।

आईएएस मीट का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। मीट के दौरान इस बार कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। कुछ विषय विशेषज्ञ भी इस मौके पर अपना उद्बोधन देंन दंगे। इस बार कुछ अलग प्रकार की खेल स्पर्धाएं होंगी और चूंकि अब दो साल बाद यह आयोजन होंने जा रहा है इसलिए इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी कुछ और रोचक अंदाज में पेश किया जाएगा।

बारह नये क्षेत्रों में सहकारिता विभाग

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भोपाल:किसानों को बिना ब्याज के कर्ज, पीडीएस की खरीदी, रियायती दरों पर खाद, बीज, कीटनाशक वितरण जैसी योजनाओं के संचालन के कारण ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पा रहे सहकारी बैक, सहकारी समितियों को पुर्नजीवन देने, उनकी आय बढ़ाने के लिए अब सहकारिता विभाग बारह नये क्षेत्रों में काम करेगा। सहकारी संघों का गठन कर पीपीपी मोड पर ये काम किए जाएंगे। इससे सहकारिता विभाग,जिला सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक और प्राथमिक सहकारी समितियों की आमदनी भी बढ़ेगी और रोजगार के अवसरों में भी इजाफा होगा।

सहकारिता विभाग ने बारह नये क्षेत्र चिन्हित किए है। इनमें अलग-अलग सहकारी संघ गठित किए जाएंगे। इन सहकारी संघों से टू टियर और थ्री टियर सिस्टम बनाकर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए ये काम किए जाएंगे। विपणन संघ और राज्य सहकारी संघ के साथ पीपीपी मोड पर काम करने का प्रारुप भी तैयार किया गया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सहकारिता विभाग जिन नये क्षेत्रों में प्रवेश करने जा रहा है उनमें खाद उत्पादन, श्रम, पर्यटन, खनिज, उद्योग, ग्रामीण पर्यटन, बहुउददेश्यीय राशन दुकाने,सर्विस सेक्टर, आईटी और उद्यानिकी सहित कुल बारह क्षेत्रों में काम करेगा।

सहकारिता विभाग उद्यानिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में सहकारी संघों का गठन कर यहां थ्री टियर सिस्टम से काम करेगा।
अपैक्स बैंक,जिला सहकारी बैंक और प्राथमिक सहकारी समितियों को इनसे जोड़ा जाएगा। पूरा योजना बनाने और मानीटरिंग तथा वित्त उपलब्ध कराने का काम अपैक्स बैंक करेगा। जिला सहकारी बैंक तकनीकी और प्रशासनिक अमला उपलब्ध कराएंगे। प्राथमिक सहकारी समितियों के जरिए इसे मैदानी स्तर पर कराया जाएगा।

पर्यटन से सुविधा और आय-
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आवागमन के साधन नहीं है या कम है वहां छोटे सात सीटर से लेकर 21 सीटर तक के वाहन बैंको से कर्ज लेकर सहकारी संघों के जरिए संचालित किए जाएंगे। इसमें यह भी देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में परिवहन की संभावनाएं ज्यादा है वहां पहले इन वाहनों का संचालन किया जाएगा। इससे ग्रामीण अंचलों के रहवासियों को आवागमन की सुविधा भी मिलेगी और सहकारी संघ, बैंको और समितियों की आय भी बढ़ेगी।

सर्विस सेक्टर और आईटी-
कोरोना काल में सर्विस सेक्टर और आईटी के क्षेत्र में काम की संभावनाए बहुत बढ़ी है। सहकारिता विभाग विभिन्न सेवाएं ग्रामीण अंचलों तक रियायती शुल्क पर उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी की सेवाएंभी ग्रामीण अंचलों तक उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं सुविधाओें का लाभ भी लोगों को घर बैठे मिल सकेगा और सहकारी संस्थाओं, बैंको,संघों को लाभ भी होगा। स्थानीय युवाओं को इसके जरिए रोजगार से जोड़ा जाएगा।

खाद उत्पादन,उद्यानिकी-
ग्रामीण अंचलों में खेतों और उद्यानों के लिए जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट, नीम खली, केचुंआ खाद और अन्य खाद, कीटनाशक और प्रमाणित बीज स्थानीय स्तर पर तैयार किएजाएंगे। इसी तरह छोटी-छोटी नर्सरियां बनाकर वहां औषधीय पौधे, सजावटी पौधे, फलदार पौधे तैयार कराए जाएंगे। उनकी बिक्री गांव से लेकर शहर तक की जाएगी। किसान भी इसे खरीदेंगे और व्यापारी तथा आमजन भी इन्हें ले सकेंगे। बाद में पुष्पों की खेती कर उससे भी मुनाफा अर्जित किया जाएगा।

न्यू दिल्ली : विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में इंदौर को लगातार पांचवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया। केंद्र सरकार के घोषित ‘सफाई मित्र चैलेंज’ अवॉर्ड भी इंदौर को मिला है। पांच सितारा श्रेणी के पुरस्कार सहित इंदौर को तीन अवॉर्ड मिले। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विज्ञान भवन में इंदौर को नंबर वन शहर, 12 करोड़ का सफाई मित्र अवॉर्ड और 5 स्टार रेटिंग अवाॅर्ड दिए। बीते चार साल से इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा है। चारों बार स्वच्छता के मामले में इंदौर ने देश में नंबर वन का अवॉर्ड अपने नाम किया। शहर की इस उपलब्धि के पीछे नगर निगम और सफाई मित्रों की मेहनत मानी जा रही है। इस बार इंदौर को तीन अवॉर्ड मिले। स्वच्छता में न केवल नंबर-वन अवॉर्ड दिया गया। साथ ही ‘सफाई मित्र चैलेंज अवार्ड’ और ‘फाइव स्टार कैटेगरी अवॉर्ड भी इंदौर के खाते में आया। केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा हर साल सात सितारा रैंकिंग दी जाती है। लेकिन, इस बार पांच सितारे दिए गए। ‘सफाई मित्र चैलेंज’ अवॉर्ड के तहत 12 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी। नगर निगम को 45 करोड़ रुपए कचरा प्रबंधन के लिए जनता दे रही है। 137 किमी नदी-नालों की सफाई पर 343 करोड़ खर्च किए गए हैं। 1200 टन कचरे का रोज निपटान कर रहा है। शहर की व्यवस्था 11364 सफाई मित्रों के हवाले है। इंदौर जब इस मुकाबले में उतरा तो पहली बार निगम के 160 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जबकि, अब 50 करोड़ सालाना खर्च हो रहे हैं। यहां हारा नहीं कोई सबकी हुई है जीत,दो कदम आगे बढ़ने एक कदम पीछे लेने की है रीति पहली बार में कचरा वाहन खरीदने, ट्रांसफर स्टेशन बनाने के कारण कचरा प्रबंधन पर 160 करोड़ खर्च हुए थे। लेकिन, अब यह खर्च सालभर में 50 करोड़ हो रहा है। शहर में कचरा प्रबंधन की वसूली ही 45 करोड़ के करीब होती है। गीले कचरे की गुणवत्ता 95% है, जो जर्मनी में भी नहीं होता। तीन साल में 100 करोड़ पार कचरे से अभी इंदौर नगर निगम 20 करोड़ रुपए साल कमा रहा है। इसमें कार्बन क्रेडिट, सीएनजी, कम्पोस्ट खाद, सीएनडी वेस्ट व सूखे कचरे से हो रही आमदनी शामिल है। जानकारों का मानना है कि जिस तेजी के साथ इंदौर कचरा प्रबंधन पर काम कर रहा है, तीन साल में कचरे से कमाई 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी। इसलिए दावा मजबूत पिछले एक साल के दौरान इंदौर में ऐसे कई काम किए, जिन्हें करने में दूसरे जिले कमजोर रहे। नगर निगम ने सीवरेज के पानी को ट्रीट करके बगीचों और फव्वारों के अलावा खेतों में भी इसका उपयोग किया। नदियों में आउट फाल रोका गया, जिससे अब नदियों में साफ पानी बहने लगा। गीले कचरे का सम्पूर्ण निष्पादन कर उससे खाद और CNG बनाने की तैयारी की गई। नालों को सुखाकर उनकी गंदगी दूर की। नदी की सूरत बदलने से शहर की सेहत भी बदल गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों में पानी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में जबरदस्त गिरावट आई है। चंदननगर, विराटनगर, आजादनगर, मूसाखेड़ी और पीलियाखाल के डॉक्टर्स, संजीवनी केंद्र, सिविल डिस्पेंसरी पर की गई पड़ताल में खुलासा हुआ कि इन इलाकों में गंदे पानी से होने वाली बीमारियों में 80% तक की कमी आई।

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न्यू दिल्ली : विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में इंदौर को लगातार पांचवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया। केंद्र सरकार के घोषित ‘सफाई मित्र चैलेंज’ अवॉर्ड भी इंदौर को मिला है।

पांच सितारा श्रेणी के पुरस्कार सहित इंदौर को तीन अवॉर्ड मिले। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने विज्ञान भवन में इंदौर को नंबर वन शहर, 12 करोड़ का सफाई मित्र अवॉर्ड और 5 स्टार रेटिंग अवाॅर्ड दिए।

बीते चार साल से इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा है। चारों बार स्वच्छता के मामले में इंदौर ने देश में नंबर वन का अवॉर्ड अपने नाम किया। शहर की इस उपलब्धि के पीछे नगर निगम और सफाई मित्रों की मेहनत मानी जा रही है। इस बार इंदौर को तीन अवॉर्ड मिले। स्वच्छता में न केवल नंबर-वन अवॉर्ड दिया गया।

साथ ही ‘सफाई मित्र चैलेंज अवार्ड’ और ‘फाइव स्टार कैटेगरी अवॉर्ड भी इंदौर के खाते में आया। केंद्र के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा हर साल सात सितारा रैंकिंग दी जाती है। लेकिन, इस बार पांच सितारे दिए गए। ‘सफाई मित्र चैलेंज’ अवॉर्ड के तहत 12 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी।

नगर निगम को 45 करोड़ रुपए कचरा प्रबंधन के लिए जनता दे रही है। 137 किमी नदी-नालों की सफाई पर 343 करोड़ खर्च किए गए हैं। 1200 टन कचरे का रोज निपटान कर रहा है। शहर की व्यवस्था 11364 सफाई मित्रों के हवाले है। इंदौर जब इस मुकाबले में उतरा तो पहली बार निगम के 160 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जबकि, अब 50 करोड़ सालाना खर्च हो रहे हैं।

यहां हारा नहीं कोई सबकी हुई है जीत,दो कदम आगे बढ़ने एक कदम पीछे लेने की है रीति

पहली बार में कचरा वाहन खरीदने, ट्रांसफर स्टेशन बनाने के कारण कचरा प्रबंधन पर 160 करोड़ खर्च हुए थे। लेकिन, अब यह खर्च सालभर में 50 करोड़ हो रहा है। शहर में कचरा प्रबंधन की वसूली ही 45 करोड़ के करीब होती है। गीले कचरे की गुणवत्ता 95% है, जो जर्मनी में भी नहीं होता।

तीन साल में 100 करोड़ पार

कचरे से अभी इंदौर नगर निगम 20 करोड़ रुपए साल कमा रहा है। इसमें कार्बन क्रेडिट, सीएनजी, कम्पोस्ट खाद, सीएनडी वेस्ट व सूखे कचरे से हो रही आमदनी शामिल है। जानकारों का मानना है कि जिस तेजी के साथ इंदौर कचरा प्रबंधन पर काम कर रहा है, तीन साल में कचरे से कमाई 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी।

इसलिए दावा मजबूत

पिछले एक साल के दौरान इंदौर में ऐसे कई काम किए, जिन्हें करने में दूसरे जिले कमजोर रहे। नगर निगम ने सीवरेज के पानी को ट्रीट करके बगीचों और फव्वारों के अलावा खेतों में भी इसका उपयोग किया। नदियों में आउट फाल रोका गया, जिससे अब नदियों में साफ पानी बहने लगा। गीले कचरे का सम्पूर्ण निष्पादन कर उससे खाद और CNG बनाने की तैयारी की गई। नालों को सुखाकर उनकी गंदगी दूर की।

नदी की सूरत बदलने से शहर की सेहत भी बदल गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों में पानी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में जबरदस्त गिरावट आई है। चंदननगर, विराटनगर, आजादनगर, मूसाखेड़ी और पीलियाखाल के डॉक्टर्स, संजीवनी केंद्र, सिविल डिस्पेंसरी पर की गई पड़ताल में खुलासा हुआ कि इन इलाकों में गंदे पानी से होने वाली बीमारियों में 80% तक की कमी आई।