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विवाद बढ़ने पर नरेंद्र तोमर ने मांगी माफी, कुशवाह समाज से जताया खेद

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कुशवाह समाज की नाराजगी के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता नरेंद्र तोमर ने विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया है। समाज की ओर से जताए गए विरोध और आपत्तियों के बाद उन्होंने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यदि उनकी किसी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो इसके लिए उन्हें गहरा दुख है।

नरेंद्र तोमर ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समाज या वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि वे सभी समाजों का सम्मान करते हैं और सामाजिक सौहार्द तथा आपसी भाईचारे में विश्वास रखते हैं।

विवादित बयान सामने आने के बाद कुशवाह समाज के विभिन्न संगठनों ने इसका विरोध किया था और सार्वजनिक माफी की मांग की थी। इसके बाद तोमर ने माफीनामा जारी कर स्थिति को शांत करने की कोशिश की।

मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, विपक्ष इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं पार्टी की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि माफीनामे के बाद यह विवाद थमता है या आगे भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना रहता है।

85% किसान रजिस्ट्री पूरी, यूपी ने देशभर में बनाई टॉप-10 राज्यों में जगह

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किसानों के डिजिटल डाटा को व्यवस्थित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। किसान रजिस्ट्री अभियान में राज्य ने निर्धारित लक्ष्य का 85 प्रतिशत पूरा कर लिया है और इसी के साथ प्रदेश देशभर में 10वें स्थान पर पहुंच गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, किसान रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सत्यापित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से मिल सके। इस प्रक्रिया में किसानों की भूमि, पहचान और अन्य आवश्यक जानकारियों का डिजिटल सत्यापन किया जा रहा है।

राज्य सरकार ने अभियान में तेजी लाने के लिए जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं। जिन जिलों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां विशेष अभियान चलाकर किसान रजिस्ट्री का कार्य जल्द पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि किसान रजिस्ट्री पूरी होने के बाद किसानों को पीएम-किसान, फसल बीमा, कृषि ऋण, सब्सिडी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक सुगमता और पारदर्शिता के साथ मिल सकेगा। साथ ही कृषि से जुड़े डेटा के बेहतर प्रबंधन से योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलेगी।

प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को अभियान में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए गांव-गांव पहुंचकर किसानों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान इस व्यवस्था से वंचित न रहे।

यूपी की महिलाओं के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान, घर-घर सर्वे कर दिलाएगी रोजगार

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महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार प्रदेशभर में घर-घर सर्वे अभियान चलाकर ऐसी महिलाओं की पहचान करेगी, जो रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ना चाहती हैं। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की योग्यता, कौशल और रुचि के आधार पर उन्हें उपयुक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

सर्वे के दौरान महिलाओं की शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण, कार्य अनुभव और आजीविका से जुड़ी जरूरतों का विवरण एकत्र किया जाएगा। इसके आधार पर उन्हें स्वयं सहायता समूहों, कौशल विकास प्रशिक्षण, लघु उद्योग, हस्तशिल्प, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य स्वरोजगार योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस अभियान से बड़ी संख्या में महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। संबंधित विभागों को सर्वे अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और पात्र महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का कहना है कि यह अभियान महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन से जोड़कर स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलने की उम्मीद है।

शेख हसीना का भावुक संदेश: ‘जिस बांग्लादेश का सपना देखा था, आज वो नहीं रहा’

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना एक भावुक संबोधन के दौरान रो पड़ीं। उन्होंने कहा, “ये वो बांग्लादेश नहीं है, जिसके लिए हमने संघर्ष किया था।” अपने संबोधन में हसीना ने देश की मौजूदा परिस्थितियों पर गहरी चिंता जताई और कहा कि जिस लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश का सपना देखा गया था, वह आज गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अस्थिरता, हिंसा और राजनीतिक तनाव का माहौल बन गया है, जिससे आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र के हितों को सर्वोपरि रखते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन की रक्षा की जानी चाहिए।

शेख हसीना के इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। उनके समर्थक इसे देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताने वाला भावनात्मक संदेश बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहे हैं। हसीना का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश में राजनीतिक घटनाक्रम लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

WTC की जंग से पहले गंभीर का बड़ा फैसला, टीम इंडिया के साथ जुड़े 4 स्पिनर्स

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शुभमन गिल की कप्तानी में भारतीय टीम श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज जीतने के इरादे से पूरी तैयारी में जुट गई है। स्पिन के अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए टीम मैनेजमेंट और मुख्य कोच गौतम गंभीर ने बड़ा दांव खेला है। अभ्यास सत्र के लिए चार विशेषज्ञ स्पिन गेंदबाजों को नेट बॉलर्स के रूप में टीम के साथ जोड़ा गया है, ताकि बल्लेबाजों को श्रीलंकाई पिचों जैसी परिस्थितियों में बेहतर तैयारी मिल सके।

श्रीलंका की पिचें पारंपरिक रूप से स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अधिक से अधिक स्पिन खेलने का अभ्यास कराने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। टीम प्रबंधन का मानना है कि बेहतर तैयारी से बल्लेबाज मैच के दौरान स्पिन के खिलाफ अधिक प्रभावी प्रदर्शन कर सकेंगे।

हालांकि टीम को जसप्रीत बुमराह के चोटिल होकर बाहर होने से झटका लगा है, लेकिन चयनकर्ताओं ने उनकी जगह तेज गेंदबाज आकिब नबी को मौका दिया है। दूसरी ओर, स्पिन विभाग में पहले से मौजूद अनुभवी गेंदबाजों के साथ नेट पर अतिरिक्त स्पिनरों की मौजूदगी भारतीय टीम की रणनीति को और मजबूत बनाएगी।

भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगी। यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है और टीम इंडिया किसी भी तरह की तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती।

किसानों के हित में बड़ा कदम: कैबिनेट ने ‘कवच योजना’ को दी हरी झंडी

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने ‘कवच योजना’ को मंजूरी दे दी, जिससे प्रदेश के 5 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया।

सरकार के अनुसार, कवच योजना का उद्देश्य किसानों को कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों से जोड़ना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और खेती को अधिक सुरक्षित एवं लाभकारी बनाना है। योजना के माध्यम से पात्र किसानों को आवश्यक सुविधाएं और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे बेहतर कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

मंत्रि-परिषद ने कहा कि यह योजना कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि ‘कवच योजना’ से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि आधुनिक और वैज्ञानिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय प्रदेश के कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण और आधुनिक तकनीक से खेती बनेगी अधिक लाभकारी: मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधिकरण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की लागत कम करने और बेहतर आय सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो सके। इससे किसानों को वर्षा पर निर्भरता कम होगी और वे सालभर विभिन्न फसलों की खेती कर सकेंगे।

उन्होंने किसानों से पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बागवानी, दलहन, तिलहन और नकदी फसलों की खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि फसल विविधिकरण से किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, उन्नत बीज, मृदा परीक्षण, कृषि यंत्रीकरण तथा डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को अनुदान और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करा रही है।

उन्होंने विश्वास जताया कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रभावी उपयोग और फसल विविधिकरण के जरिए छत्तीसगढ़ के किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त होंगे और प्रदेश कृषि विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

नई औद्योगिक नीति से छत्तीसगढ़ में निवेश की नई उड़ान, 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 1.5 लाख रोजगार का दावा

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य की नई औद्योगिक नीति को विकास का नया आधार बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश में 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इस निवेश के जरिए करीब डेढ़ लाख युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति का उद्देश्य राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देना, निवेशकों को अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है। सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों में पारदर्शिता लाने और बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के साथ-साथ कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा, स्टील, सीमेंट, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर रही है। इससे औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, नई औद्योगिक नीति के तहत प्राप्त निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे युवाओं का पलायन कम होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल करना है।

राज्य सरकार का मानना है कि उद्योग, निवेश और रोजगार पर केंद्रित यह नीति आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव, संसद से संशोधन विधेयक पास

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संसद ने पंजीकरण जन्म एवं मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाना है, ताकि फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगे और समय पर पंजीकरण को बढ़ावा मिल सके।

नए कानून के तहत अब जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दिए जाने पर पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। वहीं, यदि पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी होती है, तो अब केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश पर ही पंजीकरण कराया जा सकेगा। पहले ऐसे मामलों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से भी प्रक्रिया पूरी हो जाती थी।

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता बढ़ाना, फर्जी दस्तावेजों पर अंकुश लगाना और नागरिकों को समय पर पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करना है। सरकार के अनुसार जन्म प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति की कानूनी पहचान का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसकी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और प्रमाणिक बनाना आवश्यक है।

हालांकि, विपक्ष ने विधेयक को लेकर सवाल उठाए और संसद में विरोध भी दर्ज कराया। इसके बावजूद सरकार ने इसे नागरिक पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम सुधार बताते हुए दोनों सदनों से पारित करा लिया।

1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिल सकती है राहत, महंगाई भत्ता 63% होने के आसार

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देशभर के एक करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर सामने आ सकती है। जुलाई 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो मौजूदा 61 प्रतिशत DA बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगा। अंतिम फैसला केंद्र सरकार द्वारा अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर लिया जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, AICPI इंडेक्स के शुरुआती आंकड़े 2 प्रतिशत DA बढ़ने के संकेत दे रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही होगा। बढ़ा हुआ DA लागू होने पर इसका लाभ केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा तथा एरियर का भी भुगतान किया जा सकता है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को भी लंबे समय से लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते का इंतजार है। कर्मचारी संगठन लगातार राज्य सरकार से केंद्र के बराबर DA देने की मांग कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि केंद्र सरकार DA में बढ़ोतरी की घोषणा करती है तो राज्य सरकार भी कर्मचारियों को राहत देने का फैसला ले सकती है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच DA में वृद्धि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए जरूरी है। ऐसे में केंद्र के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भी महंगाई भत्ते को लेकर सकारात्मक घोषणा होने की उम्मीद बढ़ गई है।

हालांकि, DA बढ़ोतरी को लेकर अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर अब आगामी कैबिनेट बैठक और सरकार के आधिकारिक फैसले पर टिकी हुई है।