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मेरठ मे पीएम मोदी ने स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी

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विधानसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के मेरठ दौरे पर हैं। पीएम ने यहां मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की आधारशिला रखी। इससे पहले पीएम मोदी औघड़नाथ मंदिर और शहीद स्मारक गए। नीचे देखिए तस्वीरें। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, विश्वविद्यालय मेरठ सलावा और कैली गांवों को कवर करने वाले क्षेत्र में लगभग 700 करोड़ की अनुमानित लागत से स्थापित किया जाएगा। चुनाव वाले राज्य में मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना प्रधानमंत्री के देश के सभी हिस्सों में खेल संस्कृति को विकसित करने और विश्व स्तरीय खेल बुनियादी ढांचे की स्थापना के दृष्टिकोण के अनुरूप होगी।

पीएम ने मेरठ की रैली में कही ये बातें

साल की शुरुआत में मेरठ आना अपने आप में मेरे लिए बहुत अहम है। भारत के इतिहास में मेरठ का स्थान सिर्फ एक शहर का नहीं है, बल्कि मेरठ हमारी संस्कृति और सामर्थ्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

मेरठ, देश की एक और महान संतान, मेजर ध्यान चंद जी की भी कर्मस्थली रहा है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम दद्दा के नाम पर किया था। आज मेरठ की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेजर ध्यान चंद जी को समर्पित की जा रही।

मेरठ के इस क्षेत्र ने स्वतंत्र भारत को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्र रक्षा के लिए सीमा पर बलिदान हो या फिर खेल के मैदान में राष्ट्र के लिए सम्मान, राष्ट्र भक्ति की अलख को इस क्षेत्र ने सदा सर्वदा प्रज्ज्वलित रखा है।

नूरपुर ने चौधरी चरण सिंह जी के रूप में देश को एक विजनरी नेतृत्व भी दिया।मैं इस प्रेरणास्थली का वंदन करता हूं, मेरठ और इस क्षेत्र का अभिनंदन करता हूं।

मैं उत्तर प्रदेश के नौजवानों को यूपी की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ये आधुनिक दुनिया की श्रेष्ठ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में से एक होगी।

प्रधानमंत्री ने खेल उत्पादों की प्रदर्शनी का किया अवलोकन, कसरत भी की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर खिलाडिय़ों से बातचीत के बाद मेरठ में बनने वाले विभिन्न खेल उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान पीएम खेल कंपनियों के प्रत्येक स्टाल पर गए और खेल उत्पादों की बारीकी से जानकारी ली। पीएम ने एक स्टाल पर कसरत भी की। उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे।

UP assembly election: AAP का चुनावी शंघनाद, लखनऊ में केजरीवाल की रैली

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल रविवार दोपहर लखनऊ के स्मृति उपवन मैदान में एक रैली को संबोधित करेंगे। यूपी चुनावों में AAP नेता भी दम लगा रहे हैं और प्रदेशभर में रैलियां करने के साथ ही 300 यूनिट मुफ्त बिजली, 10 लाख नौकरी और बेरोजगारी भत्ता जैसे वादों पर लोगों से समर्थन पत्र ले रहे हैं। केजरीवाल की यह रैली पहले 28 नवंबर, 2021 को होनी थी, लेकिन टीईटी परीक्षा के कारण रद्द कर दी गई।

आर्थिक बोझ झेल रही संस्थाओं को राहत पैकेज देगी शिवराज सरकार

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भोपाल। किसानों का हित सुरक्षित रखते हुए आर्थिक बोझ झेल रही संस्थाओं को कर्ज से उबारने के लिए शिवराज सरकार मुख्यमंत्री फसल उपार्जन योजना लागू करने जा रही है। इस योजना में संस्थाओं को क्षतिपूर्ति दिया जाएगा। दरसअल किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उपज का समर्थन मूल्य दिलाने के लिए सरकार गेहूं, धान, मूंग से लेकर अन्य फसल की खरीद करती है लेकिन खरीद करने वाली एजेंसियां कर्ज के बोझ से दबी जा रही हैं। नागरिक आपूर्ति निगम और राज्य सहकारी विपणन संघ की देनदारी 73 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। किसानों को भुगतान करने के लिए एजेंसियां भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण लेती हैं।

केंद्र सरकार सेंट्रल पूल में जब उपज ले लेती है तो फिर उसका भुगतान होता है। इसमें तीन-चार साल लगते हैं। इस दौरान भंडारण, सूखत, परिवहन, मजदूरी, बारदाना सहित कुछ अन्य नुकसान होते हैं, जिनकी प्रतिपूर्ति नहीं होती है। उपार्जन व्यवस्था प्रभावित न हो और किसानों के हित सुरक्षित रहें, इसके लिए शिवराज सरकार मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना लागू करने जा रही है। इसमें प्रति वर्ष तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रविधान रहेगा, जिससे एजेंसियों की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

इस कारण पड़ी जरूरत

प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होने के बाद खेती के क्षेत्र में वृद्धि हुई है। उत्पादन बढ़ने के कारण किसानों में समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की प्रवृत्ति बढ़ी है। वर्ष 2008-09 में गेहंू 15 लाख 70 हजार टन खरीदा गया था, वो 2020-21 में 129 लाख टन से अधिक हो गया है। इसी तरह धान 2008-09 में दो लाख 35 हजार टन खरीदा गया, जो 2020-21 में 37 लाख 29 हजार टन हो गया। इसी तरह दो-तीन साल में दलहल और तिलहन का उपार्जन 15.27 लाख से बढ़कर 24.30 लाख टन हो गया।

मिलिंग की पुख्ता व्यवस्था न होने से धान को गोदाम में रखना पड़ता है, जबकि केंद्र सरकार केप में रखने की राशि प्रति क्विटल प्रतिमाह दो रुपये चालीस पैसे देती है। गोदाम में रखने पर 10 रुपये से ज्यादा खर्च आता है। सूखत भी तीन से चार प्रतिशत होता है, जबकि केंद्र सरकार एक प्रतिशत ही मान्य करती है। नागरिक आपूर्ति निगम ने वर्ष 2021-22 में दो हजार 578.13 करोड़ और राज्य सहकारी विपणन संघ ने तीन हजार 185.28 करोड़ रुपये की क्षति का दावा किया है।

यह फायदा होगा

योजना से राज्य के किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उपार्जन एजेंसियों को धनराशि उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे शासन पर ब्याज भार में कमी आएगी। एजेंसियों को उपार्जन में जो नुकसान होता है, उसकी पूर्ति हो सकेगी और खाद्यान्न् उपार्जन का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।

इन नुकसानों की होगी प्रतिपूर्ति

– प्राकृतिक आपदा से क्षति

– केंद्र सरकार के आवंटन से अधिक उपार्जन में होने वाले नुकसान

– मिलिंग के अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का भुगतान

– सूखत, भंडारण, ब्याज, परिवहन, प्रशासकीय व्यय और मजदूरी की प्रतिपूर्ति

पश्चिम बंगाल में आंशिक लॉकडाउन, सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, पार्क, जिम, स्पा, सैलून आदि बंद

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पश्चिम बंगाल:  कोरोना के खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने आंशिक लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। प्रदेश में सोमवार से सभी स्कूल, कॉलेज, पार्क, जू, स्पा, सैलून, जिम आदि बंद रहेंगे। दिल्ली और मुंबई से होनेवाली फ्लाइट ऑपरेशन को भी हफ्ते में सिर्फ दो दिन के लिए सीमित कर दिया है। नये आदेश के मुताबिक 5 जनवरी से हफ्ते में सिर्फ सोमवार और मंगलवार को ही उड़ानों के आने-जाने की इजाजत होगी। देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। दिल्ली और मुंबई में संक्रमण के मामले 48 घंटे में दोगुना हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में भी केसेज ने रफ्तार पकड़ ली है। कोलकाता में कोविड-19 के केस पिछले तीन दिनों में 3 गुना हो गए हैं। शुक्रवार को ओमिक्रोन की संख्या 1954 हो गए। वहीं सरकार ने 3 जनवरी को नेताजी इंडोर स्टेडियम में छात्र सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है।

सिस्टम अलर्ट की घोषणा

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग और कोलकाता नगर निगम ने कोरोना वायरस के रोकने के लिए सिस्टम अलर्ट की घोषणा की है। हाईकोर्ट और जिला अदालतों ने 3 जनवरी से वर्चुअल मोड में काम करने का फैसला किया है। वहीं कैबिनेट मंत्री अरूप विश्वास भी कोरोना संक्रमित हो गए है। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

स्वास्थ्य सचिव ने दी जानकारी

राज्य स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम ने बताया कि सिस्टम अलर्ट में हॉस्पिटल, स्वास्थ्य प्रबंधन, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को शामिल किया गया है। जिससे वे संक्रमण पर काबू पाने के लिए अपनी कार्ययोजना के साथ तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि अस्पताल कर्मचारियों, स्वास्थ्य मैनेजमेंट, प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को सतर्क कर दिया गया है। उन्हें योजना के साथ तैयार रहने को कहा गया। वे कोरोना केस की संख्या में वृद्धि देखते हुए अपने क्षेत्रों में कार्रवाई कर सकते है।

कई कार्यक्रम निलंबित

वहीं एक अधिकारी ने कहा कि द्वार पर सरकार और दरवाजे पर राशन के कार्यक्रम जो अगले सप्ताह से विभिन्न जिलों में शुरू होने वाले थे। महामारी के मद्देनजर निलंबित कर दिया गया है। इधर राज्य सचिवालय में शीर्ष स्तर के सूत्रों के मुताबिक सरकार अभी लॉकडाउन या सख्त प्रतिबंध नहीं लगाएगी। हालांकि लोगों को इकट्ठा होने से रोकेगी। ट्रेन, बस या मेट्रो सर्विस तुरंत रद्द नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ने पर चरणों में प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

अब सिर्फ इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदेगी महाराष्ट्र सरकार-मंत्री आदित्य ठाकरे

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महाराष्ट्र:  महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार ने नए साल में एक और नई घोषणा की है। प्रदेश के पर्यावरण मंत्री ने ऐलान किया कि 1 जनवरी से राज्य सरकार की ओर से खरीदी जानेवाली या भाड़े पर ली जानेवाली सभी गाड़ियां इलेक्ट्रिक ही होंगी। वैसे राज्य सरकार ने यह फैसला पहले ही ले लिया था, इसे 1 अप्रैल 2022 से लागू किया जाना था। लेकिन आदित्य ठाकरे ने साफ कर दिया दिया कि 1 जनवरी से ही ये लागू होगा। इस फैसले के तहत राज्य की सभी सरकारी गाड़ियां इलेक्ट्रिक से चलने वाली होंगी। आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘महाराष्ट्र सरकार ने पर्यावरण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहने और नागरिकों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से फैसला किया है कि अब 1 अप्रैल की बजाए 1 जनवरी 2022 से ही सरकार/शहरी निकाय/निगम के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही खरीदे या भाड़े पर लिए जाएंगे।’

आदित्य ठाकरे ने इस फैसले का समर्थन करने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट के प्रति भी आभार व्यक्त किया है। आपको बता दें कि एक दिन पहले ही मुंबई में 500 स्क्वायर फुट तक के घरों के प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने के फैसला लिया गया था। वैसे, केन्द्र सरकार भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए काफी प्रयास कर रही है और राज्य सरकार के इस फैसले को इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

सीएम शिवराज ने किसान सम्मान निधि वितरण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का माना आभार

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भोपाल। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा, आज नए साल के पहले दिन यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसान सम्मान निधि की 10वीं किस्त में देश के 11.37 करोड़ किसानों को 20 हजार करोड़ रुपये आनलाइन ट्रांसफर करने के लिए ह्रदय से आभार, अभिनंदन। सीएम शिवराज ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के मंत्र से देश को नई ऊर्जा दी है। हमारी बेटियां हर क्षेत्र में शिखर प्राप्त कर रही हैं, इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। मध्य प्रदेश में बेटियों के लिए लाडली लक्ष्मी सहित कई प्रभावशाली योजनाएं जारी हैं। उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए अंकुर अभियान के अंतर्गत पौधरोपण एवं सौर ऊर्जा के उत्पादन व उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यावरण की रक्षा के आपके संकल्प की सिद्धि में हेतु मध्य प्रदेश अपना हरसंभव योगदान देगा।

सीएम शिवराज ने कहा, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश के किसानों की उन्नति के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। किसानों को मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 4 हजार प्रति वर्ष व जीरो ब्याज पर कर्ज व कृषि यंत्रों की खरीदी के लिए सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

उनके मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश में विगत कई वर्षों से जैविक खेती को बढ़ावा देने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। मध्य प्रदेश में 16 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है और इसका निर्यात 2020-21 में ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक का हुआ है। मध्य प्रदेश यह संकल्प लेता है कि प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में किसानों के साथ संवाद कर हरसंभव उपाय एवं नवाचार करने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रधानमंत्री ने किसान कल्याण हेतु जो संकल्प लिये हैं, उनकी सिद्धि के लिए मैं और मध्य प्रदेश के किसान मिलकर हरसंभव प्रयास करने के लिए संकल्पित हैं।

माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में मारे गए सभी 12 श्रद्धालुओं की पहचान

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माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ में मारे गए सभी 12 श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। इसी बीच प्रदेश के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हादसे में मारे जाने वाले श्रद्धालुओं के परिजनों को 10 लाख रुपये और घायलों को दो लाख रुपये देने का ऐलान किया है। भवन में भगदड़ में मारे गए 12 श्रद्धालुओं की पहचान कर ली गई है। इस बीच, उपराज्यपाल ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके साथ ही मृतकों के स्वजन को 10-10 लाख रुपये व घायलों को दो-दो लाख रुपये देने की घोषणा की है। मृतकों व घायलों में अधिकतर श्रद्धालु दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के थे। घायल श्रद्धालुओं को कटड़ा के नारायण अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हादसा भवन के गेट नंबर तीन के पास हुआ। उस समय भवन माता के श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। पुलिस चौकी से कुछ ही दूर क्लाक रूम के बाहर से श्रद्धालु आ-जा रहे थे। जिस जगह यह हादसा हुआ वहां रास्ता काफी तंग है। वहां पर भीड़ इतनी थी कि श्रद्धालु आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।

महाराष्‍ट्र के कोल्हापुर से 18 मजदूरों को वापस लेकर आई सिवनी पुलिस

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सिवनी। जबलपुर के बरगी व जिले के लखनादौन, धूमा क्षेत्र से करीब एक हजार किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में मजदूरी करने गए 18 मजदूरों को जिले की लखनादौन पुलिस वापस लेकर आई है। सभी मजदूरों का शनिवार को मेडिकल परीक्षण कराने के बाद कोरोना रैपिड टैस्ट कराया, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आने पर गांव वापस लाकर अपने परिवार से मिला दिया गया है।

गन्‍ना कटाई कराने ले गया था : दरअसल बरगी, लखनादौन व धूमा क्षेत्र के करीब 18 मजदूरों को गांव का परिचित एक व्यक्ति एडवांस मजदूरी राशि देकर सिवनी से महाराष्ट्र के कोल्हापुर गन्ना कटाई कराने ले गया था, लेकिन वहां जाने के बाद मजदूरों से गन्ना कटाई कराने की बजाए ईट बनवाई जा रही थी।इसकी जानकारी मिलने पर मजदूरों के स्वजनों ने शिकायत जबलपुर पुलिस से की थी। जबलपुर पुलिस ने सिवनी पुलिस को मामले की जानकारी दी। इसके बाद एसपी कुमार प्रतीक ने लखनादौन पुलिस को थाना स्तर पर टीम गठित कर मजदूरों को वापस लाने कोल्हापुर जाने के निर्देश दिए थे। लखनादौन से कोल्हापुर पहुंची पुलिस टीम शुक्रवार देर शाम अलग-अलग गांव के सभी 18 मजदूरों को वापस लखनादौन लेकर आई। शनिवार को सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ ही कोरोना का रैपिड टेस्ट कराया गया।

जांच के बाद होगी कार्रवाई : पुलिस अधिकारियाें का कहना है कि एडवांस राशि देकर मजदूरों को कोल्हापुर ले जाया गया था। फिलहाल इस मामले में किसी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। मजदूरों के बयान लेकर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा, यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो प्रकरण दर्ज कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

छिंदवाड़ा में ओमिक्रोन, नीदरलैंड से आई युवती कोरोना पाजिटिव

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छिंदवाड़ा। जिले में फिर से कोरोना ने दस्तक दे दी है। कोरोना के ओमिक्रोन वैरिएंट का मरीज छिंदवाड़ा में मिला है। 22 वर्षीय युवती जो कि परासिया मार्ग स्‍थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट में रह रही थी, उसकी रिपोर्ट दिल्ली में कोरोना पाजीटिव आई है। युवती पांच दिन पहले ही नीदरलैंड से भारत आई थी, जिसकी जांच दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई थी। युवती में ओमिक्रोन वेरिएंट के लक्षण मिले हैं। पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी त्रिमूर्ति अपार्टमेंट पहुंचे तथा युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार 22 वर्षीय युवती 26 दिसंबर को नीदरलैंड से भारत आई थी। इस दौरान युवती की जांच दिल्ली एयरपोर्ट पर की गई थी। यह युवती 27 दिसंबर को दिल्ली से छिंदवाड़ा आई। कोरोना गाइडलाइन के अनुसार युवती को होम आइसोलेशन में रखा गया था। 30 दिसंबर को दिल्‍ली में युवती की जांच रिपोर्ट आई, जिसमें कोरोना के ओमिक्रोन वेरियंट के लक्षण मिले। इसके बाद दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा युवती से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका नंबर बंद था। तब छिंदवाड़ा के जिला प्रशासन से संपर्क किया गया। सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हुआ तथा युवती को खोजकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। युवती को स्वास्थ्य को लेकर कोई समस्या नहीं है, युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद जिला प्रशासन ने उसके संपर्क में आए सभी सदस्यों को होम क्वारेंटाइन कर दिया है। युवती के संपर्क में आए अन्‍य लोगों की भी जानकारी जिला प्रशासन जुटा रहा है।

10 जनवरी से बुजुर्गों और हेल्थ वर्कर्स को लगेगी कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज

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देश में 10 जनवरी से हेल्थ वर्कर्स और 60 साल के ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को कोविड वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज लगना शुरू होगी। ऐसे समय में जब दुनिया कोविड महामारी के नए ओमिक्रोन वैरिएंट से लड़ रही है। भारत सरकार नए दिशा-निर्देशों को लागू कर स्थिति काबू करने में जुटी है। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट के खिलाफ लड़ने के लिए बूस्टर डोज का विचार पहले की आ चुका है। कई देशों में नागरिकों को लगने भी लगा है। हालांकि भारत में इसे बूस्टर डोज नहीं बता रहा हैं। 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन को लेकर बड़ी घोषणा की थीं। उन्होंने इसे एहतियाती खुराक बताया था। वहीं 3 जनवरी से 15 से 18 साल के बच्चों को भी कोवैक्सीन लगना शुरू होगी। सरकार ने कोविड वैक्सीन की तीसरी डोज के लिए गाइडलाइन भी जारी की है। आइए जानते हैं कोरोना वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज से जुड़ी हर बात।

किन लोगों को लगेगी प्रिकॉशन डोज?

हेल्थकेयर वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग प्रिकॉशन डोज लगवा सकते हैं। ये डोज दूसरी खुराक के 9 महीने बाद दी जाएगी। तीसरी डोज के लिए पात्र लाभार्थियों को एक मैसेज भी आएगा। जिससे पता चल सके कि उन्हें तीसरी वैक्सीन कब लगवानी है।

इन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी?

60 साल और उससे अधिक आयु के नागरिकों को प्रिकॉशन डोज के लिए डॉक्टर से कई सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की जरूरत नहीं है। हालांकि ऐसे व्यक्तियों को तीसरी खुराक लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेने को कहा गया है।

कैसे करें बुकिंग?

कोविन प्लेटफॉर्म पर वैक्सीनेशन स्लॉट बुक कर सकेंगे। गाइलाइन्स के अनुसार वैक्सीन सेंटर में जाकर भी स्लॉट बुक कर सकते हैं।

क्या प्रिकॉशन डोज का सर्टिफिकेट मिलेगा?

लाभार्थियों को प्रिकॉशन डोज लगने के बाद सर्टिफिकेट दिए जाएगा। वहीं तीसरी खुराक सरकारी सेंटर्स पर फ्री में लगेगा। प्राइवेट अस्पताल पर इसके लिए पैसे देने पड़ेंगे।

भेल की जमीन पर एक लाख लोगों को रोजगार देने का सरकार ने बनाया प्लान

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भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कारखाना स्थापना के बाद से अब तक भारत हेवी इलेक्ट्रीकल्स लिमिटेड धीरे-धीरे अपना कारोबार समेट चुका है। कर्मचारियों से लेकर प्रॉडक्शन तक 25 फीसदी से भी कम रह गया है। ऐसे में यदि भेल प्रबंधन अपनी अनुपयोगी जमीन राज्य सरकार को वापस कर दे तो उद्योग विभाग यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने की महती योजना को अंजाम दे सकता है।

राजस्व विभाग के आदेश पर पिछले वर्ष  भोपाल कलेक्टर भेल को दी गई छह हजार एकड़ जमीन में से अनुपयोगी पड़ी 1161 एकड़ जमीन वापस राजस्व विभाग के नाम से दर्ज कर चुके है लेकिन भेल प्रबंधन इस पर हाईकोर्ट से स्टे ले चुका है। भेल भोपाल की जमीन वापस नहीं देना चाहता है। इसके चलते राजधानी भोपाल का औद्योगिक विकास अटक गया है।

भेल यदि राज्य सरकार को जमीन वापस करे तो यहां एक लाख लोगों को रोजगार देने के लिए नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्लान तैयार  है। औद्योगिक नीति निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला का कहना है कि गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र से लगी हुई भेल की जमीन है। यदि यह जमीन मध्यप्रदेश को वापस मिल जाए तो यहां सूचना र्प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं, तकनीकी सेवाओं, स्टार्ट अप, एप आधारित सेवाएं, एजूकेशन, बॉयोटेक्नालॉजी आधारित उद्योग, नालेज आधारित सेवाएं जिनमें बिल्डिंग में बैठकर काम करना होता है। इन्हें शुरु करने का प्लान तैयार है। इसमें एक से डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार मिल सकता है। जमीन मिल जाए तो डिटेल प्लान भी हम तैयार करेंगे।

प्रमुख सचिव राजस्व के निर्देश पर  भेल की रिक्त पड़ी 1161 एकड़ जमीन राजस्व विभाग के नाम पर कलेक्टर ने दर्ज कर दी थी लेकिन भेल ने इस पर हाई कोर्ट से स्टे ले लिया हे।  कोर्ट में भेल को स्टे इस आधार पर मिला है कि जमीन दिए जाने के लिए केन्द्र सरकार और भेल के बीच अनुबंध हुआ था ऐसे में राज्य सरकार केन्द्र की अनुमति के बिना यह जमीन वापस नहीं ले सकती है। इधर राजस्व विभाग और जिला प्रशासन कोर्ट में यह जवाब पेश कर चुका है कि कंपनी को जमीन नि:शुल्क दी गई थी। उसका प्रीमियम और भू भाटक भी राज्य शासन ने ही भरा था। केन्द्र और राज्य के बीच इस जमीन को लेकर कोई अनुबंध नहीं हुआ था। भेल प्रबंधन भी वर्ष 2002 में राज्य शासन को लिखकर दे चुका है कि खाली पड़ी तीन हजार एकड़ जमीन शासन वापस लेकर उसकी राशि वापस कर दे।

कांग्रेस की कैलाशनाथ काटजू सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1959 से 1962 के बीच भेल को 6045 एकड़ जमीन नि:शुल्क आबंटित की गई थी। इसमें से चार हजार एकड़ जमीन पर कारखाना और आवासीय परिसर बनाया गया था। दो हजार एकड़ जमीन शुरु से ही खाली पड़ी है। इसमें से 764.5 एकड़ से अधिक जमीन पर अतिक्रमण हो चुका है।

भोपाल के एसडीएम हुजूर आकाश श्रीवास्तव का कहना है कि भेल की जो अनुपयोगी जमीन राजस्व विभाग के नाम पर दर्ज की गई है उस पर भेल ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। स्टे वेकेट कराने और अर्ली हियरिंग के लिए प्रशासन का प्रस्ताव कोर्ट में लगा हुआ है।