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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ जिले के लिए 189 करोड़ के 72 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टीकमगढ़ जिले के लिए 189 करोड़ के 72 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमि-पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार बुंदेलखंड क्षेत्र के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। बुंदेलखंड एक नए निवेश केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य इस क्षेत्र की प्रगति को नई गति दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड अब बदल रहा है। बुंदेलखंड के किसानों ने पानी के अभाव में गरीबी झेली और कई कठिनाइयां उठाईं। रोजगार की भारी कमी का दंश भी झेला। लेकिन अब हम केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के जरिए बुंदेलखंड को समृद्ध बनाने के लिए पुरजोर प्रयास कर रहे हैं। केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पूरी होने पर यह क्षेत्र खेती के मामले में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस विशाल परियोजना से टीकमगढ़ जिले की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों के खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचेगा और उनकी आय में ऐतिहासिक वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को टीकमगढ़ जिले के खरगापुर में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने टीकमगढ़ जिले को 189 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के 72 विकास कार्यों की सौगात दी। इसमें 102.45 करोड़ रूपए के 33 कामों का लोकार्पण और 86.66 करोड़ रुपए के 39 कामों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि टीकमगढ़ में सर्वसुविधायुक्त भव्य मेडिकल कॉलेज बनाया जाएगा। इसका भूमिपूजन भी शीघ्र ही किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न शासकीय योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज टीकमगढ़ जिले को अमृत भारत रेलवे स्टेशन की बड़ी सुविधा मिली है। इसके साथ-साथ जतारा और बड़ागांव धसान में सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भवनों और सोलह विद्यालयों में विभिन्न श्रेणी के नव-निर्माण कार्यों का उपहार भी मिला है। इतना ही नहीं, हमारे युवाओं और खिलाड़ियों के लिए हॉकी सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम और बास्केटबॉल कोर्ट का भी लोकार्पण हुआ है। खरगापुर में 40 करोड़ रूपए से बनने वाले नए सांदीपनि विद्यालय भवन का भूमिपूजन भी आज हो गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलते समय की जरूरतों के मुताबिक प्रदेश के बच्चों को सांदीपनि विद्यालयों के जरिए संस्कारों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा रही है। हमारे ये विद्यालय भगवान कृष्ण और सुदामा की अमर मित्रता के पर्याय बने हैं। भविष्य में युवा पीढ़ी को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए जैसे विद्यालय चाहिए, आज उन्हें वैसे ही विद्यालय उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2002-03 तक सिंचाई का रकबा मात्र 7.50 लाख हेक्टेयर था। हमारी सरकार में प्रदेश की सिंचित भूमि का रकबा बढ़कर अब 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। हम एक करोड़ हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार लाड़ली बहनों को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर सौगात दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विवाह, तलाक और वसीयत के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश के सभी देवस्थानों को भव्य स्वरूप में विकसित कर रही है। समान भाव से कार्य करते हुए सभी धर्मों, सभी समाज के लोगों के कल्याण के लिए काम कर रही है। लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत अगर रानी को हर माह 1500 रुपए मिल रहे हैं तो रुखसाना को भी इस योजना का पूरा लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना और अन्य योजनाओं के जरिए पशुपालकों को अनुदान और अन्य मदद भी दी जा रही है। गौशाला खोलने पर प्रति गौमाता 40 रुपए की आर्थिक/अनुदान सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि अब नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों को उत्पादित दूध का समुचित दाम भी मिलने लगा है। हमारे मछुआरें भाई-बहनों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार मत्स्य उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रही है।

कार्यक्रम को पूर्व मंत्री एवं जतारा के वर्तमान विधायक हरिशंकर खटीक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा टीकमगढ़ जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झिंझरी और बहोरीबंद सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झिंझरी और बहोरीबंद सांदीपनि विद्यालयों का किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति सभी के प्रति मैत्री और कल्याण का भाव रखने का संदेश देती है। कृष्ण-सुदामा का प्रसंग भी हमें मैत्री के भाव को पूर्ण गरिमा और आत्मीयता के साथ निभाने का संदेश देता है। यह प्रसंग हमें अमीर-गरीब का भेद मिटाकर समरसता का संदेश भी देता है। भगवान कृष्ण का शिक्षा के लिए सांदीपनि आश्रम उज्जैन आगमन और शिक्षा ग्रहण कर उनका 64 कलाओं 14 विद्याओं में पारंगत होना हमें शिक्षा का महत्व बताता है। राज्य सरकार बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात दे रही हैं। प्रदेश के सांदीपनि विद्यालय सर्वसुविधा युक्त गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का माध्यम बन रहे है। इसी का परिणाम है कि विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं। शासकीय शालाओं में बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें और साइकिलें प्रदान की जा रही है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और अगर कोई विद्यार्थी स्कूल में टॉप करता है तो उसे स्कूटी दी जा रही है। राज्य में गुरुपूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं, इसीलिए विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के लिए कुलगुरु संबोधन की परंपरा शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्लीमनाबाद कटनी में सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

झिंझरी में 38 करोड़ 61 लाख और बहोरीबंद में 35 करोड़ 63 लाख रुपए लागत से निर्मित सांदीपनि विद्यालय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज क्षेत्रवासियों को झिंझरी और बहोरीबंद सांदीपनि विद्यालयों की सौगात दी। झिंझरी का सांदीपनि विद्यालय 38 करोड़ 61 लाख रुपए तथा बहोरीबंद का सांदीपनि विद्यालय 35 करोड़ 63 लाख रुपए से अधिक लागत से बनकर तैयार हुआ। यहां उपलब्ध सुविधाएं गुरुकुल की गरिमा और डिजिटल युग की दक्षता का समन्वय प्रस्तुत करती हैं।

स्लीमनाबाद टनल किसान कल्याण वर्ष में किसानों के लिए बड़ी सौगात है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में कई असंभव कार्यों को पूरा कर विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार विभिन्न विकास परक और कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है। इसी क्रम में स्लीमनाबाद टनल परियोजना बघेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है, यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ देगा। इस परियोजना से रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी में सिंचाई और पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता रहेगी। किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार की ओर से इस क्षेत्र के किसानों के लिए यह बड़ी सौगात है। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने टनल परियोजना के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपए मंजूर किए थे। इसी प्रकार केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से बुंदेलखंड के दमोह, सागर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, विदिशा सहित अन्य जिलों के किसान लाभान्वित होंगे। पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना से चंबल और मालवा क्षेत्र के जिलों को सिंचाई और पेयजल के लिए पानी उपलबध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शीघ्र ही कटनी में भव्य कार्यक्रम आयोजित कर स्लीमनाबाद टनल परियोजना का लोकार्पण किया जाएगा।

जगदीशपुर में होगी मंत्रिपरिषद की बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान राम के आशीर्वाद से मध्यप्रदेश एक देश, एक विधान, एक निशान और एक कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विधानसभा के आगामी वर्षाकालीन सत्र में प्रदेश में सभी धर्मावलंबियों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लायी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल के पास जगदीशपुर स्थित है, इसका नाम विदेशी आक्रांताओं ने बदलकर इस्लामनगर कर दिया था। विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक कर समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रक्षाबंधन से एक बार फिर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के अंतर्गत 1500 रुपए की राशि बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। कार्यक्रम को सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री मती प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, विधायक संजय पाठक, विधायक वीरेंद्र सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय जन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल के अवलोकन के बाद स्लीमनाबाद में की प्रेस वार्ता

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टनल के अवलोकन के बाद स्लीमनाबाद में की प्रेस वार्ता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से समृद्ध है , लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। स्लीमनाबाद टनल कटनी, रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी। भगवान राम के आशीर्वाद से चित्रकूट क्षेत्र और विंध्य की वैली के इन पांच जिलों के कुल ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। लोगों के लिए पेयजल की समस्या का समाधान होगा। कई स्थानों पर इसमें बिजली भी बनाई जाएगी। यह परियोजना राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के संकल्प की पूर्ति में निर्णायक भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों की ओर से टनल परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना के लिए 1600 करोड़ रुपए की राशि में केंद्र सरकार ने लगभग 275 करोड़ की राशि प्रदान की। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के बलबूते आज यह चुनौतीपूर्ण टनल परियोजना पूरी होने की ओर बढ़ रही है। किसानों और क्षेत्र के व्यापारियों के लिए यह टनल एक वरदान की तरह है। लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। भीषण भूकंप आने पर भी टनल 100 साल तक सुरक्षित रहेगी। कई स्थानों पर टनल की गहराई जमीन से नीचे 120 फीट तक भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्लीमनाबाद टनल के अवलोकन के बाद मीडिया से चर्चा में यह जानकारी दी।

मां नर्मदा, गंगा बेसिन में भी हरियाली लाएंगी
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि नर्मदा नदी तो खंभात की खाड़ी में जाकर मिलती है, लेकिन यह विज्ञान का चत्मकार ही है कि अब मां नर्मदा इस ऐतिहासिक टनल के माध्यम से गंगा बेसिन में सोन नदी के आसपास के अंचल में भी हरियाली लाएगी। एक समय ऐसा भी आया जब लगा कि टनल तैयार होना असंभव जैसा है। लेकिन जब संकल्प बड़ा होता है और पवित्र मन से कार्य किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। बार-बार कठिन चट्टानों की चुनौतियां आने के बावजूद नर्मदा टनल को पूरा करने के संकल्प के साथ पूरी टीम काम करती रही। राज्य में एक समय पर सिंचाई का रकबा केवल साढ़े 7 लाख हेक्टेयर था। हमारी सरकारों में यह रकबा बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर हुआ, जो पिछले ढाई साल में बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर हो गया है। किसान कल्याण वर्ष में नर्मदा टनल परियोजना किसानों के लिए बड़ी सौगात है। आगामी तीन माह में रबी की फसल के लिए किसानों को एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

जमीन न बेचें किसान : बघेलखंड-बुंदेलखण्ड क्षेत्र भविष्य में पंजाब हरियाणा को पीछे छोड़ेगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोन कछार का 152 क्यूबिक डिस्चार्ज से सतना जिले में 1 लाख 4 हजार 970 हेक्टेयर, मैहर जिले में 54 हजार 227 हेक्टेयर, कटनी जिले में 21 हजार 823 हेक्टेयर, रीवा जिले में 3 हजार 532 हेक्टेयर और पन्ना जिले में 448 हेक्टेयर सहित कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड एरिया में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही नहरों के निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टनल परियोजना में एक ओर जहां टनल के माध्यम से नर्मदा नदी बहेगी तो दूसरी ओर ऊपर से कटनी नदी प्रवाहित होगी। यह टनल परियोजना बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए बड़ी सौगात है, जो जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति करेगी। चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों में सिंचाई विभाग ने सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन न बेचें। यह क्षेत्र भविष्य में पंजाब और हरियाणा को पीछे छोड़ेगा। इस क्षेत्र से पलायन रुकेगा और आर्थिक रूप से समृद्धि आएगी। हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष में बड़े-बड़े संकल्प पूरा करते हुए आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अभियंताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और हजारों श्रमिकों की अथक मेहनत है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने टनल निर्माण में लगे श्रमिकों से आत्मीय संवाद किया, उनका उत्साहवर्धन किया और इस ऐतिहासिक कार्य में उनके योगदान की सराहना की।

टनल से कोई पर्यावर‍णीय क्षति भी नहीं
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने बताया कि टनल राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन, भूमिगत क्रॉसिंग और आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे से सुरक्षित रूप से निकाली गई है तथा कहीं भी संरचनात्मक क्षति नहीं हुई। साथ ही कोई पर्यावरणीय क्षति भी नहीं हुई। परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास, मुआवजा और स्थानांतरण भी पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ किया गया।

चुनौतियां बढ़ती गई : इंजीनियर-टेक्निशियन और मजदूर, सफलता के लिए संघर्ष करते रहे
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 8 घंटे की तीन शिफ्ट में टनल बनाने के लिए काम शुरू किया गया। वर्ष 2015 तक कुल 1406 मीटर टनल बोरिंग होने से इसकी गति बढ़ाने की आवश्यकता थी। लेकिन वर्ष 2016 से टनल के अपस्ट्रीम छोर से जर्मनी से लाई गई आधुनिक मशीन से खुदाई की गई। इसके बाद चुनौतियां बढ़ती चली गईं, लेकिन इंजीनियर , टेक्नीशियन और मजदूर सुरक्षा के मानकों को ध्यान में रखते हुए कार्य में लगे रहे। टनल निर्माण के लिए लंबा संघर्ष रहा है और अब वर्ष 2026 में सफलता मिली है। टनल तैयार होने के बाद अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। प्रेस से संवाद के समय नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद विष्णुदत्त शर्मा, सांसद गणेश सिंह, विधायक प्रणय पांडे, विधायक संदीप जायसवाल, धीरेन्द्र सिंह, संजय पाठक, और जल संसाधन अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी, RBI ने जारी किया डेटा

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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी, RBI ने जारी किया डेटा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का फॉरेक्स रिजर्व (India foreign exchange reserves jumped) 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर (964 मिलियन डॉलर) बढ़कर 675.16 अरब डॉलर हो गया।

इससे पहले वाले रिपोर्टिंग सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर की मजबूत बढ़त के साथ 674.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया था, जिससे पहले इसमें आई गिरावट की भरपाई हो गई थी। आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) होता है।

अब इस खबर का असर सोमवार को शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। आज NSE-BSE में जोरदार तेजी रही और दोनो भारी बढ़त के साथ बंद हुए।

समीक्षा अवधि के दौरान इसमें 93 करोड़ डॉलर (930 मिलियन डॉलर) की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 546.51 अरब डॉलर पर पहुंच गया। एफसीए में यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है।

गोल्ड रिजर्व में भी हुई बढ़ोतरी
इस दौरान देश का गोल्ड रिजर्व भी बढ़ा है। रिपोर्टिंग सप्ताह में इसमें 2.4 करोड़ डॉलर (24 मिलियन डॉलर) की बढ़ोतरी हुई और यह 105.23 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) के पास भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) होल्डिंग 30 लाख डॉलर (3 मिलियन डॉलर) बढ़कर 18.626 अरब डॉलर हो गई।

फ्रांस और इंग्‍लैंड के बीच तीसरे स्‍थान के लिए जंग

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फ्रांस और इंग्‍लैंड के बीच तीसरे स्‍थान के लिए जंग
फीफा विश्‍व कप 2026 का फाइनल मुकाबला रविवार देर रात अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेला जाएगा। हालांकि, इस मुकाबले से पहले तीसरे स्‍थान के लिए जंग होगी। सेमीफाइनल में हार का मुंह देखने वाली फ्रांस और इंग्‍लैंड के बीच तीसरे पायदान के लिए टक्‍कर होगी।

पहले सेमीफाइनल मुकाबले में स्‍पेन ने फ्रांस को 2-0 को शिकस्‍त दी थी। वहीं अर्जेंटीना ने अं‍त में खेल पलटते हुए इंग्‍लैंड को 2-1 से रौंदकर फाइनल का टिकट कटाया था।

एम्‍बाप्‍पे गोल्‍डन बूट की रेस में
अब फ्रांस और इंग्‍लैंड सिर्फ ब्रांज मेडल के लिए ही नहीं, बल्कि और सम्‍मान के साथ टूर्नामेंट से विदा लेने के लिए टकराएंगी। फ्रांस के कप्‍तान किलियन एम्‍बाप्‍पे के लिए यह मैच बेहद अहम है। एम्‍बाप्‍पे गोल्‍डन बूट की रेस में चल रहे हैं। लियोनेल मेसी और एम्‍बाप्‍पे ने अब तक 8-8 गोल किए हैं।

दोनों को अभी 1-1 मैच भी खेलना है। इंग्‍लैंड के हैरी केन और जूड बेलिंगम भी 6-6 गोल के साथ ज्‍यादा पीछे नहीं हैं।

डबल इंजन सरकार में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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डबल इंजन सरकार में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है और इसका प्रत्यक्ष लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चांपा, बालोद एवं सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण प्रदेश के रेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस जनहितकारी पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति सोशल मीडिया हैंडल एक्स में पोस्ट कर आभार व्यक्त करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में आधारभूत अधोसंरचना का तेजी से विकास हो रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित इन रेलवे स्टेशनों के विकसित होने से यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव मिलेगा। बेहतर प्रतीक्षालय, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, स्वच्छ परिसर, आधुनिक यात्री सुविधाएं तथा उन्नत अधोसंरचना से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण रेल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का सशक्त आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों के उन्नयन से व्यापार, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इससे लोगों के लिए आवागमन अधिक सुगम होगा और रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। प्रदेश में नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण तथा आधुनिक रेलवे सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिल रही है। यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।

करघे से कमाई तक: धमतरी के ग्राम नारी की बुनकर महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत

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करघे से कमाई तक: धमतरी के ग्राम नारी की बुनकर महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत
ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति ग्रामीण भारत में बुनकरों—विशेषकर महिलाओं—को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। यह समिति कच्चे माल की खरीद, कौशल प्रशिक्षण और तैयार उत्पादों के विपणन की सुविधा प्रदान करके बुनकरों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाती है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। छत्तीसगढ़ शासन के ग्रामोद्योग विभाग (हाथकरघा प्रभाग) की योजनाओं से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। धमतरी जिले के ग्राम नारी की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति आज आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तकला के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बन गई है।

*बुनकरों ने ओडिशा में अलग पहचान बना रही हैं*

नारी की ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति सरकारी सहयोग और बुनकरों की मेहनत से यह समिति न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम बनी है, बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के बाजारों में भी अपनी अलग पहचान बना रही है।

*संबलपुरी साड़ियों से मिली नई पहचान*

ग्राम नारी में पहले बुनाई प्रमुख आजीविका नहीं थी। ओडिशा में संबलपुरी साड़ियों की बढ़ती मांग को देखते हुए समिति ने इस कला को अपनाया। अपनी विशिष्ट इकत डिज़ाइन, आकर्षक रंगों और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण संबलपुरी साड़ियों की बाजार में अच्छी मांग है। गांव की महिलाओं ने इस चुनौतीपूर्ण कला को सीखकर पारंपरिक हुनर को आय का स्थायी स्रोत बना लिया।

*समिति द्वारा बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण वस्त्र तैयार कर रहे हैं*

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय वस्त्र उत्पादन कार्यक्रम के तहत समिति को नियमित धागा उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही समितियों के सुचारु संचालन के लिए सेवा प्रभार के रूप में आर्थिक सहायता, नवीन बुनाई प्रशिक्षण और आधुनिक करघों का वितरण भी किया गया है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ी है और बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण वस्त्र तैयार हो रहे हैं।

*मासिक कारोबार 3-4 लाख, महिलाओं की आय दोगुनी*

वर्तमान में ग्रामोदय बुनकर सहकारी समिति प्रतिमाह लगभग 300 से 400 संबलपुरी साड़ियों का उत्पादन कर रही है। इनकी बिक्री मुख्यतः ओडिशा के विभिन्न बाजारों में होती है। समिति का मासिक कारोबार अब 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

*महिलाएं हो रहीं हैं को आत्मनिर्भर*

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ गांव की महिलाओं को मिला है। पहले महिलाएं शासकीय वस्त्र उत्पादन से प्रतिदिन 300 से 350 रुपये कमाती थीं, अब उनकी दैनिक आय 550 से 600 रुपये तक बढ़ गई है। कौशल उन्नयन के माध्यम से भविष्य में आय को 1,000 से 1,200 रुपये प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ सामूहिक निर्णय लेने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिला है।

*छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहीं हैं*

ग्राम नारी की यह सफलता बताती है कि शासन की योजनाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और स्थानीय मेहनत मिलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं। यदि समिति को ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और नए बाजारों तक पहुंच का अवसर मिले, तो यह छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

अब 442 डिजिटल सुविधाएं एक ही केंद्र पर, घर बैठे बन रहे आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र

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अब 442 डिजिटल सुविधाएं एक ही केंद्र पर, घर बैठे बन रहे आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र
राज्य सरकार की डिजिटल सुशासन पहल के तहत संचालित सेवा-सेतु केंद्र आम नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं का सबसे भरोसेमंद और आसान माध्यम बनकर उभरे हैं। पहले लोक सेवा केंद्र के रूप में संचालित इन केंद्रों में जहां 73 शासकीय सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब इनका विस्तार कर 442 डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। इससे नागरिकों को आय, जाति, निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समेत विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर ऑनलाइन और समयबद्ध तरीके से मिल रही हैं।

सबसे अधिक राहत उन लोगों को मिली है जिन्हें आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब सेवा-सेतु केंद्र में आवश्यक दस्तावेज जमा करते ही आवेदन संबंधित विभाग तक ऑनलाइन पहुंच जाता है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित समय-सीमा में प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने से पारदर्शिता बढ़ी है और नागरिकों का समय व धन दोनों बच रहे हैं।

राज्य सरकार के इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन, श्रम पंजीयन, बिजली, पानी, राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन, खाद्य, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक विभागों की सेवाएं भी एक ही केंद्र पर उपलब्ध हो रही हैं। इससे अलग-अलग कार्यालयों में जाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो गई है।

रायगढ़ जिले में भी सेवा-सेतु केंद्रों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में रायगढ़ तहसील के विभिन्न सेवा-सेतु केंद्रों के माध्यम से राजपाल सिदार, गिरधारी सिदार, मुकेश कुमार विशाल तथा टेकचंद उरांव सहित अनेक आवेदकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जारी किए गए। आवेदन का ऑनलाइन पंजीयन, दस्तावेजों का सत्यापन और प्रमाण पत्र का निर्गमन पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के तहत संपन्न हुआ। जिले के विभिन्न सेवा-सेतु केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक विभिन्न शासकीय सेवाओं के लिए आवेदन कर रहे हैं और समय पर उनका लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

सेवा-सेतु केंद्रों की एक महत्वपूर्ण विशेषता डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था भी है। प्रत्येक आवेदन का ऑनलाइन पंजीयन होने से उसकी स्थिति की निगरानी संभव हो गई है। आवेदक अपने आवेदन की प्रगति की जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है और सेवा उपलब्ध कराने में जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।

राज्य शासन का उद्देश्य शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक सरल, सुलभ और पारदर्शी रूप में पहुंचाना है। 442 डिजिटल सेवाओं के एकीकृत मंच के रूप में विकसित सेवा-सेतु केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को नई गति दे रहे हैं। इन केंद्रों के विस्तार से न केवल लोगों का समय और धन बच रहा है, बल्कि डिजिटल सुशासन को भी नई मजबूती मिल रही है। शासन की यह पहल नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

रामायण काल से जुड़ा है कानपुर के ‘तपेश्‍वरी देवी मंदिर’ का नाम

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रामायण काल से जुड़ा है कानपुर के ‘तपेश्‍वरी देवी मंदिर’ का नाम
रामायण काल से जुड़े कुछ स्‍थल आज भी हमें उस काल के पौराणिक महत्‍व की गाथा सुनाते हैं और उनमें से एक है कानपुर का तपेश्‍वरी मंदिर। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के उत्तर कांड में इस स्‍थान का उल्‍लेख मिलता है, जिसमें इस स्‍थान का माता सीता के वनवास काल और बिठूर प्रवास से गहरा संबंध बताया जाता है। चलिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ पौराणिक कथाओं और महत्‍व के बारे में बताते हैं।

यहां की थी माता सीता ने तपस्‍या?
श्री राम के त्याग और अयोध्या से निकलने के बाद देवी सीता, जब वनवास में समय बिता रही थीं, तब इस स्थान पर उन्होंने भगवान श्री राम का विश्वास पुनः वापस पाने के उद्देश्य से तपस्या की थी। यहां देवी सीता के साथ-साथ कमला, विमला और सरस्वती नाम की चार देवियों ने भी इस स्थान पर तपस्या की थी। मान्यता है कि देवी सीता माता लक्ष्मी का ही स्वरूप थीं। उनका दुख देखकर तीनों देवियों ने भी इस अधर्म को रोकने के लिए तपस्या की थी। तब से ही इस स्थान का नाम तपेश्वरी पड़ गया।

यहां पर आज भी चार पिंडियां हैं और नवरात्रि के समय यहां श्रृद्धालुओं की भीड़ रहती है।और नवरात्रि के समय यहां श्रृद्धालुओं की भीड़ रहती है। आज भी यहां लोग हवन-पूजन कराते हैं और मन्‍नत पूरी होने पर घंटियां चढ़ाते हैं।

यहीं हुआ था लव-कुश का मुंडन
इसी स्थान पर देवी सीता ने अपने दोनों बेटों लव-कुश का मुंडन और कनछेदन कराया था। तब से यह जगह इन दोनों संस्कारों के लिए बहुत प्रचलित हो गई। इस स्थान को एक तीर्थ कहा जा सकता है, क्योंकि यहां के पौराणिक महत्व को जानकर लोग दूर-दूर से यहां पर अपने बच्चों का मुंडन और कनछेदन कराने आते हैं। इतना ही नहीं, यहां पर नवविवाहित जोड़ों को देवी के दर्शन के लिए लाया जाता है। माना जाता है कि यहां पर नए जोड़ों को आशीर्वाद दिलाने से उनका दांपत्य जीवन बहुत ही सुखद और प्रभावशाली रहता है।

अतः रामायण काल से जुड़े इस स्थल को बहुत ही पवित्र माना जाता है। यहां जो आता है, मान्यता है कि उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

PM नरेंद्र मोदी ने जालंधर से 75 रीडेवलप रेलवे स्टेशन राष्ट्र को किए समर्पित

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PM नरेंद्र मोदी ने जालंधर से 75 रीडेवलप रेलवे स्टेशन राष्ट्र को किए समर्पित
रेल और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बड़ा बढ़ावा देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जालंधर में 5,470 करोड़ रुपये से ज़्यादा के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। 75 रीडेवलप रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करने और दो ट्रेनों को लॉन्च करने से पहले, PM मोदी ने डेरा सचखंड के डेरे के प्रमुख, संत निरंजन दास से मुलाकात की। उन्होंने ट्रेन में यात्रियों से भी बातचीत की।

पंजाब से काशी जाना अब आसान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, आज जालंधर से कई नई रेल सर्विस शुरू की गई हैं। आज अमृतसर और काशी के बीच रेल सर्विस भी शुरू हुई है, इससे पंजाब से काशी जाना और भी आसान हो जाएगा। आज दौलतपुर चौक और करतोली के बीच नई लाइन का भी उद्घाटन हुआ है।

करतोली और अंबाला के बीच नई रेल सर्विस को भी हरी झंडी दिखाई गई है। आज ही लुधियाना बाईपास का शिलान्यास हुआ है, और दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के एक हिस्से का उद्घाटन हुआ है। मैं देश के सभी नागरिकों और खासकर पंजाब के भाइयों और बहनों को ऐसे हर प्रोजेक्ट के लिए दिल से बधाई देता हूं।

कई प्रोजेक्ट पर चल रहा काम
पीएम मोदी ने ​कहा, केंद्र सरकार पंजाब में कनेक्टिविटी से जुड़े कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। भले ही पंजाब में BJP की सरकार नहीं है, लेकिन केंद्र में BJP की NDA सरकार राज्य के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

मैं जालंधर के लोगों की तारीफ करता हूं कि उन्होंने ‘स्वच्छता से स्वागत’ पहल के ज़रिए इस प्रोग्राम को और भी सार्थक बनाया है। आप सभी ने अपनी कोशिशों से श्री गुरु रविदास जी के मेलजोल और मिलकर काम करने के संदेश को अपनाया है। यह अभियान कर्तव्य की भावना का भी एक बेहतरीन उदाहरण है।