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नीमच में 6,000 करोड़ का जलविद्युत प्रोजेक्ट तैयार, मार्च 2027 से शुरू होगा बिजली उत्पादन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मध्यप्रदेश को मिलेगी 2,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन की बड़ी सौगात, दिसंबर में चालू होगी पहली टरबाइन

भोपाल/नीमच। मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आई है। नीमच जिले में करीब 6,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया विशाल जलविद्युत संयंत्र बिजली उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना से मार्च 2027 से बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पहली टरबाइन दिसंबर 2026 में चालू हो जाएगी। लगभग 2,000 मेगावॉट क्षमता वाली यह परियोजना पूरी तरह संचालित होने पर मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।

एशिया की बड़ी परियोजनाओं में होगी शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश निजी कंपनी द्वारा किया गया है। परियोजना की पूरी क्षमता 2,000 मेगावॉट बताई गई है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
इस संयंत्र के शुरू होने से मध्यप्रदेश की ऊर्जा उपलब्धता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासकर बढ़ती औद्योगिक जरूरतों और बिजली की मांग को पूरा करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

राज्य सरकार लगातार सौर ऊर्जा, जलविद्युत और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है। नीमच की यह परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 6 साल की सेवा के बाद स्थायी सैनिक बनने का मिलेगा मौका, सरकार ने बदले नियम

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अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 6 साल की सेवा के बाद स्थायी सैनिक बनने का मिलेगा मौका, सरकार ने बदले नियम
केंद्र सरकार ने अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव करते हुए अग्निवीरों के लिए सेना में स्थायी भर्ती का रास्ता खोल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। नए फैसले के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को अब दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा। इसके बाद वे नियमित सैनिक के रूप में सेना में शामिल हो सकेंगे।

नई व्यवस्था के अनुसार, चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले 25 प्रतिशत अग्निवीरों को पहले की तरह योग्यता और मेरिट के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जाएगा। वहीं, शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का दूसरा सेवा कार्यकाल दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें पहले की तुलना में अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि पैकेज और वरिष्ठता संबंधी लाभ भी मिलेंगे।

रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा करने के बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए उनकी सहमति और सेना के निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य होगा। यानी स्थायी नियुक्ति स्वतः नहीं होगी, बल्कि निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से सेना को प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही अग्निवीरों को भी सैन्य सेवा में स्थायी करियर बनाने का बेहतर अवसर मिलेगा।

अग्निपथ योजना में यह बदलाव हजारों अग्निवीरों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।

अयोध्या दीपोत्सव में दिखेगी देशभर की लोक संस्कृति, विभिन्न राज्यों के कलाकार देंगे शानदार प्रस्तुतियां

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भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में आयोजित होने वाला दीपोत्सव इस बार दीपों की जगमगाहट के साथ देश की विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक कलाओं का भी भव्य संगम बनेगा। आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले कलाकार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध लोक परंपराओं की झलक पेश करेंगे।

दीपोत्सव के दौरान विभिन्न राज्यों के लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक संगीत दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। कलाकार अपनी क्षेत्रीय वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और अनूठी कला शैलियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर जीवंत करेंगे।

इस आयोजन का उद्देश्य भगवान श्रीराम की नगरी में दीपोत्सव को धार्मिक और आध्यात्मिक उत्सव के साथ-साथ राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता के उत्सव के रूप में प्रस्तुत करना है। देश के अलग-अलग हिस्सों की लोक कलाओं को एक मंच मिलने से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

दीपों से रोशन अयोध्या में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां उत्सव की भव्यता को और बढ़ाएंगी। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही स्थान पर देश की विविध लोक परंपराओं, संगीत और नृत्य का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।

सैम ऑल्टमैन ने बदला अपना नाम, अब कहलाएंगे ‘RAM’ ऑल्टमैन! सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

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टेक्नोलॉजी की दुनिया में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा कोई नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि उनका नाम है। ‘RAM ऑल्टमैन’ नाम को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। इस दिलचस्प बदलाव ने टेक जगत और AI यूजर्स का ध्यान खींचा है।

RAM को लेकर क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, 29 अक्टूबर को Cheeky Pint पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सैम ऑल्टमैन ने कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली RAM (Random Access Memory) को लेकर अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया में मेमोरी की सीमित उपलब्धता के बीच बड़ी मात्रा में DRAM का निजी कंप्यूटरों में पड़ा रहना संसाधनों के इस्तेमाल के लिहाज से प्रभावी नहीं है। उनका सुझाव था कि क्लाउड और डेटा सेंटर में मेमोरी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए।

एलन मस्क ने भी ली चुटकी
ऑल्टमैन की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उनकी आलोचना शुरू कर दी। इस बहस में एलन मस्क भी शामिल हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों को भी अपनी RAM रखने का अधिकार मिलना चाहिए। इसके बाद यूजर्स ने सैम ऑल्टमैन को ‘RAM ऑल्टमैन’ नाम रखने की सलाह दी।

ऑल्टमैन ने खुद स्वीकार किया नया नाम
एक यूजर के सुझाव पर सैम ऑल्टमैन ने ‘OK, Yeah’ कहकर सहमति जताई और अपने X अकाउंट का डिस्प्ले नेम बदलकर ‘Ram Altman’ कर लिया। हालांकि, उनका यूजरनेम @sama ही बना हुआ है।

ऑल्टमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बातों को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। वह चाहते हैं कि दुनिया में मेमोरी का उत्पादन बढ़े और लोग अपने कंप्यूटर में जरूरत के मुताबिक अधिक से अधिक RAM लगा सकें।

इस तरह AI की दुनिया के बड़े नाम सैम ऑल्टमैन का यह नया नाम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

उज्जैन में बनेगी भगवान श्रीकृष्ण पर अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की बैठक में दिए निर्देश

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार, 2 नवंबर को मंत्रालय में श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की कार्यसमिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास के साथ न्यास की आगामी कार्ययोजनाओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित अत्याधुनिक रिसर्च लाइब्रेरी स्थापित करने के निर्देश दिए।

शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन में स्थापित होने वाली रिसर्च लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियों और शोध पत्रों का संग्रह किया जाएगा। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, विचारों और शिक्षाओं पर केंद्रित शोध, वृत्तचित्र, नाटक और संगीत श्रृंखलाओं के लिए समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं यूट्यूब चैनल शुरू करने की योजना बनाई जाए। उन्होंने कृषि, गौ-संवर्धन और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कलाओं एवं विद्याओं पर प्रादेशिक और राष्ट्रीय स्तर पर विचार सत्र तथा संगोष्ठियां आयोजित करने पर भी जोर दिया।

श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण की थी। प्रदेश के विभिन्न स्थानों से भी उनकी यात्राओं के प्रसंग जुड़े हुए हैं। ऐसे सभी स्थलों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इन्हें तीर्थ के रूप में विकसित किया जाए। इन कार्यों में कृष्ण भक्ति से जुड़ी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए।

मंदिरों की आय से गौशालाओं और गांवों का होगा विकास
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों के संरक्षण, संवर्धन और बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों से जुड़ी भूमि का उपयोग कृषि और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। बड़े मंदिरों की आय के एक हिस्से का उपयोग आसपास की गौशालाओं और वृंदावन गांवों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। मंदिरों में मौजूद जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए जल गंगा अभियान के अंतर्गत कार्य किए जाएं।

3200 से अधिक मंदिरों के विकास कार्यों की समीक्षा
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 3200 से अधिक मंदिरों के रखरखाव, प्रवेश द्वारों के निर्माण और श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम के विकास एवं जीर्णोद्धार के लिए भूमि-पूजन भी हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने नारायण धाम महिदपुर, श्रीकृष्ण धाम छतरपुर, जानापाव महू (इंदौर), अमझेरा (धार), मां जागेश्वरी लोक (चंदेरी), श्रीकृष्ण राधा लोक (पन्ना) और रायसेन जिले की जमगढ़ पहाड़ियों में जारी विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में संस्कृति राज्य मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी वर्चुअली शामिल हुए। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, शिवशेखर शुक्ला, अनुपम राजन और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

आधुनिक कृषि तकनीक अपनाएं किसान, पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी से भी बढ़ाएं आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने और पशुपालन, मछली पालन तथा उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खेती को अधिक लाभकारी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि में विविधीकरण और नवाचार जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 नवंबर 2026 को सिवनी की सिमरिया मंडी में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती के साथ आय के अतिरिक्त साधनों से जोड़ना और कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान पारंपरिक फसलों के साथ दलहन, तिलहन, नकदी फसलों और उद्यानिकी फसलों की खेती को भी अपनाएं। बाजार की मांग के अनुसार फसल उत्पादन करने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है और खेती से जुड़े जोखिम को कम करने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, वैज्ञानिक पद्धतियों और कृषि नवाचारों के उपयोग से कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है। खेती के साथ दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन को जोड़ने से किसानों के लिए आमदनी के नए रास्ते खुलेंगे। खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

कृषि महोत्सव में किसानों को मिला तकनीकी मार्गदर्शन
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, उन्नत फसल उत्पादन और कृषि आधारित व्यवसायों की जानकारी दी। विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन से संबंधित सरकारी योजनाओं, पात्रता और लाभ की जानकारी भी दी गई। उन्नत खेती और नवाचार अपनाने वाले किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यमंत्री ने किसान क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने युवाओं से भी कृषि को आधुनिक तकनीक और नवाचार के माध्यम से रोजगार एवं उद्यमिता का प्रभावी माध्यम बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत मंडपम में किया पुस्तक का विमोचन, छत्तीसगढ़ की हरित ऊर्जा और निवेश संभावनाओं को किया प्रस्तुत

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की हरित ऊर्जा एवं निवेश संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के माध्यम से प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों, निवेश की संभावनाओं और भविष्य की ऊर्जा विकास योजनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया।

पुस्तक में राज्य की नई नवीकरणीय ऊर्जा नीति, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों, ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं तथा स्वच्छ और सतत ऊर्जा विकास की संभावनाओं को विस्तार से शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य निवेशकों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योगपतियों को छत्तीसगढ़ की नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और नवाचार के नए अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुस्तक निवेशकों और ऊर्जा क्षेत्र के हितधारकों को छत्तीसगढ़ में उपलब्ध संभावनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का बड़ा लक्ष्य, 5.60 लाख करोड़ के निवेश से बदलेगी तस्वीर; 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य

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छत्तीसगढ़ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

राज्य सरकार का फोकस पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर है। इस दिशा में नए निवेश, आधुनिक तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरित ऊर्जा परियोजनाओं के विकास से राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में 1.33 लाख करोड़ का निवेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एवं एक्सपो-2026 में छत्तीसगढ़ की ऊर्जा विकास कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की 23,923 मेगावाट क्षमता विकसित करने के लिए लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की रूपरेखा तैयार की गई है।

पंप स्टोरेज और बैटरी परियोजनाओं पर विशेष जोर
हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के साथ बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें लगभग 65 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट सौर परियोजना के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे की बैटरी स्टोरेज प्रणाली पहले से संचालित है।

सौर ऊर्जा से गांवों और किसानों को लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजनांदगांव जिले का खैरा गांव प्रदेश का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा आधारित गांव बन चुका है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत राज्य में लगभग 1.26 लाख सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। वहीं, 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने की भी योजना है।

बायोगैस और परमाणु ऊर्जा में भी निवेश की तैयारी
ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए कृषि अवशेष और गोबर से कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल तथा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। प्रदेश में 80 मीट्रिक टन क्षमता के आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की योजना है, जिनमें करीब 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके साथ ही लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित अन्य ऊर्जा परियोजनाओं के लिए करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने समिट में छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को प्रस्तुत करते हुए देश-विदेश के निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रस्तावित योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश में नई परियोजनाओं, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का पहला चैंपियन बना मैनपाट टाइटंस, फाइनल में संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को 4-2 से हराया

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छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के पहले संस्करण का खिताब मैनपाट टाइटंस ने अपने नाम कर लिया है। रविवार को रायपुर के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में मैनपाट टाइटंस ने संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को 4-2 से हराकर इतिहास रच दिया। इसके साथ ही मैनपाट टाइटंस लीग की पहली चैंपियन बन गई।

फाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। शुरुआती दौर में संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने अभिषेक यादव के गोल की बदौलत बढ़त बनाई। इसके बाद मैनपाट टाइटंस के प्रहलाद ने शानदार फील्ड गोल कर स्कोर बराबर कर दिया। तीसरे क्वार्टर में संदीप ठाकुर ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर मैनपाट को बढ़त दिलाई। हालांकि, संस्कारधानी के सारिक अहमद ने गोल कर मुकाबले को 2-2 की बराबरी पर ला दिया।

अंतिम क्वार्टर में मैनपाट टाइटंस ने आक्रामक खेल दिखाया। टीम के मोहित नायक ने लगातार दो शानदार गोल दागकर अपनी टीम की जीत सुनिश्चित कर दी। इस तरह मैनपाट ने 4-2 से मुकाबला जीतकर पहली बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

मैनपाट को 11 लाख, उपविजेता को 6 लाख रुपये
लीग में कुल 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई। विजेता मैनपाट टाइटंस को 11 लाख रुपये और उपविजेता संस्कारधानी स्ट्राइकर्स को 6 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

व्यक्तिगत पुरस्कारों में शाहरुख अली को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। आशीष तानी पूर्ति ने 13 गोल के साथ टॉप स्कोरर का पुरस्कार हासिल किया, जबकि हिमांशु को सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर चुना गया। मैनपाट के मोहित नायक को सर्वश्रेष्ठ छत्तीसगढ़ खिलाड़ी और संदीप कुमार को इमर्जिंग प्लेयर (अंडर-21) का सम्मान मिला।

मुख्यमंत्री साय और केंद्रीय खेल मंत्री रहे मौजूद
फाइनल मुकाबले और पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार प्रदान किए।

छत्तीसगढ़ सरकार के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस पहली हॉकी लीग में प्रदेश की छह फ्रेंचाइजी टीमों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य प्रदेश में हॉकी को बढ़ावा देना, स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराना और नई खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर देना था।

12 लाख करोड़ का निवेश मध्यप्रदेश में धरातल पर उतरा, कृषि विकास दर 24 प्रतिशत पार : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश उद्योग, रोजगार, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यटन और विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन सभी क्षेत्रों में उपलब्धियों का और विस्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री रविवार को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने मंगलदीप प्रज्ज्वलित कर राज्योत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर स्वस्ति वाचन हुआ और उन्होंने प्रदेशवासियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान यहां की समृद्ध सांस्कृतिक चेतना, परिश्रमी संस्कृति और संस्कारवान जनमानस से है। प्रदेशवासियों की सामूहिक सहभागिता और समर्पण ही विकास की सबसे बड़ी ताकत है।

उद्योग और रोजगार को मिली नई गति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाया गया, जिसके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए गए। वहीं, वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाकर कृषि क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को 490 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर चुका है और निवेश का यह सिलसिला लगातार जारी है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल रहा है।

कृषि विकास दर 24 प्रतिशत से अधिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 24 प्रतिशत से अधिक हो गई है। किसानों के हित में सिंचाई सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहित किए जाने पर उन्हें चार गुना मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश को आगे ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है और इसे पहले स्थान पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

पर्यटन और विरासत संरक्षण पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पर्यटन विकास और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

15 जनवरी को भोपाल में होगा सेना दिवस का आयोजन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि युवा वर्ष के पहले महीने में 15 जनवरी को भोपाल में सेना दिवस का भव्य आयोजन होगा। इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में सेना के जवानों का योगदान अतुलनीय है। भोपाल में सेना दिवस का आयोजन राष्ट्रभक्ति और देशप्रेम की भावना को और मजबूत करेगा।

राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनियां, महिला उद्यमिता मंडप, किसान बाजार और देशज व्यंजन मेला भी आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।