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मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में महत्वपूर्ण एमओयू, निवेश और विकास परियोजनाओं को मिली नई रफ्तार

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मध्यप्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) किए गए। इस अवसर पर विभिन्न परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों और निवेशकों ने प्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योग, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को बेहतर सुविधाएं, अनुकूल वातावरण और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रदेश में नए उद्योग स्थापित होने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की स्थापना और विस्तार के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार आवश्यक कदम उठा रही है। एमओयू और लेटर ऑफ अवॉर्ड के माध्यम से प्रस्तावित परियोजनाओं के धरातल पर आने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।

कार्यक्रम में संबंधित विभागों के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और निवेशक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने निवेशकों का स्वागत करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए अपार संभावनाएं हैं और सरकार हर स्तर पर सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में महत्वपूर्ण एमओयू, निवेश और विकास परियोजनाओं को मिली नई रफ्तार

गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है? भगवान विष्णु से जुड़ा है खास रहस्य

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हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ केले के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। यही वजह है कि गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

भगवान विष्णु से जुड़ा है केले के पेड़ का संबंध
पौराणिक मान्यताओं में केले के पेड़ को भगवान विष्णु का प्रिय माना गया है। गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। श्रद्धालु केले के पेड़ के पास दीपक जलाकर, जल अर्पित कर और हल्दी-चने की दाल जैसी पीली वस्तुओं का भोग लगाते हैं।

बृहस्पति ग्रह से भी है संबंध
ज्योतिष शास्त्र में गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति से माना जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धन, संतान, वैवाहिक सुख और समृद्धि का कारक ग्रह बताया गया है। केले के पेड़ की पूजा को बृहस्पति देव की कृपा प्राप्त करने का एक धार्मिक उपाय माना जाता है।

सुख-समृद्धि की होती है कामना
मान्यता है कि गुरुवार को श्रद्धा के साथ केले के पेड़ की पूजा करने से घर में सकारात्मकता आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। विवाह में आ रही बाधाओं और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की कामना के लिए भी कई लोग गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करते हैं।

कैसे करें केले के पेड़ की पूजा?
गुरुवार सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर केले के पेड़ के पास जाएं। सबसे पहले पेड़ के आसपास की जगह को साफ करें। इसके बाद जल अर्पित करें और हल्दी, अक्षत, फूल व पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का ध्यान करें। अंत में अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने में सहायक मानी जाती है।

जब ओमान के सुल्तान ने तोड़ा प्रोटोकॉल, गुरु के सम्मान में खुद चलाई कार; भारत के राष्ट्रपति से जुड़ी है भावुक कहानी

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भारत और ओमान के रिश्तों से जुड़ी एक पुरानी कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में है। यह किस्सा ओमान के दिवंगत सुल्तान काबूस बिन सैद अल सैद और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा से जुड़ा है। बताया जाता है कि सुल्तान काबूस ने भारतीय राष्ट्रपति के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुंचकर प्रोटोकॉल से अलग कदम उठाया और उन्हें खुद अपनी कार में लेकर गए।

एयरपोर्ट पर खुद पहुंचे थे सुल्तान
रिपोर्टों के अनुसार, जब डॉ. शंकर दयाल शर्मा ओमान पहुंचे, तो सुल्तान काबूस खुद उनका स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति को लेने पहुंची कार में ड्राइवर मौजूद होने के बावजूद सुल्तान ने खुद कार चलाने का फैसला किया और डॉ. शर्मा को अपने साथ लेकर गए। इस घटना को भारत-ओमान संबंधों में व्यक्तिगत गर्मजोशी के उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है।

वजह जानकर सामने आया गुरु-शिष्य का रिश्ता
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात इसकी वजह बताई जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, सुल्तान काबूस ने कहा था कि डॉ. शंकर दयाल शर्मा केवल भारत के राष्ट्रपति नहीं थे, बल्कि उनके शिक्षक भी रह चुके थे। काबूस ने भारत में शिक्षा प्राप्त की थी और पुणे में पढ़ाई के दौरान डॉ. शर्मा उनके प्रोफेसर रहे थे। इसी सम्मान के चलते उन्होंने राष्ट्रपति के स्वागत को व्यक्तिगत रूप से करने का फैसला किया।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा थे भारत के नौवें राष्ट्रपति
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने 25 जुलाई 1992 से 25 जुलाई 1997 तक भारत के नौवें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका कार्यकाल दर्ज है। भारतीय दूतावास के अनुसार, डॉ. शर्मा ने ओमान की यात्रा की थी।

भारत-ओमान रिश्तों की अलग मिसाल
सुल्तान काबूस का भारत से पुराना शैक्षणिक और व्यक्तिगत जुड़ाव था। इसी वजह से डॉ. शर्मा के साथ उनका रिश्ता सामान्य राजनयिक संबंधों से अलग गुरु-शिष्य के सम्मान से जुड़ा हुआ बताया जाता है। यही वजह है कि दशकों पुराना यह किस्सा आज भी भारत और ओमान के संबंधों की गर्मजोशी को याद करने वाली कहानियों में शामिल है।

नेशनल चेंजमेकर्स मीट 2026 में यूपी का डंका, अनूपशहर विधायक संजय शर्मा सम्मानित

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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की अनूपशहर विधानसभा सीट से विधायक संजय कुमार शर्मा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर में आयोजित ‘नेशनल चेंजमेकर्स मीट-2026’ में उन्हें बेटियों की शिक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।

1 से 4 अक्टूबर तक आयोजित इस चार दिवसीय कार्यक्रम में देश के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 51 चेंजमेकर्स का चयन किया गया था। इनमें संजय शर्मा एकमात्र विधायक रहे, जिन्हें राष्ट्रीय मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वडोदरा की सामाजिक संस्था समन्वय प्रतिष्ठान ने इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से किया था।

बेटियों की शिक्षा के लिए ‘अनूपशहर मॉडल’ की चर्चा
संजय शर्मा को अनूपशहर क्षेत्र में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने और जनभागीदारी के प्रयासों के लिए सम्मान मिला। वर्ष 2017 से उन्होंने क्षेत्र के गांवों में छात्राओं और उनके परिवारों से संवाद कर बेटियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रयासों से 50 हजार से अधिक बेटियों को शिक्षा जारी रखने की प्रेरणा मिली, जबकि 200 से अधिक स्कूल ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ा गया।

क्षेत्र में तीन कस्तूरबा आवासीय विद्यालय और बालिकाओं के लिए राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना व संचालन भी हुआ। मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मान की परंपरा भी जारी है।

सम्मान बेटियों और शिक्षकों को समर्पित
सम्मान मिलने के बाद विधायक संजय शर्मा ने इसे अपना व्यक्तिगत सम्मान न बताते हुए अनूपशहर की बेटियों, उनके परिवारों और शिक्षकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों में निवेश करना देश के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने जैसा है।

कार्यक्रम में शिक्षा, ग्रामीण विकास, जनजातीय कल्याण, नशामुक्ति, सुशासन और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन में गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी समेत कई प्रमुख लोग भी मौजूद रहे।

इंडिगो विमान पर गिरी बिजली, अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त; 104 यात्रियों की बाल-बाल बची जान

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इंडिगो के एक विमान को उड़ान के दौरान मौसम की खराबी के बीच बिजली गिरने की घटना का सामना करना पड़ा। बिजली गिरने से विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा। घटना के समय विमान में चालक दल के सदस्यों समेत 104 यात्री सवार थे। राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित रहे।

जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान विमान अचानक बिजली की चपेट में आ गया। इसके बाद विमान के अगले हिस्से में क्षति देखी गई। घटना के बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई गई और यात्रियों को बाहर निकाला गया। एयरलाइन की ओर से विमान का तकनीकी निरीक्षण कराया जा रहा है।

विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, उड़ान के दौरान बिजली गिरना असामान्य नहीं है। आधुनिक यात्री विमानों को इस तरह की घटनाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। हालांकि, बिजली गिरने के बाद विमान की पूरी तरह जांच जरूरी होती है, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या की आशंका को दूर किया जा सके।

घटना के बाद यात्रियों में कुछ समय के लिए चिंता का माहौल रहा, लेकिन विमान के सुरक्षित उतरने से सभी ने राहत की सांस ली। एयरलाइन की ओर से घटना की तकनीकी जांच के बाद विमान को आगे की उड़ान के लिए इस्तेमाल किए जाने को लेकर फैसला लिया जाएगा।

25 साल का सफर पूरा होने पर आडवाणी से मिले PM मोदी, लिया आशीर्वाद

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे होने के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मुलाकात की। पीएम मोदी ने आडवाणी से आशीर्वाद लिया और उनकी दशकों की जनसेवा तथा राष्ट्र के लिए योगदान को याद किया।

पीएम मोदी ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि उन्होंने आडवाणी जी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि आडवाणी की दशकों की जनसेवा और देश के सार्वजनिक जीवन में योगदान की अमिट छाप है। उन्होंने देश की प्रगति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर सरकार के प्रमुख के तौर पर अपनी यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में करीब 12.5 वर्ष तक कार्य किया और मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। तब से वह लगातार प्रधानमंत्री पद पर हैं।

आडवाणी से जुड़ा रहा राजनीतिक सफर
लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में रहे हैं। वह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 1999 से 2004 तक केंद्रीय गृह मंत्री और 2002 से 2004 तक उपप्रधानमंत्री रहे। पीएम मोदी की उनके साथ मुलाकात को 25 वर्ष के राजनीतिक सफर के दौरान वरिष्ठ नेतृत्व के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।

पीएम मोदी के 25 साल के कार्यकाल को लेकर बुधवार को देशभर में विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। भाजपा की ओर से ‘विकसित भारत संकल्प सभाओं’ और अन्य कार्यक्रमों के जरिए इस अवसर को चिह्नित किया गया।

यूपी राज्यसभा चुनाव: दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन खारिज, 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की तस्वीर साफ

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उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर अब साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना के पर्चे खारिज कर दिए गए हैं। दोनों के नामांकन में आवश्यक प्रस्तावक संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं होने की बात सामने आई है।

नामांकन खारिज होने के बाद अब मैदान में भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार, यानी कुल 10 प्रत्याशी रह गए हैं। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर होने के कारण फिलहाल मतदान की जरूरत नहीं दिख रही है।

9 अक्टूबर के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 9 अक्टूबर नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है। यदि इस अवधि में किसी उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया, तो भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। ऐसे में 16 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसी के चलते इन सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई है।

इस चुनाव में भाजपा ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं सपा की ओर से राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी मैदान में हैं।

सर्वपितृ अमावस्या पर जानें तिथि, महत्व और श्राद्ध की विधि

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पितृ पक्ष का समापन जिस विशेष तिथि पर होता है, उसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इसे महालय अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या, अमावस्या श्राद्ध और पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन उन सभी पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश छूट गया हो।

10 अक्टूबर को मनाई जाएगी सर्वपितृ अमावस्या
वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात करीब 9:35 बजे शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पर्व 10 अक्टूबर को माना जाएगा।

श्राद्ध और तर्पण के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या पुरोहित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

क्यों खास है यह अमावस्या?
पितृ पक्ष के दौरान सामान्यतः पूर्वजों का श्राद्ध उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार किया जाता है। लेकिन कई बार किसी परिजन की मृत्यु तिथि याद नहीं रहती या किसी कारण से उस दिन श्राद्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या पर उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। इसी वजह से इसे सभी पितरों को समर्पित विशेष तिथि माना जाता है।

कैसे करें श्राद्ध और तर्पण?
इस दिन श्रद्धालु स्नान के बाद पितरों का स्मरण कर तर्पण करते हैं। परंपरा के अनुसार जल और तिल अर्पित किए जाते हैं तथा पितरों के निमित्त भोजन, अन्न, वस्त्र आदि का दान किया जाता है। कई परिवार ब्राह्मण भोज भी कराते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध कर्म श्रद्धा और विधि-विधान से करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

पितरों की विदाई का दिन
सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इस दिन तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से पितरों का स्मरण करने के बाद उनकी विदाई की जाती है। इसके बाद देवी पक्ष की शुरुआत मानी जाती है और नवरात्र की तैयारियां शुरू होती हैं।

हरमनप्रीत कौर ने छोड़ी कप्तानी, स्मृति मंधाना को मिली भारतीय महिला टीम की कमान

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भारतीय महिला क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय से टीम की कप्तानी संभाल रहीं हरमनप्रीत कौर ने सभी फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी है। उनके फैसले के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने स्मृति मंधाना को भारतीय महिला टीम का नया कप्तान नियुक्त किया है।

हरमनप्रीत ने 6 अक्टूबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कप्तानी छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भारतीय टीम के लिए बतौर खिलाड़ी खेलना जारी रखेंगी। उनके नेतृत्व में भारत ने 2025 में पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब जीता था। हाल ही में उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2026 एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

स्मृति मंधाना के हाथों में नई जिम्मेदारी
BCCI ने हरमनप्रीत के बाद स्मृति मंधाना को फुल-टाइम व्हाइट-बॉल कप्तान बनाया है। मंधाना पहले भी भारतीय टीम की कप्तानी कर चुकी हैं और उन्होंने 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय तथा 4 वनडे मुकाबलों में टीम का नेतृत्व किया है।

मंधाना ने कप्तानी मिलने पर इसे अपने लिए बेहद खास सम्मान बताया। उन्होंने हरमनप्रीत के योगदान की भी सराहना की और कहा कि भारतीय टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी को वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने की कोशिश करेंगी।

हरमनप्रीत का शानदार कप्तानी रिकॉर्ड
हरमनप्रीत ने 2016 में नियमित टी20 कप्तान की जिम्मेदारी संभाली थी, जबकि 2022 में मिताली राज के संन्यास के बाद वह वनडे और टेस्ट की भी पूर्णकालिक कप्तान बनीं। उन्होंने भारत की ओर से 5 टेस्ट, 51 वनडे और 155 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की। उनके नेतृत्व में भारत ने अपना पहला महिला वनडे विश्व कप खिताब और लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता।

अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम नए नेतृत्व में आगे बढ़ेगी। टीम का अगला अभियान 16 अक्टूबर से जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज से शुरू होगा।

दुर्ग की वर्तिका की फिल्म ‘कनपटी भर सिंदूर’ का राष्ट्रीय जागरण फिल्म फेस्टिवल में चयन

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के बोरसी की रहने वाली वर्तिका श्रीवास्तव ने फिल्म जगत में प्रदेश का नाम रोशन किया है। उनके द्वारा निर्मित शॉर्ट फिल्म ‘कनपटी भर सिंदूर’ का चयन मुंबई में होने वाले राष्ट्रीय जागरण फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है। फिल्म की स्क्रीनिंग अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में होगी।

जबरन विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर आधारित फिल्म
‘कनपटी भर सिंदूर’ समाज में व्याप्त जबरन विवाह जैसी गंभीर समस्या को केंद्र में रखती है। फिल्म के जरिए उन घटनाओं को सामने लाने की कोशिश की गई है, जहां युवाओं का अपहरण कर उनकी इच्छा के विरुद्ध विवाह करा दिया जाता है। वर्तिका के अनुसार, ऐसी घटनाओं का असर संबंधित परिवारों और युवक-युवतियों के पूरे जीवन पर पड़ता है।

फिल्म का निर्देशन आलोक कुमार ने किया है, जबकि वर्तिका श्रीवास्तव ने एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर की जिम्मेदारी निभाई है। सिनेमेटोग्राफी के.एस. सुदीप, एडिटिंग राकेश ओरांव और साउंड डिजाइन निलेश ने किया है। फिल्म में दाउद हुसैन, पंकज देवा और सुब्रत सेन गुप्ता समेत कई कलाकारों ने अभिनय किया है।

अहमदाबाद फिल्म फेस्टिवल में भी हो चुका है चयन
वर्तिका की यह फिल्म इससे पहले अहमदाबाद के अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के लिए भी चयनित हो चुकी है। इससे पहले उन्होंने छत्तीसगढ़ में जादू-टोने से जुड़े अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाली शॉर्ट फिल्म भी बनाई थी, जिसकी सराहना हुई थी।

फिल्म निर्माण की पढ़ाई के बाद बनाई फिल्म
वर्तिका ने डीएवी पब्लिक स्कूल, हुडको भिलाई से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पुणे के एमआईटी से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया। इसके बाद अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता में हुआ। संस्थान के सहयोग से उन्होंने अपने साथियों के साथ ‘कनपटी भर सिंदूर’ का निर्माण किया और वहीं से पोस्टग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की।

दुर्ग की बेटी वर्तिका की फिल्म का राष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल में चयन छत्तीसगढ़ के उभरते फिल्मकारों के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। मुंबई में होने वाली स्क्रीनिंग में फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, निर्देशकों और दर्शकों के सामने यह फिल्म प्रदर्शित की जाएगी।