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कंगना रनौत ने किताब का अंश साझा कर ‘भीख में आजादी’ बयान को किया डिफेंड

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नई दिल्ली 
फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत आजादी भीख में मिलने का बयान देकर विवादों में घिर गई हैं। अब कंगना ने कहा है कि अगर वह गलत साबित होती हैं तो पद्मश्री अवॉर्ड लौटा देंगी। कंगना ने अपने बचाव में जो तर्क दिया है, वह और भी चौंकाने वाला है। गौरतलब है कि पद्मश्री मिलने के एक दिन बाद ही कंगना ने विवादास्पद बयान दिया था। फिल्म अभिनेत्री ने कहा था कि असली आजादी तो 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद मिली है। 1947 में मिली आजादी तो भीख में मिली थी। इसके बाद देशभर में कंगना का विरोध हो रहा है।

साझा किया किताब का अंश
अब एक बार फिर कंगना ने भीख में मिली आजादी वाले अपने बयान को डिफेंड किया है। फिल्म अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक किताब के कुछ अंश साझा किए हैं। इस किताब का नाम ‘जस्ट टू सेट द रिकॉर्ड्स स्ट्रेट’ है। कंगना ने लिखा है कि 1857 में आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी। इसमें सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर ने हिस्सा लिया था। लेकिन 1947 में आजादी के लिए कौन सा युद्ध लड़ा गया था? मुझे तो इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर कोई मुझे इस बारे में जानकारी दे दे तो मैं माफी तो मांगूंगी ही, साथ ही पद्मश्री भी लौटा दूंगी।

भाजपा नेता भी विरोध में
इस बीच देशभर में कंगना रानाउत का विरोध जारी है। नेताओं और तमाम अन्य लोगों ने कंगना रानाउत के बयान पर आपत्ति जताई है। दिल्ली भाजपा के नेता प्रवीण शंकर कपूर ने गुरुवार को इस बारे में ट्वीट किया था। उन्होंने लिखा कि एक स्वतंत्रता सेनानी का बेटा होने और आजादी के लिए लड़ाई लड़ने वाले वाले परिवार से आने के नाते मैं कंगना रनौत के बयान को स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान मानता हूं। मैं चाहता हूं कि भारतीय न्याय व्यवस्था इस मामले का खुद से संज्ञान ले। उन्होंने शुक्रवार को पीटीआई से बातचीत में कहा कि निजी स्तर पर ट्वीट करके यह विरोध जताया है। वहीं महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने भी कंगना रनौत के बयान को गलत बताया है।

इंदौर में फूंका गया पुतला
वहीं इस बयान के बाद देशभर में कंगना का विरोध हो रहा है। इंदौर में स्वतंत्रता सेनानियों के एक ग्रुप ने कंगना का पुतला जलाया। एमजी रोड पर किए गए इस विरोध के बाद इसमें भाग लेने वाले आशा गोविंद खादीवाला ने कहा कि कंगना को अपने बयान को माफी मांगनी ही चाहिए। वहीं जोधपुर में एक महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने फिल्म अभिनेत्री के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। जोधपुर महिला कांग्रेस कमेटी की प्रेसीडेंट मनीषा पंवार ने अपनी शिकायत में कहाकि कंगना ने आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ-साथ देश के लोगों का भी अपमान किया है।

मणिपुर माओवादी हमले में कर्नल विप्लव त्रिपाठी,उनकी धर्मपत्नी और पुत्र हुए शहीद

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रायपुर:  मणिपुर राज्य के चुराचन्दपुर जिले के ग्राम सियालसी के समीप हुए माओवादी हमले में दैनिक बयार रायगढ़ के सम्पादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री सुभाष त्रिपाठी के पुत्र कर्नल विप्लव त्रिपाठी, बहू श्रीमती अनुजा त्रिपाठी एवं पांच वर्षीय पौत्र अबीर त्रिपाठी शहीद हो गए। यह घटना आज पूर्वान्ह 11.30 बजे उस वक्त घटित हुई, जब कर्नल विप्लव त्रिपाठी, बिहांग काय-पोस्ट का विजिट कर वापस लौट रहे थे। सियालसी गांव के पास एम्बुस लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया, जिसमें कर्नल त्रिपाठी और उनके परिवार के लोग शहीद हो गए। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने माओवादी हमले को कायराना कृत्य करार देते हुए इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। उन्होंने कर्नल विप्लव त्रिपाठी की शहादत को नमन करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

भारतीय रेलवे का फैसला, स्पेशल की जगह चलेंगी नियमित ट्रेने

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने कोविड-19 संक्रमण में निरंतर गिरावट के मद्देनजर यात्रियों को राहत देते हुए कोरोना पूर्व की व्यवस्था को बहाल करने का निर्णय लिया है। इससे मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के नाम से स्पेशल हट जाएगा और वह पुरानी व्यवस्था के अनुरूप चलेंगी। रेलवे बोर्ड द्वारा बीते शुक्रवार, 12 नवंबर को जारी एक सर्कुलर के अनुसार, मंत्रालय ने निर्णय लिया है कि सभी नियमित टाइम टेबल ट्रेनें जो वर्तमान में एएसपीसी (मेल/एक्सप्रेस स्पेशल) और एचएसपी (हॉलिडे स्पेशल) ट्रेन सेवाओं के रूप में चल रही हैं वह नियमित नंबरों के साथ वर्किंग टाइम टेबल (वर्तमान समय सारिणी) के आधार पर चलेंगी। ट्रेनों के आगे से स्पेशल हटने के साथ ही सभी ट्रेन नंबरों के आगे लगे शून्य भी हट जाएंगे।

सॉफ्टवेयर में किये जायेंगे परिवर्तन

सर्कुलर में कहा गया है, “ऐसी ट्रेनों की दूसरी श्रेणी विशेष मामले में किसी भी छूट को छोड़कर आरक्षित के रूप में चलती रहेगी, पहले से बुक किए गए टिकटों पर रेलवे द्वारा वसूल किए जाने वाले किराए में कोई अंतर या पहले से बुक किए गए यात्रियों के कारण किसी भी रिफंड की अनुमति नहीं दी जाएगी। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र से अनुरोध किया गया है कि सॉफ्टवेयर में आवश्यक परिवर्तन करें। प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे यह सुनिश्चित करेगा कि सभी संबंधित कर्मचारियों को विवरण उपलब्ध कराने और डेटाबेस में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है।

रेल मंत्रालय के अनुसार रेलवे अभी 1744 ट्रेन चला रही है स्पेशल के रूप में आगे 0 लगा है। पुरानी व्यवस्था लागू होने पर रेलगाड़ी संख्या में शून्य हट जाएगा। इन विशेष ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को सामान्य ट्रेनों की तुलना में 30 फीसद ज्यादा किराया देना पड़ता था।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान कहा कि कोविड प्रोटोकॉल में रेलवे ने ट्रेनों को स्पेशल कैटेगरी में चलाने की शुरूआत की थी, जिसका उद्देश्य ट्रेनों में भीड़ को नियंत्रित कर यात्रियों को सुविधा देना था। रेल मंत्री के अनुसार, फिलहाल 95 फीसदी मेल एक्सप्रेस ट्रेनें पटरी पर लौट चुकी हैं। इनमें से करीब 25 फीसदी ट्रेनें स्पेशल कैटेगरी में चल रही हैं।

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मुंबई
मनी लॉन्ड्रिंग केस में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को आज भी राहत नहीं मिली है। मुंबई की पीएमएलए अदालत ने शुक्रवार को अनिल देशमुख को 15 नवंबर तक प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की हिरासत में भेज दिया है।

पिछले हफ्ते हुए थे गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने देशमुख को पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया था। विशेष अवकाशकालीन अदालत ने छह नवंबर को 71 वर्षीय राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता देशमुख को न्यायिक हिरासत में भेजा था और ईडी की हिरासत की मांग खारिज कर दी थी। इसके एक दिन बाद ही बंबई उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए देशमुख को 12 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया था। पूर्व मंत्री को शुक्रवार को पीएमएलए की अदालत के न्यायाधीश एचएस सठभाई के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उनकी हिरासत की अवधि 15 नवंबर तक बढ़ा दी।

ये हैं आरोप
देशमुख और अन्य के खिलाफ ईडी का मामला मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये की वसूली के आरोपों के मद्देनजर सीबीआई द्वारा मामला दर्ज करने के बाद सामने आया था। मार्च में पुलिस आयुक्त के पद से हटाए जाने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने सचिन वाझे को महानगर में बार और रेस्तरां से एक महीने में 100 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही करने के लिए कहा था। इसके बाद देशमुख ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि सिंह ने मुंबई पुलिस प्रमुख के पद से हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ आरोप लगाए थे। आरोप दुर्भावनापूर्ण बयानों पर आधारित हैं।

केंद्र सरकार के निर्णय पर अब हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रानी कमलापति स्टेशन

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भोपाल: भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर गोंड राज्य गिन्नौरगढ़ की रानी कमलापति के नाम पर किया गया। जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने उक्त निर्णय किया। हबीबगंज स्टेशन अब रानी कमलापति स्टेशन कहलायेगा।
रानी कमलापति गोंड ही नहीं अपितु समग्र समाज का मान सम्मान और गौरव का नाम है। जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर यह सबसे बड़ी सौगात है।

दरअसल 18 वीं सदी में भोपाल क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन था। ऐसा माना जाता है कि उस समय गॉड राजा सूरज सिंह शाह के पुत्र निजाम शाह से रानी कमलापति का विवाह हुआ था। रानी कमलापति ने अपने पूरे जीवन काल में अत्यंत बहादुरी और वीरता के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया। रानी कमलापति की स्मृतियों को बनाए रखने एवं उनके बलिदान के प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति के स्वरूप जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष में हबीबगंज रेलवे स्टेशन भोपाल का नामकरण रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के नाम पर किए जाने का प्रस्ताव राज्य शासन ने केंद्र सरकार को भेजा था जिसे केंद्र ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी मंदसौर जिले के दोनों मंत्री करेंगे

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भोपाल। आगामी 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भोपाल आगमन पर मंदसौर जिले के दोनों मंत्रीगण उनकी अगवानी एवं सत्कार करेंगे।

 

 

 

 

राज्य शिष्टाचार अधिकारी द्वारा जारी मिनिस्टर इन वेटिंग सूची में बताया गया कि वाणिज्यिक कर, वित्त, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री जगदीश देवड़ा एयरपोर्ट भोपाल पर, नवीन, नवकरणीय ऊर्जा एवं पर्यावरण मंत्री  हरदीप सिंह डंग बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय हेलीपैड पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगवानी करेंगे।

 

 

 

 

इसके साथ ही जंबूरी मैदान हेलीपैड पर सहकारिता मंत्री  अरविंद सिंह भदोरिया, जंबूरी मैदान कार्यक्रम में नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह एवं हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर मिनिस्टर इन वेटिंग रहेंगे।

15 नवंबर से फिर शुरु होगी 97 हजार आंगनवाड़ियाँ, मिलेगा गर्म भोजन

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भोपाल: कोरोनाकाल में लंबे समय तक बंद रही प्रदेश की 84 हजार मुख्य आंगनबाड़ी और तेरह हजार मिनी आंगनबाड़ियां एक बार फिर 15 नवंबर से खुलने जा रही है।

कोविड प्रोटोकाल के पालन के साथ शुरु होंने वाली इन आंगनबाड़ियों में आइये, आंगनबाड़ी कार्यक्रम का आयोजन कर समुदाय के सहयोग से स्थानीय खाद्य विविधता पर आधारित विशेष ताजा गर्म भोजन तैयार कर बच्चों को परोसा जाएगा।

महिला बाल विकास विभाग ने इसके लिए एसओपी जारी की है।आंगनबाड़ियों में तीन से छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों को लाने के लिए स्थानीय जिला स्तरीय क्राइसेस मैनेजमेंट और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरुप निर्णय लेने के लिए कलेक्टरों को अधिकृत किया गया है।

आइये आंगनबाड़ी समारोह से आगाज-

सभी जिलों में स्थानीय जनप्रतिनिधि और हितग्राहियों की मौजूदगी में आइये आंगनबाड़ी थीम पर समारोह का आयोजन करते हुए इन्हें शुरु किया जाएगा। यहां स्थानीय खाद्य विविधता वाला गर्म भोजन तैयार कर परोसा जाएगा। पहले दिन के बाद प्रतिदिन पूर्व की भांति समय-सारणी अनुसार आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जाएगा।

रेडी टू ईट की जगह गर्म भोजन-

कोविड संक्रमण काल में तीन से छह वर्ष के बच्चों को पूर्व में प्रदाय रेडी टू ईट सामग्री का वितरण स्थगित करते हुए बच्चों को ताजा नाश्ता एवं गर्म पका हुआ भोजन प्रदाय किया जाएगा।

65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का प्रवेश होगा वर्जित, मास्क होगा अनिवार्य-

आंगनबाड़ी केन्द्र के अंदर एवं बाहर आसपास की साफ-सफाई, स्वच्छता एवं कोविड संक्रमण से बचाव की व्यवस्था रहेगी। कोविड संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, सेनेटाईजर, दो गज की दूरी जैसे सुरक्षात्मक उपायों का पालन भी किया जाएगा। 65 साल से अधिक आयु के व्यक्तियों का आंगनबाड़ी केन्द्र में प्रवेश वर्जित होगा। गर्भवती महिलाओं एवं दस वर्ष से कम आयु के बच्चों हेतु निर्देशानुसार गतिविधियों की प्राथमिकता के आधार पर कोविड से बचाव की सावधानियों का पालन करना होगा।

ब्लूमबर्ग इंडिया इकोनॉमिक फोरम – 11 नवम्बर 2021 भावी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश

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गौतम अदाणी

चेयरमैन, अदाणीग्रुप

देवियो और सज्जनों,
मैं ब्लूमबर्ग को भारत में 25 वर्षों की उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए अपनी बात शुरू करना चाहूंगा। 1996 मेंभारत सिर्फ 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था था, जिसकी आबादी एक अरब से कम थी। आज जब भारत आजादी के 75 साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है,तो मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम विकास के उस असाधारण दौर के कगार पर हैं, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र ने अब तक हासिल किया है।

अब से लगभग 25 वर्षों बाद, भारत की जनसंख्या 1.6 बिलियन पर हो जाएगी, जो अब तक की सबसे बड़ी आबादी होगी और जिसकी औसत आयु 40 वर्ष से कम होगी। इतिहास ने बार-बार दिखाया है कि अगर राष्ट्र स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार का सामाजिकीकरण करने में सफल हो जाते हैं तो राष्ट्रों को इस युवा आबादी से बहुत लाभ होता है।। ये वही विकास है जिसे वर्तमान सरकार ने अपनी विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं के जरिये गति प्रदान की है। हालांकि परिणाम रातोंरात नहीं दिखाई देंगे, लेकिन मेरा मानना है कि आज से लेकर 2050तक के समय के बीच, भारत किसी भी देश के मुकाबले अब तक के सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी जनसांख्यिकीय लाभ का सृजन करेगा, जिसका अर्थ वैश्विक मामलों में अग्रणी भूमिका निभाने की बढ़ी हुई जिम्मेदारी होगी।

इस अग्रणी भूमिका की शुरुआत अवश्य ही सस्टेनेबिलिटी हासिल करने के प्रयास से होनी चाहिए। यह अब एक आवश्यक चुनौती है, जिसके लिए पूरे देश को एकजुट होना चाहिए। ग्लासगो में आयोजित जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, सीओपी 26 से पहले ही, मैंने कहा था कि इंक्रिमेंटल ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करने की तत्काल आवश्यकता पर ध्यान देने वाले बिजनेस अगले कई दशकों के दौरान सबसे बड़े अवसर प्रदान करेंगे। उत्सर्जन को सीमित करते हुए विकास को संतुलित करना, अनुकूलन के लिए तैयारबिजनेस के लिए एक अविश्वसनीय वैश्विक अवसर हैं। हालांकि आज देखें तो आसान समाधान आ+++सानी से उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी हम एक उदाहरण के रूप में कोविड महामारी के अपने अनुभवों कोले सकते हैं। शुरुआती उथलपुथल के बाद, हम किसी भी अनुमान से कहीं अधिक तेज़ी से समस्या पर ध्यान देने और उसका समाधान करने के लिए एकजुट हुए। दुनिया के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में कोरोनावायरस के टीके बनाने के लिए सीमाओं के पार जाकर सहयोग किया। वैज्ञानिकों को इस कार्य में एक वर्ष से भी कम समय लगा, जबकि सामान्य रूप से पांच वर्ष लग सकते थे। जब मानव जाति अस्तित्वगत खतरे का सामना कर रही थी, ऐसे वक्त में वैज्ञानिकों की सफलता मुझे पहले से कहीं अधिक आशावादी बनाती है और उम्मीद जगाती है कि विज्ञान अंततः जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर विजय हासिल कर लेगा। लेकिन अब यह हम पर निर्भर है कि हम तात्कालिकता, विश्वास के साथ और न्यायसंगत समाधानों पर ध्यान देते हुए विज्ञान का समर्थन करें।

पारिस्थितिक आपदा को टालने के इस गंभीर प्रयास में दुनिया भारतीय नेतृत्व का उपयोग कर सकती है। सस्टेनेबिलिटी संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड किसी भी अन्य प्रमुख राष्ट्र की तुलना में बेहतर है। पेरिस में सीओपी 21 में, भारत ने वादा किया था कि2030 तक, वह अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 33-35% तक कमी लाएगा और गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता के अपने हिस्से को 40% तक बढ़ा देगा। हमने दोनों लक्ष्यों को हासिल कर लिया है, जिसमें दूसरे लक्ष्य को तो तय समय से नौ साल पहले ही हासिल कर लिया। यह कुछ और नहीं भी हो तो भी इस बात का तो पर्याप्त प्रमाण है कि भारत संभवतः नई और अधिक महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धताओं को हासिल करेगा जिनकी घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सीओपी 26 में की थी।

हालांकि, हम मानते हैं कि यह आसान नहीं होगा। हर राजनेता और बिजनेस लीडर को ऐसे निर्णय लेने पड़ेंगे जो उनसे मौजूदा नियमों में परिवर्तन करने के साथ-साथ मौजूदा बिजनेस मॉडल में भी बदलाव की मांग करते हैं। इसे उस डिजिटल स्पेस में आने वाले व्यवधानों के साथ जोड़ दें, जिसने हर क्षेत्र को अपने दायरे में समेट लिया है तो हमारे सामने लगभग एकदम सही परिस्थिति मौजूद है। यह परिस्थिति कई बड़े बहुराष्ट्रीय व्यवसायों के पतन का कारण बनेगा, और उनकी जगह केवल सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के तालमेल से पैदा हुईं नई मल्टी ट्रिलियन डॉलर की कंपनियां लेंगी। दूसरे शब्दों में, हरित दुनिया को सक्षम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के भविष्य के डिजाइन और कार्यान्वयन दोनों के लिए मुख्य रूप से सस्टेनेबिलिटी और डिजिटल इनोवेशन दोनों की जरूरत पड़ेगी।

आइए, मैं अदाणी ग्रुप के नजरिए से अपनी बात समझाता हूं।

हम इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते हैं जो ‘गतिशीलता’ को सक्षम बनाता है। और इस दुनिया में जो कुछ भी गतिशील है उसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल होना चाहिए – चाहे वह ऊर्जा का प्रवाह हो, माल का प्रवाह हो, लोगों का प्रवाह हो या डेटा का प्रवाह हो। पिछले वर्षों में, हमने अपने बिजली से संबंधित व्यवसायों, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स व्यवसायों, हवाई अड्डे और परिवहन व्यवसायों और डेटा-सेंटर से संबंधित व्यवसायों के जरिये इन सभी प्रवाहों में खुद को स्थापित किया है। जलवायु परिवर्तन संबंधित दायित्व और अधिकार-पत्र इन व्यवसायों मं से हर एक को नए बाजार के अवसरों और एडजासेंसीज का पता लगाने और उनका निर्माण करने की सुविधा प्रदान करेगा। इसे प्रभावी ढंग से करने के लिए, हम अपने वर्तमान बिजनेस मॉडल पर पुनर्विचार कर रहे हैं और इसे फिर से डिज़ाइन कर रहे हैं। जब हम व्यवसाय के उन निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, जिनके लिए हमें अनुकूलन करने और तेजी से सीखने की आवश्यकता होती है तो मैं जटिलताओं को पहचान पाता हूं। लेकिन यही अनिश्चितता है, और यही तेज विकास है जो चीजों को दिलचस्प बनाये रखता है।

चलिए, मैं कुछ खास उदाहरणों से बताता हूं कि कैसे नई मार्केट एडजासेंसीज तक हमारी पहुंच बन रही है।
जब ऊर्जा के प्रवाह की बात आती है, तो अब यह निर्विवाद है कि बिजली का प्राथमिक स्रोत ग्रीन यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। हालांकि, वास्तविक वैल्यू क्रिएटर्स ग्रीन इलेक्ट्रॉन का संगहण करेंगे और ट्रांसमिशन ग्रिड में इसकी क्षणभंगुरता को स्वीकार करने के बजाय, वे इलेक्ट्रॉन को दूसरे रूप में सूचीबद्ध करेंगे –इस मामले में एक स्पष्ट संभावना हाइड्रोजन के रूप में है। यह मौजूदा वैल्यू चेंस सहित कई व्यवसायों को बाधित करेगा, जिनमें रसायन, धातु और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। अदाणी के नजरिए से, हम दुनिया के सबसे कम खर्चीले हाइड्रोजन का उत्पादन करने की मजबूत स्थिति में हैं, और उम्मीद है कि यह हाइड्रोजन उन विभिन्न उद्योगों के लिए ऊर्जा स्रोत और फीडस्टॉक का काम करेगा, जिनमें काम करने का हमारा इरादा है।

जब माल और लोगों की आवाजाही की बात आती है, तो यह साफ है कि परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरी तरह से पुनर्गठन होगा। ऑनबोर्ड बैटरी, फ्यूल सेल, हाइड्रोजन या मेथनॉल द्वारा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े का मतलब है कि आंतरिक दहन इंजन का चलन बंद हो जाएगा और इसका अर्थ यह भी है कि दुनिया भर में नए इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। चाहे वह हवाई जहाज के लिए टिकाऊ (सस्टेनेबल) एविएशन फ्यूल का उत्पादन करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर होया परमाणु ऊर्जा से चलने वाले जलयानों के लिए, लॉजिस्टिक्स वैल्यू चेन के हर हिस्से को बदलने और फिर से डिजाइन करने की आवश्यकता होगी। जहां अर्थशास्त्र में अब भी सुधार की जरूरत है, वहीं उम्मीद की किरण यह है कि हरित परिवहन के समाधान संभव हैं। वास्तव में, अदाणी ग्रुप ने पहले ही शुरुआत कर दी थी और हमारे पोर्टफोलियो में तेजी से पर्यावरण-अनुकूल हरित बंदरगाह, हरित हवाई अड्डे, हरित बिजली और हरित ट्रांसमिशन शामिल हो चुके हैं। इसने हमें कई अंतरराष्ट्रीय व्यवसायों का पसंदीदा पार्टनर बनने की स्थिति में ला दिया है, जो भारत के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजारों की सेवा करने की चाह में, हरित इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे के लिएभारत की तरफ देख रहे हैं।

डेटा प्रवाह के मामले में तो यह अपरिहार्य है कि बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चरअब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा-खपत करने वाला उद्योग बन जाएगा। क्लाउड स्टोरेज एप्लिकेशन सपोर्ट से लेकर डेटा बैकअप तक, और नेटवर्किंग से लेकर वेबसाइट होस्ट करने तक, तकनीक से संचालित होने वाली आधुनिक दुनिया को चलाने में डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग और 5जी के आगमन के साथ तेजी से वृद्धि होगी। यह अनुमान लगाया गया है कि 2025 मेंविकसित दुनिया में एक व्यक्ति हर 20 सेकंड में किसी एक डेटा सेंटर के साथ एक इंटरएक्शन करेगा। जैसे-जैसे 5जी कनेक्टिविटी एंटरप्राइज़ नेटवर्क का विस्तार करेगी और डेटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी, हमें डेटा सेंटर डिजाइनों को फिर से तैयार करने की आवश्यकता पड़ेगी। डेटा सेंटर्स के निर्माण, डेटा सेंटर्स को जोड़ने और डेटा सेंटर्स को 100% हरित बिजली प्रदान करने की अपनी क्षमता को देखते हुए अदाणी ग्रुप इस प्रवृत्ति से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है, जो एक ऐसा प्रावधान है जिसे दुनिया में कहीं और आर्थिक पैमाने पर दोहराना कठिन होगा।

अदाणी में, हम रिन्यूएबल एनर्जी को जीवाश्म ईंधन का एक व्यवहारिक, किफायती विकल्प बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। दावोस 2020 में अपनी सोच जाहिर करने के बाद से, हमने केवल 30 महीनों की अवधि में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर एनर्जी डेवलपर बनकर अपनी गंभीरता को साबित किया है। उम्मीद है कि 2030 तकहम बिना किसी शर्त या बाधा के दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बन जाएंगे – और ऐसा करने के लिए हमने अगले दशक में 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऐसी कोई अन्य कंपनी नहीं है जिसने अभी तक अपनी सस्टेनेबिलिटीइंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर इतना बड़ा दांव लगाया हो।

इसलिए हम मानते हैं कि हमारी रिन्यूएबल क्षमता और हमारी इन्वेस्टमेंट साइज साथ मिलकर हमें सस्ती हरित बिजली और हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने के प्रयास में सभी वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अग्रणी स्थिति में रखते हैं। वैश्विक सर्वसम्मति देखते हुए लगता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हरित हाइड्रोजन एक वरदान साबित होगी। यह एक चमत्कारिक ईंधन और एक चमत्कारी फीडस्टॉक है। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत की तेज वृद्धि को देखें तोसस्ते में हरित हाइड्रोजन का उत्पादन भारत को हरित ऊर्जा के नेट एक्सपोर्टर में बदल सकता है। कल्पना करें कि एक ऐसा भारत है जिसे अब आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा,एक ऐसा भारत है जो अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रभाव में नहीं है, और एक ऐसा भारत है जिसने ईंधन स्वतंत्रता हासिल कर ली है। और हम इस कल्पना को ही अपने देश में संभव बनाने के लिए मदद करना चाहते हैं।

इसके लिए, अदाणी ग्रुप डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चरके क्षेत्र में भी बड़ा निवेश कर रहा है। डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सूचना, रीयल-टाइम डेटा और ऊर्जा दक्षता तक हमारी पहुंचको काफी बेहतर बनाते हैं। विज्ञान को आज बड़े पैमाने पर कंप्यूटिंग क्षमताओं की आवश्यकता है और कंप्यूटिंग क्षमताओं को क्लाउड आधारित डेटा सेंटर्स की आवश्यकता है और डेटा सेंटर्स भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं। हम मानते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में भारत की तेज प्रगति और अंततः स्वच्छ बिजली उत्पादन की हमारी क्षमता हमें न केवल भारत के, बल्कि शायद दुनिया के अधिकांश डेटा का भंडारण करने के लिए सबसे बड़ा हरित विकल्प बना देगी – और ‘एक सूरज, एक दुनिया, एक ग्रिड’ के सिद्धांत के साथ जोड़ेगी, जिसका उल्लेख हाल ही में सीओपी 26 में किया गया है।

जैसाकि उम्मीद है, ऐसा कहने वाले लोग भी होंगे कि भारत, और अन्य राष्ट्र, आवश्यकता के अनुसार तेजी से हरित, सस्टेनेबल दुनिया में परिवर्तित नहीं हो सकते। लेकिन मैं इससे असहमत हूं। यह पहली बार नहीं है जब मानव जाति को अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ा है। आज हमारे पास विज्ञान की शक्ति, बढ़ती जागरूकता और वैश्विक सहयोग है, जिसके साथ, मुझे विश्वास है कि, हम इस संकट से भी उबरेंगे, और भारत पहले से कहीं अधिक मजबूत और प्रभावशाली होगा। विलुप्तिकरण की संभावना सामने होने पर सब कुछ संभव हो जाता है।

इसके अलावा, जो मुझे व्यक्तिगत रूप से रोमांचक लगता है, वह यह है कि अब हम विज्ञान के इतिहास के महान परिवर्तनकारी मोड़ पर खड़े हैं, जहां डिजिटल तकनीक स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ मिलकर एक ऐसा बिजनेस मॉडल बनाने के लिए सक्रिय है जो अभी अज्ञात है, और जो लगभग असीमित पैमाने पर होगा। हमें प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता होगी, लेकिन भारत को एक महत्वपूर्ण लाभ है यह है कि हमारा मध्य वर्ग, हमारे युवा, हमारी डिजिटल क्षमता, और हमारी इंफ्रास्ट्रक्चरसंबंधी ज़रूरतें भविष्य के इस उद्योग का निर्माण और उपभोग दोनों करेंगी। हम इन चुनौतियों को कैसे लेते हैं, उसी पर अगले कई दशकों में होने वाले हमारे देश के विकास की नींव पड़ेगी और यह विकास ही भारत की कहानी को हम सभी के लिए, जिनको इसका हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है, काफी प्रेरक बनाएगा।
धन्यवाद।

*हर सफल आदमी कुछ अनैतिक काम करें ये ज़रूरी नहीं है -इमरान हाशमी*

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*नेशनल*: बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी अपनी हॉरर फिल्मों में अभिनय कर सुर्खियां में हमेशा उनकी फिल्म रहते हैं | उनकी हर एक फिल्म को दर्शकों को न सिर्फ पसंद भी आती है बल्कि काफी प्यार भी मिलता हैं | हाल ही में आई थ्रिलर जॉनर फिल्म “चेहरे” जिसमें इमरान ने बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर किया था | फिल्म में अमिताभ बच्‍चन का किरदार रिटायर्ड लॉयर के साथ आर्टिस्‍ट‍िक दिखाया गया था | वंही इमरान हाश्मी का किरदार बड़ा ट्रैवेल पसंद करने वाला था । उसे अच्‍छे सूट,लेदर जैकेट, जूते पहनने का शौक था ।

 

फिल्म में इमरान हाश्मी का एक डॉयलॉग है जिसमें वे कहते हैं कि हर एक कामयाब आदमी को कुछ बेईमानी वाले काम तो करने पड़ते है | लेकिन हाल में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वे एक फिल्म का डॉयलॉग और एक किरदार था जो वो निभा रहे थे और असल ज़िन्दगी में वे इस बात से बिलकुल वाकिफ नहीं रखते है | उनका मानना हैं कि अगर ज़िन्दगी में कामयाबी की सीढ़ी चढ़ना है तो अपना काम करते जाओ और वक़्त आपको बेशुमार उपलब्धियों से नवाज़ेगा और जो भी ज़िन्दगी में आप चाहते हो वो सब आपको मिल सकता हैं | इसी के साथ साथ बेईमानी से किया हुआ काम आपको बेशक कामयाब बना दें लेकिन वो कामयाबी आपसे बहोत कुछ छीन भी लेगी |

 

इमरान हाश्मी का वीडियो अभिनेता कारण सिंह छाबड़ा ने सोशल मीडिया Koo पर शेयर किया | अभिनेता कारण सिंह छाबड़ा ने सुशांत सिंह राजपूत और कृति सनोन के साथ “राबता” मूवी में स्क्रीन शेयर किया था |

 

इमरान हाश्मी के आने वाले प्रोजेक्ट्स की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म “डीबुक” रिलीज़ हुई है और दिसंबर में “फादर्स डे” और आलिआ भट्ट के साथ साथ गंगू बाई फिल्म में नज़र आने वाले हैं |

किसान आंदोलन- राकेश टिकैत बोले 29 नवंबर को ट्रैक्टरों से संसद भवन जाएंगे।

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दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के आंदोलन का एक साल पूरा होने जा रहा है। 26 नवम्बर को इस किसान आंदोलन के एक साल पूरा होने पर दिल्ली की सभी सीमाओं पर किसानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही 29 नवम्बर से हर दिन संसद के सत्र चलने तक 500 किसान 30 ट्रैक्टर ट्रालियों में ‘संसद मार्च’ करेंगे।

तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग को लेकर पिछले साल से ही संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसान दिल्ली के तीन बॉर्डर पर डेरा जमाए हुए हैं। इस दौरान किसान नेताओं की केंद्र सरकार से कई दौर की बातचीत हुई तो जो बेनतीजा रही। अब इस किसान आंदोलन का एक साल पूरा होने जा रहा है जिसको लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने एक बैठक की और फैसला लिया है कि दिल्ली से सटे राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों की राजधानियों में किसान, मजूदर, महिलाओं का व्यापक प्रदर्शन होगा। दूसरी तरफ दिल्ली की सीमाओं पर पंजाब, हरियाणा के किसानों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

29 नवम्बर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। सत्र में पहले दिन से आखिरी दिन तक हर रोज 30 ट्रैक्टर ट्रॉली में 500 किसान हर रोज संसद की तरफ कूच करेंगे। संसद की तरफ जाने वाले ट्रैक्टर पहले से तय होंगे और वो पूरे अनुशासन का पालन करेंगे। इस ट्रैक्टर मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर कानून रदद् करने का दबाव बढ़ाना होगा।

इसके अलावा इस बैठक में हाल ही में आई उस जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई जिसमें ये सामने आया है कि लखीमपुर हिंसा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र को रायफल से गोली चली थी। इन पर संयुक्त किसान मोर्चा ने अजय मिश्र की बर्खास्तगी और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग दोहराई।

राकेश टिकैत ने कू कर दी जानकारी
किसान आंदोलन को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौ राकेश टिकैत ने सोशल सोशल मीडिया हैंडल पर आगामी संसद के शीतकालीन सत्र को लेकर आंदोलन के बारे में जानकारी दी। अपनी पोस्ट में वे लिखते है – ट्रैक्टर भी वही हैं और किसान भी वही। इस बार गूंगी-बहरी सरकार को जगाने और अपनी बात मनवाने के लिए किसान 29 नवंबर की ट्रैक्टरों से संसद भवन जाएंगे।