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इंदौर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका में तैयारी, निजी अस्पतालों में कम से कम 10 प्रतिशत बिस्तर होंगे आरक्षित

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इंदौर । कोरोना वायरस और इसके नए वेरिएंट ओमिक्रोन की सक्रियता को देखते हुए तीसरी लहर की आशंका व्यक्त की जा रही है। इससे निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे निजी अस्पताल जहां 50 से अधिक बिस्तर हैं, वहां कम से कम 10 प्रतिशत बिस्तर कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इसके लिए कलेक्टर मनीषसिंह ने महामारी रोग अधिनियम-1897 और दंड प्रक्रिया संहिता-1973 की धारा-144 के तहत आदेश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार, 50 बिस्तरों से अधिक संख्या वाले सभी अशासकीय अस्पताल न्यूनतम 10 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित कर इसकी जानकारी अपर कलेक्टर डा. अभय बेड़ेकर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. बीएस सैत्या को देंगे। साथ ही शिशुओं के उपचार के लिए आरक्षित बिस्तरों की जानकारी भी देंगे।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिले के सभी चिकित्सालयों में आक्सीजन आपूर्ति निर्बाध और सरलता से हो इसके लिए 47 शासकीय और अशासकीय अस्पतालों में आक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए गए हैं। यह प्लांट चलने की स्थिति में पहुंचे हैं या नहीं, इसका भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

इसके लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संयुक्त दल बनाए गए हैं। इन दलों में अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सीएमएचओ और डाक्टरों को रखा गया है। यह दल देखेंगे कि आक्सीजन संयंत्रों में बिजली, आक्सीजन की शुद्धता, प्रेशर, प्लांट चलाने के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति आदि व्यवस्थाएं हैं या नहीं?

मप्र राज्य निर्वाचन आयोग के अशोकनगर और शिवपुरी कलेक्टर को नोटिस

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भोपाल। । बोली लगाया या बड़ा चंदा देकर निर्विरोध निर्वाचन की लोकतंत्र में अनुमति नहीं है। ऐसी किसी भी घटना पर आदर्श आचार संहिता के तहत कार्रवाई होगी। अशोक नगर की भटौती पंचायत में सरपंच के निर्विरोध निर्वाचन के लिए 44 लाख रुपये की बोली लगाए जाने का मामला सामने आने पर राज्य निर्वाचन आयोग ने कलेक्टर को नोटिस जारी कर प्रतिवेदन मांगा है। वहीं, शिवपुरी की कोलारस तहसील के इमलावदी गांव में इसी तरह निर्विरोध निर्वाचन की घटना सामने आने पर कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बीएस जामोद ने बताया कि चुनाव की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके अलावा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़कर किसी अन्य तरीके से निर्वाचन नहीं किया जा सकता है। आचार संहिता का पालन करना सबके लिए अनिवार्य है। किसी के चुनाव लड़ने के अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है।

आचार संहिता में स्पष्ट प्रविधान है कि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए निजी राशि से सामाजिक, सांस्कृतिक अथवा धार्मिक प्रयोजन से कोई निर्माण या कार्यक्रम की घोषणा नहीं की जाएगी। सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि आचार संहिता का पालन कराया जाए। साथ ही चुनाव संबंधी प्रविधान का प्रचार-प्रसार भी किया जाए।

मध्‍य प्रदेश में पंचायत चुनाव पर संशय, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-पिछड़ा वर्ग की सीट सामान्य में मर्ज करें फिर कराएं चुनाव

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भोपाल। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पंचायत चुनाव पर असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है। राज्य सरकार ने शनिवार को होने वाला जिला पंचायत के अध्यक्ष पद का आरक्षण अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। इधर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि जब आपने पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का डाटा एकत्र नहीं किया, डाटा मांगा गया तो दे नहीं पाए फिर किस बात के आधार पर आप ओबीसी आरक्षण दे रहे हैं। ओबीसी की सीट को सामान्य श्रेणी में मर्ज किया जाए ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यही निर्देश नगरीय निकाय चुनाव पर भी लागू होंगे। सालीसिटर जनरल और राज्य निर्वाचन आयोग को सख्त निर्देश दिए कि वह इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की गई तो चुनाव रद कर दिए जाएंगे। हाईकोर्ट से भी कहा कि जनवरी में नियमित सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को देखें।

जिला पंचायत अध्यक्ष के आरक्षण पर रोक

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए शनिवार को होने वाला आरक्षण अब नहीं होगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की रोशनी में प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया है। यह दूसरा मौका है जब पदों का आरक्षण करने की प्रक्रिया को स्थगित किया गया है। प्रदेश सरकार ने कमल नाथ सरकार में हुए पंचायतों के परिसीमन को निरस्त कर दिया था। इस कारण अब 2014 के आरक्षण के आधार पर चुनाव कराए जा रहे थे। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण करने के लिए कार्यक्रम घोषित किया था।

14 दिसंबर को आरक्षण की प्रक्रिया होनी थी पर हाईकोर्ट, जबलपुर में आरक्षण के मामले में दायर याचिका को देखते हुए इसे चार दिन बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण करना फिलहाल टाल दिया है। आरक्षण लाटरी निकालकर अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और सभी वर्गों की महिला के लिए किया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ले रहा कानूनी सलाह

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंचायत चुनाव को लेकर दिए आदेश के मद्देनजर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार में मंथन का दौर शुरू हो गया है। दोनों अपने-अपने स्तर पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। इसके बाद ही चुनाव के संबंध में कोई निर्णय लिया जाएगा।

ये है आरक्षण की व्यवस्था

प्रदेश के 52 जिलों के हिसाब से आठ जिला पंचायत अनुसूचित जाति, 14 अनुसूचित जनजाति और 13 अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो रही थीं। प्रदेश में आरक्षण की जो व्यवस्था है उसके तहत जिस जिले में अनुसूचित जाति-जनजाति का आरक्षण 50 प्रतिशत से कम होता है वहां अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रविधान है।

महाराष्ट्र में मिले ओमिक्रॉन के 8 नये मामले

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देश में एक तरफ कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमिक्रॉन’ से संक्रमण की संख्या बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र में आज ओमिक्रॉन के 8 और मरीज मिले हैं। इसके साथ ही प्रदेश में ओमिक्रॉन संंक्रमण के मामले बढ़कर 40 हो गये हैं। वही देश में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। ओमिक्रॉन के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में आए हैं। इसके बाद दिल्ली में 20 और राजस्थान में 17 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं तेलंगाना और कर्नाटक में 8-8 जबकि केरल और गुजरात में 5-5 केस सामने आ आए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और चंडीगढ़ में 1-1 केस मिले हैं।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश में अब तक ओमिक्रॉन के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं, और ये 11 राज्यों में पहुंच चुका है। जिन राज्यों में ओमिक्रॉन के केस बढ़ रहे हैं वहां सरकार और प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिये गये हैं, ताकि इसे और ज्यादा फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि भारत में स्थिति अभी तुलनात्मक रुप से नियंत्रित स्थिति में है, लेकिन हमें दुनिया के हालातों को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने आगाह किया है कि कोरोना का ओमिक्रॉन (Omicron) वेरिएंट जल्द ही दुनिया भर में सबसे ज्यादा मामलों वाला वेरिएंट बन सकता है।

अच्छी बात ये है कि दुनिया में वैक्सीनेशन की रफ्तार के मामले में भारत पहले स्थान पर है। अब तक देश में 135.99 करोड़ टीके की खुराक दी जा चुकी है। भारत में 87.6 फीसदी लोगों को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज लग चुकी है। यानी अमेरिका के मुकाबले भारत में करीब तीन गुना ज्यादा वैक्सीन लगाई जा चुकी है। देश में कोरोना के कुल मामलों में भी गिरावट आई है। भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 7,447 नए केस सामने आए हैं।

WHO ने COVID19 वैक्सीन Covovax के आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी

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COVID19 वैक्सीन Covovax के आपातकालीन उपयोग के लिए अब WHO ने मंजूरी दे दी है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने यह सूचना ट्वीटर हैंडल पर पोस्‍ट की है। अब Covovax नौवां COVID-19 वैक्सीन बन गया जिसे WHO से आपातकालीन उपयोग की स्वीकृति मिली। अदार पूनावाला ने शुक्रवार को कहा, “यह अभी तक COVID-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक और मील का पत्थर है, Covovax अब W.H.O है। उत्कृष्ट सुरक्षा और प्रभावकारिता दिखाते हुए, आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमोदित। कोवोवैक्स को दो खुराक की आवश्यकता होती है और यह 2 से 8 डिग्री सेल्सियस रेफ्रिजेरेटेड तापमान पर स्थिर होता है। वैक्सीन एक नए प्लेटफॉर्म का उपयोग करता है और संशोधित SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन के लिए एक जीन युक्त इंजीनियर बैकोलोवायरस बनाकर निर्मित होता है।

नीरज चोपड़ा की बायोपिक करना चाहते हैं आयुष्मान खुराना

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बॉलीवुड एक्टर आयुष्मान खुराना अलग फिल्म करने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उनकी मूवी ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ रिलीज हुई। इस फिल्म में आयुष्मान को वाणी कपूर से प्यार हो जाता है। वाणी ने फिल्म में ट्रांसजेंडर का किरदार निभाया है। आयुष्मान की हर फिल्म समाज के किसी मुद्दे पर होती है। उसमें कोई संदेश छुपा होता है। हालांकि अब एक्टर बायोपिक में काम करना चाहते हैं। खुराना ने देश के गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा की बायोपिक करने की इच्छा जाहिर की है।

आयुष्मान खुराना ने कहा कि मैं हमेशा से असल जिंदगी के लोगों और हीरोज से प्रेरित रहा हूं। अभी मैं नीरज चोपड़ा से प्रभावित हूं। एक्टर से पूछा गया कि बॉलीवुड में काफी बायोपिक बन रही हैं। क्या वो ऐसी किसी मूवीज में काम करना पसंद करेंगे। इसके जवाब में खुराना ने कहा, ‘अगर नीरज चोपड़ा पर फिल्म बनती है, तो वह लीड रोल निभाना चाहेंगे।’

उन्होंने कहा कि ओलंपिक में गोल्ड मोडल जीतने के लिए नीरज ने जिस तरह का जज्बा और परफॉर्म किया है। उसे सलाम करने की जरूरत है। अगर कभी उनकी लाइफ पर कोई बायोपिक बनती है। तो उसमें काम नहीं करते हैं, तो मैं लीड रोल निभाना चाहूंगा। आयुष्मान ने आगे कहा, ‘इस तरह की उपलब्धियों का सिनेमा पर्दे पर दिखाने की जरूरत है।’

राज्य नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा मुझे परिणाम चाहिए

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भोपाल । मध्य प्रदेश राज्य नीति एवं योजना आयोग के अधिकारियों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कहा कि अगले दो साल में जमीनी स्तर पर काम दिखाई देने चाहिए। मुझे परिणाम चाहिए। मुख्यमंत्री गुरुवार को आयोग की तीसरी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आयोग प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से कम समय में पूरी होने वाली योजनाए बनाए, नीति तय करे और उनका प्रभावी क्रियान्वयन कर जल्द परिणाम दे। सर्वोच्च प्राथमिकता के कुछ कार्यक्रम व योजनाएं तय कर उनके लक्ष्य तय करें। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष प्रो सचिन चतुर्वेदी, वित्त एवं योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) प्राप्त करने के लिए विभागों की कार्ययोजना, रणनीति, समय सीमा पेश करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारिता आंदोलन, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण, महिला नीति, सतत पर्यटन और मत्स्य निर्यात की दिशा में प्रभावी प्रयासों से लोगों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इसलिए इन पर विशेष ध्यान दें। गतिविधियों में सफल होने के लिए राज्य स्तर से लेकर जनप्रतिनिधि, दीनदयाल अंत्योदय समिति, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक की जिम्मेदारी एवं समय सीमा तय की जाए और मासिक आधार पर इनकी समीक्षा हो।

आकांक्षी विकासखंडों की जिम्मेदारी अधिकारियों को

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रत्येक आकांक्षी विकासखंड की जिम्मेदारी एक-एक अधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे तय लक्ष्य समय सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने योजनाओं और अधोसंरचना विकास से संबंधित गतिविधियों का थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराने पर विचार करने की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा …

– आयोग को विचार करना चाहिए कि मध्य प्रदेश देश की फाइव ट्रिलियन इकोनामी और सौर ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर कितना योगदान दे सकता है।

– आयोग को जन साधारण से जोड़ना जरूरी है।

– नीति निर्माण के लिए हितग्राहियों का फीडबैक, कार्यक्रमों और योजनाओं से जुड़े सभी समूहों से परामर्श लेना जरूरी।

मध्‍य प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूह चलाएंगे उचित मूल्य की दुकानें

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भोपाल। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं, धान सहित अन्य उपज खरीदने, आक्सीजन और पोषण आहार संयंत्रों का संचालन करने के बाद अब मध्य प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूह उचित मूल्य दुकानों (राशन दुकानों) का संचालन भी करेंगे। समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में शिवराज सरकार ने यह एक और कदम उठाया है। इसके लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग नियमों में संशोधन कर रहा है। इसे देखते हुए सहकारिता विभाग ने सहकारी समितियों द्वारा संचालित उचित मूल्य की दुकानों के लिए 1827 कनिष्ठ संविदा विक्रेता के पद के लिए चल रही नियुक्ति प्रक्रिया रोक दी गई है।

प्रदेश में 25 हजार उचित मूल्य की दुकानों से चार करोड़ से अधिक व्यक्तियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न् वितरित किया जाता है। अधिकांश दुकानें सहकारी समितियां संचालित करती हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किए जा रहे कार्यों की सफलता को देखते हुए इन्हें दुकानों का संचालन सौंपने का निर्णय किया है।

इसके मद्देनजर खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग नियम में संशोधन करने जा रहा है। सहकारिता विभाग ने कनिष्ठ संविदा विक्रेता के 3626 पद स्वीकृत किए थे। एमपी आनलाइन के माध्यम से चयन प्रक्रिया कराई गई। इसमें 45 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने भाग लिया था।

दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद 1799 पदों पर नियुक्तियां दी गईं। जबकि, शेष 1827 पदों पर भर्ती के लिए नियम में संशोधन करके प्रावीण्य सूची में दूसरे स्थान पर रहे अभ्यर्थियों को मौका देने का निर्णय लिया गया। जिलों में यह प्रक्रिया अभी चल रही थी। सहकारिता विभाग ने बुधवार को नियुक्ति प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब समूहों द्वारा उचित मूल्य की दुकानों का संचालन किया जाएगा तो विक्रेता भी उन्हीं का होगा इसलिए भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई है।

किसानों को मिलने चाहिए उनकी पसंद के विकल्प – पींएम मोदी

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पीएम मोदी (Narendra Modi) ने आज गुजरात के आणंद में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान किसानों को संबोधित किया. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ‘कॉन्क्लेव ऑन नेचुरल फार्मिंग’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ये कॉन्क्लेव गुजरात में जरूर हो रहा है लेकिन इसका दायरा, इसका प्रभाव पूरे भारत के लिए है. भारत के हर किसान के लिए है.

PM Modi के संबोधन की बड़ी बातें

  • कृषि सेक्टर, खेती-किसानी के लिए आज का दिवस बहुत ही महत्वपूर्ण है. मैंने देशभर के किसान भाइयों से आग्रह किया था कि प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय सम्मेलन से जरूर जुड़ें. आज करीब-करीब 8 करोड़ किसान देश के हर कोने से टेक्नोलॉजी के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं.
  • आजादी के बाद के दशकों में जिस तरह देश में खेती हुई, जिस दिशा में बढ़ी, वो हम सब हम सबने बहुत बारीकी से देखा है. अब आजादी के 100वें साल तक का जो हमारा सफर है, वो नई आवश्यकताओं, नई चुनौतियों के अनुसार अपनी खेती को ढालने का है.
  • बीज से लेकर बाजार तक, किसान की आय को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक अनेक कदम उठाए गए हैं. मिट्टी की जांच से लेकर सैकड़ों नए बीज तक, पीएम किसान सम्मान निधि से लेकर लागत का डेढ़ गुणा MSP तक, सिंचाई के सशक्त नेटवर्क से लेकर किसान रेल तक, अनेक कदम उठाए हैं.
  • खेती के साथ साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और सौर ऊर्जा, बायो फ्यूल जैसे आय के अनेक वैकल्पिक साधनों से किसानों को निरंतर जोड़ा जा रहा है. गांवों में भंडारण, कोल्ड चैन और फूड प्रोसेसिंग को बल देने के लिए लाखों करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
  • खेती में उपयोग होने वाले कीटनाशक और केमिकल फर्टिलाइजर हमें बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करना पड़ता है. इस वजह से खेती की लागत बढ़ती है, खर्च बढ़ता है और गरीब की रसोई भी महंगी होती है.
  • ये सही है कि केमिकल और फर्टिलाइजर ने हरित क्रांति में अहम रोल निभाया है. लेकिन ये भी उतना ही सच है कि हमें इसके विकल्पों पर भी साथ ही साथ काम करते रहना होगा. हमें अपनी खेती को कैमिस्ट्री की लैब से निकालकर प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ना ही होगा. प्रकृति की प्रयोगशाला तो पूरी तरह से विज्ञान आधारित ही है.
  • बीज से लेकर मिट्टी तक सबका इलाज आप प्राकृतिक तरीके से कर सकते हैं. प्राकृतिक खेती खेती में न तो खाद पर खर्च करना है और ना ही कीटनाशक पर. इसमें सिंचाई की आवश्यकता भी कम होती है और बाढ़-सूखे से निपटने में ये सक्षम होती है.
  • आज दुनिया जितना आधुनिक हो रही है, उतना ही ‘back to basic’ की ओर बढ़ रही है. इस Back to basic का मतलब क्या है? इसका मतलब है अपनी जड़ों से जुड़ना! इस बात को आप सब किसान साथियों से बेहतर कौन समझता है? हम जितना जड़ों को सींचते हैं, उतना ही पौधे का विकास होता है.
  • कृषि से जुड़े हमारे प्राचीन ज्ञान  को हमें न सिर्फ फिर से सीखने की जरूरत है, बल्कि उसे आधुनिक समय के हिसाब में तराशने की भी जरूरत है. इस दिशा में हमें नए सिरे से शोध करने होंगे, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक फ्रेम में डालना होगा.

Ola ने S1 व S1 Pro को लॉन्च की, सिंगल चार्ज में मिलेगी 181km की रेंज

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ओला इलेक्ट्रिक ने अपने इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स के दो वेरियंट Ola S1 और Ola S1 Pro की डिलीवरी शुरू कर दी है। कंपनी की ओर से जानकारी दी गई है कि चेन्नई और बेंगलुरू में एक स्पेशल इवेंट के आयोजन में Ola S1 और Ola S1 Pro के शुरुआती 100 ग्राहकों को इसकी डिलीवरी की गई है। बता दें कि पिछले महीने कंपनी की ओर से खरीदारों के लिए टेस्‍ट राइड शुरू की गई थी और ऐसा कहा गया है कि इन इलेक्ट्रिक स्कूटरों की डिलीवरी अक्‍टूबर में शुरू होनी थी, लगातार हो रही देरी के कारण इसे अब डिलीवर किया जा रहा है।

ओला इलेक्ट्रिक के सीईओ भाविश अग्रवाल ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिलीवरी को लेकर कहा कि देरी होने के लिए खेद है। आगे लिखते हुए उन्‍होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम अपनी बहुत सख्त समयसीमा और उच्च गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करें। यह बातें उन्‍होंने ट्विटर के माध्‍यम से साझा की हैं।

इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स की रेंज और फीचर्स
ओला की इलेक्ट्रिक स्‍कूटर्स के फीचर्स की बात करें तो इसमें लिथियम आयन बैट्री दी जा रही है। जो फुल चार्ज करने पर चार से पांच घंटे का समय लेती है। Ola S1 वेरियंट फुल सिंगल चार्ज पर 121 किलोमीटर का रेंज देता है। वहीं, इसका S1 Pro वेरियंट सिंगल चार्ज पर 181 किलोमीटर तक चलता है। S1 वैरिएंट महज 3.6 सेकंड्स में 0-40 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड देता है तो वहीं, इसका S1 Pro वेरियंट 3 सेकंड्स में 0-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार देता है।