जैसे ही अमूल ने अपने दूध की कीमतों में इजाफा किया, एक के बाद एक दूसरी दूध उत्पादक कंपनियों ने दाम बढ़ाने का ऐलान करना शुरु तक दिया है। ताजा मामला मदर डेयरी का है जिसने रविवार यानी 16 अक्टूबर से फुल क्रीम और गाय के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। मदर डेयरी के प्रवक्ता ने कहा कि डेयरी उद्योग कच्चे दूध की कीमतों में लगातार वृद्धि का अनुभव कर रहा है। पिछले दो महीनों में लागत में लगभग 3 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है, जो विभिन्न इनपुट लागतों में कई गुना वृद्धि के कारण है।
पहले अमूल ने बढ़ाये दाम
इससे पहले, गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF), जो अमूल ब्रांड नाम से दूध और दूध उत्पाद बेचता है, ने त्योहारी सीजन के बीच फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की दरों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड के एमडी आरएस सोढ़ी ने कहा कि अमूल ने गुजरात को छोड़कर सभी राज्यों में फुल क्रीम दूध और भैंस के दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। बढ़ोतरी के बाद अमूल के फुल क्रीम दूध की कीमत 61 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 63 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
वीटा ने बढ़ाई कीमत
अमूल के साथ-साथ वीटा डेयरी ने भी अपने दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है। जो वीटा का फुल क्रीम दूध अब तक 1 लीटर 62 रुपये में मिलता था। अब फुल क्रीम दूध का भाव बढ़ कर 64 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, आधा लीटर दूध फुल क्रीम 31 रुपये में मिलता था, अब आधा लीटर 32 रुपये में मिलेगा।
बढ़ोतरी की ये है मुख्य वजह
दूध बेचनेवाली इन कंपनियों का तर्क है कि चारे की बढ़ती कीमतों और कुछ उत्तरी राज्यों में कम बारिश ने स्थिति को मुश्किल बना दिया है। इसलिए हम किसानों को समर्थन देने और उपभोक्ताओं के लिए गुणवत्तापूर्ण दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कीमतों में संशोधन करने के लिए मजबूर हैं।
दिल्ली-एनसीआर में अमूल के बाद मदर डेयरी ने भी बढ़ाये दाम
पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. कलाम की जयंती पर मुख्यमंत्री चौहान ने किया नमन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जयंती पर उन्हें नमन कर स्मरण किया। मुख्यमंत्री चौहान ने निवास कार्यालय स्थित सभागार में डॉ. कलाम के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. कलाम को मिसाइल मेन के नाम से भी जाना जाता है। धनुषकोड़ी रामेश्वरम, तमिलनाडु में 15 अक्टूबर 1931 को जन्में डॉ. कलाम भारतीय गणतंत्र के 11वें निर्वाचित राष्ट्रपति थे। उन्होंने 4 दशक तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अपनी सेवाएँ दी। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और सैन्य मिसाइल विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने परमाणु परीक्षण में निर्णायक, संगठनात्मक और तकनीकी भूमिका निभाई। डॉ. कलाम का अवसान 27 जुलाई 2015 को हुआ। उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मनित किया गया।
कवि तथा ओजस्वी वक्ता सुमित ओरछा के साथ मुख्यमंत्री चौहान ने किया पौध-रोपण
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी उद्यान में राष्ट्रीय कवि संगम के राष्ट्रीय मंत्री तथा ओजस्वी वक्ता सुमित ओरछा के साथ नीम, करंज और सारिका इंडिका के पौधे लगाए। सुमित ओरछा केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड, मुंबई के सदस्य भी हैं। मुख्यमंत्री चौहान के साथ परम्परा फाउण्डेशन के मीत और मैत्री शर्मा ने अपने जन्म-दिवस पर पौधे लगाए। नीलेश शर्मा और पूजा अश्वनी शर्मा भी पौध-रोपण में शामिल हुई।
भारत भवन में राजधानी के प्रमुख हिन्दी सेवियों ने मुख्यमंत्री चौहान से साझा किए अपने विचार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हिन्दी माध्यम की शिक्षा कई विद्यार्थियों के जीवन में नया प्रकाश लेकर आयेगी। हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई के साथ एक नया युग शुरू हो रहा है। यह एक सामाजिक क्रांति है। गरीब परिवार का बेटा भी मेडिकल की पढ़ाई के बारे में सोच सकेगा। प्रदेश में मातृ-भाषा हिन्दी में अध्ययन और अध्यापन को प्रोत्साहित करने और हिन्दी के लिए गर्व की अनुभूति उत्पन्न कराने के उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गतिविधियाँ जारी हैं। हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना, प्रदेश के विभिन्न अंचलों के निवासियों को भावनात्मक रूप से बाँधने के लिए मध्यप्रदेश गीत को कार्यक्रम और उत्सव का भाग बनाने की पहल, पाणिनी संस्कृत विद्यालय की स्थापना और भोपाल में विश्व हिन्दी सम्मेलन का आयोजन इसी उद्देश्य से किया गया। मुख्यमंत्री चौहान आज भारत भवन के अंतरंग सभागार में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित “हिन्दी की व्यापकता एक विमर्श” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा संकल्प व्यक्त किया गया है कि शिक्षा का माध्यम मातृ-भाषा हो, नई शिक्षा नीति में भी इस भावना का प्रकटीकरण हुआ है। मध्यप्रदेश ने देश में पहली बार मेडिकल की पढा़ई हिन्दी में कराने का संकल्प लिया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के नेतृत्व में हिन्दी में मेडिकल की पाठ्य-पुस्तकें विकसित हुईं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 16 अक्टूबर को भोपाल में मेडिकल की हिन्दी पुस्तकों का लोकार्पण करेंगे। अपनी मातृ-भाषा हिन्दी में शिक्षा को नया आयाम देना हमारे लिए स्वाभिमान और गौरव का क्षण होगा।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, भोपाल महापौर मालती राय, हिन्दी सेवी पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा, कैलाश चंद्र पंत, वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव, राजेन्द्र शर्मा, विजयदत्त श्रीधर, रमेश शर्मा, रवीन्द्रनाथ टेगौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, पूर्व महापौर आलोक शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता सुमित पचौरी विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि अंग्रेजी के सरल और चलन में आ चुके शब्दों के देवनागरी लिपि में अधिक से अधिक उपयोग से मेडिकल और तकनीकी शिक्षा की पढ़ाई विद्यार्थियों के लिए सरल होगी। हिन्दी को लेकर मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। अंग्रेजी भाषा से ही हम समाज में प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त करते हैं, इस सोच को बदलना होगा। भाषा से व्यक्ति कुंठित हो, उसमें हीन-भावना उत्पन्न हो, इस स्थिति से मुक्ति आवश्यक है। हमें अंग्रेजी के भय को समाप्त करना है। हिन्दी भाषा में पढ़ाई से कस्बों और ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा के प्रकटीकरण का अवसर मिलेगा। मध्यप्रदेश की यह पहल सामाजिक क्रांति सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि जब माता-पिता अपनी मातृ-भाषा हिन्दी पर गौरव और सम्मान का प्रकटीकरण करेंगे तभी बच्चे भी हिन्दी को आत्म-सात कर उसे जीवन में अपनाने के लिए अग्रसर होंगे। हिन्दी का संपूर्ण विश्व में सम्मान है। मैंने सभी विदेश यात्राओं में अपनी मातृ-भाषा हिन्दी में ही संबोधन दिए हैं, सभी जगह हिन्दी को सम्मान से सुना जाता है। राज्य सरकार द्वारा मातृ-भाषा हिन्दी में पढ़ाई का विस्तार इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक, नर्सिंग और पैरामेडिकल में भी किया जाएगा।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री चौहान द्वारा सौंपे गए दायित्व के निर्वहन में शासकीय मेडिकल कॉलेज के 97 चिकित्सक की टीम ने 4 माह के परिश्रम से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पुस्तकें विकसित की।
हिन्दी सेवी श्री कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में हिन्दी में शिक्षा आरंभ हुई। यह पहल अंग्रेजी भाषा की मानसिक गुलामी से मुक्ति की दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम सिद्ध होगी। प्रदेश के कस्बों और गाँवों में भी जन-जन को हिन्दी में शिक्षा सुविधा के संबंध में जागरूक कर उन्हें हीन-भावना से मुक्त कराने के लिए गतिविधियाँ संचालित की जाएँ।
वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा ने कहा कि इस पहल से यह भ्रम दूर होगा कि तकनीकी विषयों की शिक्षा हिन्दी में नहीं हो सकती। उन्होंने हिन्दी भाषी विद्यार्थियों में आत्म-विश्वास के लिए देश की संस्कृति, स्वाभिमान, मानवीय मूल्यों पर प्रति शनिवार स्कूल और कॉलेजों में संगोष्ठियाँ करने का सुझाव दिया।
वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश के युवाओं को अंग्रेजी के भय से मुक्त किया है। कस्बाई और ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों में भाषायी अस्मिता और मातृ-भाषा के गौरव के लिए स्वदेशी आंदोलन के समान हिन्दी के आंदोलन का घर-घर में विस्तार किया जाना चाहिए।
रवीन्द्रनाथ टेगौर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कृषि के अध्ययन के लिए हिन्दी में पुस्तकें विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि माता-पिता की प्राय: यह सोच होती है कि अंग्रेजी में पढ़ाई से ही बच्चों का भविष्य सँवरेगा। इस मानस को बदलना आवश्यक है। विश्व के 112 विश्वविद्यालय में हिन्दी पढा़ई जा रही है। तकनीकी में आए बदलाव से भी हिन्दी का बहुत विस्तार हुआ है।
पत्रकार राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में प्रदेश में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना कर इस दिशा में कदम उठाए गए थे। हिन्दी के प्रोत्साहन के साथ हिन्दी की शुद्धता और सुरक्षा के लिए भी कदम उठाना आवश्यक है। मानस भवन के कार्यकारी अध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने कहा कि हिन्दी के सरल शब्दों के उपयोग से भाषा की लोकप्रियता बढ़ेगी। डॉक्टरों को अपने मरीजों से हिन्दी में बात करने और दवा के पर्चे देवनागरी में लिखने की पहल करना चाहिए। पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने स्वाधीनता के अमृत महोत्सव में हुई इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान को शुभकामनाएँ दी।
विराट कोहली की गिरफ्तारी की सोशल मीडिया पर उठी मांग
विराट कोहली और रोहित शर्मा की गिनती महान क्रिकेटरों में होती है। दोनों के देश-दुनिया में करोड़ों फैंस हैं। सोशल मीडिया पर दोनों खिलाड़ियों के बीच तुलना भी होती है, लेकिन तमिलनाडु में जो हुआ, वह शर्मसार करने वाला है। यहां विराट कोहली के प्रशंसक और रोहित शर्मा के प्रशंसक के बीच दोनों खिलाड़ियों को लेकर बहस इतनी बढ़ गई कि विराट कोहली के प्रशंसक ने रोहित शर्मा के फैन की हत्या कर दी। आरोपी फरार है, लेकिन सोशल मीडिया पर बवाल मचा है। #ArrestKohli ट्रेंड कर रहा है। पढ़ें पूरा घटनाक्रम
#ArrestKohli: विराट कोहली और रोहित शर्मा के फैन्स की कहानी
पूरा घटनाक्रम तमिलनाडु के मल्लूर का है। यहां दो दोस्त, पी. विग्नेश और धर्मराज क्रिकेट पर बात कर रहे थे। दोनों साथ में शराब भी पी रहे थे। विग्नेश रोहित शर्मा का फैन्स है। वहीं धर्मराज, विराट कोहली और उनकी आईपीएल टीम आरसीबी के प्रशंसक है। रोहित शर्मा और विराट कोहली में से कौन बेहतर खिलाड़ी और बेहतर कप्तान है, इसको लेकर शुरू हुई चर्चा बहस में बदल गई। धर्मराज बोलते समय थोड़ा हकलाता है। विग्नेश ने उसकी इसी कमजोरी को आरसीबी के प्रदर्शन से जोड़ लिया। इस बॉडी शेमिंग से धर्मराज गुस्सा गया। उसने शराब की बोतल उठाई और विग्नेश से सिर पर दे मारी। इसके बाद क्रिकेट बल्ले से भी उसे पीटा। बुरी तरह घायल विग्नेश ने दम तोड़ दिया। इसके बाद धर्मराज मौके से फरार हो गया। हालांकि बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यूं तो दोनों दोस्त थे, लेकिन विग्नेश हमेशा उसके हकलाने की आदत के बहाने से आरसीबी का मजाक उड़ाता था।
धनतेरस की रात इस स्थान पर जलाएं दीपक, धन की कमी दूर होगी
धनतेरस हर साल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाई जाती है। इस बार धनतेरस का पर्व 23 अक्टूबर रविवार को मनाया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार धनतेरस के दिन यदि आप किसी विशेष स्थान पर दीपक जलाते हैं तो आपकी आर्थिक परेशानी दूर हो जाती है। आइए जानते हैं धनतेरस के दिन कहां दीपक जलाकर माता लक्ष्मी की कृपा पाई जा सकती है।
– धनतेरस की रात श्मशान घाट पर दीपक जलाना चाहिए। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
– धनतेरस का त्योहार समृद्धि का पर्व माना जाता है। इस दिन पूजा कक्ष में दीपक जलाना चाहिए। दीपक को जलाने से वास्तु दोष दूर होते हैं। वहीं घर में आर्थिक समृद्धि आती है।
– धनतेरस के दिन घर की उत्तर-पूर्व दिशा में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। रुई की बाती की जगह लाल रंग के धागे का प्रयोग करें। दीपक जलाते समय उसमें कुमकुम डालें। वहीं दीपक को जमीन पर न रखकर सीधे चावल पर रखें।
– धनतेरस की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए। यदि आप पीपल के वृक्ष के पास दीपक जलाते हैं तो जीवन में धन की कमी दूर होती है।
– किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या हो तो धनतेरस की रात बेला के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। ऐसा करने से धन, सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
नर्सिंग कालेजों की फैकेल्टी को देना होगा शपथ पत्र, सिर्फ एक कालेज में है नाम
भोपाल । नर्सिंग कालेजों में हुए फर्जीवाड़े के बाद चिकित्सा शिक्षा संचालनालय हर फैकेल्टी के लिए शपथ पत्र अनिवार्य करने जा रहा है। इसमें उन्हें बताना होगा कि उनका नाम और किसी कालेज में फैकेल्टी (शिक्षक) के तौर पर दर्ज नहीं है। मेडिकल कालेजों में पहले से यह व्यवस्था है। साथ ही मप्र नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
अभी तक दूसरे राज्यों या इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी)में कराए गए पंजीयन को भी मान्य किया जा रहा था। ऐसे में कोई फैकेल्टी अपने नाम को शार्ट फार्म में लिखकर फैकेल्टी के तौर पर पंजीकृत होता था तो पकड़ पाना मुश्किल होता था। काउंसिल के अधिकारियों ने बताया कि एमपी आनलाइन के पोर्टल पर जैसे ही फैकेल्टी मप्र नर्सिंग काउंसिल का पंजीयन नंबर डालेगा पहले कहीं नाम होने पर जानकारी आ जाएगी।
241 कालेजों की समाप्त की जा चुकी है मान्यता
फर्जीवाड़ा करने के चलते प्रदेश के 241 कालेजों की मान्यता नर्सिंग काउंसिल द्वारा समाप्त की जा चुकी है। इनके अलावा मौजूदा सत्र में 94 कालेजों की मान्यता हाईकोर्ट जबलपुर के निर्देश पर नर्सिंग काउंसिल ने निलंबित की थी। इनमें कई बड़े कालेज भी शामिल थे। इन कालेजों ने मान्यता नवीनीकरण के संबंध में काउंसिल द्वारा भेजे गए ईमेल का जवाब ही नहीं दिया था।
जवाब देने पर इनमें 80 कालेजों की मान्यता बहाल की जा चुकी है। इनके अलावा 45 कालेजोें की मान्यता 21 सितंबर को समाप्त की गई है। यह वही कालेज हैं जिन्हें मान्यता देने के लिए नर्सिंग काउंसिल की तत्कालीन रजिस्ट्रार सुनीता शिजू को हाईकोर्ट ने निलंबित करने को कहा था।
रजिस्ट्रार ने कहा था कि मापदंड पूरा करने पर ही इन कालेजों को मान्यता दी गई थी। इसके बाद ला स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने कुछ कालेजों के संबंध में दस्तावेज कोर्ट में पेशकर बताया था कि कालेजों में न तो फैकेल्टी, न भवन और नहीं अस्पताल। इसके बाद भी मान्यता दे दी गई है।
फार्मेसी के सहायक प्राध्यापक ने सर्वश्रेष्ठ विज्ञानियों की सूची में बनाई जगह
इंदौर। विश्व के सर्वश्रेष्ठ दो प्रतिशत विज्ञानियों की सूची में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के सहायक प्राध्यापक ने जगह बनाई है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर प्रकाशन ने वर्ष 2021 की सूची तैयार कर 10 अक्टूबर 2022 को जारी कर दी है, जिसमें 22 क्षेत्रों व 176 उपक्षेत्रों से संबंधित विज्ञानियों का डाटाबेस रखा है।
स्कूल आफ फार्मेसी के सहायक प्राध्यापक डा. मुकेश शर्मा ने फर्मेसी क्षेत्र की कुछ रिसर्च को अमेरिका की विश्वविद्यालय व संस्थान को भेजा था। विश्वभर से लाखों आवेदन आए। स्क्रूटनी करने के बाद समिति ने मधुमेह, कैंसर, हाई ब्लड प्रेशर की शोध को बेहतर माना है। उसके आधार पर डा. शर्मा ने सूची में जगह बनाई है। उन्होंने 35 किताबों में लेख, 70 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। यहां तक डा. शर्मा को शोध क्षेत्र में यूजीसी रिसर्च अवार्ड 2012-13 से पुरस्कार मिल चुका है। वैसे वह कई सालों से फार्मेसी विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। यहां तक विश्वविद्यालय की विभिन्न समिति और कार्यों का दायित्व निभाते आए हैं।
उन्होंने बताया कि सूची में शोध क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों का चयन होता है। आकलन करने का काम एल्सेवियर और स्कोपस इंडेक्स संस्थाएं ने स्तरीय मापदंड बनाए हैं। इसके चलते विश्वभर के महज दो प्रतिशत विज्ञानियों को सूची में शामिल किया जाता है। कुलपति डा. रेणु जैन का कहना है कि इसे पहले भी विश्वविद्यालय के कई शिक्षक सूची में जगह बना चुके है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय रिसर्च क्षेत्र पर अधिक ध्यान दे रही है। वे बताती है कि सभी विभागों को रिसर्च को लेकर निर्देश दिए है, जिसमें समाज को नई दिशा देने वाली शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। ताकि लोगों को इसका फायदा हो सके।
ज्ञानवापी मामले में फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा हिंदू पक्ष
ज्ञानवापी मामले में वाराणसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ हिंदू पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। दरअसल, वाराणसी कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में मौजूद कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग नहीं कराने का फ़ैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि इससे सुप्रीम कोर्ट के आदेश (मौजूदा ढांचे की यथास्थिति बनाये रखना) की अवहेलना होगी। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हम इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। कोर्ट ने ये कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने उस जगह को सील कर रखा है इसलिए हम इसमें कोई भी ऑर्डर पास नहीं कर सकते। मैं अभी इसकी तिथि नहीं बता सकता, लेकिन हम शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
इस मामले में 5 में से 4 पक्षकारों ने कथित शिवलिंग की ASI द्वारा वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की थी। जबकि मस्जिद पक्ष ने दलील दी कि वहां शिवलिंग नहीं फ़व्वारा है। इसकी सुनवाई 11 तारीख़ को सुनवाई पूरी हो गई थी। आपको बता दें कि 5 में से 1 हिंदू पक्षकार ने भी कथित शिवलिंग के वैज्ञानिक परीक्षण का विरोध किया। इस मा्मले में मस्जिद पक्ष की दलील है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि पूरा वजूखाना सील रहे, ऐसे मंय सर्वे का आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा। हम बस चाहते हैं कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण से पता चले कि शिवलिंग कितने साल पुराना है। अगर कोर्ट आज सर्वेक्षण के लिए जानकारों की कमेटी बनाएगा तो हमें वो मंज़ूर होगा। इस पर अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना नहीं होनी चाहिए और इस आधार पर कार्बन डेटिंग की अर्जी को खारिज कर दिया।
हिमाचल प्रदेश में 12 नवंबर को विधानसभा चुनाव का ऐलान
शुक्रवार को निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की। सीईसी राजीव कुमार और ईसी अनूप चंद्र पांडे ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। सीईसी राजीव कुमार ने चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि 8 जनवरी को हिमाचल प्रदेश में वर्तमान विधानसभा का अवधि खत्म हो रही है। इसलिए इस बार विधानसभा चुनाव एक चरण में आयोजित किये जाएंगे और 17 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। मतदान की तारीख 12 नवंबर तय की गई है, जबकि वोटों की गिनती 8 दिसंबर को होगी।
उन्होंने ये भी कहा कि हम निष्पक्ष चुनाव कराने को प्रतिबद्ध है और हमारा प्रयास है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होना चाहिए। हिमाचल में 80 साल से ज्यादा के बुजुर्ग और दिव्यांग वोटर्स घर बैठे बैलेट पेपर से वोट डाल सकेंगे। साथ ही नए वोटरों का खास ध्यान रखा जाएगा। ये लोग नामांकन के दिन तक वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कर सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश का चुनावी समीकरण
हिमाचल प्रदेश का चुनावी समीकरण देश के बाकी राज्यों से काफी अलग रहा है। प्रदेश में 1985 के बाद से हर बार सत्ता परिवर्तन हुआ है। हर पांच साल पर कांग्रेस और बीजेपी की सरकार बारी-बारी से सत्ता में आई है। अगर पिछले चुनाव के परिणामों की बात करें तो 68 सीटों पर हुए इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 44 सीटें जीतकर बाजी मार ली थी। वहीं, कांग्रेस को 15 सीटों का नुकसान हुआ था और मात्र 21 सीटों पर सिमट कर रह गयी थी। बाकी बचे तीन सीटों पर निर्दलीय और अन्य राजनीतिक दलों का कब्जा रहा था। बीजेपी इस बार इतिहास को बदलकर दुबारा सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। पीएम मोदी की हिमाचल के लगातार हो रहे दौरे इसका स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।





