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मार्नस लाबुशेन ने रचा इतिहास, ब्रायन लारा, वीरेंद्र सहवाग और विव रिचर्ड्स जैसे दिग्गजों को छोड़ा पीछे

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ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी से टीम को मुश्किल परिस्थिति से निकाला। एशेज सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में मार्नस पहले दिन 95 रन बनाकर नॉटआउट लौटे। इस पारी के दौरान उन्होंने एक खास मुकाम हासिल कर लिया और ब्रायन लारा, विव रिचर्ड्स, वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया। टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 2000 रन पूरा करने के मामले में लाबुशेन अब टॉप-5 बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। लाबुशेन ने अपने करियर की 34वीं पारी में ऐसा किया। इस मामले में उनसे आगे चार ही बल्लेबाज हैं। सर डॉन ब्रैडमैन ने यह कारनामा 22 पारियों में, जॉर्ज हेडली ने 32 पारियों में, हर्बर्ट सटक्लिफ 33 पारियों में और माइक हस्सी ने 33 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी।

डग वाल्टर्स और ब्रायन लारा ने यह कारनामा 35-35 पारियों में किया था। भारत की ओर से सबसे तेज 2000 टेस्ट पूरा करने का रिकॉर्ड राहुल द्रविड़ के नाम दर्ज है। द्रविड़ ने 40 पारियों में ऐसा किया था, उनके अलावा वीरेंद्र सहवाग ने भी इतनी ही पारियों में यह आंकड़ा छुआ था। लाबुशेन जबर्दस्त फॉर्म में हैं और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत से ही काफी प्रभावित किया है।

लाबुशेन अभी तक 20 टेस्ट मैचों की 34 पारियों में 64.18 के औसत से 2054 रन बना चुके हैं। मैच की बात करें तो एडिलेड में खेले जा रहे इस डे-नाइट टेस्ट मैच के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया ने दो विकेट पर 221 रन बना लिए हैं। लाबुशेन के साथ क्रीज पर कप्तान स्टीव स्मिथ मौजूद हैं, जो 18 रन बनाकर खेल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने अपना पहला विकेट चार रन पर ही गंवा दिया था। स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंद पर मार्कस हैरिस तीन रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद डेविड वॉर्नर और लाबुशेन ने मिलकर दूसरे विकेट के लिए 172 रनों की साझेदारी निभाई। वॉर्नर अनलकी रहे और 95 रन बनाकर बेन स्टोक्स की गेंद पर स्टुअर्ट ब्रॉड को कैच थमा बैठे।

UNESCO ने दुर्गा पूजा को दिया हेरिटेज का दर्जा, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की मिली मान्यता

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पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सांस्कृतिक ईकाई UNESCO ने कोलकाता की दुर्गा पूजा (Kolkata Durga Puja) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कर लिया है। यूनेस्को की पेरिस में आयोजित अंतर सरकारी समिति के 16 वें सत्र के दौरान कोलकाता में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची ( UNESCO’s Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल किया गया है। बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है और ये बंगाल की संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। बंगाल सरकार ने यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा देने की अपील की थी, जिसे यूनेस्को ने मंजूरी दे दी है।

पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सांस्कृतिक ईकाई UNESCO ने कोलकाता की दुर्गा पूजा (Kolkata Durga Puja) को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल कर लिया है। यूनेस्को की पेरिस में आयोजित अंतर सरकारी समिति के 16 वें सत्र के दौरान कोलकाता में दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची ( UNESCO’s Representative List of Intangible Cultural Heritage of Humanity) में शामिल किया गया है। बता दें कि बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत ही धूमधाम से मनाई जाती है और ये बंगाल की संस्कृति के साथ जुड़ा हुआ है। बंगाल सरकार ने यूनेस्को से दुर्गा पूजा को विरासत का दर्जा देने की अपील की थी, जिसे यूनेस्को ने मंजूरी दे दी है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी सेमीकंडक्टर चिप्स निर्माण योजना को मंजूरी

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नई दिल्ली  : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स के डिजाइन, निर्माण की योजना को मंजूरी दी। इसके अलावा कैबिनेट ने 93,068 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2021-26 के लिए प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दी। इससे ढाई लाख एससी और 2 लाख एसटी किसानों समेत करीब 22 लाख किसानों को फायदा होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टरों/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (एटीएमपी/ओएसएटी), सेमीकंडक्टर डिजाइन के काम में लगी हुई कंपनियों/संघों को आकर्षक प्रोत्साहन सहायता प्रदान करना हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और भारत को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, देश में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास के लिए व्यापक कार्यक्रम को मंजूरी दी है।

यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ डिजाइन के क्षेत्र में कंपनियों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन पैकेज प्रदान करके इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों के निर्माण में एक नए युग की शुरुआत करेगा। यह सामरिक महत्व तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता के इन क्षेत्रों में भारत के प्रौद्योगिकीय नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।

जानिये क्‍या है सेमीकंडक्टर

सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव हैं, जो उद्योग 4.0 के तहत डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण की ओर आगे बढ़ा रहे हैं। सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणालियों का उत्पादन बहुत जटिल तथा प्रौद्योगिकी की अधिकता वाला क्षेत्र है, जिसमें भारी पूंजी निवेश, उच्च जोखिम, लंबी अवधि और पेबैक अवधि तथा प्रौद्योगिकी में तेजी से बदलाव शामिल हैं और इसके लिए अत्यधिक एवं निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम पूंजी सहायता और प्रौद्योगिकीय सहयोग की सुविधा प्रदान करके सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले प्रणाली के उत्पादन को बढ़ावा देगा। भारत में सेमीकंडक्टरों और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए निम्नलिखित व्यापक प्रोत्साहनों को मंजूरी दी गई है:

सेमीकंडक्टर फैब और डिस्प्ले फैब: भारत में सेमीकंडक्टर फैब तथा डिस्प्ले फैब की स्थापना की योजना उन आवेदकों को परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी जो पात्र पाए गए हैं और जिनके पास प्रौद्योगिकी के साथ-साथ इस प्रकार की अत्यधिक पूंजी वाली तथा संसाधन केंन्द्रित परियोजनाओं के निष्पादन की क्षमता है। भारत सरकार देश में कम से कम दो ग्रीनफील्ड सेमीकंडक्टर फैब तथा दो डिस्प्ले फैब स्थापित करने के लिए आवेदनों को मंजूरी देने हेतु भूमि, सेमीकंडक्टर ग्रेड जल, उच्च गुणवत्ता वाली बिजली, लॉजिस्टिक्स तथा अनुसंधान प्रणाली के रूप में आवश्यक बुनियादी ढांचे वाले हाई-टेक क्लस्टर स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी।

सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने यह भी मंजूरी दे दी है कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) के आधुनिकीकरण तथा व्यवसायीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। यह मंत्रालय ब्राउनफील्ड फैब संयंत्र के आधुनिकीकरण के लिए एक वाणिज्यिक फैब पार्टनर के साथ एससीएल के संयुक्त उद्यम की संभावना तलाशेगा।

कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब तथा सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी इकाइयां: भारत में कंपाउंड सेमीकंडक्टर/सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब्स और सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी संयंत्रों की स्थापना हेतु योजना के तहत स्वीकृत इकाइयों को पूंजीगत व्यय की 30 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस योजना के तहत सरकार के सहयोग से कंपाउंड सेमीकंडक्टरों और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग की कम से कम 15 ऐसी इकाइयां स्थापित किए जाने की संभावना है।

सेमीकंडक्टर डिजाइन कंपनियां: डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत पांच साल के लिए शुद्ध बिक्री पर 6 प्रतिशत– 4 प्रतिशत के पात्र व्यय एवं प्रोडक्ट डिप्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव के 50 प्रतिशत तक उत्पाद डिजाइन से जुड़े प्रोत्साहन दिए जाएंगे । इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी), चिपसेट, सिस्टम ऑन चिप्स (एसओसी), सिस्टम एवं आईपी कोर तथा सेमीकंडक्टर लिंक्ड डिज़ाइन के लिए 100 घरेलू कंपनियों को सहायता प्रदान की जाएगी और आने वाले पांच वर्षों में 1500 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर हासिल करने वाली कम से कम 20 ऐसी कंपनियों को विकास की सुविधा प्रदान की जाएगी।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन: सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले के उत्पादन की एक सतत प्रणाली विकसित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष और स्वतंत्र “इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम)” स्थापित किया जाएगा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का नेतृत्व सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले उद्योग के क्षेत्र से जुड़े वैश्विक विशेषज्ञ करेंगे। यह सेमीकंडक्टरों एवं डिस्प्ले प्रणाली पर आधारित योजनाओं के कुशल तथा सुचारू कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।

जैविक खेती और उत्पादों के निर्यात में मध्य प्रदेश देश में अव्वल

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भोपाल। मध्य प्रदेश जैविक खेती और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में देश में अव्वल है। प्रदेश में लगातार जैविक खेती का क्षेत्र बढ़ रहा है। वर्ष 2017-18 में 11 लाख 56 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती हो रही थी। जबकि, वर्ष 2020-21 में यह क्षेत्र बढ़कर 16 लाख 37 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश से पांच लाख टन जैविक उत्पाद का निर्यात हुआ, जो ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक का था।

जैविक खेती करने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या एक लाख से अधिक है। सोयाबीन, चना, मसूर, तुअर और उड़द के उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में नंबर एक पर है। वहीं, रामतिल और मूंग में दूसरा और गेहूं और बाजरा के उत्पादन में तीसरा स्थान है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। शिवराज सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। इसके लिए 2011 में जैविक कृषि नीति बनाई गई और 2014 में मंडला में निवेशक सम्मेलन भी किया। दरअसल, प्रदेश में जैविक खेती का रकबा (क्षेत्र) तो बढ़ रहा है पर उत्पाद की मार्केटिंग और ब्रांडिंग न होने से उत्पादकों को फायदा नहीं मिल पाता है।

इसे देखते हुए कृषि विभाग अब किसान और व्यापारियों को एक मंच पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। अपर मुख्य सचिव कृषि एवं सहकारिता अजीत केसरी का कहना है कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश जैविक खेती के मामले में देश में अव्वल है।

प्राकृतिक तौर पर मध्य प्रदेश में जैविक खेती का क्षेत्र सर्वाधिक है। वहीं, किसान भी लगातार प्रेरित हो रहे हैं। वर्ष 2020-21 में उत्पादन 13 लाख 92 हजार 95 टन रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। जैविक उत्पाद के निर्यात की दृष्टि से देखें तो देश-दुनिया में इसकी मांग बढ़ रही है। मध्य प्रदेश से वर्ष 2020-21 में पांच लाख 636 टन जैविक उत्पाद निर्यात किए गए। इसका मूल्य दो हजार 836 करोड़ रुपये होता है।

चावल सर्वाधिक होता है निर्यात

संचालक कृषि प्रीति मैथिल नायक ने बताया कि जैविक उत्पाद में प्रदेश से सर्वाधिक चावल निर्यात होता है। देश से होने वाले निर्यातय में मध्य प्रदेश का हिस्सा एक तिहाई से अधिक है। प्रदेश उड़द, सोयाबीन, तुअर, मसूर और चना के उत्पादन में नंबर एक पर है। वहीं, रामतिल और मूंग के उत्पादन में नंबर दो पर है। गेहूं और बाजरा के उत्पादन में मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर है। जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा जो किसान जैविक खेती के लिए पंजीयन कराते हैं, उनका क्षेत्र प्रमाणित करती है। संस्था के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण भी किया जाता है। निर्यात करनेे वाली कंपनियों द्वारा प्रमाण्ाीकरण का कार्य करवाया जाता है।

इन जिलों में अधिक होती है जैविक खेती

मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, उमरिया, दमोह, सागर, आलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, सीहोर, श्योपुर और भोपाल ।

जैविक खेती का क्षेत्र

वर्ष- क्षेत्र

2017-18 – 11,56,881

2018-19- 09,18,303

2019-20- 11,61,015

2020-21- 16,37,730

38 साल बाद भी नहीं हो सका भोपाल गैस पीड़ितों के हितों का फैसला

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भोपाल। विश्व की बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में शामिल भोपाल गैस त्रासदी हो या फिर दतिया जिले की सिंध नदी के पुल पर भगदड़ और झाबुआ के पेटलावद में विस्फोट से 90 से ज्यादा लोगों की मौत। आयोग गठित हुए, जांच हुई, रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी और सरकार कार्रवाई करना भूल गई। ऐसे एक दर्जन से ज्यादा मामले हैं। जिनमें पीड़ितों को अब भी न्याय का इंतजार है और विभिन्न् आयोग की फाइलें अलमारियों में कैद होकर रह गई हैं।

भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 38 साल पहले जहरीली गैस रिसी थी, जिससे हजारों लोगों की मौत हुई थी। मामले की जांच के लिए अगस्त 2010 में न्यायमूर्ति एसएल कोचर की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। जांच शुरू हुई। फरवरी 2015 को आयोग ने यह रिपोर्ट शासन को सौंप दी।

तब से अब तक गैस राहत विभाग इस रिपोर्ट पर मंथन कर रहा है। मामले में आयोग की रिपोर्ट तक पूरी तरह से सामने नहीं आई। यह इकलौता मामला नहीं है। एक दर्जन से ज्यादा गंभीर घटनाओं में सरकार की कार्रवाई ऐसी ही चल रही है। इन सभी मामलों में संबंधित आयोग अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप चुके हैं। कई मामलों की रिपोर्ट विधानसभा पटल पर रखी जा चुकी है पर कार्रवाई का इंतजार अब भी है।

मामले उछलते और ठंडे पड़ जाते हैं

इनमें से कुछ मामले राजनीतिक जरूरत का विषय हैं। इसलिए मौके-मौके पर उठते रहते हैं। विपक्ष जब मामला उठाता है, कुछ दिन चर्चा चलती हैं। अलमारी खुलती है, कैद फाइलों को रोशनी देखने को मिलती है और चंद दिनों में मामला ठंडा पड़ जाता है। आखिर फाइलें आमतौर पर जहां रहती हैं, वहीं पहुंच जाती हैं।

जांच और प्रतिवेदन तक पहुंचे मामले

– वर्ष 2006 में दतिया जिले के रतनगढ़ देवी मंदिर जाते हुए सिंध नदी के पुल पर भगदड़ से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी। जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुशील पाण्डेय की अध्यक्षता में अक्टूबर 2006 में आयोग गठित हुआ। जिसने मार्च 2007 में रिपोर्ट सौंप दी। दूसरी घटना अक्टूबर 2013 में हुई थी। इसकी अलग जांच कराई। जुलाई और दिसंबर 2014 में दोनों जांच प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखे गए।

– सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में अनियमित्ताओं की जांच के लिए फरवरी 2008 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एनके जैन की अध्यक्षता में आयोग गठित हुआ। आयोग ने सितंबर 2012 को रिपोर्ट सौंप दी। सामाजिक न्याय विभाग इस पर अब भी मंथन कर रहा है।

– झाबुआ जिले के पेटलावद में सितंबर 2015 में चाय की गुमठी में गैस सिलेंडर फटने से 90 लोगों की मौत हुई थी। घटना के तीन दिन बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर्येन्द्र कुमार सक्सेना को जांच सौंपी गई। उन्होंने दिसंबर 2015 में रिपोर्ट सौंप दी, जो अप्रैल 2016 से गृह विभाग में है।

– भोपाल केंद्रीय जेल से आठ कैदियों के भागने की जांच नवंबर 2016 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एसके पाण्डे को सौंपी गई। उन्होंने अगस्त 2017 में रिपोर्ट सौंप दी। जून 2018 में प्रतिवेदन विधानसभा पटल पर रखा जा चुका है।

– मंदसौर के पिपल्यामंडी में किसान आंदोलन के दौरान जून 2017 में पुलिस की गोली से पांच किसानों की मौत के मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेके जैन को सौंपी थी। उन्होंने जून 2018 में रिपोर्ट सौंप दी। जिसे तुरंत कार्रवाई के लिए गृह विभाग को भेज दी गई। तब से वहीं पड़ी है।

मानव निर्मित ऑब्जेक्ट ने पहली बार सूर्य के वायुमंडल में किया प्रवेश

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दिसंबर 1903 में जब पहली बार राइट बंधुओं ने हवाई जहाज उड़ाया था, तब शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि हवाई जहाज की उड़ान भरते के लगभग 100 साल बाद ही मानव निर्मित को ऑब्जेक्ट सूर्य को भी छू लेगा। लेकिन इंसान की जिज्ञासा ने इसे सच साबित कर दिया है। नासा के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे Parker Solar Probe ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल को छूकर इतिहास रच दिया है।

सूर्य के कोरोना में घुसा Parker Solar Probe

खगोल वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य की सबसे बाहरी परत को कोरोना कहा जाता है और नासा द्वारा भेजे गए अंतरिक्ष यान Parker Solar Probe ने कोरोना में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है।
सूर्य के अध्ययन के लिए मिलेगी अहम जानकारी
Parker Solar Probe ने कोरोना में स्थित कणों और चुंबकीय क्षेत्र के सैंपल इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। साथ ही इन सैंपल को धरती पर भेजना भी शुरू कर दिया है। अब वैज्ञानिकों को प्राप्त इस डेटा से सूर्य के अध्ययन में काफी सहायता मिलेगी। नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के सहयोगी प्रशासक थॉमस ज़ुर्बुचेन ने कहा कि पार्कर सोलर प्रोब ‘टचिंग द सन’ सौर विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण पल है और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
साल 2018 में लॉन्च किया गया था Parker Solar Probe
नासा ने Parker Solar Probe को साल 2018 में लॉन्च किया था, जिसका काम सूर्य की बाहरी परतों का अध्ययन करना था। Parker Solar Probe का नाम अमेरिकी सौर खगोल वैज्ञानिक यूजीन पार्कर के नाम पर रखा गया। यह अंतरिक्ष यान हमारे सूर्य के रहस्यों को जानने के लिए काम कर रहा है। Parker Solar Probe किसी भी अन्य अंतरिक्ष यान की तुलना में 7 गुना अधिक गति से उड़ान भरता है।
Parker Solar Probe पर लगी है 4.5 मोटी कार्बन परत
नासा ने जानकारी दी है कि Parker Solar Probe को सूर्य की भयावह गर्मी से बचाने के लिए 4.5 इंच मोटी कार्बन के परत से कवर किया गया है। Parker Solar Probe अंतरिक्ष यान करीब 1,377 डिग्री सेल्सियस तक के बाहरी तापमान को सहन कर सकता है

सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज किया

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ग्वालियर। सुप्रीम कोर्ट से राज्य शासन को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उस एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को खारिज कर दिया, जिसमेे नगर निमग के महापौर व नगर पालिका, नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के आरक्षण पर हाई कोर्ट के स्टे को चुनौती दी थी। इस एसएलपी के खारिज होने के बाद अब मामला फिर से हाई कोर्ट में सुना जाएगा।

हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण को चुनौती देने के लिए अलग-अलग नौ जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। युगलपीठ में सभी जनहित याचिकाओं को एक साथ सुना जा रहा है। कोर्ट ने 12 मार्च 2021 को अंतरिम आदेश पारित करते हुए दो नगर निगम, 79 नगर पालिका, नगर परिषद के आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने राज्य शासन से जवाब मांगा था। राज्य शासन ने अपने जवाब में आरक्षण की प्रक्रिया को सही बताया था। लेकिन ये याचिकाएं जबलपुर की प्रिसिंपल बैंच में स्थानांतरित हो गई हैं। राज्य शासन ने हाई कोर्ट के समक्ष तर्क दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी है। कोर्ट ने रोक बरकरार रखते हुए याचिकाओं की तारीख बढ़ा दी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राज्य शासन की एसएलपी पर सुनवाई हुई। एसएलपी को खारिज कर दिया। इस एसएलपी के खारिज होने से अब हाई कोर्ट अंतिम फैसला होगा है। हाई कोर्ट में सुनवाई होने से नगरीय निकाय के आरक्षण पर भी जल्द फैसला हो सकता है। क्योंकि कोर्ट के स्टे के कारण नगरीय निकाय के चुनाव नहीं हो पा रहे हैं।

फैक्ट फाइल

– 79 नगर पालिका व नगर परिषद के आरक्षण पर रोक ली है।

– 2 नगर निगम के महापौर के आरक्षण पर रोक लगी है।

– हाई कोर्ट ने 10 दिसंबर 2020 की अधिसूचना पर रोक लगाई है।

रोटेशन की प्रक्रिया का होना था पालन

– याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में तर्क दिए थे कि महापौर व नगर पालिका, नगर परिषद के अध्यक्ष पद के आरक्षण में रोटेशन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। जो नगर निगम व नगर पालिका के अध्यक्ष पद लंबे समय से आरक्षित हैं। इस कारण दूसरे लोगों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल पा रहा है। आरक्षण के रोस्टर का पालन करना चाहिए।

– रवि शंकर बंसल ने डबरा नगर पालिका के अध्यक्ष पद के आरक्षण को चुनौती दी थी। इस याचिका में स्टे आदेश आने के बाद 8 याचिकाएं और आ गईं। मनवर्धन सिंह की जनहित याचिका में 2 निगम व 79 नगर पालिका व नगर परिषद के आरक्षण पर रोक लगा दी। राज्य शासन ने इन दोनों याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

पंचायत चुनाव में आरक्षण का फैसला अब हाईकोर्ट करेगा

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भोपाल। मध्य प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण पर अब निर्णय हाईकोर्ट, जबलपुर करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट में अपील करने का निर्देश दिया है। इस पर सुनवाई गुरुवार को होगी। इसके लिए नए सिरे से अपील दायर करनी होगी।

कांग्रेस के सैयद जाफर और जया ठाकुर ने त्रिस्तरीय पंचायत (जिला, जनपद और ग्राम पंचायत) का चुनाव 2014 के आरक्षण से कराने के विरुद्ध दायर याचिका की थी। याचिकाकर्ता जाफर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को सुना और कहा कि एक विषय को दो न्यायालय द्वारा नहीं सुना जा सकता है।

इसे हाईकोर्ट ने देख लिया है, इसलिए आप मप्र पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश 2021 को हाईकोर्ट में चुनौती दीजिए। इस मामले में तत्काल सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के बाद हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर ली गई है। बीस दिसंबर तक नामांकन पत्र स्वीकार किए जाएंगे। इस याचिका में राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ता सैयद जाफर ने अध्यादेश को चुनौती देते हुए कहा कि यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। संविधान में हर पांच साल के बाद आरक्षण नए सिरे से किए जाने का प्रविधान है। जबकि अध्यादेश के माध्यम से 2014 के आरक्षण को आधार मानकर राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी की गई है।

रोहित शर्मा की कप्तानी में नहीं खेलना चाहते विराट कोहली? साउथ अफ्रीका सीरीज से नाम लिया वापस

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हाल ही में बीसीसीआई (BCCI) ने विराट कोहली (Virat Kohli) की जगह रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को वनडे का कप्तान बना दिया है। जिसके बाद से टीम में विवाद की खबरें सामने आ रही हैं। खबर है कि कोहली क्रिकेट बोर्ड के फैसले से नाराज हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में होने वाली वनडे सीरीज से अपना नाम वापस ले लिया है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार विराट ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला से नाम वापस ले लिया है। उन्होंने खुद को अनुपलब्ध बताया है।

रोहित की कप्तानी में नहीं खेलना चाहते विराट

इससे यह साफ है कि रोहित शर्मा की कप्तानी में विराट कोहली खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। टीम इंडिया का दक्षिण अफ्रीका दौरा 26 दिसंबर से शुरू होगा। जहां उसे तीन टेस्ट मैच और इतने ही वनडे खेलने हैं। 19 जनवरी को भारत और अफ्रीका के बीच पहला वनडे मुकाबला होगा। रिपोर्ट के मुताबिक विराट अपनी बेटी वामिका का पहला बर्थडे मनाने के लिए वक्त निकाल रहे हैं।

वनडे सीरीज से नाम वापस

वामिका जन्म साल 11 जनवरी 2021 को हुआ था। दरअसल कोहली टेस्ट सीरीज खत्म होने के बाद परिवार के साथ हॉलिडे मनाने की प्लानिंग कर रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ आखिरी टेस्ट मैच 11 जनवरी से शुरू होगा। वनडे टीम की घोषणा नहीं हुई है। भारत और अफ्रीका के बीच टी20 मैच भी होने वाले थे, लेकिन ओमिक्रोन के कारण रद्द कर दिया गया।

रोहित शर्मा को लगी चोट

वहीं टीम इंडिया के लिए एक बुरी खबर सामने है। कप्तान रोहित शर्मा ट्रेनिंग सेशन के दौरान चोटिल हो गए हैं। उनकी चोट काफी गंभीर है। रोहित साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। उनकी जगह प्रियांक पंचाल को टीम में शामिल किया गया है।

मध्‍य प्रदेश को मिलेंगे 29 आइएएस-आइपीएस अधिकारी, बीस दिसंबर को होगी डीपीसी

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भोपाल।। प्रदेश को इस साल 29 आइएएस-आइपीएस अधिकारी मिल जाएंगे। इसके लिए बीस दिसंबर को राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस और राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस संवर्ग आवंटन के लिए विभागीय पदोन्न्ति समिति (डीपीसी) की बैठक होगी। इसकी अध्यक्षता संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष प्रदीप जोशी करेंगे। बैठक भोपाल में प्रस्तावित की गई है। इसमें 18 राज्य प्रशासनिक सेवा और 11 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को आइएएस और आइपीएस संवर्ग आवंटन होगा।

सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने विभागीय पदोन्नति समिति के लिए संघ लोक सेवा आयोग को करीब दो माह पहले प्रस्ताव भेजा था। आयोग ने बीस दिसंबर को भोपाल में बैठक प्रस्तावित की है। इस वर्ष राज्य प्रशासनिक सेवा से आइएएस संवर्ग आवंटन के लिए 18 पद उपलब्ध हैं। इसके लिए 54 अधिकारियों के नाम का प्रस्ताव आयोग को भेजा गया था। वरिष्ठता और सेवा अभिलेख के आधार पर 1998 और 1999 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के नाम पर विचार करके अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

1994 बैच के विनय निगम, विवेक सिंह और 1995 बैच के पंकज शर्मा के नाम भी विचार के लिए बैठक में रखे जाएंगे। दोनों को पिछले साल जांच चलने के कारण मौका नहीं मिल पाया था। वरिष्ठता के अनुसार सुधीर कोचर, रानी बाटड, चंद्रशेखर शुक्ला, त्रिभुवन नारायण सिंह, नारायण प्रसाद नामदेव, दिलीप कुमार कापसे, बुद्धेश कुमार वैद्य, जयेंद्र कुमार विजयवत, डा.अभय अरविंद बेडेकर, अजय देव, नियाज अहमद खान, मनोज मालवीय, नीतू माथुर, अंजू पवन भदौरिया और जमना भिडे को आइएएस संवर्ग मिलना तय माना जा रहा है।

इसी तरह राज्य पुलिस सेवा से आइपीएस संवर्ग में पदोन्नति के लिए 11 पद उपलब्ध हैं। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सेवा अभिलेखों के आधार पर 1995-96 बैच के अधिकारी प्रकाश चंद्र परिहार, निश्चल झारिया, रसना ठाकुर, संतोष कोरी, जगदीश डाबर, मनोहर सिंह मंडलोई, रामजी श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह पवार, सुनील तिवारी, संजीव कुमार सिन्हा और संजीव कुमार कंचन को आइपीएस संवर्ग आवंटित हो सकता है।

आइएएस के लिए पहले होगी बैठक

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार आइएएस संवर्ग में पदोन्न्ति के लिए सुबह 11 बजे से बैठक होगी। इसमें मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, सामान्य प्रशासन विभाग की प्रमुख सचिव कार्मिक दीप्ति गौड़ मुखर्जी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं, तीन बजे से आइपीएस संवर्ग में पदोन्न्ति के लिए बैठक होगी। इसमें मुख्य सचिव के साथ पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव गृह डा.राजेश राजौरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।