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दुनिया के सामने आया ‘मक्का रक्षा समझौते’ का मसौदा, जानें किन शर्तों पर बनी सहमति

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पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ का पूरा मसौदा सामने आ गया है। तीनों देशों ने 7 अगस्त 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अब तुर्किये ने इसे संसद की मंजूरी के लिए पेश किया है, जिसके बाद इसकी 16 धाराओं और आपसी रक्षा सहयोग की शर्तों का खुलासा हुआ है।

इस समझौते का सबसे अहम प्रावधान यह है कि किसी एक सदस्य देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके तहत अन्य सदस्य देश हमले का सामना कर रहे देश की मदद करेंगे। हालांकि, सहायता का स्वरूप और सीमा संबंधित जरूरतों के आकलन तथा उपलब्ध सैन्य संसाधनों के आधार पर तय होगी।

सहायता का स्वरूप और सीमा संबंधित जरूरतों के आकलन तथा उपलब्ध सैन्य संसाधनों के आधार पर तय होगी।

समझौते की प्रमुख शर्तें
1. एक देश पर हमला, सभी पर हमला: समझौते की धारा 2 के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर बाहरी सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। अन्य देश उपलब्ध संसाधनों और सैन्य क्षमताओं के अनुसार सहायता देंगे।
2. रक्षा उद्योग और हथियारों में सहयोग: तीनों देश रक्षा तकनीक, संयुक्त अनुसंधान, हथियारों के उत्पादन और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग करेंगे।
3. खुफिया जानकारी साझा करना: समझौते में सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों का प्रावधान है। गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा के लिए भी नियम निर्धारित किए गए हैं।
4. सैन्य प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता: तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा संस्थानों के बीच कर्मियों के आदान-प्रदान और जरूरत पड़ने पर रसद संबंधी सहयोग को बढ़ावा देंगे। इसमें ईंधन, कलपुर्जों और अन्य सैन्य उपकरणों की सहायता भी शामिल हो सकती है।
5. रणनीतिक रक्षा समिति का गठन: समझौते के तहत विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों वाली रणनीतिक राजनीतिक एवं रक्षा समिति बनाई जाएगी। यह समिति सहयोग की दिशा तय करेगी और समझौते के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं पर विचार करेगी। इसकी बैठक साल में दो बार होगी।
6. दस साल से पहले बाहर निकलने पर रोक: समझौते में कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं है। इसके लागू होने के दस साल पूरे होने के बाद ही कोई सदस्य देश इससे अलग हो सकता है। इसके लिए अन्य देशों को राजनयिक माध्यमों से कम से कम तीन महीने पहले लिखित सूचना देनी होगी।

क्या नाटो जैसा सैन्य गठबंधन बनेगा?
समझौते में एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला मानने का प्रावधान नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत से मिलता-जुलता है। हालांकि, इसमें हर परिस्थिति में एक जैसी सैन्य कार्रवाई या सैनिकों की निश्चित संख्या भेजने की बाध्यता स्पष्ट नहीं की गई है। सहायता का फैसला जरूरतों और उपलब्ध क्षमताओं के आधार पर होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सऊदी अरब का यह रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए भी इस घटनाक्रम पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, खासकर रक्षा तकनीक, सैन्य सहयोग और पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में। हालांकि, समझौते में किसी देश को स्पष्ट रूप से दुश्मन घोषित नहीं किया गया है।

फिलहाल समझौते को तुर्किये की संसद से मंजूरी मिलने की प्रक्रिया जारी है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और सैन्य सहयोग का दायरा आगे की संसदीय प्रक्रिया तथा तीनों देशों के फैसलों से स्पष्ट होगा।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाका: 5 गोल्ड समेत 27 मेडल जीते, कुल पदक 62; टॉप-5 में बनाई जगह

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एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने बुधवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया। तीसरे दिन भारत ने पांच स्वर्ण पदकों सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही भारत की कुल पदक संख्या 62 पहुंच गई और भारतीय दल पदक तालिका में छठे स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंच गया।

सचिन, सिमरन और प्रवीण ने चमकाया देश का नाम
भारतीय खिलाड़ियों की इस सफलता में पैरा एथलेटिक्स का बड़ा योगदान रहा। सचिन खिलारी ने पुरुषों की शॉटपुट F46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 100 मीटर T12 दौड़ में स्वर्ण अपने नाम किया। प्रवीण कुमार ने पुरुषों की ऊंची कूद में, दिलीप गावित ने 100 मीटर दौड़ में और आयुष वर्मा ने शॉटपुट F53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की झोली में पांच गोल्ड डाले।

पदक तालिका में भारत पांचवें स्थान पर
बुधवार के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य सहित कुल 62 पदक हो गए। भारत ने ईरान को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पांच देशों में जगह बनाई। चीन पदक तालिका में पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि जापान और उज्बेकिस्तान क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। दक्षिण कोरिया चौथे स्थान पर है।

तीरंदाजी, तैराकी और पावरलिफ्टिंग में भी सफलता
पैरा एथलेटिक्स के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने अन्य खेलों में भी पदक जीते। तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक हासिल किया। तैराक रवि कार्तिक बुधिगिना ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक S13 स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि पावरलिफ्टिंग में कस्तूरी राजमणि ने महिलाओं की 67 किलोग्राम वर्ग में रजत अपने नाम किया।

भारतीय दल से आगे भी बड़ी उम्मीदें
एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन जारी है। खेलों के तीसरे दिन मिले पदकों ने भारत की स्थिति मजबूत कर दी है। अब भारतीय दल की नजरें आगामी मुकाबलों में और स्वर्ण पदक जीतने तथा पदक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करने पर टिकी हैं।

‘जेलर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, 8 बजे तक 308 करोड़ रुपये की कमाई का दावा

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सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने रिलीज के पहले सप्ताह में ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। दर्शकों के बीच फिल्म को मिल रही लोकप्रियता और दशहरा की छुट्टी का फायदा इसकी कमाई में नजर आया है।

सातवें दिन भी जारी है कमाई का सिलसिला
बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग वेबसाइटों के आंकड़ों के मुताबिक, ‘जेलर 2’ ने 21 अक्टूबर को अपने सातवें दिन भी मजबूत प्रदर्शन किया। Sacnilk के लाइव आंकड़ों में शाम तक फिल्म की भारत में नेट कमाई लगभग 300 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई थी, जबकि घरेलू ग्रॉस कलेक्शन इससे अधिक दर्ज किया गया। हालांकि, दिन का अंतिम कलेक्शन बाद में अपडेट होना था।

दुनियाभर में 500 करोड़ के पार पहुंची फिल्म
रजनीकांत की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है। फिल्म में रजनीकांत के साथ मोहनलाल, विद्या बालन और अन्य कलाकार भी नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 500 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।

फिल्म की लगातार कमाई ने ट्रेड विश्लेषकों और दर्शकों का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ‘जेलर 2’ आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर कौन-सा नया रिकॉर्ड बनाती है।

सौरव दास और आशुतोष रांका को शर्तों के साथ जमानत, जंतर-मंतर का भी हुआ जिक्र

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत से शर्तों के साथ जमानत मिल गई। दोनों के खिलाफ दर्ज मामले में अदालत ने राहत देते हुए कुछ शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और वहां विरोध जताने के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा है।

जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में प्रदर्शन स्थल पर हुई इस कार्रवाई और उसके बाद मिली न्यायिक राहत ने एक बार फिर राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के नियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

दोनों नेताओं ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि वे शांति व्यवस्था भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर को नियमानुसार प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की है। दोनों को उस दिन जमानतदारों के साथ पेश होना होगा, जबकि पुलिस को जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

देशभर में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश

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देशभर में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कश्मीर से लेकर बिहार की राजधानी पटना और हरियाणा के पंचकूला तक दशहरे की रौनक देखने को मिली। विभिन्न शहरों में आयोजित रामलीला और रावण दहन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आकर्षक आतिशबाजी, सजे हुए मैदानों और भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल उत्सवमय हो गया।

दशहरा भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।

पंचकूला में सबसे ऊंचे रावण के दहन पर नजरें
हरियाणा के पंचकूला में रावण दहन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां सबसे ऊंचे रावण के पुतले के दहन को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और विजयादशमी के उत्सव का आनंद लिया। रावण दहन के दौरान आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा।

पटना के गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब
बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भी दशहरे का उत्साह देखने को मिला। यहां आयोजित दशहरा समारोह में लोगों ने रामलीला और रावण दहन का आनंद लिया। मैदान में जुटे लोगों ने भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया। आयोजन को लेकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहीं।

कश्मीर में भी दिखी दशहरे की रौनक
कश्मीर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में दशहरे के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने परंपरागत तरीके से पर्व मनाते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच विजयादशमी ने लोगों को एकता और सद्भाव का संदेश दिया।

अच्छाई की राह पर चलने का संदेश
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, अहंकार, क्रोध और अन्याय को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। देशभर में हुए आयोजनों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की राह अंततः विजय की ओर ले जाती है।

छत्तीसगढ़ में बनेगी आधुनिक रेल इंजन मेंटेनेंस सुविधा, 300 हाई पावर इलेक्ट्रिक इंजनों का होगा रखरखाव

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प्रदेश में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में आधुनिक रेल इंजन मेंटेनेंस सुविधा विकसित करने की योजना महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस सुविधा के माध्यम से 300 हाई पावर इलेक्ट्रिक रेल इंजनों का रखरखाव किया जा सकेगा। इससे इलेक्ट्रिक इंजनों की नियमित जांच, तकनीकी देखरेख और रखरखाव संबंधी कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आधुनिक मेंटेनेंस सुविधा विकसित होने से रेल परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने और इंजनों की तकनीकी स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हाई पावर इलेक्ट्रिक इंजन मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनके लिए बेहतर रखरखाव व्यवस्था उपलब्ध होना रेलवे की परिचालन क्षमता के लिहाज से अहम है।

रेलवे के बुनियादी ढांचे को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में रेलवे की तकनीकी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलने की संभावना है। आधुनिक उपकरणों और रखरखाव प्रणालियों के उपयोग से इंजनों की जांच एवं मरम्मत संबंधी कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकेंगे। इससे तकनीकी खराबियों की समय पर पहचान करने और इंजनों को परिचालन के लिए तैयार रखने में मदद मिल सकती है।

परियोजना से जुड़ी लागत, निर्माण की समयसीमा, सटीक स्थान और रोजगार सृजन के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60% उत्तर प्रदेश में, कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत हुई: मुख्यमंत्री योगी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार और कृषि क्षेत्र में सुधारों से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में एक्सप्रेसवे और सड़क नेटवर्क के विस्तार को विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल सकती है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों के विकास से निवेश के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।

कृषि विकास दर में वृद्धि पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत होने का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है। ऐसे में कृषि उत्पादन, सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तार राज्य के आर्थिक विकास के लिए अहम है।

विकास और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
प्रदेश सरकार का जोर बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने पर भी है। सड़क नेटवर्क के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं, कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री के इन बयानों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और कृषि विकास दर में वृद्धि को प्रदेश के विकास के प्रमुख पहलुओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी और कृषि विकास दर के 18 प्रतिशत होने के आंकड़ों का आकलन संबंधित आधिकारिक स्रोतों, समयावधि और गणना के आधार पर किया जाना चाहिए।

RBI का बड़ा नियम: बैंक की लापरवाही पर मिल सकता है ₹5,000 प्रतिदिन मुआवजा, जानिए किन मामलों में मिलेगा लाभ

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बैंक से जुड़ी शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होने पर ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अलग-अलग बैंकिंग सेवाओं में देरी के लिए निर्धारित समय-सीमा और मुआवजे के नियम बनाए हैं। कुछ मामलों में बैंक की लापरवाही पर ग्राहकों को प्रतिदिन ₹5,000 तक का मुआवजा मिल सकता है। हालांकि, यह राशि सभी बैंक शिकायतों पर लागू नहीं होती; मुआवजे की रकम संबंधित सेवा और RBI के नियमों पर निर्भर करती है।

1. प्रॉपर्टी के कागजात लौटाने में देरी पर ₹5,000 प्रतिदिन
RBI के 13 सितंबर 2023 के निर्देशों के अनुसार, पर्सनल लोन सहित संबंधित ऋण का पूरा भुगतान या सेटलमेंट होने के बाद बैंक और अन्य विनियमित ऋणदाताओं को 30 दिनों के भीतर मूल प्रॉपर्टी दस्तावेज लौटाने और संबंधित रजिस्ट्रेशन से अपना चार्ज हटाने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

यदि देरी ऋणदाता की वजह से होती है, तो उसे देरी का कारण बताना होगा और निर्धारित नियमों के तहत ग्राहक को प्रत्येक दिन के लिए ₹5,000 मुआवजा देना होगा। यह प्रावधान उन मामलों पर लागू है जिनमें दस्तावेज लौटाने की समय-सीमा 1 दिसंबर 2023 या उसके बाद पूरी हुई हो।

यदि मूल दस्तावेज खो जाते हैं या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो ऋणदाता को डुप्लीकेट या प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कराने का खर्च भी उठाना होता है। ऐसी स्थिति में प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय दिया गया है।

2. क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी पर कितना मुआवजा?
RBI के क्रेडिट कार्ड संबंधी निर्देशों के मुताबिक, बकाया राशि का भुगतान होने पर कार्ड बंद करने का अनुरोध सात कार्यदिवस के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। यदि बैंक या कार्ड जारी करने वाली संस्था इस समय-सीमा का पालन नहीं करती, तो उसे ग्राहक को ₹500 प्रति कैलेंडर दिन मुआवजा देना होगा। यह नियम तभी लागू होता है जब कार्ड पर कोई बकाया राशि न हो।

3. बैंक शिकायत का समाधान नहीं कर रहा तो क्या करें?

यदि बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता, तो इन चरणों का पालन करें:

सबसे पहले बैंक के शिकायत निवारण विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करें और शिकायत संख्या सुरक्षित रखें।

बैंक से मिले जवाब और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें।

यदि बैंक 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देता या उसका जवाब संतोषजनक नहीं है, तो पात्र मामलों में RBI के शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है।

4. क्या हर शिकायत पर ₹5,000 प्रतिदिन मिलेंगे?
नहीं। ₹5,000 प्रतिदिन का मुआवजा विशेष रूप से ऋण चुकाने के बाद मूल प्रॉपर्टी दस्तावेज लौटाने में ऋणदाता की जिम्मेदारी से हुई देरी के लिए निर्धारित है। क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी के लिए मुआवजे की दर अलग है। अन्य सेवाओं में देरी या डिजिटल लेनदेन की समस्या के लिए संबंधित नियम और निर्धारित समय-सीमा देखना जरूरी है।

ग्राहकों के लिए जरूरी बात: बैंक के खिलाफ शिकायत होने मात्र से मुआवजा अपने आप नहीं मिलता। पहले यह जांचें कि आपका मामला संबंधित RBI नियम के दायरे में आता है या नहीं। शिकायत, भुगतान और बैंक के साथ हुए पत्राचार के प्रमाण सुरक्षित रखना आपके दावे को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

विजयादशमी 20 अक्टूबर को करें ये 10 खास उपाय, सरसों और नारियल से लेकर शमी पूजा तक जानें धार्मिक मान्यताएं

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बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति में उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा नई शुरुआत, साहस और सफलता का प्रतीक है। इस दिन शमी वृक्ष और देवी अपराजिता की पूजा के साथ दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, विजयादशमी पर कुछ पारंपरिक उपाय किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इनसे सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और कार्यों में सफलता की कामना की जाती है। हालांकि, इन उपायों के परिणाम की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

विजयादशमी पर किए जाने वाले 10 पारंपरिक उपाय

1. करियर में सफलता के लिए सरसों का उपाय
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, दशहरे पर एक चुटकी पीली या काली सरसों को बहते जल में प्रवाहित करने का विधान बताया गया है। इसे नौकरी और व्यापार में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है। जल में कुछ भी प्रवाहित करने से पहले पर्यावरण और स्थानीय नियमों का ध्यान रखें।

2. नौकरी में तरक्की के लिए दान
मान्यता के अनुसार, सिंघाड़े के आटे की रोटियां बनाकर उनके साथ मूली जरूरतमंद व्यक्ति को दान की जा सकती है। इसे करियर में उन्नति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।

3. आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए
दशहरे पर मंदिर में सरसों के तेल का दान करने की परंपरा बताई गई है। श्रद्धालु इसे आत्मबल और निर्णय क्षमता में वृद्धि की कामना के साथ कर सकते हैं।

4. परिवार में सुख-शांति के लिए
परिवार की खुशहाली की कामना से सफेद चंदन का तिलक लगाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। इसे आपसी सद्भाव, शांति और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है।

5. मानसिक शांति के लिए
सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल पर सुगंधित धूप जलाकर भगवान की आराधना करें। पूजा के दौरान कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताना मन को शांत रखने में सहायक हो सकता है।

6. नारियल का दान
हिंदू परंपरा में नारियल को शुभता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर मंदिर में जटा वाला नारियल अर्पित करने की मान्यता है। इसे शुभ कार्यों की शुरुआत और सकारात्मकता की कामना से जोड़ा जाता है।

7. चांदी के हाथी की स्थापना
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, दशहरे पर चांदी का छोटा हाथी खरीदकर घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इसे दृढ़ संकल्प, बुद्धिमत्ता और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।

8. सुख-सुविधाओं के लिए दान
दशहरे पर मंदिर में सिंघाड़े का आटा, फल या अन्य उपयोगी सामग्री दान करने की परंपरा बताई गई है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन और आवश्यक वस्तुएं देना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप है।

9. चंदन से जुड़ा पारंपरिक उपाय
कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में दशहरे की रात सिरहाने चंदन का टुकड़ा रखकर सुबह उसे मंदिर में दान करने का उल्लेख है। इसे स्मरण शक्ति और बुद्धिमत्ता में वृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।

10. शमी वृक्ष की पूजा
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु वृक्ष के सामने दीपक जलाकर, जल अर्पित कर और हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि तथा सफलता की प्रार्थना कर सकते हैं। पेड़ की टहनियां तोड़ने के बजाय वृक्ष की विधिवत पूजा करना बेहतर है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं में विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना गया है। लोक परंपरा के अनुसार, इसे विजय, सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, पक्षी को देखने के लिए उसे परेशान करना या पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

दशहरे पर पूजा के साथ इन बातों का रखें ध्यान
विजयादशमी पर भगवान श्रीराम की पूजा, शमी वृक्ष का पूजन, शस्त्र पूजा और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। इस दिन लोग नए काम की शुरुआत भी शुभ मानते हैं। धार्मिक उपाय श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं; इन्हें निश्चित परिणाम देने वाला उपाय मानने के बजाय आस्था और सकारात्मक संकल्प के रूप में अपनाना चाहिए।

दशहरे का मूल संदेश अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय है। इसलिए इस अवसर पर सत्य, सदाचार, सेवा और आत्मविश्वास को जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी पर्व की सार्थकता बढ़ाता है।

विजयादशमी पर उज्जैन में राजसी वैभव के साथ निकलेगी बाबा महाकाल की सवारी, शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा पूजन

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धार्मिक नगरी उज्जैन में विजयादशमी के अवसर पर भगवान महाकाल की सवारी इस बार राजसी वैभव और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। मंगलवार, 20 अक्टूबर को निकलने वाली इस विशेष सवारी में धार्मिक परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और भारतीय लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। बाबा महाकाल नगर भ्रमण करते हुए शमी वृक्ष के पूजन के लिए दशहरा मैदान पहुंचेंगे।

राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण करेंगे बाबा महाकाल
श्री महाकालेश्वर मंदिर की परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। विजयादशमी पर उनकी विशेष सवारी निकाली जाती है। इस दौरान भगवान महाकाल चांदी की पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। सवारी के मार्ग पर श्रद्धालुओं को धार्मिक उल्लास और पारंपरिक वैभव का अनुभव होगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस बार सवारी को ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारी की गई है। आयोजन में वेदपाठी बटुकों के मंत्रोच्चार, विभिन्न बैंडों की मधुर धुनों और जनजातीय कलाकारों के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

200 से अधिक वेदपाठी करेंगे अगवानी
भगवान महाकाल की सवारी के दौरान 200 से अधिक वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रों के साथ अगवानी करेंगे। वहीं, चित्रकार अपनी तूलिका के माध्यम से उज्जयिनी के गौरव और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करेंगे। विभिन्न बैंडों की प्रस्तुतियों और पारंपरिक कलाओं से सवारी का वातावरण भक्तिमय बनेगा।

आयोजन का उद्देश्य उज्जैन की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भव्य रूप में प्रस्तुत करना है।

शमी वृक्ष और शस्त्रों का होगा पूजन
विजयादशमी पर शमी वृक्ष और शस्त्रों की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी परंपरा के तहत भगवान महाकाल की सवारी दशहरा मैदान पहुंचेगी, जहां उज्जैन के कलेक्टर रोशन कुमार सिंह भगवान महाकाल, शमी वृक्ष और शस्त्रों का विधिवत पूजन करेंगे।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी वृक्ष की पूजा विजय, साहस और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा भी शक्ति, सुरक्षा और कर्तव्य के प्रति सम्मान को दर्शाती है।

श्रद्धालुओं में उत्साह, परंपरा के होंगे दर्शन
विजयादशमी पर निकलने वाली बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इस आयोजन में भगवान महाकाल के प्रति आस्था के साथ शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान भी दिखाई देती है। राजसी सवारी, वैदिक मंत्रोच्चार और लोककलाओं की प्रस्तुतियों के बीच श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर धर्म और परंपरा के इस विशेष पर्व के साक्षी बनेंगे।