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चार साल बाद टी20 टीम में लौटे भुवी, न्यूजीलैंड दौरे पर तेज गेंदबाजी संयोजन में बदलाव के संकेत

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भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी ने न्यूजीलैंड दौरे से पहले टीम चयन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। करीब चार साल बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में लौटे भुवनेश्वर अपनी स्विंग गेंदबाजी और शुरुआती ओवरों में विकेट लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में उनकी यह कला टीम
इंडिया के लिए अहम साबित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की रिपोर्ट के अनुसार, भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उनका पिछला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नवंबर 2022 में था। ऐसे में उनकी वापसी को टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किस खिलाड़ी की हो सकती है छुट्टी?
भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद प्लेइंग इलेवन में तेज गेंदबाजों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ना तय है। अर्शदीप सिंह, मयंक यादव और प्रिंस यादव जैसे गेंदबाजों के बीच टीम संयोजन को लेकर कप्तान और टीम प्रबंधन को फैसला करना होगा। हालांकि, किस खिलाड़ी को बाहर बैठना पड़ेगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि मैच की अंतिम एकादश घोषित होने के बाद ही होगी।

न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में भुवी से उम्मीदें
न्यूजीलैंड में नई गेंद से स्विंग मिलने की संभावना भुवनेश्वर कुमार के अनुभव को उपयोगी बना सकती है। वह शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के साथ डेथ ओवरों में भी अपनी गेंदबाजी से योगदान दे सकते हैं। भारतीय टीम प्रबंधन उनसे प्रभावी प्रदर्शन की उम्मीद करेगा।

अब सबकी नजरें न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज पर रहेंगी, जहां भुवनेश्वर की वापसी और भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का संयोजन चर्चा का विषय होगा।

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग मामले में बड़ी कार्रवाई, कोटा से तीनों शूटर गिरफ्तार

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अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले में फायरिंग करने के आरोपी तीनों शूटरों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किए जाने की खबर है। बताया जा रहा है कि तीनों आरोपी ट्रेन से दिल्ली की ओर जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फायरिंग की घटना को अंजाम देने के पीछे क्या वजह थी और इस मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका है या नहीं।

इस कार्रवाई से मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, घटना का पूरा घटनाक्रम, आरोपियों की पहचान और फायरिंग के पीछे की वजह जैसे पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक पुलिस जानकारी के आधार पर की जानी बाकी है।

पीएम मोदी ने एशियाई खेलों के भारतीय खिलाड़ियों से की मुलाकात, बोले- खिलाड़ियों ने तिरंगे का मान बढ़ाया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एशियाई खेल 2026 में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय खिलाड़ियों ने तिरंगे का गौरव बढ़ाया है और देश को गर्व करने का अवसर दिया है।

भारत ने जीते 85 पदक
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में भारत ने कुल 85 पदक हासिल किए। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों, उनके प्रशिक्षकों, सहयोगी स्टाफ और परिवारों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सराहा
प्रधानमंत्री ने भारतीय महिला खिलाड़ियों के योगदान की विशेष रूप से प्रशंसा की। भारतीय महिला खिलाड़ियों ने कुल 85 पदकों में से 38 पदक जीते, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में खेलों के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और क्षमता को दर्शाती है।

युवा खिलाड़ियों से की खास अपील
पीएम मोदी ने खिलाड़ियों से आग्रह किया कि वे अपने गांवों, शहरों और स्कूलों में जाकर युवा प्रतिभाओं को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के अनुभव और संघर्ष की कहानियां नई पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक, 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की भारत की आकांक्षा का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय खिलाड़ी आने वाले वर्षों में देश के लिए और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, मेहनत, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों से उबरने की क्षमता भी विकसित करते हैं।

यामी गौतम की ‘नई नवेली’ की बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत, पहले दिन दुनियाभर में कमाए ₹4.6 करोड़

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बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम धर की नई फिल्म ‘नई नवेली’ ने रिलीज के पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 4.6 करोड़ रुपये का कारोबार किया। 16 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म हॉरर, कॉमेडी और फैंटेसी का मिश्रण है। फिल्म की ओपनिंग से निर्माताओं को वीकेंड पर कमाई बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की शुरुआत सामान्य रही है।

पहले दिन भारत में कितनी हुई कमाई?
ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने पहले दिन भारत में करीब 3.25 करोड़ रुपये नेट कमाए। भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन लगभग 3.83 करोड़ रुपये रहा, जबकि विदेशों से करीब 75 लाख रुपये की कमाई हुई। इस तरह फिल्म का पहले दिन का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन लगभग 4.58 करोड़ रुपये रहा।

हॉरर और कॉमेडी का अनोखा मेल
‘नई नवेली’ का निर्देशन बालाजी मोहन ने किया है। फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। इसमें यामी गौतम के साथ आदिनाथ कोठारे, सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ, सोनल झा और सुष्मिता मुखर्जी भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। फिल्म को आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा ने प्रोड्यूस किया है।

वीकेंड पर टिकी निगाहें
फिल्म को पहले दिन दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। अब शनिवार और रविवार की कमाई से पता चलेगा कि फिल्म दर्शकों के बीच कितनी लोकप्रियता हासिल कर पाती है। ट्रेड विश्लेषकों के लिए वीकेंड का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि इससे फिल्म की आगे की बॉक्स ऑफिस यात्रा का अंदाजा लगेगा।

यामी गौतम की पिछली फिल्मों के प्रदर्शन को देखते हुए ‘नई नवेली’ से भी उम्मीदें थीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म आने वाले दिनों में अपनी कमाई में कितना इजाफा कर पाती है।

यूपी में मौसम की मार से पहले मिलेगा अलर्ट, योगी सरकार 22.45 करोड़ रुपये से लगाएगी 5 डॉप्लर वेदर रडार

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उत्तर प्रदेश में आंधी, तूफान, तेज बारिश और अन्य मौसमी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए योगी सरकार ने आधुनिक तकनीक की मदद से मौसम निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। प्रदेश के पांच शहरों में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। इस परियोजना पर रडार और उनसे जुड़ी साइटों के निर्माण कार्य सहित कुल 22.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे किसानों से लेकर आम नागरिकों तक को मौसम की गंभीर परिस्थितियों के बारे में समय रहते जानकारी मिलने में मदद मिलेगी।

पांच शहरों में स्थापित होंगे हाईटेक रडार
राज्य सरकार की योजना के तहत लखनऊ, आजमगढ़, झांसी, अलीगढ़ और वाराणसी में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, आजमगढ़ और वाराणसी में रडार स्थापित हो चुके हैं, जबकि लखनऊ, झांसी और अलीगढ़ में काम जारी है।

ये रडार बादलों की स्थिति, बारिश की तीव्रता और मौसम में तेजी से होने वाले बदलावों की निगरानी करने में मदद करेंगे। इससे मौसम संबंधी चेतावनी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को बेहतर बनाया जा सकेगा।

22.45 करोड़ रुपये होंगे खर्च
इस परियोजना के लिए लगभग 19.50 करोड़ रुपये रडार व्यवस्था पर और 2.95 करोड़ रुपये संबंधित स्थलों पर सिविल कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस प्रकार कुल निवेश 22.45 करोड़ रुपये होगा।

किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
मौसम की सटीक और समय पर जानकारी मिलने से किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है। तेज बारिश, आंधी या अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों की चेतावनी मिलने पर किसान कटाई, सिंचाई, खाद और कृषि उपज के भंडारण से जुड़े फैसले बेहतर तरीके से ले सकेंगे।

इससे फसलों, पशुधन और कृषि गतिविधियों को होने वाले संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
आपदा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद

डॉप्लर रडार से मिलने वाले आंकड़े प्रशासन को संवेदनशील इलाकों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव की तैयारियां करने में सहायता देंगे। खराब मौसम की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी एहतियाती कदम उठाने के लिए भी अतिरिक्त समय मिल सकता है।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल का उद्देश्य आधुनिक मौसम निगरानी तकनीक के जरिए आपदा से होने वाले नुकसान को कम करना और आम लोगों की सुरक्षा को मजबूत बनाना है। हालांकि, रडार की स्थापना अपने आप में हर आपदा से बचाव की गारंटी नहीं है; इसका लाभ समय पर चेतावनी जारी करने और लोगों तक सूचना पहुंचाने की व्यवस्था पर भी निर्भर करेगा।

शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा – मुख्यमंत्री योगी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने शिक्षकों को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने का उल्लेख किया। साथ ही विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए संचालित योजनाओं का भी जिक्र किया।

योगी ने दावा किया कि ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों में पेयजल, शौचालय, स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और शिक्षकों को सम्मान देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

23 अक्टूबर को विधान परिषद चुनाव
मुख्यमंत्री ने आगामी विधान परिषद चुनाव का उल्लेख करते हुए भाजपा प्रत्याशियों इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह और उमेश द्विवेदी के पक्ष में मतदान की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक और स्नातक मतदाता ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करें, जो उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठा सकें।

योगी आदित्यनाथ के इस बयान से उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। सम्मेलन में शिक्षा, शिक्षकों के सम्मान, रोजगार और प्रदेश के विकास को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर नहीं रख सकते, यह उनका मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि इंटरनेट तक पहुंचना और उसका उपयोग करना बच्चों सहित प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह वंचित करना उचित नहीं है। बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।

संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) का दिया हवाला
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में कहा कि इंटरनेट तक पहुंचने और उसका उपयोग करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत संरक्षित है। यह अधिकार बच्चों को भी उनकी उम्र की परवाह किए बिना प्राप्त है।

अदालत ने माना कि इंटरनेट आज शिक्षा, जानकारी हासिल करने, विचारों की अभिव्यक्ति और दूसरों से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए यह सीखने और नई जानकारियां प्राप्त करने का प्रमुख साधन हो सकता है।

ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर पूर्ण प्रतिबंध समाधान नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को इंटरनेट से दूर रखने के बजाय ऑनलाइन खतरों से बचाने के प्रभावी उपायों पर जोर दिया। अदालत के अनुसार, यदि बच्चों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाता है, तो वे अनियंत्रित और अधिक खतरनाक वेबसाइटों या प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा और मुश्किल हो सकती है।

पीठ ने यह भी चिंता जताई कि इंटरनेट इस्तेमाल करने पर सजा मिलने के डर से ऑनलाइन उत्पीड़न, धमकी या शोषण का सामना करने वाले बच्चे अपने माता-पिता अथवा भरोसेमंद वयस्कों को इसकी जानकारी देने से हिचक सकते हैं।

बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त व्यवस्था पर जोर
यह मामला इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण तथा दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री के प्रसार को रोकने के प्रयासों से संबंधित था। अदालत ने ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संबंधित एजेंसियों को बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

अभिभावकों की जिम्मेदारी भी अहम
फैसले का अर्थ यह नहीं है कि बच्चों को इंटरनेट पर बिना किसी निगरानी के सब कुछ करने की छूट मिल गई है। बच्चों की उम्र के अनुरूप सुरक्षा उपाय, अभिभावकों की निगरानी, अनजान लोगों के संदेशों पर नियंत्रण और हानिकारक सामग्री को रोकने जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का प्रमुख संदेश है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह अलग करने के बजाय उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए तैयार किया जाना चाहिए। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और ऑनलाइन खतरों से सुरक्षा—दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

नवरात्रि में कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है व्रत, जानें इंद्रदेव से जुड़ी मान्यता और बटुक पूजा का महत्व

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शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिनों, विशेषकर अष्टमी और नवमी तिथि पर, छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन के बिना नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इस परंपरा में कन्याओं के साथ बटुक यानी बालक की पूजा भी खास मानी जाती है।
कन्या पूजन क्यों है महत्वपूर्ण?

हिंदू धार्मिक परंपरा में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतीक माना गया है। कन्या पूजन के दौरान उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाया जाता है, चुनरी या वस्त्र भेंट किए जाते हैं और श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है। इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है।

मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों को सुख, समृद्धि, आरोग्य तथा खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान अनेक परिवार इस परंपरा का विधिपूर्वक पालन करते हैं।

इंद्रदेव से जुड़ी है परंपरा की मान्यता
कन्या पूजन की परंपरा को लेकर विभिन्न धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ धार्मिक वर्णनों में इसका संबंध देवराज इंद्र से जोड़ा जाता है। इन कथाओं के अनुसार, देवी शक्ति की आराधना और कन्याओं के सम्मान को शुभ फल प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। हालांकि, इंद्रदेव से इस परंपरा की शुरुआत होने के दावे को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना उचित है।

कन्या पूजन में बटुक को भोजन कराने का क्या है महत्व?
कन्या पूजन में छोटी कन्याओं के साथ एक बालक को भोजन कराने की परंपरा भी प्रचलित है। इस बालक को बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान भैरव को मां दुर्गा का रक्षक और शक्तिपीठों का संरक्षक बताया गया है।

हालांकि, बटुक को भोजन कराना सभी परंपराओं में अनिवार्य नहीं माना जाता। यह परिवार की धार्मिक मान्यता और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है।

कन्या पूजन में किन बातों का रखें ध्यान?

कन्याओं को स्वच्छ स्थान पर सम्मानपूर्वक बैठाएं।

श्रद्धानुसार उनके पैर धोकर तिलक लगाएं।

हलवा, पूरी और काले चने जैसे पारंपरिक प्रसाद का भोजन कराएं।

भोजन के बाद दक्षिणा या उपहार देकर उनका सम्मान करें।

पूजा के दौरान बच्चों की इच्छा, सहजता और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

नवरात्रि में कन्या पूजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कन्याओं के सम्मान, सेवा और नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का भी प्रतीक है।

इंदौर में बिजासन माता को अर्पित होगी 2.5 किमी से लंबी चुनरी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी होंगे शामिल; ट्रैफिक में बदलाव

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धार्मिक आस्था और भक्ति के रंग में रंगने जा रहा इंदौर एक भव्य चुनरी यात्रा का साक्षी बनेगा। मां बिजासन देवी को ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी अर्पित की जाएगी। इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भी शामिल होने का कार्यक्रम है। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

भव्य चुनरी यात्रा में शामिल होंगे श्रद्धालु
मां बिजासन के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए निकाली जा रही इस चुनरी यात्रा में भक्तजन चुनरी लेकर शामिल होंगे। ढाई किलोमीटर से अधिक लंबी चुनरी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगी। धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालु मां से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण की कामना करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संभावित सहभागिता से आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

यातायात व्यवस्था में किया गया बदलाव
आयोजन के दौरान भीड़ और वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस ने विशेष व्यवस्था की है। कुछ मार्गों पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित या परिवर्तित किया जा सकता है। ऐसे में आयोजन स्थल की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को घर से निकलने से पहले यातायात संबंधी ताजा निर्देशों की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
प्रशासन का उद्देश्य धार्मिक आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है। लोगों से अपील है कि वे यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें, निर्धारित मार्गों का उपयोग करें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें।

मां बिजासन को अर्पित की जाने वाली विशाल चुनरी श्रद्धालुओं की आस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बनेगी।

छत्तीसगढ़ में रेल यात्रियों को बड़ी सौगात, रायपुर-कुरूद के बीच चलेंगी दो नई मेमू ट्रेनें; बड़ी रेललाइन का काम पूरा

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छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रेलवे ने रायपुर से कुरूद के बीच दो नई मेमू (MEMU) पैसेंजर ट्रेनों के संचालन को मंजूरी दे दी है। इससे राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। नई ट्रेनों से रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और व्यापारियों को विशेष लाभ मिल सकता है।

रायपुर-कुरूद के बीच मिलेंगी दो नई रेल सेवाएं
रेल मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर-कुरूद मार्ग पर दो मेमू ट्रेनों को मंजूरी दी गई है। इनमें गाड़ी संख्या 68772/68771 और 68774/68773 शामिल हैं। इसके अलावा रायपुर से रावघाट के बीच भी एक नई मेमू ट्रेन को स्वीकृति मिली है। इस तरह छत्तीसगढ़ को कुल तीन नई मेमू रेल सेवाओं की सौगात मिली है।

छात्रों और नौकरीपेशा यात्रियों को मिलेगी राहत
नई ट्रेनों के संचालन से रायपुर आने-जाने वाले दैनिक यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए, कर्मचारियों को नौकरी के सिलसिले में और किसानों व व्यापारियों को अपने कामकाज के लिए आवागमन में सुविधा मिल सकती है। वहीं, इलाज के लिए राजधानी पहुंचने वाले लोगों का सफर भी आसान होने की संभावना है।

समय-सारणी का इंतजार
नई मेमू ट्रेनों के संचालन की मंजूरी मिलने के बाद अब यात्रियों की नजर रेलवे की ओर से जारी होने वाली समय-सारणी और परिचालन शुरू होने की तारीख पर है। ट्रेन के प्रस्थान और आगमन का समय तथा बीच के स्टेशनों पर ठहराव की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद यात्री अपनी यात्रा की योजना बना सकेंगे।

नई रेल सेवाओं से क्षेत्रीय परिवहन को बढ़ावा मिलने और रायपुर-कुरूद के बीच यात्रियों को सुविधाजनक रेल विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।