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कॉलेज की आगामी तीन सत्र की फीस तय होना है, ऑडिट रिपोर्ट ने रोके फीस के प्रस्ताव

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भोपाल : प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति को सूबे के करीब 1266 कॉलेजों की आगामी तीन सत्र 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की फीस निर्धारित करना है। एआईसीटीई से मान्यता नहीं मिलने के कारण 75 फीसदी कालेज फीस फिक्स कराने के लिए दस्तावेज तैयार नहीं करा पा रहे हैं। इसकी वजह कालेज की आडिट रिपोर्ट तैयार नहीं होना है। इसके कारण फीस कमेटी में अभी तक 25 फीसदी ही आवेदन पहुंच सके हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने एनसीटीई कोर्स में प्रवेश देने काउंसलिंग शुरू कर दी है।

तकनीकी शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रस्तावित है। दोनों विभागों के करीब 850 कालेजों ने फीस निर्धारित करने दस्तावेज फीस कमेटी में जमा नहीं हुये हैं। इसकी वजह चाटर्ड एकाउंटेंट की बैलेंस सीट नहीं होना है। इसलिए अंतिम तिथि बीतने तक 75 फीसदी कालेज फीस निर्धारित करने के लिए अपने प्रस्ताव फीस कमेटी तक नहीं भेज सके हैं। उन्होंने कमेटी से कुछ समय की मांग की है।

कालेजों की समस्या और एआईसीटीई से मान्यता व निरंतरता के अभाव को देखते हुये फीस कमेटी ने आवेदन कराने की अंतिम तिथि को 31 मई तक बढ़ा दिया है। करीब 400 कालेजों के आवेदन कमेटी में पहुंच चुके हैं। इसलिये उनकी फीस निर्धारित करने की प्रक्रिया को अभी थाम दिया गया है।

इन कोर्स की निर्धारित होगी फीस
फीस कमेटी बिना बैलेंस सीट के फीस निर्धारण नहीं करेगा। इससे कालेजों की समस्याएं जरुर बढ गई हैं। फीस कमेटी प्रोफेशनल कोर्स में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फामेर्सी, विधि, आर्किटेक्चर, होटल मैनेजमेंट, नर्सिंग और मेडिकल के साथ एनसीटीई कोर्स संचालित करने वाले करीब 1266 कालेजों की फीस निर्धारित करेगा।

आॅफलाइन सुनी जाएंगी दलीलें
फीस कमेटी सभी कालेज के प्रस्ताव लेकर उनकी प्रत्यक्ष उपस्थित में सुनवाई कर फीस निर्धारित करती है। पिछले दो सालों में कोरोना संक्रमण का ज्यादा प्रभाव होने के कारण आनलाइन सुनवाई कराई गई थी। अब कोरोना संक्रमण नियंत्रण में बना हुआ है। इसलिये फीस कमेटी ने प्रत्यक्ष तौर होने वाली उपस्थित पर आफलाइन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। आफलाइन सुनवाई के दौरान कालेज अपनी दलीलें कमेटी के सामने रख पाएंगे। उनके पक्ष सुनने के बाद कमेटी उनकी फीस तय करेगी।

केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का महत्वपूर्ण और जनहितकारी निर्णय : मुख्‍यमंत्री

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भोपाल। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का महत्वपूर्ण और जनहितकारी निर्णय लिया गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक वर्ष में 12 सिलेंडरों के लिए ₹200 प्रति सिलेंडर सब्सिडी देने का निर्णय अभिनंदनीय है। इस अहम फैसले से देश के 9 करोड़ से अधिक उज्ज्वला योजना की माताओं-बहनों को सीधे लाभ प्राप्त होगा

पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी कम करना साहसिक और स्वागतयोग्य कदम: विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा की गई पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी कम करने की घोषणा केंद्र सरकार का एक साहसिक कदम है। इस जनहितैषी निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए। मैं इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री सीतारमण एवं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।

प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि ऐसे समय में जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध के दुष्प्रभाव सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं, केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल से एक्साइज ड्यूटी कम करने तथा उज्जवला योजना के गैस सिलेंडरों पर 200 रुपये की सब्सिडी देने का निर्णय एक साहसिक फैसला है। श्री शर्मा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों के कम होने से जहां देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, वहीं गैस सिलेंडरों पर दी जा रही सब्सिडी से गरीब परिवार की गृहिणियों की मुश्किलें आसान होंगी।

केंद्र ने एक्साइज़ घटाई, ₹9.5 सस्ता हुआ पेट्रोल, डीजल पर घटे 7 रुपए प्रति लीटर

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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने लोगों को राहत देते हुए शनिवार को पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क घटा दिया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी देते हुए कहा,” हम पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर की कमी कर रहे हैं. इससे पेट्रोल की कीमत 9.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 7 रुपये प्रति लीटर कम हो जाएगी.

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 200 रुपये सब्सिडी

वित्त मंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के नौ करोड़ से अधिक लाभार्थियों को अब 200 रुपये प्रति सिलेंडर (12 सिलेंडर तक) सब्सिडी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि इससे हमारी माताओं और बहनों को मदद मिलेगी.

SMS से चेक करें अपने शहर में पेट्रोल-डीजल का भाव

आप एक SMS के जरिए रोज अपने शहर में पेट्रोल-डीजल की कीमत जान सकते हैं. इसके लिए इंडियन ऑयल (IOCL) के ग्राहकों को  RSP कोड लिखकर 9224992249 नंबर पर भेजना होगा. अपने शहर का RSP कोड जानने के लिए यहां क्लिक करें.

हर दिन अपडेट होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमत के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमत प्रतिदिन अपडेट की जाती है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियां कीमतों की समीक्षा के बाद रोज पेट्रोल (Petrol) और डीजल (Diesel) के दाम तय करती हैं. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम तेल कंपनियां हर दिन सुबह विभिन्न शहरों की पेट्रोल और डीजल की कीमतों की जानकारी अपडेट करती हैं.

निर्मला सीतारमण ने किया ऐलान

केंद्र सरकार ने शनिवार शाम देशवासियों को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty on Petrol-Diesel) में बड़ी कटौती की. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने जानकारी देते हुए कहा हम पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central excise duty) में 8 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपए प्रति लीटर की कमी कर रहे हैं. इससे पेट्रोल की कीमत 9.5 रुपए प्रति लीटर लीटर और डीजल की कीमत 7 रुपए प्रति लीटर कम हो जाएगी. हालांकि, सरकार के राजस्व पर इससे ₹1 लाख रुपए का सालाना असर होगा.

आज रात से लागू होंगी नई कीमतें

शनिवार मध्यरात्री रात 12 बजे से पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें लागू होंगी. पिछले दिनों PM मोदी ने लोगों को महंगाई से राहत दिलाने के लिए राज्यों को एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) कम करने की सलाह दी थी. हालांकि, कुछ राज्यों ने ही पिछले दिनों वैट में कटौती की थी. लेकिन, अभी ज्यादातर राज्यों में वैट ज्यादा है. निर्मला सीतारमण ने कहा- हम राज्यों से भी उम्मीद करते हैं, जिन्होंने नवंबर 2021 के बाद से कोई कटौती नहीं की है, वो भी आम जनता को थोड़ी राहत देंगे.

गैस सिलेंडर पर 200 रुपए की सब्सिडी

मोदी सरकार ने पीएम उज्ज्वला योजना (PM Ujjwala Yojana) के करीब 9 करोड़ लाभार्थियों को गैस सब्सिडी देने का भी फैसला किया है. सरकार ने कहा है कि वह प्रति गैस सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी देगी. निर्मला सीतारमण ने ट्वीट में लिखा है कि इससे माताओं-बहनों को बहुत मदद मिलेगी. इससे सरकार पर सालाना करीब 6100 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा.

पीसीसी में एक से ज्यादा पद पदाधिकारी जल्द ही स्वेच्छा से छोड़ सकते हैं

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भोपाल : उदयपुर के चिंतन शिविर में हुए निर्णय का पालन अब प्रदेश कांग्रेस में स्वेच्छा से करवाया जा रहा है। इस क्रम में नाथ के बाद एक और पदाधिकारी द्वारा अपना एक पद छोड़ने के बाद अब ऐसे नेताओं पर नैतिक दबाव बन गया है जिनके पास पीसीसी में एक से ज्यादा पद हैं। ऐसे कुछ और पदाधिकारी जल्द ही अपना एक पद स्वेच्छा से छोड़ सकते हैं।

 इन पर अब होगा दबाव
कई पदाधिकारियों पर अब अपना पद छोड़ने का नैतिक दबाव बनाने की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की रणनीति दिखाई दे रही है। चिंतन शिविर से पहले उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़कर एक पद ही अपने पास रखा। इसके बाद शुक्रवार को अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने एक पद छोड़ा, वे प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष बने रहेंगे।  इन दो नेताओं के पद छोड़ने के बाद अब विधायक एवं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी,बाला बच्चन,महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल, जेपी धनोपिया जैसे नेताओं पर भी एक पद छोड़ने का दबाव बन गया है। इनके अलावा भी कांग्रेस में कई नेता हैं जो दो-दो पदों की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पटवारी और बच्चन प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं। पटवारी मीडिया विभाग के अध्यक्ष हैं, बच्चन बाल कांग्रेस के प्रभारी है। विभा पटेल प्रवक्ता हैं और जेपी धनोपिया प्रवक्ता के साथ ही अन्य पदों पर भी हैं।

14 साल से थे पद पर
सुरेंद्र चौधरी अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष पिछले 14 सालों से थे। वे 2008 में अध्यक्ष बनाए गए थे। इस दौरान वे विधानसभा चुनाव भी लड़े। करीब चार साल पहले उन्हें प्रदेश कांग्रेस का कार्यवाहक अध्यक्ष भी बनाया गया।

विधायक दल की बैठक आज शाम को
इधर कांग्रेस विधायक दल की बैठक आज शाम को होने जा रही है। डॉ. गोविंद सिंह के नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक है। इस बैठक में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की रणनीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही सिवनी सहित अन्य जिलों में हुई हिंसक घटनाओं को लेकर कांग्रेस विधायकों की सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

आय से अधिक संपत्ति मामले में पूर्व CM ओम प्रकाश चौटाला को कोर्ट ने दोषी करार किया

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नई दिल्ली : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला (Om Prakash Chautala) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आय से अधिक संपत्ति मामले में शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चौटाला को दोषी करार दिया है। अदालत में 26 मई को सजा पर बहस होनी है।

जानकारी के अनुसार,  शनिवार को हुई इस सुनवाई के दौरान ओम प्रकाश चौटाला कोर्ट रूम में ही मौजूद रहे। इससे पहले 19 मई को राउज एवेन्यू कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में सीबीआई ने 26 मार्च, 2010 को चौटाला के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था और उन्हें 1993 से 2006 के बीच कथित रूप से उनकी वैध आय से काफी अधिक 6.09 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, चौटाला परिवार इन आरोपों को हमेशा से ही राजनीति से प्रेरित बताता रहा है।

बता दें कि, साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की 3 करोड़ 68 लाख की संपत्तियों को जब्त किया था। इन संपत्तियों में ओम प्रकाश चौटाला के फ्लैट, प्लॉट और जमीन शामिल थे। जब्‍त की गईं संपत्तियां नई दिल्ली, पंचकूला और सिरसा में स्थित हैं। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज FIR को लेकर हुई थी।

चौटाला जेबीटी भर्ती घोटाले में पिछले साल जुलाई में ही तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे। अब उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ सकता है। कोर्ट के फैसले के बाद उनके समर्थकों में मायूसी छा गई है।

बता दें कि, इससे पहले ओम प्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और कई अन्य लोगों को साल 2000 में तीन हजार से ज्यादा जूनियर बेसिक शिक्षकों की गैर कानूनी तरीके से भर्ती करने के मामले में सजा सुनाई गई थी। इस मामले में पूर्व सीएम को 10 साल की जेल की सजा हुई थी।

शिक्षक घोटाला मामले में अपनी सजा पूरी करने के बाद चौटाला पिछले साल ही दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे। ताऊ देवीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे चौटाला हरियाणा की राजनीति में कद्दावर नेता माने जाते हैं।

पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने दी स्वर्ण विजेता निकहत को बधाई

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भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन (52 भारवर्ग) ने गुरुवार को विश्व चैंपियन बन गईं। उन्होंने 52 भारवर्ग के फाइनल में थाईलैंड की जितपोंग जुटामेंस को एकतरफा 5-0 से हरा दिया। तेलंगाना की मुक्केबाज भारत की ऐसी पांचवीं महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने विश्व चैंपियनशिप में सोने का तमगा अपने नाम किया है। निकहत की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, ”निकहत जरीन को महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शानदार स्वर्ण पदक जीतने के लिए बधाई। मैं मनीषा मौन और परवीन हुड्डा को भी इसी प्रतियोगिता में कांस्य पदक के लिए बधाई देता हूं।”

अमित शाह ने ट्वीट किया, ”महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने पर निकहत जरीन को बधाई। भारत को आपकी उपलब्धि पर गर्व है। आपके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।”

भारत को चार साल बाद मिला स्वर्ण
जरीन के स्वर्ण पदक के अलावा मनीषा मौन (57 भारवर्ग) और पहली बार विश्व चैंपियनशिप में खेल रही प्रवीण हुड्डा (63 भारवर्ग) ने कांस्य पदक अपने नाम किया। इन दोनों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। निकहत इस बार फाइनल में पहुंचने वालीं पहली भारतीय मुक्केबाज बनीं। सेमीफाइनल में जरीन ने ब्राजील की कैरोलिन डि अलमेडा को भी 5-0 से पराजित किया था। भारत की ओर से 12  सदस्यीय टीम ने हिस्सा लिया था। भारत ने चार वर्ष के बाद स्वर्ण पदक हासिल किया है। इससे पहले 2018 में एम सी मैरीकॉम ने जीता था।

1960 से जिस इलाके पर चीन का अवैध कब्जा, वहां पुल बना रहा ड्रैगन, हमें यह मंजूर नहीं

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भारत ने शुक्रवार को कहा कि चीन द्वारा पैंगोंग झील पर बनाया जा रहा दूसरा पुल उस क्षेत्र में है जो 1960 से उसके अवैध कब्जे में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत ने कभी भी भारत के क्षेत्र पर इस तरह के अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि हमने चीन द्वारा पैंगोंग झील पर अपने पहले के पुल के साथ एक और पुल के निर्माण की रिपोर्ट देखी है। ये दोनों पुल 1960 के दशक से चीन के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में हैं। बागची इस मामले में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे।

इस तरह के अवैध कब्जे स्वीकार नहीं
प्रवक्ता ने कहा, हमने अपने क्षेत्र पर इस तरह के अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है, न ही हमने अनुचित चीनी दावे या ऐसी निर्माण गतिविधियों को स्वीकार किया है। हमने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग हैं और हम उम्मीद करते हैं कि अन्य देश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश के सुरक्षा हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं, बागची ने कहा कि सरकार ने 2014 से विशेष रूप से सड़कों और पुलों के निर्माण सहित सीमा के बुनियादी ढांचे के विकास को आगे बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि सरकार न केवल भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बल्कि इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण के उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार भारत की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सभी घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखती है और इसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी जरूरी उपाय करती है। चीनी निर्माण से परिचित लोगों ने बुधवार को कहा कि चीन पूर्वी लद्दाख में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पैंगोंग त्सो के आसपास के क्षेत्र में दूसरा पुल बना रहा है।

कोई भी दल हो, उसे विकासवाद की राजनीति के लिए मजबूर करना है-प्रधानमंत्री

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नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत को इस तरह से देखा जाता है जहां पर लोग महत्वाकांक्षा से भरपूर हैं। अब भारत का हर नागरिक काम को पूरा होते देखना चाहता है, वह इसके परिणाम को देखना चाहता है। ऐसी स्थिति में सरकार की जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ जाती है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस एक और विषय पर हमें निरंतर काम करते रहना है वो है देश में विकास वाद की राजनीति की चौतरफा, चारो दिशा में स्थापना होनी चाहिए। कोई भी दल हो, उसको भी विकासवाद की राजनीति पर आने के लिए मजबूर करना है। आज गरीब से गरीब भी अपने आसपास लोगों को योजनाओं का लाभ मिलते देख रहा है। वो आज बहुत विश्वास से कहता है कि एक न एक दिन मुझे भी इस योजना का लाभ अवश्य मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार पर, सरकार की व्यवस्थाओं पर, सरकार के डिलीवरी मैकेनिज्म पर किसी समय देश का जो भरोसा उठ गया था। 2014 के बाद जनता जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा सरकार उसे वापस लेकर आई है। मैं सैचुरेशन की बात करता हूं, यह सिर्फ पूर्णता का आंकड़ा भर नहीं है। ये भेदभाव, भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार, के चंगुल से देश को बाहर निकालने का माध्यम है। पिछले 8 साल देश के छोटे किसानों, श्रमिकों, मध्यम वर्ग के लोगों की अपेक्षा को पूरा करने वाले रहे हैं। 8 साल के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा के रहे हैं। माता बहनों, बेटियों के सशक्तिकरण के रहे है, उनकी गरिमा को बढ़ाने वाले साल रहे हैं।

पीएम मोदी ने एनडीए सरकार के 8 साल पूरे होने पर कहा कि येह 8 साल संकल्प के रहे हैं, सिद्धियों के रहे हैं, सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। हमे आराम नहीं करना है। आज भी हम अधीर हैं, बेचैन हैं, आतुर हैं क्योंकि हमारा लक्ष्य भारत को उस उंचाई तक पहुंचाना है जहां का सपना देश की आजादी की लड़ाई में मर-मिटने वालों ने देखा था। आजादी के इस अमृत काल में देश बड़े लक्ष्य के लिए काम कर रहा है। हमे बहुत सी बाते याद रखनी हैं, भाजपा का कार्यकर्ता होने के नाते हमे चैन से बैठने का हक नहीं है, मैं देश के उज्जवल भविष्य को भलि-भांति देख रहा हूं। जब मैं आत्मविश्वास से भरे हुए देश के युवाओं को देखता हूं, कुछ कर गुजरने के हौसले के साथ आगे बढ़ती हुई बहन-बेटियों को देखता हूं तो मेरा आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है।

राज्य निर्वाचन आयोग की पीएस रेवेन्यू, मतपत्र छपाई की तैयारी शुरू

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भोपाल :सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद प्रदेश में नगरीय एवं पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई है। आज की स्थिति में नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे न होते हुए पार्षदों के माध्यम से किया जाना है। लेकिन, सूत्रों के मानें तो सरकार जल्द ही इस मामले पर कोई नया फैसला ले सकती है।

नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां तेज हो गई है। आज राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह और सचिव राज्य निर्वाचन आयोग राकेश सिंह ने राजस्व विभाग एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी और गवर्नमेंट प्रेस के कंट्रोलर श्रीमन शुक्ला से चर्चा कर मतपत्र, लिफाफे और चुनाव सामग्री की छपाई को लेकर चर्चा की। उधर नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्ष के चुनाव फिलहाल अप्रत्यक्ष रूप से ही होंगे। जनता सीधे उन्हें नहीं चुनेगी बल्कि पार्षद उनका चुनाव करेंगे।

राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह से आज मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी ने मुलाकात की। आयुक्त सिंह ने उन्हें कहा कि पंचायत आम निर्वाचन के लिए मतपत्रों के लिए सफेद, नीले, पीले और गुलाबी रंग के कागजों की व्यवस्था जिलों की मांग के अनुरूप करें। मतपत्र मुद्रण का इंतजाम किया जाए प्रारूप पत्र, लिफाफे का इंतजाम किया जए। जिले की मांग के अनुरूप मुद्रण की व्यवस्था करें। पीएस राजस्व मनीष सिंह ने उन्हें आश्वासन दिया कि सभी काम समयसीमा के भीतर कराए जाएंगे।  नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने भी राज्य निर्वाचन आयुक्त बीपी सिंह से मुलाकात की।

अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाएंगे मेयर-अध्यक्ष
कांग्रेस सरकार के शासनकाल में किए गए संशोधन के अनुसार ही इस बार नगरीय निकाय चुनावों में महापौर और अध्यक्ष के अप्रत्यक्ष चुनाव कराए जाएंगे। भाजपा सरकार ने इस संशोधन में अब तक किसी तरह का संशोधन नहीं कराया है इसलिए बिना संशोधन के पूर्व की यथा स्थिति बरकरार है। नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष सिंह का कहना है कि महापौर और अध्यक्ष के चुनाव प्रक्रिया में बदलाव के लिए किसी तरह का अध्यादेश विभाग ने प्रस्तावित नहीं किया है। इसलिए पुराने विधेयक और संशोधन के मुताबिक ही चुनाव कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव मनीष सिंह का भी कहना है महापौर और अध्यक्ष के सीधे चुनाव कराने का कोई प्रस्ताव सरकार की ओर से प्रस्तावित नहीं किया गया है।

आरक्षण के बाद अधिसूचना जारी करने मिलेगा एक सप्ताह का समय
राज्य निर्वाचन आयोग ने दोनो निकायों की अद्यतन आरक्षण रिपोर्ट 25 मई तक देने को कहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों को पंचायतों के आम चुनाव, सरपंच, पंच, जनपद पंचायत के निर्वाचन क्षेत्रों और अध्यक्ष तथा जिला पंचायत के निर्वाचन क्षेत्रों में ओबीवी आरक्षण कराने के लिए आदेश जारी कर दिए है। आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होंने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की अधिसूचना जारी करने के लिए एक सप्ताह का समय और मिलेगा।

जिलों में होगा प्रशिक्षण
राज्य निर्वाचन आयोग चुनावों के लिए 17 मई को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए एक बार प्रशिक्षण का आयोजन मैदानी अफसरों के लिए किया था। इसके बाद दूसरे दौर का प्रशिक्षण एक बार और होना है। जिलों में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों से जुड़े अफसरों का चुनाव के लिए मैदानी स्तर पर प्रशिक्षण जिलों में ही किया जाएगा।

अफसरों को व्यवस्था करने निर्देश
राज्य निर्वाचन आयुक्त मैदानी अफसरों से लगातार वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बात कर रहे है।  चुनाव से  जुड़े अधिकारियों से मतपत्र की व्यवस्था, लाजिस्टिक, मैनपावर डिप्लायमेेंट और प्रशिक्षण के लिए चर्चा की जा रही है। इसके अलावा मतदान केन्द्र और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मौजूदा व्यवस्था और आगे की जरुरत पर भी चर्चा हो चुकी है।

भारत प्रतिबंध के बाद मिस्र को गेहूं देने को तैयार हुआ

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नई दिल्ली : भारत ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद गेहूं की एक बड़ी खेप मिस्र को भेजी है. मिस्र के अनुरोध के बाद भारत की तरफ से 61,500 टन गेहूं मिस्र को भेजा गया है. गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध के बाद भारत की तरफ से ये किसी देश को दी गई सबसे बड़ी खेप है. मिस्र की तरह ही करीब 12 देशों ने भारत से अनुरोध किया है कि वो उन्हें गेहूं का निर्यात करे.

पूरे मामले से अवगत एक अधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि कम से कम एक दर्जन देश ऐसे हैं जो भारत से गेहूं के लिए राजनयिक स्तर पर अनुरोध कर रहे हैं.

मिस्र को जितना गेहूं निर्यात किया जाना था, कस्टम ने उसमें से 17,160 टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी. अधिकारी ने बताया कि भारत की तरफ से निर्यात पर प्रतिबंध प्रभावी होने से पहले ही मिस्र को भेजे जा रहे शिपमेंट के लिए क्रेडिट गारंटी सहित अनिवार्य औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थीं.

मिस्र को भारत की तरफ से गेहूं की शिपमेंट मेरा इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कर रहा है. प्रतिबंध के प्रभावी होने के बाद गेहूं की इस खेप के लिए शिप को कस्टम क्लीयरेंस दिया गया. ये खेप 17 मई को गुजरात के कांडला बंदरगाह से निकल गई थी.

घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत ने लगाया गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक भारत ने 13 मई को कहा कि वो अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है. हालांकि, भारत ने ये जरूर कहा था कि वो खाद्य संकट झेल रहे उन देशों की मदद करेगा जो उनसे मदद की मांग करेंगे. भारत ने ये भी कहा कि प्रतिबंध से पहले जिन देशों के साथ गेहूं निर्यात को लेकर सौदा किया गया है, उन देशों को भी भारत गेहूं निर्यात करेगा.

वहीं, मिस्र को गेहूं भेजे जाने की जानकारी देने वाले अधिकारी ने कहा कि भारत विदेशों से प्राप्त हो रहे गेहूं के अनुरोध पर विचार करेगा. ये देश गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारी जल्द ही अनुरोधों की समीक्षा करने के लिए चर्चा करने वाले हैं. हालांकि, अधिकारी ने ये नहीं बताया कि विदेश मंत्रालय को किन देशों से गेहूं के अनुरोध मिल रहे हैं.

भारत सरकार के अनुमानों के अनुसार, भारत में लगातार पांच वर्षों के रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के बाद पहली बार इसमें गिरावट देखने को मिल रही है. फरवरी में अनुमान लगाया गया कि उत्पादन 11.1 करोड़ टन होगा लेकिन उत्पादन 10.5 करोड़ टन ही है. यानी उत्पादन में कम से कम 5.7% की गिरावट आई है.

अप्रैल 2022 में, देश के व्यापारियों ने उच्च वैश्विक मांग और बढ़ी हुई कीमतों का लाभ उठाने के लिए विदेशों में 14 लाख टन गेहूं की बिक्री की. भारत ने वित्त वर्ष में मार्च तक रिकॉर्ड 78 लाख 50 हजार टन निर्यात किया, जो एक साल पहले की तुलना में 275% अधिक है.