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पापांकुशा एकादशी 21 या 22 अक्टूबर? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा

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हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने तथा व्रत रखने की परंपरा है। इस बार एकादशी की तिथि 21 अक्टूबर से शुरू होने के कारण श्रद्धालुओं के बीच व्रत की सही तारीख को लेकर असमंजस है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।

पापांकुशा एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 22 अक्टूबर को व्रत रखा जाएगा।

व्रत की तारीख: 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार
एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 अक्टूबर, दोपहर 2:11 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 22 अक्टूबर, दोपहर 2:47 बजे

पूजा का शुभ समय: स्थानीय पंचांग के अनुसार सुबह और अभिजीत मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।
व्रत का पारण: 23 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक (दिल्ली के लिए प्रकाशित पंचांग समय)। अपने शहर के अनुसार समय की पुष्टि करें।

पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि
पापांकुशा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, धूप-दीप और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

एकादशी व्रत में अन्न और चावल का सेवन न करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या उपवास रख सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक निर्दयी बहेलिया रहता था। उसने अपना जीवन हिंसा और गलत कार्यों में बिताया। जब उसके जीवन के अंतिम दिन निकट आए, तो यमदूत उसे लेने आने वाले थे। भयभीत बहेलिया एक ऋषि की शरण में पहुंचा और अपने उद्धार का उपाय पूछा।

ऋषि ने उसे पापांकुशा एकादशी का व्रत करने तथा भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा करने की सलाह दी। बहेलिए ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया। धार्मिक कथा के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से उसे पापों से मुक्ति और भगवान की कृपा प्राप्त हुई।

इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति, प्रायश्चित और सत्कर्म व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

क्या है पापांकुशा एकादशी का धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र जाप, कथा श्रवण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि व्रत, पूजा और पारण के समय का निर्धारण अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार करें।

छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षकों के लिए बड़ी खबर, साल में दो बार होगी विशेष TET परीक्षा

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छत्तीसगढ़ के शासकीय शिक्षकों के लिए बड़ी राहत और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) साल में कम से कम दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के पर्याप्त अवसर देना और नौकरी में बने रहने तथा पदोन्नति से जुड़ी पात्रता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करना है।

CGSSSB कराएगा कंप्यूटर आधारित परीक्षा
राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार, विशेष टीईटी परीक्षा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल (CGSSSB) के माध्यम से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) पद्धति से आयोजित की जाएगी। शासन ने लोक शिक्षण संचालनालय को साल में कम से कम दो बार परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), रायपुर की ओर से प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

किन शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य?
कक्षा 1 से 8 तक अध्यापन करने वाले सेवारत शासकीय शिक्षकों के लिए यह परीक्षा महत्वपूर्ण है। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच वर्ष या उससे अधिक समय शेष है, उन्हें सेवा में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने के लिए संबंधित स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया फैसला
विशेष टीईटी आयोजित करने का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में लिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने 24 सितंबर 2026 को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति प्रदान की। नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित होने से शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे।

शिक्षकों को अब परीक्षा कार्यक्रम का इंतजार
सरकार की मंजूरी के बाद अब शिक्षकों की नजर परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और अन्य दिशा-निर्देशों पर है। इनका विस्तृत विवरण संबंधित विभाग और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की ओर से जारी किया जाना अपेक्षित है।

इस फैसले से प्रदेश के उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें टीईटी उत्तीर्ण करने की आवश्यकता है। साल में कम से कम दो बार परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था से उन्हें अपनी पात्रता पूरी करने के लिए अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

कार्बाइड गन पर सख्ती से रोक लगाएं, हादसा हुआ तो कलेक्टर-एसपी होंगे जिम्मेदार: CM मोहन यादव

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मध्यप्रदेश में त्योहारों के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्बाइड गन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कार्बाइड गन से होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रशासन पहले से सतर्क रहे। किसी जिले में अप्रिय या विषम स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अधिकारियों को दिए निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों, पुलिस महानिरीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के साथ कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने त्योहारों के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाने को कहा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि कार्बाइड गन से निकलने वाले प्लास्टिक और धातु के छोटे टुकड़े आंखों, चेहरे और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए इनके इस्तेमाल, बिक्री और उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।

अवैध पटाखों की बिक्री और भंडारण पर भी कार्रवाई
सीएम ने दीपावली के दौरान अवैध पटाखों की बिक्री, प्रतिबंधित आतिशबाजी के उपयोग और विस्फोटक सामग्री के अवैध भंडारण पर रोक लगाने के निर्देश दिए। पटाखा दुकानों को लाइसेंस देते समय निर्धारित नियमों का पालन और मौके पर सत्यापन सुनिश्चित करने को कहा गया।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर नियमित पुलिस गश्त हो। महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव की आशंका वाले क्षेत्रों में भी आवश्यक प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए।

आगजनी से निपटने के लिए अस्पतालों को अलर्ट रहने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने आगजनी या किसी अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए अग्निशमन वाहनों, आवश्यक उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही एंबुलेंस की व्यवस्था दुरुस्त रखने और अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटना होने पर घायलों को तत्काल उपचार मिल सके।

खाद्य पदार्थों में मिलावट पर भी सरकार सख्त
बैठक में मुख्यमंत्री ने खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए विशेष जांच दल गठित कर खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। हालांकि, उन्होंने अधिकारियों को यह हिदायत दी कि जांच के नाम पर व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाए।

बैठक में बताया गया कि मिलावट के मामलों में अब तक 17 लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और 42 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने त्योहारों के दौरान जनसुरक्षा, कानून-व्यवस्था और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि त्योहारों की खुशियों के बीच लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संभावित खतरे की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

दुनिया के सामने आया ‘मक्का रक्षा समझौते’ का मसौदा, जानें किन शर्तों पर बनी सहमति

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पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ का पूरा मसौदा सामने आ गया है। तीनों देशों ने 7 अगस्त 2026 को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अब तुर्किये ने इसे संसद की मंजूरी के लिए पेश किया है, जिसके बाद इसकी 16 धाराओं और आपसी रक्षा सहयोग की शर्तों का खुलासा हुआ है।

इस समझौते का सबसे अहम प्रावधान यह है कि किसी एक सदस्य देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसके तहत अन्य सदस्य देश हमले का सामना कर रहे देश की मदद करेंगे। हालांकि, सहायता का स्वरूप और सीमा संबंधित जरूरतों के आकलन तथा उपलब्ध सैन्य संसाधनों के आधार पर तय होगी।

सहायता का स्वरूप और सीमा संबंधित जरूरतों के आकलन तथा उपलब्ध सैन्य संसाधनों के आधार पर तय होगी।

समझौते की प्रमुख शर्तें
1. एक देश पर हमला, सभी पर हमला: समझौते की धारा 2 के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर बाहरी सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। अन्य देश उपलब्ध संसाधनों और सैन्य क्षमताओं के अनुसार सहायता देंगे।
2. रक्षा उद्योग और हथियारों में सहयोग: तीनों देश रक्षा तकनीक, संयुक्त अनुसंधान, हथियारों के उत्पादन और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग करेंगे।
3. खुफिया जानकारी साझा करना: समझौते में सुरक्षा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों का प्रावधान है। गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा के लिए भी नियम निर्धारित किए गए हैं।
4. सैन्य प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता: तीनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, रक्षा संस्थानों के बीच कर्मियों के आदान-प्रदान और जरूरत पड़ने पर रसद संबंधी सहयोग को बढ़ावा देंगे। इसमें ईंधन, कलपुर्जों और अन्य सैन्य उपकरणों की सहायता भी शामिल हो सकती है।
5. रणनीतिक रक्षा समिति का गठन: समझौते के तहत विदेश मंत्रियों, रक्षा मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों वाली रणनीतिक राजनीतिक एवं रक्षा समिति बनाई जाएगी। यह समिति सहयोग की दिशा तय करेगी और समझौते के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं पर विचार करेगी। इसकी बैठक साल में दो बार होगी।
6. दस साल से पहले बाहर निकलने पर रोक: समझौते में कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं है। इसके लागू होने के दस साल पूरे होने के बाद ही कोई सदस्य देश इससे अलग हो सकता है। इसके लिए अन्य देशों को राजनयिक माध्यमों से कम से कम तीन महीने पहले लिखित सूचना देनी होगी।

क्या नाटो जैसा सैन्य गठबंधन बनेगा?
समझौते में एक सदस्य पर हमले को सभी पर हमला मानने का प्रावधान नाटो के सामूहिक रक्षा सिद्धांत से मिलता-जुलता है। हालांकि, इसमें हर परिस्थिति में एक जैसी सैन्य कार्रवाई या सैनिकों की निश्चित संख्या भेजने की बाध्यता स्पष्ट नहीं की गई है। सहायता का फैसला जरूरतों और उपलब्ध क्षमताओं के आधार पर होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
पाकिस्तान और तुर्किये के साथ सऊदी अरब का यह रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए भी इस घटनाक्रम पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, खासकर रक्षा तकनीक, सैन्य सहयोग और पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक संबंधों के संदर्भ में। हालांकि, समझौते में किसी देश को स्पष्ट रूप से दुश्मन घोषित नहीं किया गया है।

फिलहाल समझौते को तुर्किये की संसद से मंजूरी मिलने की प्रक्रिया जारी है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता और सैन्य सहयोग का दायरा आगे की संसदीय प्रक्रिया तथा तीनों देशों के फैसलों से स्पष्ट होगा।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाका: 5 गोल्ड समेत 27 मेडल जीते, कुल पदक 62; टॉप-5 में बनाई जगह

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एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने बुधवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का मान बढ़ाया। तीसरे दिन भारत ने पांच स्वर्ण पदकों सहित कुल 27 पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही भारत की कुल पदक संख्या 62 पहुंच गई और भारतीय दल पदक तालिका में छठे स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंच गया।

सचिन, सिमरन और प्रवीण ने चमकाया देश का नाम
भारतीय खिलाड़ियों की इस सफलता में पैरा एथलेटिक्स का बड़ा योगदान रहा। सचिन खिलारी ने पुरुषों की शॉटपुट F46 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 100 मीटर T12 दौड़ में स्वर्ण अपने नाम किया। प्रवीण कुमार ने पुरुषों की ऊंची कूद में, दिलीप गावित ने 100 मीटर दौड़ में और आयुष वर्मा ने शॉटपुट F53 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत की झोली में पांच गोल्ड डाले।

पदक तालिका में भारत पांचवें स्थान पर
बुधवार के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में 14 स्वर्ण, 22 रजत और 26 कांस्य सहित कुल 62 पदक हो गए। भारत ने ईरान को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पांच देशों में जगह बनाई। चीन पदक तालिका में पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि जापान और उज्बेकिस्तान क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। दक्षिण कोरिया चौथे स्थान पर है।

तीरंदाजी, तैराकी और पावरलिफ्टिंग में भी सफलता
पैरा एथलेटिक्स के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने अन्य खेलों में भी पदक जीते। तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक हासिल किया। तैराक रवि कार्तिक बुधिगिना ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक S13 स्पर्धा में रजत पदक जीता, जबकि पावरलिफ्टिंग में कस्तूरी राजमणि ने महिलाओं की 67 किलोग्राम वर्ग में रजत अपने नाम किया।

भारतीय दल से आगे भी बड़ी उम्मीदें
एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का दमदार प्रदर्शन जारी है। खेलों के तीसरे दिन मिले पदकों ने भारत की स्थिति मजबूत कर दी है। अब भारतीय दल की नजरें आगामी मुकाबलों में और स्वर्ण पदक जीतने तथा पदक तालिका में अपनी स्थिति बेहतर करने पर टिकी हैं।

‘जेलर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, 8 बजे तक 308 करोड़ रुपये की कमाई का दावा

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सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘जेलर 2’ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने रिलीज के पहले सप्ताह में ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। दर्शकों के बीच फिल्म को मिल रही लोकप्रियता और दशहरा की छुट्टी का फायदा इसकी कमाई में नजर आया है।

सातवें दिन भी जारी है कमाई का सिलसिला
बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग वेबसाइटों के आंकड़ों के मुताबिक, ‘जेलर 2’ ने 21 अक्टूबर को अपने सातवें दिन भी मजबूत प्रदर्शन किया। Sacnilk के लाइव आंकड़ों में शाम तक फिल्म की भारत में नेट कमाई लगभग 300 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई थी, जबकि घरेलू ग्रॉस कलेक्शन इससे अधिक दर्ज किया गया। हालांकि, दिन का अंतिम कलेक्शन बाद में अपडेट होना था।

दुनियाभर में 500 करोड़ के पार पहुंची फिल्म
रजनीकांत की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार ने किया है। फिल्म में रजनीकांत के साथ मोहनलाल, विद्या बालन और अन्य कलाकार भी नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 500 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।

फिल्म की लगातार कमाई ने ट्रेड विश्लेषकों और दर्शकों का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ‘जेलर 2’ आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर कौन-सा नया रिकॉर्ड बनाती है।

सौरव दास और आशुतोष रांका को शर्तों के साथ जमानत, जंतर-मंतर का भी हुआ जिक्र

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत से शर्तों के साथ जमानत मिल गई। दोनों के खिलाफ दर्ज मामले में अदालत ने राहत देते हुए कुछ शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और वहां विरोध जताने के दौरान हुए घटनाक्रम से जुड़ा है।

जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में प्रदर्शन स्थल पर हुई इस कार्रवाई और उसके बाद मिली न्यायिक राहत ने एक बार फिर राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के नियमों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को चर्चा में ला दिया है।

दोनों नेताओं ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि वे शांति व्यवस्था भंग नहीं करेंगे और जब तक जंतर-मंतर को नियमानुसार प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तारीख तय की है। दोनों को उस दिन जमानतदारों के साथ पेश होना होगा, जबकि पुलिस को जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

देशभर में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश

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देशभर में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। कश्मीर से लेकर बिहार की राजधानी पटना और हरियाणा के पंचकूला तक दशहरे की रौनक देखने को मिली। विभिन्न शहरों में आयोजित रामलीला और रावण दहन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आकर्षक आतिशबाजी, सजे हुए मैदानों और भगवान श्रीराम के जयकारों से माहौल उत्सवमय हो गया।

दशहरा भारतीय संस्कृति और परंपरा का प्रमुख त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया।

पंचकूला में सबसे ऊंचे रावण के दहन पर नजरें
हरियाणा के पंचकूला में रावण दहन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां सबसे ऊंचे रावण के पुतले के दहन को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और विजयादशमी के उत्सव का आनंद लिया। रावण दहन के दौरान आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा।

पटना के गांधी मैदान में उमड़ा जनसैलाब
बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में भी दशहरे का उत्साह देखने को मिला। यहां आयोजित दशहरा समारोह में लोगों ने रामलीला और रावण दहन का आनंद लिया। मैदान में जुटे लोगों ने भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया। आयोजन को लेकर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण रहीं।

कश्मीर में भी दिखी दशहरे की रौनक
कश्मीर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में दशहरे के अवसर पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने परंपरागत तरीके से पर्व मनाते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच विजयादशमी ने लोगों को एकता और सद्भाव का संदेश दिया।

अच्छाई की राह पर चलने का संदेश
विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों, अहंकार, क्रोध और अन्याय को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। देशभर में हुए आयोजनों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म की राह अंततः विजय की ओर ले जाती है।

छत्तीसगढ़ में बनेगी आधुनिक रेल इंजन मेंटेनेंस सुविधा, 300 हाई पावर इलेक्ट्रिक इंजनों का होगा रखरखाव

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प्रदेश में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में आधुनिक रेल इंजन मेंटेनेंस सुविधा विकसित करने की योजना महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस सुविधा के माध्यम से 300 हाई पावर इलेक्ट्रिक रेल इंजनों का रखरखाव किया जा सकेगा। इससे इलेक्ट्रिक इंजनों की नियमित जांच, तकनीकी देखरेख और रखरखाव संबंधी कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आधुनिक मेंटेनेंस सुविधा विकसित होने से रेल परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने और इंजनों की तकनीकी स्थिति को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हाई पावर इलेक्ट्रिक इंजन मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनके लिए बेहतर रखरखाव व्यवस्था उपलब्ध होना रेलवे की परिचालन क्षमता के लिहाज से अहम है।

रेलवे के बुनियादी ढांचे को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में रेलवे की तकनीकी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलने की संभावना है। आधुनिक उपकरणों और रखरखाव प्रणालियों के उपयोग से इंजनों की जांच एवं मरम्मत संबंधी कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकेंगे। इससे तकनीकी खराबियों की समय पर पहचान करने और इंजनों को परिचालन के लिए तैयार रखने में मदद मिल सकती है।

परियोजना से जुड़ी लागत, निर्माण की समयसीमा, सटीक स्थान और रोजगार सृजन के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60% उत्तर प्रदेश में, कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत हुई: मुख्यमंत्री योगी

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास और कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश की कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सड़क कनेक्टिविटी के विस्तार और कृषि क्षेत्र में सुधारों से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में एक्सप्रेसवे और सड़क नेटवर्क के विस्तार को विकास की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार, परिवहन और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसानों को अपनी उपज बाजारों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल सकती है। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक गतिविधियों के विकास से निवेश के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।

कृषि विकास दर में वृद्धि पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कृषि विकास दर बढ़कर 18 प्रतिशत होने का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है। ऐसे में कृषि उत्पादन, सिंचाई सुविधाओं, आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तार राज्य के आर्थिक विकास के लिए अहम है।

विकास और किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
प्रदेश सरकार का जोर बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने पर भी है। सड़क नेटवर्क के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों और औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं, कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने और किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिलने की संभावना है।

मुख्यमंत्री के इन बयानों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार और कृषि विकास दर में वृद्धि को प्रदेश के विकास के प्रमुख पहलुओं के रूप में प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी और कृषि विकास दर के 18 प्रतिशत होने के आंकड़ों का आकलन संबंधित आधिकारिक स्रोतों, समयावधि और गणना के आधार पर किया जाना चाहिए।