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सीधी से साफ हुई भाजपा, कांग्रेस को नहीं मिला जनता का साथ

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मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण में सीधी नगर पालिका परिषद से 24 पार्षद सीटों के लिए बुधवार को मतगणना हुई। यहां की 24 सीटों में से 14 सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाते हुए शानदार वापसी की है। वहीं भारतीय जनता पार्टी सिर्फ छह सीटों पर जीत दर्ज कर पाई है। वहीं एक सीट पर आम आदमी पार्टी ने अपना कब्जा जमाया है और 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीते हैं ।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की यह प्रतिष्ठा वाली सीट थी। यहां कांग्रेस ने शानदार वापसी कर नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा जमाने के लिए एकतरफा जीत हासिल की है।

नगर पंचायत चुरहट में भी मिली जीत
नगर पंचायत चुरहट में कांग्रेस ने 15 सीटों में 10 सीटों पर सफलता हासिल की है। भारतीय जनता पार्टी सिर्फ 3 सीटों पर सिमट कर रह गई है, वहीं 2 सीटों पर निर्दलीयों ने अपना कब्जा जमाया है। आपको बता दें कि चुरहट विधानसभा क्षेत्र से पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल की प्रतिष्ठा दांव में लगी थी। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा के महामंत्री एवं चुरहट से विधायक शरतेंदु तिवारी भी अपनी इज्जत बचाने की कोशिश में जुटे थे।

सीधी जिले की एक नगर पालिका एवं तीन नगर पंचायत में आए चुनाव परिणाम में सीधी नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी ने शानदार वापसी करते हुए भारतीय जनता पार्टी से यह सीट छीन ली है। जबकि चुरहट नगर पंचायत में कांग्रेस पार्टी का ही नगर पंचायत अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है। वहीं नगर पंचायत मझौली एवं रामपुर नैकिन में भारतीय जनता पार्टी अपना अध्यक्ष बनाने में सफल हो जाएगी। मझौली एवं रामपुर नैकिन में कांग्रेस पार्टी का नगर पंचायत अध्यक्ष था। दोनों सीट भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस से छीन ली है।

ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडेय को किया गिरफ्तार

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फौन टैपिंग मामले में ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडेय को गिरफ्तार कर लिया है। उनपर आरोप हैं कि उन्होंने एनएसई के कर्मचारियों के अवैध रूप से फोन रेकॉर्ड किए थे। पांडेय 30 जून को रिटायर हुए हैं। उनपर आरोप है कि 2009 से 2017 के बीच उन्होंने गैरकानूनी तरीके से एनएसई के कर्मचारियों के फोन रेकॉर्ड किए। इसके लिए  iSEC Services Pvt Ltd नाम की कंपनी ने उन्हें 4.45 करोड़ रुपये दिए।  

 

तीन लोगों से पूछताछ के आधार पर केंद्रीय एजेंसी ने दिल्ली कोर्ट में सोमवार को दावा किया था कि 1997 से ही एनएसई के कर्मचारियों की फोन टैपिंग हो रही थी और इससे जुड़े सबूत और दस्तावेज भी बरामद किए जा चुके हैं। इससे पहले सीबीआई ने पांडेय और दूसरे पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से 100 करोड़ की वसूली मामले में भी पूछताछ की थी। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख इस मामले में आरोपी हैं।

एनएसई में वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर छानबीन करते वक्त ईडी को सेक्रेट फोन सर्विलांस मिले थे। इसके बाद ईडी ने इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी थी। इसके बाद सीबीआई से इन आरोपों की जांच करने को कहा गया था। सीबीआई और ईडी दोनों ने ही संजय पांडेय के खिलाफ फोन टैपिंग मामले में केस दर्ज किया है। ईडी ने इस महीन को-लॉकेशन मामले में भी उनसे पूछताछ की थी।

सीबीआई और ईडी ने दिल्ली की कंपनी आईएसईसी सर्विसेज प्रैइवेट लिमिटेड समेत एनएसई के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के खिलफ भी मामला दर्ज किया है। सीबीआई का आरोप है कि नारायण और रामकृष्ण ने फोन टैपिंग की साजिश रची थी। यह कंपनी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजय पांडेय ने ही खोली थी।

खुशी कपूर के डेब्यू को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं जान्हवी,

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बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर की अपकमिंग फिल्म ‘गुड लक जेरी’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। वहीं उन्होंने अपनी छोटी बहन खुशी के डेब्यू को लेकर बातें की। इसमें उन्होंने ट्रोलर्स को एक खास मैसेज दिया है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि ‘अगर ट्रोलर्स उनकी बहन को ट्रोल करते हैं तो वे उन्हें नहीं छोड़ेंगी।’ हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में जाह्नवी कपूर ने अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म ‘द आर्चीज’ को लेकर अपनी एक्साइटमेंट जाहिर की है। वे काफी खुश हैं कि खुशी जल्द ही अपना डेब्यू करने वाली है। खुशी कपूर जाह्नवी की छोटी बहन है। वे बोनी कपूर और दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी हैं। खुशी जल्दी ही जोया अख्तर की फिल्म ‘द आर्चीज’ के साथ अपनी शुरुआत करने जा रही हैं। खुशी की यह फिल्म 2023 में रिलीज होगी। खुशी के अलावा इस फिल्म में सुहाना खान और अगस्त्य नंदा भी हैं।

अपनी बहन के लिए काफी एक्साइटेड हैं जाह्नवी

हाल ही में एक बातचीत में जाह्नवी कपूर से ये सवाल किया गया कि ‘उन्हें अपनी बहन की आने वाली पहली फिल्म के बारे में कैसा लगा।’ इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ‘मैं बहुत खुश और एक्साइटेड हूं। मैं एक बार उनके आउटडोर शूट में भी गई थी। उनकी एनर्जी इतनी पॉजिटिव थी कि मुझे लगता है कि वे ऐसा कुछ बना रहे हैं जो कि दिल से है। और वह कुछ ऐसा है कि लोग उसे काफी प्यार देने वाले हैं। ये किड्स काफी टैलेंटेड और मेहनती हैं। मैंने अपनी बहन को काफी मेहनत करते हुए देखा है। उसने सच में कड़ी मेहनत की है। उसने इसके लिए ऑडिशन भी दिया है। खुशी को ये चाहिए ही था। मैं उसके लिए बहुत खुश हूं और उम्मीद करती हूं कि यह अच्छा हो।’

जाह्नवी ने दिया ट्रोलर्स को खास मैसेज

जाह्नवी ने आगे कहा कि ‘अगर ट्रोलर्स उनकी बहन खुशी को टारगेट करेंगे तो उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।’ उन्होंने कहा कि ‘अगर कोई खुशी के बारे में कुछ भी बुरा कहता है तो ये सभी ट्रोलर्स, मैं उनको छोड़ूंगी नहीं। मैं कसम खाती हूं। मुझे नफरत है इन सब से।’ वहीं आगे जाह्नवी से पूछा कि ‘क्या उन्होंने अपनी छोटी बहन को कोई सलाह या टिप्स शेयर किया है।’ इसका जवाब देते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि ‘उसे टिप्स की जरूरत नहीं है। वह काफी समझदार है।’ बता दें कि जाह्नवी की अगली फिल्म ‘गुड लक जेरी’ 29 जुलाई को रिलीज होने वाली है। यह 2018 में आई तमिल फिल्म ‘कोलामावु कोकिला’ की रीमेक है। इस फिल्म में नयनतारा और योगी बाबू ने एक्टिंग की थी। कुछ हफ्तों पहले ही जाह्नवी की इस फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था।

13 सितंबर से होगा विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र

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मध्य प्रदेश विधानसभा का 25 जुलाई से प्रस्तावित पांच दिवसीय सत्र अब 13 सितंबर से होगा। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने सरकार के सत्र की तारीख में परिवर्तन के प्रस्ताव को अनुमति दे दी है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह ने पुनरीक्षित अधिसूचना मंगलवार को जारी कर दी। सत्र पांच दिवसीय ही रहेगा। इस बार शनिवार को भी सदन की कार्यवाही होगी।

विधानसभा के प्रमुख सचिव ने बताया कि सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने मानसून सत्र की तारीख पुनरीक्षित करने करने की अनुमति दी है। अब सत्र 13 से 17 सितंबर तक होगा। इस दौरान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए प्रथम अनुपूरक अनुमान (बजट) प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए वित्त विभाग सभी विभागों से प्रस्ताव मांग चुका है। इसके अलावा नगर पालिक विधि द्वितीय संशोधन, भू-राजस्व संहिता में संशोधन सहित अन्य विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे।

सत्र की तारीख में परिवर्तन पर सभी थे सहमत

विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख में परिवर्तन भाजपा और कांग्रेस विधायक दल की सहमति के बाद किया गया है। दरअसल, इस बार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के माध्यम से किया जाना है। इसके लिए कलेक्टर निर्वाचित पार्षदों का सम्मेलन बुलाएंगे। इसी तरह जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष का चुनाव होना है। इस प्रक्रिया में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वहीं, विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम और प्रमुख सचिव 22 अगस्त से कनाडा में होने वाले राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके लिए वे 20 अगस्त को जाएंगे और सितंबर के प्रथम सप्ताह में लौटेंगे। इसे देखते हुए सत्र सितंबर में प्रस्तावित किया गया है।

57 साल बाद भी नहीं टूटा मिथक, सिंधिया परविार नहीं बना सका अपनी मर्जी का मेयर

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नगर निगम ग्वालियर न केवल प्रदेश बल्कि देश भर में बीजेपी के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी की ताकत दिखाने का पांच दशक तक उदाहरण देने का काम करता था। 57 वर्ष पूर्व जब इस निगम में जनसंघ काबिज हुई थी तब देश मे यह चौंकाने वाली बात थी क्योंकि तब तक देश मे कांग्रेस इकलौती सियासी ब्राण्ड थी और जनसंघ बमुश्किल दो-चार पार्षदों को ही जिता पाती थी। लेकिन एक बार जनसंघ जीती इसके बाद फिर कांग्रेस इस पर काबिज नहीं हो पाई। मिथक बन गया कि जिस दल की कमान सिंधिया परिवार के पास रहती है, नगर निगम में उसका मेयर नहीं बन पाता।

इस बार इस मिथक के टूटने की संभावना थी क्योंकि इस नगर निगम पर बीजेपी का साढ़े पांच दशक से भी ज्यादा पुराना कब्जा था और कांग्रेस उसे हराना तो दूर उसे कभी चुनौती भी नही दे पाती थी। लेकिन इस बार कांग्रेस सिंधिया मुक्त हुई तो उसने चमत्कार करते हुए नगर निगम ग्वालियर को बीजेपी मुक्त कर दिया लेकिन सिंधिया परिवार से जुड़ा मिथक नहीं टूटा।

ग्वालियर के ऐतिहासिक नगर निगम की सत्ता पर पूरे सत्तावन साल से भाजपा कब्जा जमाये हुए बैठी थी। लेकिन इस बार का चुनाव ख़ास था। इसकी बजह है सिंधिया परिवार। सत्तर के दशक से अंचल की सियासत पर सिंधिया परिवार का कब्ज़ा रहा है। ख़ास बात ये कि सिंधिया परिवार कांग्रेस में टिकट बांटता रहा है लेकिन अभी तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि सिंधिया परिवार अपनी पार्टी के प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने सड़क पर उतरा हो।

लेकिन इस बार सब कुछ उलट – पुलट हुआ। सिंधिया इस बार कांग्रेस में नहीं बल्कि उसी बीजेपी में हैं जिसके खिलाफ वे लगातार अपने प्रत्याशी लड़ाते थे। सिंधिया परिवार ने पहली बार अपनी परंपरा को तोड़ते हुए नगर निगम मेयर और पार्षद प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया,रोड शो किया और वोट मांगे। बावजूद यहां से पहली दफा कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती शोभा सिकरवार ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।

महारानी ने ली थी कांग्रेस की सदस्यता

स्वतंत्रता  के बाद से ही सिंधिया परिवार का कांग्रेस में प्रवेश हो गया था। 1947 में देश आज़ाद हुआ और ग्वालियर रियासत का भारत सरकार में विलय हो गया। तत्कालीन महाराज जियाजी राव सिंधिया को भारत सरकार ने ब्रिटिश परम्परा की तरह उनको नव गठित मध्यभारत प्रान्त का राज्य प्रमुख बनाया था और उन्होंने ही राज्य के पहले मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई थी। राजतन्त्र समाप्त होने के बाद तत्कालीन महाराजा सिंधिया ने तो राजनीति में नहीं जाने का फैसला किया था लेकिन उनकी पत्नी महारानी विजयाराजे सिंधिया ने उप प्रधानमंत्री बल्लभ भाई पटेल के समक्ष कांग्रेस की सदस्यता ली थी।

इसके बाद वे सांसद और विधायक रहीं लेकिन 1967 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारिका प्रसाद मिश्रा से उनका विवाद हो गया और उन्होंने अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और जनसंघ में शामिल हो गईं। इस तरह राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और इंदिरा गांधी के सलाहकार पंडित डीपी मिश्र की सरकार का पतन हो गया। राजमाता के विधायकों के सहयोग से जनसंघ ने संभवत: देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार का गठन किया। जिसे इतिहास में संबिद सरकार के नाम से जाना जाता है। इस घटनाक्रम के समय राजमाता के इकलौते पुत्र माधव राव सिंधिया लन्दन में रहकर पढ़ाई कर रहे थे।

वे 1970 में  लौटे और कुछ महीनो बाद 25 वीं वर्षगांठ मनाई गई। राजमाता ने उन्हें अपनी परम्परागत गुना संसदीय सीट गिफ्ट की और उन्हें वहां से जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ाया और जीत हासिल की। लेकिन युवा माधवराव को जनसंघ के विचार और तौर-तरीके पसंद नहीं आये और राजमाता से भी अलगाव होने लगा।  इस बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी। राजमाता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और उनके पुत्र माधव राव नेपाल चले गए जहां उनकी बड़ी बहन उषा राजे भी रहती थी और स्वयं माधव राव का वहां ससुराल भी था।

इसी दौरान माधव राव और इंदिरा गांधी के बीच नजदीकी बढ़ी। इमरजेंसी हटने के बाद आम चुनाव हुए तो माधव राव ने जनसंघ से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। वे निर्दलीय मैदान में उतरे और कांग्रेस ने इनके खिलाफ अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा। देश भर में चल रही कांग्रेस विरोधी लहर में पूरे उत्तर भारत से कांग्रेस साफ़ हो गई। स्वयं पीएम इंदिरा गांधी भी चुनाव नहीं जीत सकीं। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस का बुरा हाल हो गया। हालांकि फिर भी यहां दो लोकसभा सीटें जीती थी। एक छिंदबाड़ा और दूसरी गुना। छिंदवाड़ा  से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गार्गी शंकर मिश्रा जीत गए और गुना से माधवराव जीते।

मेयर के टिकट का फैसला सिंधिया करते लेकिन जनता हरा देती

इस जीत के साथ ही देश भर की निगाहें इस युवा सांसद पर गईं। जीत के कुछ साल बाद ही वे कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल हो गए। तब से वे अंतिम साँस तक कांग्रेस में रहे। हालाँकि हवाला मामले में नाम आने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए कांग्रेस छोड़ी और तमाम दलों से ऑफर मिलने के बावजूद वे किसी दल में शामिल नहीं हुए और ग्वालियर सीट से अपनी मप्र विकास कांग्रेस से चुनाव लड़े और शानदार जीत हासिल की। अपने अंतिम समय तक ग्वालियर नगर निगम में मेयर से लेकर पार्षद तक के टिकट का फैसला वे ही करते थे लेकिन वे कभी किसी मेयर या पार्षद प्रत्याशी का प्रचार करने नहीं गए।

उनके असामयिक निधन के बाद उनके युवा बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार की राजनीतिक विरासत संभाली। कांग्रेस के सभी निर्णय सूत्र पिता की तरह उनके हाथ में ही रहे लेकिन उन्होंने भी अपने आप को समर्थकों को सिर्फ टिकट देने तक सीमित रखा। प्रचार करके जिताने वे कभी सड़कों पर नहीं आये। यह भी सच है कि कांग्रेस में रहते कभी भी यहां काँग्रेस का मेयर नहीं बन सका।

मंदसौर में BJP को मिली एक तरफा जीत

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मध्य प्रदेश में रविवार को आए नगर निकाय के प्रथम चरण के नतीजों में भाजपा ने कुछ जगहों पर अपना परचम लहराया है, तो वहीं कई जगह पर अभी भी पेंच फंसा हुआ है। प्रदेश में भाजपा का गढ़ कहे जाने वाले मालवा क्षेत्र में भाजपा ने अपनी जीत कुछ क्षेत्रों में प्रभावी तरीके से दर्ज करवाई है, जबकि कांग्रेस यहां संतुलित आंकड़ों में ही बढ़ता बना पाई है।

बीजेपी और कांग्रेस में सबसे अधिक कांटे की टक्कर नीमच नगर पालिका के नतीजों में देखने को मिल रही है। वहीं, मंदसौर में भाजपा ने वर्षों का रिकॉर्ड तोड दिया है। यहां पहले से ही 40 वर्षों से नगर पालिका पर कब्जा कर बैठी भाजपा ने इस बार फिर कांग्रेस को जबर्दस्त पटखनी दी है। वहीं, रतलाम की ताल नगर परिषद की 15 सीट में से 6 सीटों पर निर्दलियों की जीत ने दोनों पार्टियों के कान खड़े कर दिए हैं।

मंदसौर में इस स्थिति में कभी नहीं दिखी कांग्रेस, सांसद के वार्ड से हार गई भाजपा

मंदसौर नगर पालिका के 40 वार्डों में से 29 सीट पर भाजपा पार्षदों ने जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस मात्र 8 सीटों पर ही कब्जा कर पाई है। इसके अलावा 3 वार्ड निर्दलियों के खाते में गए हैं, जिनमें से दो वार्ड भाजपा के पुश्तैनी माने जाते थे। भाजपा की सीटें जरूर ज्यादा आई हैं, लेकिन बीजेपी अपने सांसद सुधीर गुप्ता के वार्ड क्रमांक 7 से ही 683 मतों से हार गई है। बड़ी बात यह भी है कि मंदसौर नगर पालिका में वर्तमान में कांग्रेस की जितनी सीटें आई हैं, उतनी दयनीय स्थिति में कांग्रेस यहां कभी नहीं दिखी। इसके अलावा ग्राम नगरी नगर परिषद में भी भाजपा ने 15 में से 10 वार्ड जीते हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 4 और 1 वार्ड निर्दलीय के खाते में गया है।

रतलाम के ताल नगर परिषद में निर्दलियों ने बिगाड़ा दोनों पार्टियों का समीकरण

प्रथम चरण की मतगणना में रतलाम जिले की ताल और आलोट नगर परिषदों के भी नतीजे सामने आए हैं, जिसमें आलोट नगर परिषद की 15 सीटों में से 9 पर बीजेपी, 4 पर कांग्रेस और 2 पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि ताल नगर परिषद में तो निर्दलियों ने अपना डंका बजाया है। यहां 6 निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि 5 पर कांग्रेस और मात्र 4 वार्डों में ही बीजेपी उम्मीदवार जीत दर्ज कर पाए हैं। ऐसे में स्थिति साफ है कि यहां का अध्यक्ष निर्दलीय उम्मीदवार ही तय करेंगे।

नीमच की नगर पालिका में कांग्रेस आगे, एक परिषद पर भाजपा का कब्जा

नीमच में भी नगर पालिका नीमच और जीरन नगर परिषद के कुल 55 वार्डों की मतगणना में जीरन के 15 वार्डों के नतीजे आ चुके हैं। यहां जीरन नगर परिषद के 15 वार्डों में से 6 पर बीजेपी, 5 पर कांग्रेस और 4 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, जबकि अब तक सामने आए नीमच नगर पालिका के 40 में से 10 वार्डों के नतीजे में कांग्रेस के 5, बीजेपी के 3 और निर्दलीय 2 उम्मीदवार जीते हैं। मतगणना धीमी गति से चलने के कारण यहां अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन हालिया स्थिति को देखते हुए यहां बीजेपी और कांग्रेस में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

भोपाल नगर निगम में 25% प्रत्याशियों को 1000 से कम वोटों के अंतर से मिली जीत

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भोपाल नगर निगम (बीएमसी) के वार्ड पार्षदों के चुनाव में एक चौथाई विजेताओं के लिए जीत का अंतर 1,000 से कम वोटों का रहा। बीएमसी में 85 वार्ड हैं। रविवार को घोषित परिणामों में करीबी मुकाबलों में बीजेपी ने कांग्रेस को 3:1 से पीछे कर दिया।

भाजपा ने 13 सीटों पर 1000 से कम वोटों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस ने सात सीटों 1000 से कम वोटों के अंतर से जीती। खास बात यह रही कि बीएमसी की 42 सीटों पर जीत का अंतर 2000 वोटों से कम रहा। 2000 से कम वोटों के अंतर से जीत की बात करें तो भाजपा ने 42 में से 30 पर, कांग्रेस ने 10 पर और निर्दलीय प्रत्याशियों ने दो पर जीत हासिल की।

10% विजेताओं ने 500 से कम वोटों के अंतर से लहराया जीत का परचम
वार्ड नंबर 4 में भाजपा के राजेश हिंगोरानी ने 25 मतों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की। जानकारों के मुताबिक गांधीनगर और बैरागढ़ भाजपा के गढ़ माने जाते हैं। इन जगहों पर भाजपा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही, जिसे देखते हुए अगले साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर नेता अब चिंतित हैं। वॉर्ड नंबर 33 में अमित शर्मा जैसे बड़े नेता का भाजपा के आर के सिंह से 783 वोटों से हारना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बन गया है। वार्ड 79 से अंजू राजपूत और वार्ड 9 से नाहिद खान ने क्रमशः 6,070 और 6,017 मतों के सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की।

‘असली टाइगर तो यहां बैठा है’ – CM शिवराज

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को भोपाल में चाय पर चर्चा की। चाय पर चर्चा कार्यक्रम में कई लोग मौजूद थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद पुलिसकर्मियों को कई सख्त आदेश भी दिये हैं। मंच पर अपने अंदाज में मुख्यमंत्री ने गुंडे-बदमाशों को चेताया है और पुलिस को कहा है कि जल्द से जल्द वो इनपर कार्रवाई करें।

भोपाल में आय़ोजित इस कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान जब मंच पर आए तो उन्होंने मंच पर लगे कूलर को बंदा करा दिये। सीएम ने कहा कि कूलर बंद करो, जनता कूलर के बिना बैठी है तो मुख्यमंत्री भी बिना कूलर के बोलेगा…।

इसके बाद सीएम ने मंच से ही पूछा कि यहां पुलिसवाले कौन हैं। कार्यक्रम के दौरान किसी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके इलाके में टाइगर नाम के किसी गुंडे का आतंक बढ़ रहा है। इसके बाद तो सीएम ने मंच से पुलिस अफसरों को निर्देश दिया कि वो जल्द से जल्द इसपर कार्रवाई करें।

सीएम ने कहा, मुझे बताया गया है कि यहां की जनता गुंडे-बदमाशों से परेशान है। यहां परमानेंट चौकी बनाएं और डंडा लेकर निकल पड़ो, सही कर दो…, मैं निर्देश दे रहा हूं… आगे कोई शिकायत आई तो फिर..! यह जरा देख लें, कौन है- टाइगर-फाइगर। असली टाइगर तो यहां बैठा है …तो काहे के टाइगर-फाइगर?’ सीएम ने मंच से कहा कि पूरे राज्य के गुंडे-बदमाशों के लिए यह चेतावनी है।

इसके बाद सीएम शिवराज ने ऐलान किया कि जनता के पीने के पानी की समस्या दूर होगी। उन्होंने मंच से ही कलेक्टर को निर्देश दिए कि यहां ओवरहेड टैंक बनाकर घरों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा टेंडर के चक्कर में देरी नहीं होना चाहिए।

सीएम ने कू पर लिखा, ‘भाजपा का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना और जीतना नहीं है, जनता की जिंदगी बदलना है। आज से ही हमने नये सिरे से जनता की जिंदगी को बदलने का अभियान प्रारंभ किया है। यहां लोगों ने जो समस्याएं बताई है, उसके तत्काल समाधान के निर्देश दिये हैं। जनता की जिंदगी बदलना है, चेहरे पर मुस्कुराहट लाना है। इसलिए रोटी, कपड़ा, मकान, पढ़ाई, लिखाई, दवाई, रोजगार का अभियान हम नये सिरे से प्रारंभ कर रहे हैं।’

सुप्रीम कोर्ट में नूपुर शर्मा ने फिर दायर की याचिका

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बीजेपी से निलंबित नेता नूपुर शर्मा ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी मामले में अपने ऊपर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) दिल्ली ट्रांसफर करने का अनुरोध किया है। नुपूर शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद उनकी जान को खतरा और अधिक बढ़ गया है। उन्हें रेप और हत्या की धमकी मिल रही है। इनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

पिछली बार नूपुर शर्मा की इसी याचिका को सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने खारिज कर दिया था। जस्टिस जेबी पारदीवाला जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि अपने बयान को लेकर उन्हें टीवी पर जाना चाहिए था और पूरे देश से माफ़ी मांगनी चाहिए थी। शीर्ष अदालत ने कहा था, “जिस तरह से नूपुर ने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया है, देश में जो हो रहा है उसके लिए यह महिला अकेले जिम्मेदार है।”

नूपुर शर्मा ने एक टीवी डिबेट शो में पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणियां की थीं। इसे लेकर उनके खिलाफ कई राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई। कोलकाता पुलिस की तरफ से उन्हें कई बार समन भी जारी हो चुका है और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

मध्‍य प्रदेश के कांग्रेस विधायक सचिन बिरला ने की क्रास वोटिंग

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राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में मध्य प्रदेश में एक कांग्रेस विधायक ने क्रास वोटिंग की। बड़वाह से विधायक सचिन बिरला ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा में हूं। हम सबके लिए यह ऐतिहासिक क्षण था। देश के सबसे गरीब वर्ग को मौका मिला है। बिरला खंडवा लोकसभा उपचुनाव के समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए विधानसभा में दो बार आवेदन कर चुकी है। हालांकि, दोनों बार विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम आवेदन निरस्त कर चुके हैं, इसलिए वे तकनीकी आधार पर कांग्रेस विधायक दल के ही सदस्य माने जाते हैं।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए सुबह दस बजे से विधानसभा भवन स्थित समिति कक्ष में बनाए गए मतदान केंद्र पर मतदान प्रारंभ हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने सबसे पहले मतदान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, नेता प्रतिपक्ष डा. गोविन्द सिंह सहित अन्य विधायकों ने मतदान किया। दलीय स्थिति के अनुसार मध्य प्रदेश में भाजपा के 127, कांग्रेस के 96, बसपा दो, सपा एक और चार निर्दलीय विधायक है।

सपा के राजेश्ा शुक्ला और निर्दलीय विक्रम सिंह राणा पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। बसपा के एक अन्य विधायक रामबाई शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में मौजूद थीं। वहीं, सचिन बिरला ने राजग प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया है। वे कांग्रेस विधायकों से भी मिलने नहीं पहुंचे और न ही विधायक दल की बैठक में हिस्सा लेते हैं। संसदीय कार्य मंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि द्रौपदी मुर्मू को मध्य प्रदेश से भरपूर समर्थन प्राप्त होगा। निर्धारित मतों से कुछ अधिक मत राजग प्रत्याशी को मिलेंगे। वहीं, पूर्व मंत्री बाला बच्चन ने बताया कि हमारे दल के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी लाइन के अनुसार ही मतदान हुआ है।