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महाराष्ट्र SIR में 33% मतदाताओं के नाम कटने का दावा, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

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महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि राज्य में ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 33 प्रतिशत यानी लगभग 3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इस मामले में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।

3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा
याचिकाकर्ता अरुण आनंदगिरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद पी. दातार ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र में करीब 9 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 3 करोड़ के नाम ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगतियों (Logical Discrepancies) के आधार पर प्रभावित हुए हैं।

याचिका में मुंबई और पुणे जैसे शहरों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने का मुद्दा भी उठाया गया। दलील दी गई कि पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण स्थान बदलने वाले कई लोगों को भी सूची में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखे गए हैं; इन पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।

फॉर्म-6 को लेकर भी उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने को कहा जा रहा है। यह फॉर्म सामान्यतः नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है। ऐसे में पहले मतदान कर चुके लोगों के सामने घोषणा से जुड़ी व्यावहारिक और कानूनी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इस पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आश्वासन दिया कि फॉर्म भरने के कारण किसी को अभियोजन का सामना नहीं करना पड़ेगा। याचिकाकर्ता ने हटाए गए मतदाताओं के लिए अलग फॉर्म की व्यवस्था करने की मांग भी की।

अंतिम मतदाता सूची पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मतदाता सूची से इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने के कारण प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए अधिक समय की जरूरत है। उन्होंने दावों और आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग का पक्ष सुने बिना तत्काल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए मामले को 5 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। इस प्रकार, फिलहाल मतदाता सूची की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगी है और नाम हटाए जाने से जुड़े आरोपों पर आयोग का जवाब आने के बाद आगे की सुनवाई होगी।

जामिया मामले में FIR दर्ज होने पर भड़के इमरान मसूद, कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने नाराजगी जताई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। जामिया परिसर में हुए घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी चर्चा जारी है।

इमरान मसूद की प्रतिक्रिया के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। हालांकि, FIR में दर्ज आरोपों, पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और सांसद के बयान के सटीक विवरण की पुष्टि आधिकारिक जानकारी से किया जाना जरूरी है।

रामलीला मैदान में रैली से पहले राहुल गांधी का बड़ा बयान, बोले- ‘मोदी जी, CEC को हटाइए, 30 सेकंड में रुक जाएगा आंदोलन’

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दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली विपक्षी INDIA गठबंधन की महारैली से पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें हटा दें, तो 30 सेकंड में आंदोलन रुक जाएगा। राहुल गांधी का यह बयान दिल्ली के व्यापारियों की ओर से रैली स्थगित करने की अपील के बाद आया है।

‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना
राहुल गांधी लगातार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए गए और सवाल उठाने वालों पर लाठियां चलाई गईं। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जनता को आगे आना होगा। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं; चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण का बचाव किया है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
कांग्रेस ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ जन मार्च और महारैली का आह्वान किया है। राहुल गांधी ने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों से इसमें शामिल होने की अपील की है। विपक्ष इस कार्यक्रम के जरिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही का मुद्दा उठाने की तैयारी में है।

फ्रांस में महंगाई और शिक्षा को लेकर हिंसक प्रदर्शन, 1300 से ज्यादा लोग हिरासत में; 53 पुलिसकर्मी घायल

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फ्रांस में बढ़ती महंगाई, गिरती क्रय शक्ति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर हो रहे प्रदर्शनों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। शनिवार, 24 अक्टूबर को देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने 1,314 लोगों को हिरासत में लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान करीब 53 पुलिसकर्मी घायल हुए। कई शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं।

देशभर में सड़कों पर उतरे हजारों प्रदर्शनकारी
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शनों में देशभर में लगभग 4.10 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। राजधानी पेरिस में करीब 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, जबकि आयोजकों ने देशव्यापी भागीदारी का आंकड़ा इससे अधिक बताया।

प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, वेतन, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। छात्र संगठनों के साथ श्रमिक संगठनों और अन्य समूहों ने भी इन प्रदर्शनों में भाग लिया।

कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
पेरिस सहित कई शहरों में दिन के अंत में हालात तनावपूर्ण हो गए। कुछ स्थानों पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जबकि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। कुछ दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा।

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार, पिछले सप्ताह हुए व्यापक उपद्रव की तुलना में इस बार नुकसान कम रहा। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पहले से जांच करने के कारण कई जगहों पर स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिली।

शिक्षा व्यवस्था भी प्रदर्शन का बड़ा मुद्दा
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और खराब शैक्षणिक सुविधाओं को लेकर छात्रों की नाराजगी से हुई थी। बाद में यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की लागत और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों तक फैल गया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बढ़ते खर्च के बीच आम लोगों के लिए जीवनयापन मुश्किल होता जा रहा है। वहीं, सरकार ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन
प्रदर्शनकारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने 31 अक्टूबर को फिर से प्रदर्शन करने और 5 नवंबर को देशव्यापी हड़ताल की योजना की घोषणा की है। ऐसे में फ्रांस सरकार के सामने महंगाई, वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर समाधान तलाशने की चुनौती बनी हुई है।

ऐतिहासिक विरासत, खूबसूरत पहाड़ियों, हरियाली और प्रेम की अमर दास्तान का अनुभव करना चाहते हैं, तो धार जिले का मांडू आपके लिए शानदार पर्यटन स्थल है। यहां स्थित जहाज महल पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है, जबकि रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी इस ऐतिहासिक नगरी को खास पहचान देती है। अक्टूबर के अंतिम दिनों और नवंबर की शुरुआत में सुहावने मौसम के बीच मांडू घूमने का आनंद और बढ़ जाता है। दो तालाबों के बीच खड़ा है अनोखा जहाज महल मांडू का जहाज महल अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मुंज तालाब और कपूर तालाब के बीच बनी यह दो मंजिला इमारत पानी में तैरते जहाज जैसी दिखाई देती है। सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी के शासनकाल में निर्मित इस महल की लंबाई करीब 110 मीटर बताई जाती है। पानी में महल की परछाईं और इसके खुले मंडप, छज्जे तथा मेहराब पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी मांडू की पहचान रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेमगाथा से भी जुड़ी हुई है। इतिहास और लोककथाओं में दोनों के प्रेम, संगीत और विरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहाड़ी पर स्थित रूपमती मंडप से नर्मदा घाटी और दूर तक फैले प्राकृतिक दृश्यों का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य खास तौर पर आकर्षक होता है। बाज बहादुर का महल भी मांडू के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है। इसके विशाल आंगन, ऊंची छतें और आसपास की पहाड़ियों के दृश्य मध्यकालीन स्थापत्य की झलक प्रस्तुत करते हैं। हिंडोला महल और जामा मस्जिद भी हैं खास मांडू की यात्रा के दौरान हिंडोला महल, अशर्फी महल, जामा मस्जिद और होशंग शाह का मकबरा भी देखा जा सकता है। हिंडोला महल अपनी झुकी हुई दीवारों के कारण अलग पहचान रखता है। वहीं, जामा मस्जिद की विशाल संरचना और होशंग शाह के मकबरे की संगमरमर की वास्तुकला इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करती है। कैसे पहुंचें मांडू? मांडू मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए इंदौर सबसे सुविधाजनक प्रमुख शहरों में से एक है। हवाई मार्ग: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा है। रेल मार्ग: इंदौर और रतलाम प्रमुख नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं। सड़क मार्ग: इंदौर से धार होते हुए सड़क के रास्ते मांडू पहुंचा जा सकता है। इंदौर से दूरी लगभग 95 किलोमीटर है। ठहरने और स्थानीय खानपान का भी लें आनंद मांडू में पर्यटकों के लिए होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं। यहां घूमने के साथ स्थानीय मालवी व्यंजनों का स्वाद लेना भी यात्रा को खास बना सकता है। दाल-पानिया मांडू के लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है।

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ऐतिहासिक विरासत, खूबसूरत पहाड़ियों, हरियाली और प्रेम की अमर दास्तान का अनुभव करना चाहते हैं, तो धार जिले का मांडू आपके लिए शानदार पर्यटन स्थल है। यहां स्थित जहाज महल पानी में तैरते जहाज जैसा दिखाई देता है, जबकि रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी इस ऐतिहासिक नगरी को खास पहचान देती है। अक्टूबर के अंतिम दिनों और नवंबर की शुरुआत में सुहावने मौसम के बीच मांडू घूमने का आनंद और बढ़ जाता है।

दो तालाबों के बीच खड़ा है अनोखा जहाज महल
मांडू का जहाज महल अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मुंज तालाब और कपूर तालाब के बीच बनी यह दो मंजिला इमारत पानी में तैरते जहाज जैसी दिखाई देती है। सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी के शासनकाल में निर्मित इस महल की लंबाई करीब 110 मीटर बताई जाती है। पानी में महल की परछाईं और इसके खुले मंडप, छज्जे तथा मेहराब पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

रानी रूपमती और बाज बहादुर की अमर प्रेम कहानी
मांडू की पहचान रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेमगाथा से भी जुड़ी हुई है। इतिहास और लोककथाओं में दोनों के प्रेम, संगीत और विरह की कहानियां प्रचलित हैं। पहाड़ी पर स्थित रूपमती मंडप से नर्मदा घाटी और दूर तक फैले प्राकृतिक दृश्यों का मनमोहक नजारा दिखाई देता है। सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य खास तौर पर आकर्षक होता है।

बाज बहादुर का महल भी मांडू के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में शामिल है। इसके विशाल आंगन, ऊंची छतें और आसपास की पहाड़ियों के दृश्य मध्यकालीन स्थापत्य की झलक प्रस्तुत करते हैं।

हिंडोला महल और जामा मस्जिद भी हैं खास
मांडू की यात्रा के दौरान हिंडोला महल, अशर्फी महल, जामा मस्जिद और होशंग शाह का मकबरा भी देखा जा सकता है। हिंडोला महल अपनी झुकी हुई दीवारों के कारण अलग पहचान रखता है। वहीं, जामा मस्जिद की विशाल संरचना और होशंग शाह के मकबरे की संगमरमर की वास्तुकला इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करती है।

कैसे पहुंचें मांडू?
मांडू मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। यहां पहुंचने के लिए इंदौर सबसे सुविधाजनक प्रमुख शहरों में से एक है।
हवाई मार्ग: इंदौर का देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट निकटतम प्रमुख हवाई अड्डा है।
रेल मार्ग: इंदौर और रतलाम प्रमुख नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं।
सड़क मार्ग: इंदौर से धार होते हुए सड़क के रास्ते मांडू पहुंचा जा सकता है। इंदौर से दूरी लगभग 95 किलोमीटर है।

ठहरने और स्थानीय खानपान का भी लें आनंद
मांडू में पर्यटकों के लिए होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट उपलब्ध हैं। यहां घूमने के साथ स्थानीय मालवी व्यंजनों का स्वाद लेना भी यात्रा को खास बना सकता है। दाल-पानिया मांडू के लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है।

खरगे के बयान पर भड़के CM योगी, बोले- ‘यह 145 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं का अपमान’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर सियासी घमासान तेज हो गया है। बिहार की राजधानी पटना में दिए गए खरगे के बयान पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। योगी ने इसे 145 करोड़ भारतीयों की भावनाओं का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।

पटना में खरगे की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
25 अक्टूबर 2026 को बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर सभा में मौजूद एक व्यक्ति की टिप्पणी पर खरगे ने जवाब देते हुए कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति बन गई और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खरगे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह 145 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला कृत्य बताते हुए कांग्रेस की हताशा, निराशा और वैचारिक दिवालियापन का प्रमाण करार दिया।

भाजपा ने भी जताई कड़ी नाराजगी
खरगे की टिप्पणी पर भाजपा नेताओं ने भी आपत्ति जताई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस की आलोचना की। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध के दौरान प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है।

काले धन और चुनावी मुद्दों पर भी बोले खरगे
पटना में अपने संबोधन के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी पर काले धन को वापस लाने के वादे को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), भाजपा और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी निशाना साधा। कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी आरोप लगाए, जबकि इन आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

बांग्लादेश का बदला रुख! चीन की रणनीति को झटका या भारत के लिए नई चुनौती? जानिए पूरा मामला

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दक्षिण एशिया में भारत, चीन और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। बांग्लादेश के चीन के साथ बढ़ते आर्थिक और रक्षा संबंधों के बीच क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। हालांकि, बांग्लादेश के चीन को बड़ा झटका देने के दावे की पुष्टि के लिए संबंधित घटनाक्रम को समझना जरूरी है।

चीन के साथ बढ़ा बांग्लादेश का सहयोग
सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश और चीन के बीच रक्षा एवं व्यापार सहयोग बढ़ रहा है। दोनों देश कूटनीति और रक्षा से जुड़े मुद्दों पर ‘2+2’ संवाद शुरू करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि ढाका अपनी विदेश नीति में चीन के साथ संबंधों को अधिक महत्व दे रहा है।

क्या चीन की भारत को घेरने की रणनीति सफल हो रही है?
चीन लंबे समय से दक्षिण एशिया में अपनी आर्थिक और सामरिक मौजूदगी बढ़ाने में जुटा है। बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के पास चीनी आर्थिक क्षेत्र विकसित करने और तीस्ता नदी परियोजना में सहयोग जैसे कदमों ने भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ाई हैं। भारत के लिए पूर्वोत्तर राज्यों को शेष देश से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के आसपास के घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण हैं।

बांग्लादेश की रणनीति: चीन से दोस्ती, भारत से भी जरूरी संबंध
बांग्लादेश की नीति को केवल चीन के समर्थन या भारत के विरोध के रूप में देखना सही नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका बुनियादी ढांचे, व्यापार और रक्षा जरूरतों के लिए चीन के साथ सहयोग बढ़ाते हुए दूसरे देशों के साथ भी संबंध बनाए रखना चाहता है। भारत के साथ उसकी भौगोलिक निकटता, व्यापार, ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था के रिश्ते भी बेहद अहम हैं।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
बांग्लादेश और चीन के बढ़ते सहयोग से भारत को अपनी पूर्वी सीमाओं, बंगाल की खाड़ी और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं पर रणनीतिक नजर बनाए रखनी होगी। वहीं, भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

दिल्ली के हर्ष विहार में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन मकान का स्लैब ढहा, मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके हर्ष विहार स्थित मिलन गार्डन में रविवार शाम एक निर्माणाधीन मकान का स्लैब गिरने से हड़कंप मच गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गए।

शाम 6:46 बजे मिली हादसे की सूचना
दिल्ली अग्निशमन सेवा के अनुसार, रविवार शाम करीब 6 बजकर 46 मिनट पर मिलन गार्डन इलाके में मकान गिरने की सूचना मिली। इसके बाद तत्काल पांच दमकल गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। पुलिस और संबंधित विभागों की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।

पुरानी इमारत पर बनाई जा रही थी अतिरिक्त मंजिल
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मकान पहले से एक मंजिला था और उसके ऊपर अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया जा रहा था। रविवार को पहली मंजिल का लेंटर डाला गया था। आशंका जताई जा रही है कि पुरानी इमारत नए निर्माण का भार सहन नहीं कर सकी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

मलबे में मजदूरों के फंसे होने की आशंका
मकान मालिक ने आशंका जताई है कि हादसे के समय दो मजदूर इमारत के भीतर मौजूद हो सकते थे। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस और अन्य संबंधित टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। बचाव अभियान के दौरान मलबा हटाकर स्थिति का आकलन किया जा रहा है।

फिलहाल, मलबे में लोगों के दबे होने और जनहानि को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के खातों में अंतरित किए ₹317.86 करोड़, रबी 2025-26 के 16.70 लाख किसान आवेदनों को मिलेगा लाभ

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मध्यप्रदेश के किसानों को फसल बीमा योजना के तहत आर्थिक राहत मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को धार जिले के सरदारपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत रबी वर्ष 2025-26 की 317.86 करोड़ रुपये की बीमा दावा राशि किसानों के खातों में अंतरित की। यह भुगतान लगभग 16.70 लाख पात्र किसान आवेदनों के लिए किया गया। राशि सीधे बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी गई।

एक क्लिक से किसानों के खातों में पहुंची राशि
मुख्यमंत्री ने सरदारपुर में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए बीमा दावा राशि का अंतरण किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और अधिसूचित जोखिमों के कारण फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में पात्र किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।

बीमा दावा राशि मिलने से संबंधित किसानों को खेती-किसानी के खर्चों को पूरा करने और आगामी फसल की तैयारी करने में मदद मिल सकती है। प्रत्येक किसान को मिलने वाली राशि उसके स्वीकृत बीमा दावे और योजना के निर्धारित नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

2,387 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजना का भी लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 2,387.60 करोड़ रुपये की नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण भी किया।

इस परियोजना से धार और झाबुआ जिलों के 260 गांवों की लगभग 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने और वर्षा पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

किसानों के कल्याण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कृषि क्षेत्र में सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। फसल बीमा राशि के अंतरण के साथ सिंचाई परियोजना का लोकार्पण कृषि क्षेत्र में जोखिम कम करने और खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

किसान ऐसे जांचें बीमा राशि का स्टेटस
जिन किसानों का बीमा दावा स्वीकृत है, वे अपने बैंक खाते की पासबुक अपडेट कराकर या बैंक की मोबाइल बैंकिंग सेवा के माध्यम से भुगतान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि राशि खाते में नहीं पहुंची है, तो संबंधित बैंक, बीमा कंपनी या कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में पंडवानी कलाकारों को CM साय की बड़ी सौगात, 70 दलों को मिलेंगे 25-25 हजार रुपये; तीजन बाई के नाम पर होगा लोककला अलंकरण

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अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन पर जोर देते हुए कलाकारों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में शामिल 70 लोककला दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के साथ क्षेत्र में शिक्षा और सड़क निर्माण से जुड़ी सौगात भी दी।

70 लोककला दलों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री साय ने आयोजकों की मांग पर महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को प्रत्येक को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी नृत्य दल और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं। इस घोषणा से प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी कला और परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्था पिछले 46 वर्षों से लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रही है। ऐसे प्रयास छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण हैं।

तीजन बाई के नाम पर शुरू होगा लोककला अलंकरण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। उनके गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं ने महाभारत की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर इस लोकविधा को देश-विदेश के मंचों तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि तीजन बाई के नाम पर इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर लोककला अलंकरण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने और वहां के हाईस्कूल का नामकरण उनके नाम पर करने की पहल की जाएगी। इन प्रयासों का उद्देश्य तीजन बाई की सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

बानबरद को हाईस्कूल और सड़क निर्माण की सौगात
पंडवानी महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़ी मांगों पर भी महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बानबरद के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने तथा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण कराने की घोषणा की। इन कार्यों से स्थानीय विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा मिलने और आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ी सिनेमा और कलाकारों को मिलेगा नया मंच
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाओं का संरक्षण करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और कलाकारों तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

जनप्रतिनिधि और कलाकार रहे मौजूद
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, विधायक रिकेश सेन, दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू और पद्मश्री डॉ. उषा बारले सहित अन्य जनप्रतिनिधि तथा प्रदेशभर से आए लोक कलाकार उपस्थित रहे। वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने और लोककलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में कलाकारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पंडवानी महासम्मेलन में हुई घोषणाओं को लोक कलाकारों के प्रोत्साहन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।